देशभर के किसान खरीफ सीजन की फसलों की तैयारी कर रहे हैं. खरीफ सीजन की शुरुआत से पहले ही किसानों के बीच यूरिया और डीएपी की उपलब्धता की चिंता बनी रहती है. खेत तैयार करने से लेकर उसमें खाद डालने तक इस समय किसान अपने जरूरी काम निपटाते हैं. हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए खेती में सिर्फ खाद डालना ही काफी नहीं होता बल्कि सही मात्रा में खाद डालना ज्यादा जरूरी होता है.
कई किसान बिना मिट्टी की जांच करें अनुमान के आधार पर खेत में खाद डाल देते हैं, इससे फसल को फायदा कम और मिट्टी को नुकसान ज्यादा होता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि आपके खेत में कितनी खाद की जरूरत है, आप कैसे चेक कर सकते हैं?
मृदा स्वास्थ्य कार्ड से जाने खेत में कितनी खाद की जरूरत?
मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को यह जानने में मदद करता है कि उनके खेत में कितनी और कौन सी खाद की जरूरत है. मृदा हेल्थ कार्ड बनवाने के लिए किसानों को अपने खेत के अलग-अलग हिस्सों से पहले मिट्टी के नमूने लेने होते हैं. इसके लिए उन्हें खेत में 15 से 20 अलग-अलग स्थान से मिट्टी निकालनी होती है. इसके बाद सभी नमूनों को मिलाकर एक नमूना तैयार किया जाता है, फिर इन नमूने को पॉलिथीन बैग में भरकर कृषि विभाग या मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में जमा कराया जाता है. मिट्टी का नमूना जमा होने के बाद हाईटेक मशीन से उसकी जांच की जाती है. वहीं आमतौर पर 5 दिन के अंदर रिपोर्ट तैयार हो जाती है. जांच के दौरान मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का स्तर देखा जाता है.
रिपोर्ट से पता चलता है खेत में क्या कमी?
मिट्टी की जांच की रिपोर्ट आने के बाद किसानों को पता चलता है कि खेत में कौन से पोषक तत्व कम है और कौन सा पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. जैसे अगर खेत में फास्फोरस की कमी है, तो उसी के अनुसार खाद डाली जा सकती है. वहीं अगर पोटाश पर सही मात्रा में है, तो ज्यादा पोटाश डालने की जरूरत नहीं होती है. आपको बता दें कि जांच रिपोर्ट के आधार पर किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है. यह कार्ड 3 साल तक मान्य रहता है, इस कार्ड में कौन सी फसल के लिए कौन सा खाद कितनी मात्रा में खाद कब देना है और कौन से सूक्ष्म पोषक तत्वों की जरूरत है यह सारी जानकारी दी जाती है.
बिना जांच के कैसे पता करें खेत में खाद की जरूरत?
कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर किसी किसान की मिट्टी जांच रिपोर्ट नहीं आती है और अगर वह मिट्टी की जांच नहीं कर सकता है, तो वह मानक सिफारिश के अनुसार खाद का उपयोग कर सकता है. जैसे प्रति एकड़ के लिए 48 किलो नाइट्रोजन, 24 किलो फास्फोरस और 16 किलो पोटाश डालना सुरक्षित माना जाता है. वहीं अगर किसान डीएपी का उपयोग कर रहा है तो 52 किलो डीएपी, 84 किलो यूरिया और 27 किलो पोटाश, अगर एसएसपी खाद का उपयोग कर रहे हैं तो 150 किलो एसएसपी, 105 किलो यूरिया, 27 किलो पोटाश और अगर एनपीके खाद का उपयोग कर रहे हैं तो 75 किलो एनपीके, 85 किलो यूरिया और 60 किलो पोटाश डाल सकते हैं.



