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आज की ताजा खबर LIVE:’एक राष्ट्र-एक चुनाव’ का विचार देश और राज्यों पर हमला, राहुल का बड़ा बयान

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मोदी सरकार ‘एक देश-एक चुनाव’ को लेकर कमर कस चुकी है. इसको लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में कमेटी का गठन भी कर दिया गया है. साथ ही कल इसको लेकर अधिसूचना भी जारी कर दी गई. अब ‘एक देश-एक चुनाव’ को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पहली प्रतिक्रिया दी है.

राहुल ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को देश और सभी राज्यों पर हमला बताया है.

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा है, ‘इंडिया यानि भारत, राज्यों का एक संघ है. ‘एक देश-एक चुनाव’ का विचार संघ और उसके सभी राज्यों पर हमला है.’

एक राष्ट्र-एक चुनाव पर कांग्रेस हमलावर

इससे पहले पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम ने एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर बीजेपी पर हमला बोला. चिदंबरम ने कहा कि बीजेपी की ओर से प्रायोजित हर दूसरे मुद्दे की तरह यह विचार भी पहले से निर्धारित और पूर्व नियोजित लगता है. उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र-एक चुनाव एक राजनीतिक-कानूनी प्रश्न है. यह कानून से ज्यादा राजनीतिक है.

एक देश-एक चुनाव पर बनी कमेटी के सदस्यों को लेकर भी चिदंबरम ने सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि 8 सदस्यों वाली कमेटी में प्रमुख विपक्षी दल से सिर्फ एक सदस्य है.इसके अलावा कमेटी में मैं केवल एक स्वीकृत संवैधानिक मामलों के जानकार वकील को ही पहचानता हूं.

संसदीय लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश- कांग्रेस

वहीं, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि एक राष्ट्र-एक देश की संभावना पर सरकार की ओर से बनाई गई कमेटी संसदीय लोकतंत्र को नष्ट करने की कोशिश है. उन्होंने कहा कि कमेटी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सदस्य नहीं बनाना हमारी समझ से परे है. केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि खरगे को इसलिए कमेटी में नहीं रखा गया, क्योंकि उनको रखना बीजेपी और आरएसएस के लिए सुविधाजनक नहीं होता.

Chhattisgarh-Odisha समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें अपने शहर के मौसम का ताजा हाल”

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देश के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां लगातार जारी हैं. मौसम विभाग ने आज छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh), ओडिशा (Odisha) और गंगीय पश्चिम बंगाल (Gangetic West Bengal) में आज भारी बारिश (Heavy rainfall) का अलर्ट जारी किया है.”

मौसम विभाग ने आज पूर्व-मध्य पूर्व भारत में आज तेज बारिश की संभावना जताई है.मौसम विभाग ने बताया कि 8 सितंबर तक साइक्लोन ओडिशा तट पर मडराता रहेगा.

इसलिए राज्य के दक्षिणी हिस्से में उत्तरी हिस्से की तुलना में अधिक बारिश होगी.इस बारिश के कारण आने वाले दिनों में ओडिशा में बारिश की कमी पूरी हो जाएगी.

दिल्ली-एनसीआर समेत हरियाणा-पंजाब और यूपी-बिहार में आज मौसम साफ रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है. महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान समेत अन्य राज्यों में भी मौसम सामान्य रहेगा. बारिश नहीं होने से इन राज्यों में उमस भरी गर्मी पड़ रही है.>राजस्थान में 85 साल में सबसे कम बारिश<>राजस्थान में अगस्‍त महीने में पिछले 85 साल में सबसे कम बारिश हुई है. मौसम विभाग ने कहा कि अगस्त में राजस्थान में औसत से 80 फीसदी कम बारिश हुई और पिछले 117 साल में तीसरी बार अगस्त में इतनी कम बारिश दर्ज की गई है.<>अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान में अगस्त की औसत बारिश 155.7 मिली मीटर के आसपास रहती है. हालांकि, राजस्थान में लगभग 30.9 मिमी बारिश ही हुई है. मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव से अगस्त में स्थिति और खराब हो गई और सितंबर महीने में भी मौसम की यही स्थिति रहने की आशंका है.<><>मौसम अधिकारियों ने कहा, “अगस्त 2023 में 30.9 मिमी बारिश हुई है जो 85 साल में सबसे कम है. राजस्थान में अगस्त में सबसे कम बारिश 15.2 मिमी है, जो 1905 में हुई थी. वर्ष 1937 में राज्‍य में अगस्त के महीने में 27.4 मिमी बारिश हुई थी. पिछले साल अगस्त में राज्‍य में 50 मिमी से अधिक बारिश हुई. अधिकारियों ने बताया कि अगस्त महीने में पूरे राज्य में 31 में से 10 दिन मौसम शुष्क रहा. केवल पांच दिनों की अवधि में राज्य में एक या दो स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी हुई. उन्होंने बताया कि अगस्त में राजस्थान में सबसे कम बारिश गंगानगर जिले 0.3 मिमी रिकार्ड की गई. इसी तरह, बाड़मेर में भी अगस्त में केवल 0.4 मिमी बारिश हुई. करौली में सर्वाधिक 213.7 मिमी बारिश हुई, लेकिन यह भी सामान्य से नौ फीसदी कम है. अधिकारियों ने बताया कि अगस्त में सीकर, जालौर, चूरू, बीकानेर, बाड़मेर, गंगानगर, जैसलमेर और जोधपुर में बिल्कुल बारिश नहीं हुई.<

