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डीके जांगला बने दिल्‍ली न्‍यायिक सेवा संघ के अध्‍यक्ष, सचिव-कोषाध्‍यक्ष पद पर किसे मिली जीत? जानें

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दिल्ली न्यायिक सेवा संघ (DJSA) के चुनावों के नतीजे आ गए हैं. अतिरिक्‍त सत्र न्‍यायाधीश देवेंद्र कुमार जांगला दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (DHJS) के अध्‍यक्ष चुने गए हैं. उन्‍हें 498 वोट मिले. उन्होंने रुचि अग्रवाल को हराया, जिन्हें महज 97 वोट ही मिले. 2 नवंबर, 2023 की अधिसूचना के अनुसरण में यह चुनाव आयोजित किए गए थे. चुनाव के माध्‍यम से दिल्ली न्यायिक सेवा संघ के सचिव, कोषाध्यक्ष और अध्‍यक्ष को चुना जाना था. जज शेफाली बरनाला टंडन 400 वोटों के साथ सचिव चुनी गईं. उन्होंने हिमांशु तंवर को 155 वोटों से हराया, जबकि ओमबीर शौकीन को सिर्फ 40 वोट मिले. इसी तर्ज पर जज नेहा पांडे को 430 वोट मिले और वह 166 वोट पाने वाली रुचिका त्यागी को हराकर कोषाध्यक्ष चुनी गईं.

इससे पहले, पंजाब हाई कोर्ट एक सर्किट बेंच के माध्यम से दिल्ली पर अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करता था, जो केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली और दिल्ली प्रशासन से संबंधित मामलों को देखता था. दिल्ली के महत्व, इसकी जनसंख्या और अन्य विचारों को देखते हुए, संसद ने दिल्ली का एक अलग एवं नया हाई कोर्ट स्थापित करना आवश्यक समझा. 5 सितंबर, 1966 को दिल्ली हाई कोर्ट अधिनियम, 1966 को लागू करके हासिल किया गया था.
 क्‍यों पड़ी जज एसोसिएशन बनाने की जरूरत?
दिल्ली हाई कोर्ट की स्थापना के बाद दिल्ली का न्यायिक सेवा संघ सामने आया. जज एसोसिएशन का मुख्य उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों का कल्याण है. दिल्ली न्यायिक सेवा संघ बनाम गुजरात राज्य द्वारा शुरू किए गए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले को उठाया था, जहां गुजरात के एक न्यायिक अधिकारी को एक पुलिस स्टेशन में शराब पीने के लिए मजबूर किया गया था. उन्हें वहां जाने के लिए कहा गया. उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और सरकार के समक्ष पेश किया गया था. हथकड़ी लगी अवस्था में उन्‍हें जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया और उसकी फोटो भी खींची गई.

सस्ता हुआ पेट्रोल….नए रेट जारी

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नजर आ रही है. सोमवार सुबह 6 बजे के करीब WTI क्रूड 73.56 डॉलर प्रति बैरल पर बिक रहा है. वहीं, ब्रेंट क्रू़ड 79.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. देश में तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जारी कर दिए हैं. भारत में हर सुबह 6 बजे ईंधन के दामों में संशोधन किया जाता है. जून 2017 से पहले कीमतों में संशोधन हर 15 दिन के बाद किया जाता था. गुजरात में पेट्रोल और डीजल 78 पैसे की बढ़त के साथ बिक रहे हैं. हरियाणा में पेट्रोल 14 और डीजल 13 पैसे महंगा हुआ है. इसके अलावा ओडिशा, तेलंगाना, राजस्थान और आंध्र प्रदेश में भी पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई है. महाराष्ट्र में पेट्रोल 44 पैसे और डीजल 43 पैसे सस्ता हुआ है. उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल 35 पैसे सस्ते हुए हैं. पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अरुणाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमत में चारों महानगरों में पेट्रोल-डीजल के दाम – दिल्ली में पेट्रोल 96.72 रुपये और डीजल 90.08 रुपये प्रति लीटर – मुंबई में पेट्रोल 106.31 रुपये और डीजल 94.27 रुपये प्रति लीटर – कोलकाता में पेट्रोल 106.03 रुपये और डीजल 92.76 रुपये प्रति लीटर – चेन्नई में पेट्रोल 102.74 रुपये और डीजल 94.33 रुपये प्रति लीटर इन शहरों में कितने बदले दाम – नोएडा में पेट्रोल 96.76 रुपये और डीजल 89.93 रुपये प्रति लीटर हो गया है. – गाजियाबाद में 96.34 रुपये और डीजल 89.52 रुपये प्रति लीटर हो गया है. – लखनऊ में पेट्रोल 96.74 रुपये और डीजल 89.93 रुपये प्रति लीटर हो गया है. – पटना में पेट्रोल 107.59 रुपये और डीजल 94.36 रुपये प्रति लीटर हो गया है. – पोर्टब्‍लेयर में पेट्रोल 84.10 रुपये और डीजल 79.74 रुपये प्रति लीटर हो गया है.

