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फिर बजा विश्व में भारत का डंका 8 देशों के प्रमुख अब भारतवंशी

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 विश्व राजनीति में भारतवंशियों का दबदबा और बढ़ गया है। अब भारतीय मूल के थर्मन षणमुगरत्नम सिंगापुर के 9वें राष्ट्रपति निर्वाचित होने से वह विश्व के आठवें देश के भारतवंशी राष्ट्र प्रमुख बन गए हैं।

थर्मन के माता-पिता तमिल हैं तथा सिंगापुर में तमिल जनसंख्या लगभग 9 प्रतिशत है। इससे पूर्व 7 अन्य देशों में भारतीय मूल के 7 नेता या तो राष्ट्रपति पद पर विराजमान हैं या प्रधानमंत्री पद को सुभोभित कर रहे हैं।

सिंगापुर के राष्ट्रपति षणमुगरत्नम से पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ, लैटिन अमरीकी देश सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिका प्रसाद संतोखी, गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली, सेशल्स के राष्ट्रपति वावेल राम कलावन व आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वराडकर भारतीय मूल के राजनेता हैं जो शीर्ष पदों पर पहुंचे हैं।

थर्मन ने राजनीति में आने के 22 वर्षों के बाद राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव लडऩे के लिए जुलाई में सत्तारूढ़ पीपुल्स एक्शन पार्टी (पी.ए.पी.) और कैबिनेट में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। यह कुछ विश्लेषकों के लिए आश्चर्यजनक और अप्रत्याशित रहा क्योंकि पिछले कुछ सप्ताह में पी.ए.पी. को परेशान करने वाले घोटालों को देखते हुए लग रहा था कि इससे उनकी उम्मीदवारी पर दाग लग सकता है। सिंगापुर की वर्तमान राष्ट्रपति हलीमा याकूब का 6 वर्ष का कार्यकाल 13 सितम्बर को समाप्त हो रहा है।

प्रधानमंत्री ली सीन लूंग ने शनिवार को थर्मन को बधाई देते हुए कहा कि सिंगापुर के लोगों ने निर्णायक अंतर से थर्मन षणमुगरत्नम को हमारा अगला राष्ट्रपति चुना है। वह भारतीय मूल के कई उन नेताओं में से हैं जो वैश्विक स्तर पर सार्वजनिक सेवा के उच्चतम स्तर तक पहुंचे हैं। उनकी जीत विश्वभर में भारतीयों के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है।

अमरीका में कमला के बाद निक्की और रामास्वामी भी चमके

अमरीका में भारतीय-अमरीकी समुदाय के बढ़ते प्रभाव को कमला हैरिस की सफलता में देखा जा सकता है जो देश की पहली महिला उपराष्ट्रपति बनीं। कैलिफोर्निया के प्रमुख राजनेता हरमीत ढिल्लों ने हाल ही में रिपब्लिकन नैशनल कमेटी (आर.एन.सी.) के अध्यक्ष के लिए चुनाव लड़ा था। निक्की हैली और विवेक रामास्वामी जैसे भारतीय मूल के नेताओं ने 2024 में व्हाइट हाऊस के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर CM भूपेश बघेल (पाटन) के नवनिर्मित भवनों का लोकर्पण किया

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 5 सितम्बर यानी आज शिक्षक दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले में संत विनोबा भावे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, मर्रा (पाटन) के नवनिर्मित भवनों का लोकर्पण किया यह महाविद्यालय 11.76 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है. इस मौके पर भुपेश बघेल कृषि मंत्री ताम्रध्वज साहू तथा दुर्ग जिले के प्रभारी मंत्री मोहम्मद अकबर एवं स्कूल शिक्षा मंत्री रवीद्र चौबे अतिथि बनकर शिक्षकों को सम्मानित कर कार्यक्रम की अध्यक्षता को प्रस्तान किया|

करोड़ों के विकास कार्यो का लोकार्पण

संत विनोबा भावे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, मर्रा (पाटन) को लगभग 87 एकड़ भूमि में बनाया गया है. यहां कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए नवीन महाविद्यालय भवन समस्त शैक्षणिक सुविधावों से सुसज्जित है. जिसकी लागत लगभग 5 करोड़ 25 लाख रुपये है. यहां पर कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान कार्य के लिए स्मार्ट क्लास रूम, वाई-फाई एवं इंटरनेट सम्मुनत प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेलकूद, एन.एस.एस., पोस्ट-मेट्रिक छात्रवृत्ति आदि कि सुविधाएं उपलब्ध हैं. कृषि क्षेत्र में अनुसंधान के लिए 72 एकड़ में कृषि प्रक्षेत्र का विकास किया गया है, जहां हाइ-टेक नर्सरी का निर्माण किया गया है, जिसकी लागत लगभग एक करोड़ रुपये है.

