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Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ पुलिस ने चलाया ऑपरेशन मुस्कान अभियान, अलग-अलग राज्यों से बच्चों को किया गया बरामद

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Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने पूरे भारत में ऑपरेशन मुस्कान अभियान चलाकर छत्तीसगढ़ से लापता हुए 559 बच्चों को छत्तीसगढ़ पुलिस ने भारत के अलग-अलग राज्यों से खोज निकाला है.

इन बच्चों में ज्यादातर लड़कियां है जो लापता हो गई थी. यह अभियान 1 जून से लेकर 30 जून तक चलाया गया था.

मुख्यमंत्री के निर्देश पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने चलाया ऑपरेशन मुस्कान अभियान
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर राज्य में गुमशुदा बच्चों की तलाश के लिए आपरेशन मुस्कान चलाया जा रहा है. गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा को इस मामले में व्यापक अभियान चलाने के आदेश दिए थे. निर्देशों का पालन करते हुए पुलिस महानिरीक्षक सीआईडी एस.सी. द्विवेदी के पर्यवेक्षण में गुमशुदा बच्चों की पतासाजी के लिए प्रदेश व्यापी अभियान ‘‘ऑपरेशन मुस्कान’’ 01 जून से 30 जून 2023 तक चलाया गया. जिसमें राज्य पुलिस को बेहतर सफलता मिली है.

छत्तीसगढ़ सहित भारत के अन्य राज्यों में चलाया गया यह अभियान
‘‘ऑपरेशन मुस्कान’’ अभियान को बेहतर तरीके से चलाने के लिए इस संबंध में छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय द्वारा जिलों को विभिन्न दिशा-निर्देश दिए गए थे. जिसे पुलिस अधीक्षकों और जिलों में नामांकित नोडल अधिकारियों ने गंभीरता से लेते हुए इस अभियान को सफल बनाने में अपना सराहनीय योगदान दिया. यह अभियान प्रदेश के भीतर और भारत के विभिन्न राज्यों में चलाया गया.

भारत के अलग-अलग राज्यों से बच्चों को किया गया बरामद
छत्तीसगढ़ पुलिस ने प्रदेश के सभी जिलों में पहले गुमशुदा बच्चों की एक लिस्ट तैयार की गई जिसके बाद उन बच्चों की तलाश के लिए छत्तीसगढ़ सहित उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली एवं कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में ऑपरेशन मुस्कान अभियान चलाया गया. इस दौरान जिलों में गठित पुलिस टीम द्वारा हर संभावित स्थानों पर जाकर गुमशुदा बच्चों को बरामद किया गया. ऑपरेशन मुस्कान अभियान के तहत छत्तीसगढ़ पुलिस ने 1 जून से 30 जून तक अभियान चलाकर 559 बच्चों को खोज निकाला है.

लापता बच्चों में सबसे ज्यादा लड़कियां हुई बरामद
‘‘ऑपरेशन मुस्कान’’ के दौरान 72 बालक एवं 487 बालिकाओं इस प्रकार राज्यभर के कुल 559 गुमशुदा बच्चों को बरामद किया गया है. जिसमें सर्वाधिक जिला जांजगीर-चांपा के 76, रायपुर 56, बिलासपुर 52 और सक्ती के 52 गुमशुदा बच्चों को और बाकि अन्य जिलों द्वारा बरामद किया गया है. ‘‘ऑपरेशन मुस्कान’’ के माध्यम से बरामद किये गये बालक/बालिकाओं को पुलिस द्वारा विधिवत उनके परिजनों के सुपूर्द कर गुमशुदा बच्चों एवं पालकों के चेहरों पर मुस्कान लौटाने में सफलता प्राप्त की है.

Chhattisgarh : PM मोदी के दौरे से पहले सियासत तेज, कांग्रेस ने रमन सिंह पर लगाया 1 लाख करोड़ के घोटाले का आरोप

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Congress Allegation On Raman Singh: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) सात जुलाई को छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रहे हैं, लेकिन इससे पहले कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) में जुबानी जंग शुरू हो गई है.

कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह (Raman Singh) के 15 साल के कार्यकाल में एक लाख करोड़ रुपए के घोटाले का दावा किया है और इस मामले की जांच कराने की मांग की है. दूसरी तरफ बीजेपी ने कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है.

