Home Blog Page 10

अपने लक्ष्य दीवारों पर लिखें, जो आपको संकल्प याद दिलाए : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह…

0

– विधानसभा अध्यक्ष ने 120 मेधावी विद्यार्थियों को विद्या विभूषण सम्मान 2026 से किया सम्मानित’
– बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 5-5 हजार रूपए प्रदान करने की घोषणा की’
– दृढ़ इच्छा शक्ति से अपना वादा निभाएं’
– दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं’
– नालंदा परिसर एक राष्ट्रीय स्तर की सर्वसुविधायुक्त लाईब्रेरी बनने से विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ’

राजनांदगांव: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने आज स्पीकर हाऊस राजनांदगांव में शैक्षणिक सत्र 2025-26 की बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 120 मेधावी विद्यार्थियों को विद्या विभूषण सम्मान 2026 से सम्मानित किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को 5-5 हजार रूपए प्रदान करने की घोषणा की।

विधानसभा अध्यक्ष ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि आज यहां सभी मेधावी बच्चों के चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक और अंदर की ताकत दिखाई दे रही है। उन्होनें सभी बच्चों से यह जानकारी ली कि वे अपने जीवन में क्या बनना चाहते है। उन्होंने कहा कि आप में से कोई डॉक्टर बनना चाहते है, कोई कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक या इंजीनियर बनाना चाहते हैं। आप जिस भी क्षेत्र में सेवा देना चाहते हैं, उस लक्ष्य को अपने घर के कमरे की दीवार पर लिखना कि आने वाले वर्षों में मैं इस पद पर जाना चाहता हूं। रोज पढ़ते समय यह दीवार आपको प्रेरणा प्रदान करेगी कि तुमने यह वादा किया था, अपने आप से एक संकल्प लिया था। तो उस वादे को पूरा करने की इच्छाशक्ति भी होनी चाहिए। दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है, जो तय कर लिया है, तो वह सपना अवश्य पूरा होगा। देश के पूर्व राष्ट्रपति एवं प्रसिद्ध वैज्ञानिक मिसाईल मैन डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम भी असफल हुए। इसलिए जीवन में कभी असफल होने पर निराश मत होना। बल्कि यह समझना कि सफलता के समीप हैं। उन्होंने कहा कि राजनांदगांव सभी की पढ़ाई के लिए नालंदा परिसर एक राष्ट्रीय स्तर की सर्वसुविधायुक्त लाईब्रेरी बनने जा रही है। जहां सभी प्रकार की किताबें उपलब्ध रहेंगी। आने वाले वर्षों में बच्चों को इस लाईब्रेरी का लाभ मिलेगा।

कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने सभी मेधावी बच्चों को सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह एक शुरूआत है। आगे आप अपने जीवन में प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अलग-अलग मकाम पर पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा, डॉक्टर, इंजीनियर,  अधिकारी अन्य किसी पद में सेवाएं देने के लिए पहले यह जरूर समझेंकि किस उद्देश्य एवं प्रेरणा के साथ यह कार्य करना चाहते हैं। गरीब एवं जरूरतमंद की सेवा करने की प्रेरणा के साथ यदि किसी सेवा में जाएंगे तो वह प्रेरक स्थिति आजीवन कायम रहती है। देश एवं समाज के विकास के लिए अपना योगदान दें और दूसरों के लिए कुछ करने का जज्बा हो तो यह भाव जिंदगी भर स्थायी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में जाने के लिए सिलेबस को ध्यान में रखते हुए थोड़ी किताबों को बार-बार पढ़ें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी सोशल मीडिया एवं नशे से दूर रहें तथा इसके साथ ही भटकाव की स्थिति नहीं होनी चाहिए। जो आप चाहते हैं, उसके लिए ईमानदारी बनाएं रखे और सही दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि ईमानदारी एक महंगा शौक है जिसे आप जीवन भर अपने साथ रखें। अपने जीवन में अनुशासन बनाएं रखें। अभिभावकों से कहा कि बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें और उनकी तुलना न करें। उनके साथ दोस्ती का व्यवहार रखें और उनका हाथ थाम कर चलें। कार्यक्रम को समाज सेवी श्री कोमल सिंह राजपूत ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर डॉ. भीवराम अम्बेडकर की स्मृति में कक्षा 12वीं में जिले में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले ग्राम सुरगी के विद्यार्थी गजेन्द्र साहू तथा कक्षा 10वीं में जिले में प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाली विद्यार्थी उपमा सिन्हा को 10-10 हजार रूपए सम्मान राशि प्रदान की गई। कार्यक्रम में महापौर श्री मधुसूदन यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण वैष्णव, अध्यक्ष जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक श्री सचिन बघेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती किरण साहू, राजगामी संपदा न्यास अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा साहू, श्री संतोष अग्रवाल, श्रीमती रेखा मेश्राम, श्री सुमीत उपाध्याय, श्री उत्तम साहू, जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रवास सिंह बघेल, जिला समन्वयक समग्र शिक्षा श्री सतीश ब्योहारे, छात्र युवा जन कल्याण संस्थान के संयोजक श्री नागेश यदु सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित थे।

OBC में क्रीमी लेयर के लिए आरक्षण की मांग करने वालों से SC ने पूछा- तुम्हारे माता-पिता IAS, फिर भी चाहिए कोटा?

0

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने कहा कि उम्मीदवार के माता-पिता आईएएस अधिकारी हैं, वे अच्छी स्थिति में हैं. अब सरकार ने इन लोगों को रिजर्वेशन से बाहर कर दिया तो ये लोग उस पर सवाल उठा रहे हैं.

