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एलएंडटी ने दुबई एयरपोर्ट पर एपीएम सिस्टम विकसित करने के लिए जीता ऑर्डर…

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देश की दिग्गज इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) को दुबई के अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण में ऑटोमोटेड पीपल मूवल (एपीएम) सिस्टम डिजाइन और विकसित करने के लिए 5,000 करोड़ रुपए का ऑर्डर मिला है।

यह जानकारी कंपनी की ओर से गुरुवार को दी गई।

कंपनी ने बताया कि यह ऑर्डर उसके ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर बिजनेस को मिला है। साथ ही, कहा कि उसने यह ऑर्डर जापान की मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज (एमएचआई) के साथ मिलकर एक कंसोर्टियम में हासिल किया है। इसमें एलएंडटी पूरी तरह से इंटीग्रेटेड एपीएम सिस्टम की टर्नकी डिलीवरी के लिए जिम्मेदार है, जिसमें कंस्ट्रक्शन, आपूर्ति, टेस्टिंग, कमीशनिंग और ऑपरेशन के लिए तैयार करना शामिल है।

ऑटोमेटेड पीपल मूवर एक ड्राइवर-लेस ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल यात्रियों को एयरपोर्ट टर्मिनल और दूसरी सुविधाओं के बीच लाने-ले जाने के लिए किया जाता है।

डिजाइन-एंड-बिल्ड कॉन्ट्रैक्ट के तहत, एलएंडटी मुख्य एपीएम इंफ्रास्ट्रक्चर और सिस्टम के डिजाइन, खरीद, डिलीवरी और इंटीग्रेशन का काम करेगा। इसमें गाइडवे, डीसी ट्रैक्शन सबस्टेशन, पावर डिस्ट्रीब्यूशन, सिग्नलिंग और टेलीकम्युनिकेशन, ऑनबोर्ड कम्युनिकेशन सिस्टम, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर और डिपो इक्विपमेंट शामिल हैं।

एलएंडटी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को दुबई एविएशन सिटी कॉर्पोरेशन विकसित कर रहा है और इसे दुबई एविएशन इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स के जरिए लागू किया जा रहा है।

कंपनी ने कहा कि यह एयरपोर्ट के लंबे समय के, कई चरणों वाले विस्तार प्रोग्राम का एक अहम हिस्सा है।

एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया है कि पूरी तरह से डेवलप होने के बाद, अल मकतूम इंटरनेशनल एयरपोर्ट के दुनिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बनने की उम्मीद है, जिसकी सालाना क्षमता 26 करोड़ यात्री और 1.2 करोड़ टन माल ढोने की होगी।

एलएंडटी में ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर के एग्जीक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट और हेड, रामकुमार एस ने कहा कि यह प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड एपीएम रेल सिस्टम को लागू करने में कंपनी की काबिलियत को दिखाता है।

उनके अनुसार, एमएचआई के एपीएम सिस्टम और एलएंडटीके इंटीग्रेटेड सिस्टम के अनुभव का मेल – जिसे कंपनी की इंजीनियरिंग डिज़ाइन काबिलियत का भी साथ मिलेगा – सुरक्षा और क्वालिटी पर खास ध्यान देते हुए काम को पूरा करने में मदद करेगा।

भारत-जापान के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर सहमति, रक्षा मंत्रियों ने समझौते पर किए हस्ताक्षर…

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भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए रक्षा सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने 20 अगस्त को नई दिल्ली में इसके लिए एक द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक में दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग पर व्यवस्था संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आगे के सहयोग के लिए ढांचा उपलब्ध कराएगा। समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। समझौते के तहत जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स और भारतीय नौसेना के बीच सहयोग मजबूत होगा, जिसमें समुद्री क्षेत्र की जानकारी साझा करना शामिल है।

दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी हिंद-प्रशांत में शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रमुख आधार हैं। दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा, नौसेना सहयोग, रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी, सैन्य अभ्यास तथा रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने जुलाई 2026 में दोनों देशों के नेताओं की ओर से जारी संयुक्त बयान को याद किया।