दरअसल, सात जुलाई की सुबह 10 बजे के आस पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर (Raipur) पहुंच जाएंगे. पीएम मोदी रायपुर में सरकारी आयोजन में शामिल होने के बाद बीजेपी की बड़ी आम सभा में भी शामिल होंगे. इसके लिए छत्तीसगढ़ बीजेपी पूरी तरह से तैयारी में जुटी है. इसी बीच कांग्रेस ने प्रेस कांफ्रेंस कर बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है.

कांग्रेस ने रमन सिंह पर लगाया घोटाले का आरोप
कांग्रेस ने रमन सिंह पर 34 अलग-अलग 34 मामलों में एक लाख करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया है. इनमें से छह मामलों में कांग्रेस ने मनी लांड्रिंग होने का दावा किया और पीएम से जांच करवाने की मांग की है. छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा “रमन सिंह राज में 1 लाख करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ है. रमन सिंह के घोटालों की जांच के लिए मुख्यमंत्री ने ईडी को और पीएम मोदी को पत्र भी लिखा है.”

कांग्रेस ने की पीएम से ये मांग
उन्होंने कहा कि रमन सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच की शिकायत पीएमओ में हुई है. उन्होंने कहा कि केंद्र में बीजेपी की सरकार होने के कारण रमन सिंह के घोटालों की जांच नहीं हो रही है. वैसे तो रमन सिंह और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के घोटाले की लंबी सूची है, लेकिन हम प्रधानमंत्री से छह घोटालो की जांच की मांग करते है, जिसमें सीधे मनी लॉड्रिंग हुई है और जो ईडी के जांच के दायरे में आता है.

Tomato Price: टमाटर के बाद अब अदरक और हरी मिर्च के दाम ने भी छुआ आसमान, जानें- क्या हैं नए रेट

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Tomatoes Price in Surguja: टमाटर और हरी मिर्च के बाद अब अदरक के भाव में भी आग लग गई है. सब्जी की तो बात छोड़िए अब चटनी का भी जायका बिगड़ रहा है. मंगलवार को बैंगलोर से पहुंचे टमाटर का थोक भाव 105 रूपए प्रति किलो और फुटकर 130-140 रूपए रहा.

इधर बारिश के शुरूआती सीजन में सरगुजा जिले के स्थानीय टमाटर की फसल को क्षति पहुंचने के साथ ही टमाटर में गलन और दाग लगने के साथ गुणवत्ता काफी खराब हुई है. इसके बावजूद स्थानीय टमाटर का भी थोक भाव 60 रूपए प्रति किलो की दर पर रहा, जबकि गुणवत्ताहीन लोकल टमाटर फुटकर में 75 से 80 रूपए किलो रहा. बताया जा रहा है कि वर्तमान समय में लोकल टमाटर की फसल लगभग खात्मे की स्थिति में है और अगली फसल में विलंब की संभावना है.

सब्जियों के थोक व्यापारियों के मुताबिक अंबिकापुर शहर में हर रोज लगभग तीन से चार ट्रक टमाटर की खपत होती है. मगर मौजूदा समय में बारिश के कारण टमाटर की फसलें खराब होने और दाम में बढ़ोत्तरी के कारण एक ट्रक ही उपलब्ध हो पा रहा है. मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं होने से कीमत लगातार बढ़ रहा है. इधर हरी सब्जियों के दाम में बेतहाशा वृद्धि होने का लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ रहा है. जिस कारण लोगों को सब्जियों की मात्रा में कटौती करनी पड़ रही है. महंगाई के चलते सब्जी का जायका बिगड़ रहा है.

बैंगलोर से टमाटर मंगा भेज रहे यूपी-बिहार

बताया जा रहा है कि मौजूदा समय में ओड़ीसा, उत्तर प्रदेश, बिहार क्षेत्र में बैंगलोर की लाल गुणवत्ता वाले टमाटर की कीमत थोक में 130 से 140 रूपए हैं. जिसकी वजह से सब्जी मंडी कंपनी बाजार के थोक सब्जी व्यापारियों के द्वारा बैंगलोर से एक ट्रक टमाटर मंगाए जा रहे है. एक ट्रक में सात सौ ट्रे टमाटर आता है. दूसरे प्रांतों में कीमत अधिक होने के चलते व्यावसायी अंबिकापुर में मात्र ढाई सौ से तीन सौ ट्रे की ही नीलामी कर रहे हैं, जबकि शेष टमाटरों को पिकअप के माध्यम से बाहर भेज दिया जा रहा है. टमाटर के भाव में कमी नहीं आने के पीछे इसे भी कारण माना जा रहा है.