देश में आरक्षण की सीमा और क्रीमी लेयर को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (22 मई, 2026) को ओबीसी आरक्षण और क्रीमी लेयर को लेकर सुनवाई में सवाल उठाया कि अगर उम्मीदवार के माता-पिता दोनों ही आईएएस अधिकारी हैं, तो उसे आरक्षण का लाभ क्यों मिलना चाहिए.

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइंया की बेंच ने कहा कि आरक्षण में आर्थिक के अलावा सामाजिक स्थिति भी देखी जानी चाहिए. ये टिप्पणियां जस्टिस बी वी नागरत्ना ने की हैं. याचिका में उस नियम पर सवाल उठाया गया था, जिसमें माता-पिता की नौकरी को बच्चों को क्रीमी लेयर श्रेणी में डालने का आधार बनाने को गलत बताया गया था.

कोर्ट ने कहा कि आईएएस अधिकारियों के बच्चों का आरक्षण मांगना सही नहीं लगता है. हालांकि, इन टिप्पणियों के बावजूद याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया. सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें बैकवर्ड क्लास के क्रीमी लेयर उम्मीदवारों के लिए रिजर्वेशन की मांग की गई है.

जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने इस दौरान बेहद अहम टिप्पणी की है. उन्होंने कहा, ‘उम्मीदवार के माता-पिता आईएएस अधिकारी हैं, सरकारी नौकरी में हैं. वे अच्छी स्थिति में हैं. अब सरकार ने इन लोगों को रिजर्वेशन से बाहर कर दिया तो ये लोग उस पर सवाल उठा रहे हैं.’

कोर्ट ने कहा, ‘शैक्षिक और आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक स्थिरता भी आती है. फिर भी बच्चों के लिए आरक्षण की मांग करेंगे तो इस तरह कभी हमें छुटकारा ही नहीं मिलेगा. हमें इस पर ध्यान देना होगा.’ मामले में पेश सीनियर एडवोकेट शशांक रतनू ने कहा कि जिन लोगों ने यह मुद्दा उठाया है, उन्हें सैलरी के आधार पर नहीं उनके सोशल स्टेटस के आधार पर रिजर्वेशन से बाहर किया गया है. उन्होंने गहन जांच की मांग करते हुए कहा है कि आर्थिक रूप से कमजोर सेक्शन (EWS) और क्रीमी लेयर के बीच अंतर करना जरूरी है. इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि ईडब्ल्यूएस में सामाजिक पिछड़ेपन नहीं सिर्फ आर्थिक पिछड़ेपन की बात कही गई है.

शशांक रतनू ने इस पर तर्क दिया कि क्रीमी लेयर के मामले में मानदंड ईडबल्यूएस की तुलना में ज्यादा उदार होने चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर दोनों सेक्शंस को एक तरह से ही देखा जाएगा तो इन दोनों में तो कोई अंतर ही नहीं होगा. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि संतुलन बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि भले ही कोई व्यक्ति शैक्षिक या आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ हो, लेकिन जब आरक्षण का लाभ उठाकर उसके माता-पिता एक निश्चित स्तर प्राप्त कर लेते हैं तो स्थिति बदल जाती है. इसके बाद कोर्ट ने नोटिस जारी करके संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है.

Weather Summer India: भारत के 97 शहर दुनिया में सबसे ज्यादा गर्म;नेपाल के तीन तो भारत के 97 शहर दुनिया में सबसे ज्यादा गर्म…

0

Summer Weather Report 2026: भारत समेत दुनिया के कई देश प्रचंड गर्मी से जूझ रहे हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि विश्व के 100 सबसे गर्म शहरों में 97 शहर भारत के हैं.

भारत के अधिकतर राज्यों में गर्मी की वजह से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. शुक्रवार दोपहर को आए आंकड़ों ने दुनिया को चौंकाया है. दुनियाभर के 100 सबसे गर्म शहरों में भारत के 97 शहर रहे. देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी हिस्सों में भीषण गर्मी की लहर ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली. इससे दोपहर को 45 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पारा चढ़ गया. AQI.in की मानें तो भारतीय समयानुसार दोपहर 2.50 बजे दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की लिस्ट में ज्यादातर भारतीय शहर ही थे. ओडिशा के बालांगीर में 48 डिग्री तापमान रहा. यह देश का सबसे गर्म शहर रहा.

नेपाल के तीन तो भारत के 97 शहर दुनिया में सबसे ज्यादा गर्म

इनके अलावा बिहार के सासाराम में 48 डिग्री, यूपी के वाराणसी में 47 डिग्री तापमान के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे. भारत के अलावा दुनिया के अन्य देशों जिनमें नेपाल के तीन शहर सबसे गर्म रहे. यहां धांगड़ी 23वें, नेपालगंज 34वें और लुम्बिनी सांस्कृतिक 76वें स्थान पर रहे. यहां तापमान 45 डिग्री से 46 डिग्री के बीच रहा.

भारत के गर्म शहरों में  मुजफ्फरनगर, अयोध्या, पटियाला, वारंगल, हरिद्वार, ग्वालियर, धनबाद, चंडीगढ़, आगरा, भरतपुर और सिंगरौली शामिल हैं. यहां करीबन 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा.