उन्होंने मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा सहयोग और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों रक्षा मंत्रियों ने मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति पर एक-दूसरे के आकलन साझा करने को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता और सुरक्षा में बाधा डालने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। दोनों ने बल या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास का भी विरोध किया। इसके अलावा खोज एवं बचाव तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।

दोनों पक्ष समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाजों और सैन्य इकाइयों की पारस्परिक यात्राएं बढ़ाएंगे। संयुक्त अभ्यास, सैन्यकर्मियों और विशेषज्ञों का आदान-प्रदान भी होगा। बंदरगाहों तथा रखरखाव और मरम्मत सुविधाओं के इस्तेमाल के लिए भी सहयोग बढ़ाया जाएगा। नौसैनिक जहाज निर्माण में सहयोग की संभावना को भी बढ़ाया जाएगा। दोनों मंत्रियों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। उन्होंने समुद्री बारूदी सुरंगों से निपटने की क्षमता बढ़ाने में एक-दूसरे की विशेषज्ञता का लाभ उठाने की बात कही।

दोनों पक्षों ने नौसैनिक जहाजों के संयुक्त विकास और डिजाइन की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति जताई है। इसमें जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किया जाएगा। भारत व जापान ने रक्षा जहाज निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाने पर जोर दिया। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत की उत्पादन क्षमता के इस्तेमाल पर भी चर्चा आगे बढ़ाई जाएगी। दोनों पक्ष निकट भविष्य में जहाज मरम्मत सुविधाओं के पारस्परिक इस्तेमाल के लिए व्यवस्था को अंतिम रूप देने पर भी सहमत हुए हैं।

दोनों मंत्रियों ने भारत-जापान के बीच लगातार बढ़ रहे सैन्य अभ्यासों का स्वागत किया। इसके तहत ‘धर्म गार्जियन’ और ‘जेमेक्स’ जैसे युद्धाभ्यासों का विस्तार किया जाएगा। इस साल होने वाले भारत-जापान वायुसेना अभ्यास ‘वीर गार्जियन 26’ की तैयारियों में हुई प्रगति का भी दोनों ने स्वागत किया है। इस अभ्यास में पहली बार जापान की वायु आत्मरक्षा सेना के लड़ाकू विमान भारत आएंगे और अभ्यास में हिस्सा लेंगे।

दोनों देशों ने सैन्य अभ्यासों को और जटिल बनाने, मानवरहित प्रणालियों को शामिल करने और अवसर मिलने पर कम समय में संयुक्त अभ्यास करने पर भी सहमति जताई है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए विशेष अभियान बलों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति बनी है। भारत में एकीकृत थिएटर कमान स्थापित होने के बाद जापान के साथ इस क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं भी तलाशने पर सहमति बनी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जापान की ओर से रक्षा उपकरण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ढांचे की हालिया समीक्षा का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि जापान हिंद-प्रशांत और पूरी दुनिया में शांति एवं स्थिरता में आगे भी योगदान देगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी को और मजबूत करने की उम्मीद भी जताई।

‘वंदे मातरम’ पर कांग्रेस के रुख को लेकर गिरिराज सिंह का हमला…

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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ दो पद गाने के कांग्रेस के फैसले पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कांग्रेस पर भारत विरोधी रवैया अपनाने और मुस्लिम लीग के दबाव में काम करने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा।

 गिरिराज सिंह ने 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए ‘वंदे मातरम’ गायन के वायरल वीडियो का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “15 अगस्त को कांग्रेस दफ्तर में ‘वंदे मातरम’ के पूरे गायन के दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के चेहरे देखिए। ऐसा लग रहा था जैसे कोई उन्हें ज़हर पिला रहा हो।”

गिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। उन्होंने कहा, “सबने 15 अगस्त को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खड़गे की हरकतों को छिपाने की कोशिश की, लेकिन असलियत सामने आ गई है और यह भारत के विरोध में सामने आई है। आखिर यह कांग्रेस गांधी की कांग्रेस नहीं है। यह सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कांग्रेस है।”

