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Gold: पत्नी के नाम पर खरीदा गोल्ड, क्या फ्यूचर में इसकी बिक्री से होने वाली इनकम पर पति को देना होगा टैक्स?

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Gold Price: भारत में सोने की खरीद को काफी अहम माना जाता है. त्योहारों के मौके पर देश में सोने की खरीद भी बढ़ जाती है. वहीं अब देश में आने वाले दिनों में धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहार भी आ रहे हैं, ऐसे में इन त्योहारों पर भी सोने की खरीद में इजाफा देखने को मिल रहा है.

इससे पहले आज हम आपको सोने को लेकर एक अहम अपडेट देने जा रहे हैं. वहीं कई लोग सोने को खरीदने के बाद उसकी ऊंचे दाम पर बेचकर मुनाफा भी कमाते हैं. वहीं किसी संपत्ति को खरीद के समय की कीमत से अधिक कीमत पर बेचने पर पूंजीगत लाभ टैक्स (Capital Gains Tax) लगता है. यह बात सोने की बिक्री पर भी लागू होती है. उदाहरण के लिए, यदि आप आज थोक में सोना खरीदते हैं और भविष्य में इसे ऊंची कीमत पर बेचते हैं, तो आप ऐसी बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ पर टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे.

केपिटल गेन टैक्स

बहुत से लोग सोने की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर टैक्स बचाने के तरीकों के बारे में जानने में रुचि रखते हैं. वहीं लोगों को मन में सवाल आता है कि अगर कोई आदमी अपनी पत्नी को सोने के आभूषण खरीदने के लिए पैसे देता है और बिल पत्नी के नाम पर बनता है. ऐसे में भविष्य में सोने की बिक्री से होने वाली आय पर टैक्स कौन देगा? पति टैक्स देगा या पत्नी टैक्स देगी. आइए जानते हैं इसके बारे में…

क्या देना होगा टैक्स?

किसी व्यक्ति के जरिए अपने पति या पत्नी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर की गई संपत्ति पर उत्पन्न होने वाली इनकम को ऐसे व्यक्ति (यानी हस्तांतरणकर्ता) की आय के साथ जोड़ा जाएगा. बशर्ते कि ऐसा हस्तांतरण पर्याप्त प्रतिफल के विरुद्ध या तलाक के निपटान के हिस्से के रूप में नहीं किया गया हो या अलग रहने के समझौते के तहत न हो.

पूंजीगत लाभ

इसलिए, इस मामले में जहां एक आदमी सोने के आभूषण खरीदने के लिए अपनी पत्नी को पैसे देता है, उस पर क्लबिंग प्रावधान लागू होंगे और ऐसे आभूषणों के ट्रांसफर पर होने वाले किसी भी पूंजीगत लाभ को आदमी की आय के साथ जोड़ दिया जाएगा. सिर्फ सोना ही नहीं, अपनी पत्नी के नाम पर रियल एस्टेट संपत्ति खरीदने से किसी व्यक्ति को ऐसी संपत्ति की बिक्री के बाद उत्पन्न होने वाले पूंजीगत लाभ टैक्स देनदारी या इसे किराए पर लेने से अर्जित आय पर टैक्स देनदारी से कोई राहत नहीं मिलती है.

‘उदयनिधि के बयान पर सख्ती से जवाब देना होगा’…सनातन धर्म विवाद पर पहली बार बोले PM मोदी

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में होने जा रहे G-20 समिट से पहले मंत्रियों के साथ बैठक की और उनको कुछ खास हिदायतें दीं। पीएम मोदी ने सनातन धर्म पर हो रहे विवाद पर कहा कि उदयनिधि स्टालिन को उचित जवाब देना होगा।

पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा कि उदयनिधि के सनातन धर्म वाले बयान पर सही से जवाब दें। साथ ही पीएम मोदी ने मंत्रियों से इंडिया बनाम भारत पर कुछ नहीं बोलने को कहा है।

पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा कि G-20 समिट के दौरान VIP क्लचर को न अपनाएं और जिसको जो ड्यूटी दी गई है वहां मंत्री समय पर पहुंचें। बता दें कि तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन सनातन धर्म को लेकर दिए अपने बयान के कारण देशभर में निशाने पर है। उदयनिधि ने एक सम्मेलन में कहा था कि सनातन धर्म डेंगू, मलेरिया की तरह है जिसे मिटाना जरूरी है। उदयनिधि ने कहा कि मच्छरों, डेंगू, मलेरिया और कोरोना की तरह ही सनातन धर्म को बढ़ने से रोकना है।

कांग्रेस का दावा- साढ़े तीन साल में 67,000 रेल गाड़ियां हुईं कैंसिल अब पार्टी करेगी रेल रोको आंदोलन

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Politics on train cancellation: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव(Chhattisgarh assembly election 2023) के पहले कांग्रेस (Congress)पार्टी रेलवे के जरिए बीजेपी (BJP)को घेरने की तैयारी में है.