हीटस्ट्रोक से जुड़े 300 से ज्यादा मामले आए सामने

इधर, गर्मी बढ़ने की वजह से करीबन 300 संदिग्ध मामले सामने आए हैं. यह सारी बीमारियां गर्मी से जुड़ी हुई है. रॉयटर्स के मुताबिक राज्य के हेल्थ डिपार्टमेंट ने जानकारी दी कि मार्च की शुरुआत से मई के बीच आंध्र प्रदेश में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के 300 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आए हैं.

आंध्र प्रदेश में 1 मार्च से 19 मार्च के बीच हीट स्ट्रोक से जुड़े 325 संदिग्ध केस दर्ज किए गए हैं. इनमें एक तिहाई मामले मई की शुरुआत से ही सामने आए हैं. रिपोर्ट में जानकारी दी गई है कि लू एक मेडिकल इमरजेंसी है, यह शरीर गर्म ज्यादा हो जाने से होती है.

राज्यों के अधिकारियों ने लोगों को सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है. साथ ही चेतावनी दी है कि इन घंटों के दौरान लू और ज्यादा तापमान अपने चरम पर है. मौसम विभाग ने 22 मई से 27 मई के बीच दिल्ली और अन्य नॉर्थ इंडिया के बड़े हिस्सों में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति रहने का अनुमान लगाया है. इसके अलावा कई अस्पताल के हिस्सों में दस्त और डिहाइड्रेशन से पीड़ित मरीजों की लंबी कतारें लग गई हैं. पश्चिमी गुजरात में पानी की समस्या भी सामने आई है.

NEET paper leak: NEET-UG पेपर एजेंसी प्रमुख ने संसदीय समिति से कहा CBI की जांच जारी…

0

एनटीए प्रमुख अभिषेक सिंह ने सांसदों को बताया कि नीट यूजी का प्रश्नपत्र एनटीए सिस्टम के माध्यम से लीक नहीं हुआ था, और कहा कि सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की निगरानी में होने वाले नीट 2026 के एग्जाम लीक होने के बाद से इसकी गंभीरता से जांच जारी है। सीबीआई ने इस मामले में आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई की है, वहीं, एनटीए के डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह ने गुरुवार को संसद के कई सदस्यों को बताया कि NEET-UG का पेपर उनके सिस्टम से लीक नहीं हुआ था और कहा कि CBI मामले की जांच कर रही है।

सिंह ने यह दावा तब किया जब उनसे शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल मामलों की पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमिटी ने पूछताछ की। कई सांसदों ने NTA अधिकारियों से पूछा कि एजेंसी ने भविष्य में पेपर लीक को रोकने के लिए एग्जाम सिस्टम को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। पैनल ने शिक्षा सचिव विनीत जोशी समेत शिक्षा मंत्रालय के टॉप अधिकारियों को बुलाया था।

मीटिंग में बुलाए गए NTA अधिकारियों में चेयरपर्सन प्रदीप कुमार जोशी और डायरेक्टर जनरल अभिषेक सिंह शामिल थे। अधिकारियों ने एजेंसी में सुधार के लिए राधाकृष्णन रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर एक डिटेल्ड प्रेजेंटेशन दिया।

एनटीए की ओर से पेपर लीक नहीं हुआ

जानकारी के मुताबिक, जब सांसदों ने पूछा कि नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट) का पेपर कैसे लीक हुआ, तो सिंह ने दावा किया कि पेपर उनके सिस्टम से लीक नहीं हुआ था।

NTA DG ने आगे कहा कि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) इस मामले को देख रहा है।

कुछ विपक्षी MPs ने भी पैनल के सामने जांच रिपोर्ट पेश करने की मांग की; हालांकि, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ MPs ने इस मांग पर एतराज़ जताया और कहा कि CBI एक इंडिपेंडेंट बॉडी है और उसे अपना काम करने की आज़ादी मिलनी चाहिए।

सिंह ने NTA में सुधार के लिए राधाकृष्णन रिपोर्ट की सिफारिशों को कैसे लागू किया जाएगा, इस पर भी एक डिटेल्ड प्रेजेंटेशन दिया और कहा कि सुझाए गए शॉर्ट-टर्म उपायों में से लगभग 70% पहले ही लागू किए जा चुके हैं।

NTA अधिकारियों ने पैनल के सदस्यों को बताया कि वे एक फुलप्रूफ एग्जामिनेशन सिस्टम पक्का करने के लिए कदम उठा रहे हैं और एजेंसी एक पूरी रिव्यू कर रही है। उन्होंने कहा कि पेपर सेट करने और बांटने के सिस्टम में भरोसेमंद लोगों को शामिल किया जाना चाहिए। NTA अधिकारियों ने आगे कहा कि वे कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (CBT) के ज़रिए NEET एग्जाम कराने पर विचार कर रहे हैं।

MPs ने स्टाफ की कमी का मुद्दा उठाया और NTA से एजेंसी के अच्छे से काम करने और किसी भी पेपर लीक को रोकने के लिए खाली जगहों को भरने को कहा।

NTA अधिकारियों ने कमेटी के सदस्यों को बताया कि एजेंसी में लगभग 25% स्टाफ की कमी है और सभी खाली जगहों को भरने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

राधाकृष्णन कमेटी ने क्या सुझाव दिया?

