Liquor Scam: ED ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की हैं, जिसमें गोवा का वेस्टिन होटल भी शामिल है. जांच के अनुसार, 2019-2023 के बीच सिंडिकेट ने नकली होलोग्राम के जरिए 2,883 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की.
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है. रायपुर जोनल कार्यालय ने इस मामले में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर ली हैं. कुर्क की गईं संपत्तियों में गोवा का प्रसिद्ध वेस्टिन होटल भी शामिल है. ED ने यह कार्रवाई 28 मई 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की. इसके लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश (PAO) जारी किए गए थे. यह पूरी जांच रायपुर की EOW/ACB द्वारा दर्ज FIR पर आधारित है.
सिंडिकेट ने की 2,883 करोड़ की अवैध कमाई!
ED की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2019 से 2023 के बीच राज्य की आबकारी व्यवस्था में भारी हेरफेर किया गया. इस दौरान एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय था. इसमें अनवर ढेबर, सेवानिवृत्त IAS अनिल टुटेजा और कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे. इनके साथ शराब डिस्टिलरी मालिकों और निजी संस्थाओं ने मिलकर लगभग 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की.
110 करोड़ में खरीदा गया होटल
गोवा के अंजुना क्षेत्र स्थित लग्जरी होटल वेस्टिन गोवा को कुर्क किया गया है. यह होटल पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है, जिसके निदेशकों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं. ईडी का दावा है कि इस होटल की खरीद में करीब 110 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. यह पूरी राशि शराब घोटाले से प्राप्त अवैध नकदी से चुकाई गई थी.
4 नए आरोपियों के नाम शामिल, कुल 85 पहुंचे
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ईडी ने तीसरी बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने तीन कंपनियों के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड जब्त किए हैं. जांच में खुलासा हुआ कि कंपनियों को अपने मुनाफे का हिस्सा सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया गया. ईडी के अनुसार 50 से 60 प्रतिशत तक हिस्सा सिंडिकेट को दिया जाता था. मामले में ईडी ने विशेष अदालत में छठी पूरक चार्जशीट दाखिल की है. चार नए आरोपियों को भी शामिल किया गया है. इनमें विजय भाटिया, टी. भुनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर के नाम शामिल हैं. मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 85 हो गई है.
जांच के घेरे में बड़े नाम
इस कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच ED और राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW/ACB) कर रही है. मामले में कई रसूखदार लोग मुख्य आरोपी बनाए गए हैं. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव (Deputy Secretary) सौम्या चौरसिया का नाम आया है. वहीं जांच के अनुसार, अनवर ढेबर (सिंडिकेट का मुख्य मास्टरमाइंड व रायपुर के मेयर का भाई) और सेवानिवृत्त IAS अनिल टुटेजा सिंडिकेट चलालते थे . इसके अलावा, पूर्व आबकारी आयुक्त और कई शराब कंपनियों के अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं. पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल का नाम भी जांच प्रक्रिया में है. अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा घोटाला ₹2000 करोड़ से ₹3200 करोड़ के बीच का है.



