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सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर ने ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ पर लिखा लेख, पीएम मोदी ने की प्रशंसा…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत दौरे और ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के बारे में सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक के लेख की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अलेक्जेंडर का लेख भारत की एआई में प्रगति और भारत-सर्बिया संबंधों को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक का एक शानदार लेख, जिसमें वे एआई के बारे में बात करते हैं, साथ ही भारत के लिए अपने लगाव, एआई में भारत की प्रगति और भारत-सर्बिया के मजबूत संबंधों पर भी प्रकाश डालते हैं।”

इससे पहले, राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपना लेख शेयर करते हुए लिखा, “भारत में आकर और ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में भाग लेकर खुशी हुई।”

उन्होंने अपने लेख की शुरुआत में लिखा, “एआई इम्पैक्ट समिट के लिए दिल्ली पहुंचने पर उन्हें बहुत खुशी महसूस हुई। यह एहसास उस देश को आगे बढ़ते हुए देखने से पैदा हुआ है जिसकी मैं लंबे समय से तारीफ करता रहा हूं और जो अपने साथियों के लिए सफलता का रास्ता बना रहा है।”

भारत की कई चीजों में एकता बनाए रखने की काबिलियत ने मुझे हमेशा से आकर्षित किया है। दुनिया के सबसे बड़े रिपब्लिक में से एक होने के नाते, जिसमें कई भाषाएं, धर्म, संस्कृतियां और परंपराएं हैं, यह देश एक जीवंत, गतिशील बहुलवाद का उदाहरण है।

अपनी जिंदगी के बारे में बात करते हुए उन्होंने लिखा, “1990 के दशक में लंदन में काम करते समय यहां (भारत) के लोगों से पहली बार मिलना हुआ, जिसके बाद भारत के प्रति मेरा लगाव बढ़ा। उस समय मैंने जो सबक सीखे, वे डिप्लोमेसी और पॉलिटिक्स के शोर-शराबे से बहुत दूर थे। उन्होंने मेरा चरित्र और दुनिया को देखने का मेरा नजरिया दोनों को बनाने में मदद की।”

राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक ने अपने लेख में लिखा, “ऐसे समय में जब मेरे आस-पास के कई यूरोपियन भारत और भारतीयों को कम आंकने के आदी थे, मेरे साथियों और दोस्तों के शांत पक्के इरादे और मेहनत ने मुझे कुछ और सोचने पर मजबूर कर दिया। जो लोग लंबे समय में भारत की तरक्की को खारिज करते हैं, मैंने तब सोचा था कि वे एक दिन गलत साबित होंगे।

उन्होंने आगे लिखा, “मैंने इस विश्वास को इस साल के वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में दावोस में फिर से महसूस किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक चर्चा में, एक दृष्टिकोण यह था कि भारत शायद वैश्विक एआई शक्तियों में ‘दूसरे दर्जे’ का स्थान रखेगा। मैं पूरी इज्जत के साथ असहमत हूं। भारत का एआई के प्रति दृष्टिकोण वास्तविक दुनिया में तैनाती, नैतिक मानकों और समावेशी नवाचार पर केंद्रित है। यह व्यावहारिक दृष्टिकोण, जो 21वीं सदी की दुनिया की सबसे जरूरी जरूरतों से जुड़ा है, भारत की इस आशा को दर्शाता है कि वह तकनीकी विकास को सामाजिक भलाई के लिए लागू करने में एक मार्गदर्शक बने।”

‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ को एक सम्मेलन से कहीं ऊपर बताते हुए उन्होंने कहा, “यह भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर वैश्विक चर्चा के केंद्र में मजबूती से रखता है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि असल दुनिया की चुनौतियों से निपटने के लिए एआई को जिम्मेदारी से, सबको साथ लेकर और बड़े पैमाने पर कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है।”

राष्ट्रपति अलेक्जेंडर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए तकनीकी लाभों के लिए समान पहुंच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि एआई कुछ विशेष वर्गों के लिए नहीं, बल्कि समावेशी विकास और सामूहिक उन्नति का इंजन बने।

हैदराबाद में सम्मान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल, क्या बदलेंगे समीकरण?