राधाकृष्णन कमेटी ने एग्जामिनेशन सिस्टम में बड़े पैमाने पर बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसमें अंडरग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट के लिए एक जैसा फ्रेमवर्क, कंप्यूटर-अडैप्टिव एग्जाम की तरफ धीरे-धीरे बदलाव और NTA द्वारा एक पब्लिक टेस्टिंग प्लेटफॉर्म बनाने की सिफारिश की गई है।

अपने लंबे समय के सुधारों के हिस्से के तौर पर, एक्सपर्ट पैनल ने पारंपरिक पेन-एंड-पेपर एग्जाम से हटकर कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट की ओर जाने का सुझाव दिया है। इसने हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर मिनिस्ट्री के साथ मिलकर, कोशिशों की संख्या और उम्र की लिमिट के साथ मल्टी-स्टेज और मल्टी-सेशन एग्जाम शुरू करने की भी सिफारिश की है।

एग्जाम सिक्योरिटी और एफिशिएंसी को मजबूत करने के लिए, NTA एक ​​क्लाउड-इनेबल्ड डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सुरक्षित ऑपरेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन जैसी टेक्नोलॉजी को शामिल करने की योजना बना रहा है।

एजेंसी अपना खुद का एग्जामिनेशन सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम बनाकर और इंस्टीट्यूशनल पायलट रन करके बाहरी टेस्ट-डिलीवरी वेंडर्स पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी काम कर रही है।

इसके अलावा, NTA का इरादा एडवांस्ड एन्क्रिप्शन सिस्टम और मजबूत नेटवर्क-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल डिप्लॉय करने का है, साथ ही ETS एग्जामिनेशन मेथडोलॉजी से मिली जानकारी सहित ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित एक मॉडर्न टेस्टिंग मॉडल डेवलप करना है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में डीएमके कांग्रेस की हार के बाद दोनों दल में तलाक हो गया?

0

संसद में राष्ट्रीय मुद्दों पर साथ मिलकर काम करने के लिए राजी करने की संभावना तलाशनी शुरू कर दी। डीएमके कांग्रेस पर लगातार हमले कर रही है और उसे “पीठ में छुरा घोंपने वाली” कह रही है। डीएमके कुछ मुद्दों पर उसके साथ सहयोग करने के लिए तैयार हो सकती है।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में डीएमके कांग्रेस की हार के बाद दोनों दल में तलाक हो गया? कांग्रेस ने साथी एमके स्टालिन को छोड़ कर थलपति विजय के साथ सरकार बना ली और 59 साल बाद मंत्रिमंडल में शामिल हुए। क्या तमिलनाडु में

डीएमके -कांग्रेस के अलग होने से दिल्ली में एक नया राजनीतिक गलियारा पनपेगा? एनडीटीवी को सूत्रों से पता चला है कि सत्ताधारी भाजपा को डीएमके-कांग्रेस के विभाजन में संसद में अपनी संख्या बढ़ाने का अवसर दिख रहा है। पार्टी ने द्रविड़ पार्टी को संसद में राष्ट्रीय मुद्दों पर साथ मिलकर काम करने के लिए राजी करने की संभावना तलाशनी शुरू कर दी।

भाजपा की उम्मीदें क्यों बढ़ रही हैं?

तमिलनाडु में विजय के नेतृत्व वाली टीवीके का समर्थन करने के लिए कांग्रेस द्वारा अपने लंबे समय से चले आ रहे गठबंधन को तोड़ने के बाद से डीएमके का कांग्रेस से कड़वा मतभेद हो गया है। इसके बाद से डीएमके कांग्रेस पर लगातार हमले कर रही है और उसे “पीठ में छुरा घोंपने वाली” कह रही है।

पूर्व सहयोगी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए डीएमके ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में बैठने की नई व्यवस्था की मांग की है, क्योंकि पार्टी नहीं चाहती कि उसके सांसद सदन में कांग्रेस के साथ बैठें। सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया है कि इस घटनाक्रम से भाजपा को उम्मीद है कि डीएमके कुछ मुद्दों पर उसके साथ सहयोग करने के लिए तैयार हो सकती है।

डीएमके और एआईएडीएमके के छह दशक पुराने द्रविड़ एकाधिकार को तोड़ दिया

भाजपा, डीएमके की राजनीतिक कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है, जिसे विधानसभा चुनावों में एक नई पार्टी टीवीके ने करारी शिकस्त दी है। सुपरस्टार विजय की पार्टी ने डीएमके और एआईएडीएमके के छह दशक पुराने द्रविड़ एकाधिकार को तोड़ दिया है और राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। पुराने कामकाजी संबंधों को फिर से मजबूत करना असंभव नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि किसी क्षेत्रीय पार्टी के लिए राज्य और केंद्र दोनों में विपक्ष में रहना मुश्किल है। ऐसे में, भाजपा सूत्रों का मानना ​​है कि डीएमके को केंद्र के साथ मिलकर काम करने के लिए राजी करना आसान हो सकता है। डीएमके अतीत में भाजपा के साथ रही है।

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी, बाद में कांग्रेस गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया।

परिसीमन और सनातन धर्म से जुड़ी बाधाएं

डीएमके केंद्र सरकार की प्रस्तावित परिसीमन योजना की पुरजोर विरोधी रही है। उसने अपने पूरे विधानसभा चुनाव अभियान को “दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर भाजपा का हमला” बताते हुए केंद्रित किया। डीएमके सांसदों ने काले कपड़े का प्रदर्शन किया और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाईं। एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए इस मुद्दे पर अपना रुख नरम करना आसान नहीं होगा।

एक और अड़चन सनातन धर्म पर डीएमके का रुख है, जिसने लगातार उसे भाजपा के खिलाफ खड़ा किया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म के खिलाफ बार-बार की गई टिप्पणियों और इसके उन्मूलन के आह्वान ने लंबे समय से भाजपा और डीएमके के बीच टकराव पैदा किया है। दोनों पक्षों के लिए इस क्षेत्र में आगे बढ़ना मुश्किल होगा।