अदरक, मिर्च की कीमतों ने लोगों के उड़ाये होश

टमाटर की कीमत में उछाल के साथ ही अब अदरक और हरी मिर्च के भाव ने भी लोगों को चौंकाया है. अंबिकापुर के सब्जी मंडी कंपनी बाजार में अदरक दो सौ रूपए प्रति किलो की दर से थोक में बिका और फुटकर में 250, 260 रूपए प्रतिकिलो दर रहा. इसी प्रकार हरी मिर्च की कीमत भी सातवें आसमान पर है. यह भी 110 रूपए थोक और 180 से 200 रूपए की फुटकर कीमत के साथ बिका. इसके अलावा भिंडी, परवल, बरबट्टी, डोड़का, करेला, फूलगोभी, बैगन सहित अन्य सब्जियों का फुटकर भाव भी 65 से 70 रूपए प्रति किलो है. जिस कारण बढ़ती महंगाई से लोगों कि थाली का स्वाद बिगड़ सा गया है.

MP Election: राहुल-प्रियंका और खड़गे की जोड़ी दिलाएगी जीत? कांग्रेस ने बनाया प्लान

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मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों जनता को लुभाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। वहीं कांग्रेस ने आने वाले 50 दिनों का प्लान बनाया है।

पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा राज्य में छह रैलियां करेंगे। पार्टी राज्य में अपने चुनावी अभियान को बढ़ाने की योजना बना रही है क्योंकि उसका मानना है कि यह बीजेपी से मुकाबला करने का अच्छा मौका है।

प्रियंका गांधी ने 13 जून को जबलपुर में एक विशाल रैली के साथ पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत की थी। वे अब 22 जुलाई को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्वालियर में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित कर सकती हैं। 25 अगस्त तक होने वाली छह रैलियों के स्थानों में से तीन ओबीसी, एससी और एसटी जनसंख्या बहुल वाले क्षेत्रों में होंगे। यह निर्णय सोमवार को राज्य इकाई अध्यक्ष कमलनाथ और एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल के नेतृत्व में राज्य के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक बैठक में लिया गया।

मंथन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, अजय सिंह राहुल, एआईसीसी के प्रदेश प्रभारी जेपी अग्रवाल सहित अन्य लोग शामिल हुए। भ्रष्टाचार को शिवराज चौहान सरकार के खिलाफ अपना मुख्य मुद्दा बनाने के बाद, कांग्रेस कथित अनियमितताओं और घोटालों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, बीजेपी शासन के खिलाफ एक आरोप पत्र लाने की योजना बना रही है। मुख्य मामला ‘महाकाल’ पुनर्विकास होगा, जो हाल ही में एक तूफान के दौरान मंदिर परिसर की मूर्तियों के ढहने से सामने आया था।

पार्टी ने 10 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में महाकाल मुद्दे पर जोर देने के साथ शुरू करने का भी फैसला किया है। साथ ही मुख्यमंत्री को घेरने के लिए ‘उनकी लोकलुभावन घोषणाओं के आधार पर सवाल उठाए जाएंगे। पार्टी ने 18 सालों के दौरान सीएम द्वारा की गई ‘22,000 घोषणाओं’ पर ध्यान केंद्रित किया है और उनसे इसके बारे में सवाल करेगी। यह उस आरोपपत्र का भी हिस्सा होगा जिसे पार्टी आने वाले हफ्तों में जारी करेगी।

विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस उम्मीदवारों के शीघ्र चयन पर विचार कर रही है। उन 65 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करने की शुरुआत किए जाने की संभावना है जहां भाजपा पिछले 20-30 सालों में नहीं हारी है। इसके बाद भाजपा के कब्जे वाली सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय किए जाएंगे और कांग्रेस के कब्जे वाली सीटों पर उम्मीदवारों के नाम सबसे बाद में तय किए जाने की संभावना है।

Maharashtra Politics : किस पवार के पास पावर? आज चलेगा पता किसके साथ हैं NCP के ज्यादा विधायक, दोनों गुटों ने बुलाई बैठक

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मुंबई: पार्टी एक, नेता दो. फैसला एक, चॉइस दो. विधायक, नेता और कार्यकर्ता आखिर चुनेंगे किसको? आज (बुधवार, 5 जुलाई) यह तय हो जाएगा कि किसमें कितना है दम? आज फैसला हो जाएगा कि एनसीपी के 53 विधायकों में से कितने विधायक शरद पवार के साथ हैं और कितने अजित पवार के साथ.

अजित पवार गुट से चीफ व्हिप चुने जाने के बाद अनिल पाटील ने व्हिप जारी करते हुए सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और विधायकों को बांद्रा के एमईटी सेंटर में सुबह 11 बजे मीटिंग के लिए बुलाया है.

दूसरी तरफ शरद पवार के गुट से चीफ व्हिप के तौर पर चुने गए जितेंद्र आव्हाड ने व्हिप जारी कर सबको दोपहर 1 बजे वाई.बी. चव्हाण सेंटर में बुलाया है. कहा गया है कि यही फैसले की घड़ी है. विधायकों के लिए वाकई फैसले की घड़ी सामने आ गई है. शरद पवार से वफादारी निभाएं कि अजित पवार के नेतृत्व में भविष्य की उम्मीद का दीया जलाएं. किस मीटिंग में कितने नेता पहुंचेंगे यह इस बात की गवाही होगी कि किनके साथ कितने लोग हैं. एनसीपी पर किसका दावा कितना मजबूत है?

विधायकों की परेड हुई नहीं, शरद गुट ने भी समर्थकों की लिस्ट दी नहीं; दम देखने का तरीका यही

दोनों ही गुट ने अपनी-अपनी तरफ से बस दावे किए हैं. शरद पवार गुट से प्रदेशाध्यक्ष जयंत पाटील ने दावा किया है कि एनसीपी के 53 विधायकों में से मंत्रीपद की शपथ लेने वाले 9 विधायकों को छोड़कर बाकी 44 विधायक शरद पवार के साथ हैं. अजित पवार गुट से प्रफुल्ल पटेल ने दावा किया है कि अजित पवार के समर्थन में 40 विधायक हैं. अब तक दोनों ही तरफ से बस दावे हुए हैं, दावे के समर्थन में सबूत नहीं दिखाई दिए हैं. न तो राजभवन में अजित पवार ने विधायकों की लिस्ट सौंपते वक्त उनका परेड करा कर दिखाया और न ही शरद पवार गुट ने अपनी किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने समर्थक विधायकों को सामने लाकर दिखाया. ऐसे में अब दोनों तरफ की असली स्ट्रेंथ कितनी है, यह पता करने का एक ही तरीका बचता है. जिसकी मीटिंग में जितने विधायक मौजूद होंगे, वही संबंधित गुट का एक्चुअल स्ट्रेंथ होगा.

विधान परिषद के 9 में से 5 सदस्य अजित पवार के साथ!

विधानसभा के विधायकों के साथ-साथ जितेंद्र आव्हाड के साथ-साथ शरद पवार गुट से विधानपरिषद के लिए शशिकांत शिंदे ने भी व्हिप जारी किया. विधानपरिषद के एनसीपी के 9 विधायकों में से फिलहाल अजित पवार के साथ 5 और शरद पवार के साथ 4 विधायक खड़े नजर आ रहे हैं. रामराजे निंबालकर, अमोल मिटकरी, विक्रम काले, सतीश चव्हाण अजित पवार के साथ हैं तो एकनाथ खडसे, शशिकांत शिंदे, अरूण लाड, बाबा जानी दुरानी शरद पवार के साथ हैं.

अलग-अलग जिलाध्यक्ष भी मुंबई के लिए रवाना, जानिए किसे किसकी मीटिंग में है जाना

आज अलग-अलग जिलों के जिलाध्यक्ष और पार्टी पदाधिकारी भी मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं. जलगांव और चंद्रपुर जिले के जिलाध्यक्ष और पदाधिकारियों ने शरद पवार के साथ बने रहने का फैसला किया है. नागपुर शहर के पार्टी पदाधिकारियों ने भी शरद पवार का साथ देने का मन बनाया है. दूसरी तरफ यवतमाल जिले के जिलाध्यक्ष अजित पवार को समर्थन देने की बात कर चुके हैं. मंगलवार को शरद पवार ने अलग-अलग जिलों से आने वाले पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात की और एक अहम बैठक की. इसके बाद शरद पवार ने खुद कई विधायकों को कॉल किया और बुधवार की मीटिंग में शामिल होने को कहा.

