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इंडिया ब्लॉक में पड़ी एक और दरार, ममता बनर्जी के बयान से गुस्साई कांग्रेस, बंगाल सीएम पर साधा निशाना…

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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले इंडिया ब्लॉक में एक और दरार पड़ती दिख रही है. दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में तमिलनाडु सीएम स्टालिन और राज्य कांग्रेस पर एक विवादापस्द बयान दिया था.

ममता के इस बयान पर कांग्रेस गुस्साई हुई है. कांग्रेस हाईकमान ने भी ममता के बयान पर नाराजगी जाहिर की है. इस बीच कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है.

कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने ममता पर आरोप लगाया कि उन्होंने डीएमके, कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच कथित समझौते का बेबुनियाद और गैरजिम्मेदाराना दावा किया है, जिससे विपक्ष की एकता कमजोर होती है. टैगोर ने ममता के पुराने भाजपा गठबंधन का भी जिक्र करते हुए उनके आरोपों को ध्यान भटकाने की कोशिश बताया. उन्होंने कहा कि बिना सबूत सहयोगियों और संस्थाओं पर सवाल उठाना सही नेतृत्व नहीं है. टैगोर ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि ममता बनर्जी अपना संतुलन खो रही हैं और बिना सबूत के बेबुनियाद दावे कर रही हैं.

ममता की TMC ने भाजपा से किया था गठबंधन

कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि टीएमसी 1998 और 1999 में भाजपा के साथ गठबंधन में थी और 2004 में आरएसएस-भाजपा गठबंधन के साथ चुनाव भी लड़ी थी. उन्होंने कहा कि संस्थाओं पर संदेह करना और बिना तथ्यों के गठबंधन सहयोगियों को निशाना बनाना नेतृत्व नहीं है, यह तो ध्यान भटकाने का प्रयास है. टैगोर ने कहा कि राहुल गांधी लगातार आरएसएस-भाजपा की विचारधारा के खिलाफ खड़े रहे हैं, जिसके चलते उन्हें 25 से अधिक मुकदमों, संसद से अयोग्यता और यहां तक ​​कि अपने सरकारी आवास से बेदखली का सामना करना पड़ा है. सत्ता के सामने सच बोलने की यही कीमत उन्हें चुकानी पड़ी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को भाजपा से लड़ने के बारे में उपदेशों की जरूरत नहीं है.

इंडिया ब्लॉक से अलग होने वाले दल

यह समय लापरवाही भरे बयान देने का नहीं है। यह समय एकता, जिम्मेदारी और लक्ष्य केंद्रित करने का है. वहीं, इंडिया ब्लॉक से 2024 लोकसभा चुनाव से पहले और उसके बाद कई प्रमुख दल अलग हो चुके हैं. इनमें नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) शामिल हैं, जो NDA में शामिल हो गए. इसके अलावा, आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी खुद को गठबंधन से अलग कर लिया है. खुद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के साथ तनाव के कारण अकेले चुनाव लड़ रही है. केरल में कांग्रेस के साथ सीधे मुकाबले के कारण वामपंथी दल भी गठबंधन की एकजुटता में शामिल नहीं हैं. जबकि केंद्र में टीएमसी और वामपंथी कांग्रेस के साथ हैं.

Iran Vs America: जंग खत्म करने के लिए ईरान ने पेश किए 10 नई शर्तें, अगर नहीं बनी बात, मचेगी और तबाही?

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Iran 10 Point Peace Plan: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर है। ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ‘अवास्तविक’ बताते हुए ठुकरा दिया है और बदले में अपना 10-सूत्रीय प्लान पेश किया है। तेहरान का कहना है कि सिर्फ युद्धविराम काफी नहीं है, बल्कि एक स्थायी समाधान जरूरी है। पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष के बीच ईरान की इन नई शर्तों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है, क्योंकि इसमें प्रतिबंध हटाने से लेकर समुद्री रास्तों के इस्तेमाल तक की बड़ी मांगें शामिल हैं।

Iran’s 10 point agenda: ईरान की 10 प्रमुख शर्तें

सुरक्षा की पक्की गारंटी: ईरान चाहता है कि अमेरिका और उसके सहयोगी लिखित में यह भरोसा दें कि भविष्य में ईरान की जमीन पर कभी भी दोबारा हमला नहीं किया जाएगा।