नया बिजनेस शुरू करने वालों के लिए फरिश्ते हैं ये लोग, बिना ब्याज लिए देते हैं पैसे, बस आइडिया में हो दम

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कोई भी नया बिजनेस शुरू करने के लिए पैसे की जरूरत होती है. कई लोगों के पास यह पैसा पहले से होता है, लेकिन बहुत लोग ऐसे भी होते हैं जिनके के लिए वित्त एक बड़ी समस्या होती है. ऐसे लोगों के पास बैंक या किसी अन्य वित्तीय संस्थान से पैसे लेने का विकल्प होता है. इसमें एक समस्या ये है कि अगर बिजनेस डूबा तो बैंक को पैसा लौटाने में दिन में तारे दिख जाएंगे. बैंक को आप मूल के साथ सूद यानी ब्याज भी देते हैं. 10 लाख का लोन कब 15-20 लाख का हो जाता है पता नहीं चलता. बैंक से लोन लेने में एक समस्या यह भी है कि ज्यादातर बैंक आपको नया बिजनेस शुरू करने की बजाय पहले से स्थापित व्यवसाय को एक्सपेंड करने के लिए पैसा देते हैं. ऐसे में मध्यमवर्गीय या आर्थिक रूप से कमजोर परिवार का कोई व्यक्ति अगर बिजनेस के लिए पैसा चाहे तो उसे गैर-संगठित क्षेत्र का रुख करना पड़ता है. यहां से कर्ज लेने में कई समस्याएं होती हैं. यहां लोन आपको जल्दी मिलता है लेकिन उसकी ब्याज दर बहुत अधिक होती है. इन पर कोई रेग्युलेशन नहीं होता इसलिए यह रिकवरी के लिए मनमाने तरीके अपनाते हैं. एंजेल इन्वेस्टर्स उपरोक्त दोनों विकल्पों को देखने के बाद आप पाएंगे कि बिजनेस शुरू करने या बिजनेस को बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा मददगार होते हैं एंजेल इन्वेस्टर्स. ये क्या होते हैं और क्यों बेहतर होते हैं, हम इसके बारे में आगे जानेंगे. एजेंल इन्वेस्टर्स बिजनेस की शुरुआत या एक्सपेंशन के लिए आपको फंडिंग देते हैं. इसके लिए वह आपसे ब्याज की उम्मीद नहीं करते. नाही आपको उन्हें पैसा लौटाने की उम्मीद नहीं रखते. वह आपसे कंपनी में हिस्सेदारी मांगते हैं. यह हिस्सेदारी कितनी भी हो सकती है. यह पूरी तरह उद्यमी और इन्वेस्टर के बीच हुई समझौते पर निर्भर करता है. क्या होता है इसका फायदा स्टार्टअप नवगति के सीईओ और सह-संस्थापक वैभव कौशिक कहते हैं कि स्टार्टअप से फंडिंग लेना फायदेमंद हो सकता है. बकौल वैभव, इससे आपको वित्तीय सहायता के साथ-साथ अच्छी गाइडेंस भी मिलती है जो किसी बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान से हासिल करना मुश्किल है. लौनटैप के चीफ बिजनेस ऑफिसर अमित वेंकेश्वर कहते हैं, “एंजेल निवेशकों से फंडिंग हासिल करना पारंपरिक बैंकों और वित्तीय संस्थानों की तुलना में तेज़ और गतिशील लाभ प्रदान करता है.” बकौल वेंकेश्वर, “एंजेल निवेशक न केवल कैपिटल बल्कि स्ट्रैटेजिक गाइडेंस,इंडस्ट्री इनसाइट्स और तेज़ निर्णय लेने की प्रक्रिया भी प्रदान करते हैं.”

अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस पटरी से उतरी, 4 डिब्बे हुए डि-रेल, हड़कंप मचा, जानें कहां हुआ हादसा

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अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस आज अचानक पटरी से उतर गई. हादसा अजमेर के मदार यार्ड में हुआ. वहां ट्रेन के 4 डिब्बे डि-रेल हो गए. उस समय ट्रेन मेंटिनेंस के लिए जा रही थी. गनीमत है कि बे-पटरी होने के दौरान ट्रेन खाली थी. ट्रेन के बे-पटरी होने से किसी तरह का बड़ा कोई नुकसान नहीं हुआ है. ट्रेन के बेपटरी होने की सूचना पर रेलवे प्रबंधन मौके पर पहुंचा और हालात का जायजा लिया. डि-रेल हुए कोच को वापस पटरियों पर चढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.

खत का जवाब खत! VP जगदीप धनखड़ ने बुलाया, फिर भी मिलने क्यों नहीं गए खरगे? लेटर लिख बताई असल वजह

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उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने आज यानी 25 दिसंबर को कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे को संसद में व्यवधान और विपक्षी सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर बातचीत के लिए अपने आवास पर आमंत्रित किया था, मगर मल्लिकार्जुन खरगे आज नहीं मिल पाए. कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति के पत्र का जवाब दिया और खत लिखकर मुलाकात न करने की वजह बताई है. मल्लिकार्जुन खरगे ने जवाबी खत में कहा कि वह आज मुलाकात नहीं कर पाएंगे, क्योंकि वह अभी दिल्ली से बाहर हैं और दिल्ली वापस आते ही वह उनसे मुलाकात करेंगे.

खरगे ने बताई मुलाकात न करने की वजह
मल्लिकार्जुन खरगे ने उपराष्ट्रपति और उच्च सदन के सभापति जगदीप धनखड़ के पत्र के जवाब में लिखा और कहा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों से सांसदों का सामूहिक निलंबन ‘सरकार द्वारा पूर्व निर्धारित और पूर्व नियोजित लगता है.’ सभापति धनखड़ द्वारा आज अपने कक्ष में विभिन्न मामलों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने कहा कि वह फिलहाल दिल्ली से बाहर हैं और राष्ट्रीय राजधानी लौटने के बाद उन्होंने नई बैठक का प्रस्ताव रखा है. उन्होंने आगे कहा, ‘हालांकि मैं फिलहाल दिल्ली से बाहर हूं, यह मेरा विशेषाधिकार होगा और वास्तव में मेरा कर्तव्य होगा कि मैं दिल्ली वापस आते ही आपकी सुविधानुसार जल्द से जल्द मिलूं.’

मल्लिकार्जु खरगने और क्या कहा
मल्लिकार्जुन खरगे ने आगे कहा कि सभापति सदन का संरक्षक होता है और उसे सदन की गरिमा बनाए रखने, संसदीय विशेषाधिकारों की रक्षा करने और संसद में बहस, चर्चा और उत्तर के माध्यम से अपनी सरकार को जवाबदेह रखने के लोगों के अधिकार की रक्षा करने में सबसे आगे रहना चाहिए. यह दुखद होगा, जब इतिहास बिना बहस के पारित किए गए विधेयकों और सरकार से जवाबदेही की मांग न करने के लिए पीठासीन अधिकारियों को कठोरता से आंकेगा.

जगदीप धनखड़ ने अपने पत्र में क्या लिखा ता
बता दें कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे को संसद में व्यवधान और विपक्षी सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर बातचीत के लिए 25 दिसंबर को अपने आवास पर आमंत्रित किया था और कहा था कि उनके बार-बार आग्रह के बावजूद शीतकालीन सत्र के दौरान ऐसी बैठक नहीं हो सकी. उपराष्ट्रपति ने कहा था कि सदन में व्यवधान इरादातन था और रणनीति के तहत था. धनखड़ ने पत्र में कहा, ‘इस प्रकरण में मुख्य विपक्षी दल की पूर्वनियोजित भूमिका की ओर इंगित करके, मैं आपको लज्जित नहीं करना चाहता, लेकिन जब कभी भी मुझे आपसे बातचीत करने का अवसर लाभ मिलेगा, मैं आपसे वह साझा अवश्य करूंगा.’

