NCERT की किताब में न्यायपालिका के बारे में विवादित अध्याय का मामला…
‘ब्लैकलिस्टेड’ शिक्षाविदों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने वापस लिया सरकारी संस्थानों से बाहर करने का आदेश’
तीनों शिक्षाविदों ने आवेदन दाखिल कर कोर्ट से कहा कि अध्याय लिखते समय उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी. उस अध्याय के लिए वह अकेले जिम्मेदार नहीं थे.
स्कूली किताब में न्यापालिका के बारे में विवादित अंश के लिए जिम्मेदार माने गए 3 शिक्षाविदों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने वह आदेश वापस ले लिया है जिसमें उन्हें सरकारी अनुदान वाली किसी संस्था में काम न देने को कहा गया था. मिशेल डेनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना ने मामले पर सफाई देते हुए माफीनामा पेश किया था. इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.
NCERT की कक्षा 8 की एक किताब में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ पर लिखे गए अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था. 26 फरवरी को कोर्ट ने किताब पर रोक लगा दी थी. वेबसाइट पर ऑनलाइन उपलब्ध किताब की पीडीएफ फाइल को भी हटाने का आदेश दिया था. 11 मार्च को कोर्ट ने विवादित बातें लिखने के जिम्मेदार शिक्षाविदों को केंद्र या राज्य सरकार से जुड़े किसी भी संस्थान में काम न देने का आदेश दिया था.
तीनों शिक्षाविदों ने आवेदन दाखिल कर कोर्ट से कहा कि अध्याय लिखते समय उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी. उस अध्याय के लिए वह अकेले जिम्मेदार नहीं थे. उनकी तरफ से पेश वरिष्ठ वकीलों श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायण और जे साईं दीपक की बातें सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने अपना आदेश वापस ले लिया.
कोर्ट ने अपने पिछले आदेश पर स्पष्टता देते हुए कहा कि उसकी नाराजगी बच्चों को अवांछित बातें पढ़ाए जाने को लेकर थी. शिक्षाविदों के जवाब से वह संतुष्ट हैं. केंद्र और राज्य सरकारें इन लोगों को जरूरत के मुताबिक काम देने पर विचार कर सकती हैं. कोर्ट की तरफ से इस पर अब कोई रोक नहीं है. हालांकि, केंद्र ने कहा कि उसने इन लोगों को स्कूली शिक्षा से जुड़ा काम न देने का फैसला किया है.
केंद्र के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनकी जानकारी में कुछ और किताबों में न्यायपालिका के बारे में लिखी गई अवांछित बातें आई हैं. कम उम्र के बच्चों में व्यवस्था के प्रति नकारात्मक छवि नहीं बननी चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इन बातों को जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने रखें. इस कमेटी के गठन न्यायपालिका को लेकर लिखी गई बातों की समीक्षा के लिए किया गया है. सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा के अलावा इस 3 सदस्यीय कमेटी में वरिष्ठ वकील के के वेणुगोपाल और गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह भी शामिल हैं.