संख्या का खेल

भाजपा की उम्मीदें संसद में विशिष्ट मुद्दों पर डीएमके के समर्थन पर टिकी हैं, जहां वास्तविक संख्या ही मायने रखती है। संसद में परिसीमन मतदान के दौरान भाजपा विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी। संसद में NDA को दो-तिहाई बहुमत (362) से 70 सीटें कम हैं। लोकसभा में DMK के 22 सांसद भविष्य में बहुमत के इस आंकड़े के करीब पहुंच सकते हैं।

परिसीमन मतदान में NDA को 298 वोट मिले, जबकि इसके खिलाफ 230 वोट पड़े। मतदान के दौरान 528 सांसद उपस्थित थे। इसलिए NDA को दो-तिहाई बहुमत (352) से 54 सीटें कम रह गईं। DMK के 22 सांसदों ने विपक्ष के साथ मिलकर विधेयक के खिलाफ मतदान किया।

सूत्रों के अनुसार,

DMK के साथ नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD), जगन रेड्डी की YSRCP और के चंद्रशेखर राव की BRS जैसी पार्टियों के समान संबंध स्थापित करने की उम्मीद कर रही है, जहां वे NDA से बाहर रहते हुए केंद्र को मुद्दों पर आधारित समर्थन देती हैं।

एआईएडीएमके का विघटन

चुनाव परिणामों के बाद भाजपा की तमिलनाडु सहयोगी एआईएडीएमके में हुए विद्रोह ने भाजपा को इससे परे देखने के लिए मजबूर कर दिया है। पार्टी सूत्रों का मानना ​​है कि पार्टी टूटने के कगार पर है। और एआईएडीएमके के दोनों गुटों को अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए केंद्र (अर्थात भाजपा) के समर्थन की आवश्यकता होगी।

ऐसे में, अगर स्टालिन की पार्टी डीएमके के प्रति कोई रुचि दिखाती है, तो भाजपा के लिए डीएमके के करीब आना मुश्किल नहीं होगा। राष्ट्रपति चुनाव की गणना नए राष्ट्रपति का चुनाव अगले साल होना है। पश्चिम बंगाल और असम में बड़ी जीत के बाद भाजपा मजबूत होकर उभरी है, लेकिन संसद में दो-तिहाई बहुमत का अभाव पार्टी के रणनीतिकारों को परेशान करता रहता है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी राष्ट्रपति चुनाव के लिए डीएमके का समर्थन प्राप्त करने के अवसर तलाशेगी। सत्ताधारी पक्ष की संख्या बढ़ाने के अलावा, डीएमके द्वारा भाजपा को मुद्दों पर आधारित समर्थन देने से विपक्ष भी बिखरा हुआ दिखाई देगा। इससे भाजपा को एक अतिरिक्त सकारात्मक पहलू मिलेगा।

NCERT की किताब में न्यायपालिका के बारे में विवादित अध्याय का मामला…

0

NCERT की किताब में न्यायपालिका के बारे में विवादित अध्याय का मामला…

‘ब्लैकलिस्टेड’ शिक्षाविदों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने वापस लिया सरकारी संस्थानों से बाहर करने का आदेश’

तीनों शिक्षाविदों ने आवेदन दाखिल कर कोर्ट से कहा कि अध्याय लिखते समय उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी. उस अध्याय के लिए वह अकेले जिम्मेदार नहीं थे.

स्कूली किताब में न्यापालिका के बारे में विवादित अंश के लिए जिम्मेदार माने गए 3 शिक्षाविदों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने वह आदेश वापस ले लिया है जिसमें उन्हें सरकारी अनुदान वाली किसी संस्था में काम न देने को कहा गया था. मिशेल डेनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना ने मामले पर सफाई देते हुए माफीनामा पेश किया था. इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

NCERT की कक्षा 8 की एक किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ पर लिखे गए अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. 26 फरवरी को कोर्ट ने किताब पर रोक लगा दी थी. वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध किताब की पीडीएफ फाइल को भी हटाने का आदेश दिया था. 11 मार्च को कोर्ट ने विवादित बातें लिखने के जिम्मेदार शिक्षाविदों को केंद्र या राज्य सरकार से जुड़े किसी भी संस्थान में काम न देने का आदेश दिया था.

तीनों शिक्षाविदों ने आवेदन दाखिल कर कोर्ट से कहा कि अध्याय लिखते समय उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी. उस अध्याय के लिए वह अकेले जिम्मेदार नहीं थे. उनकी तरफ से पेश वरिष्ठ वकीलों श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायण और जे साईं दीपक की बातें सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने अपना आदेश वापस ले लिया.

कोर्ट ने अपने पिछले आदेश पर स्पष्टता देते हुए कहा कि उसकी नाराजगी बच्चों को अवांछित बातें पढ़ाए जाने को लेकर थी. शिक्षाविदों के जवाब से वह संतुष्ट हैं. केंद्र और राज्य सरकारें इन लोगों को जरूरत के मुताबिक काम देने पर विचार कर सकती हैं. कोर्ट की तरफ से इस पर अब कोई रोक नहीं है. हालांकि, केंद्र ने कहा कि उसने इन लोगों को स्कूली शिक्षा से जुड़ा काम न देने का फैसला किया है.