क्रिसमस पर मिलने का भेजा था न्योता
राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे को एक ताजा पत्र में धनखड़ ने लिखा, ‘हमें आगे बढ़ने की जरूरत है और उन्हें 25 दिसंबर को या उनकी सुविधानुसार किसी भी समय पर अपने आधिकारिक आवास पर बातचीत के लिए आमंत्रित किया. खरगे के 22 दिसंबर के पत्र का जवाब देते हुए राज्यसभा के सभापति ने कहा कि उन्हें संतोष होता अगर कांग्रेस नेता का यह दावा कि ‘हम संवाद और बातचीत में दृढ़ता से यकीन रखते हैं’ वास्तव में चरितार्थ हो पाता. धनखड़ ने पत्र में लिखा है कि पूरे सत्र भर, कभी मैंने सदन के अंदर आग्रह किया तो कभी पत्र लिखकर आपसे संवाद और परामर्श करने का अनुरोध किया, आपसे बातचीत करने के लिए बार बार किया गया मेरा हर प्रयास विफल रहा.

क्या बूस्टर डोज की है जरूरत, कब लगेगी चौथी वैक्सीन? कोरोना के JN.1 पर सरकार ने दिया अपडेट

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भारत में कोरोना वायरस के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं. वहीं दुनिया भर में कोहराम मचाने वाला कोरोना वायरस के नए सब-वेरिएंट JN.1 की एंट्री भारत में हो चुकी है. केरल में पहला मामला सामने आने के बाद गोवा और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में इसके मामलों में तेजी से उछाल आए हैं. वहीं इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्य सरकारों को अलर्ट रहने का निर्देश दिया है. सराकर ने यह स्पष्ट किया है कि फिलहाल बूस्टर डोज या चौथी वैक्सीन लेने की कोई जरूरत नहीं है. भारत SARS-CoV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) के प्रमुख एन.के. अरोड़ा ने बताया कि नए सब-वेरिएंट के सामने आने के बाद कोरोना वैक्सीन के बूस्टर डोज की कोई जरूरत नहीं है. डॉ. अरोड़ा ने कहा, ‘केवल 60 वर्ष से अधिक आयु के वे लोग, जो कि गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं, वे एहतियाती तौर पर तीसरी डोज ले सकते हैं. अगर उन्होंने अब तक एक भी खुराक नहीं ली है. फिलहाल आम जनता को चौथी डोज की जरूरत नहीं है. हम घबराने की सलाह नहीं देंगे.’ उन्होंने कहा, ‘राहत की बात यह है कि ओमिक्रॉन के इस नए सब-वेरिएंट के सामने आए मामले अधिक गंभीर नहीं हैं और संक्रमितों को अस्पताल में भर्ती नहीं कराना पड़ा है. JN.1 सबवेरिएंट के लक्षणों में बुखार, नाक से पानी आना, खांसी, कभी-कभी दस्त और गंभीर शरीर दर्द शामिल हैं, जो आमतौर पर एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले ही राज्यों को टेस्ट बढ़ाने का निर्देश दिया है.’

तेलंगाना : 40 साल बाद दोहराया इतिहास ” केसीआर की राजनीतिक यात्रा का टर्निंग प्वाइंट..,

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Telangana Assembly Election Results 2023: 1983 के बाद 2023 यानि 40 साल बाद पहली बार ऐसा मौका आया है कि के चंद्रशेखर राव (केसीआर) खुद कोई चुनाव हारे हों।

रविवार को हुई वोटों की गिनती में कामारेड्डी सीट पर वह दूसरे स्थान पर रहे हैं और बीजेपी उम्मीदवार ने उन्हें साढ़े 6 हजार से भी ज्यादा वोटों के अंतर से हराया है।

1983 में अपना पहला चुनाव भी हारे थे केसीआर

1983 में केसीआर अपना पहला ही चुनाव हार गए थे। उन्होंने तब सिद्दीपेट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी भाग्य आजमाया था, लेकिन वह असफल रहे थे।

