Home विदेश ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता और चीन की अगली पारी…

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता और चीन की अगली पारी…

2
0

भारत ने ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की, जो बेहद सफल रहा। सबसे बड़ी चुनौती सभी देशों को एक मंच पर लाना थी, और भारत ने नई दिल्ली डिक्लेरेशन पर सभी सदस्य देशों की सहमति प्राप्त कर अपनी कूटनीतिक क्षमताओं को साबित किया।

अब अगली बार ब्रिक्स की मेज़बानी चीन करेगा, जहां 2027 में सम्मेलन बीजिंग में आयोजित होगा। शी जिनपिंग ने इस अवसर पर ब्रिक्स के लिए एक फाइव पॉइंट एक्शन प्लान पेश किया है, जो कई सवाल उठाता है।

जिनपिंग के इस प्लान में व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीकी विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर जोर दिया गया है। लेकिन वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप्पी क्यों है? क्या चीन ब्रिक्स को केवल अपने उत्पादों का बाजार बनाना चाहता है?

शी जिनपिंग का फाइव पॉइंट एक्शन प्लान

जिनपिंग का यह प्लान क्या है?
पॉइंट 1- व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना, विशेष आर्थिक क्षेत्रों में साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
पॉइंट 2- तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सहयोग बढ़ाना।
पॉइंट 3- डिजिटल अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ऑनलाइन और डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देना।
पॉइंट 4- उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाना।
पॉइंट 5- युवाओं को नई तकनीक और स्टार्टअप से जोड़ना।

चीन का व्यापारिक फोकस और भारत की चुनौतियाँ

चीन का ध्यान मुख्य रूप से व्यापार और तकनीकी विकास पर केंद्रित है। वह दुनिया का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब है, और उसके सस्ते उत्पाद पहले से ही वैश्विक बाजार में मौजूद हैं। भारत और चीन के बीच व्यापार का अंतर बहुत बड़ा है, जहां भारत चीन से अधिक खरीदता है और कम बेचता है। यदि ब्रिक्स के तहत व्यापार को और आसान बनाया जाता है, तो भारत में चीनी उत्पादों की भरमार हो सकती है।

हालांकि, चीन का सबसे बड़ा दांव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में है। यदि ब्रिक्स देश चीन के एआई मॉडल और डिजिटल नेटवर्क पर निर्भर होते हैं, तो डेटा सुरक्षा का खतरा बढ़ सकता है। शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए विकासशील देशों पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।

चीन का संदेश स्पष्ट है: व्यापार बढ़ाओ, एआई लाओ, उत्पादन करो और बाजार पर नियंत्रण करो। लेकिन क्या ब्रिक्स केवल एक व्यावसायिक मंच बनकर रह जाएगा? क्या आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और विश्व शांति जैसे गंभीर मुद्दे अनदेखे रह जाएंगे? 2027 में जब ब्रिक्स देश बीजिंग में एकत्र होंगे, तब यह देखना होगा कि क्या भारत और अन्य देश चीन के इस व्यापार-केंद्रित एजेंडे पर अपनी शर्तें रख पाएंगे।