भाजपा नेता ने कहा, “यह सिर्फ वंदे मातरम का विरोध नहीं है, बल्कि हमारे क्रांतिकारियों के खिलाफ भी है। यह मुस्लिम लीग वाली कांग्रेस बन गई है। यह सब मुस्लिम लीग के दबाव में हो रहा है। पिछले 12 सालों में राहुल गांधी के बयानों पर नजर डालें। उनमें से कोई भी भारत के पक्ष में नहीं है।”

उन्होंने कहा, “सोनिया गांधी ने शादी के 15 साल तक भारतीय नागरिकता नहीं ले सकी, तो उनको भारत से प्यार कैसे हो सकता है? राहुल गांधी अभी भी दोहरी नागरिकता के मामले में कोर्ट में फंसे हुए हैं।”

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के बयान कि सरकार ने मुसलमानों के प्रति नफरत की वजह से ‘वंदे मातरम’ का पूरा पाठ अनिवार्य किया, पर गिरिराज सिंह ने करारा जवाब दिया और कहा, “वह एक कठपुतली हैं। वह राहुल के बड़े तोते हैं। राहुल गांधी उन्हें जो सिखाते हैं, वह वही कहते हैं।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘वंदे मातरम’ गाने के बारे में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया…

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ‘वंदे मातरम’ गाने के बारे में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

कांग्रेस के इस फ़ैसले को “राष्ट्र-विरोधी” बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दे रही है।”


तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में बोलते हुए, शाह ने कहा कि CWC ने 1937 के एक प्रस्ताव को आधार बनाकर ‘वंदे मातरम’ के केवल दो पद गाने का फ़ैसला किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में ‘वंदे मातरम’ को बांटने का फ़ैसला मुसलमानों को खुश करने के लिए लिया गया था और इसी ने देश के बंटवारे की नींव रखी थी।

गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने के लिए कांग्रेस की उस गलती को सुधारा है और इसे कानूनी आधार भी दिया है। शाह के अनुसार, कांग्रेस का मौजूदा फ़ैसला उसकी तुष्टिकरण की नीति को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने न केवल बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना का अपमान किया है, बल्कि उन लाखों लोगों का भी अपमान किया है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।

अमित शाह ने कहा कि एक तरफ़ तो कांग्रेस 1937 के प्रस्ताव को लागू कर रही है, वहीं दूसरी तरफ़ वह संसद द्वारा बनाए गए कानून को नकार रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने आगे कहा, “देश ने ‘वंदे मातरम’ को दो हिस्सों में बंटने देकर गलती की थी, और हमें इसके नतीजे भुगतने पड़े हैं।” शाह ने लोगों से अपील की कि वे कांग्रेस के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ एकजुट हों। उन्होंने कहा कि BJP इस फ़ैसले की निंदा करती है और देश में तुष्टिकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

‘वंदे मातरम’ पर CWC की बैठक में क्या हुआ?

19 अगस्त को कांग्रेस ने घोषणा की कि वह ‘वंदे मातरम’ पर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और उस समय के अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा 1937 में लिए गए फ़ैसले का सख्ती से पालन करेगी; नतीजतन, पार्टी कार्यकर्ता राष्ट्रगीत के केवल दो पद ही गाएंगे। इस मुद्दे पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) – जो पार्टी की सबसे बड़ी नीति-निर्धारक संस्था है – की बैठक में चर्चा हुई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 1937 के CWC प्रस्ताव के कुछ हिस्से पढ़कर सुनाए। जाने-माने नेताओं की मौजूदगी में पास हुए इस प्रस्ताव में तय किया गया था कि *वंदे मातरम* के सिर्फ़ शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे।

वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा,

वंदे मातरम पर प्रस्ताव 1937 में पास हुआ था; उस बैठक में उस दौर के बड़े नेता – जिनमें महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, गोविंद वल्लभ पंत, राजगोपालाचारी और आचार्य नरेंद्र देव शामिल थे – मौजूद थे।” उन्होंने आगे कहा कि यह प्रस्ताव रवींद्रनाथ टैगोर से सलाह-मशविरा करने के बाद ही अपनाया गया था।

