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लंदन नहीं भारत की इस जगह पर सात फेरे लेंगे अनंत और राधिका, सामने आईं डिटेल्स…

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लंदन नहीं भारत की इस जगह पर सात फेरे लेंगे अनंत और राधिका, सामने आईं डिटेल्स…

Anant Ambani Radhika Merchant Wedding: बिजनेसमैन मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी की शादी का सभी को बेसब्री से इंतजार है. गुजरात के जामनगर में तीन दिनों तक चले अनंत और राधिका के प्री-वेडिंग के बाद अब उनकी शादी 12 जुलाई को होने वाली है.

परिवार में शादी की तैयारियां जोरो-शोरों पर चल रही हैं. लेकिन इन सबके बीच शादी के वेन्यू को लेकर अलग-अलग तरह की खबरें आ रही हैं. अब खबर है कि अनंत अंबानी की शादी लंदन में नहीं होगी.

लंदन में नहीं होगी अनंत अंबानी की शादी
अनंत और राधिका 12 जुलाई को सात फेरे लेने जा रहे हैं. शादी को लेकर रोज नए-नए अपडेट्स मिल रहे हैं. बिग फैट वेडिंग में बड़ी-बड़ी हस्तियां शामिल होंगी. अनंत और राधिका की शादी को लेकर लगातार अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. पैपराजी विरल भयानी के अनुसार अंबानी परिवार के बेटे अनंत की शादी मुंबई में ही होगी शादी. इससे पहले इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया था कि लंदन में शादी होगी.

बड़ी-बड़ी हस्तियां होंगी शामिल
रिपोर्ट में कहा गया था कि उनकी शादी लंदन के स्टोक पार्क एस्टेट में होगी और अबु धाबी में संगीत सेरेमनी का आयोजन होगा. अनंत अंबानी की शादी में बॉलीवुड, क्रिकेट, बिजनेस और राजनीति से जुड़े लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. हालांकि अभी तक कोई गेस्ट लिस्ट सामने नहीं आई है और न ही अंबानी परिवार की ओर से किसी तरह की आधिकारिक जानकारी दी गई.

बंट गया न्योता
बता दें कि अनंत और राधिका की शादी का कार्ड छप चुका है और मेहमानों को भी न्योता दिया जा चुका है. खबरों की मानें तो शादी का कार्ड करीब नौ पन्नों का है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्री-वेडिंग फंक्शन की बात करें तो अंबानी ने इस कार्यक्रम में करीब 1250 करोड़ का खर्चा किया था.

इतना लैविश था प्री-वेडिंग फंक्शन
अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट का प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन किसी परियों की कहानी जैसा था. इसमें दुनियाभर की बड़ी-बड़ी हस्तियां जैसे मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग, माइक्रोसॉफ्ट के को-फॉउंडर बिल गेट्स और डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप आदि शामिल हुए थे. प्री-वेडिंग सेलिब्रेशन में अंबानी परिवार ने अपने मेहमानों को चार्टर्ड प्लेन, वॉर्डरोब सर्विस, वर्ल्ड क्लास शेफ, पिकअप और ड्रॉप के लिए लग्जरी गाड़ियां जैसी कई शानदार सर्विसेज दी थीं.

CM योगी आदित्यनाथ बोले- दलितों, पिछड़ों के अधिकारों पर ‘डकैती’ डालने के लिये सत्ता चाहती है कांग्रेस!

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CM योगी आदित्यनाथ बोले- दलितों, पिछड़ों के अधिकारों पर ‘डकैती’ डालने के लिये सत्ता चाहती है कांग्रेस!

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए दावा किया कि यह पार्टी अनुसचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़ी जातियों के अधिकारों पर ‘डकैती’ डालने के लिये सत्ता में आना चाहती है।

आदित्यनाथ ने यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्यालय पर संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस और इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) पर गंभीर आरोप लगाये।