कांग्रेस ने 13 सितंबर को पूरे प्रदेश रेल रोकने(Train Stop) का एक्शन प्लान बनाया है. इसके जरिए लगातार छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेन कैंसिल होने पर कांग्रेसी विरोध जताएंगे. इसके अलावा कांग्रेस ने दावा किया है कि साढ़े तीन साल में 67 हजार से अधिक ट्रेन कैंसिल(Train cancel) की गई है. केंद्र सरकार पैसेंजर ट्रेन(passenger train) की जगह मालगाड़ी चला रही और ये रेलवे को निजी हाथ में सौंपने का षड्यंत्र है.

13 सितंबर को छत्तीसगढ़ के सभी रेलवे स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन
दरअसल कांग्रेस ने रेलवे के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति बनाई है. इसके अनुसार इसी महीने 9 सितंबर से कांग्रेस का आंदोलन शुरू हो जाएगा.सबसे पहले 9 सितंबर को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में पत्रकारवार्ता के बाद रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने जाएंगे.10, 11 और 12 सितंबर को पाम्पलेट-पोस्टर वितरण और चस्पा कार्यक्रम रखा गया है. इसके बाद यदि केंद्र सरकार नहीं मानी तो 13 सितंबर को प्रदेश के सभी रेलवे स्टेशनों पर रेल रोको आंदोलन किया जायेगा. इसको लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सभी जिला कांग्रेस कमेटी को निर्देश दे दिया है.

कांग्रेस का दावा साढ़े 3 साल में 67 हजार से अधिक ट्रेन कैंसिल
कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने दावा किया है कि पिछले साढ़े तीन साल में 67 हजार 382 ट्रेनों को रद्द किया गया है. इस आंकड़े पीछे उन्होंने आरटीआई से प्राप्त जानकारी को आधार बताया है. उन्होंने मीडिया से कहा कि साल 2020 में 32757 ट्रेनें निरस्त की गई, साल 2021 में 32151 ट्रेनें निरस्त की गई, साल 2022 में 2474 ट्रेनें निरस्त की गई, साल 2023 में (अप्रैल माह तक) 208 ट्रेनें निरस्त की गई और बीते अगस्त महीने में 24 ट्रेनें रद्द की गई है. ये सभी ट्रेन छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेनें है और येन मौके पर कैंसिल कर दी जाती है जब रक्षाबंधन, दीवाली, शीतकालीन और शादी-ब्याह के समय खासकर.

कांग्रेस का आरोप रेलवे को निजी हाथ में सौंपने की साजिश
छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेन लगातार कैंसिल होने के पीछे कांग्रेस ने कारण बताया कि यात्री ट्रेनों को जानबूझकर रद्द किया जाता है, कभी कोयले के आपूर्ति के नाम पर, कभी कोई और कारण बता कर यह विश्वसनीय यात्री सेवा भारतीय रेल को बदनाम करने की साजिश है ताकि लोग रेलवे से ऊब जाये और रेल को भी मोदी अपने उद्योगपति मित्र अडानी के हवाले कर सके. मोदी सरकार रेलवे की यात्री सुविधाओं को समाप्त कर इसे सिर्फ मालवाहक बनाना चाहती है और बाद में रेल को निजी हाथों में सौंपा जा सके इसका रास्ता बना रही है. ऐसा इसलिये कि यात्री ट्रेनों की अपेक्षा माल भाड़े में रेलवे को 300 से 400 प्रतिशत ज्यादा मुनाफा मिलता है.

यात्री कोयले के कारण खामियाजा भुगत रहे है ?
कांग्रेस ने ये भी दावा किया है कि बिलासपुर रेलवे जोन जिसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ आता है यहां से केवल माल भाड़े से केंद्र की मोदी सरकार 20 हजार से 22 हजार करोड रुपए हर साल कमाती है. लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता को रेलवे की सुविधा नहीं दे रही है. बीजेपी के 9 लोकसभा सांसद मौन बैठे है. वहीं बीजेपी की तरफ से ट्रेन कैंसिल होने के पीछे मेन्टेनेंस और रेलवे लाइन को अपडेट करने का दावा किया जाता है. इसपर भी कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा है कि ट्रेन मेन्टेनेंस के कारण ट्रेनों को रद्द किया गया है तो फिर उसी रेलवे ट्रेक पर सवारी ट्रेन से 50 गुना ज्यादा वजनी मालगाड़ियों का परिचालन कैसे किया जा रहा है. इसके पीछे कांग्रेस ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती रत्नगर्भा है.हमारे यहां कोयले का प्रचुर भंडार है. इसका मतलब यह तो नहीं कि खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा.

‘इंडिया” नाम हटाना मोदी सरकार के लिए नहीं होगा आसान, संविधान विशेषज्ञ का बयान आया सामने

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भारत के अंग्रेजी नाम ‘इंडिया’ को हटाने की मांग अब कई महान हस्तियां भी उठा रही हैं। क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग से लेकर कई बॉलीवुड हस्तियों ने देश को सिर्फ भारत नाम से पुकारने का समर्थन किया।

हालांकि, केंद्र सरकार के लिए इंडिया नाम हटाना आसान नहीं रहेगा। इसके लिए कई चुनौतियां भी सामने आएंगी। संविधान विशेषज्ञ पी डी टी आचार्य ने मंगलवार को कहा कि संविधान के अनुच्छेद 1 में लिखा गया ‘इंडिया, दैट इज भारत’ केवल वर्णनात्मक है और दोनों नामों का परस्पर उपयोग नहीं किया जा सकता है।

संविधान में संशोधन करना होगा

उन्होंने बताया कि भारतीय गणराज्य के नाम में किसी भी बदलाव के लिए कई संशोधनों की आवश्यकता होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा ‘प्रेसीडेंट ऑफ भारत’ के नाम से जी20 के रात्रिभोज के लिए निमंत्रण पत्र प्रेषित किए जाने को लेकर उठे विवाद के संदर्भ में उनका यह बयान आया है। जब लोकसभा के पूर्व महासचिव आचार्य से देश के नाम पर मौजूदा स्थिति में बदलाव की प्रक्रिया को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें संविधान में संशोधन करना होगा। अनुच्छेद 1 (बदलना होगा) और फिर अन्य सभी अनुच्छेदों में परिणामी बदलाव होंगे।”

जहां भी इंडिया नाम है, हटाना होगा

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘जहां भी इंडिया नाम है, हटाना होगा। आप देश का केवल एक नाम रख सकते हैं। दो नाम नहीं हो सकते जो आपस में बदलते रहें। इससे बहुत भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी न केवल देश में, बल्कि बाहर भी।” आचार्य ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में देश का नाम ‘रिपब्लिक ऑफ इंडिया’ है और कल यदि इसे ‘रिपब्लिक ऑफ भारत’ (भारत गणराज्य) लिखा जाना हो तो संविधान बदलना होगा और सभी संबंधित देशों को संदेश भेजना होगा कि ‘हमारा नाम बदल गया’ है।

खुद को नुकसान पहुंचाने वाला कदम होगा

उन्होंने कहा, ‘‘संविधान में संशोधन के माध्यम से यह बदलाव करना होगा। अन्यथा देश का नाम इंडिया ही रहेगा। अनुच्छेद 1 में लिखा ‘इंडिया दैट इज भारत’ केवल वर्णनात्मक है और ऐसा नहीं है कि ये दो नाम आपस में बदले जा सकते हैं। ऐसा करना खुद को नुकसान पहुंचाने वाला कदम होगा। एक देश का एक ही नाम होता है।” संसद के 18 सितंबर से शुरू होने वाले पांच दिवसीय विशेष सत्र में देश का नाम बदलने संबंधी मुद्दा आने की अटकलें भी चल रही हैं।

यूरोप दौरे पर रवाना हुए राहुल गांधी, EU के वकीलों-छात्रों और प्रवासियों से करेंगे मुलाकात

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी यूरोप की करीब एक सप्ताह की यात्रा के लिए मंगलवार को रवाना हो गए और इस दौरान वह यूरोपीय संघ (ईयू) के वकीलों, छात्रों और भारतीय प्रवासियों के साथ मुलाकात करेंगे।

सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गांधी सात सितंबर को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के वकीलों के एक समूह से मिलेंगे और हेग में भी इसी तरह की एक बैठक करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष आठ सितंबर को पेरिस के एक विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित करेंगे। राहुल गांधी ओस्लो में प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम को करेंगे संबोधित उनका नौ सितंबर को पेरिस में फ्रांस के श्रमिक संगठन की बैठक में भी भाग लेने का कार्यक्रम है।

इसके बाद वह नॉर्वे जाएंगे, जहां वह 10 सितंबर को ओस्लो में प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। गांधी के जी20 शिखर सम्मेलन समाप्त होने के एक दिन बाद 11 सितंबर तक लौट आने की संभावना है। जी20 शिखर सम्मेलन नौ-10 सितंबर को दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

अब तक ये अमेरिकी राष्ट्रपति आ चुके हैं भारत के दौरे पर, जानें कब आएंगे बाइडेन

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 अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बृहस्पतिवार को भारत जाएंगे तथा इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने यह जानकारी दी। इस घोषणा से एक दिन पहले सोमवार को अमेरिका की प्रथम महिला कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थीं। इसके बाद बाइडेन की भी जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट में उनके संक्रमित नहीं होने की पुष्टि हुई।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने व्हाइट हाउस में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बृहस्पतिवार को भारत जाएंगे। उन्होंने बताया कि बाइडेन प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। उन्होंने बताया कि बाइडेन शनिवार और रविवार को जी20 शिखर सम्मेलन के आधिकारिक सत्र में भाग लेंगे। भारत की आजादी के बाद पहले 50 साल में केवल तीन अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के दौरे पर आए थे।

वहीं, पिछले लगभग ढाई दशक में बाइडेन भारत आने वाले 5वें प्रेसिडेंट होंगे। 1.ड्वाइट डी आइजनहावर ड्वाइट डी आइजनहावर भारत का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे। वह 1959 में भारत आए थे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और प्रधानमंत्री नेहरू से मुलाकात की और भारत की संसद को संबोधित किया।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ था, जब भारत को सूखे का सामना करना पड़ा था और खाद्य सामान की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा था। इसके अलावा यहां औद्योगिक उत्पादन कम था और विदेशी मुद्रा की सप्लाई बेहद कम थी। 2.रिचर्ड निक्सन रिचर्ड निक्सन भारत आने वाले दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति थे। वह 1969 में भारत आए।

इस दौरान उन्होंने कार्यवाहक राष्ट्रपति हिदायतुल्ला और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात की। वह सिर्फ 23 घंटे के लिए भारत में थे। निक्सन पाकिस्तानी समर्थक थे और भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति के खिलाफ थे। अमेरिका का मानना था कि उस समय भारत-पाक संबंध खराब हो रहे थे और निक्सन की यात्रा ने इसे संबोधित करने की कोशिश की थी।

3.जिमी कार्टर भारत दौरे पर आने वाले तीसरे अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर थे। उन्होंने 1978 में भारत की यात्रा की। अपनी यात्रा में उन्होंने राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी और प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने संसद को भी संबोधित किया।

उन्हें गुड़गांव के गांव दौलतपुर नसीराबाद की यात्रा के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है, जिसका नाम बदलकर कार्टरपुरी कर दिया गया था। 4.बिल क्लिंटन बिल क्लिंटन 2000 में भारत आए थे। उन्होंने राष्ट्रपति केआर नारायणन से मुलाकात की। ऊर्जा और पर्यावरण पर हस्ताक्षरित ज्वाइंट स्टेटमेंट को लेकर संसद को संबोधित किया।

क्लिंटन की यात्रा किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की सबसे लंबी यात्रा थी। इस यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ देने के रूप में देखा जाता है। 5.जॉर्ज डब्ल्यू बुश जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 2006 में भारत का दौरा किया था। इस दौरान अमेरिका-भारत असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए।

बुश की यात्रा ने भारत के ‘न्यूक्लियर अपार्थिड’ के अंत की शुरुआत की और दोनों देशों ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए। 6.बराक ओबामा बराक ओबामा 2010 और 2015 में भारत आए। वह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे, जिन्होंने अपने कार्यकाल में दो बार भारत का दौरा किया। अपनी पहली यात्रा के दौरान ओबामा ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और पीएम मनमोहन से मुलाकात की।