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बिहार की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई, जब महागठबंधन के घटक दल इंडियन इंक्लूसिव पार्टी के सुप्रीमो आईपी गुप्ता को हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

यह कार्यक्रम All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (एआईएमआईएम) के मंच पर आयोजित था, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।

दरअसल, यह अवसर एआईएमआईएम के बिहार से जीते विधायकों के सम्मान समारोह का था। हैदराबाद में आयोजित इस कार्यक्रम में पार्टी नेतृत्व ने अपने विधायकों का अभिनंदन किया। इसी समारोह में आईपी गुप्ता को भी आमंत्रित किया गया और उन्हें मंच पर सम्मानित किया गया।

आईपी गुप्ता की उपस्थिति और सम्मान के बाद बिहार की सियासत में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या वे महागठबंधन से दूरी बनाने की तैयारी में हैं? क्या राज्य में किसी नए राजनीतिक समीकरण की पटकथा लिखी जा रही है? हालांकि अभी तक इंडियन इंक्लूसिव पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में आगामी चुनावों को देखते हुए सभी दल अपनी-अपनी संभावनाओं को टटोल रहे हैं। ऐसे में विभिन्न दलों के बीच संवाद और मंच साझा करना पूरी तरह असामान्य नहीं माना जा सकता। फिर भी, एआईएमआईएम जैसे दल के कार्यक्रम में महागठबंधन के एक प्रमुख नेता की मौजूदगी को सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल में नेताओं के बीच बातचीत भी हुई। हालांकि किसी औपचारिक गठबंधन या समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

इधर, महागठबंधन के अन्य घटक दलों की नजर भी इस घटनाक्रम पर टिकी हुई है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इसे संभावित राजनीतिक बदलाव का संकेत बता रहे हैं।

फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि आईपी गुप्ता की यह उपस्थिति महज एक शिष्टाचार मुलाकात थी या भविष्य की किसी रणनीति का हिस्सा। लेकिन इतना तय है कि हैदराबाद के इस सम्मान समारोह ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में स्थिति और साफ होने की उम्मीद है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा- कांग्रेस, सपा और भाजपा की सोच अंबेडकर विरोधी, गठबंधन पर फैलाया जा रहा झूठ…

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने गठबंधन को लेकर चल रही खबरों का खंडन किया है। उन्होंने आरोप लगाए कि लोगों को गुमराह करने की नीयत से झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं।

मायावती ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भाजपा की सोच भीमराव अंबेडकर विरोधी होने के कारण उनके साथ गठबंधन से बसपा को भारी नुकसान होता है।

मायावती ने बुधवार को एक बयान जारी करके कहा, “व्यापक देश व जनहित की कड़वी हकीकत के बारे में देश व दुनिया को जागृत करके लोकतंत्र और संविधान को मजबूती प्रदान करने के बजाय, इन दिनों एआई को सफलता की कुंजी बताने की स्वार्थी चर्चाओं के बीच किसी ना किसी बहाने बसपा के बारे में यह चर्चा है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी विधानसभा का होने वाला अगला चुनाव गठबंधन में लड़ेगी, जो विशुद्ध रूप से लोगों को गुमराह करने की नीयत वाली यह झूठी और मनगढ़ंत खबरें हैं।”

उन्होंने कहा कि अपने बलबूते पर चुनाव लड़ने के बारे में बसपा की ओर से एक बार नहीं, बल्कि कई बार सार्वजनिक तौर पर घोषणा की गई। कुछ लोग घिनौनी साजिश में पड़कर इस प्रकार की उल्टी-पुल्टी व गलत खबर प्रचारित करने की फर्जी उड़ान भरकर अपना समय और इमेज दोनों बर्बाद करते हैं।”

बसपा सुप्रीमो ने लिखा, “पार्टी के लोगों को यह अच्छी तरह से मालूम है कि कांग्रेस, सपा और भाजपा की सोच संकीर्ण है और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विरोधी होने के कारण इनकी अंबेडकरवादी बसपा से गठबंधन करने की नीति सिर्फ वोटों का राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ है। ऐसे गठबंधन से बसपा को नुकसान होता है। इसलिए 2027 में अकेले ही पूरे जी-जान से लगे हुए हैं।”

मायावती ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे ऐसी अनर्गल व मनगढ़ंत बातों पर कतई भी ध्यान ना दें और वे हाथी की मस्त चाल चलते रहें। 2007 की तरह अकेले ही यह चुनाव लड़कर फिर से वे बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएं।”

मायावती ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने वर्तमान सरकार की ओर से दिल्ली में अलॉट टाइप-8 बंगले को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने बताया कि यह उन्हें त्यागराज मार्ग पर अलॉट बंगले के बदले में मिला है। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि इसको लेकर राजनीति करना उचित नहीं है।