टिशू-कल्चर प्रयोगशाला का करेंगे उद्दघाटन

महाविद्यालय परिसर में टिशू-कल्चर प्रयोगशाला का निर्माण लगभग 2.50 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है. यहां टिशू-कल्चर के माध्यम से केला, गन्ना, बांस, गुलाब एवं अन्य पौधों तैयार किया जाएगा. छत्तीसगढ़ मंडी बोर्ड के सहयोग से बीज भंडार गृह इम्प्लीमेंट शेड एवं कृषक प्रशिक्षण के लिए कृषक विश्राम गृह का निर्माण लगभग 2.37 करोड़ रुपए में किया गया है. 200 मैट्रिक टन क्षमता वाले 3 खाद गोदामों का भी निर्माण 32.93 लाख रुपये की लागत से किया गया है.

Chhattisgarh : विधानसभा चुनाव से पहले सीएम भूपेश बघेल ने दूसरी बार प्रधानमंत्री मोदी को लिखी चिट्ठी, जानें- क्या है वजह

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Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इस बार मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के पीएम आवास योजना को लेकर पत्र लिखा है.

इसमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आग्रह किया है कि छत्तीसगढ़ में लाखों परिवारों को आवास का लाभ दिया जाए. इसकी स्वीकृति लंबे समय से अटकी हुई है इसपर निर्णय लेने का आग्रह किया गया है.

PM मोदी को CM भूपेश बघेल का एक और पत्र

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पत्र में लिखा है कि राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थाई प्रतीक्षा सूची में शामिल 6 लाख 99 हजार 439 परिवारों के साथ आवास प्लस के 8 लाख 19 हजार 999 परिवारों के आवास को स्वीकृत कर लक्ष्य प्रदान करने का अनुरोध है. प्रधानमंत्री से आवासों को स्वीकृति देते के लिए लक्ष्य देने के साथ ही केन्द्रांश की राशि उपलब्ध कराए जाने का भी अनुरोध किया है. मुख्यमंत्री ने कहा 30 जुलाई 2023 के परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार के अनुरोध पर भारत सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से आज दिनांक तक अवगत नहीं कराया गया है

आवास योजना के लिए केंद्रांश जारी करने की मांग

साल 2021-22 के लिए आवंटित 7 लाख 81 हजार 999 आवासों के लक्ष्य को केंद्र द्वारा वापस ले लिया गया है. राज्य सरकार द्वारा स्थायी प्रतीक्षा सूची के बाकी 6 लाख 99 हजार 439 परिवारों को और राज्य सरकार के द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण- 2023 में पाए गए आवासहीन 47 हजार 90 परिवारों को योजनांतर्गत आवास निर्माण कर लाभान्वित किए जाने के लिए राज्यांश राशि जारी कराने का निर्णय लिया गया है. वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा है कि लक्ष्य आवंटित करते हुए केन्द्रांश की राशि उपलब्ध कराए जाने का अनुरोध किया है, ताकि योजनांतर्गत आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जाकर हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सके.

विधानसभा चुनाव में आवास योजना भी बड़ा मुद्दा

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ पीएम आवास योजना विधानसभा चुनाव का बड़ा मुद्दा है. क्योंकि बीजेपी आवास योजना के नाम पर कांग्रेस सरकार को लगातार घेर रही है. वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने ये घोषणा भी की है कि जब-जब छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनेगी तो जो भी मुख्यमंत्री बनेगा सबसे पहले पीएम आवास योजना पर ही हस्ताक्षर करेंगे और राज्य के लाखों लोगों को आवास का पैसा जारी किया जाएगा.

MP Weather: मध्य प्रदेश के लोगों को जल्द मिलेगी गर्मी से राहत, जानिए आपके जिले में कब होगी बारिश?

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MP Weather Update:
 इन दिनों मध्य प्रदेश सूखे की मार झेल रहा है. राज्य में पिछले 31 दिनों से बारिश नहीं हुई है. हालांकि अब एमपी के लोगों के लिए राहत भरी खबर आ रही है. मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश में एक-दो दिनों में झमाझम बारिश की संभावनाएं जताई हैं.

विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी के पश्चिम मध्य और उत्तर क्षेत्र में चक्रवर्ती घेरा सक्रिय होने की वजह से मध्य प्रदेश में भी बारिश की संभावना है. मौसम विभाग में आने वाले कुछ दिनों में एमपी के कई इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी भी दी है.

मौसम विशेषज्ञ डॉक्टर वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि आने वाले 24 घंटे में जबलपुर संभाग, शहडोल संभाग और रीवा संभाग में बारिश की संभावना है. इन संभागों के सीधी, सिंगरौली, बालाघाट डिंडोरी आदि जिलों में बारिश की पूरी संभावनाएं जताई गई है. मौसम विभाग ने उक्त जिलों में 24 घंटे के भीतर बारिश की संभावना जताते हुए दावा किया कि आने वाले 72 घंटे में भोपाल, होशंगाबाद, इंदौर, ग्वालियर, सागर संभाग में भी मध्यम बारिश होगी. वैसे भी मौसम विभाग ने 7 सितंबर से एमपी में बारिश होने का पहले ही दावा कर दिया था. मौसम विभाग की माने तो 10 सितंबर तक पूरे मध्य प्रदेश में झमाझम बारिश होगी.

72 घंटे के भीतर बारिश की संभावना
वर्तमान समय में किसानों को बारिश का बेसब्री से इंतजार है. हालांकि सामान्य से कम बारिश होने की वजह से जमीन का जलस्तर भी ऊपर नहीं उठ पाया है. वेद प्रकाश सिंह के मुताबिक बारिश का सिस्टम पूर्व से पश्चिम की ओर सफर करेगा. इस दौरान उज्जैन संभाग में भी 72 घंटे के भीतर बारिश होने की संभावना है. बारिश के कारण मौसम ठंडा होगा और तापमान कम हो जाएगा. बारिश के दौरान तेज हवाएं चलने की भी पूरी संभावना रहेगी. हवा की गति पर भी बारिश का असर पड़ेगा.

मध्य प्रदेश के सभी जिलों में बारिश
मौसम विभाग की ओर से दावा किया जा रहा है कि 72 घंटे मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का दौर शुरू हो जाएगा. इसके बाद धीरे-धीरे आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश के सभी जिलों में बारिश होगी. एमपी के कुछ जिले ऐसे भी है जिन्हें लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इनमें रीवा, बालाघाट, सीधी, सिंगरौली, डिंडोरी जिले शामिल है.

Mumbai : मुंबई में संयुक्त किसान मोर्चा का राज्य स्तरीय सम्मेलन आज, कई मुद्दों पर होगी चर्चा, घोषणापत्र में क्या होगा खास?

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Samyukt Kisan Morcha Conference: संयुक्त किसान मोर्चा का राज्य स्तरीय सम्मेलन आज मुंबई में होगा. इस सत्र में किसानों के मुद्दों पर चर्चा होगी. यह सम्मेलन मुंबई के यशवंतराव चव्हाण केंद्र में आयोजित किया जाएगा.

इस स्थापना बैठक के अवसर पर कृषि पर निर्भर किसानों, खेतिहर मजदूरों, मजदूरों, कृषि में काम करने वाली महिलाओं, आदिवासियों, मछुआरों के तमाम मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी. इस सम्मेलन में एक मजबूत राज्यव्यापी कार्रवाई कार्यक्रम बताते हुए एक घोषणापत्र की घोषणा की जानी है. उसके आधार पर महाराष्ट्र में किसान आंदोलन को बड़ा बढ़ावा दिया जाएगा.

महाराष्ट्र के 27 किसान संगठन एक साथ आएंगे
ABP माझा के अनुसार, यह सत्र संयुक्त किसान मोर्चा की महाराष्ट्र राज्य शाखा के स्थापना दिवस पर आयोजित किया जाएगा. सम्मेलन दोपहर 3 बजे शुरू होगा. इस दौरान इस सत्र में संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेता राजाराम सिंह सहित कई लोग उपस्थित रहेंगे. डॉ. दर्शनपाल, अतुल कुमार अंजान, डॉ. अशोक धावले, मेधा पाटकर, प्रतिभा शिंदे, डाॅ. सुनीलम और अन्य गणमान्य भी उपस्थित रहेंगे. इस बैठक में महाराष्ट्र के 27 किसान संगठन एक साथ आ रहे हैं.

सम्मेलन की पृष्ठभूमि
बीजेपी की केंद्र सरकार ने कृषि का कॉरपोरेटीकरण करने के उद्देश्य से तीन कृषि कानून पारित किये. इन कानूनों के खिलाफ देशभर में 500 से ज्यादा किसान संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था. किसान करीब एक साल से दिल्ली की सीमा पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. इसके बाद केंद्र सरकार ने यह कानून वापस ले लिया. इसी आंदोलन के दौरान 26 से 27 अक्टूबर 2020 को दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की स्थापना की गई.

मार्च में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार के तीन किसान विरोधी और कॉर्पोरेट शैली के कानूनों का विरोध करने के लिए देशव्यापी संघर्ष का आह्वान किया गया. किसानों को फिर से कर्जदार बनने से रोकने के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार कृषि वस्तुओं के लिए उत्पादन लागत का डेढ़ गुना गारंटी देने का प्रस्ताव पारित किया जाए. संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों के हित की अन्य मांगों जैसे कृषि वस्तुओं की उत्पादन लागत में कमी, किसान विरोधी बिजली बिल को रद्द करने, श्रम पेंशन, व्यापक फसल बीमा योजना, किसान-कृषि आदि पर भी आर-पार की लड़ाई लड़ने का फैसला किया है.

सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किये
किसानों ने 26 नवंबर 2020 से 11 दिसंबर 2021 तक दिल्ली की सीमाओं पर कड़ा संघर्ष किया था. जिसके बाद आखिरकार केंद्र सरकार को किसान विरोधी तीन कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. उस वक्त सरकार ने किसान आंदोलन में 700 से ज्यादा शहीदों के परिवारों को मदद, लखीमपुर खीरी नरसंहार के आरोपियों को सजा देने जैसे कई वादे किए थे. दरअसल, केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को रद्द करने के अलावा अन्य वादे पूरे नहीं किए. परिणामस्वरूप संयुक्त किसान मोर्चा को अपना संघर्ष जारी रखना पड़ा. इस संघर्ष को मजबूत करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने राज्य स्तर पर संयुक्त किसान मोर्चा की शाखाएं स्थापित करने का आह्वान किया.