केंद्र के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनकी जानकारी में कुछ और किताबों में न्यायपालिका के बारे में लिखी गई अवांछित बातें आई हैं. कम उम्र के बच्चों में व्यवस्था के प्रति नकारात्मक छवि नहीं बननी चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इन बातों को जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने रखें. इस कमेटी के गठन न्यायपालिका को लेकर लिखी गई बातों की समीक्षा के लिए किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा के अलावा इस 3 सदस्यीय कमेटी में वरिष्ठ वकील के के वेणुगोपाल और गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह भी शामिल हैं.

पेट्रोल-डीजल की कमी बढ़ाएगी महंगाई? रुपये पर दबाव से आयात और महंगा…

0

होर्मुज के आसपास वैश्विक तनाव की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है. रुपये पर दबाव से आयात और महंगा हो गया है.

पेट्रोल-डीजल के दाम पहले ही आसमान छू रहे हैं और अब उसका असर सीधे आपके घर तक पहुंचने वाले सामान पर भी दिखने लगा है. देशभर के ट्रांसपोर्टरों के संगठन AITWA यानी ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने माल ढुलाई के भाड़े में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है.

ट्रक का भाड़ा बढ़ने की वजह से सब्जी, अनाज, दवाइयों समेत वो हर चीज महंगी होगी जो एक जगह से दूसरी जगह ट्रक में जाती है. डीजल की महंगाई ने एक डोमिनो इफेक्ट शुरू किया है और उसकी सबसे ज्यादा चोट उस आम आदमी पर पड़ेगी जो पहले से ही बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है.

एबीपी न्यूज़ ने जब जमीन पर जाकर हालात जाने तो तस्वीर और भी परेशान करने वाली निकली. संगठन ने Fuel Adjustment Factor यानी FAF लागू करने का फैसला किया है जो 20 मई 2026 से लागू हो चुका है. फॉर्मूला सीधा है 15 मई 2026 की डीजल कीमत को आधार मानते हुए आगे जब भी डीजल एक रुपये प्रति लीटर बढ़ेगा फ्रेट रेट में 0.65 फीसदी की बढ़ोतरी अपने आप जुड़ जाएगी.

AITWA का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में ट्रांसपोर्ट की लागत हर तरफ से बढ़ी है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास वैश्विक तनाव की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है. रुपये पर दबाव से आयात और महंगा हो गया है.

पांच फीसदी बढ़े टायर के दाम

AdBlue यानी DEF की कीमतें पिछले दो महीनों में करीब दोगुनी हो चुकी हैं. टायर के दाम पांच फीसदी चढ़ चुके हैं और 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में टोल भी बढ़ा दिया गया है. संगठन के मुताबिक ट्रांसपोर्ट की कुल लागत में डीजल का हिस्सा करीब 65 फीसदी होता है इसलिए यह कदम मजबूरी में उठाना पड़ा.

एबीपी न्यूज़ ने जब ड्राइवरों से बात की तो सामने आया कि भाड़ा नहीं बढ़ेगा तो घर कैसे चलाएंगे, सब अपना घाटा दूर करेंगे तो लोगों को आखिर में महंगाई चुकानी ही है.

पेट्रोलडीजल की शुरू हुई किल्लत

साथ ही ड्राइवर बता रहे है कि पंपों पर डीजल की किल्लत भी शुरू हो गई है. ड्राइवरों ने बताया कि कई जगह एक बार में 100 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं दिया जा रहा है जिससे लंबे रूट पर चलने वाले ट्रकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. इसका सीधा मतलब है कि ट्रक देर से पहुंचेंगे लागत बढ़ेगी और वह बोझ आखिरकार आम खरीदार पर ही पड़ेगा. हालात यहीं नहीं रुकते. ट्रांसपोर्टरों ने यह भी बताया कि पहले से ही माल के ऑर्डर कम हो गए हैं. मांग घटी है लेकिन लागत बढ़ी है यह दोहरी मार इंडस्ट्री को अंदर से खोखला कर रही है. सड़क परिवहन भारत की सप्लाई चेन की रीढ़ है और अब वो भी मुश्किल हालात से गुज़र रहा है.

India Power Demand: भीषण गर्मी से उबल रहा देश! बिजली की खपत ने तोड़े सारे रिकॉर्ड!

0

India Power Demand: भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ Heatwave के थपेड़ों के बीच भारत इस समय एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा है। देश इस समय भीषण गर्मी और खतरनाक हीटवेव की चपेट में है। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है।

हालात ऐसे हैं कि भारत के कई शहर दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में शामिल हो गए हैं। आसमान से बरसती आग और बढ़ते तापमान के कारण देश में बिजली की खपत ने इतिहास के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।

मंगलवार, 19 मई 2026 को देश की पीक पावर डिमांड (Peak Power Demand) 260 गीगावाट (GW) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई, जिसने देश के ऊर्जा क्षेत्र पर भारी दबाव बना दिया है।

India Peak Power Demand 260 GW 2026: राष्ट्रीय स्तर पर बिजली की मांग का महा-रिकॉर्ड सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार, 19 मई को दिन के समय देश की पीक पावर डिमांड 260 गीगावाट (GW) दर्ज की गई। इसने पिछले महीने यानी 25 अप्रैल 2026 को दर्ज किए गए 256.11 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। ऊर्जा मंत्रालय ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस साल भीषण गर्मी के चलते गर्मियों में पीक पावर डिमांड 270 गीगावाट (GW) तक पहुंच सकती है।

मौजूदा रुख को देखकर लगता है कि यह अनुमान जल्द ही सच साबित होने वाला है। पिछले साल से तुलना करें तो जून 2025 में पीक पावर डिमांड 242.77 गीगावाट थी, जबकि मई 2024 में यह 250 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी। इस साल मई में ही यह 260 गीगावाट पार कर चुकी है।