माइक्रोसॉफ्ट ग्लोबल साउथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए निवेश करेगा 50 अरब डॉलर…

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अमेरिकी दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने बुधवार को ऐलान किया कि वह ग्लोबल साउथ के देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को बढ़ावा देने के लिए इस दशक के अंत तक 50 अरब डॉलर निवेश करेगा।

माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयर और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ और माइक्रोसॉफ्ट की वाइस प्रेसिडेंट और चीफ रिस्पॉन्सिबल एआई ऑफिसर नताशा क्रैम्पटन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि ग्लोबल नॉर्थ में एआई का उपयोग ग्लोबल साउथ की तुलना में लगभग दोगुना है।

उन्होंने लिखा,”यह खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। यह असमानता न केवल राष्ट्रीय और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रभावित करती है, बल्कि इस बात पर भी असर डालती है कि क्या एआई दुनिया भर में अवसरों और समृद्धि को बढ़ाने के अपने व्यापक वादे को पूरा कर सकता है।”

स्मिथ ने कहा कि ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ ने इस चुनौती को अपने एजेंडे के केंद्र में रखकर बिल्कुल सही काम किया है।

उन्होंने कहा, “एक सदी से भी अधिक समय से, बिजली तक असमान पहुंच ने वैश्विक उत्तर और दक्षिण के बीच बढ़ती आर्थिक खाई को और गहरा कर दिया है। यदि हम तत्काल कार्रवाई नहीं करते हैं, तो एआई की बढ़ती खाई आने वाली सदी में इस असमानता को और बढ़ा देगी।”

माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में ‘एजुकेटर्स के लिए एलिवेट’ कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य 2,00,000 से अधिक स्कूलों, व्यावसायिक संस्थानों और उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत 20 लाख शिक्षकों की क्षमता को बढ़ाना है।

कंपनी ने कहा, “हमारा लक्ष्य देश के शिक्षण कार्यबल को एआई-आधारित भविष्य में आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व करने में मदद करना है। यह कार्यक्रम भारत के राष्ट्रीय शिक्षा और कार्यबल प्रशिक्षण प्राधिकरणों के साथ साझेदारी में चलाया जाएगा, जिससे 80 लाख छात्रों के लिए एआई के समान अवसर उपलब्ध होंगे।”

पिछले वित्तीय वर्ष में ही, माइक्रोसॉफ्ट ने ग्लोबल साउथ को सर्विस देने वाले डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में 8 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया। इसमें भारत, मैक्सिको और अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, दक्षिणपूर्व एशिया और मध्य पूर्व के देशों में नया इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

इसके अलावा, 24 मिलियन की संख्या के साथ, भारतीय डेवलपर समुदाय गिटहब पर दूसरा सबसे बड़ा राष्ट्रीय समुदाय है, जहां डेवलपर एआई के बारे में सीखते हैं और दुनिया भर के डेवलपर्स के साथ सहयोग करते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट ने कहा, “भारतीय समुदाय शीर्ष 30 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला समुदाय है, जिसकी वृद्धि दर 2020 से हर साल 26 प्रतिशत से अधिक रही है और 2025 की चौथी तिमाही तक वार्षिक वृद्धि में 36 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया था।”

मोहन भागवत के यूजीसी वाले बयान पर तनवीर सादिक बोले, देश में किसी पर विचार थोपना उचित नहीं…

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जम्मू में यूजीसी गाइडलाइन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में किसी भी विचार को थोपना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हर धर्म को अपने अधिकार देता है और किसी पर निर्णय थोपना लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है।

तनवीर सादिक ने घुसपैठियों को रोजगार न देने संबंधी टिप्पणी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह तय कैसे होगा कि घुसपैठिया कौन है? यदि किसी समुदाय को सामूहिक रूप से संदेह के दायरे में रखा जाता है तो यह गलत और अनुचित है।

वहीं पीडीपी विधायक आगा सैयद मुंतजिर मेहदी ने कहा कि कानून का उद्देश्य लोगों के अधिकारों की रक्षा करना होता है, न कि किसी विशेष वर्ग को दंडित करना। उन्होंने यूजीसी से जुड़े प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम एक वर्ग को संतुष्ट करने और दूसरे को दंडित करने की भावना से प्रेरित प्रतीत होता है।

दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि यूजीसी के नियमों का पालन होना चाहिए और इसमें विवाद की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को राजनीति से दूर रखना चाहिए और संस्थानों में शैक्षणिक व्यवस्था सर्वोपरि होनी चाहिए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यूजीसी गाइडलाइन से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा था कि कानून सभी को मानना चाहिए और यदि कानून गलत है तो उसे बदलने का संवैधानिक तरीका मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि जातियां संघर्ष का कारण नहीं बननी चाहिए और समाज में अपनत्व का भाव मजबूत होना चाहिए।

भागवत ने कहा था कि जो लोग पीछे रह गए हैं, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए समाज को झुककर सहयोग करना चाहिए। समाज में समन्वय से ही प्रगति संभव है, संघर्ष से नहीं। एक को दबाकर दूसरे को आगे बढ़ाने की मानसिकता समाज को कमजोर करती है। उन्होंने ये बातें लखनऊ के सरस्वती शिशु मंदिर, निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक के दौरान कहीं थीं।

“ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, अब 18 मार्च को होगी अगली सुनवाई”

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आई- पैक रेड मामले में ममता बनर्जी के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी। अदालत में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ईडी आज ही अपना जवाब दाखिल कर देगी।

प्रवर्तन निदेशालय ने आई-पैक के दफ्तरों पर छापेमारी के दौरान कथित दखलअंदाजी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार को पक्षकार बनाया गया है। ईडी ने इन तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

दूसरी ओर ममता बनर्जी ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में ईडी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालयों में तलाशी के नाम पर ईडी अधिकारियों ने तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा गोपनीय और चुनावी रणनीति का डेटा जब्त कर लिया। उनके अनुसार यह कार्रवाई न केवल अवैध थी, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में दखल देने जैसी भी है।

ममता बनर्जी ने अपने हलफनामे में कहा कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि आई-पैक के दफ्तरों में तलाशी चल रही है और वहां पार्टी का संवेदनशील डेटा मौजूद है, वह खुद वहां पहुंचीं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पार्टी की गोपनीय सामग्री को सुरक्षित रखना था, ताकि उसका किसी तरह से दुरुपयोग न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ईडी की कार्रवाई में किसी प्रकार की बाधा नहीं डाली।

अब इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें 18 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में सुनी जाएंगी। अदालत के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला जांच एजेंसी की कार्रवाई और राज्य सरकार के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

“16 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा, राजनीति में उठे नए सवाल”

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भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और बिहार की 16 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की तारीखें घोषित कर दी हैं। इस ऐलान के बाद कई राज्यसभा सांसदों के भविष्य को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

एनसीपी के शरद गुट के नेता शरद पवार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह अब राजनीति से संन्यास लेंगे। उनके संन्यास की घोषणा के बाद यह सवाल उठ रहा है कि राज्यसभा में उनकी जगह कौन आएगा और पार्टी की रणनीति क्या होगी।

बिहार की राजनीति में भी राज्यसभा सीटों को लेकर हलचल तेज है। यहां गठबंधन की आंतरिक राजनीति के कारण उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति और उनकी राज्यसभा संभावनाओं पर नजरें लगी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर चर्चा जोरों पर है।

महाराष्ट्र में भी राजनीतिक समीकरण बदलते दिख रहे हैं। उद्धव ठाकरे की घटती सियासी शक्ति और प्रियंका चतुर्वेदी के संसदीय भविष्य को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति और गठबंधन सहयोगियों के रुख का फैसला महत्वपूर्ण साबित होगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव केवल सीट जीतने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में राज्यों और केंद्र के बीच राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने वाला भी है। शरद पवार के संन्यास, बिहार और महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण, सभी को मिलाकर यह चुनाव कई नई दिशा तय करेगा।

हालांकि, सभी दलों ने अभी तक औपचारिक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व इस पर अंतिम निर्णय लेगा। इस बीच मीडिया और राजनीतिक हलकों में भविष्य के संभावित दावेदारों और गठबंधनों को लेकर अटकलें जारी हैं।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन केवल राजनीतिक समीकरण और सीटों के बंटवारे पर आधारित नहीं होगा, बल्कि इसमें गठबंधन की ताकत, उम्मीदवार की लोकप्रियता और भविष्य की रणनीति को भी महत्व दिया जाएगा।