लगातार दो कार्यकाल तक रहे नए राज्य के मुख्यमंत्री

69 वर्षीय तेलंगाना के निवर्तमान मुख्यमंत्री केसीआर खुद को ‘तेलंगाना का मसीहा’ कहलाने पर गौरवांवित होते रहे हैं। संयुक्त आंध्र प्रदेश की अलग-अलग सरकारों के खिलाफ तेलंगाना के साथ कथित ‘अन्याय’ को ही उन्होंने अपनी राजनीति का आधार बनाया और लगातार दो कार्यकालों तक नए राज्य के सीएम रहे हैं।

40 साल बाद कामारेड्डी में अपना चुनाव हारे हैं केसीआर

उन्होंने एक दशक से ज्यादा समय तक तेलंगाना आंदोलन को ‘आत्म गौरवम’ और ‘स्व-शासन’ जैसे नारों से परवान चढ़ाया था। आंध्र प्रदेश से अलग होने के बाद वे राज्य के सबसे बड़े सियासी चेहरे बने हैं। लेकिन, कामारेड्डी में निजी तौर पर भी उनकी बड़ी हार हुई है, जहां बीजेपी के उम्मीदवार वेंकट रमण रेड्डी ने उन्हें अच्छे अंतर से हरा दिया है।

तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति (BRS) की हार से तो सिर्फ उनका सीएम के तौर पर हैट्रिक लगाने का सपना टूटा है, लेकिन भाजपा प्रत्याशी से त्रिकोणीय मुकाबले में मिली हार को उनके पूरे राजनीतिक करियर के लिए कभी नहीं मिट पाने वाला धब्बा कहा जा रहा है।

‘वो बाउंस बैक करेंगे’

वैसे बीआरएस के एक वरिष्ठ नेता ने उनके बारे में उम्मीद जताई है कि ‘वो बाउंस बैक करेंगे। केसीआर एक आंदोलन के नेता से शीर्ष स्तर तक पहुंचे हैं। यह बहुत बड़ी कामयाबी है। यह सिर्फ एक अस्थायी झटके की तरह है।’

चुनावों के दौरान जैसे ही मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने गजवेल के साथ-साथ कामारेड्डी से भी चुनाव लड़ने का ऐलान किया था तो विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाए थे कि उन्हें गजवेल से हार का डर सता रहा है।

लेकिन, गजवेल से तो उनकी जीत हो गई, लेकिन कामारेड्डी ने 6,741 वोटों से उनके चुनावी करियर पर बड़ा दाग लगा दिया।

6 बार एमएलए चुने गए,लोकसभा का भी चुनाव जीता

केसीआर 1985 से ही चुनाव जीतते आ रहे हैं। वे अपने गृह क्षेत्र सिद्दीपेट से 4 बार चुनाव जीत चुके हैं और दो बार से गजवेल से उनकी जीत हो रही है। वे करीमनगर (एक बार उप चुनाव भी), महबूबनगर और मेडक से लोकसभा चुनाव भी जीत चुके हैं।

केसीआर की राजनीतिक यात्रा का टर्निंग प्वाइंट

केसीआर की राजनीतिक यात्रा में आए सबसे बड़े टर्निंग प्वाइंट में एक तरह से टीडीपी नेता एन चंद्रबाबू नायडू का बहुत बड़ा रोल रहा है।

1999 में नायडू ने उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह नहीं दी। 1995 से 99 तक वे नायडू सरकार में ट्रांसपोर्ट मंत्री थे, लेकिन 1999 में उन्हें डिप्टी स्पीकर बना दिया गया।

उन्होंने इसके बाद बहुत बड़ा फैसला लिया। उन्होंने डिप्टी स्पीकर के पद के साथ-साथ विधायिकी से भी इस्तीफा दे दिया और टीडीपी भी छोड़ दी।

2001 के अप्रैल में उन्होंने तेलंगाना राष्ट्र समिति का गठन किया, जिसका नाम अब भारत राष्ट्र समिति कर दिया गया है। इसके बाद ही उन्होंने अलग तेलंगाना राज्य के लिए मुहिम छेड़ी और 2014 में नए राज्य के पहले सीएम (63 सीटें जीतकर) बने। 2018 के चुनाव के बाद उन्होंने और धमाकेदार अंदाज (88 सीट) में अपनी सत्ता काबिज रखी।