Delhi Electricity Demand SLDC: दिल्ली-NCR में दो साल का सबसे गर्म दिन; बिजली मांग 7,776 MW पार देश की राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर (NCR) के इलाकों में पिछले दो सालों का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया।

दिल्ली के रिज (Ridge) क्षेत्र में अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो राजधानी का सबसे गर्म इलाका रहा। वहीं सफदरजंग और पालम मौसम केंद्रों पर पारा 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

दिल्ली में बिजली का नया रिकॉर्ड: स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर (SLDC) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार दोपहर 3:30 बजे दिल्ली की बिजली मांग 7,776 मेगावाट (MW) के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इससे ठीक एक दिन पहले सोमवार को यह मांग 7,542 मेगावाट थी, जो रात को बढ़कर 7,600 मेगावाट हुई और अगले ही दिन दोपहर में इसने 7,700 मेगावाट की सीमा को भी पार कर दिया।

क्यों बढ़ रही है इतनी तेजी से बिजली की खपत? विशेषज्ञों के अनुसार-लगातार बढ़ते तापमान के कारण AC और कूलर का उपयोग कई गुना बढ़ गया है जिससे शहरी इलाकों में Urban Heat Island से रात में भी तापमान कम नहीं हो रहा। लंबे समय तक चलने वाली हीटवेव के कारण घरेलू और व्यावसायिक बिजली खपत दोनों बढ़ी हैं वहीं इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है। इसी वजह से पावर ग्रिड पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है।

क्या देश में बढ़ेगा बिजली संकट का खतरा ? केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने अनुमान जताया है कि इस गर्मी में देश की अधिकतम बिजली मांग 270 GW तक पहुंच सकती है। हालांकि सरकार का दावा है कि पर्याप्त कोयला स्टॉक और बिजली उत्पादन व्यवस्था के चलते फिलहाल बड़े बिजली संकट की आशंका नहीं है। फिर भी कई राज्यों में लोकल फॉल्ट, ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड और मेंटेनेंस के कारण बिजली कटौती की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

दुनिया के टॉप-100 सबसे गर्म शहरों में भारत का दबदबा कायम रीयल-टाइम ग्लोबल टेम्परेचर रैंकिंग (AQI.in) के अनुसार, दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की सूची में अभी भी अधिकांश शहर भारत के ही बने हुए हैं।

यूपी का बांदा सबसे गर्म: उत्तर प्रदेश का बांदा जिला 48.2 डिग्री सेल्सियस के साथ इस सीजन के सबसे उच्चतम स्तर पर रहा। इसके अलावा महाराष्ट्र के अमरावती में पारा 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

46 डिग्री का क्लस्टर: कल दोपहर तक देश के कई प्रमुख शहर 46°C के ब्रैकेट में एक साथ शामिल दिखे, जिनमें बांदा, बठिंडा, पठानकोट, बरेली, झांसी, कैथल और हरिद्वार जैसे बड़े नाम हैं।

इस लिस्ट में सबसे आखिरी पायदान पर मौजूद शहर का तापमान भी झुलसा देने वाला 44°C दर्ज किया गया। IMD का डराने वाला अलर्ट-अभी और तपेगा देश भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी ताजा चेतावनी में कहा है कि देश के उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी हिस्सों में ‘गंभीर हीटवेव’ (Severe Heatwave) की स्थिति अगले कुछ दिनों तक लगातार जारी रहेगी।

राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश और विदर्भ में इस हफ्ते लू से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है। तापमान में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने न केवल आम नागरिकों के स्वास्थ्य को संकट में डाला है, बल्कि देश के पावर ग्रिड (Power Grid) पर भी भारी दबाव बना दिया है। ऊर्जा मंत्रालय और डिस्कॉम (Discoms) कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिना किसी ट्रिपिंग या बड़े पावर कट के इस भारी मांग की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

School Closed Tomorrow: कल स्कूल खुले हैं या बंद? दिल्ली-NCR से UP-राजस्थान तक, क्या है नया अपडेट…

0

School Closed Tomorrow: देशभर में पड़ रही तेज गर्मी अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगी है। सुबह से ही तपती धूप और गर्म हवाओं ने हालात मुश्किल कर दिए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और स्कूल जाने वाले छात्रों को हो रही है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर लगातार यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या आने वाले दिनों में स्कूल बंद रहेंगे या छुट्टियां बढ़ाई जाएंगी। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में अभिभावक स्कूलों से जुड़े नए आदेशों का इंतजार कर रहे हैं। कई जगहों पर प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया है, जबकि कुछ राज्यों में गर्मी की छुट्टियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। बढ़ते तापमान को देखते हुए शिक्षा विभाग भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ी चिंता

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे इलाकों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के करीब बना हुआ है। तेज धूप और लू के कारण बच्चों की तबीयत खराब होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसी को देखते हुए कई स्कूलों ने सुबह की शिफ्ट का समय बदल दिया है। शिक्षा विभाग की तरफ से पहले ही संकेत दिए गए थे कि मई के दूसरे या तीसरे सप्ताह से ज्यादातर स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू कर दिए जाएंगे।

यूपी में जल्द छुट्टियों के संकेत

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गर्म हवाओं को लेकर रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। हालात को देखते हुए प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में तय समय से पहले छुट्टियां घोषित करने पर काम चल रहा है। कई जिलों में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि दोपहर की कक्षाएं न चलें और बच्चों को तेज धूप से बचाया जाए।