उन्होंने दावा किया, ” कांग्रेस और ‘इंडिया’ की मंशा अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के अधिकारों पर डकैती डालने की है और इसके लिए वह सरकार में आना चाहते हैं। वह जातिगत जनगणना कराना चाहते हैं और उसके आधार पर बहुसंख्यक समाज के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का प्रयास करेंगे।”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2006 में कांग्रेसनीत केन्द्र सरकार के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने एक भाषण में इस बात का उल्लेख किया था कि देश के संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। उन्होंने आरोप लगाया, ” कांग्रेस देश के लोगों की संपत्ति का सर्वेक्षण करवाएगी और उसके बाद इसका बंदरबांट करेगी यानी वह अपनी पुरानी स्मृति में लेकर जा रहे हैं कि पहला अधिकार किसका है और फिर वहीं से उनकी शुरुआत हो रही है। इसके लिए वह जातीय जनगणना को आधार बना रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में यह मंशा जतायी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की मंशा हमेशा येन-केन-प्रकारेण सत्ता प्राप्त करने की रही है और वे देश की कीमत पर सत्ता चाहते हैं।

योगी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सत्ता में आने पर ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ यानी शरिया कानून को लागू करके तालिबानी विध्वंस का समर्थन करने की बात करती है। उन्होंने कहा, ” इससे कांग्रेस की मंशा स्पष्ट उजागर होती है कि उनका इरादा देश के प्रति अच्छा नहीं है। वह अपने उसी पुराने ‘डीएनए’ के अनुसार कार्य करने का प्रयास कर रही है जिसके कारण 1947 में देश का विभाजन हुआ था, जिसके कारण देश आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद की चपेट में आया था।”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि न्यामूर्ति रंगनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में जो कमेटी बनाई गई उसकी सिफारिश कांग्रेस की मंशा के अनुरूप देश में लागू करने के कुत्सित परिणाम हुए थे। उन्होंने कहा, ” इसके तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण के अधिकार को एक वर्ग विशेष को देने के प्रयास शुरू किए गए थे। आयोग की सिफारिशों में अन्य पिछड़े वर्गों को मिलने वाले 27 प्रतिशत आरक्षण में से छह प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय को देने की बात कही गयी थी।”

आदित्यनाथ ने यह भी आरोप लगाया कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में भी दलितों और अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के आरक्षण में घुसपैठ करके उसके एक हिस्से को भी मुस्लिम वर्ग को जबरन देने के कुत्सित प्रयास किए गए थे, जिसका उस समय भारी विरोध हुआ था।

मुख्यमंत्री ने दावा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 10 वर्षों में देश के अंदर काम की राजनीति पर ध्यान देकर पूरी जवाबदेही के साथ हर मोर्चे पर सर्वांगीण विकास के जिन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में प्रयास शुरू किए हैं आज देश इसका लाभ प्राप्त कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने लंबे समय तक शासन करने के बावजूद कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की राजनीति काम पर आधारित क्यों नहीं हो सकी ?

इन 3 देशों के लिए आपस में ही लड़ बैठे अमेरिकी नेता, अरबों डॉलर का मामला

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इन 3 देशों के लिए आपस में ही लड़ बैठे अमेरिकी नेता, अरबों डॉलर का मामला

कई महीनों की देरी के बाद अमेरिकी सीनेट में यूक्रेन, रूस और ताइवान की सहायता के लिए 95 बिलियन डॉलर का पैकेज पास हो गया है. इस प्रस्ताव के ऊपर कैपिटल हिल में दोनों पक्षों में महीनों संघर्ष चला है.

कुछ सांसदों ने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद को लेकर आपत्ति जताई थी. लेकिन मंगलवार को ये प्रस्ताव बहूमत वोटों से पारित हो गया है. अमेरिका के अपर हाउस में 23 अप्रैल को 15 रिपब्लिकन और 3 डेमोक्रेट ने बिल के खिलाफ वोट किया, जबकि 48 डेमोक्रेट और 31 रिपब्लिकन ने विधेयक के पक्ष में वोट डाला. जिसके बाद 79-18 से ये बिल पास हुआ.

इस बिल के पास होने के बाद सीनेट के लीडर चक स्कमर ने चिल्लाते हुए कहा, ‘फाइनली, फाइनली, फाइनली बिल पास हो गया. आज रात व्लादिमीर पुतिन को उस दिन का पछतावा हो सकता है जब उन्होंने अमेरिकी संकल्प पर सवाल उठाया था.’

