सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जिस याचिका पर दिया है उसमें कहा गया था कि झारखंड हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में एक फैसला सुनाया था. वह फैसला अभी तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है.
हाई कोर्ट के फैसलों में होने वाली देरी के समाधान के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किए किए हैं. कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश सुनाने के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की है. आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर हाई कोर्ट की कोई बेंच इन निर्देशों का पालन नहीं करेगी तो मामला दूसरी बेंच को सौंप दिया जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जिस याचिका पर दिया है उसमें कहा गया था कि झारखंड हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 में एक फैसला सुनाया था. वह फैसला अभी तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया है. याचिकाकर्ता के वकील को भी फैसले की कॉपी नहीं दी गई है.
सुनवाई का दायरा व्यापक करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट से उनके यहां फैसला सुरक्षित रखने, उन्हें सुनाए जाने और अपलोड करने की व्यवस्था पर जानकारी मांगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी, 2025 के बाद सुरक्षित रखे गए सभी फैसलों का ब्यौरा भी मांगा था. साथ ही, उन्हें सुनाए जाने और अपलोड किए जाने की तारीखों पर भी जानकारी मांगी थी.
मामले को सुनते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने कहा था, ‘मैं 15 साल हाई कोर्ट का जज रह चुका हूं. ऐसा कभी नहीं हुआ कि हमने कोई फैसला सुरक्षित रखा हो और तीन महीने के भीतर उसे न सुनाया हो.’ अब उनकी अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने सभी हाई कोर्ट के लिए बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनमें कहा गया है :-
- सुनवाई पूरी होने के बाद सुरक्षित रखा गया फैसला 3 महीने के भीतर सुनाया जाए.
- जमानत के मामलों में आदेश अगले दिन देने का प्रयास किया जाए. आदेश की जानकारी उसी दिन जेल अधिकारियों को दी जाए
- जमानत मिलने के बाद विचाराधीन कैदियों को उसी दिन या अधिक से अधिक अगले दिन रिहा किया जाए
- फैसले का मुख्य हिस्सा कोर्ट में सुनाया जाए. कारण बताते हुए विस्तृत आदेश 7 दिनों के भीतर अपलोड किया जाए
- फैसला सुरक्षित रखे जाने की तारीख हाई कोर्ट की वेबसाइट पर दिखनी चाहिए.
- अगर कोई बेंच इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं करती, तो मामला दूसरी बेंच को सौंपा जाएगा.
- अगर 30 दिनों के भीतर फैसले के कारण अपलोड नहीं किए जाते, तो भी मामले नई बेंच को सौंपा जा सकता है.



