मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है. खराब स्वास्थ्य के बीच उन्होंने पानी पीकर उपवास तोड़ा.
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने आखिरकार रविवार (31 मई) अपना अनशन समाप्त कर दिया. राज्य सरकार और आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी, जिसके बाद जरांगे पाटिल ने पानी पीकर अपना उपवास तोड़ा.
हालांकि अनशन खत्म होने के कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें इलाज के लिए छत्रपति संभाजीनगर के गैलेक्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
रविवार को राज्य सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, विधायक प्रसाद लाड और अन्य प्रतिनिधियों ने मनोज जरांगे पाटिल से मुलाकात की. दोनों पक्षों के बीच कई घंटों तक चर्चा चली. बातचीत के दौरान सरकार ने मराठा समाज की कई प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया.
बैठक के बाद मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने मनोज जरांगे पाटिल को पानी पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया. इस दौरान बड़ी संख्या में आंदोलनकारी और मराठा समाज के लोग मौजूद रहे.
कुनबी प्रमाणपत्र और वैधता को लेकर बड़ा फैसला
बैठक के बाद मनोज जरांगे पाटिल ने बताया कि सरकार ने 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर पात्र लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र देने पर सहमति जताई है. साथ ही जिन लोगों को प्रमाणपत्र मिल चुका है, उन्हें वैधता प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा.
उन्होंने कहा कि किसी पात्र व्यक्ति को प्रमाणपत्र देने में अधिकारी लापरवाही करते हैं या जानबूझकर देरी करते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने का भरोसा दिया है.
जरांगे पाटिल ने कहा कि सातारा गजेटियर लागू करने की मांग भी सरकार के सामने रखी गई है. इस मामले में सरकार को एक महीने का समय दिया गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार तय समय के भीतर इस दिशा में जरूरी कदम उठाएगी.
इसके अलावा वैधता प्रमाणपत्र से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें.
दो-तीन दिन में जारी होगा शासन निर्णय
मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि मुंबई आंदोलन के बाद सरकार द्वारा लिए गए कई फैसलों पर पहले से काम चल रहा है. हालांकि कुछ मुद्दों को लेकर समाज में भ्रम और शंकाएं बनी हुई थीं, जिसके कारण दोबारा आंदोलन शुरू हुआ.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार मराठा समाज के हित में काम कर रही है. अब जो प्रस्ताव स्वीकार किया गया है, उसके आधार पर अगले दो से तीन दिनों के भीतर शासन निर्णय (जीआर) जारी कर अमल की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
हालांकि मनोज जरांगे पाटिल ने साफ कर दिया कि यदि सरकार ने तय समय के भीतर शासन निर्णय जारी नहीं किया, तो वे फिर से आंदोलन और अनशन का रास्ता अपनाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार और मुख्यमंत्री की ओर से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद ही उन्होंने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित किया है.
भुजबल पर साधा निशाना, नार्को टेस्ट की मांग
बैठक के दौरान मनोज जरांगे पाटिल ने बिना नाम लिए छगन भुजबल पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति उन पर गलत आरोप लगा रहा है तो दोनों का नार्को टेस्ट कराया जाना चाहिए, जिससे सच्चाई जनता के सामने आ सके.
तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती
अनशन समाप्त होने के बाद मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत अचानक बिगड़ गई. डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें छत्रपति संभाजीनगर के गैलेक्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है. फिलहाल डॉक्टर उनकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
मराठा आरक्षण आंदोलन के इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बाद फिलहाल आंदोलन स्थगित हो गया है, लेकिन अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम और आगामी शासन निर्णय पर टिकी हुई हैं. यदि सरकार अपने वादों को समय पर पूरा करती है तो लंबे समय से चल रहा यह विवाद सुलझने की दिशा में आगे बढ़ सकता है.