इस दौरान उन्होंने संसद को संबोधित किया। इतना ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने मुंबई में यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल और उद्यमिता शिखर सम्मेलन में भाग लिया। ओबेमा दूसरी बार 2015 में भारत आए। वह गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे।

इस दौरान उन्होंने परमाणु समझौते पर सफलता की घोषणा की। समझौते पर 2008 में सहमति हुई थी, लेकिन किसी न किसी वजह से 6 साल अमेरिकी कंपनियों ने भारत में देनदारी को लेकर इसे टाल दिया था। 7. डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2020 में भारत आए थे।

भारत की अपनी पहली यात्रा पर डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पत्नी ने मेलानिया, बेटी इवांका, दामाद जेरेड कुशनर और कई शीर्ष अधिकारियों के साथ अहमदाबाद, आगरा और नई दिल्ली का दौरा किया था। उन्होंने 24 फरवरी को अहमदाबाद में तीन घंटे बिताए थे। इस दौरान उन्होंने 22 किलोमीटर लंबे रोड शो में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम को संबोधित किया। ट्रंप भारत आने वाले आखिरी राष्ट्रपति थे।

G-20 Summit: ”फर्क नहीं पड़ता..”, G-20 समिट में जिनपिंग और पुतिन के न आने पर जयशंकर ने कही यह बड़ी बात

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दिल्ली में 9-10 सितंबर को G-20 समिट होने जा रहा है। G-20 समिट में कई देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शामिल होने वाले हैं। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन भी शामिल होंगे।

वहीं इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग हिस्सा नहीं लेंगे। पुतिन और शी जिनपिंग के हिस्सा नहीं लेने पर भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर की प्रतिक्रिया सामने आई है।

जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि G20 में अलग-अलग समय पर कुछ ऐसे राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने किसी वजह से न आने का फैसला किया है लेकिन उस अवसर पर जो भी उस देश का प्रतिनिधि होता है, वह अपने देश और उसकी स्थिति को सामने रखता है। मुझे लगता है कि हर कोई बहुत गंभीरता के साथ आ रहा है।

जयशंकर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि अलग-अलग समय पर जी-20 में कोई न कोई राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री रहे हैं, जो किसी वजह से खुद नहीं आ पाए हैं लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता। मायने यह रखता है कि उस देश का पक्ष और स्थिति क्या है और वह इसी बात से साफ हो जाता है कि वह अपने किस प्रतिनिधि को जी-20 के लिए भेजता है। मुझे लगता है कि जी-20 में सभी काफी गंभीरता के साथ आ रहे हैं जो अपने देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, जर्मनी के चांसलर ऑल्फ स्कॉल्ज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनैकियो लूला डि सिल्वा सहित जी20 के कई नेता इस सम्मेलन में शिरकत करने आ रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की जगह चीनी पीएम ली कियांग नई दिल्ली में 9-10 सितंबर की बैठक में बीजिंग का प्रतिनिधित्व करेंगे और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जगह विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जी-20 समिट में हिस्सा लेंगे।

19 सितंबर से शुरू हो रहा गणेशोत्सव, मूर्ति स्थापना के दौरान 6 नियमों का करें पालन, सुख-समृद्धि से भर जाएगा घर

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Ganesh Chaturthi 2023 : 19 सितंबर 2023, दिन मंगलवार को गणेश चतुर्थी प्रारंभ हो रही है. इस दिन घरों और सार्वजनिक स्थानों पर भगवान गणेश की शानदार मनोहारी प्रतिमाएं पूरे भारत वर्ष में जगह-जगह स्थापित की जाती है.

भारत वर्ष में गणेशोत्सव का त्योहार बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस साल मंगलवार के दिन गणेशोत्सव पर्व की शुरुआत होने जा रही है. ये पर्व 10 दिन तक मनाया जाएगा. ये 10 दिन भगवान गणेश की आराधना करने वाले भक्तों के लिए ख़ास है. ज्योतिष की समझ रखने वाले जानकार बताते हैं, कि यदि इस दौरान गणपति बप्पा की विधि विधान से पूजा अर्चना की जाए और कुछ नियमों का पालन किया जाए. तो पूरे साल भगवान गणेश अपने भक्तों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. साथ ही वे अपने भक्तों की हर मनोकामना भी पूरी करते हैं. भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं, भगवान गणेश की स्थापना के नियमों के बारे में.