कुल मिलाकर, 16 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा ने राजनीतिक माहौल को गरम कर दिया है। शरद पवार के संन्यास और बिहार व महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। आने वाले दिनों में इस पर पार्टियों की रणनीति और उम्मीदवारों के चयन से ही वास्तविक दिशा स्पष्ट होगी।

पीएम मोदी से मिले स्पेन के राष्ट्रपति सांचेज: द्विपक्षीय बैठक में डिफेंस, ट्रेड और तकनीक को लेकर हुई बात…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली में स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ बैठक में द्विपक्षीय मुद्दों पर बात की। दोनों ने व्यापार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और कई दूसरे जरूरी सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

प्रधानमंत्री ने बाद में कहा बैठक काफी अच्छी रही।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने के लिए सांचेज नई दिल्ली पहुंचे। यह एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म है जो उद्योग-धंधे और सरकार चलाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर फोकस करता है।

समिट में शामिल होने से पहले सांचेज ने पीएम मोदी के साथ अहम बैठक की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी।

उन्होंने लिखा, “दिल्ली में राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ एक अच्छी मीटिंग हुई। इंडिया-स्पेन दोस्ती को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा हुई, खासकर डिफेंस, सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और दूसरे क्षेत्रों में। हमारे देश 2026 को इंडिया-स्पेन ईयर ऑफ कल्चर, टूरिज्म और एआई के तौर पर मना रहे हैं। इससे लोगों के बीच जुड़ाव और गहरा होगा। स्पेन के विश्वविद्यालय का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है; यह देखकर खुशी हुई। यह भी हमारे लोगों को जोड़ने में बहुत मदद करेगा।”

पीएम ने आगे लिखा, “ईयू के साथ ऐतिहासिक एफटीए का स्पेन के साथ इकोनॉमिक पार्टनरशिप पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा और दोनों देशों के लोगों को नए अवसर उपलब्ध कराएगा।”

इससे पहले नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता के बाद, विदेश मंत्रालय (एमईए) ने एक्स पर बातचीत का ब्योरा शेयर करते हुए कहा, “पीएम मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने आए स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों नेताओं ने इंडिया-स्पेन साझेदारी को गहरा करने के मकसद से कई मुद्दों पर चर्चा की।”

प्रधानमंत्री के साथ अपनी मीटिंग से पहले, प्रेसिडेंट सांचेज ने स्पेन-इंडिया सीईओ फोरम में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने स्पेन में निवेश की संभावनाओं पर बल दिया और भारत के प्रमुख उद्यमियों से बिजनेस संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की।

एक्स पोस्ट में, राष्ट्रपति सांचेज ने कहा, “स्पेन एक ऐसा देश है जिसमें निवेश करना चाहिए। यह एक स्ट्रेटेजिक पार्टनर भी है, जो ग्रोथ, स्टेबिलिटी, टैलेंट और इनोवेशन देता है। यही बात मैंने नई दिल्ली में भारतीय कंपनियों के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स से मिलकर उन्हें बताई है।”

स्पेनिश राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता भारत-स्पेन के बीच लंबे समय से चले आ रहे और अच्छे रिश्तों को और मजबूती प्रदान करती है, ये 1956 में राजनयिक रिश्ते बनने के समय से हैं।

राष्ट्रपति सांचेज इससे पहले 28-29 अक्टूबर, 2024 को भारत आए थे। वह दौरा उनका पहला भारत दौरा था और 18 सालों में स्पेन सरकार के किसी राष्ट्रपति का भारत दौरा था।

CG: 24 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा छत्तीसगढ़ का बजट, वित्त मंत्री ओपी चौधरी बोले- इस बार नई थीम…

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ओपी चौधरी ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है, उसी दिशा में छत्तीसगढ़ को भी विकसित राज्य बनाने के लिए काम किया जाएगा. सरकार शॉर्ट टर्म प्लानिंग के तहत एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए दीर्घकालीन लक्ष्यों को हासिल करेगी.

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत 23 फरवरी से होगी. इसके अगले दिन 24 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश किया जा सकता है. इसकी जानकारी प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी. यह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का तीसरा बजट होगा.

इस बार का बजट नई थीम पर होगा 

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार का पहला बजट ज्ञान आधारित था, जिसे गरीब, युवा, किसान और महिलाओं को समर्पित किया गया था. दूसरा बजट गति की रणनीति पर केंद्रित रहा, जिसमें गुड गवर्नेंस, एक्सीलरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रियल ग्रोथ पर विशेष फोकस किया गया. अब तीसरा बजट कुछ नई थीम और विजन के साथ पेश किया जाएगा.