लेकिन, 2023 के विधानसभा चुनाव में वह एक सीट पर खुद चुनाव हार गए और बीआरएस 119 सीटों वाली विधानसभा चुनाव में सिर्फ 39 सीटें जीतकर सत्ता से बाहर हो गई।

छत्तीसगढ़ : दंगे में मरा किसान का बेटा… भाजपा ने उसी को दिया टिकट, छह बार के विधायक और मंत्री रविंद्र चौबे को हराकर चौंका दिया

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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले की साजा सीट पर काफी रोचक मुकाबला देखने को मिला। यहां के साधारण किसान ईश्वर साहू ने छह बार के विधायक और मंत्री रविंद्र चौबे को हराकर चौंका दिया। दूसरे समुदाय से हिंसक झड़प में ईश्वर के बेटे की हत्या कर दी गई थी।

इससे लोगों में आक्रोश था। जनभावनाओं को देखते हुए भाजपा ने ईश्वर को टिकट दिया था। भाजपा की इस जीत को बड़ी रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। ईश्वर साहू ने कुल 101789 वोट हासिल कर पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे को 5196 वोटों से पराजित किया है।

हिंसक झड़पों में ईश्वर साहू के बेटे भुवनेश्वर साहू की हुई थी हत्या
छत्तीगसढ़ के बेमेतरा जिले में आने वाली सीट साजा में इसी साल अप्रैल में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। स्कूली मारपीट से शुरू हुई इस घटना ने जल्द ही सांप्रदायिक दंगों का रूप धर लिया था। इस घटना में दो मुस्लिम और एक हिंदू व्यक्ति की मौत हुई थी। दोनों पक्षों की तरफ से आगजनी की घटनाएं हुईं। घर जलाए गए। इन हिंसक झड़पों में भुवनेश्वर साहू की हत्या हुई। भाजपा ने भुवनेश्वर साहू के पिता ईश्वर साहू को टिकट दिया था। ईश्वर साहू लगातार वोट के बदले अपने बेटे के लिए इंसाफ देने की बात कहते रहे।

ईश्वर साहू की भावनात्मक अपील और साहू मतदाता रहे निर्णायक
राजनीतिक जानकार कहते हैं कि ईश्वर साहू भावनात्मक ढंग से यह चुनाव को लड़े। इस सीट पर करीब 60 हजार साहू वोटर हैं। वह निर्णायक होते रहे हैं। साहू समाज का एकमुश्त वोट ईश्वर साहू के पक्ष में पड़े इसके लिए भाजपा ने पूरी कोशिश की। साहू समाज के अलावा लोधी समाज बड़ी संख्या में इस सीट पर हैं। भाजपा की कोशिश रही थी कि सभी जातियों को ईश्वर के साथ खड़ा किया जाए। जानकार मानते हैं कि ईश्वर साहू को प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने चुनावों को धार्मिक रंग देने की कोशिश की।

Stock Market Closing On 4 December 2023: शेयर बाजार तेजी के साथ हुआ बंद, 6 लाख करोड़ बढ़ गई निवेशकों की संपत्ति…

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Stock Market Closing On 4 December 2023: केंद्र में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी की तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में शानदार जीत और वहां बनने जा रही सरकार से उत्साहित भारतीय शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी के साथ सोमवार 4 दिसंबर 2023 को कारोबारी सेशन में क्लोज हुआ है.

सेंसेक्स 1400 अंकों और निफ्टी 430 अंकों के उछाल के साथ नए ऐतिहासिक हाई पर जा पहुंचा. आज के सत्र में बैंकिंग के साथ ही सरकारी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली है. निवेशकों की संपत्ति में एक ही सत्र में 6 लाख करोड़ रुपये का इजाफा देखने को मिला है. आज का कारोबार खत्म होने पर बीएसई सेंसेक्स 1384 अंकों के उछाल के साथ 68,865 अंकों तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 419 अंकों के उछाल के साथ 20,686 अंकों पर बंद हुआ है.

सेक्टर का हाल

आज के सेशन में सेंसेक्स – निफ्टी ऐतिहासिक हाई पर जा पहुंचा. तो बैंक निफ्टी भी 1668 अंकों के उछाल के एतिहासिक हाई 46,484 अंकों पर जा पहुंचा. निफ्टी मिड कैप इंडेक्स और स्मॉल इंडेक्स भी अपने लाइफटाइम हाई पर जाकर क्लोज हुआ है. आज के ट्रेड में सरकारी और निजी दोनों ही बैंकों के शेयरों में तेजी रही. सरकारी कंपनियों में भी बड़ी खरीदारी रही. सेंसेक्स के 30 शेयरों में 25 तेजी के साथ और 5 गिरकर बंद हुए. जबकि निफ्टी के 50 में से 45 शेयक तेजी के साथ 5 गिरकर बंद हुए.

