होर्मुज जलडमरूमध्य
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया है कि सोमवार, 31 अगस्त को करीब 1.7 करोड़ बैरल कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते गुजरा।
अमेरिका के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद एक दिन में यहां से गुजरने वाली यह सबसे बड़ी मात्रा है।
अगर यह आंकड़ा सही साबित होता है तो इसे वैश्विक तेल बाजार के लिए राहत की खबर माना जा सकता है। हालांकि, शिपिंग ट्रैकिंग डेटा अमेरिकी दावे से अलग तस्वीर पेश कर रहा है, जिससे इस आंकड़े को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
आखिर इतना अहम क्यों है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से एशिया और दुनिया के दूसरे हिस्सों तक बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से पहुंचता है। यही वजह है कि जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है या होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर तुरंत असर पड़ता है। भारत समेत एशिया के कई बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है।
अमेरिका ने 1.7 करोड़ बैरल तेल गुजरने का क्या दावा किया?
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, सोमवार को करीब 17 मिलियन बैरल यानी 1.7 करोड़ बैरल तेल होर्मुज से होकर गुजरा। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि युद्ध शुरू होने के बाद यह एक दिन में हुआ सबसे बड़ा तेल फ्लो है। यदि यह आंकड़ा सही है और आने वाले दिनों में भी तेल की आवाजाही इसी स्तर पर बनी रहती है, तो इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हो सकती है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
शिपिंग डेटा अमेरिकी दावे से क्यों अलग है?
हालांकि, यहां सबसे बड़ा सवाल शिपिंग ट्रैकिंग डेटा को लेकर है। मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को होर्मुज से केवल 5 कमोडिटी जहाज गुजरे। इसके मुकाबले पिछले 10 दिनों में यहां से गुजरने वाले जहाजों का औसत करीब 14 प्रतिदिन बताया गया है। और भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इन पांच जहाजों में कोई लिक्विड टैंकर शामिल नहीं था। ऐसे में अमेरिकी सरकार की ओर से 1.7 करोड़ बैरल तेल गुजरने के दावे और उपलब्ध शिपिंग डेटा के बीच अंतर नजर आता है। इसलिए फिलहाल इस आंकड़े को अमेरिकी सरकार का दावा ही माना जा रहा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि पर नजर बनी हुई है।
क्या तेल की कीमतों में आ सकती है गिरावट?
अगर आने वाले दिनों में होर्मुज के रास्ते तेल की आवाजाही वास्तव में बढ़ती है और नियमित बनी रहती है, तो वैश्विक बाजार में सप्लाई का दबाव कम हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों को कुछ राहत मिलने की संभावना है। लेकिन बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता अभी भी मध्य पूर्व का तनाव है। होर्मुज के आसपास जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बनी हुई हैं। किसी भी नए हमले या समुद्री मार्ग में रुकावट की स्थिति में तेल की सप्लाई पर दबाव फिर बढ़ सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है और खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए एक अहम सप्लाई स्रोत है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही सुचारु रहना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर समुद्री मार्ग सुरक्षित रहता है और तेल की सप्लाई सामान्य होती है, तो इससे भारत में भी ईंधन कीमतों पर संभावित दबाव कम हो सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ रुपये की स्थिति और घरेलू टैक्स जैसे कई अन्य कारक भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करते हैं।
फिलहाल राहत के साथ बना हुआ है संशय
होर्मुज से बड़ी मात्रा में तेल गुजरने का अमेरिकी दावा वैश्विक बाजार के लिए राहत की उम्मीद जरूर पैदा करता है, लेकिन शिपिंग डेटा इस दावे पर सवाल खड़े करता है। ऐसे में आने वाले दिनों में वास्तविक टैंकर मूवमेंट और तेल के प्रवाह पर बाजार की नजर रहेगी। अगर होर्मुज से तेल की सप्लाई लगातार सामान्य होती है तो यह दुनिया के लिए बड़ी राहत होगी, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच इसे स्थायी राहत मानना अभी जल्दबाजी होगी। अगर चाहें तो मैं इसी खबर के लिए 5 बेहद दमदार क्लिकबेट लेकिन प्रोफेशनल हेडलाइन भी दे सकता हूं।