मानसून के थमे होने, चढ़ते पारे और पसीना निकालती गर्मी से हर कोई हैरान-परेशान है। मौसम विभाग की ओर से प्रदेश के मौसम का पूर्वानुमान जारी किया गया है। साथ ही मानसून ऋतु में बारिश के कम होने की रिपोर्ट जारी की गई है।

OBC Quota Policy: ओबीसी कोटा पॉलिसी में अहम बदलावों की सिफारिश कर सकता है रोहिणी कमीशन

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OBC Quota Policy: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को सब-कैटगरी में बांटने की संभावना को लेकर बनाए गए रोहिणी कमीशन ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पिछले महीने सौंपी थी. जस्टिस जी रोहिणी आयोग की रिपोर्ट 1000 पन्नों से भी ज्यादा की है और इसे दो भागों में बांटा गया है.

पहला भाग इस बात से संबंधित है कि ओबीसी कोटा को कैसे आवंटित किया जाना चाहिए और दूसरे भाग में देश की सभी 2600 ओबीसी जातियों की एक अपडेट लिस्ट है.

सब कैटगराइजेशन का उद्देश्य ओबीसी वर्ग के बीच एक नई हिरार्की पैदा करना नहीं है बल्कि सभी के लिए समान अवसर पैदा करना है. अक्टूबर 2017 में आयोग की स्थापना इसलिए की गई थी कि ये सुनिश्चित किया जा सके कि आरक्षण का लाभ कुछ प्रमुख ओबीसी वर्ग तक ही न रहे.

सूची ?

नाम न छापने की शर्त पर लोगों ने कहा, “ओबीसी की केंद्रीय सूची मुख्य रूप से विभिन्न समुदायों से मिले लाभों की मात्रा के आधार पर बनाई गई है.” लोगों ने आगे कहा कि आयोग ने इस उप-वर्गीकरण के लिए मानदंडों की सिफारिश की है, जो काका कालेलकर जैसे पहले के आयोगों या बीपी मंडल की अध्यक्षता वाले पैनल के अपनाए गए मानदंडों से परे है.

उन्होंने बताया कि दोनों ने एक समुदाय की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक व्यवसाय को आरक्षण के मानदंड के रूप में इस्तेमाल किया. यहां तक कि देश के जिन 10 राज्यों में सब कैटगराइजेशन है वो भी एक समुदाय की स्थिति से चलते हैं.

कई सामुदायिक प्रतिनिधिमंडलों ने रोहिणी आयोग के सदस्यों से मुलाकात की और मानदंडों को जारी रखने की सिफारिश की. लोगों ने कहा कि पैनल इस दृष्टिकोण से असहमत है.

कमीशन ?

रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न वर्गों से मिले आरक्षण के लाभों के आंकड़ों से आयोग ने पाया कि जो लोग अपनी निर्धारित स्थिति में बेहद पिछड़े हैं, उनका देश के कुछ हिस्सों में एजूकेशन और सर्विस दोनों में महत्वपूर्ण प्रतनिधित्व है. उन्होंने कहा, “अत्यधिक अतुलनीय समुदायों को एक ही श्रेणी में समूहित करने का कोई मतलब नहीं है.” लोगों ने आगे बताया कि आयोग की रिपोर्ट एक वैकल्पिक दृष्टिकोण की सिफारिश करती है.

हालांकि सब-कैटगरी की पुष्टि नहीं की गई है लेकिन इसको तीन से चार वर्गों में बांटने की संभावना है. जो तीन सब-कैटगरी की संभावना जताई जा रही है वो इस तरह हो सकती है- जिन्हें कोई लाभ नहीं मिला है उनको 10 प्रतिशत, जिन्हें कुछ लाभ मिला है उन्हें भी 10 प्रतिशत और जिन्हें सबसे ज्यादा लाभ मिला है उन्हें 7 प्रतिशत. या हो सकता है कि इसे 4 हिस्सों में भी बांट दिया जाए. हालांकि सब-कैटगरी की प्रक्रिया संख्यात्मक है.

आयोग ने केवल यह निर्धारित करने की कोशिश की कि कौन से समुदाय एक-दूसरे के साथ उचित रूप से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं और एक साथ रखे जा सकते हैं. रिपोर्ट के दूसरे भाग में हर जाति का इतिहास और उन्हें पिछड़ा माने जाने का कारण बताया है.

रिपोर्ट का इंतजार करने वालों के बीच ये डर है कि यह उन ओबीसी समूहों को बाहर कर देगा जिन्हें अधिकांश आरक्षण लाभों के लाभार्थियों के रूप में देखा जाता है, पैनल को नहीं लगता कि इससे किसी एक समुदाय को ज्यादा नुकसान होगा. सरकार इस रिपोर्ट को अपनी कैबिनेट बैठक में ला सकती है जिसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा लेकिन ये सरकार पर निर्भर है कि वह इसे स्वीकार करती है या अस्वीकार करती है.

I.N.D.I.A लोकसभा चुनाव 2024 के लिए एकजुट, मुंबई की बैठक से क्या निकला सामने? प्वाइंट्स में समझिए

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Mumbai Opposition Meet: पटना और बेंगलुरु की दो सफल बैठकों के बाद मुंबई में आयोजित तीसरी बैठक में विपक्षी दलों के ‘इंडिया’ गठबंधन ने कई प्रस्ताव पारित किए. 31 अगस्त और 1 सितंबर, दो दिन चली इंडिया अलायंस की मीटिंग में सभी दलों ने सीट-बंटवारे समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की.

वहां उपस्थित सभी विपक्षी दलों ने 2024 का लोकसभा चुनाव साथ एकसाथ मिलकर लड़ने का फैसला किया है.

बैठक के बाद सभी दिग्गज नेताओं ने बारी-बारी से बीजेपी सरकार पर हमला कर मोदी सरकार पर कटाक्ष किया. इंडिया गठबंधन की बैठक में कॉर्डिनेशन कमेटी समेत पांच समितियां बनाई गई है, जिससे आगे की रणनीति पर सभी पार्टियों के साथ तालमेल कायम रहे.

मुंबई में हुई I.N.D.I.A बैठक की महत्वपूर्ण बातें इन 10 प्रमुख प्वाइंट्स में समझें-

  • कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्षी गठबंधन इंडिया लोकसभा चुनावों में बीजेपी को हराने में पूरी तरह सक्षम है. पीएम मोदी का जिक्र कर कहा कि उनका कांग्रेस मुक्त भारत का सपना कभी पूरा नहीं होने वाला. उन्होंने कहा कि अंग्रेज भी कभी पार्टी को खत्म नहीं कर पायी थी.
  • इंडिया गठबंधन बैठक में कॉर्डिनेशन कमेटी समेत पांच समितियां बनाई गई. कॉर्डिनेशन के अलावा 19 सदस्यीय चुनाव अभियान समिति, सोशल मीडिया से संबंधित 12 सदस्यीय कार्य समूह, मीडिया के लिए 19 सदस्यीय कार्यसमूह और शोध के लिए 11 सदस्यीय समूह गठित किया है.
  • पांचों समितियों में सबसे अहम कॉर्डिनेशन कमेटी है, जो गठबंधन के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम करेगी. इसके अलावा प्रचार, मीडिया, सोशल मीडिया, रिसर्च को लेकर भी अलग–अलग समितियां बनाई गई हैं. सभी समितियों में प्रमुख दलों से एक-एक नेताओं को शामिल किया गया है.
  • बैठक में एक 14 सदस्यों वाली कॉर्डिनेशन कमिटी के गठन की घोषणा की गई. जो सभी दलों को एक निर्णय लेने में मदद करेगी. इस पैनल में कांग्रेस से केसी वेणुगोपाल, एनसीपी से शरद पवार, डीएमके से टीआर बालू , जेएमएम से हेमंत सोरेन, शिवसेना यूबीटी से संजय राउत,आरजेडी तेजस्वी यादव और टीएमसी से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी शामिल हैं. जबकि केजरीवाल की पार्टी AAP ,सपा, जेडीयू,सीपीआई, एनसी, पीडीपी, सीपीआई (एम) अपने सदस्य का नाम बाद में तय करेंगे.
  • वायनाड सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और बिहार के मुख्यमंत्री इस कॉर्डिनेशन कमेटी में शामिल नहीं हैं. शायद इन्हें दूसरी जिम्मेदारी दी जायेगी. बैठक में जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया नाम वाले थीम पर पूरे देश में अभियान चलाने की बात कही गई.
  • इंडिया गठबंधन की कैंपेन कमेटी में कुल 19 सदस्यों के शामिल किया हैं, जिसमें कांग्रेस के गुरदीप सिंह सप्पल, जेडीयू से संजय झा, शिवसेना (यूबीटी) के अनिल देसाई, आरजेडी से संजय यादव, एनसीपी के पीसी चाको, जेएमएम से चंपई सोरेन, सपा से किरणमय नंदा, आप के संजय सिंह, सीपीआईएम के अरुण कुमार, सीपीआई से बिनॉय विश्वम हैं.
  • सोशल मीडिया ग्रुप में 12 सदस्य हैं. जिसमें कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत, आरजेडी के सुमित शर्मा, सपा के आशीष यादव, सपा से ही राजीव निगम, आप के राघव चड्ढा, जेएमएम की अभिनंदिनी,सीपीएम के प्रांजल, पीडीपी की इल्तिजा महबूबा, सीपीआई के बालचंद्रन कांगो, नेशनल कॉन्फ्रेंस से इफ्रा, सीपीआईएम वी अरुण कुमार, टीएमसी का एक सदस्य शामिल है.
  • विपक्षी गठबंधन की तीसरी बैठक ने सीट शेयरिंग जैसी प्रमुख मुद्दों पर भी बात की गई. सीट-बंटवारे पर निर्णय को लेकर कहा गया, इसकी व्यवस्था तुरंत शुरू की जाएगी और सभी दलों के साथ सीट की लेन-देन में सहयोग की भावना के साथ 30 सितंबर तक पूरी की जाएगी.
  • इंडिया के सदस्य कुछ दिनों में पूरे देश में एक व्यापक रैलियां आयोजित करना शुरू करेंगे. साथ ही सभी तबके के लोगों से सार्वजनिक सरोकार और महत्व के मुद्दों पर उनकी राय लेने का काम करेंगे. इसके लिए भी एक अलग से कमेटी बनाई जाएगी.
  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेताओं से एक सामूहिक एजेंडे को तैयार करने के लिए बुलेट प्वाइंट तैयार करने को कहा है. साथ ही कहा कि सरकार प्रतिशोध की राजनीति के कारण आने वाले महीनों में हमलों, छापों और गिरफ्तारियां करवा सकती हैं, जिसके लिए सभी को तैयार रहना चाहिए.

7th Pay Commission: मंत्रालय ने कर्मचारियों के लिए जारी किया अपडेट, इन कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन

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7th Pay Commission Update: सातवें वेतन आयोग के तहत एक नया अपडेट जारी किया गया है. मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने ​रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों को प्रमोशन देने के लिए न्यूनतम योग्यता को लेकर संशोधन किया है.

यह संशोधन सातवे वेतन आयोग के तहत आने वाले डिफेंस कर्मचारियों और सैनिकों पर लागू होगा.

22 अगस्त को जारी ऑफिस मेमोरैंडम में मंत्रालय ने मिनिमम योग्यता सर्विस डिफेंस सिविलियन कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए जारी किया गया है. यहां ऐसे कर्मचारियों के प्रमोशन के लिए क्राइटेरिया जारी की गई है.

इन कर्मचारियों के पास इतना अनुभव जरूरी

कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर मंत्रालय ने अधिसूचना में कहा है कि अलग-अलग लेवल के लिए वर्क एक्सप्रीएंश अलग-अलग होना आवश्यक है. लेवल 1 से 2 तक के लिए तीन साल का अनुभव होना चाहिए. लेवल 1 से 3 के लिए 3 साल का अनुभव, दो लेवल से लेकर 4 लेवल के लिए 3 से आठ साल का अनुभव होना चाहिए. इसी तरह, कुल लेवल 17 तक के कर्मचारियों को 1 साल से लेकर 12 साल का अनुभव होने पर प्रमोशन दिया जाएगा.

तत्काल प्रभाव से लागू करने का आदेश

डिफेंस मंत्रालय की ओर से शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, यह नया अपडेट तुरंत प्रभावी होगा. इसका मतलब है कि जो भी कर्मचारी इस योग्यता के तहत आते हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रमोशन दिया जाएगा. हालांकि मंत्रालय की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कर्मचारियों को कितना प्रमोशन दिया जाएगा.

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए क्या अपडेट

कई मीडिया रिपोर्ट में कहा है कि केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी जुलाई के लिए इस माह हो सकती है. हालांकि अधिकारिक तौर पर इसका कोई एलान नहीं किया गया है. अनुमान है कि केंद्रीय कर्मचारियों को महंगाई भत्ता में 3 फीसदी की बढ़ोतरी मिल सकती है. अगर ये बढ़ोतरी की जाती है तो कर्मचारियों को मिलने वाला महंगाई भत्ता बढ़कर 45 फीसदी हो जाएगा.

भारत में सबसे पहले कहां शुरू हुई कोयले की खदान?

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भारत में कोयला को काला सोना भी कहा जाता है. सरकार से लेकर ठेकेदार तक, ट्रांसपोर्टर से लेकर कमीशन एजेंट तक कोयले के धंधे से अच्छा पैसा कमाते हैं. हाल ही में कोयला मंत्रालय ने कोयले के अवैध खनन को रोकने के लिए खनन प्रहरी मोबाइल एप भी लांच किया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे पहले कहां कोयले की खदान शुरू हई. कोयला, सिविल सर्विसेज प्रश्नपत्र सेट करने वाले लोगों का पसंदीदा विषय है कि बीते सालों में प्री और मेंस में इससे संबंधित प्रश्न पूछे गए हैं.

आइए इनसे संबंधित सवालों के जवाब जानते हैं.

कोयला मंत्रालय ने मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी की मदद से कोयले के अवैध खनन को रोकने के लिए खनन प्रहरी मोबाइल एप भी लांच किया है. मंत्रालय के पास कोयला खदान निगरानी और प्रबंधन प्रणाली पोर्टल भी है. सरकार चाहती है कि आम नागरिक अवैध कोयला खनन की सूचना एप के माध्यम से सरकार को दें.

सरकार ऐसे लोगों की पहचान गुप्त रखेगी. इस एप के सकारात्मक परिणाम सरकार को मिलने लगे हैं. बड़ी संख्या में अवैध खनन को लेकर आमजन तस्वीरें, लोकेशन भी शेयर कर रहे हैं. इसकी जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि देश में कोयले के अवैध खनन का कारोबार लगातार बढ़ रहा है और इससे सरकार को काफी नुकसान भी हो रहा है.

इसे भी जानें

  1. भारत विश्व के प्रमुख कोयला उत्पादक देशों में शामिल है.
  2. दुनिया के प्रमुख कोयला उत्पादक देशों में चीन, अमेरिका, रूस, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया हैं.
  3. भारत अपनी कोयला जरूरत पूरी नहीं कर पाता. पिछले वित्तीय वर्ष में कोयला आयात 30 फीसद बढ़ा.
  4. मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छतीसगढ़, ओडिशा, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल प्रमुख कोयला उत्पादक राज्य हैं.
  5. भारत में लगभग 249 वर्ष पहले कोयला खुदाई का काम शुरू हुआ था.
  6. साल 1774 में पश्चिम बंगाल के रानीगंज कोयला क्षेत्र में ईस्ट इंडिया कंपनी ने कोयले की खुदाई शुरू की थी.
  7. आजादी के कई साल बाद तक कोयला खदानें निजी हाथों में ही थीं.
  8. साल 1956 में इसे व्यवस्थित करने को पहली बार राष्ट्रीय कोयला विकास निगम की स्थापना हुई.
  9. साल 1971 से 1973 तक सरकार ने कोयला खदानों का राष्ट्रीय करण दो चरणों में किया.
  10. कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम 2015 के माध्यम से सरकार ने नीलामी के माध्यम से कोयला खदान आवंटन शुरू किया.
  11. साल 2018 में केंद्र सरकार ने निजी कंपनियों को भी व्यावसायिक रूप से कोयला खनन की अनुमति दी.
  12. साल 2022-23 में भारत ने 14.77 फीसदी बढ़ोत्तरी के साथ 893.19 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया.
  13. बावजूद इसके भारत ने पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 237.67 मिलियन टन कोयला आयात किया.
  14. हर साल कोयले का उत्पादन बढ़ने के बावजूद खपत भी बढ़ रही है, नतीजतन आयात कम नहीं हो पा रहा.

ISRO सुलझाएगा सूरज की पहेली, Aditya L1 की लॉन्चिंग में कुछ घंटे बाकी, मिशन पर टिकीं दुनिया की नजरें

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चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारत एक बार फिर से अंतरिक्ष में अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिए तैयार है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज भारत का पहला सूर्य मिशन ADITYA-L1 लॉन्च करने जा रहा है.

आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से इसे सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा. मिशन की सफलता के लिए इसरो चीफ एस सोमनाथ और अन्य सभी वैज्ञानिकों ने मंदिर में जाकर पूजा अर्चना भी की.

यह मिशन इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले भारत ने सूर्य के सीक्रेट्स जानने के लिए कोई भी स्पेस मिशन लॉन्च नहीं किया था. इसरो ने गुरुवार को आदित्य एल1 की सफल लॉन्चिंग रिहर्सल्स भी की और शनिवार से इसकी लॉन्चिंग का काउंटडाउन शुरू कर दिया था. ISRO द्वारा आदित्य एल1 को बाहुबली रॉकेट पीएसएलवी-सी 57 के जरिए सूर्य की कक्षा में भेजा जाएगा. मिशन को अपने तय कक्षा तक पहुंचने में 125 दिन लगेंगे.

क्या है Aditya-L1 का डेस्टिनेशन?

आदित्य एल-1 को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाएगा, जिसके बाद उसे प्रोपल्शन प्रणाली के जरिये लग्रांज पॉइंट एल-1 की ओर भेजा जाएगा. आदित्य एल1 अपने साथ कुल सात पेलोड ले जाएगा जो फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और सूर्य की सबसे बाहरी परत का अध्ययन करेगा.

बता दें कि भारत ऐसा पहला देश नहीं है जो सूर्य के अध्ययन के लिए कोई मिशन लॉन्च कर रहा है. इससे पहले अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA, यूरोपीय स्पेस एजेंसी और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर ने भी अपने सूर्य मिशन लॉन्च किए हैं. जिसमें से सबसे ज्यादा सफल नासा द्वारा भेजा गया ‘पार्कर सोलर प्रोब’ मिशन माना जाता है. यह एकलौता ऐसा मिशन है जो सूर्य के सबसे करीब पहुंच सका है.

क्या है लैंग्रेज पॉइंट (L1)

चंद्रयान-3 की तरह आदित्य एल1 को भी धीरे-धीरे करके पृथ्वी की कक्षा से बाहर भेजा जाएगा. पहले आदित्य एल-1 को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाएगा फिर इसे एल-1 प्वाइंट की ओर भेजा जाएगा. यह पृथ्वी और सूर्य के बीच का एक ऐसा स्थान है जहां गुरुत्वाकर्षण का असर नहीं होता है. इस स्थान को पार्किंग पॉइंट भी कहा जाता है क्योंकि इसी कक्षा में घूमते हुए आदित्य अपना सूर्य अध्ययन करेगा. आदित्य एल1 कुल 15 लाख किमी की दूरी तय करके अपने गंतव्य तक पहुंचेगा.

कितना आया खर्च ?

भारत अपनी वैज्ञानिक ताकत के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पकड़ बना रहा है. भारतीय स्पेस मिशन अपने आप में अनोखे इसलिए भी माने जाने जाते हैं क्योंकि अन्य देशों के मुकाबले हमारे मिशन बहुत कम बजट में सफल हो जाते हैं. चंद्रयान-3 मून मिशन में 615 करोड़ रुपये लगे थे. आदित्य एल1 का कुल बजट 400 करोड़ रुपए है, यानी चंद्रयान मिशन से भी 200 करोड़ रुपये कम. रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत का सूर्य मिशन NASA के सूर्य मिशन से तकरीबन 90 प्रतिशत सस्ता है.

एक देश-एक चुनाव पर मोदी सरकार ने बनाई समिति, आज जारी हो सकता है नोटिफिकेशन

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अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार बड़ा कदम उठाती दिख रही है. एक देश एक चुनाव का मसला लगातार सुर्खियों में बना रहा है और इस बीच भारत सरकार ने एक समिति का गठन किया है, जो इस पर अपनी रिपोर्ट देगी.

इस कमेटी की अध्यक्षता पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद करेंगे. भारत सरकार आज इसपर आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर सकती है.