National Teacher Award 2023 : इन 75 शिक्षकों को आज मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, राष्ट्रपति करेंगी सम्मानित, क्यों दिया जाता है यह अवार्ड

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National Teachers Award 2023: शिक्षक दिवस पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 5 सितंबर को चयनित योग्य शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2023 प्रदान करेंगी। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के विज्ञान भवन में होगा, जिसकी मेजबानी शिक्षा मंत्रालय के तहत स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग करेगा।

इस वर्ष, देश के विभिन्न हिस्सों से 75 शिक्षकों को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस सम्मान का उद्देश्य उन शिक्षकों को पहचानना और उनकी प्रशंसा करना है जिन्होंने न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया है बल्कि अपने अटूट समर्पण और प्रतिबद्धता से अपने छात्रों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। प्रत्येक शिक्षक को योग्यता प्रमाण पत्र, 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार और एक रजत पदक दिया जायेगा।

शिक्षक एक गुरु और मार्गदर्शक भी

पुरस्कार प्रदान करने से पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, “शिक्षक दिवस एक ऐसा अवसर है जब राष्ट्र शिक्षण के पेशे का सम्मान करता है और छात्रों के भविष्य के निर्माण के लिए शिक्षकों की सेवाओं और प्रयासों को मान्यता देता है। एक शिक्षक केवल वह व्यक्ति नहीं है जो परीक्षाओं को पास करने के लिए विषयों का ज्ञान देता है, जबकि एक शिक्षक एक गुरु और मार्गदर्शक भी होता है जो अपने छात्र को सही रास्ता दिखाता है।” इसके अलावा उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी के युग में शिक्षकों की भूमिका ने शिक्षा प्रदान करने के नवीनतम तरीकों को विकसित करने और अपनाने की आवश्यकता के साथ नए आयाम हासिल किए हैं।

ऑनलाइन था नोमिनेशन प्रोसेस

चुने गए 75 शिक्षकों में से 50 स्कूलों से हैं, 13 उच्च शिक्षा से हैं, और 12 कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय से हैं। रचनात्मक शिक्षण दृष्टिकोण, प्रभावशाली शोध, सामुदायिक भागीदारी और अद्वितीय शैक्षिक प्रयासों को स्वीकार करने के लिए, नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन की गई, जिससे जनता की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया। नीचे पुरस्कार विजेताओं की लिस्ट दी गई है जानें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुने गये शिक्षक किस-किस राज्य से हैं।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2023 की सूची

सत्यपाल सिंह (रेवाड़ी, खोल, हरियाणा)

विजय कुमार (राजकीय माध्यमिक विद्यालय मोहटली, इंदौरा, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश)

अमृतपाल सिंह (सरकारी सेनाध्यक्ष स्कूल छपार, पखोवाल, लुधियाना, पंजाब)

आरती कानूनगो (एसकेवी लक्ष्मी नगर, पूर्वी दिल्ली)

दौलत सिंह गुसाईं सरकार. इंटर कॉलेज सेंधीखाल, जयहरीखाल, पौरी गढ़वाल, उत्तराखंड)

संजय कुमार (गवर्नमेंट मॉडल हाई स्कूल, सेक्टर 49डी, क्लस्टर 14, चंडीगढ़)

आशा रानी सुमन (राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खरखड़ा, राजगढ़, अलवर, राजस्थान)

शीला आसोपा (जीजीएसएसएस, श्याम सदन, जोधपुर, राजस्थान)

श्यामसुंदर रामचंद खानचंदानी (सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिलवासा, दमन और दीव)

अविनाश मुरलीधर पारखे (विशेष बच्चों के लिए दिशा स्कूल, पणजी, तिस्वाड़ी, उत्तरी गोवा)

दीपक जेठालाल मोटा (श्री हुंडरायबाग प्राइमरी स्कूल, कच्छ, गुजरात)

रीताबेन निकेशचंद्र फुलवाला (शेठ श्री पी.एच. बचकानिवाला विद्यामंदिर, सूरत, गुजरात)

सारिका घारू (शासकीय एच.एस. स्कूल, सांडिया जिला, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश)

सीमा अग्निहोत्री, (सीएम राइज शासकीय विनोबा एच.एस. स्कूल, रतलाम मध्य प्रदेश)

ब्रजेश पांडे (स्वामी आत्मानंद शासकीय इंग्लिश स्कूल, सरगुजा छत्तीसगढ़)

इजाज़ुल हेग (एमएस दीवानखाना, चतरा, झारखंड)

भूपिंदर गोगिया (सत पॉल मित्तल स्कूल, लुधियाना, पंजाब)

शशि शेखर कर शर्मा (केंदुपाड़ा नोडल हाई स्कूल, भद्रक, ओडिशा)