वित्त वर्ष 2031 तक 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को करना होगा व्यापक संरचनात्मक बदलाव…

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वित्त वर्ष 2031 तक 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को करना होगा व्यापक संरचनात्मक बदलाव**

वाणिज्य मंत्रालय अधिकारी**

भारत को वित्त वर्ष 2030-31 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करने के लिए अपने विनिर्माण और व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन करने होंगे।

वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने गुरुवार को कहा कि केवल छोटे-मोटे सुधारों से यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता, बल्कि उत्पादन, आपूर्ति शृंखला और निर्यात क्षमता में बड़े स्तर पर बदलाव आवश्यक होंगे।

सीआईआई मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए यशवीर सिंह ने कहा कि भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 863 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि वर्ष 2014-15 में यह 468 अरब डॉलर था। यह उल्लेखनीय उपलब्धि है, लेकिन 2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए वर्तमान गति को दोगुने से अधिक करना होगा।

उन्होंने कहा, “2030 तक 2 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए हमें अपनी मौजूदा प्रगति से कहीं अधिक तेजी लानी होगी। यह केवल क्रमिक सुधारों से संभव नहीं होगा, बल्कि इसके लिए संरचनात्मक परिवर्तन आवश्यक हैं।”

यशवीर सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर चर्चा में रहने वाली ‘चीन प्लस वन’ रणनीति को केवल चीन पर निर्भरता कम करने के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत को खुद को एक ऐसे विश्वसनीय, पारदर्शी और मजबूत विनिर्माण साझेदार के रूप में स्थापित करना होगा, जो वैश्विक कंपनियों को भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला उपलब्ध करा सके।

उन्होंने कहा, “हमें केवल ‘चीन प्लस वन’ नहीं बनना है। हमें भारत बनना है, एक विश्वसनीय भागीदार, एक मजबूत निर्माता और वैश्विक विकास का अगला बड़ा इंजन।”

सिंह ने कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है। व्यापार अब केवल आर्थिक गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि कई देशों द्वारा इसे भू-राजनीतिक रणनीति के एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के हालिया घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली चुनौतियों का सामना कर रही है। डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में मतभेद और उसके अपीलीय निकाय की लंबे समय से जारी निष्क्रियता इस बदलते परिदृश्य के उदाहरण हैं।

उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत ‘सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र’ व्यवस्था भी अब दबाव में है। पारस्परिक शुल्क, एकतरफा प्रतिबंध और सुरक्षा संबंधी अपवादों के विस्तार ने पारंपरिक व्यापार ढांचे को प्रभावित किया है।

यशवीर सिंह ने कहा, “महत्वपूर्ण खनिजों के निर्यात प्रतिबंधों का रणनीतिक हथियार के रूप में उपयोग किया जा रहा है। प्रौद्योगिकी तक पहुंच को सीमित करने के लिए कृत्रिम बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। व्यापार अब केवल आर्थिक साधन नहीं रहा, बल्कि भू-राजनीतिक नीति का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।”

उन्होंने बताया कि वैश्विक विनिर्माण और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं का अत्यधिक केंद्रीकरण अब आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चिंता बन चुका है। वर्ष 1990 में वैश्विक विनिर्माण मूल्यवर्धन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 3 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2024 में करीब 28 प्रतिशत हो गई। इसके अलावा दुर्लभ मृदा तत्वों, ग्रेफाइट और मैग्नीशियम जैसे कई महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और परिशोधन में भी चीन का मजबूत प्रभुत्व है।

महंगी हुई चीनी! 40 से बढ़कर 60 रुपये किलो पहुंचा भाव…

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चीनी की कीमतें एक बार फिर बढ़ गई हैं आज इसकी कीमत ₹60 के पार पहुँच गई है। इसने आम आदमी की जेब पर भारी असर डाला है।

त्योहारों के मौसम में, उस चीज़ की कीमत तेज़ी से बढ़ रही है जो हमारी मिठाइयों में मिठास लाती है।

कीमतें कितनी बढ़ी हैं?

सिर्फ़ 20 दिनों में चीनी की कीमतें ₹20 से ज़्यादा बढ़ गई हैं। जो चीनी पहले ₹45 प्रति किलो बिक रही थी, वह अब ₹65 तक पहुँच गई है। आज, 20 अगस्त को, इसकी कीमत ₹60 प्रति किलो है। हैरानी की बात यह है कि न तो व्यापारी और न ही ग्राहक इस कीमत वृद्धि का कारण समझ पा रहे हैं।

सबसे ज़्यादा असर किस पर पड़ेगा?

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर निश्चित रूप से उससे बनने वाली सभी चीज़ों और मिठाइयों पर पड़ेगा। रक्षाबंधन पास आ रहा है, ऐसे में चीनी की बढ़ती कीमतों के कारण मिठाइयों के दाम भी तेज़ी से बढ़ सकते हैं। इसका असर हर उस गृहिणी पर भी पड़ेगा जो मेहमानों के लिए चाय बनाती हैं या बच्चों के लिए मिठाइयाँ बनाती हैं। घर का बजट बिगड़ेगा और मिठाई, बेकरी उत्पादों, बिस्कुट और कोल्ड ड्रिंक्स का कारोबार करने वालों की लागत भी बढ़ेगी।

चीनी को लेकर सरकार का सख्त रुख

बढ़ती कीमतों और जमाखोरी की चिंताओं के बीच, सरकार ने एक अहम फ़ैसला लिया है: चीनी के स्टॉक पर सीमा (कैप) लगा दी गई है। जो व्यापारी और कंपनियाँ पहले 30 दिनों का स्टॉक रखती थीं, वे अब सिर्फ़ 15 दिनों की सप्लाई ही रख पाएँगी। यह नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा। संक्षेप में कहें तो, आने वाले त्योहारों के मौसम में चीनी के लिए मारामारी होने की संभावना है।

अवैध खाद भंडारण और जैव उत्प्रेरक के खिलाफ कृषि विभाग की कार्रवाई, गोदाम सील…

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खरीफ मौसम वर्ष 2026 में किसानों को गुणवत्ता युक्त कृषि आदान उपलब्ध कराने और उर्वरकों तथा कीटनाशकों के नियम विरुद्ध बिक्री पर रोक लगाने के लिये कृषि विभाग ने कार्यवाही तेज कर दी है। जिला प्रशासन के निर्देश पर औचक निरीक्षण के दौरान विभाग ने खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के गंडई स्थित दो कृषि केन्द्रों पर कार्यवाही की गई है।

बाजार चौक स्थित हरिओम कृषि केन्द्र, गंडई के द्वारा विभाग को गुमराह कर अवैध रूप से गोदाम का संचालन किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच के दौरान विभाग ने तत्काल कार्यवाही करते हुए धमधा रोड़ स्थित अवैध गोदाम को सील कर गोदाम में मौजूद समस्त संदेहास्पद कीटनाशकों एवं उर्वरकों को जप्त कर संबंधित कृषि केन्द्र के संचालक नीरज अग्रवाल को सुपुर्द की गई एवं विभाग ने आगे की कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। इसी प्रकार राघवेन्द्र कृषि केन्द्र में उर्वरक नियंत्रण आदेश का उल्लंघन पाये जाने के पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना निर्धारित प्रक्रिया के कीटनाशकों एवं उर्वरकों का विक्रय, स्टॉक का उचित संधारण नहीं करना, अनुज्ञप्ति में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन एवं निर्धारित मानकों के विपरित कीटनाशकों एवं उर्वरकों का व्यापार किये जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरूद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जावेगी।