यूक्रेन को मिला सबसे बड़ा पैकेज

ये पूरा पैकेज 95 अरब डॉलर का है. इसमे सबसे बड़ा हिस्सा यूक्रेन को दिया गया है, इस पैकेज में से 61 अरब डॉलर यूक्रेन को दिए जाएंगे. ये मदद यूद्ध की मार झेल रहे यूक्रेन को कुछ ही दिनों में मिलने लगेगी. इसके अलावा इजराइल को 26 अरब डॉलर की मदद दी गई है, जिसमें करीब 9 अरब डॉलर गाजा में मानवीय मदद पहुंचाने के लिए दिए जाएंगे. साथ 8 अरब डॉलर इंडो-पैसेफिक रीजन को दिए जाएंगे.

बाइडन ने दी प्रतिक्रिया

बाइडेन ने इस बिल के पास होने के बाद इसकी सराहना की है. बाइडेन ने कहा, ‘ये बिल खास है और इससे अमेरिका और दुनिया पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी. हम अपने दोस्तों की मदद करने के लिए ये कर रहे हैं, जो हमास जैसे आतंकवादियों और पुतिन जैसे तानाशाहों से लड़ रहे हैं. बतां दे की इस बिल पर बुद्धवार को जो बाइडेन साइन करेंगे जिसके बाद इस पैकेज को यूक्रेन, इजराइल और ताइवान जाने की हरी झंडी मिल जाएगी .

VVPAT Machine क्या होती है और कैसे करती है काम, कब तक दिखती है वोट की पर्ची?

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VVPAT Machine क्या होती है और कैसे करती है काम, कब तक दिखती है वोट की पर्ची?

लोकसभा चुनाव 2024 के पहले चरण के लिए मतदान हो चुके हैं, अब इसी हफ्ते 26 अप्रैल को दूसरे चरण के लिए मतदान होने हैं. चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान हमेशा से ही विपक्षी दल के लोग EVM और VVPAT Machine को लेकर सवाल करते आए हैं.

बहुत से सवाल अब भी ऐसे हैं जिनके बारे में लोगों को जानकारी तक नहीं है.

आज खुद से ही पूछकर देखिए क्या आपको पता है कि आखिर VVPAT मशीन क्या है और ये मशीन आखिर किस तरह से काम करती है या फिर वोट डालने के बाद आखिर कब तक VVPAT Slip नजर आती है? अगर आप इन सभी जरूरी सवालों के जवाब नहीं जानते हैं तो हमारे साथ बने रहिए, आज हम आपको इन सभी सवालों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे.

What is VVPAT: समझें क्या है वीवीपैट मशीन?

ये मशीन क्या है, इसे जानने से पहले आपको ये पता होना चाहिए कि आखिर इसका मतलब क्या है? वीवीपैट का मतलब है Voter Verifiable Paper Audit Trail. जब EVM और VVPAT जैसी मशीन नहीं थी और बैलेट पेपर के जरिए ही चुनाव होते थे.

लेकिन फिर समय बदला और बैलेट पेपर की जगह EVM मशीन ने ले ली. इस मशीन के आने के बाद से अबतक विपक्ष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर सवाल खड़े करता रहता है.

जब EVM पर सवाल खड़े होने लगे तब चुनाव आयोग इस समस्या का हल निकालते हुए VVPAT को लेकर आया. वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल उर्फ VVPAT मशीन को EVM मशीन के साथ कनेक्ट किया जाता है.

VVPAT Works: कैसे काम करती है ये मशीन?

EVM और VVPAT दोनों ही मशीन कंट्रोल यूनिट के साथ जुड़ी होती हैं. जैसे ही आप ईवीएम मशीन में बटन दबाते हैं, एक बीप की आवाज आती है और साथ में लगी वीवीपैट मशीन में आपने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है उसकी एक पर्ची प्रिंट होकर दिखने लगती है.

आप इस पर्ची को घर लेकर नहीं जा सकते लेकिन आपको ये पर्ची मशीन में कुछ सेकंड तक जरूर नजर आती है जिससे कि आप इस बात को चेक कर सकते हैं कि आपका वोट वाकई उसी को गया है या नहीं जिसे आपने वोट दिया है या नहीं. इसके बाद ये पर्ची मशीन में मौजूद एक सील पैक्ड बॉक्स में गिरती है.

VVPAT Slip: कितनी देर तक दिखती है स्लिप?

