‘जल-संरक्षण की राह, संवरेंगे खेत और गांव, ’वर्षा जल का संरक्षण, मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण’
वर्षा जल के तेज बहाव को नियंत्रित कर उसे भूमि में समाहित करने में सहायक होंगे, जिससे खेतों की नमी और भूमि की उत्पादकता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
जल संरचनाएं भविष्य में खेतों और गांवों के लिए बड़े बदलाव का आधार बन सकती हैं। “जल और मिट्टी का संरक्षण, समृद्ध गांव की मजबूत नींव” के उद्देश्य के साथ किए जा रहे ये कार्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।
वर्षा जल के बहाव को नियंत्रित करने के उद्देश्य
इन संरचनाओं के माध्यम से पानी को रोककर धीरे-धीरे जमीन में समाहित होने का अवसर मिलता है। इससे भू-क्षरण कम होने, मिट्टी में नमी बनाए रखने और भूमि की उत्पादक क्षमता को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
’प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ रोजगार का अवसर’
इन कार्यों को ग्रामीण समुदाय की भागीदारी और श्रम आधारित गतिविधियों के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है।
इससे एक ओर जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।