बिना स्त्रोत प्रमाण पत्र के जैव उत्प्रेरक भी जब्त

कृषि विभाग ने बिना स्त्रोत प्रमाण पत्र के कीटनाशकों एवं उर्वरकों का विक्रय एवं भंडारण किये जाने पर भी तीन कृषि केन्द्र संचालकों के विरूद्ध कार्यवाही की है। निरीक्षण के दौरान खैरागढ़ विकासखंड अंतर्गत दक्ष एग्रोटेक रेंगाकठेरा में 250 लीटर अवैध जैव उत्प्रेरक को जप्त कर प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है। साथ ही भंडारणपुर स्थित सूर्याश कृषि केन्द्र एवं परसाही स्थित प्राची कृषि केन्द्र में बिना अनुज्ञप्ति के जैव उर्वरक का विक्रय किये जाने पर स्टॉक को जप्त कर वैधानिक कार्यवाही प्रारंभ कर दिया है।

कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर राजस्व कार्यों की समीक्षा की…

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– राजस्व प्रकरणों के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के दिए निर्देश**

राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में राजस्व कार्यों एवं विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की।

उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के साथ ही प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण एवं विधिसम्मत निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति की समीक्षा करते हुए सर्वे कार्य को सही एवं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने कहा।

उन्होंने नक्शा बटांकन कार्य में अपेक्षित प्रगति लाने के निर्देश दिए। कम प्रगति वाली तहसीलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों के प्रति नाराजगी व्यक्त की और कार्य में तेजी लाकर निर्धारित समयावधि में लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने स्वामित्व योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को आगामी 20 दिवस में योजना के तहत शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। जिले में अब तक कुल 352 ग्रामों के अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। कलेक्टर ने शेष ग्रामों में अधिकार अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

स्वामित्व योजना के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने पर लाल बहादुर नगर तहसीलदार श्री नीलकंठ जनबंधु, डोंगरगढ़ नायब तहसीलदार श्रीमती झरना राजपूत एवं श्री चिराग रामटेके के कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का अधिकार अभिलेख प्राप्त होगा और इससे संपत्ति संबंधी विवादों के निराकरण में भी सहायता मिलेगी।

कलेक्टर ने शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि शासकीय भूमि की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई करते हुए शासकीय भूमि को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

उन्होंने सभी राजस्व अधिकारियों को राजस्व प्रकरणों का निर्धारित समयावधि में गुणवत्तापूर्ण एवं विधिसम्मत निराकरण सुनिश्चित करने कहा।

साथ ही लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करने, अनावश्यक विलंब से बचने तथा राजस्व कार्यों की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, नजूल अधिकारी श्री प्रकाश टंडन सहित जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार उपस्थित थे।

राजनांदगांव जिले में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 5 हजार कनेक्शन पूरे…

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सौर ऊर्जा के प्रति बढ़ा नागरिकों का रूझान, बिजली बिल में राहत के साथ आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा जिला**

राजनांदगांव। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में राजनांदगांव जिले ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 5 हजार सौर कनेक्शन पूर्ण कर लिए हैं। योजना के माध्यम से जिले के घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं।

इससे जहां घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत मिल रही है, वहीं स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देकर जिले को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को अपने घर की छत पर सोलर संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को केंद्र एवं राज्य शासन की ओर से अनुदान एवं प्रोत्साहन का लाभ दिया जा रहा है। शासन की इस पहल से जिले में नागरिकों का रूफटॉप सोलर के प्रति रूझान लगातार बढ़ रहा है।

जिले के 5 हजार परिवारों तक पहुंचा सौर ऊर्जा का लाभ –

राजनांदगांव जिले में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार जनजागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ग्राम पंचायतों, नगरीय क्षेत्रों तथा विभिन्न माध्यमों से नागरिकों को योजना के लाभ, आवेदन प्रक्रिया, सोलर संयंत्र की उपयोगिता तथा अनुदान की जानकारी दी जा रही है। इसके परिणामस्वरूप जिले में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने योजना के तहत आवेदन कर अपने घरों पर सोलर संयंत्र स्थापित कराए हैं। जिले में 5 हजार सोलर कनेक्शन पूर्ण होना सौर ऊर्जा को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। योजना से लाभान्वित परिवार अपनी घरेलू बिजली जरूरतों को सौर ऊर्जा से पूरा करने के साथ अतिरिक्त बिजली का उत्पादन भी कर रहे हैं। इससे पारंपरिक विद्युत स्रोतों पर निर्भरता कम होने के साथ बिजली खर्च में भी कमी आ रही है।