बीते दिन ही केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर तक संसद का विशेष सत्र बुलाने का ऐलान किया था. जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि इस स्पेशल सत्र में मोदी सरकार एक देश-एक चुनाव को लेकर बिल ला सकती है और चर्चा कराने के बाद पास कर सकती है. जैसे ही ये अटकलें चली तभी देश में नई बहस शुरू हो गई, विपक्ष के कई नेताओं द्वारा इस तरह के किसी भी बिल लाने को गैरसंवैधानिक बताया गया.

अगर लागू हुआ एक देश एक चुनाव…

अगर देश में एक देश-एक चुनाव का फैसला लागू होता है, तो सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ ही कराए जाएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर इसके पक्ष में जोर-शोर से आवाज़ उठा चुके हैं और अब देश में इसको लेकर माहौल बनाया जा रहा है. कुछ वक्त पहले ही लॉ कमिशन ने एक देश एक चुनाव पर आम लोगों की राय भी मांगी थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इस बात का जिक्र किया था कि किसी को भी एक सिरे से एक देश-एक चुनाव के मसले को नहीं नकारना चाहिए और इसपर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए. पीएम मोदी ने देश का वक्त, खर्च और विकास की गति तो तेज करने के लिए एक देश-एक चुनाव को वक्त की जरूरत बताया था और कहा कि हमें इस ओर कदम बढ़ाने चाहिए.

दरअसल, ये चर्चा इसलिए तेज हुई क्योंकि बीते दिन केंद्रीय संसदीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने ट्विटर पर ये जानकारी दी कि 18 से 22 सितंबर तक केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया है. इस दौरान 5 बैठकें होंगी और अमृत काल की ओर बढ़ रहे देश के विकास के मसले पर सार्थक चर्चाएं होंगी.

हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा एक देश एक चुनाव को लेकर बनाए जा रहे माहौल पर विपक्ष आगबबूला है. कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि अभी देश को इसकी जरूरत नहीं है, मोदी सरकार की मंशा इस मामले में ठीक नहीं है. सरकार को पहले महंगाई से निदान पाने और बेरोजगारी को खत्म करने पर ध्यान देना चाहिए.

GDP Growth: इन वजहों से पकड़ी भारत ने रफ्तार, रिकॉर्ड जीडीपी के पीछे ये हैं कारण

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सरकार ने वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़ें जारी कर पूरी दिखा दिया है है कि भारत की इकोनॉमिक रफ्तार सबसे तेज है. आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही में भी जीडीपी की ग्रोथ रेट एक साल के हाई पर आते हुए 7.8 फीसदी पर पहुंच गई है.

इस तेजी के प्रमुख कारण केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किया जाने वाला कैपिटल एक्सपेंडिचर है. साथ ही स्ट्रांग कंजंप्शन डिमांड भी माना जा रहा है.

सर्विस सेक्टर को भी इसका श्रेय दिया जा सकता है. तिमाही में मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल जीडीपी में 8 फीसदी की तेजी देखने को मिली. जबकि वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में यह 27.7 फीसदी थी. तो आइए उन कारणों की ओर चलते हैं, जिनकी वजह से भारज की जीडीपी में जबरदस्त रफ्तार देखने को मिल रही है.

सभी सेक्टर में तेजी बनी वजह

  1. ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्टेशन और कंयूनिकेशन समेत कांटैक्ट इंटेसिव सेक्टर्स चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में 9.2 फीसदी का ग्रोथ देखने को मिला था. पिछली तिमाही की तुलना में इस संख्या में मामूली वृद्धि देखी गई है जब यह 9.1 फसदी थी.
  2. रियल एस्टेट और फाइनेंशियल सेक्टर में भी सालाना आधार पर 12.2 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है.
  3. कंसट्रक्शन, माइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स में भी इजाफा देखने को मिला है. इन तीनों में क्रमश: 7.9 प्रतिशत, 5.8 प्रतिशत और 4.7 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली.
  4. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कृषि और बिजली सेक्टर में 3.5 फीसदी और 2.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई.
  5. निजी खपत, जिसका जीडीपी में हिस्सा 57.3 फीसदी था, वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही में 6 फीसदी की दर से बढ़ा है.