सुभाष चंद्र राउत (ब्रुंडाबन गवर्नमेंट हाई स्कूल, जगतसिंहपुर, ओडिशा)

चंदन मिश्रा (रघुनाथपुर, नफ़र अकादमी, हावड़ा, पश्चिम बंगाल)

रेयाज़ अहमद शेख (सरकारी मिडिल स्कूल, पोशनारी, चित्तरगुल, अनंतनाग, जम्मू और कश्मीर)

आसिया फ़ारूक़ी (प्राथमिक विद्यालय, अस्ति नगर, फ़तेहपुर, उत्तर प्रदेश)

चन्द्र प्रकाश अग्रवाल (शिव कुमार अग्रवाल जनता इण्टर कॉलेज, मो0, उत्तर प्रदेश)

अनिल कुमार सिंह (आदर्श गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रामगढ़, कैमूर-भभुआ, बिहार)

द्विजेन्द्र कुमार (एनएस मधुबन, बनगांव बाजार, बाजपट्टी, सीतामढी, बिहार)

कुमारी गुड्डी (उच्च विद्यालय सिंघिया किशनगंज, बिहार)

रविकांत मिश्रा (जेएनवी, बीकर, दतिया, मध्य प्रदेश)

मनोरंजन पाठक (सैनिक स्कूल, तिलैया कांटी, चंदवारा, कोडरमा, झारखंड)

यशपाल सिंह (एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, फंदा, भोपाल, मध्य प्रदेश)

मुजीब रहमान के यू (केंद्रीय विद्यालय, कांजीकोड, पलक्कड़, केरल)

चेतना खंबेटे (केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 2, बीएसएफ, इंदौर, मध्य प्रदेश)

नारायण परमेश्वर भागवत (श्री मरिकम्बा सरकार पीयूसी हाई स्कूल अनुभाग, सिरसी, कर्नाटक)

सपना श्रीशैल अनिगोल (के.एल.ई. सोसायटी के एस.सी.पी. जूनियर कॉलेज हाई स्कूल, बागलकोट, कर्नाटक)

नेताई चंद्र डे (रामकृष्ण मिशन स्कूल, नरोत्तम नगर, देवमाली, तिरप, अरुणाचल प्रदेश)

निंगथौजम बिनॉय सिंह (चिंगमेई उच्च प्राथमिक विद्यालय, केइबुल लामजाओ, मोइरंग, बिष्णुपुर, मणिपुर)

पूर्ण बहादुर छेत्री (सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सोरेंग, सिक्किम)

लालथियांघलीमा (सरकारी डायक्कॉन हाई स्कूल, कोलासिब, बिल्खावथलिर, कोलासिब, मिजोरम)

माधव सिंह (अल्फा इंग्लिश हायर सेकेंडरी स्कूल, लम्सोह्दानेई, उमलिंग, मेघालय)

कुमुद कलिता (पाठशाला सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मुगुरिया, पाठशाला, असम)

जोस डी सुजीव (गवर्नमेंट मॉडल गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, पट्टम, तिरुवनंतपुरम, केरल)

मेकला भास्कर राव (एमसीपीएस कोंडायापालम एस.सी. कॉलोनी कोंडायापालेम, एसपीएसआर नेल्लोर, आंध्र प्रदेश)

मुरहारा राव उमा गांधी (जीवीएमसीपी स्कूल सिवाजीपालेम, 21, विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश)

सेट्टेम अंजनेयुलु (एस.आर.आर. ज़ेड.पी. हाई स्कूल मसापेटा, रायचोटी, अन्नामय्या, आंध्र प्रदेश)

अर्चना नूगुरी (एमपीपीएस रेब्बानपल्ली रेब्बानपल्ली, लक्सेटिपेट, मंचेरियल, तेलंगाना)

संतोष कुमार भेदोदकर (मंडल परिषद उच्च प्राथमिक विद्यालय निपानी, भीमपुर, आदिलाबाद, तेलंगाना)

रितिका आनंद (सेंट मार्क्स सेकेंडरी पब्लिक स्कूल, पश्चिम विहार, दिल्ली)

सुधांशु शेखर पांडा (के.एल. इंटरनेशनल स्कूल, मेरठ, उत्तर प्रदेश)

टी गॉडविन वेदनायगम राजकुमार गवर्नमेंट बॉयज़ एचआर सेक. स्कूल, अलंगनल्लूर, मदुरै, तमिलनाडु

मलाथी एस.एस. मलाथी (सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय वीरकेरलमपुदुर, कीलप्पवूर, तेनकासी, तमिलनाडु)

मृणाल नंदकिशोर गंजले (जेडपी स्कूल पिंपलगांव तरफे, महालुंगे, अंबेगांव, पुणे, महाराष्ट्र)

उच्च शिक्षा विभाग:

एस बृंदा (पीएसजी पॉलिटेक्निक कॉलेज, कोयंबटूर, तमिलनाडु)

मेहता ज़ंखाना दिलीपभाई (सरकारी पॉलिटेक्निक, अहमदाबाद गुजरात)

केशव काशीनाथ सांगले (वीजेटीआई, मुंबई, महाराष्ट्र)