युद्ध का परमानेंट अंत: ईरान सिर्फ कुछ दिनों का युद्धविराम नहीं चाहता। उसकी मांग है कि इस जंग को हमेशा के लिए आधिकारिक तौर पर खत्म घोषित किया जाए ताकि शांति बनी रहे।

लेबनान पर हमला बंद हो: तेहरान की बड़ी शर्त है कि इजरायल लेबनान पर हो रहे अपने तमाम सैन्य हमलों को तुरंत रोके और वहां से अपनी सेना को पीछे हटाए।

अमेरिकी प्रतिबंधों की विदाई: ईरान पर जितने भी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध लगे हैं, उन्हें पूरी तरह हटाया जाए ताकि वह दुनिया के साथ फिर से व्यापार कर सके।

सहयोगियों की सुरक्षा: ईरान ने मांग की है कि क्षेत्र में उसके साथ खड़े देशों और गुटों के खिलाफ चल रहे तमाम सैन्य ऑपरेशनों और संघर्षों को तुरंत बंद किया जाए।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना: अगर ईरान की शर्तें मानी जाती हैं, तो वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोल देगा।

हर जहाज पर ट्रांजिट फीस: ईरान ने शर्त रखी है कि इस रास्ते से गुजरने वाले हर एक जहाज को सुरक्षा और सुविधा के बदले 2 मिलियन डॉलर की फीस देनी होगी।

ओमान के साथ कमाई का बंटवारा: जहाजों से मिलने वाली इस भारी-भरकम फीस को ईरान अकेला नहीं रखेगा, बल्कि वह इसे अपने पड़ोसी देश ओमान के साथ साझा (Share) करेगा।

बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण: ईरान इस समुद्री टैक्स से होने वाली पूरी कमाई का इस्तेमाल युद्ध में तबाह हुए अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर और सड़कों-पुलों को फिर से बनाने के लिए करेगा।

क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान: ईरान की आखिरी शर्त है कि पश्चिम एशिया के मामलों में बाहरी दखल बंद हो और ईरान की सीमाओं और संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाए।

USA vs Iran conflict: ईरान ने क्यों ठुकराया अमेरिकी प्रस्ताव?

ईरान ने अमेरिका की शर्तों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ और ‘अत्यधिक मांग वाली’ बताया है। तेहरान का तर्क है कि अमेरिका का प्रस्ताव ईरान को कमजोर करने की कोशिश है। ईरान का मानना है कि केवल कुछ समय के लिए युद्ध रोकना समाधान नहीं है, क्योंकि इससे दुश्मन को फिर से संगठित होने का मौका मिल जाता है। इसी वजह से ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी बुनियादी शर्तें नहीं मानी जातीं, तब तक कोई समझौता मुमकिन नहीं है।

Netflix ने बच्चों की कराई मौज! लॉन्च किया Playground app, बिना पैसे के खेल सकेंगे गेम…

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ओटीटी प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स ने बच्चों के लिए एक खास गेमिंग ऐप Netflix Playground लॉन्च किया है, जो पूरी तरह सुरक्षित और बिना किसी ऐड के है. यह ऐप खास तौर पर 8 साल से कम उम्र के बच्चों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.

इसमें न तो इन ऐप परचेज का झंझट है और न ही कोई अतिरिक्त फीस देनी होगी. माता पिता के लिए यह एक राहत की बात है क्योंकि बच्चों को अब बिना चिंता के गेम खेलने दिया जा सकता है. कंपनी का लक्ष्य इसे बच्चों के लिए एक सुरक्षित और मजेदार प्लेटफॉर्म बनाना है.

बच्चों के लिए सुरक्षित और बिना ऐड का गेमिंग प्लेटफॉर्म

नेटफ्लिक्स प्लेग्राउंड को खासतौर पर छोटे बच्चों के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें पूरी तरह ऐड फ्री अनुभव मिलता है. इस ऐप में कोई इन ऐप परचेज या छिपे हुए चार्ज नहीं हैं, जिससे माता-पिता को अतिरिक्त खर्च की चिंता नहीं करनी पड़ती. यह ऐप मौजूदा नेटफ्लिक्स सब्सक्रिप्शन के साथ ही काम करता है, यानी अलग से कुछ खरीदने की जरूरत नहीं है. कंपनी के अनुसार यह ऐप बच्चों की क्रिएटिविटी और सीखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए बनाया गया है. इसमें बच्चों के पसंदीदा किरदारों के साथ मजेदार और सुरक्षित गेमिंग अनुभव दिया गया है, जिससे स्क्रीन टाइम भी उपयोगी बन सके.

पॉपुलर किरदारों के साथ मजेदार गेम्स और ऑफलाइन सपोर्ट

इस ऐप में बच्चों के लिए कई तरह के आसान और इंटरएक्टिव गेम्स दिए गए हैं, जो उनके पसंदीदा शोज और किरदारों पर आधारित हैं. इसमें Peppa Pig, Sesame Street और Dr. Seuss जैसी कहानियों से जुड़े गेम्स शामिल हैं. बच्चे इसमें पजल्स, मेमोरी गेम्स, कलरिंग और अन्य क्रिएटिव एक्टिविटीज का आनंद ले सकते हैं. खास बात यह है कि ये सभी गेम्स बिना इंटरनेट के भी खेले जा सकते हैं. यानी यात्रा के दौरान या कमजोर नेटवर्क में भी बच्चे बिना रुकावट के गेम खेल सकते हैं.

कैसे डाउनलोड और इस्तेमाल करें ऐप

Netflix Playground ऐप को डाउनलोड करना और इस्तेमाल करना काफी आसान है. यूजर्स अपने फोन या टैबलेट में Apple App Store या Google Play Store पर जाकर इसे सर्च कर सकते हैं और इंस्टॉल कर सकते हैं. इसके बाद ऐप खोलकर अपने Netflix अकाउंट से लॉगिन करना होता है. लॉगिन के बाद एक आसान और बच्चों के अनुकूल इंटरफेस दिखाई देता है, जहां गेम्स कैटेगरी के अनुसार दिखाई देते हैं. माता-पिता को इसमें बेसिक कंट्रोल्स भी मिलते हैं, जिससे वे स्टोरेज मैनेज कर सकते हैं और जरूरत के अनुसार गेम्स को हटा सकते हैं.

Iran America War: युद्ध के माहौल में अचानक अमेरिका दौरे पर भारतीय विदेश सचिव, क्या है मोदी सरकार का प्लान?

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Idian Foreign Secretary US visit: मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात के बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका के तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं।

8 से 10 अप्रैल 2026 तक होने वाली इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करना है।

वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत का रुख शांति की स्थापना और अपने रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अहम है। यह दौरा न केवल व्यापार, रक्षा और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।

Iran America War: क्या रुकने वाली है विश्व तबाही?

ईरान और अमेरिका के बीच गहराते संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। भारत के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील है क्योंकि खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं और वहां से भारत की ऊर्जा जरूरतें (तेल और गैस) जुड़ी हैं। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। भारत इस संकट में एक संतुलन बनाने वाले देश के रूप में उभरा है, जो शांति और कूटनीति पर जोर देता है।

डिफेंस और बिजनेस से जुड़े समझौतों पर बातचीत

विक्रम मिसरी की इस यात्रा के दौरान डिफेंस और बिजनेस से जुड़े कई बड़े समझौतों पर बातचीत आगे बढ़ेगी। इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संकेत दिया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अपने अंतिम चरण में है। इस दौरे पर उसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा, दोनों देश रक्षा उपकरणों के साझा उत्पादन और उच्च तकनीक के हस्तांतरण पर भी चर्चा करेंगे, जिससे भारत की सुरक्षा व्यवस्था और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विज्ञान और तकनीक पर विशेष फोकस

भारत और अमेरिका के बीच ‘कंपैक्ट’ (COMPACT) समझौते के तहत सेना, व्यापार और टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। विक्रम मिसरी अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तार देंगे। 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देश एक-दूसरे के तकनीकी अनुभव का लाभ उठाना चाहते हैं। यह सहयोग आने वाले समय में भारतीय स्टार्टअप्स और इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए नए दरवाजे खोलेगा।

द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा

मिसरी का यह दौरा पिछले दौरों की प्रगति को जांचने का भी एक मौका है। मई 2025 में हुए उनके पिछले दौरे और फरवरी 2026 में एस जयशंकर की यात्रा के दौरान जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनकी समीक्षा की जाएगी। वॉशिंगटन डीसी में ‘फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन’ की मीटिंग में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि रणनीतिक और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर काम सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह निरंतर संवाद दोनों लोकतंत्रों के बीच भरोसे को और गहरा करता है।

Dollar Vs Rupee: कम हुई रुपए की ताकत, ₹93 पर पहुंची एक डॉलर की कीमत…

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मंगलवार को रुपया 10 पैसे गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.00 (अस्थायी) पर बंद हुआ. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की समय सीमा और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले सतर्क बने रहे.

फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि डॉलर-रुपए जोड़ी दबाव में कारोबार कर रही है. विदेशी पूंजी की लगातार निकासी, डॉलर की मजबूती और अस्थिर भू-राजनीतिक स्थिति के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण इसमें गिरावट आई है. इसके अलावा, बाजार के पार्टिसिपेंट्स बदलती भू-राजनीतिक खबरों और RBI के आगामी मॉनेटरी पॉलिसी के फैसलों पर भी नजर रखेंगे. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं.

93 का हुआ एक डॉलर

इंटरबैंक फॉरेन करेंसी एक्सचेंज मार्केट में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.05 पर खुला. इसके बाद यह कमजोर होकर 93.07 पर कारोबार करने लगा, जो इसके पिछले बंद भाव से 17 पैसे की गिरावट दर्शाता है. दिन के दौरान, रुपया डॉलर के मुकाबले 92.86 के इंट्राडे उच्च स्तर को भी छू गया. मंगलवार के कारोबारी सत्र के अंत में, रुपया 93.00 (अस्थायी) पर बोला गया, जो इसके पिछले बंद भाव से 10 पैसे कम था. सोमवार को, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे मजबूत होकर 92.90 पर बंद हुआ. यह रिज़र्व बैंक द्वारा सट्टेबाजी की होड़ पर अंकुश लगाने और भारतीय मुद्रा में अस्थिरता को कम करने के उपायों के बाद हुआ.

RBI ने सट्टेबाजी की स्थितियों पर अंकुश लगाने के लिए अपने नियमों को सख्त कर दिया है और बैंकों की ‘नेट ओपन पोजीशन’ की सीमा 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तय कर दी है. इस बीच, रिजर्व बैंक की दर-निर्धारण समिति ने सोमवार को चालू वित्त वर्ष की पहली द्वि-मासिक मौद्रिक नीति पर अपना तीन दिवसीय विचार-मंथन सत्र शुरू किया. रिज़र्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) का निर्णय बुधवार को घोषित किया जाएगा.

डॉलर गिरा और शेयर बाजार में तेजी

डॉलर इंडेक्स, जो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.15 प्रतिशत गिरकर 99.83 पर आ गया. वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, वायदा कारोबार में 1.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 107.61 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. घरेलू शेयर बाज़ार में, सेंसेक्स 509.73 अंक उछलकर 74,616.58 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 155.40 अंक चढ़कर 23,123.65 पर पहुंच गया. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 8,167.17 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए दी गई समय सीमा आज खत्म हो रही है, और ईरान अभी भी संघर्ष विराम के प्रस्ताव पर नरम नहीं पड़ा है.

‘भारत दुनिया की आत्मा.गौभक्त बनते ही रुक जाएगी गौहत्या’, वृंदावन में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत…

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उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित वृंदावन में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भाग लेकर कई महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए. भागवत मलूक पीठ गौशाला में चल रहे 452वें जयंती महोत्सव में शामिल हुए, जहां योग गुरु बाबा रामदेव सहित संत समाज की बड़ी उपस्थिति रही.

इस दौरान भागवत ने आश्रम पहुंचकर पूजा-अर्चना भी की और कार्यक्रम के आध्यात्मिक माहौल की सराहना की.

इस अवसर पर मोहन भागवत ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि यहां का वातावरण इतना शांत और आध्यात्मिक है कि बोलने की इच्छा कम हो जाती है. ऐसे माहौल में मौन रहना ही अधिक उपयुक्त लगता है. भागवत ने भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत ही दुनिया की आत्मा है. उनके अनुसार, जब तक भारत अपनी मूल पहचान और मूल्यों के साथ खड़ा रहेगा, तब तक विश्व भी संतुलित रहेगा. उन्होंने कहा कि आज दुनिया भटकाव की स्थिति में है क्योंकि उसने अपनी आत्मा को खो दिया है.