केंद्र और राज्य शासन से मिल रहा अनुदान –

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत हितग्राहियों को सोलर संयंत्र की क्षमता के अनुसार केंद्र शासन की ओर से सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाता है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भी पात्र हितग्राहियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का लाभ दिया जा रहा है। केंद्र एवं राज्य शासन से मिलने वाली सहायता के माध्यम से हितग्राहियों को कम लागत में अपने घर पर सोलर संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिल रहा है। सोलर संयंत्र स्थापित होने के बाद कई परिवारों के बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है। वहीं, सौर संयंत्र से घरेलू खपत से अधिक बिजली उत्पादित होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने की सुविधा का भी लाभ मिल रहा है। इस प्रकार योजना के माध्यम से घरेलू उपभोक्ता बिजली का उपयोग करने के साथ उसके उत्पादन में भी सहभागी बन रहे हैं।

बिजली उपभोक्ता के साथ उत्पादक भी बन रहे नागरिक –

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके माध्यम से घरेलू बिजली उपभोक्ता बिजली उत्पादक की भूमिका में भी आ रहे हैं। घर की छत पर स्थापित सोलर पैनल से उत्पादित बिजली का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं के लिए किया जाता है तथा अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजा जा रहा है। इससे घरेलू स्तर पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण में भी सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

जनजागरूकता से योजना को मिल रही गति –

जिला प्रशासन द्वारा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों द्वारा मैदानी स्तर पर योजना की प्रगति की समीक्षा की जा रही है तथा लंबित आवेदनों, सोलर संयंत्र स्थापना और अनुदान भुगतान की प्रक्रिया को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जिले में सूर्य सभा सहित विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को योजना के लाभ और प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। इन प्रयासों से नागरिकों में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता और विश्वास बढ़ा है। नागरिकों को यह भी बताया जा रहा है कि सौर ऊर्जा बिजली बिल में कमी लाने के साथ भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।

स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा की दिशा में मजबूत पहल –

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 5 हजार सोलर कनेक्शन पूर्ण होना राजनांदगांव जिले में स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में परिवारों को आर्थिक राहत मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। आने वाले समय में सौर ऊर्जा से जुडऩे वाले परिवारों की संख्या बढऩे के साथ बिजली की बचत, घरेलू अर्थव्यवस्था में राहत और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। घरों की छतों पर स्थापित हो रहे सोलर संयंत्र राजनांदगांव जिले को स्वच्छ, हरित और ऊर्जा आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री बाल संदर्भ शिविर में 80 गंभीर, अति गंभीर तथा मध्यम श्रेणी के बच्चों की गई स्वास्थ्य जांच…

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राजनांदगांव। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुमरदा में मुख्यमंत्री बाल संदर्भ शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 80 गंभीर, अति गंभीर तथा मध्यम श्रेणी के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण एवं आवश्यक स्वास्थ्य जांच की गई।

बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का परीक्षण कर चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक उपचार संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। शिविर के सफल आयोजन में हमर स्वस्थ लइका कार्यक्रम एवं एम्स रायपुर के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर का विशेष सहयोग रहा।

इसके साथ ही जन औषधि केंद्र छुरिया के सहयोग से बच्चों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं एवं मार्गदर्शन प्रदान किया गया। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आवश्यक परामर्श एवं उपचार संबंधी सेवाएं प्रदान की गईं। विभागीय टीम द्वारा बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई तथा जरूरत के अनुसार दवाइयां उपलब्ध कराई गई।

शिविर के माध्यम से गंभीर एवं कुपोषण की श्रेणी में आने वाले बच्चों की समय पर पहचान, स्वास्थ्य जांच तथा आवश्यक उपचार एवं पोषण संबंधी सेवाएं सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग की ओर से एएनएम, मेडिकल ऑफिसर एवं फार्मासिस्ट उपस्थित थे।