यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू करने के निर्णय को लेकर केंद्र सरकार आलोचना का सामना कर रही है। विपक्ष इसे अमेरिका के दबाव में लिया गया निर्णय मान रहा है। 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के पर्सन टु मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा।
₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर ₹300 का चार्ज लगेगा। आम जनता को चिंता है कि व्यापारी इस चार्ज को ग्राहकों से वसूलेंगे। इस मुद्दे पर बसपा प्रमुख मायावती ने मोदी सरकार पर तीखा हमला किया है।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने यूपीआई के नए नियम को सरकार की ओर से जनता से दोनों हाथों से वसूली करार दिया है।
उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा उस पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लोगों के लिए मुनाफाखोरी का प्रतीक है, जिससे जनता में बेचैनी और आक्रोश स्वाभाविक है। हालांकि, जनता इस व्यवस्था को ‘कर’ मानने को तैयार नहीं है, लेकिन 15 अक्टूबर से लागू होने वाली इस व्यवस्था का असर आम जनता पर पड़ेगा।’
उन्होंने आगे कहा, ‘यह भी स्पष्ट है कि देश की अधिकांश जनता गरीबी और महंगाई से जूझ रही है, और उनके बच्चे अशिक्षा और बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की नीतियों को लाभकारी कम और कल्याणकारी अधिक होना चाहिए। यदि सरकार जनता की समस्याओं की चिंता नहीं करेगी, तो फिर कौन करेगा?’
14,500 स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ बनाने की योजना पर निशाना
सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ में हुई कैबिनेट बैठक में 14,429 प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी गई थी। इस निर्णय पर तंज कसते हुए मायावती ने कहा, ‘यूपी सरकार द्वारा लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से 14,500 स्कूलों को स्मार्ट बनाने की योजना अच्छी है, लेकिन बच्चों को स्मार्ट पढ़ाई से पहले बुनियादी शिक्षा की जरूरतें पूरी करनी चाहिए। क्या प्रति स्कूल लगभग दो लाख रुपये में यह संभव होगा? इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।’



