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Rahul Gandhi Congress: 6 जून से दिल्ली में मचेगा सियासी घमासान! दलित-मुस्लिम गठबंधन के लिए कांग्रेस का सबसे बड़ा दांव…

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दिल्ली सम्मेलन में तैयार रोडमैप को पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाएगा. इसके बाद यूपी, पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में इसी तरह के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.

पांच राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति को नया आकार देना शुरू कर दिया है. पार्टी अब दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्गों को एक साझा मंच पर लाने की व्यापक सामाजिक और राजनीतिक कवायद में जुट गई है. इसकी शुरुआत दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को एकजुट करने के अभियान से होने जा रही है.

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग और अल्पसंख्यक विभाग ने मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर एक नई सोशल इंजीनियरिंग रणनीति तैयार की है. पार्टी का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इन समुदायों के बीच साझा मुद्दों और चुनौतियों को आधार बनाकर एक मजबूत सामाजिक गठबंधन खड़ा किया जा सकता है.

कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय चेयरपर्सन राजेंद्र पाल गौतम ने एबीपी न्यूज से बातचीत में बताया कि पार्टी एक राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित करने जा रही है, जिसमें दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ गरीब पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण वर्ग के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा. इसके बाद दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक, ओबीसी और गरीब सवर्ण समुदायों का एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के शीर्ष नेता शामिल होंगे.

6 जून से अभियान की शुरुआत

सूत्रों के अनुसार इस अभियान की औपचारिक शुरुआत 6 जून को दिल्ली में होने वाले संयुक्त सम्मेलन से होगी. सम्मेलन में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, कलाकार और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. बैठक में दोनों समुदायों से जुड़े सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक मुद्दों पर चर्चा कर एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा.

दिल्ली सम्मेलन में तैयार रोडमैप को पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा. इसके बाद उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में इसी तरह के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे.

35-40 फीसदी वोट बैंक पर नजर

जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, वहां दलित और अल्पसंख्यक आबादी मिलकर लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक प्रभाव रखती है. पार्टी को उम्मीद है कि यदि इन वर्गों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाया गया तो इसका सीधा चुनावी फायदा मिल सकता है. सूत्रों का कहना है कि भविष्य में इस सामाजिक गठबंधन में अति पिछड़े वर्ग, व्यापक ओबीसी समाज और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को भी जोड़ने की योजना है.

संविधान बचाओअभियान की सफलता से उत्साहित कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के ‘संविधान बचाओ’ अभियान को दलित समाज से व्यापक समर्थन मिला था, जिसका असर पार्टी के प्रदर्शन में भी दिखाई दिया. अब कांग्रेस उसी राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाते हुए सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व के मुद्दों को केंद्र में रखने की तैयारी कर रही है.

राहुल गांधी ने हाल में अल्पसंख्यक नेताओं के साथ हुई बैठकों में यह भी कहा है कि किसी भी समुदाय के साथ होने वाले अन्याय के मुद्दों को स्पष्टता के साथ उठाया जाना चाहिए और नेताओं को इन विषयों पर खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए.