पेट्रोल-डीजल को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, पेट्रोल पर पहली बार लगेगा टैक्स डीजल और ATF के निर्यात पर घटाई SAED.
अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम $120 प्रति बैरल से ऊपर चले गए थे. उस वक्त सरकार ने डीजल पर SAED बढ़ाकर 55.5 रुपये और ATF पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी थी.
केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन यानी ATF के निर्यात पर लगने वाले Special Additional Excise Duty यानी SAED की दरें एक बार फिर बदल दी हैं. इसको लेकर 15 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर दी गई है. ये नई दरें 16 मई 2026 यानी आज से लागू होंगी.
नई दरें क्या हैं?
-पेट्रोल के निर्यात पर अब 3 रुपये प्रति लीटर SAED लगेगी. डीजल पर यह दर 16.5 रुपये प्रति लीटर और ATF यानी विमान ईंधन पर 16 रुपये प्रति लीटर तय की गई है. तीनों मामलों में रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस यानी RIC शून्य है.
-घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.
SAED क्या है और काम कैसे करती है?
-सरकार यह टैक्स हर दो हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की औसत कीमतों के आधार पर तय करती है.
-जब ग्लोबल कीमतें ऊपर जाती हैं तो रिफाइनरियों को निर्यात में भी मुनाफा दिखता है और वे देश की बजाय बाहर ज्यादा ईंधन भेजने लगती हैं. इससे घरेलू आपूर्ति पर असर पड़ सकता है.
-SAED निर्यात को महंगा करके इसी को रोकती है. जब प्राइस नरम पड़ते हैं तो SAED भी घटा दी जाती है.
-यह व्यवस्था 27 मार्च 2026 से शुरू हुई थी जब पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहली बार यह शुल्क लगाया गया था.
$120 प्रति बैरल तक गए थे कच्चे तेल के दाम
अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम $120 प्रति बैरल से ऊपर चले गए थे. उस वक्त सरकार ने डीजल पर SAED बढ़ाकर 55.5 रुपये और ATF पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी थी. एक मई को जब कीमतें कुछ नरम हुईं तो डीजल पर यह घटकर 23 रुपये और ATF पर 33 रुपये हुई. अब 16 मई को एक और कटौती के बाद डीजल 16.5 रुपये और ATF 16 रुपये पर आ गई है.
पेट्रोल पर पहली बार लगेगी SAED
पेट्रोल पर तीन रुपये पहली बार हुआ और यह इस रिवीजन का सबसे अलग पहलू है. अब तक पेट्रोल के निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगता था, लेकिन इस बार पहली बार 3 रुपये प्रति लीटर SAED लगाई गई है. इसकी वजह यह है कि भले ही क्रूड ऑयल की कीमतें थोड़ी नरम हुई हों, पेट्रोल का निर्यात रिफाइनरियों के लिए अभी भी मुनाफे का सौदा बना हुआ है. इसीलिए सरकार ने पेट्रोल को भी पहली बार इस दायरे में लाना जरूरी समझा.