‘साहेब’ या फिर ‘दादा’, आज फैसला होकर रहेगा

ज्यादा सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष किस खेमे में रहेंगे मौजूद, इस पर न सिर्फ पूरे महाराष्ट्र बल्कि राष्ट्र की नजरें लगी होंगी. सुप्रिया सुले ने ट्वीट कर अपना वीडियो संदेश जारी किया है. मराठी में दिए संदेश में उन्होंने कहा है कि, ‘महाराष्ट्र की स्वाभिमानी जनता ने आदरणीय पवार साहेब को जी भर कर प्यार दिया है. साहेब की जान भी उनकी जनता है. यह रिश्ता अटूट और पहाड़ की तरह मजबूत है. मौजूदा हालात में आप सबकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की आगे की दिशा तय करने के लिए 83 साल के युवा योद्धा, मतलब आप आप सबके आदरणीय पवार साहेब कल सभी पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने वाले हैं. इस बैठक में आप सब प्रचंड संख्या में मौजूद रहें. यह आपसे नम्र निवेदन है.’

आगे चलकर ऐसे होने वाली है पवार VS पवार फाइट

शरद पवार के गुट की ओर से पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, जिलाध्यक्षों को बड़ी तादाद में शामिल होने को कहा गया है. शरद पवार का गुट हुबहू उद्धव ठाकरे गुट की रणनीति पर काम कर रहा है. रणनीति यह है कि अगर अजित पवार ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल कर पार्टी और इसके निशान पर दावा करें तो शरद पवार गुट झट से चुनाव आयोग के सामने यह दलील देगा कि पार्टी विधायकों और सांसदों से नहीं होती, पार्टी तो संगठन से जुड़े हजारों-लाखों कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और नेताओं से होती है. अजित पवार के पास भले ही विधायकों का बहुमत ज्यादा हो, पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का बहुमत सीनियर पवार के पास. इसलिए एनसीपी का चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम शरद पवार वाले गुट के पास रहेगा. यही वजह है कि एनसीपी ने मंगलवार से ही चुनाव आयोग में भविष्य में होने वाली लड़ाई को ध्यान में रखते हुए शपथपत्र पर हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत कर दी है.

2 मुद्दों पर संग्राम! विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग, किसके साथ पार्टी निशान

अजित पवार की रणनीति फिलहाल विधायकों का बहुमत जुटाने की है. अजित पवार अगर 40 विधायकों का समर्थन जुटा लेते हैं तो शरद पवार का उनके विधायकों को अयोग्य ठहराने की उम्मीद धरी रह जाएगी. हालांकि संविधान के टेंथ शेड्यूल की शर्तों के मुताबिक अगर शरद पवार गुट यह साबित करने में कामयाब होता है कि ये सारे विधायक राजनीतिक लाभ के लिए शिंदे-बीजेपी सरकार के साथ मिल गए हैं, तब दल बदल कानून के तहत अजित पवार गुट पर गाज गिर सकती है. लेकिन शिवसेना मामले में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया है कि यह तय करने का अधिकार विधानसभा स्पीकर का है कि संबंधित विधायकों को विधायकी से अयोग्य ठहराया जाए या नहीं. ऐसे में बीजेपी नेता और स्पीकर राहुल नार्वेकर क्या फैसला करते हैं, इस पर सबकी नजरें होंगी.

Manipur Violence : मणिपुर में भीड़ ने IRB कैंप पर बोला हमला, हथियार लूटने की कोशिश एक की मौत

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हिंसा प्रभावित मणिपुर में मंगलवार को एक बार फिर से संघर्ष की स्थिति देखने को मिली. जहां, के थौबल जिले में इकट्ठा हुई सैकड़ों की भीड़ ने इंडियन रिजर्व बटालियन (IRB) के कैंप पर धावा बोल दिया और वहां रखे हथियारों को लूटने का प्रयास किया.

हालांकि, समय रहते सुरक्षा बलों के जवानों ने स्थिति पर काबू पा लिया. इस दौरान जवानों और भीड़ के बीच झड़प भी देखने को मिली जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई है.

घटना को लेकर भारतीय सेना की ओर से एक बयान भी जारी किया गया. जिसमें बताया गया कि सैकड़ों की संख्या में जुटी भीड़ ने सबसे पहले सैनिकों की आवाजाही को रोकने के लिए सड़कें जाम कर दी थी. हालांकि, असम राइफल्स और रैपिड एक्शन फोर्स की अतिरिक्त टुकड़ियों की मदद और मिले जुले प्रयास के बाद स्थिति पर कंट्रोल किया गया. बताया जा रहा है कि भीड़ पर काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों की ओर से आंसू गैस के गोले भी दागे गए.