जब भी कोई व्यक्ति मतदान उर्फ वोट डालता है तो मशीन में स्लिप जेनरेट होती है. इस स्लिप को देखने से वोट देने वाले को एक तसल्ली हो जाती है कि उन्होंने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है वोट उसी को गया है. इस स्लिप में उम्मीदवार का नाम होता है जिसे आपने वोट दिया है और चुनाव चिन्ह छपा होता है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, VVPAT मशीन में लगे ग्लास विंडो में ये स्लिप लगभग 7 सेकंड तक नजर आती है. इसके बाद यह स्लिप मशीन के नीचे लगे कंपार्टमेंट में गिरती है.

पहली बार कब हुआ VVPAT का इस्तेमाल?

EVM के साथ हमेशा से VVPAT का इस्तेमाल नहीं होता था, ईवीएम पर जब सवाल उठने लगे तो वीवीपैट मशीन को लाया गया. क्या आप इस सवाल के जवाब से वाकिफ हैं कि आखिर पहली बार कब चुनाव आयोग ने VVPAT का इस्तेमाल किया था?

हो सकता है कि इस सवाल का जवाब आधे से ज्यादा जनता जानती हो, लेकिन फिर भी बहुत से लोग ऐसे होंगे जिन्हें अब भी इस सवाल का जवाब नहीं पता. याद दिला दें कि 2013 में हुए नागालैंड विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने पहली बार वीवीपैट मशीन को बतौर ट्रायल के रूप में इस्तेमाल किया था.

261 लोकसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला, जिनसे तय होगा दिल्ली के सत्ता का सिंहासन

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261 लोकसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला, जिनसे तय होगा दिल्ली के सत्ता का सिंहासन

लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए और कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन के बीच सीधी लड़ाई मानी जा रही है. हालांकि देश की तकरीबन आधी से ज्यादा लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां इन दोनों गठबंधन के अलावा तीसरी ताकत के रूप में क्षत्रप हैं, जो एनडीए और इंडिया के खिलाफ मजबूती के साथ चुनावी संग्राम में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

देश में ऐसी 261 लोकसभा सीटें हैं, जहां त्रिकोणीय मुकाबला होता दिख रहा है.

बता दें कि देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में से उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, तमिलनाडु और पंजाब सहित 9 राज्यों की 261 सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस और बीजेपी के सीधी लड़ाई के बजाय तीसरी पार्टी के उतरने से त्रिकोणीय मुकाबला होता नजर आ रहा है. क्षत्रप पूरे दमखम के साथ के चुनावी मैदान में हैं. देश की सत्ता से नरेंद्र मोदी को हर हाल में हटाने की कोशिशों में इंडिया गठबंधन के साथ क्षेत्रीय दल भी जुटे हैं, लेकिन दोनों दलों में आमने-सामने की लड़ाई के बजाय मुकाबला त्रिकोणीय होने से चुनाव दिलचस्प हो गया है.

UP में बसपा ने बनाई त्रिकोणीय लड़ाई

उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोकने के लिए इस बार कांग्रेस और सपा ने गठबंधन किया है. सूबे की 80 लोकसभा सीटों में कांग्रेस 17 और सपा 62 सीट पर चुनाव लड़ रही है, जबकि अखिलेश यादव ने अपने कोटे की एक सीट टीएमसी को दी है. यूपी में बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए को इंडिया गठबंधन सीधे चुनौती दे रहा है, लेकिन बसपा प्रमुख मायावती के अकेले चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है. यूपी में बसपा के प्रत्याशी 80 में से 79 सीट पर मैदान में है, बरेली सीट से पार्टी उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो गया है. इस तरह सूबे की चुनावी लड़ाई त्रिकोणीय होती दिख रही है. बसपा उम्मीदवार कहीं पर बीजेपी के लिए टेंशन बने हुए हैं, तो कहीं कांग्रेस-सपा गठबंधन की चिंता बढ़ा रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में त्रिकोणीय घमासान

पश्चिम बंगाल में इस बार किसी भी दल का कोई गठबंधन नहीं हुआ है. राज्य में टीएमसी, बीजेपी, कांग्रेस और वामपंथी दल हैं. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी अकेले सभी 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं, तो बीजेपी ने भी सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं. कांग्रेस और लेफ्ट ने औपचारिक रूप से तो गठबंधन नहीं किया, लेकिन एक दूसरे के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतार रहे हैं. इस तरह कांग्रेस-लेफ्ट एक दूसरे की आपसी समझ के साथ चुनाव लड़ रहे हैं. सूबे की 42 लोकसभा सीट पर बीजेपी, टीएमसी और लेफ्ट-कांग्रेस के प्रत्याशी मैदान में है. इसके अलावा इंडियन सेक्युलर फ्रंट के प्रमुख अब्बास सिद्दीकी ने भी 30 सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे कई सीट पर चार दलों के बीच मुकाबला है, लेकिन ज्यादातर सीटों पर मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच है.