गणेश स्थापना के नियम

-यदि आप भी भगवान गणपति की मूर्ति स्थापित करने जा रहे हैं. तो इसे ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थापित करें. ये ध्यान रखें कि मूर्ति का मुख पश्चिम दिशा की ओर ही हो.

-भगवान गणेश की स्थापना करने से पहले ही उस जगह की अच्छे से साफ़ सफ़ाई करनी चाहिए, जिस जगह भगवान गणेश को स्थापित करने जा रहे हैं. वहां पर अशुद्धि और कचरा ना रहे. इसके अलावा चमड़े का सामान इस जगह के आस पास न लाएं.

-भगवान गणेश की स्थापना करने के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम को इनकी आरती करें. सुबह-शाम भगवान गणेश को भोग लगाएं, धूप दीप दिखाएं.

-भगवान गणेश की मूर्ति एक बार स्थापित हो जाए, तो उसे बार बार उस जगह से हिलाएं नहीं. इसे विसर्जन के समय ही वहां से हटाया जा सकता है. भगवान गणेश को गलती से भी तुलसी की पत्तियां न चढ़ाएं, भगवान गणपति को दूर्वा ही चढ़ाई जाती है.

-भगवान गणेश की स्थापना करते समय अपने मन में बुरे भाव नहीं लाने चाहिए और न ही इन 10 दिनों के दौरान कोई ग़लत कार्य करना चाहिए.

-यदि आप आप घर में भगवान गणेश की स्थापना करने जा रहे हैं. तो ध्यान रखें कि घर में नॉन वेज या शराब आदि न लाई जाए और न ही घर के बाहर जाकर इस तरह की तामसिक चीज़ों का सेवन करें. हो सके तो गणेशोत्सव के दौरान लहसुन प्याज़ खाने से भी परहेज़ करें.

Janmashtami 2023 Wishes: श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी… जन्माष्टमी के पावन अवसर पर अपनों को भेजें ये बधाई संदेश

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Happy Janmashtami 2023 Wishes: जन्माष्टमी का त्योहार प्रत्येक वर्ष देश भर में बेहद ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. हिंदू धर्म में इस त्योहार का खास महत्व है. मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल का जन्म हुआ था.

वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है. इस वर्ष 6 सितंबर को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है. ऐसे में 6 तारीख को जन्माष्टमी का व्रत रखा जाएगा और बाल गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम से सेलिब्रेट किया जाएगा. जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण जी के मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया जाता है. इन मंदिरों में लड्डू गोपाल के दर्शन के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. अपने-अपने घरों में भी कृष्ण भक्त कान्हा का जन्मदिन खास अंदाज में मनाते हैं. पूजा-पाठ करते हैं, व्रत रखते हैं.

इस दिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई संदेश भेजने का सिलसिला लगातार जारी रहता है. व्हॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, नॉर्मल मैसेज के जरिए लोग एक-दूसरे को विशेज स्टिकर, वॉलपेपर, टेक्स्ट मैसेज, कोट्स आदि शुभकामना संदेश भेजते हैं. यदि आप भी अपने रिश्तेदारों, दोस्तों, ऑफिस कलीग्स को कृष्ण जन्मोत्सव पर बधाई संदेश भेजना चाहते हैं तो हम लेकर आए हैं कुछ चुनिंदा और खूबसूरत मैसेजेज.

कृष्ण जन्माष्टमी पर भेजें ये शुभकामना संदेश

श्री कष्ण जन्माष्टमी के इस शुभ अवसर पर

हमारी दिल से ये दुआ है कि

कृष्ण भगवान की कृपा आपके

और समस्त परिवार पर सदा बनी रहे.

कृष्ण जन्माष्टमी की ढेरों बधाई!

जपेंगे राधा-राधा तो होगा आपका उद्धार

क्योंकि यही वो नाम है जिससे कृष्ण को है बेहद प्यार.

Happy Janmashtami 2023

मुरली मनोहर ब्रज के धरोहर

नंदलाल बाल गोपाल है.

अपनी बंसी की धुन पर

सब दुखों को हर लेने वाला

आने वाला है वो नटखट लड्डू गोपाल है.

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!

राधा की भक्ति और मुरली की मिठास

गोपियों का रास, माखन का स्वाद

आओ, सब मिलकर बनाते हैं

श्री कृष्ण का जन्मोत्सव खास.