बता दें कि मणिपुर पिछले दो महीने से हिंसा की आग में झुलस रहा है. उग्र हुई भीड़ को काबू करने के लिए राज्य के कई जिलों में कर्फ्यू लगा हुआ है. हिंसा को लेकर राज्य पुलिस ने सोमवार को बयान जारी करते हुए बताया था कि छिटपुट घटनाओं के साथ मणिपुर के कई हिस्सों में स्थिति तनावपूर्ण है. लगातार हो रही हिंसक घटनाओं की वजह से पूरे राज्य में करीब 118 चेक पॉइंट स्थापित किए गए हैं और 326 लोगों को हिरासत में लिया गया है.

मार्च के दौरान आमने-सामने आए गए थे दो समुदाय

राज्य में तीन मई को कुकी समुदाय की ओर से निकाले गए आदिवासी एकता मार्च के दौरान हिंसा भड़क गई. मार्च के दौरान कुकी और मैतेई समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए. दोनों ही तरफ से शहर-शहर आगजनी और तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया गया. हिंसा में अब तक 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. हिंसा के बाद शांति बहाली के लिए कई जिलों में कर्फ्यू लगा हुआ है.

हिंसा के पीछे की असली वजह

दरअसल, मैतेई समुदाय आरक्षण का लाभ लेने के लिए एसटी दर्जे में शामिल करने की मांग कर रहा है जबकि कुकी और नागा इसका विरोध कर रहे हैं. मैतेई समुदाय का कहना है कि राज्य में बड़े पैमाने पर अवैध अप्रवासन को देखते हुए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इस मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब मणिपुर हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश देते हुए मैतेई समुदाय को आरक्षित श्रेणी में शामिल करने के अनुरोध पर विचार करने और केंद्र सरकार के पास सिफारिश भेजने का निर्देश दिया.

Uniform Civil Code: यूसीसी में आदिवासियों को बाहर रखना BJP के लिए चुनौती, क्या निकलेगा हल?

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एक देश एक कानून की हलचल के बीच समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से पूर्वोत्तर और जनजातीय समूहों को बाहर रखने का मामला बीजेपी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है. संसदीय समिति की बैठक में बीजेपी नेता सुशील मोदी ने जनजातीय समूहों के हितों की रक्षा की पुरजोर वकालत की.

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि उनके यहां इस विषय का ख्याल रखा जा रहा है.

समान नागरिक संहिता को लेकर लॉ कमीशन द्वारा मांगे गए सुझाव को लेकर लोगों के सुझाव आ चुके रहे हैं. कानून और न्याय मामलों की संसद की समिति ने इस पर अपनी बैठक में पहली बार सोमवार को चर्चा की.

उत्तराखंड में राज्य सरकार द्वारा यूसीसी पर गठित विशेषज्ञ समिति अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट बस सौंपने वाली है, लेकिन बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है समान नागरिक संहिता के जद में देश के जनजातीय समुदाय को लाना.

आदिवासी समाज की चिंता

जनजातीय समुदाय के बीच बीजेपी की मातृ संस्था आरएसएस लंबे समय से काम कर रही है, जिसे इस बात का डर है कि यूसीसी आने से उनकी परंपरा पर खतरा आ जाएगा. लिहाजा आरएसएस की अनुसांगिक संगठन बनवासी कल्याण ने इस मुद्दे को सॉफ्टली हैंडल करने का सुझाव दिया है. पारंपरिक रूप से आदिवासी समाज में संघ परिवार और बीजेपी की पैठ मजबूत रही है, लिहाजा बीजेपी इसका हल निकालने की कोशिश में जुट गई है.

इसी क्रम में कानून और न्याय मामलों की संसदीय समिति की बैठक में समिति के अध्यक्ष सुशील मोदी ने लॉ कमिशन और कानून मंत्रालय के अधिकारियों के सामने यूसीसी पर कानून ड्राफ्टिंग से पहले आदिवासी समाज की चिंता को जाहिर करते हुए उनके कस्टम्स और रीति, परंपरा का विशेष ख्याल रखे जाने की पुरजोर वकालत की. बैठक में बीजेपी के वरिष्ठ सांसद सुशील मोदी ने कहा, “अनुसूचित जाति एवं पूर्वोत्तर राज्यों से संबंधित कानून प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से बाहर रखे जाएं.”

UCC को लाने में केंद्र नहीं दिखाएगा हड़बड़ी

संसदीय समिति के सदस्यों से सुशील मोदी ने कहा, “बहु-विवाह, तलाक एवं भरण-पोषण, गोद लेना और महिलाओं के संपत्ति से जुड़े अधिकारों आदि से संबंधित कानूनों पर चर्चा होना चाहिए.” बहरहाल, राष्ट्रीय स्तर पर यूसीसी पर कानून बनाने को लेकर कंसल्टेशन की प्रक्रिया चल रही. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इसको लाने में कोई हड़बड़ी नहीं दिखाएगी. पहले ये कानून बीजेपी शासित राज्यों में लागू किए जाएंगे, जिसकी शुरुआत उत्तराखंड से की जा रही है.

उत्तराखंड में कंसल्टेशन की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है अब यहां मिले सुझावों को पांच सदस्यीय समिति ने कंपाइल कर अपनी रिपोर्ट बनाना शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि जुलाई मध्य तक उत्तराखंड सरकार को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी, जिसके अध्ययन के बाद यूसीसी पर कानून लाया जाएगा. दिल्ली में पिछले 3 दिनों से यूसीसी को लेकर उत्तराखंड के सीएम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन मंत्री बीएल संतोष से अलग अलग मीटिंग कर चुके हैं. प्रधानमंत्री से मंगलवार को मीटिंग के बाद पुष्कर धामी ने बताया कि यूसीसी के अंदर जनजातीय समूहों को लाने को लेकर राज्य सरकार द्वारा गठित समिति ने विस्तृत अध्ययन किया है.

UCC उत्तराखंड के बाद गुजरात में हो सकता लागू

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, एक देश एक कानून के मुद्दे पर थाह-थाह कर कदम बढ़ाएगी. उत्तराखंड के बाद गुजरात जैसे एक दो अन्य राज्यों में भी इसको लागू किया जा सकता है. उसके बाद ही इसे राष्ट्रीय स्तर पर लाने का प्रयास किया जाएगा. उत्तराखंड में सबसे पहले कानून लागू कर पार्टी वाटर टेस्ट करना चाहती है, फिर उसकी कमियों को अन्य राज्यों में सुधार कर फाइनली इसे केंद्र सरकार देश में लागू करने की कोशिश करेगी. इस बीच जनजातीय समूहों को यूसीसी के दायरे से बाहर रखने की कोशिश के तहत एक प्रावधान ये हो सकता है कि असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम सरीखे 6वें शेड्यूल स्टेट बाहर रखे जा सकते हैं.

खालिस्तानी! कनाडा में ‘किल इंडिया’ रैली का ऐलान, भारत ने डिप्लोमैट को तलब किया

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खालिस्तान समर्थकों की भारत विरोधी हरकतों के चलते कनाडा के साथ संबंध लगातार खराब होते दिख रहे हैं। भारत ने कनाडा के उच्चायुक्त कैमरून मैकके को तलब कर खालिस्तान की हरकतों को लेकर चिंता जाहिर की है।

कनाडा में खालिस्तान समर्थकों ने पोस्टर लगाए हैं, जिनमें भारतीय राजनयिकों की तस्वीरें लगी हैं और उन्हें धमकी दी गई है। खालिस्तानियों ने ऐलान किया है कि वे 8 जुलाई को कनाडा में ओटावा के भारतीय उच्चायोग और दो अन्य कौंसुलेट्स के सामने प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसे लेकर भारत ने सख्त आपत्ति जताई है और कनाडा से कहा है कि वह इन तत्वों पर लगाम कसे। इसके अलावा भारतीय राजनयिकों और दूतावासों की सुरक्षा करे।

भारत की आपत्ति के बाद कनाडा की सरकार भी हरकत में आई है। उसने खालिस्तान समर्थकों द्वारा भारतीय उच्चायोग के बाहर रैली करने को गलत बताया है और कहा कि यह अस्वीकार्य रहेगा। सोमवार को ट्विटर पर दिए बयान में कनाडा के विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा, ‘विएना कन्वेंशन के तहत कनाडा डिप्लोमैट्स की सुरक्षा को प्रमुखता देता है। कनाडा भारतीय राजनयिकों के साथ संपर्क में है। हम 8 जुलाई को कुछ तत्वों की ओर से रैली के ऐलान को लेकर सतर्क हैं। ऐसा कोई भी आयोजन स्वीकार नहीं किया जाएगा।’

