Home राजनीति हिमाचल नगर निगम चुनावों में BJP का दबदबा, 3 निगमों पर कब्जा…

हिमाचल नगर निगम चुनावों में BJP का दबदबा, 3 निगमों पर कब्जा…

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हिमाचल प्रदेश के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार में से तीन नगर निगमों में जीत दर्ज की है. चुनाव परिणामों के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने दावा किया कि नगर निगम, नगर निकाय और पंचायत चुनावों में मिले जनसमर्थन ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश की जनता कांग्रेस सरकार की नीतियों से असंतुष्ट है. उन्होंने कहा कि यह परिणाम कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनमत हैं और 2027 के विधानसभा चुनावों की तस्वीर भी साफ कर रहे हैं.

नगर निगमों में भाजपा की बड़ी जीत

शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में राजीव बिंदल ने बताया कि मंडी, धर्मशाला और सोलन नगर निगमों में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की है. मंडी नगर निगम की 14 में से 12 सीटों, धर्मशाला की 17 में से 11 सीटों और सोलन की 17 में से 10 सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे. वहीं पालमपुर नगर निगम में कांग्रेस को बढ़त मिली, लेकिन भाजपा ने पिछली बार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है. बिंदल ने कहा कि चार में से तीन नगर निगमों में मिली सफलता प्रदेश में बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत है.

पंचायत और निकाय चुनावों में भी भाजपा को बढ़त

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 17 मई को हुए नगर निकाय चुनावों में 25 नगर परिषदों में से 18 और 22 नगर पंचायतों में से 12 स्थानों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने बढ़त हासिल की. उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कांग्रेस की जीत संबंधी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने अधिकृत उम्मीदवार ही घोषित नहीं किए थे, इसलिए जीत का दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है. बिंदल के अनुसार पंचायत चुनावों में भी भाजपा समर्थित 3,759 पंचायतों में से करीब 2,780 प्रधान और 2,930 उपप्रधान निर्वाचित हुए हैं, जो 74 से 77 प्रतिशत सफलता दर को दर्शाता है.

बिंदल ने कांग्रेस सरकार पर नगर निकायों में सत्ता बनाए रखने के लिए नियमों में बदलाव करने का आरोप लगाया. उन्होंने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव संबंधी संशोधनों को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि भाजपा इस मुद्दे को न्यायालय और जनता के बीच उठाएगी. उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, कर्मचारियों की समस्याएं, अधूरे वादे और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जनता में भारी नाराजगी है, जिसका असर चुनाव परिणामों में साफ दिखाई दिया है. नतीजे सरकार के खिलाफ रेफरेंडम जैसे हैं ऐसे में सरकार ज्यादा समय तक सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं है.