सब मिलकर सजाओ नन्दलाल को

मिलकर करो सब गुणगान

जो दिखाते हैं सबको राह

बिगड़ी सबकी बनाते हैं!

शुभ श्री कृष्ण जन्माष्टमी!

माखन चुराकर उसने खाया

बंसी बजाकर उसने नचाया

खुशी मनाओ उसके जन्मदिन की

जिसने दुनिया को प्रेम का मार्ग दिखाया.

हैप्पी जन्माष्टमी 2023

यशोदा जी के घर माखन चोर है आया रे

चारों ओर गोकुल में हैं खुशियां छाई रे

जन्मे हैं कृष्ण कन्हैया आज

शुभ घड़ी है देखो आई रे

नंद खुशी से फूले न समायो रे.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की ढेरों बधाई!

माखन से भरी हांडी ने मिठास बढ़ाई है

बाल गोपाल की लीला है बेहद प्यारी

वो दें आप सभी को दुनिया भर की खुशियां सारी.

जन्माष्टमी की ढेरों बधाई!

ब्रज के दुलारे और मइया यशोदा की आंखों के तारे

राधा और सभी गोपियों के हैं वे सखा प्यारे

बेहद मनमोहक हैं श्रीकृष्ण हमारे.

जन्माष्टमी की ढेरों बधाई!

फिर बजा विश्व में भारत का डंका 8 देशों के प्रमुख अब भारतवंशी

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 विश्व राजनीति में भारतवंशियों का दबदबा और बढ़ गया है। अब भारतीय मूल के थर्मन षणमुगरत्नम सिंगापुर के 9वें राष्ट्रपति निर्वाचित होने से वह विश्व के आठवें देश के भारतवंशी राष्ट्र प्रमुख बन गए हैं।

थर्मन के माता-पिता तमिल हैं तथा सिंगापुर में तमिल जनसंख्या लगभग 9 प्रतिशत है। इससे पूर्व 7 अन्य देशों में भारतीय मूल के 7 नेता या तो राष्ट्रपति पद पर विराजमान हैं या प्रधानमंत्री पद को सुभोभित कर रहे हैं।

सिंगापुर के राष्ट्रपति षणमुगरत्नम से पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ, लैटिन अमरीकी देश सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी, गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली, सेशल्स के राष्ट्रपति वावेल राम कलावन व आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वराडकर भारतीय मूल के राजनेता हैं जो शीर्ष पदों पर पहुंचे हैं।

थर्मन ने राजनीति में आने के 22 वर्षों के बाद राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लडऩे के लिए जुलाई में सत्तारूढ़ पीपुल्स एक्शन पार्टी (पी.ए.पी.) और कैबिनेट में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। यह कुछ विश्लेषकों के लिए आश्चर्यजनक और अप्रत्याशित रहा क्योंकि पिछले कुछ सप्ताह में पी.ए.पी. को परेशान करने वाले घोटालों को देखते हुए लग रहा था कि इससे उनकी उम्मीदवारी पर दाग लग सकता है। सिंगापुर की वर्तमान राष्ट्रपति हलीमा याकूब का 6 वर्ष का कार्यकाल 13 सितम्बर को समाप्त हो रहा है।

प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने शनिवार को थर्मन को बधाई देते हुए कहा कि सिंगापुर के लोगों ने निर्णायक अंतर से थर्मन षणमुगरत्नम को हमारा अगला राष्ट्रपति चुना है। वह भारतीय मूल के कई उन नेताओं में से हैं जो वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक सेवा के उच्चतम स्तर तक पहुंचे हैं। उनकी जीत विश्वभर में भारतीयों के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है।

अमरीका में कमला के बाद निक्की और रामास्वामी भी चमके

अमरीका में भारतीय-अमरीकी समुदाय के बढ़ते प्रभाव को कमला हैरिस की सफलता में देखा जा सकता है जो देश की पहली महिला उपराष्ट्रपति बनीं। कैलिफोर्निया के प्रमुख राजनेता हरमीत ढिल्लों ने हाल ही में रिपब्लिकन नैशनल कमेटी (आर.एन.सी.) के अध्यक्ष के लिए चुनाव लड़ा था। निक्की हैली और विवेक रामास्वामी जैसे भारतीय मूल के नेताओं ने 2024 में व्हाइट हाऊस के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।