समाज के गौभक्त बनते ही रुक जाएगी गौहत्या

गौसंरक्षण और गौहत्या के मुद्दे पर बोलते हुए संघ प्रमुख ने कहा कि समाज को गौभक्त बनाया जाए तभी गौहत्या अपने आप रुक जाएगी. उन्होंने कहा कि समाज को गौभक्त बनाना जरूरी है. उनका मानना है कि जब समाज में गाय के प्रति सम्मान और श्रद्धा बढ़ेगी, तो गौहत्या स्वतः रुक जाएगी. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकारें इस दिशा में काम करना चाहती हैं, लेकिन कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में समाज का समर्थन बेहद जरूरी है. बिना समाज के समर्थन ये कार्य नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसे में साहसी कदम उठाने के लिए समाज का साथ जरूरी है. उन्होंने कहा कि गौ-जागृति को मजबूत करना होगा. जब जनभावना तैयार हो जाएगी, तो व्यवस्था को भी उसे मानना पड़ेगा.

जनभावना मजबूत होने पर हुआ राम मंदिर का निर्माण

राम मंदिर के निर्माण का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि 2014 से 2019 तक यह कार्य नहीं हो पाया, लेकिन 2019 के बाद जनभावना मजबूत होने के कारण रास्ता साफ हुआ. उन्होंने कहा कि इसी तरह यदि गौसंरक्षण के मुद्दे पर भी जनमत तैयार हो जाए, तो समाधान निकल सकता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संत समाज और संघ मिलकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं. उन्होंने कहा कि संत मार्गदर्शन देंगे और संघ उनके साथ खड़ा रहेगा. भागवत ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत विश्व गुरु बनकर उभरेगा और दुनिया को नई दिशा देगा.

“Air India ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज, डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फ्लाइट टिकट का कितना बढ़ जाएगा किराया?”

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Air India fuel surcharge Hike: एयर इंडिया ने घरेलू (Domestic) और अंतरराष्ट्रीय (international) उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ाने का ऐलान किया है। जिसके चलते हवाई किराया अब महंगा होगा।

वैश्विक जेट फ्यूल की कीमतों में तीव्र बढ़ोतरी और अमेरिका-ईरान युद्ध को इसकी वजह बताया गया है।

एयर इंडिया का ये फैसला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कैंपबेल विल्सन के इस्‍तीफे के बाद आया है। कैंपबेल विल्सन को पांच साल के कान्‍ट्रेक्‍ट पर नियुक्त किया गया था। एयर इंडिया के सीईओ के रूप में उनका कार्यकाल जुलाई 2027 में समाप्त होने वाला था लेकिन इससे पहले ही उन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया है।

कब से बढ़ेगा एयर टिकट का किराया?

टाटा समूह की इस एयरलाइन ने बताया कि नई अधिभार संरचना घरेलू मार्गों पर 8 अप्रैल से और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्रों के लिए 10 अप्रैल से लागू होगी।

Air India का कितना बढ़ जाएगा किराया?

डोमेस्टिक फ्लाइट के लिए, एयर इंडिया ने दूरी के आधार पर फ्यूलच चार्ज मॉडल लागू किया है। इसके तहत, 0-500 किमी पर ₹299, 501-1000 किमी पर ₹399, 1001-1500 किमी पर ₹549, 1501-2000 किमी पर ₹749 और 2000 किमी से अधिक पर ₹899 का शुल्क होगा। घरेलू ATF पर 25% की सरकारी सीमा के बावजूद, यह वृद्धि अधिकांश टिकट की कीमतें बढ़ाएगी।

इंटरनेशनल फ्लाइट के किराए में कितनी होगी बढ़ोत्‍तरी?

इंटरनेशनल रूट पर इसका प्रभाव अधिक होगा, क्योंकि वहां कोई रेट लिमिट नहीं है। एयर इंडिया ने क्षेत्र के आधार पर काफी अधिक अधिभार निर्धारित किए हैं, सार्क गंतव्यों के लिए $24 से लेकर उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के मार्गों के लिए $280 तक। एयरलाइन बढ़ी हुई ईंधन लागत का एक हिस्सा स्वयं वहन कर रही है, ताकि किराया और अधिक न बढ़े।

कितना महंगा हो गया है जेट फ्यूल?

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के अनुसार, वैश्विक जेट ईंधन की कीमतें मार्च के अंत तक $195.19 प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो कुछ हफ़्ते पहले के $99 से लगभग दोगुनी हैं। रिफाइनिंग मार्जिन, या “क्रैक स्प्रेड,” भी कम समय में तीन गुना हुए हैं, जिससे विमानन कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ गया है।

Indigo पहले ही बढ़ा चुका है टिकट के दाम

बता दें पिछले सप्‍ताह इंडिगो ने फ्यूल चार्ज में बढ़ाेत्‍तरी करने का ऐलान किया था, जिसके चलते फ्लाइट टिकट महंगा हो गया है। इससे साफ है कि फ्यूल की बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा यात्रियों पर डालने को एयरलाइंस मजबूर हैं, क्योंकि ईंधन परिचालन खर्चों का लगभग 40% होता है। याद रहे ईरान युद्ध के बाद कच्चे तेल और ATF की कीमतें बढ़ाई हैं।

Pawan Khera: पासपोर्ट विवाद पर एक्शन! पवन खेड़ा के घर पहुंची असम पुलिस, हिमंता सरमा की पत्नी की FIR के बाद हलचल…

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Pawan Khera असम पुलिस की एक टीम कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची है। यह कार्रवाई हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR के ठीक एक दिन बाद की गई है।

यह कार्रवाई उस FIR के बाद हुई है, जो हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई थी। पवन खेड़ा के घर रेड पर निकलने के बाद दिल्ली पुलिस ने कहा कि कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद है।

जानकारी के मुताबिक, असम से आई पुलिस टीम ने दिल्ली पुलिस को पहले ही सूचित कर दिया था, जिसके बाद स्थानीय पुलिस भी इस कार्रवाई में सहयोग कर रही है। नियमों के तहत जब किसी राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जांच के लिए जाती है, तो वहां की स्थानीय पुलिस को जानकारी देना जरूरी होता है।

सूत्रों के मुताबिक जब पुलिस टीम पवन खेड़ा के घर पहुंची, उस समय वह वहां मौजूद नहीं थे। बताया जा रहा है कि हाल ही में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पासपोर्ट को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए थे।

इसी मामले को लेकर अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है और असम पुलिस सीधे दिल्ली पहुंच गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा क्या है पूरा विवाद?

असम की राजनीति में रविवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सीएम सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खेड़ा ने दावा किया कि उनके पास एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी बड़ी संपत्ति भी मौजूद है। इन आरोपों के सामने आते ही मामला सियासी बहस का केंद्र बन गया।

इन आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने इन्हें पूरी तरह झूठा और राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप कांग्रेस की घबराहट और घटते जनाधार को दिखाते हैं। सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने साफ किया कि यह सब उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।

सीएम सरमा और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा पर एफआईआर दर्ज की है।आपराधिक और दीवानी मानहानि का केस दर्ज किया गया है।

पवन खेड़ा ने किस आधार पर लगाए आरोप?

अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने कुछ दस्तावेजों का हवाला दिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि ये उन्हें विदेश में मौजूद सूत्रों से मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि रिनकी सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ एंड बारबुडा के पासपोर्ट हैं।

इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुबई में उनकी प्रॉपर्टी है और अमेरिका के व्योमिंग में एक कंपनी रजिस्टर्ड है, जिसका बजट 34.67 बिलियन डॉलर बताया गया। खेड़ा के मुताबिक, होटल इंडस्ट्री में निवेश की भी तैयारी है।

चुनावी हलफनामे और नागरिकता पर क्यों उठे सवाल?

पवन खेड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि अगर ये सारी संपत्तियां मौजूद हैं, तो उनका जिक्र सीएम सरमा के चुनावी हलफनामे में क्यों नहीं किया गया। उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि क्या रिनकी सरमा के पास भारतीय नागरिकता है, क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है।

पवन खेड़ा ने इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी और आगामी चुनावों से अयोग्यता तक की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित से हस्तक्षेप की अपील की और पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग उठाई है।

Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पूरी, करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटे; चुनाव से पहले बड़ा बदलाव…

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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है. विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के पूरा होने के बाद करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं

यह प्रक्रिया न्यायिक अधिनिर्णय के बाद सोमवार मध्यरात्रि को पूरी हुई, जिससे राज्य की चुनावी तस्वीर में बड़ा असर पड़ने की संभावना है.

न्यायिक अधिनिर्णय के बाद बढ़ा आंकड़ा

मुख्य चुनाव अधिकारी पश्चिम बंगाल के अनुसार, कुल 6006675 मामलों को न्यायिक जांच के लिए भेजा गया था. इनमें से 5984512 मामलों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और न्यायिक अधिकारियों द्वारा ई-हस्ताक्षर भी कर दिए गए हैं. इन मामलों में से 2716393 मतदाताओं को हटाए जाने योग्य पाया गया, जिसके बाद कुल हटाए गए मतदाताओं की संख्या बढ़कर 9083345 हो गई है. हालांकि, 22163 मामलों में अभी ई-हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है, जिससे यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.

मतदाता सूची में लगातार बदलाव

SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले, नवंबर में राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 76637529 थी. दिसंबर में जारी मसौदा सूची में 5820899 नाम हटाए गए थे. इसके बाद 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या बढ़कर 6366952 हो गई. अब न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर करीब 91 लाख तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा संशोधन माना जा रहा है.

अपील का मिलेगा अवसर

जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने योग्य पाए गए हैं, उन्हें अपील का अधिकार दिया गया है. इसके लिए राज्य में 19 अपीलीय न्यायाधिकरण बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोग अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ चुनौती दे सकते हैं.

इन जिलों में सबसे ज्यादा असर

जिलावार आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा नाम अल्पसंख्यक-बहुल मुर्शिदाबाद जिले से हटाए गए हैं, जहां कुल 455137 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए. इसके बाद उत्तर 24 परगना में 325666 और मालदा जिले में 239375 नाम हटाए गए हैं. इन जिलों में बड़े पैमाने पर बदलाव ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है.

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से आगामी विधानसभा चुनाव पर सीधा असर पड़ सकता है. यह मुद्दा राजनीतिक दलों के बीच विवाद का कारण भी बन सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं. अब सभी की नजर अंतिम आंकड़ों और संभावित अपीलों पर टिकी है. अगर बड़ी संख्या में अपीलें दायर होती हैं और कुछ नाम बहाल होते हैं, तो मतदाता सूची में एक बार फिर बदलाव संभव है.

CG: मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप से युवाओं को मिलेगा प्रशासनिक क्षेत्र में करियर का अवसर…

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IIM रायपुर के सहयोग से संचालित दो वर्षीय MBA कार्यक्रम के लिए जागरूकता अभियान तेज’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के युवाओं को सुशासन और पब्लिक पॉलिसी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री सुशासन फेलोशिप” के तहत संचालित दो वर्षीय MBA इन पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

इस क्रम में भारतीय प्रबंध संस्थान रायपुर के प्रतिनिधि श्री बिनॉय टी एवं श्री एस.एन. मंडल द्वारा जशपुर सहित प्रदेश के उत्तरी जिलों का दौरा कर विद्यार्थियों को इस कोर्स की जानकारी दी जा रही है। टीम द्वारा विभिन्न इंजीनियरिंग एवं स्नातक महाविद्यालयों में पहुंचकर कार्यक्रम की विशेषताओं, पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। साथ ही पंपलेट वितरण के माध्यम से भी अधिक से अधिक युवाओं तक जानकारी पहुंचाई जा रही है।

यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ शासन एवं IIM रायपुर के संयुक्त प्रयास से संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों की पूरी फीस राज्य शासन द्वारा वहन की जाएगी। इसके साथ ही विद्यार्थियों को प्रति माह 50 हजार रूपए की छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाएगी।

कार्यक्रम की विशेषता यह है कि अभ्यर्थियों को IIM रायपुर में उच्च स्तरीय कक्षा शिक्षण के साथ-साथ राज्य शासन के विभिन्न विभागों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण (फील्ड एक्सपोजर) का अवसर भी मिलेगा, जिससे उन्हें नीति निर्माण और प्रशासनिक कार्यों का वास्तविक अनुभव प्राप्त होगा।

यह फेलोशिप विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए उपलब्ध है तथा इसमें राज्य शासन की आरक्षण नीति लागू होगी। इच्छुक अभ्यर्थी विस्तृत जानकारी एवं आवेदन के लिए IIM रायपुर की आधिकारिक वेबसाइट पर निर्धारित तिथि तक आवेदन कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि IIM रायपुर की टीम द्वारा जशपुर जिले के सभी विकासखंडों के महाविद्यालयों का भ्रमण कर विद्यार्थियों को इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं को सुशासन के क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा अवसर मिल सके।