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राजस्थान के इस शख्स ने 15 रुपये के आंवले से कमाए करोड़ों, सक्सेस स्टोरी कर देगी इंस्पायर…

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Gooseberry Farming: राजस्थान के भरतपुर जिले के अमर सिंह ने वह कर दिखाया है जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता. 15 रुपये किलो बिकने वाले आंवले ने आज उन्हें करोड़पति किसान बना दिया है.

अमर सिंह की सक्सेस स्टोरी उन लोगों के लिए एक करारा जवाब है जो खेती को घाटे का सौदा मानते हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आप मॉडर्न माइंडसेट और सही बिजनेस स्ट्रैटेजी के साथ मिट्टी से जुड़ें.

तो कामयाबी कदम चूमती है. महज 100 पेड़ों से शुरू हुआ यह सफर आज एक बड़े ब्रांड में बदल चुका है. उनकी यह जर्नी केवल पसीने की नहीं. बल्कि स्मार्ट वर्क और इनोवेशन की दास्तां है जिसने पूरे राजस्थान के किसानों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है. अमर सिंह आज न केवल लाखों कमा रहे हैं. बल्कि खेती में वैल्यू एडिशन का एक परफेक्ट मॉडल पेश कर रहे हैं. जान लीजिए अमर सिंह की पूरी कहानी.

छोटी शुरुआत से बड़ा बिजनेस एंपायर

अमर सिंह ने जब आंवले की खेती शुरू की थी. तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह मामूली सा फल उनकी किस्मत बदल देगा. शुरुआत में उन्होंने सिर्फ 100 पेड़ों के साथ रिस्क लियाय लेकिन उनकी दूरदर्शिता कमाल की थी. उन्होंने सिर्फ कच्चा आंवला बेचने पर फोकस नहीं किया. क्योंकि मंडी में उसका भाव काफी कम मिलता था. यहीं से उन्होंने अपनी स्ट्रैटेजी बदली और आंवले की प्रोसेसिंग पर ध्यान देना शुरू किया.

आज उनके पास आंवले के बाग का बड़ा एरिया है और वह खुद की प्रोसेसिंग यूनिट भी चला रहे हैं. उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी क्वालिटी और ग्राहकों का भरोसा है. जिसकी बदौलत आज उनका टर्नओवर करोड़ों में पहुंच गया है. एक आम किसान से एक सफल एग्री-बिजनेस टाइकून बनने का यह सफर वाकई किसी को भी इंस्पायर करने के लिए काफी है.

महज 100 आंवले के पेड़ों से शुरू किया था अपना यह पूरा फार्मिंग सफर.

कच्चे फल की जगह उसकी प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग को अपना मुख्य हथियार बनाया.

आज अपनी मेहनत के दम पर करोड़ों रुपये का सालाना टर्नओवर जनरेट कर रहे हैं.

बेचने के लिए अपनाया यह तरीका

अमर सिंह की असली सफलता का राज उनके आंवले बेचने के तरीके में छिपा है. जो आजकल के मॉडर्न एग्री-बिजनेस का मूल मंत्र है. उन्होंने महसूस किया कि अगर 15 रुपये के आंवले को मुरब्बा, कैंडी, जूस या पाउडर में बदल दिया जाए. तो उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है. इसी विजन के साथ उन्होंने आंवले के प्रोडक्ट्स तैयार करना शुरू किए और सीधे मार्केट में अपनी जगह बनाई. आज उनके बनाए प्रोडक्ट्स की डिमांड न सिर्फ लोकल मार्केट में है.

बल्कि दूर-दूर तक लोग उनके काम के कायल हैं. वह न केवल खुद लाखों कमा रहे हैं. बल्कि गांव के कई लोगों को रोजगार देकर एक सोशल एंटरप्रेन्योर की भूमिका भी निभा रहे हैं. अमर सिंह की यह कहानी सिखाती है कि खेती में अगर थोड़ा सा दिमाग और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का तड़का लगा दिया जाए. तो मुनाफे की कोई लिमिट नहीं है.

आंवले से मुरब्बा, कैंडी और जूस जैसे कई प्रीमियम प्रोडक्ट्स तैयार किए.

प्रोसेसिंग के जरिए कच्चे आंवले की मार्केट वैल्यू को कई गुना तक बढ़ा दिया.

आज कई परिवारों को रोजगार देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं.