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​जनगणना 2027: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ‘सुशासन नीति’ का असर…

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​जनगणना 2027: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ‘सुशासन नीति’ का असर’

​छत्तीसगढ़ में 60% से अधिक मकान सूचीकरण का कार्य पूरा’

​गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) ने रचा इतिहास, 100% लक्ष्य हासिल कर राज्य में बना नंबर-1 जिला’

​मुख्यमंत्री ने मैदानी टीमों को दी बधाई; बड़े शहरों और नगर निगमों के सुस्त प्रदर्शन पर जताई चिंता, गति बढ़ाने के दिए कड़े निर्देश’

छत्तीसगढ़ में आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। राज्य के सभी जिलों और नगर निगमों में मकान सूचीकरण ब्लॉकों (HLB) के गठन और सत्यापन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में जारी आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक कुल 60.73% कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस महाअभियान में डिजिटल टेक्नोलॉजी के सटीक समन्वय से कुल 48,742 ब्लॉकों में से 29,602 ब्लॉकों का कार्य पूर्ण हो चुका है।

सटीक जनगणना से ही हर गरीब तक पहुंचेगा सुशासन —मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

​राज्य की इस प्रगति पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संतोष व्यक्त करते हुए गौरेला- पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिला प्रशासन और प्रदेश भर के प्रगणकों को बधाई दी है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ और सुशासन के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। आगामी जनगणना 2027 के ये आंकड़े भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्धारण की मजबूत बुनियाद बनेंगे। डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करना सराहनीय है। जिन बड़े शहरों या नगर निगमों में गति धीमी है, वहां के अधिकारी मैदानी मॉनिटरिंग बढ़ाएं और जल्द से जल्द इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य को गति दें।

​गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने मारी बाजी, कई जिले शत-प्रतिशत के करीब

​राज्य स्तर पर जिलों के प्रदर्शन को देखा जाए तो आदिवासी बहुल गौरेला-पेंड्रा- मरवाही (GPM) जिला सूची में शीर्ष पर है, जिसने अपने सभी 528 मकान सूचीकरण ब्लॉकों का कार्य 100% पूरा कर लिया है। इसके बाद जशपुर (99.87%) और मोहला- मानपुर-अंबागढ़ चौकी (99.84%) जिले भी पूर्णता के बेहद करीब हैं। इसके अलावा बेमेतरा (97.8%) और मुंगेली (96.52%) जिलों में भी काम लगभग खत्म होने की कगार पर है।

​कलेक्टर की रणनीति आई काम

GPM जिले के इस शानदार प्रदर्शन और ‘शून्य पेंडेंसी’ के मॉडल पर कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने अपनी टीम की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह सफलता हमारे स्थानीय प्रगणकों (Enumerators), पर्यवेक्षकों (Supervisors) और जिला प्रशासन की बेहतरीन टीम भावना का परिणाम है। भौगोलिक रूप से दुर्गम और आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के बावजूद हमने माइक्रो-प्लानिंग के तहत काम किया। हर चार्ज नंबर की रोजाना डिजिटल मॉनिटरिंग की गई, जिससे 17 मई की मध्यरात्रि को डेटा पोर्टल पर सिंक होते ही हमने 100% पूर्णता का लक्ष्य हासिल कर लिया। अब हम अगले चरण के प्रशिक्षण और मैदानी सत्यापन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

​बड़े शहरों और नगर निगमों की रफ्तार सुस्त, रायपुर-भिलाई पिछड़े

​एक तरफ जहां ग्रामीण और दूरस्थ जिलों ने बाजी मारी है, वहीं राज्य के बड़े शहरों और नगर निगम (Municipal Corporation) क्षेत्रों में काम की रफ्तार चिंताजनक रूप से धीमी दर्ज की गई है। ​रायगढ़ नगर निगम सूची में सबसे निचले पायदान पर है, जहां महज 4.65% काम ही पूरा हो सका है। औद्योगिक हब भिलाई नगर में केवल 7.84% और रिसाली में 8.33% कार्य ही संपन्न हुआ है। राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां कुल 1,964 ब्लॉकों में से केवल 203 ही पूरे हो पाए हैं, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 10.34% है।

​प्रशासनिक मुस्तैदी का असर

राहत की बात यह है कि राज्य के अधिकांश जिलों में ‘HLBs Not Started’ (कार्य शुरू नहीं हुआ) का आंकड़ा शून्य है। इसका साफ मतलब है कि मैदानी स्तर पर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है। कबीरधाम के महज 1 ब्लॉक को छोड़कर हर जगह काम शुरू हो चुका है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि बचे हुए ‘प्रगति पर’ (In Progress) कार्यों को भी जल्द से जल्द पूरा करने के लिए नगर निगम आयुक्तों और जिला कलेक्टर्स को विशेष नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।​

कांग्रेस ने केरल के लिए सीएम के नाम की घोषणा. वीडी सतीशन (V. D. Satheesan) केरल के नए मुख्यमंत्री होंगे…

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कांग्रेस ने केरल के लिए सीएम के नाम की घोषणा कर दी है.