जल्द ही स्कूलों की तरफ से अभिभावकों को नई जानकारी भेजी जा सकती है।

बिहार में बदला स्कूलों का समय

बिहार में भी भीषण गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। पटना समेत कई जिलों में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबरों के बाद प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए। कई जिलों में आदेश जारी कर कहा गया कि स्कूल सुबह 10:30 या 11 बजे के बाद न चलें। कुछ जगहों पर गर्मी की छुट्टियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं ताकि बच्चों को राहत मिल सके।

राजस्थान में लंबी छुट्टियां

राजस्थान इस समय सबसे ज्यादा गर्म राज्यों में शामिल है। कई शहरों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने सरकारी और निजी स्कूलों में मई के मध्य से ही लंबी गर्मी की छुट्टियों का ऐलान कर दिया है। फिलहाल कुछ स्कूलों में केवल प्रशासनिक काम या बड़ी कक्षाओं की तैयारी से जुड़े कार्य ही किए जा रहे हैं। सामान्य छात्रों के लिए अधिकांश स्कूल बंद हैं।

अफवाहों से बचने की सलाह स्कूल बंद होने और छुट्टियों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की बातें वायरल हो रही हैं। ऐसे में अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे केवल स्कूल प्रशासन या आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें। ज्यादातर स्कूल व्हाट्सएप ग्रुप और मैसेज के जरिए तुरंत जानकारी साझा कर रहे हैं, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न हो।

Delhi Women Loan Scheme: बिना गारंटी ₹10 करोड़ तक का लोन! दिल्ली सरकार का फैसला बदलेगी महिला कारोबार की तस्वीर…

0

Delhi Women Startup Loan Scheme: दिल्ली की महिलाओं के लिए सरकार ने ऐसा फैसला लिया है, जो आने वाले समय में राजधानी के स्टार्टअप इकोसिस्टम की दिशा बदल सकता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ऐलान किया है कि अब महिलाओं की अगुवाई वाले स्टार्टअप और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को बिना किसी गारंटी के 10 करोड़ रुपये तक का लोन दिया जाएगा। खास बात यह है कि इस कर्ज की गारंटी खुद दिल्ली सरकार लेगी।

सरकार का दावा है कि इस योजना का मकसद महिलाओं को सिर्फ छोटे स्तर तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें बड़े बिजनेस मॉडल और ब्रांड बनाने के लिए तैयार करना है। यही वजह है कि इसे दिल्ली की महिला उद्यमियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक पहल माना जा रहा है।

महिलाओं को बिजनेस में बड़ी ताकत देने की तैयारी (Women Startup Empowerment Plan) मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रोहिणी में आयोजित दो दिवसीय ‘मेगा स्वयं सहायता समूह मेला-2026’ के उद्घाटन के दौरान इस योजना की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। सीएम के मुताबिक कई महिलाएं अच्छा काम करना चाहती हैं, लेकिन बैंक गारंटी और फंडिंग की शर्तों की वजह से आगे नहीं बढ़ पातीं। नई योजना इसी समस्या को खत्म करने के लिए लाई गई है। अब महिला स्टार्टअप्स और एसएचजी को बड़े स्तर पर कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी जुटाने में आसानी होगी।

सरकार खुद बनेगी गारंटर (Government Will Act As Guarantor) इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यही है कि लोन लेने के लिए महिलाओं को निजी संपत्ति गिरवी रखने या किसी गारंटर की जरूरत नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में दिल्ली सरकार खुद गारंटी देगी। आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाओं के बिजनेस में सबसे बड़ी बाधा शुरुआती पूंजी और बैंकिंग सिस्टम का दबाव होता है। ऐसे में सरकारी गारंटी वाला मॉडल महिला उद्यमिता को नई रफ्तार दे सकता है।

‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की कोशिश (Vocal For Local Push) रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ अभियान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर फोकस कर रही है। इसी के तहत महिलाओं द्वारा तैयार किए गए स्वदेशी उत्पादों को अब मॉल और बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में भी जगह दिलाई जाएगी। यानी जो महिलाएं अभी तक छोटे मेलों या लोकल बाजारों तक सीमित थीं, उन्हें अब बड़े ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

मेगा एसएचजी मेले में दिखा महिला कारोबार का दम (SHG Fair Showcases Women Entrepreneurs) रोहिणी में आयोजित इस मेले में करीब 24 स्वयं सहायता समूहों ने हिस्सा लिया।

यहां महिलाओं ने हस्तशिल्प, खादी, क्रोशिया वर्क, घरेलू सामान, फूड प्रोडक्ट्स और कई तरह के हैंडमेड आइटम प्रदर्शित किए। सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजन सिर्फ बिक्री का मंच नहीं होते, बल्कि छोटे कारोबारों को पहचान देने का माध्यम भी बनते हैं। यही वजह है कि दिल्ली सरकार अब एसएचजी नेटवर्क को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

क्यों अहम माना जा रहा है यह फैसला?

(Why This Decision Matters) विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में महिला उद्यमियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन फंडिंग तक पहुंच अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। बैंक अक्सर बड़ी राशि के लिए गारंटी मांगते हैं, जिससे छोटे और नए बिजनेस पीछे रह जाते हैं। दिल्ली सरकार की यह पहल महिला स्टार्टअप्स को सीधे बड़े स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का मौका दे सकती है। अगर योजना सही तरीके से लागू हुई, तो आने वाले वर्षों में राजधानी में महिला-नेतृत्व वाले कारोबारों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।