एस.आर. महादेव प्रसन्ना (आईआईटी, धारवाड़, कर्नाटक)

दिनेश बाबू जे (अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, बैंगलोर, कर्नाटक)

फरहीन बानो (डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ, उत्तर प्रदेश)

सुमन चक्रवर्ती (आईआईटी, खड़गपुर, पश्चिम बंगाल)

सयम सेन गुप्ता (आईआईएसईआर, मोहनपुर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल)

चंद्रगौड़ा रावसाहेब पाटिल (आर.सी. पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, शिरपुर, महाराष्ट्र)

राघवन बी. सुनोज (आईआईटी मुंबई, महाराष्ट्र)

इंद्रनाथ सेनगुप्ता (आईआईटी, गांधीनगर, गुजरात)

आशीष बाल्दी (महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा, पंजाब)

सत्य रंजन आचार्य (भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, गांधीनगर, गुजरात)

कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय:

रमेश रक्षित (सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल)

रमण कुमार (सरकारी आईटीआई हिलसा, नालन्दा, बिहार)

शियद एस (सरकारी आईटीआई, मालमपुझा, पलक्कड़)

स्वाति योगेश देशमुख (सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, लोअर परेल, मुंबई

टिमोथी जोन्स धार (सरकारी आईटीआई, शिलांग)

अजित ए नायर (सरकारी आईटीआई, कलामासेरी, एच.एम.टी. कॉलोनी, एर्नाकुलन)

चित्रकुमार (सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (महिला), नाथम रोड, कुल्लनमपट्टी, डिंडीगुल

रबीनारायण साहू (पीडब्ल्यूडी के लिए आईटीआई, खुदपुर, खोरधा)

सुनीता सिंह, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, भुवनेश्वर)

पूजा आर सिंह (राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान, बैंगलोर)

डिवी (राष्ट्रीय महिला कौशल प्रशिक्षण संस्थान, होसुर रोड, बेंगलुरु, कर्नाटक)

दिब्येंदु चौधरी (स्कूल ऑफ एंटरप्राइज मैनेजमेंट (एसईएम) नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज, यूसुफगुडा, हैदराबाद)

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार क्या है, कैसे हुई इसकी शुरुआत

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पहली बार 1958 में युवामन के साथ-साथ उनके भविष्य को आकार देने में शिक्षकों की उत्कृष्टता और प्रतिबद्धता को पहचानने के लिए शुरु किए गए थे। 60 के दशक के मध्य से, 5 सितंबर भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के उपलक्ष्य में समारोह के लिए निश्चित तिथि हो गई। इस पुरस्कार का उद्देश्य प्रारम्भिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रतिभाशाली शिक्षकों को सार्वजनिक मान्यता प्रदान करना था। वही राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार योजना के दिशा-निर्देशों को वर्ष 2018 में संशोधित किया गया था। जिसके बाद अब यह पुरस्कार उन शिक्षकों को दी जाती है जो पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रतिभाशाली हों ताकि वे अन्य शिक्षकों के लिए उदाहरण और प्रेरणास्रोत बन सकें।

eRupee By SBI: अब यूपीआई से होगा डिजिटल रुपये का लेन-देन, एसबीआई ने करोड़ों ग्राहकों को दी इस सर्विस की सौगात

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ग्राहकों की संख्या के हिसाब से देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने सोमवार को एक नई पहल की शुरुआत की है. इस पहल के साथ अब करोड़ों लोग सीधे यूपीआई के माध्यम से डिजिटल रुपये का लेन-देन कर पाएंगे.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की इस नई पेशकश से डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की जा रही है.

ये है सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कुछ समय पहले डिजिटल करेंसी, जिसे सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी या सीबीडीसी के नाम से भी जाना जाता है, की शुरुआत की थी. रिजर्व बैंक के ई-रुपी यानी डिजिटल रुपये से जुड़े प्रोजेक्ट से शुरुआत में जो बैंक साथ आए थे, उनमें एसबीआई भी शामिल है. सीबीडीसी उसी ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जिस पर क्रिप्टो करेंसीज काम करती हैं. हालांकि सीबीडीसी क्रिप्टो करेंसीज से बिलकुल अलग होती हैं, क्योंकि इन्हें उसी तरह से सॉवरेन गारंटी मिली होती है, जैसी पेपर करेंसी को मिली होती है.

यूजर्स को होगा ऐसे फायदा

एसबीआई ने एक स्टेटमेंट में बताया कि उसकी नई पहल ने यूपीआई को डिजिटल रुपये के साथ इंटरऑपरेबल बना दिया है. ग्राहक इस सर्विस का लाभ ईरुपी बाय एसबीआई ऐप के जरिए उठा सकते हैं. इस ऐप की मदद से यूजर कहीं भी दुकान पर या किसी भी जगह पर यूपीआई क्यूआर कोड स्कैन कर सीधे डिजिटल रुपये से भुगतान कर सकते हैं.