वीडी सतीशन (V. D. Satheesan) केरल के नए मुख्यमंत्री होंगे. वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि केरल के अगले मुख्यमंत्री के चयन के लिए पार्टी आलाकमान ने स्पष्ट प्रक्रिया अपनाई. कोट्टायम से नवनिर्वाचित विधायक राधाकृष्णन ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि आलाकमान ने सभी पक्षों को सुना है और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सीधे तौर पर इस प्रक्रिया में शामिल रहे हैं.

राधाकृष्णन ने कहा, ‘यह स्पष्टता वाली एक ऐसी प्रक्रिया है जिस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. लोकतंत्र में केवल ऐसी ही प्रक्रिया का पालन किया जा सकता है. इसके लिए मैं आलाकमान के प्रति अपनी प्रसन्नता व्यक्त करता हूं’. उन्होंने कहा कि कई नामों में से किसी एक नेता को चुनने में असमंजस की स्थिति होना स्वाभाविक है.

राधाकृष्णन ने कहा, ‘यह नहीं कहा जा सकता कि एक लोकतांत्रिक पार्टी में हर व्यक्ति की राय एक जैसी होनी चाहिए. यहां कांग्रेस पार्टी के पास एक समन्वय शक्ति है, जो इसका नेतृत्व है. पार्टी नेतृत्व ने कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक, नयी दिल्ली में बैठकें और आगे की चर्चाओं सहित सभी प्रक्रियाओं को अपनाया है. इन सभी प्रक्रियाओं के बाद, नेतृत्व अपना अंतिम निर्णय घोषित करने जा रहा है’.

उन्होंने कहा कि हालांकि सीएलपी ने अंतिम निर्णय आलाकमान पर छोड़ दिया था, फिर भी उसके बाद विस्तृत चर्चा की गई.  राधाकृष्णन ने कहा कि वह किसी भी फैसले का समर्थन करेंगे, भले ही उनके द्वारा सुझाए गए नाम को सहमति न मिले. उन्होंने कहा, ‘पार्टी का सदस्य होने के नाते, अपने आलाकमान की आज्ञा का पालन करना मेरा कर्तव्य है’.

तमिलनाडु के CM बनते ही विजय ने लिखी PM मोदी को चिट्ठी, जानिए क्या अपील की…

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मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि तमिलनाडु का कपड़ा और परिधान उद्योग, कपास और धागे की कीमतों में हुई अभूतपूर्व बढ़ोतरी के कारण एक गंभीर संकट से गुजर रहा है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कपास पर लगने वाले 11 प्रतिशत आयात शुल्क को तत्काल हटाने का आग्रह किया. उन्होंने चेतावनी दी कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण राज्य का कपड़ा और परिधान क्षेत्र गंभीर संकट का सामना कर रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में सीएम विजय ने कहा कि कपास और धागे की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने कपड़ों के निर्माताओं पर जबरदस्त दबाव डाल दिया है और इस क्षेत्र पर निर्भर लाखों मजदूरों की रोजी-रोटी को खतरे में डाल दिया है.

तमिलनाडु को भारत का सबसे बड़ा कपड़ा और परिधान निर्यात करने वाला राज्य बताते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह उद्योग लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है.

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि तमिलनाडु का कपड़ा और परिधान उद्योग, कपास और धागे की कीमतों में हुई अभूतपूर्व बढ़ोतरी के कारण एक गंभीर संकट से गुजर रहा है.

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से घरेलू कपास उत्पादन में कमी और पूरे देश में बढ़ी हुई व्यापारिक गतिविधियों के कारण हुई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है और कपड़ा निर्माताओं पर असर पड़ा है.

उन्होंने आगे कहा कि कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति अब केवल आयात के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है, लेकिन कपास पर मौजूदा 11 प्रतिशत आयात शुल्क के कारण आयात महंगा और उद्योग के लिए अलाभकारी साबित हो रहा है.

मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले दो महीनों में कपास की कीमत 54,700 रुपए से बढ़कर 67,700 रुपए प्रति कैंडी हो गई है, जिसमें लगभग 25 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी अवधि के दौरान, धागे की कीमतें भी 301 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई हैं.

मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से घरेलू कपास उत्पादन में कमी और पूरे देश में बढ़ी हुई व्यापारिक गतिविधियों के कारण हुई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है और कपड़ा निर्माताओं पर असर पड़ा है.

Organic Farming: किसानों को मिलेगी 5 साल तक 10000 प्रति एकड़ सब्सिडी, जानें कैसे उठा सकते हैं लाभ…

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Organic Farming: केमिकल फ्री और नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार 10000 की सब्सिडी दे रही है. जो कि पूरे 5 साल तक मिलेगी जिससे खेती की लागत लगभग आधी हो जाएगी.

आज के समय में जब पूरी दुनिया केमिकल फ्री और आर्गेनिक फूड की तरफ भाग रही है. तब खेती-किसानी में भी एक बड़ा बदलाव आ रहा है. केंद्र और राज्य सरकारें अब पारंपरिक और केमिकल वाली खेती को छोड़कर नेचुरल और आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं. इसी कड़ी में किसानों की मदद करने और उनकी लागत को कम करने के लिए एक शानदार सरकारी योजना सामने आई है.

इसके तहत आर्गेनिक खेती अपनाने वाले किसानों को पूरे 5 साल तक 10000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सीधे बैंक खाते में सब्सिडी दी जाएगी. अगर आप भी अपनी मिट्टी को बचाना चाहते हैं और साथ ही सरकार की इस आर्थिक मदद का फायदा उठाकर तगड़ी कमाई करना चाहते हैं. तो यह स्कीम आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है.

आर्गेनिक खेती के लिए सरकारी सब्सिडी

सरकार का मुख्य मकसद किसानों को केमिकल वाले महंगे फर्टिलाइजर्स और कीटनाशकों के चंगुल से बाहर निकालना है. जब कोई किसान आर्गेनिक या प्राकृतिक खेती की शुरुआत करता है. तो शुरुआती सालों में पैदावार थोड़ी कम होने का रिस्क रहता है इसी नुकसान की भरपाई करने के लिए सरकार ने 10000 रुपये सालाना की यह बड़ी सब्सिडी देने का फैसला किया है.

यह मदद लगातार 5 वर्षों तक मिलती रहेगी ताकि किसान बिना किसी आर्थिक तनाव के अपनी जमीन को पूरी तरह से आर्गेनिक बना सकें. इस स्कीम से न सिर्फ खेती की लागत आधी हो जाएगी, बल्कि जमीन की उपजाऊ शक्ति भी कई गुना सुधर जाएगी. जिससे आगे चलकर बंपर और प्रीमियम क्वालिटी की फसल मिलेगी.

देसी गाय की खरीदारी पर भी बंपर सपोर्ट

आर्गेनिक और नेचुरल फार्मिंग का सबसे बड़ा आधार देसी गायें हैं. क्योंकि इनके गोबर और गोमूत्र से ही जीवामृत और घनजीवामृत जैसे बेहतरीन प्राकृतिक खाद तैयार होते हैं. किसानों की इस जरूरत को समझते हुए सरकार सिर्फ फसल उगाने पर ही नहीं. बल्कि देसी गाय खरीदने के लिए भी तगड़ा कैश सपोर्ट दे रही है.

योजना के तहत अगर कोई किसान नेचुरल फार्मिंग के लिए देसी गाय खरीदता है. तो उसे सरकार की तरफ से 25000 रुपये तक की बड़ी वित्तीय सहायता दी जा रही है. इसके साथ ही जीवामृत का घोल तैयार करने के लिए लगने वाले चार बड़े ड्रम भी किसानों को बिल्कुल मुफ्त या भारी सब्सिडी पर मुहैया कराए जा रहे हैं.

इस तरीके से कराएं रजिस्ट्रेशन

अगर आप इस बेहतरीन योजना का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो इसका प्रोसेस काफी आसान है. इसके लिए किसानों को सरकार के ऑफिशियल प्राकृतिक खेती पोर्टल पर जाकर अपना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा. फॉर्म भरते समय आपके पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अपनी जमीन के सही दस्तावेज  होने चाहिए.

रजिस्ट्रेशन के बाद कृषि विभाग के अधिकारी आपके खेत का वेरिफिकेशन करेंगे कि आप वाकई प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं. जैसे ही आपकी रिपोर्ट अप्रूव होगी सब्सिडी की रकम और गाय खरीदने का पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाएगा.

Electric Three Wheelers: अब दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर चलेंगे, सरकार का बड़ा फैसला, जल्द नए नियम होंगे लागू….

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दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी और CAQM की सिफारिशों के तहत यह फैसला लिया गया है. सरकार का मानना है कि थ्री-व्हीलर गाड़ियां शहर में बड़ी संख्या में चलती हैं.

अब दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर चलेंगे

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए अब सरकार और CAQM सख्त कदम उठाने की तैयारी में हैं. राजधानी की हवा लगातार खराब होती जा रही है और वाहनों से निकलने वाला धुआं इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है. इसी को देखते हुए अब एक बड़ा फैसला लिया गया है, जिसके तहत आने वाले सालों में दिल्ली-एनसीआर में केवल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर यानी ई-ऑटो और ई-रिक्शा को ही बढ़ावा दिया जाएगा.

सरकार की नई योजना के मुताबिक, साल 2027 से दिल्ली में नए CNG, पेट्रोल या डीजल थ्री-व्हीलर वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा. इसका मतलब है कि 2027 के बाद दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर ही रजिस्टर्ड हो सकेंगे. इसके बाद यह नियम धीरे-धीरे पूरे NCR क्षेत्र में लागू किया जाएगा. गुरुग्राम, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में यह नियम 2028 से लागू होने की संभावना है, जबकि 2029 तक पूरा NCR इस नीति के दायरे में आ सकता है.

नई EV पॉलिसी के तहत लिया गया फैसला

दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी और CAQM की सिफारिशों के तहत यह फैसला लिया गया है. सरकार का मानना है कि थ्री-व्हीलर गाड़ियां शहर में बड़ी संख्या में चलती हैं और इनसे काफी प्रदूषण फैलता है. अगर इन्हें इलेक्ट्रिक में बदला जाए तो हवा की क्वालिटी में बड़ा सुधार हो सकता है. यही वजह है कि अब पुराने CNG ऑटो को भी फेज वाइज इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की योजना बनाई जा रही है.

नई नीति में सिर्फ थ्री-व्हीलर ही नहीं, बल्कि टू-व्हीलर्स और कमर्शियल वाहनों के लिए भी सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, 2028 से दिल्ली में नए पेट्रोल और CNG टू-व्हीलर्स के रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लग सकती है. इसके अलावा सरकार धीरे-धीरे टैक्सी, डिलीवरी वाहन और सार्वजनिक परिवहन को भी इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में काम कर रही है.

कितनी सहायता दी जा सकती है?

सरकार इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने वालों को आर्थिक मदद देने की भी तैयारी कर रही है. ड्राफ्ट EV पॉलिसी में इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने पर सब्सिडी और पुराने CNG ऑटो को बदलने पर आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव है. इससे ऑटो चालकों पर अचानक आर्थिक बोझ न पड़े और वे आसानी से इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ जा सकें. रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआती सालों में ई-ऑटो खरीदने पर 30 हजार से 50 हजार रुपये तक की सहायता दी जा सकती है.

इसके साथ ही सरकार चार्जिंग स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग नेटवर्क बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. क्योंकि अगर बड़ी संख्या में ई-ऑटो सड़कों पर आएंगे तो उन्हें चार्ज करने के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ेगी. सरकार चाहती है कि आने वाले समय में लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल करने में किसी तरह की परेशानी न हो.

8th Pay Commission Update: 8वें वेतन आयोग पर महामंथन, ग्रेच्युटी, प्रमोशन और पुरानी पेंशन… कैबिनेट सचिव की बैठक में गूंजी कई मांग…

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केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर हुई बैठक में सैलरी, पेंशन, प्रमोशन और भत्तों समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.

8th Pay Commission Update: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी बैठक हुई है. इस बैठक में सैलरी, पेंशन, प्रमोशन, भत्ते और कर्मचारियों की कई जरूरी मांगो पर चर्चा की गई. इसकी वजह से अब लाखों कर्मचारियों और रिटायर्ड लोगों की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं. 11 मई 2026 को नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NCJCM) की 49वीं बैठक कैबिनेट सचिव टी.वी सोमनाथन की अध्यक्षता में हुई. इस बैठक में कर्मचारी यूनियनों और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने कई जरूरी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की.

बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ?

बता दें कि इस बैठक में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन, व्यय सचिव, कार्मिक सचिव, डाक विभाग सचिव, शिक्षा सचिव, स्वास्थ्य सचिव समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे. वहीं कर्मचारियों की तरफ से शिव गोपाल मिश्रा, एम राघवैय्या, डॉ. एन.कनैय्या समेत कई प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

बैठक में क्या-क्या मुद्दे उठे?

इस बैठक में कर्मचारियों ने 8वें वेतन आयोग से जुड़े कई जरूरी मुद्दे उठाए. इनमें शामिल हैं…

न्यूनतम वेतन

फिटमेंट फैक्टर

इंक्रीमेंट रेट

प्रमोशन पॉलिसी

भत्ते

पेंशन से जुड़े मामले

NPS और UPS की वापसी

मौजूदा पेंशनर्स की मांगें

इसके साथ ही कर्मचारी यूनियनों ने सरकार से मांग की कि 8वें वेतन आयोग के कामकाज के दौरान नियमित बातचीत रखी जाए.

बैठकों में अनियमितता पर जताई नाराजगी

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि JCM नियमों के मुताबिक, हर साल 3 बैठके होनी चाहिए, लेकिन 60 साल में केवल 49 बैठकें ही हुई हैं. उन्होंने नियमित बैठकें कराने की मांग की.

मेडिकल और CGHS से जुड़े मुद्दे

इस बैठक में कर्मचारियों ने CGHS और मेडिकल खर्चों की पूरी प्रतिपूर्ति की मांग की है. हियरिंग एड, डेंटल इम्प्लांट और डेन्चर जैसे खर्चों को भी कवर करने की बात कही गई. कैबिनेट सचिव ने इन मामलों पर 3 महीने के अंदर फैसला लेने के निर्देश दिए.

पेंशनर्स के लिए बड़ी मांग

कर्मचारी यूनियनों ने हर 5 साल में पेंशन बढ़ाने की मांग की. साथ ही  Fixed Medical Allowance को बढ़ाकर 3 हजार रुपये प्रति माह करने की मांग रखी गई.

परिवारिक पेंशन में बदलाव की मांग

यूनियनों ने परिवार की परिभाषा बदलकर विधवा और आश्रित बहुओं को भी फैमिली पेंशन के दायरे में शामिल करने की मांग की.

OPS को लेकर भी चर्चा

कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि 22 दिसंबर 2003 से पहले निकली भर्तियों वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना यानी OPS का लाभ दिया जाए.

प्रमोशन में देरी पर चिंता

इसी के साथ ही कई विभागों में प्रमोशन में 3 से 5 साल की देरी पर चिंता जताई गई. कैबिनेट सचिव ने समय पर DPC कराने के निर्देश देने की बात कही.

आउटसोर्सिंग पर सवाल

वहीं यूनियनों ने कहा कि कई विभागों में स्थायी भर्ती की जगह आउटसोर्सिंग बढ़ रही है. उन्होंने खाली पदों पर नियमित भर्ती की मांग की है. कर्मचारी संगठनों ने 5 प्रतिशत सीमा हटाने और ज्यादा नियुक्तियां देने की मांग की. कैबिनेट सचिव ने साफ किया कि अनुकंपा नियुक्तियों को रोका नहीं जा सकता है.

कर्मचारियों को क्या उम्मीद?

इस बैठक के बाद उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की कई मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. खासकर सैलरी, पेंशन, मेडिकल सुविधा और प्रमोशन से जुड़े फैसले लाखों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत ला सकते हैं.

NEET पेपर लीक में बड़ा धमाका! NTA के अंदर तक पहुंची जांच, प्रोफेसरों और अधिकारियों पर शिकंजा….

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NEET UG Paper Leak: नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक लातूर के प्रोफेसर कुलकर्णी पिछले पांच वर्षों से NTA के लिए पेपर तैयार करने में शामिल थे.

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बड़े खुलासे सामने आ रहे हैं. अब इस मामले की आंच सीधे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) तक पहुंचती दिखाई दे रही है. सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, लातूर के प्रोफेसर कुलकर्णी पिछले पांच साल से NTA के लिए पेपर तैयार करने का काम कर रहे थे. जांच एजेंसी को शक है कि पेपर लीक नेटवर्क में सिर्फ बाहरी लोग ही नहीं, बल्कि NTA के अंदर के कुछ कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं.

प्रोफेसर कुलकर्णी सहित कई लोग CBI के रडार पर, पुणे से हुई प्रोफेसर कुलकर्णी की गिरफ्तारी, छात्रों को पहले ही लिखवाए गए थे सही जवाब, चार साल पहले हुए थे रिटायर, कोचिंग सेंटर संचालक से भी पूछताछ’

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, प्रोफेसर कुलकर्णी के अलावा दो अन्य प्रोफेसर भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं. इसके साथ ही NTA के अंदर पेपर प्रक्रिया से जुड़े करीब 50 कर्मचारी और अधिकारियों की सूची भी सीबीआई के पास मौजूद है. सूत्रों का दावा है कि पेपर लीक मामले में NTA के अंदर के लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में कुछ गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं.

सीबीआई टीम ने प्रोफेसर कुलकर्णी को पुणे स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया है. अधिकारियों के मुताबिक, कुलकर्णी के पास प्रश्नपत्रों तक पहुंच थी और वह अपने घर पर विशेष कोचिंग क्लास चलाते थे. जांच में सामने आया है कि अप्रैल 2026 के अंतिम सप्ताह में कुलकर्णी ने आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से कुछ छात्रों को इकट्ठा किया था. मनीषा वाघमारे को सीबीआई पहले ही 14 मई को गिरफ्तार कर चुकी है.

सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, इन विशेष क्लासों के दौरान प्रोफेसर कुलकर्णी छात्रों को सवाल, उनके विकल्प और सही उत्तर बोलकर लिखवाते थे. बताया गया कि छात्रों ने इन सवालों को अपनी नोटबुक में हाथ से लिखा था और बाद में यही प्रश्न 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा के असली प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खाते पाए गए.

अधिकारियों के अनुसार, प्रोफेसर कुलकर्णी चार साल पहले एक प्रतिष्ठित कॉलेज से रिटायर हुए थे. वह नीट परीक्षा के लिए रसायन विज्ञान विषय का प्रश्नपत्र तैयार करने वाली समिति में शामिल थे. गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए 3 मई को नीट-यूजी 2026 परीक्षा आयोजित की गई थी. लेकिन पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी. इसके बाद केंद्र सरकार ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी.

सीबीआई ने महाराष्ट्र के लातूर शहर के एक बड़े कोचिंग सेंटर के संचालक शिवराज मोटेगांवकर से भी पूछताछ की है. सीबीआई की टीम गुरुवार रात और शुक्रवार तड़के शिवनगर इलाके स्थित ओमकार रेजिडेंसी पहुंची, जहां रेनुकाई केमिस्ट्री क्लासेज (RCC) के निदेशक शिवराज मोटेगांवकर का घर है. जांच एजेंसी अब पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े हर कड़ी को खंगालने में जुटी हुई है.

PM Modi Netherlands Visit: ऊर्जा संकट को लेकर पीएम मोदी ने दुनिया को आगाह किया…

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पीएम मोदी ने कहा कि लगातार युद्ध और वैश्विक अस्थिरता दशकों के डेवलपमेंट को उलट सकती है. उन्होंने एनर्जी संकट को लेकर दुनिया को आगाह किया.

नीदरलैड्स के द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया को ऊर्जा संकट को लेकर आगाह किया. पीएम मोदी ने कहा कि लगातार युद्ध और वैश्विक अस्थिरता दशकों के विकास को उलट सकती है और बड़ी आबादी को फिर से गरीबी में धकेल सकती है. इस दौरान पीएम मोदी दुनिया को भारत की उपलब्धियां भी बताई.

हालात अच्छे नहीं हुए तो खत्म हो सकता सब कुछ: PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा, ‘आज मानवता के सामने अनेक बड़ी चुनौतियां भी हैं. पहले कोरोना आया, फिर युद्ध होने शुरू हो गए और अब ऊर्जा संकट है. ये दशक दुनिया के लिए आपदाओं का दशक बन रहा है. अगर यह स्थिति जल्द नहीं बदली, तो बीते दशकों की उपलब्धियां खत्म हो सकती है. दुनिया की आबादी का एक बड़ा हिस्सा फिर से गरीबी के जाल में फंस सकता है.’

पीएम मोदी ने अपने देश की उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा, ‘बीते वर्षों में भारत ने धरती से चंद्रमा की दूरी जितनी है, उससे भी 11 गुना अधिक ऑप्टिकल फाइबर बिछाया है. एक दशक पहले हम मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, आज भारत दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्यूफेक्चरर है. इसके अलावा आज के भारत की एक और पहचान है. आज का भारत इनोवेशन पॉवर है. आज हमारे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की चर्चा पूरी दुनिया में होती है. ये भारतीयों के इनोवेशन का बहुत बड़ा प्रमाण है.’

