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PM Modi Tour: 5 देशों की यात्रा से क्या लेकर लौटे PM मोदी? , भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत….

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यह दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, उच्च तकनीक निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और वैश्विक व्यापार-रणनीतिक साझेदारियों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली कामयाब कोशिश साबित हुई है.

15 मई से 20 मई 2026 के बीच PM मोदी महज छह दिन में पांच देशों का दौरा करके लौटे हैं. ये यात्रा सिर्फ विदेशी मेहमान नवाजी या फोटो सेशन तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत हर पड़ाव से कुछ ऐसा लेकर लौटा है जो सीधे देश की ऊर्जा सुरक्षा, चिप निर्माण, ग्रीन एनर्जी और कारोबारी ताकत को नया आयाम देगा. UAE से लेकर इटली तक, हर मुलाकात में ऐसे समझौते हुए जिनका असर आने वाले दशकों तक हमारी जेब, हमारी नौकरियों और हमारी सुरक्षा पर पड़ने वाला है. आइए जानते हैं कि PM मोदी इन पांचों जगहों से असल में क्या-क्या लेकर लौटे?

पहला पड़ाव- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): ऊर्जा सुरक्षा का नया अध्याय

PM मोदी 15 मई की सुबह सबसे पहले अबू धाबी पहुंचे. करीब 3 घंटे के इस छोटे से प्रवास में ही दोनों देशों के बीच 7 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें सबसे अहम रहा ‘स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व एग्रीमेंट’. यह रणनीतिक तेल भंडार पर बड़ी डील:

UAE की राष्ट्रीय तेल कंपनी ADNOC अब भारत के रणनीतिक तेल भंडारों में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी. युद्ध या आपूर्ति में रुकावट की स्थिति में इस रिजर्व पर पहला अधिकार भारत का होगा. UAE इस भंडारण के लिए भारत को किराया भी देगा.

अभी भारत के पास कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में तीन रणनीतिक तेल भंडार हैं, जिनकी क्षमता 53.3 लाख मीट्रिक टन (करीब 4 करोड़ बैरल) है, लेकिन वे केवल 65% भरे हुए हैं. इस डील के बाद भारत का रणनीतिक तेल भंडार मौजूदा 9 दिनों की खपत से बढ़कर 14-15 दिनों के बराबर हो जाएगा.

इस डील की सबसे खास बात यह है कि UAE का यह तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से न गुजरकर, हशबान ऑयल फील्ड से एक विशेष पाइपलाइन के जरिए सीधे फुजैराह बंदरगाह पहुंचेगा, जहां से जहाज भारत आ सकते हैं. इससे भारत को एक सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति मार्ग मिलेगा.

इसके अलावा UAE गुजरात के वडिनार बंदरगाह पर एक बड़ा जहाज मरम्मत केंद्र और नाविकों का ट्रेनिंग सेंटर बनाएगा. साथ ही, बुनियादी ढांचे, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में 3 बिलियन डॉलर (लगभग 48,000 करोड़ रुपये) का निवेश करने पर भी सहमति बनी.

दूसरा पड़ाव- नीदरलैंड: सेमीकंडक्टर क्रांति और महत्वपूर्ण खनिज

15 मई की रात करीब 9 बजे PM मोदी एम्स्टर्डम पहुंचे और करीब डेढ़ दिन रुके. इस दौरान उन्होंने राजपरिवार और प्रधानमंत्री से मुलाकात की और कुल 17 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. इनमें दो समझौते बेहद अहम हैं:

चिप-मेकिंग में ऐतिहासिक डील: नीदरलैंड की दिग्गज कंपनी ASML ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ चिप मैन्युफैक्चरिंग में पार्टनरशिप की है. टाटा गुजरात के धोलेरा में 91,000 करोड़ रुपये की लागत से भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट लगा रही है. ASML अपनी एकाधिकार वाली लिथोग्राफी तकनीक से वहां चिप उत्पादन शुरू करने में मदद करेगी. इससे भारत की चिप आयात पर निर्भरता कम होगी, जो अभी 90% है. 2023-24 में 1.05 लाख करोड़ रुपये की चिप्स आयात की गई थीं.