एसबीआई को इस बात का यकीन

एसबीआई का कहना है कि उसका यह कदम यूजर्स को सहूलियत और आसानी से उपलब्धता का फायदा दिलाएगा. बैंक ने कहा कि यूपीआई के साथ सीबीडीसी को इंटीग्रेट करने से लोगों के बीच डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल बढ़ेगा. इस तरह लोग अब रोजाना के लेन-देन में डिजिटल रुपये का ज्यादा इस्तेमाल कर पाएंगे. बैंक का मानना है कि उसकी यह पहल डिजिटल करेंसी इकोसिस्टम के लिए गेम चेंजर साबित होने वाली है.

भारत में सीबीडीसी की शुरुआत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2022-23 में सीबीडीसी का ऐलान किया था. उसके बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 1 दिसंबर 2022 से सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी का परीक्षण शुरू किया था. अभी प्राइवेट सेक्टर के बैंकों के साथ-साथ लगभग सारे प्रमुख बैंक सीबीडीसी के साथ जुड़ चुके हैं. एसबीआई का जुड़ना इस कारण खास है कि वह ग्राहकों की संख्या, ब्रांचों की संख्या और दूर-दराज के इलाके तक पहुंच के मामले में अन्य सभी बैंकों से कोसों आगे है.

Ek Desh Ek Chunav: जून में ही लिख दी गई थी ‘एक देश एक चुनाव’ की स्क्रिप्ट, क्यों रामनाथ कोविंद रहे सरकार की पसंद

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What is One Nation One Election: संसद के विशेष सत्र के ऐलान के साथ ही ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब खबर है कि सरकार ने इसकी पटकथा जून की शुरुआत से लिखना शुरू कर दी थी।

साथ ही इस पूरी प्रक्रिया में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बड़ी भूमिका निभाते नजर आए। बहरहाल, इससे जुड़ा बिल सत्र में पेश होगा या नहीं, यह अब तक तय नहीं है। लेकिन माना जा रहा है कि अगर देश में एक ही चुनाव के फैसले पर मुहर लगती है, तो विपक्ष को बड़ा झटका लग सकता है।

भारत के नए संसद भवन के उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोविंद से मुलाकात की थी। उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉक्टर पीके मिश्रा भी मौजूद थे। एक मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इस बैठक में ही एक देश एक चुनाव पर बड़ी चर्चा शुरू हो गई थी। अटकलें हैं कि 18 सितंबर से शुरू रहे पांच दिवसीय संसद सत्र के दौरान पेश किया जा सकता है।

कोविंद की क्यों?
शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर पूर्व राष्ट्रपति के नाम ऐलान कर दिया गया। समिति उनकी अगुवाई में काम करेगी। इसके बाद सदस्यों की भी घोषणा कर दी गई थी। अब सवाल यह भी है कि सरकार ने कोविंद के नाम पर ही मुहर क्यों लगाई? इसकी भी कई वजहें गिनाईं जा रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सूत्र बताते हैं कि पूर्व राष्ट्रपति जटिल कानूनी मामलों को आसानी से संभाल सकते हैं।

साथ ही उन्होंने पीएम मोदी का भी भरोसेमंद माना जाता है। रविवार को केंद्रीय कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति से जुड़े कामों को लेकर मुलाकात की थी। खबर है कि पूर्व राष्ट्रपति बीते तीन महीनों में कम से कम 10 राज्यपालों से मुलाकात कर चुके हैं।

विपक्ष के लिए झटका कैसे
कहा जा रहा है कि यह विपक्ष को भी परेशान कर सकता है। दरअसल, अगर एक देश एक चुनाव होते हैं, तो उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में टीएमसी, कांग्रेस और वाम दलों के बीच लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनावों के लिए गठबंधन मुश्किल हो सकता है। साथ ही यही स्थिति आप और कांग्रेस के बीच पंजाब और दिल्ली में भी बन सकती है। इधर, समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश चुनाव में कुछ सीटों पर पहले ही उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुकी है।

जी20 में भी अफ्रीकी देशों पर पीएम मोदी का फोकस, चीन को यूं झटका देने का है प्लान

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राजधानी दिल्ली में जी20 की औपचारिक बैठक शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने वाले हैं। शुक्रवार को वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और इसके बाद डिनर का आयोजन होगा।

वहीं पीएम मोदी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और मॉरिशस के पीएम प्रविंद जुगनाथ के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। रविवार को वह फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कोमोरोस के राष्ट्रपति अजाली असौमानी के साथ मीटिंग करने वाले हैं। असौमानी अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष के रूप में जी20 सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं।

अफ्रीकी संघ को पीएम मोदी ने दी अहमियत
जी20 सम्मेलन में अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों और अफ्रीकी संघ को पीएम मोदी ने काफी अहमियत दी है। कोरोना महामारी के बाद अफ्रीकी देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वहीं अफ्रीका के कई देश चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट रोड के तहत भी आते हैं और उनपर चीन का काफी कर्ज हो गया है। उन देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चीनी बैंकों ने पैसा लगाया है और अब वे देश बोझ तले दब गए हैं। मेजबान के तौर पर पीएम मोदी इस दौरान काफी व्यवस्त रहने वाले हैं। फिर भी उन्होंने कई मेहमानों से मिलने और द्विपक्षीय वार्ताओं को समय फिक्स किया है।