भारत का युवा आसमान छूना चाहता है: PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा, ‘आज हमारा भारत बहुत बड़ा सपना देख रहा है. आज देश कह रहा है- हमें सिर्फ ट्रांसफॉर्मेशन नहीं चाहिए, हमें बेस्ट चाहिए, हमें फास्टेस्ट चाहिए. इसलिए जब भारत में Aspirations Unlimited हैं, तो Efforts भी Limitless हो रहे हैं. आज भारत का युवा आसमान छूना चाहता है. आज का भारत एक अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. आपने हाल में देखा होगा कि दुनिया की सबसे बड़ी और सफल AI समिट भारत ने आयोजित की. उससे पहले G-20 की सफल समिट भी भारत ने आयोजित की थी.

पीएम मोदी ने कहा, ‘स्टार्टअप आज भारत के युवाओं का मिजाज बन चुका है. 12 साल पहले देश में 500 से भी कम स्टार्टअप्स थे. आज ये संख्या बढ़कर दो लाख से ज्यादा हो गई है. स्टार्टअप की दुनिया में 2014 में भारत में सिर्फ चार यूनिकॉर्न थे, आज यहां करीब सवा सौ यूनिकॉर्न हैं. 2025 में ही करीब 44 हजार और नए स्टार्टअप रजिस्टर हुए हैं. आज एआई, डिफेंस और स्पेस सेक्टर में हमारे स्टार्टअप बहुत शानदार काम कर रहे हैं.

आज भारत इनोवेशन पावर है: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, ‘समय के साथ रिसर्च और इनोवेशन का ये कल्चर और विराट होता जा रहा है. पिछले साल भारत में लाखों से अधिक पेटेंट्स फाइल किए गए हैं. भारत चिप मेकिंग में सेमीकंडक्टर सेक्टर में भी बड़े कदम उठा रहा है. फिलहाल भारत में 12 सेमीकंडक्टर प्लांट काम कर रहे हैं. इनमें से दो प्लांट्स में प्रोडक्शन भी शुरू हो चुका है. अब चिप भी डिजाइन इंडिया, मेड इन इंडिया होगी. आज भारत इनोवेशन पावर है. हमारे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की चर्चा आज पूरी दुनिया में होती है. ये भारतीयों के इनोवेशन का बहुत बड़ा प्रमाण है.’

Petrol-Diesel Export Tax Update: पेट्रोल के दाम बढ़े, अब सरकार ने लगाया 3 रुपए का Tax…

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हर बार जब भी पेट्रोल-डीजल से जुड़े नियम बदलते हैं तब लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यह आता है कि इसका असर उनकी जेब पर पड़ेगा या नहीं. ऐसे में अब सरकार ने पेट्रोल-डीजल और ATF के निर्यात शुल्क में बदलाव किया है इसलिए इसे समझना काफी जरूरी है.

केंद्र सरकार ने 15 मई यानी शुक्रवार को नई अधिसूचना जारी कर पेट्रोल-डीजल और विमान ईंधन यानी ATF के निर्यात पर लगने वाले Special Additional Excise Duty (SAED) की दरों में फिर बदलाव किया है. ये नई दरें 16 मई 2026 से लागू हो गई हैं.  लेकिन एक राहत की बात है कि इसका असर घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा.

क्या हैं नई दरें?

नई अधिसूचना के मुताबिक, अब पेट्रोल के निर्यात पर 3 रुपये प्रति लीटर SAED लगेगा.

वहीं डीजल पर 16.5 रुपये प्रति लीटर लगेगा.

अगर बात करें ATF की तो इस पर 16 रुपये प्रति लीटर लगेगा.

फिलहाल, तीनों पर Road and Infrasructure Cess यानी RIC जीरो रखा गया है.

SAED क्या है और कैसे काम करता है?

SAED एक तरह का अतिरिक्त उत्पाद चार्ज है, जिसे सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की औसत कीमतों के आधार पर हर दो हफ्ते में तय करती है. जब ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो रिफाइनरियों को निर्यात में ज्यादा मुनाफा मिलता है. ऐसे में कंपनियां घरेलू बाजार की बजाय विदेशों में ज्यादा ईंधन बेचने लगती हैं.

इससे देश में सप्लाई प्रभावित हो सकती है. इसी स्थिति को रोकने के लिए सरकार SAED लगाती है, ताकि निर्यात महंगा हो जाए और घरेलू आपूर्ति बनी रहे. यह व्यवस्था 27 मार्च 2026 से लागू की गई थी. मिडिल ईस्ट तनाव के बीच घरेलू ईंधन सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने पहली बार यह चार्ज लगाया था.