रिकॉर्ड हाई पर मार्केट कैप

शेयर बाजार में शानदार तेजी के चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाईजेशन ऐतिहासिक हाई पर जाकर क्लोज हुआ है. आज के ट्रेड में मार्केट कैप 343.45 लाख करोड़ रुपये रहा है. जबकि पिछले सत्र में मार्कैट कप 337.53 लाख करोड़ रुपये रहा था. यानि आज के ट्रेड में निवेशकों की संपत्ति में 6 लाख करोड़ रुपये का इजाफा देखने को मिला है.

चढ़ने-गिरने वाले स्टॉक्स

आज के ट्रेड में सबसे बड़ी तेजी एचपीसीएल 8.96 फीसदी, आईशऱ मोटर्स 7.43 फीसदी, अंबुजा सीमेंट 7.36 फीसदी, अडानी एंटरप्राइजेज 7.13 फीसदी, एसीसी 6.28 फीसदी, अडानी पोर्ट्स 6.14 फीसदी की तेजी के साथ बंद हुआ है. जबकि डेल्टा कॉर्प 3.77 फीसदी, लुपिन 2.78 फीसदी ग्लेनमार्क 2.13 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ है.

छत्तीसगढ़ : चुनावी नतीजे जारी होने के बाद से रोचक तथ्य ”50 और 100 वोटों से भी कम के अंतर…

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छत्तीसगढ़ के चुनावी नतीजे जारी होने के बाद से रोचक तथ्य सामने आ रहे हैं. चुनाव में कई नेता जहां बड़े अंतरों से जीते हैं तो कुछ ऐसे हैं जो 50 और 100 वोटों से भी कम के अंतर पर हार गए हैं.

इनमें डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव (TS Singhdeo) और कांग्रेस शंकर ध्रुव (Shankar Dhruv) शामिल है. वहीं, किसी नेता ने अपने प्रतिद्वंद्वी को 60 हजार से अधिक वोटों से हराया है और तो किसी ने 40 हजार से अधिक वोटों से मात दी है.

छत्तीसगढ़ की कांकेर और पत्थलगांव के नतीजे हैरान करने वाले रहे. इन दोनों ही सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली. वहीं अंबिकापुर में नतीजा बेहद अप्रत्याशित रहा जहां से टीएस सिंहदेव का मुकाबला उनके ही करीबी रहे राजेश अग्रवाल से था. राजेश बीजेपी की टिकट से मैदान में थे. राजेश अग्रवाल ने महज 94 वोटों के अंतर से टीएस सिंहदेव की विधायकी छीन ली. इस सीट पर कांग्रेस ने दोबारा काउंटिंग की मांग की और निर्वाचन आयोग ने रिकाउंटिंग कराई लेकिन नतीजा में हार ही मिली. वहीं, कांकेर ऐसी सीट रही जहां बीजेपी के नेता आशाराम नेताम ने शंकर ध्रुव को 16 वोटों से हराया. उधर, बीजेपी के ही गोमती साय ने कांग्रेस रामपुकार सिंह ठाकुर को 255 वोटों से हराया.

छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक वोटों से जीतने वाले टॉप तीन नेता भी बीजेपी के ही हैं
जिन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को धूल चटाई.
इनमें दुर्ग सिटी से बीजेपी के गजेंद्र यादव, रायगढ़ से ओपी चौधरी और रायपुर दक्षिण से बृजमोहन अग्रवाल हैं. गजेंद्र यादव ने कांग्रेस अरुण वोरा को 48,697 वोटों से हराया है. वहीं, ओपी चौधरी ने कांग्रेस के ही प्रकाश नायक को 64443 वोटों से मात दी, जबकि बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेस के महंत रामसुंदर दास को 67719 वोटों से हराया है. बृजमोहन अग्रवाल ने लगातार चौथी बार रायपुर दक्षिण सीट से चुनाव जीता है.