किन मुद्दों पर होगी चर्चा
जी20 सम्मेलन और अलग से होने वाली मुलाकातों में जलवायु परिवर्तन और रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा अहम हो सकता है। जी20 का मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास होता है। यूक्रेन का मुद्दा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से अहम है। इसके अलावा कोयला बनाम अन्य खनिज ईंधन को लेकर भी चर्चा होने वाली है। पर्यावरण के लिहाज से ग्रीन एनर्जी पर बल दिया जाना जी20 सम्मेलन का बड़ा टॉपिक होगा। वहीं खानपान में मोटे अनाज को बढ़ावा देने के मामले पर भी चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोकस दक्षिणी दुनिया यानी अफ्रीकी देशों पर रहने वाला है। कोरोना महामारी के बाद खराब होती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए दुनियाभर के देशों को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है। भारत इसपर अपने विचार रख सकता है और जी20 देशों से अफ्रीकी देशों की मदद की भी अपील कर सकता है ताकि वहां राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता लाई जा सके।

देश की सबसे सुरक्षित 5 गाड़ियों की लिस्ट, सभी को मिले हैं 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग

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क्या आप भी नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं? अगर हां तो आपको ऐसे गाड़ी खरीदनी चाहिए जो सेफ्टी के लिहाज से काफी अच्छा हो। इसलिए आपको इस खबर के माध्यम से उन गाड़ियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें सेफ्टी के लिहाज से 5 स्टार रेटिंग मिली हुई है।

Volkswagen Virtus

जर्मन ऑटो कंपनी Volkswagen की ये कार हमारी सूची में प्रथम स्थान पर है। Volkswagen Virtus और Skoda Slavia भारत की पहली सेडान बन गई हैं जो ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5 स्टार की रेटिंग लेकर आई है। इन कारों को वयस्कों और बच्चों दोनो की ही सुरक्षा के लिए 5-स्टार रेटिंग मिली है। वर्टस ने एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन टेस्ट में 34 में से 29.71 अंक और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन टेस्ट में 49 में से 42 अंक हासिल किए हैं।

Skoda Kushaq

भारत में सबसे सुरक्षित SUVs भी जर्मन कार निर्माता फॉक्सवैगन और उसके चेक पार्टनर स्कोडा ही पेश करती है। Taigun कॉम्पैक्ट SUV ने पिछले साल ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5-स्टार स्कोर किए थे। Volkswagen Taigun को वयस्कों और बच्चों दोनो की ही सुरक्षा के लिए 5-स्टार रेटिंग मिली है। आपको बता दें कि 71.64 अंकों के समग्र सुरक्षा स्कोर के साथ Taigun भारत में बिकने वाली सबसे सुरक्षित SUV कार है।

Mahindra Scorpio N

महिंद्रा स्कॉर्पियो N को भी सेफ्टी के लिहाज से 5 स्ट़ार रेटिंग मिली है। पिछले साल महिंद्रा की ये सबसे बड़ी लॉन्चिंग में से एक थी। कीत की बात करें तो स्कॉर्पियों की एक्स-शोरूम शुरुआती कीमत 12 लाख 73 हजार रुपये से लेकर 24 लाख 3 हजार रुपये तक है।

Tata Punch

टाटा मोटर्स ने हाल ही में भारत में अपनी सबसे छोटी एसयूवी पंच को पेश किया है। लेकिन अपने लॉन्च से पहले ही यह देश की सबसे सुरक्षित एसयूवी बन गई थी और टाटा पंच को ग्लोबल एनकैप से सुरक्षा के लिए पूरे 5 स्टार्स की रेटिंग हासिल हुई। इसे एडल्ट ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन के लिए फाइव-स्टार सेफ्टी रेटिंग (16.453) और चाइल्ड ऑक्यूपेंट प्रोटेक्शन के लिए फोर-स्टार रेटिंग (40.891) मिली। जनवरी 2020 में अल्ट्रोज और दिसंबर 2018 में नेक्सॉन और 2021 टिगोर ईवी के बाद यह सुरक्षा मान्यता प्राप्त करने वाली टाटा का तीसर व्हीकल है।

टाटा Altroz

टाटा मोटर्स की तरफ से आने वाली प्रीमियम हैचबैक कार अल्ट्रोज का नाम भी इस लिस्ट में आता है। अपने क्रैश टेस्ट के दौरान ग्लोबल एनकैप द्वारा एडल्ट ऑक्यूपेंट के लिए इसे फाइव-स्टार की रेटिंग और चाइल्ड ऑक्यूपेंट के लिए थ्री-स्टार की रेटिंग प्राप्त हुई थी। सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्ट्रोज में एक स्थिर संरचना और फुटवेल क्षेत्र, सिर और गर्दन की सुरक्षा, आगे की सीटों पर दो लोगों के लिए बेहतरीन सुरक्षा फीचर दी गई है।