पहले कितनी थी दरें?

बता दें कि अप्रैल में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थी, तब सरकार ने डीजल पर SAED 55.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया था. इसके बाद 1 मई को कीमतें कुछ नरम होने पर डीजल पर यह घटकर 23 रुपये और ATF पर 33 प्रति लीटर कर दी गई.  वहीं अब 16 मई को एक और कटौती के बाद डीजल 16.5 रुपये और ATF 16 रुपये प्रति लीटर पर आ गया है.

पेट्रोल पर पहली बार लगा चार्ज

इस बार के सबसे बड़े बदलाव की बात करें तो पेट्रोल के निर्यात पर पहली बार 3 रुपये प्रति लीटर SAED लगाया गया है, क्योंकि अब तक पेट्रोल निर्यात पर कोई भी चार्ज नहीं था, लेकिन सरकार ने इसे भी दायरे में इसलिए शामिल किया, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी के बाद भी निर्यात अभी भी रिफाइनरियों के लिए फायदे का सौदा बना हुआ है. वहीं सरकार का मानना है कि इससे घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बेहतर बनी रहेगी.

अरुण देव गौतम छत्तीसगढ़ के नए DGP;1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को राज्य का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया…

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छत्तीसगढ़ सरकार ने 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को राज्य का पूर्णकालिक डीजीपी नियुक्त किया है. संयुक्त राष्ट्र पदक से सम्मानित गौतम नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपने अनुभव और मजबूत प्रशासनिक क्षमता के लिए जाने जाते हैं.

छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अरुण देव गौतम को राज्य का पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त कर दिया है. यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का राज्य दौरा प्रस्तावित है, जिससे इस नियुक्ति को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौतम वर्तमान में प्रभारी डीजीपी के रूप में कार्यरत थे और अब उन्हें स्थायी जिम्मेदारी सौंपी गई है. वे अपने तेज-तर्रार कार्यशैली, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अनुभव और उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड के लिए जाने जाते हैं. उनके नेतृत्व में राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली को और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है.

लंबे अनुभव वाले अधिकारी को मिली बड़ी जिम्मेदारी. अरुण देव गौतम वर्ष 1992 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं.

उन्हें पहले मध्यप्रदेश कैडर आवंटित हुआ था, लेकिन वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद उन्होंने नया कैडर चुना. राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर में एसपी रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया.

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में मजबूत पकड़

झीरम घाटी नक्सल हमले के बाद गौतम को बस्तर का आईजी बनाया गया था, जहां उन्होंने चुनौतीपूर्ण हालात में कार्य किया. 2013 के विधानसभा चुनावों के दौरान नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका अहम रही, जिससे मतदान प्रतिशत में भी वृद्धि दर्ज की गई.

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित’

अरुण देव गौतम को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं.

वर्ष 2002 में कोसोवो में शांति मिशन के तहत सेवा देने पर संयुक्त राष्ट्र पदक,

वर्ष 2010 में भारतीय पुलिस पदक’

वर्ष 2018 में राष्ट्रपति पुलिस पदक (विशिष्ट सेवा)’

ये उपलब्धियां उनके पेशेवर कौशल और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती हैं. शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत. गौतम का जन्म 2 जुलाई 1967 को उत्तरप्रदेश के फतेहपुर जिले के अभयपुर गांव में हुआ. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई इलाहाबाद में पूरी की.

  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए
  • राजनीति शास्त्र में एमए
  • जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल
  • उनकी उच्च शिक्षा और प्रशासनिक समझ ने उनके करियर को दिशा दी.
  • पुलिस महकमे में विभिन्न पदों का अनुभव
  • अपने करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है.
  • जबलपुर में प्रशिक्षु आईपीएस
  • बिलासपुर में सीएसपी
  • छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स के प्रभारी
  • रेलवे, प्रशिक्षण, भर्ती और यातायात शाखाओं के आईजी

हाल के वर्षों में वे छत्तीसगढ़ सरकार में गृह विभाग, जेल और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे.

केंद्रीय दौरे से पहले रणनीतिक नियुक्ति

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का छत्तीसगढ़ दौरा प्रस्तावित है. इसे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के कदम के रूप में देखा जा रहा है.

भविष्य की चुनौतियां और अपेक्षाएं

नए डीजीपी के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखना, नक्सल समस्या से निपटना और पुलिसिंग को आधुनिक बनाना बड़ी चुनौती होगी. उनके अनुभव और कार्यशैली को देखते हुए सरकार और जनता को उनसे बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा है.