महत्वपूर्ण खनिजों के लिए समर्थन: नीदरलैंड भारत को कोबाल्ट, लीथियम, ग्रेफाइट और निकल जैसे 30 महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और खनन के लिए आधुनिक तकनीक देगा. अभी भारत अपनी जरूरत का 70% से 100% तक ये खनिज चीन जैसे देशों से आयात करता है.

इसके अलावा:

कल्पसार परियोजना: गुजरात में खंभात की खाड़ी पर बनने वाले 30 किलोमीटर लंबे बांध की डिजाइन और इंजीनियरिंग में वॉटर मैनेजमेंट एक्सपर्ट नीदरलैंड मदद करेगा.

सांस्कृतिक धरोहर की वापसी: नीदरलैंड ने 11वीं सदी के चोल राजवंश की 21 बड़ी और 3 छोटी ताम्रपत्र (तांबे की प्लेटें) भारत को लौटा दीं. 18वीं सदी में डच मिशनरी इन्हें यूरोप ले गए थे और भारत 2012 से इन्हें वापस लाने की कोशिश कर रहा था.

तीसरा पड़ाव- स्वीडन: रणनीतिक साझेदारी और मुक्त व्यापार की राह

17 मई को PM मोदी स्टॉकहोम पहुंचे. यहां उन्हें स्वीडन के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया. स्वीडन में:रणनीतिक साझेदारी बढ़ी: भारत और स्वीडन के बीच संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया गया और अगले 5 सालों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया.

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने PM मोदी से मुलाकात में वादा किया कि वे साल के अंत तक इस समझौते पर हस्ताक्षर कर देंगी. इस डील के तहत यूरोप से भारत आने वाली 96.6% वस्तुओं पर से टैरिफ पूरी तरह हटा दिया जाएगा या बहुत कम कर दिया जाएगा. यूरोप भी भारत से आने वाले 99.5% सामान पर ऐसा ही करेगा.

चौथा पड़ाव- नॉर्वे: 43 साल बाद ऐतिहासिक यात्रा और हरित ऊर्जा

18 मई को PM मोदी ओस्लो पहुंचे. यह 43 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा थी, इससे पहले 1983 में इंदिरा गांधी वहां गई थीं. यहां दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते हुए:

हरित रणनीतिक साझेदारी: दोनों देशों के बीच 12 मुद्दों पर समझौते हुए, जिनमें सबसे अहम है ‘ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप’. इसके तहत नॉर्वे भारत के स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन, जलविद्युत, परमाणु) परियोजनाओं में बड़ा निवेश करेगा. गौरतलब है कि नॉर्वे की 98% बिजली आपूर्ति स्वच्छ ऊर्जा से होती है, जबकि भारत का 2030 तक 500 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है, जिसके मुकाबले अप्रैल 2026 तक सिर्फ 283.46 गीगावाट क्षमता ही स्थापित हो पाई है.

LPG खरीद पर बात: नॉर्वे यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है और रोजाना लगभग 2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है. ईरान युद्ध के बाद से भारत ने नॉर्वे से LPG की खरीद बढ़ाई है और भविष्य में वहां से और तेल खरीदने के विकल्प तलाश रहा है.

पांचवां पड़ाव- इटली: व्यापार, IMEC और ‘मेलोडी’ की दोस्ती

यूरोपीय दौरे के आखिरी पड़ाव पर PM मोदी 19 मई को रोम पहुंचे और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की. दोनों नेता एक ही कार में घूमे और 2,000 साल पुराने कोलोजियम में सेल्फी भी ली. इसके बाद Melodi सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा. भारत और इटली के बीच 2 बड़े समझौते हुए:

IMEC को आगे बढ़ाने पर सहमति: भारत और इटली ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को आगे बढ़ाने का फैसला किया. यह परियोजना भारत को रेलवे, बंदरगाह और शिपिंग नेटवर्क के जरिए मिडिल ईस्ट और यूरोप से जोड़ेगी, जिससे भारत से यूरोप तक सामान पहुंचाने का समय और लागत 30-40% तक कम हो सकती है.

AI और साइबर सुरक्षा में सहयोग: दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा देने का फैसला किया और 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो से ज्यादा तक ले जाने का टारगेट रखा. फिलहाल दोनों देशों के बीच 14 अरब यूरो (लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये) का व्यापार होता है.