विकसित प्रदेश बनाने का लक्ष्य 

ओपी चौधरी ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है, उसी दिशा में छत्तीसगढ़ को भी विकसित राज्य बनाने के लिए काम किया जाएगा. सरकार शॉर्ट टर्म प्लानिंग के तहत एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए दीर्घकालीन लक्ष्यों को हासिल करेगी.

जनता को परेशान किया 

बजट को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जाने वाले सवालों पर पलटवार करते हुए ओपी चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने राजीव गांधी न्याय योजना के नाम पर किसानों और आम जनता को परेशान किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने किसानों के साथ अन्याय किया, जबकि मौजूदा सरकार एकमुश्त दुगनी राशि दे रही है.

कांग्रेस ने पांच रुपये तक नहीं दिए 

ओपी चौधरी ने उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने माताओं को 500 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन 5 रुपये तक नहीं दिए. वहीं वर्तमान सरकार हर साल करीब 8000 करोड़ रुपये माताओं को दे रही है. ओपी चौधरी ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कांग्रेस करती रहेगी, क्योंकि विष्णु देव साय की सरकार कांग्रेस को पच नहीं रही है.

CG: कांग्रेस का सरकार पर हमला, कानून-व्यवस्था पर सवाल, SIR प्रक्रिया पर भी कांग्रेस के आरोप…

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कांग्रेस का सरकार पर हमला

छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी ने गर्मी बढ़ा दी है. कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के छत्तीसगढ़ प्रभारी डॉ. अमीनुल खान सूरी ने राजीव भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि “आज छत्तीसगढ़ बांग्लादेश बनता जा रहा है”, और आरोप लगाया कि राज्य में अल्पसंख्यकों के साथ प्रताड़ना की घटनाएं बढ़ रही हैं.

कानूनव्यवस्था पर सवाल, ”अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना

डॉ. सूरी ने कहा कि छत्तीसगढ़ को लंबे समय तक “शांति का टापू” कहा जाता रहा है, लेकिन वर्तमान हालात चिंताजनक हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है और प्रशासन संवेदनशील मामलों में गंभीरता नहीं दिखा रहा. सूरी ने कहा कि कब्रिस्तान से जुड़े मामलों में अनावश्यक विवाद खड़े किए जा रहे हैं. साथ ही क्रिसमस के दिन मॉल में सांता क्लॉज की प्रदर्शनी में तोड़फोड़ जैसी घटनाएं सामाजिक सौहार्द पर चोट करती हैं. कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी परिस्थितियां क्यों बन रही हैं? शासन-प्रशासन इन मामलों पर मौन क्यों है? क्या प्रदेश में सामाजिक सौहार्द को कमजोर करने की कोशिश हो रही है?

SIR प्रक्रिया पर भी कांग्रेस के आरोप

डॉ. सूरी ने SIR की प्रक्रिया पर भी गंभीर आपत्ति जताई. आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि उनके संगठन के एक पदाधिकारी का नाम भी SIR के दौरान सूची से हटा दिया गया है. कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें न्याय मिले. उन्होंने राज्य सरकार से उन्मादी तत्वों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए.

सरकार का पलटवार: अवैध घुसपैठ पर सख्ती जारी

इधर राज्य सरकार ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने का दावा किया. हाल ही में आयोजित पत्रकार वार्ता में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि बीते दो वर्षों में 34 अवैध घुसपैठियों को डिपोर्ट किया गया है. उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए विशेष एसटीएफ का गठन किया गया है, नागरिकों से सूचना प्राप्त करने हेतु टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है. संदिग्धों के लिए होल्डिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं. उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में अवैध रूप से रहने वालों के खिलाफ आगे भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी कीमत पर घुसपैठियों को बख्शा नहीं जाएगा.

सियासी बयानबाजी से बढ़ा तापमान

एक ओर कांग्रेस राज्य में कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर सरकार को घेर रही है, तो दूसरी ओर सरकार अवैध घुसपैठ और सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी सख्ती को प्रमुखता से पेश कर रही है. अब सवाल यह है कि क्या यह केवल सियासी बयानबाजी है या प्रदेश में वाकई सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ रहा है? आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान और तेज होने के संकेत हैं.