Home विदेश Ebola Virus: इबोला का नया स्ट्रेन ग्लोबल इमरजेंसी घोषित, इससे भारत को...

Ebola Virus: इबोला का नया स्ट्रेन ग्लोबल इमरजेंसी घोषित, इससे भारत को कितना डरना चाहिए?

3
0

Ebola Outbreak: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि हुई है और शुरुआती जेनेटिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह वायरस कई हफ्तों, संभव है कई महीनों से चुपचाप फैल रहा था.

दुनिया एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर सतर्क हो गई है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के नए प्रकोप की पुष्टि हुई है और शुरुआती जेनेटिक जांच से संकेत मिले हैं कि यह वायरस कई हफ्तों, संभव है कई महीनों से चुपचाप फैल रहा था. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस नए स्ट्रेन के व्यवहार और इसकी क्षमता को लेकर अभी भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. ऐसे में दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस वायरस से डरने की जरूरत है.

कैसे फैलता है इबोला वायरस?

एक्सपर्ट  के अनुसार इबोला उन वायरसों में शामिल नहीं है जो हवा के जरिए तेजी से फैलते हैं. यह वायरस शरीर में तभी प्रवेश करता है जब इंफेक्टेड व्यक्ति के खून, लार, मल, यूरिन या अन्य शारीरिक द्रव के सीधे संपर्क में आया जाए. लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के एक्सपर्ट डॉ. डेविड हेमन, जिन्होंने 1976 में पहली बार इबोला पर स्टडी किया था, बताते हैं कि यह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में मुख्य रूप से शारीरिक लिक्यूड के जरिए फैलता है. यही कारण है कि मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और परिवार के सदस्य सबसे अधिक जोखिम में रहते हैं.

शरीर में कैसे फैलता है यह?

वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सीधे इम्यून सिस्टम पर हमला करता है. जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ मेंज के वायरोलॉजी प्रोफेसर डॉ. बोडो प्लाख्टर के अनुसार वायरस पहले लसीका ग्लैंड में अपनी संख्या बढ़ाता है और फिर खून के जरिए शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंच जाता है.  यह उन सेल्स को निशाना बनाता है जो सामान्य परिस्थितियों में शरीर को इंफेक्शन से बचाती हैं. जब यही इन्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है तो वायरस तेजी से पूरे शरीर में फैलने लगता है.

पहचानना क्यों होता है मुश्किल?

इबोला की सबसे बड़ी चुनौती इसके शुरुआती लक्षण हैं. शुरुआत में मरीज को सामान्य बुखार, सर्दी, इंफेक्शन या मलेरिया जैसी परेशानी महसूस हो सकती है. कई बार मरीज को कुछ समय के लिए राहत भी महसूस होती है, लेकिन इसके बाद बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. डॉ. डेविड हेमन के अनुसार बाद के चरण में शरीर के विभिन्न हिस्सों से ब्लड निकलने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. यही वह समय होता है जब मरीज सबसे ज्यादा संक्रामक होता है और इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ जाता है.

भारत में क्या स्थिति है?

अब सवाल यह है कि भारत को कितना डरना चाहिए. मई 2026 तक भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है. हेल्थ के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट clinikk के एक्सपर्ट के आकलन के मुताबिक भारतीय आबादी के लिए फिलहाल सीधा खतरा कम है. देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर निगरानी व्यवस्था, स्वास्थ्य जांच, बड़े अस्पतालों में त्वरित जांच सुविधाएं और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की चेतावनी सिस्टम संभावित मामलों की पहचान में मदद कर रही हैं. हालांकि अफ्रीकी देशों के साथ यात्रा और व्यापारिक संबंधों को देखते हुए सतर्कता बनाए रखना जरूरी माना जा रहा है.