केरल में UDF-LDF-बीजेपी

दक्षिण भारत के केरल की सियासी लड़ाई कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट की अगुवाई एलडीएफ के बीच तीसरी ताकत के रूप में बीजेपी गठबंधन मैदान में है. केरल की 20 सीटों पर 26 अप्रैल को दूसरे चरण में वोट डाले जाएंगे, लेकिन इस बार मुकाबला लेफ्ट और कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी सेभी है. बीजेपी केरल में पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरी है. पीएम मोदी से लेकर अमित शाह तक ने रैली करके सियासी माहौल बनाने का दांव चला है.

आंध्र प्रदेश की लड़ाई दिलचस्प

आंध्र प्रदेश में कुल 25 लोकसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला है. इस बार टीडीपी, बीजेपी और पवन कल्याण की पार्टी मिलकर चुनावी मैदान में उतरी है. एनडीए का मुकाबला जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी के बीच है. हालांकि, सूबे में मुख्य मुकाबला जगन मोहन रेड्डी और एनडीए के बीच है. यहां कांग्रेस अपना सियासी वजूद बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, जबकि एक दौर में उसका सबसे मजबूत दुर्ग हुआ करता था. इस बार आंध्र प्रदेश का चुनाव काफी रोचक माना जा रहा है क्योंकि जगन रेड्डी की बहन कांग्रेस की कमान संभाल रही हैं.

ओडिशा में कांग्रेस-बीजेपी-बीजेडी

ओडिशा में कुल 21 लोकसभा सीटें हैं. प्रदेश में कांग्रेस, बीजेपी और बीजेडी के बीच त्रिकोणीय लड़ाई है. प्रदेश में किसी भी पार्टी का कोई गठबंधन नहीं है. हालांकि यहां की सियासत के बेताज बादशाह बीजेडी प्रमुख और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हैं. बीजेडी शुरू से ही गैर-कांग्रेसी और बीजेपी दलों के साथ गठबंधन की बात करती रही है, लेकिन इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं है. बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की चर्चा थी, पर बात नहीं बन सकी. इसके चलते तीनों ही पार्टियां एक दूसरे के खिलाफ मजबूती से चुनावी मैदान में है.

तेलंगाना-तमिलनाडु में त्रिकोणीय फाइट

तेलंगाना में कुल 17 लोकसभा सीटें हैं. यहां की चुनावी लड़ाई मुख्य रूप से बीआरएस, कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. इस तरह से राज्य में तीसरी ताकत के रूप में केसीआर हैं, जो गैर-बीजेपी और गैर कांग्रेसी गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बनी. इसके बाद अकेले चुनाव मैदान में है, जिसके चलते ज्यादातर सीटों पर त्रिकोणीय लड़ाई होती दिख रही है.

वहीं, तमिलनाडु में एक बार फिर से कांग्रेस और डीएमके मिलकर चुनावी मैदान में हैं, लेकिन बीजेपी और एआईएडीएमके अलग-अलग चुनाव लड़ रही है. राज्य में कुल 39 लोकसभा सीटें है, जिसके चलते हर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा. तमिलनाडु की सभी सीट पर पहले चरण में वोटिंग हो चुकी है, लेकिन तेलंगाना में अभी मतदान होना बाकी है.

पंजाब-जम्मू-कश्मीर गठबंधन बिखरा

पंजाब में कुल 13 लोकसभा सीटें है. सूबे में कांग्रेस, बीजेपी, आम आदमी पार्टी और अकाली दल के बीच मुख्य मुकाबला है. पंजाब में किसी भी दल का कोई गठबंधन नहीं है, ये सभी अकेले-अकेले चुनाव में उतर रहे हैं, जिसके चलते इस बार मुकाबला काफी रोचक है. वहीं, जम्मू-कश्मीर में कुल 5 लोकसभा सीटें हैं. सूबे में चार दल प्रमुख रूप से हैं, जिनमें कांग्रेस, बीजेपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी हैं. इसके चलते मुकाबला काफी रोचक हो गया है.

उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, कर्नाटक और केरल में कुल 351 लोकसभा सीटों का फैसला होता है. जो भी दल इनमें से पांच राज्यों को जीतने में कामयाब रहता था, वो 200 सीटों के आंकड़े के करीब पहुंच जाता था. इसके बाद उसके लिए बहुमत के 272 के आंकड़े को छूना आसान हो जाता था. ये गणित 2014 में खत्म हो गया.

इस बार के चुनाव के लिए छह राज्य गणित बदल रहे हैं. महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक, झारखंड और ओडिशा. 193 लोकसभा सीटों का फैसला करने वाले इन राज्यों में जबरदस्त टक्कर है. इससे तय होगा कि बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी. ऐसे में देश के 9 राज्यों में त्रिकोणीय मुकाबला है, जहां पर कांग्रेस और बीजेपी के अलावा क्षत्रप हैं.

2019 में बीजेपी को 303 सीटें मिली थीं. उसने देश में बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, असम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की 320 में से 278 सीटें जीत कर लगभग सफाया कर दिया, लेकिन बाकी राज्यों में बड़ी जद्दोजहद के बावजूद कुल मिलाकर 25 सीटें ही जीत पाई थी. बीजेपी ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन वहां के अग्रणी दलों से बहुत पीछे रही. इस बार भी बीजेपी की कोशिश इन्हीं सीटों को जीतने की है, लेकिन विपक्षी दल जिस तरह से एकजुट होकर चुनावी में उतरे हैं, उससे बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती है.

चीन और ईरान के बीच होने जा रही ऐसी डील, भारत की बढ़ सकती है टेंशन

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चीन और ईरान के बीच होने जा रही ऐसी डील, भारत की बढ़ सकती है टेंशन

रान पर आरोप लगता आया है कि वे मध्यपूर्व में विद्रोह समूहों को ड्रोन और मिसाइल देता है. यहां तक कि यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने भी ईरान से उसके सस्ते ड्रोन खरीदे हैं. हाल ही में किए गए इजराइल पर हमले के बाद ईरान ने ये साबित कर दिया कि उसके ड्रोन 2 हजार किलोमीटर की दूरी से भी हमला करने में सक्षम हैं.

जिसके बाद दुनिया की बड़ी आर्थिक और सैन्य ताकत ने भी ईरान के इन ड्रोन को अपनी सेना में शामिल करने का फैसला किया है.

खबरों के मुताबिक, चीनी सेना ने ईरान को 15,000 आत्मघाती ड्रोन का ऑर्डर दिया है और इसके अलावा रूस भी ईरान से दोबारा बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदने जा रहा है. चीन और रूस दुनिया की बड़ी ताकत हैं और इनकी सैन्य ताकत अमेरिका की सेना से भी कम नहीं है. ऐसे में इन देशों का ईरान से हथियार खरीदना बताता है कि ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता किस हद तक बढ़ा ली है.

रूस ने खरीदे ईरानी ड्रोन

पिछले साल जून में व्हाइट हाउस ने कहा थी कि रूस ईरान के साथ अपने रक्षा सहयोग गहरा कर रहा है. व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने बताया था कि रूस ने ईरान से ड्रोन खरीदे हैं, जिनका इस्तेमाल वे यूक्रेन पर हमला करने के लिए कर रहा है. बता दें यूक्रेन-रूस युद्ध में ईरान के ड्रोन और अनक्रूड एरियल व्हीकल (UAV) का इस्तेमाल अच्छी तादाद में हुआ है.

चीन का इतनी बड़ी तादाद में ड्रोन खरीदना भारत के लिए भी खतरा बन सकता है. क्योंकि भारत का चीन के साथ सीमा विवाद पिछले कुछ सालों में गहरा हुआ है.

इजराइल हमले में दिखाई ताकत

अमेरिका और रूस दुनिया भर में अपने हथियार बेचते आए हैं. दुनिया के किसी भी कोने में जंग हो, इन दोनों देशों का नाम जरूर आता है. जानकार मानते हैं युद्ध अपने हथियारों की गुणवत्ता दुनिया को दिखाने का अवसर प्रदान करता है. दुनिया के किसी भी क्षेत्र के युद्ध में अमेरिका, फ्रांस ,ब्रिटेन और रूस का कूदना भी इस बात का सबूत है. जंग में अगर किसी देश के हथियार अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो उनकी मांग बढ़ जाती है. ईरान का इजराइल पर हमला करना उसको आर्म एक्सपोर्ट में मददगार साबित हो रहा है.

lok sabha chunav 2024 : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर संविधान और लोकतंत्र के मुद्दे पर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना…

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lok sabha chunav 2024 : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर संविधान और लोकतंत्र के मुद्दे पर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना…

नोटबंदी, किसान बिल, जीएसटी, कर्जा माफी सब केवल 22 लोगों के लिए. राहुल गांधी का PM मोदी पर बड़ा हमला…

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर संविधान और लोकतंत्र के मुद्दे पर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है. महाराष्ट्र के अमरावती में जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि लोकसभा का ये चुनाव संविधान और लोकतंत्र को बचाने का चुनाव है. राहुल गांधी ने कहा कि हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार किसी राजनीतिक पार्टी ने संविधान पर आक्रमण किया है और संविधान को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. इसे रोका जाना जरूरी है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि आज संविधान और लोकतंत्र के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई चल रही है. एक तरफ इंडिया गठबंधन है जो संविधान और लोकतंत्र बचाने का अभियान चला रहा है जबकि दूसरी तरफ पीएम मोदी, बीजेपी और आरएसएस है जो संविधान को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं.

हम किसी को संविधान नहीं बदलने देंगे- राहुल

राहुल गांधी ने इसी के साथ ये भी कहा कि बीजेपी और आरएसएस चाहे जितनी साजिश करे लेकिन हम किसी भी कीमत पर संविधान को बदलने नहीं देंगे. उन्होंने कहा कि संविधान गरीबों की, पिछड़ों की, दलितों की, आदिवासियों की आवाज है- इसे कोई नहीं बदल सकता है. राहुल गांधी ने कहा कि पिछले दस सालों के दौरान देश में कुल 22-25 लोगों को और अमीर बनाने का काम किया गया है. उन्होंने कहा कि आज देश में कुल 22 लोगों के पास उतना ही धन है जितना देश के 70 करोड़ लोगों के पास है. एक तरफ 22 लोग, दूसरी तरफ 70 करोड़. ये आज की सरकार की देन है.

केवल 22 लोगों के लिए हो रहा काम- राहुल

राहुल गांधी ने कहा कि नोटबंदी हो या किसान बिल, जीएसटी या हो या कर्जा माफी- प्रधानमंत्री ने ये सारा कुछ केवल 22 लोगों के लिए किया है. इसी के साथ उन्होंने सवाल उठाया कि देश के आम किसान हो या स्टूडेंट, मोदी सरकार ने इनमें से कितने लोगों का कर्जा माफ किया.

राहुल गांधी ने फिर गिनाए 5 गारंटियों के वादे

1. भर्ती भरोसा : 30 लाख सरकारी पदों पर तत्काल स्थायी नियुक्ति की गारंटी.

2. पहली नौकरी पक्की : हर ग्रेजुएट और डिप्लोमाधारी को एक लाख रु. सालाना स्टाइपेंड के अप्रेंटिसशिप की गारंटी.

3. पेपर लीक से मुक्ति : पेपर लीक रोकने के लिए नया कानून बना कर विश्वसनीय ढंग से परीक्षा के आयोजन की गारंटी.

4. GIG इकॉनोमी में सामाजिक सुरक्षा : GIG इकॉनोमी की वर्क फोर्स के लिए काम की बेहतर परिस्थितियों, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी.

5. युवा रोशनी : 5000 करोड़ के राष्ट्रीय कोष से जिला स्तर पर युवाओं को स्टार्ट-अप फंड देकर उन्हें उद्यमी बनाने की गारंटी.

कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे अखिलेश यादव, कल दाखिल करेंगे नामांकन…

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कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे अखिलेश यादव, कल दाखिल करेंगे नामांकन…

खिलेश यादव कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगे. वह कल अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं. इस बात की पुष्टि खुद सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने की है. पहले सपा की ओर से यहां तेज प्रताप सिंह यादव को टिकट दिया गया था. बताया जाता है कि इस बार तेज प्रताप यादव लोकसभा चुनाव लड़ना ही चाहते थे, इसे लेकर उन्होंने अखिलेश यादव से पैरवी की थी और अखिलेश इसके लिए तैयार भी थे. उन्होंने तेज प्रताप यादव की उम्मीदवारी का भी ऐलान कर दिया था, बुधवार को उन्हें नामांकन भी करना था, लेकिन एन वक्त पर उन्हें रोक दिया गया. अब बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव कल खुद नामांकन करेंगे. स्थानीय नेताओं के दबाव में लिया फैसला माना जा रहा है अखिलेश यादव के कन्नौज से चुनाव लड़ने के लिए स्थानीय नेताओं की जिद पर राजी हुए हैं. दरअसल कन्नौज के स्थानीय नेता किसी भी सूरत में तेज प्रताप यादव का समर्थन करने को तैयार नहीं थे. अखिलेश यादव ने खुद इन नेताओं से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे मानने को तैयार नहीं थे. इसके बाद अखिलेश यादव ने उनसे 24 घंटे का वक्त मांगा था.

छत्‍तीसगढ़ : भूपेश बघेल ने महंगाई के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर साधा निशाना…

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छत्‍तीसगढ़ : राजनांदगांव में जनसंपर्क के दौरान भूपेश बघेल भाजपा सरकार की नीतियों और वादा खिलाफियों के खिलाफ जमकर बरसे। भूपेश ने कहा, ये डबल इंजन की डबल परेशानी वाली सरकार है। भूपेश बघेल ने महंगाई के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर साधा निशाना छत्‍तीसगढ़ की राजनांदगांव लोकसभा से कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल ने कहा है कि भाजपा के नेता डबल इंजन की सरकार की बातें तो करते हैं, लेकिन सच यह है कि एक ओर एक इंजन लगातार महंगाई बढ़ा रहा है और दूसरा इंजन कांग्रेस सरकार की ओर से महंगाई से राहत दिलाने के लिए जो सुविधाएं मिली थीं, उसमें कटौती कर रहा है। ये डबल इंजन की डबल परेशानी वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार गरीब, आदिवासी और महिला विरोधी है। एक ओर कांग्रेस जहां गरीबों, आदिवासियों, महिलाओं और मजदूरों की मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखती है तो वहीं भाजपा गरीब को और गरीब बना रही है। उनसे सुविधाएं छीन रही है। भाजपा सरकार ने राशनकार्ड के चावल में भी कटौती: भूपेश बघेल ने कहा कि 2014 में भाजपा ने नारा दिया था, बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार, लेकिन आज 10 सालों बाद महंगाई दोगुनी से भी अधिक हो गई है। बढ़ी हुई महंगाई की सबसे अधिक मार घर में सबके भोजन का प्रबंध करने वाली माताओं-बहनों पर पड़ा है और अब तो भाजपा सरकार ने राशनकार्ड के चावल में भी कटौती कर दी है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 26 अप्रैल को छत्तीसगढ़ दौरे पर बेमेतरा में चुनावी सभा को करेंगे संबोधित । 

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 26 अप्रैल को छत्तीसगढ़ दौरे पर बेमेतरा में चुनावी सभा को करेंगे संबोधित । 

लोकसभा चुनाव के लिए 26 अप्रैल को दूसरे चरण और तीसरे चरण का मतदान 7 मई को होगा। 7 मई को होने वाले मतदान के लिए सभी पार्टियां तैयारियों में जुट गई है। लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व लगातार छत्तीसगढ़ का दौरा कर रहे हैं। पीएम मोदी दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर आए थे। पीएम मोदी से पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे पर आए थे। वहीं अब एक बार फिर गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे। मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 26 अप्रैल को छत्तीसगढ़ दौरे पर आएंगे। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह बेमेतरा जाएंगे और चुनावी सभा को संबोधित करेंगे। गृहमंत्री अमित शाह दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल के पक्ष में प्रचार करते हुए सभा को संबोधित करेंगे और जनता से भारी संख्या में मतदान करने की अपील करेंगे। बता दें कि, गृहमंत्री अमित शाह 26 अप्रैल को छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रहे हैं और उसी दिन दूसरे चरण के लिए मतदान भी होना है। 26 अप्रैल को छत्तीसगढ़ की राजनंदगांव, कांकेर और महासमुंद लोकसभा सीट पर मतदान होना है। वहीं केंद्रीय गृहमंत्री के दौरे और सभा को लेकर बेमेतरा में तैयारियां शुरू कर दी गई है।