सर्विस सेक्टर में आई तेजी

अर्थशास्त्रियों ने इस ग्रोथ का सबसे ज्यादा श्रेय भारत के सर्विस सेक्टर में सुधार को दिया है. राहुल बाजोरिया ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि हवाई और रेल यात्रा के लिए हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में लगातार स्टेबल डिमांड की पुष्टि करते हैं, हालांकि क्षमता की कमी, एक्टिविटी के प्री-कोविड लेवल तक पहुंची है, उसके बाद भी पिछली तिमाही की तुलना में गति में कुछ कमी देखने को मिली है. आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने विकास दर का अनुमान लगाते हुए कहा कि सर्विस सेक्टर की मांग में लगातार बढ़ोतरी और इंवेस्टमेंट एक्टिविटी में सुधार, विशेष रूप से सरकारी कैपेक्स में तेजी की वजह से वित्त वर्ष में तेजी देखने को मिली है.

कैपिटल एक्सपेंडिचर में में बढ़ोतरी भी एक वजह

कैपिटल एक्सपेंडिचर एक दूसरा अहम फैक्टर है जिसने जीडीपी ग्रोथ में इजाफा करने में अहम योगदान दिया है. नरेंद्र मोदी की सरकार ने हाल के महीनों में कैपिटल एक्सपेंडिचर पर काफी जोर दिया है. अप्रैल-जून 2023 के दौरान कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़कर लगभग 2,78,500 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के दौरान 1,75,000 करोड़ रुपये था.

केंद्र सरकार ने संभवतः पहली तिमाही में बजट राशि का 27.8 प्रतिशत खर्च किया, जबकि राज्य सरकारों का खर्च 12.7 प्रतिशत था. इसके अलावा, केंद्र और 23 राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, मणिपुर और मेघालय को छोड़कर) द्वारा कैपिटल एक्सपेंडिचर सालाना आधार पर 59.1 प्रतिशत और 76 प्रतिशत बढ़ा.

आरबीआई का अनुमान

आरबीआई को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2024 में भारत 6.5 प्रतिशत की दर से विकास करेगा. हालांकि, अल नीनो चिंताओं के कारण असमान मानसून भारत के कंजंप्शन रिवाइवल को प्रभावित कर सकता है, ऐसे सिनेरियो में जहां ग्लोबल ग्रोथ रेट धीमी हो रही है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 2023 के दौरान मानसून वर्षा 36 फीसदी की कमी के साथ अगस्त समाप्त होने के बाद “सामान्य से नीचे” या “सामान्य” के निचले स्तर पर रहने की उम्मीद है, जो 122 वर्षों में सबसे खराब है.

आईएमडी के महानिदेशक एम महापात्र ने कहा कि हमें इस वर्ष सामान्य से कम या सामान्य से कम मानसूनी वर्षा दर्ज करने की संभावना है, लेकिन हम अपना पूर्वानुमान नहीं बदल रहे हैं. हमने अनुमान लगाया था कि हमें +/-4 फीसदी एरर मार्जिन के साथ 96 फीसदी मानसूनी बारिश दर्ज करने की संभावना है. हम उस एरर मार्जिन के भीतर होंगे.

राजस्थान में ईडी की बड़ी कार्रवाई, कई अधिकारियों के घर छापेमारी जारी, जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़ा है मामला

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राजस्थान में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी छापेमारी की है। यहां जल जीवन मिशन भ्रष्टाचार मामले में ईडी ने जयपुर व उसके आसपास के करीब 16-20 ठिकानों पर छापेमारी की है। ईडी ने यह रेड जलदाय विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों के यहां की है।

जलदाय विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों से ईडी की पूछताछ जारी है। एजेंसी जयपुर के वैशाली नगर, शाहपुरा विराटनगर, दूदू में पूछताछ कर रही है। साथ ही रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशिक के घर पर भी छापेमारी की गई है। बताया जा रहा है कि ईडी ने वहां से संपत्ति से जुड़े कई कागजात जब्त किए हैं। जनकारी के मुताबिक अमिताभ कौशिक ने कई बड़े अधिकारियों को जमीन दिलाने का काम किया था।

मंत्री के नजदीकी हैं कुछ ठेकेदार

बता दें कि राजस्थान के अलग-अलग स्थानों पर दिल्ली ईडी की टीम ने छापेमारी की है। बता दें कि हाल ही में एसीबी ने जिन अधिकारियों और ठेकेदारों को पकड़ा था उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई है। पीएचईडी से जुड़े कुछ अधिकारियों पर ईडी आज भी कड़ा एक्शन ले सकती है। बता दें कि कुछ ठेकेदार राज्य सरकार में मंत्री महेश जोशी के नजदीकी भी हैं।