कनाडा की रक्षा मंत्री अनीता आनंद ने भी ऐसा ही ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि 8 जुलाई की रैली को लेकर जो सामग्री शेयर की गई है, उसे हम खारिज करते हैं। यह कनाडा के लोगों का विचार नहीं है। कनाडा की सरकार अपनी धरती पर राजनयिकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। हम अपनी जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता से समझते हैं। खालिस्तान समर्थकों ने ‘किल इंडिया’ नाम से पोस्टर शेयर किए हैं। इनमें भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों की तस्वीरें लगी हैं। इस मसले पर भारत ने कनाडा के विदेश मंत्रालय को जानकारी दी है और सुरक्षा करने को कहा है।

सैन फ्रांसिस्को की घटना के बाद बढ़ गई है चिंता

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय कौंसुलेट पर आग लगाने के प्रयास के बाद चिंता और बढ़ गई है। एक भारतीय अधिकारी ने कहा कि कनाडा के अफसरों को पूरी जानकारी दी गई है और उन्हें मामले की गंभीरता के बारे में बताया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका में हुई हिंसक घटना से पता चलता है कि सच में खतरा कितना बड़ा है। कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर के नाम पर रैलियां करने का ऐलान हुआ है, जिसकी 18 जून को कनाडा के ही एक गुरुद्वारे की पार्किंग में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। खालिस्तान समर्थक तत्वों का कहना है कि निज्जर की हत्या के पीछे भारतीय एजेंसियों का हाथ है।

महाराष्ट्र में 5 जुलाई को होगा शक्ति प्रदर्शन, चाचा-भतीजे ने एक ही दिन बुलाए NCP के सभी सांसद, विधायक

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महाराष्ट्र में 5 जूलाई को बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार के बाद उनके भतीजे अजित पवार ने भी 5 जुलाई को पार्टी के सभी पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।

यहां दिलचस्प बात ये है कि अजित पवार ने भी ठीक उसी समय यह बैठक बुलाई है जिस समय शरद पवार ने पार्टी पदाधिकारियों को उपस्थित होने के लिए कहा है।

5 जुलाई को होगा शक्ति प्रदर्शन

एनसीपी में जारी संकट के बीच, नवनियुक्त डिप्टी सीएम अजित पवार ने सभी एनसीपी सांसदों, विधायकों, एमएलसी, जिला प्रमुखों और राज्य प्रतिनिधियों को 5 जुलाई को एमईटी बांद्रा में एक बैठक के लिए बुलाया है। उन्होंने कहा है कि इस बैठक में सभी का उपस्थित होना जरूरी है। वहीं इससे पहले, शरद पवार ने भी अपने सभी सदस्यों को उसी दिन (5 जुलाई) वाईबी चव्हाण सभागार में बुलाया है।

अजित पवार सहित नौ राकांपा नेताओं के एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने के मद्देनजर, पार्टी प्रमुख शरद पवार ने घटनाक्रम और भविष्य की कार्रवाई पर चर्चा के लिए 5 जुलाई को मुंबई में बैठक बुलाई है। इसकी राज्य इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल ने रविवार को यह जानकारी दी थी। पत्रकारों से बात करते हुए पाटिल ने कहा कि बैठक बुधवार दोपहर 1 बजे दक्षिण मुंबई के वाई बी चव्हाण केंद्र में होगी।

शरद पवार को मिला कार्यकर्ताओं का समर्थन

इससे अलावा, एनसीपी पुणे शहर कार्य समिति ने मंगलवार को एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में एनसीपी प्रमुख शरद पवार को समर्थन देने का प्रस्ताव पारित किया गया और पार्टी को तोड़ने की कोशिश के लिए भाजपा की निंदा की। यह प्रस्ताव राकांपा के वरिष्ठ नेता अंकुश काकड़े ने पेश किया, जिसका बैठक में मौजूद सभी नेताओं ने समर्थन किया। बैठक में राकांपा शहर प्रमुख प्रशांत जगताप और पार्टी के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

पटेल ने तटकरे को राकांपा की महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष, अजित पवार को विधायक दल का नेता नियुक्त किया

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार द्वारा पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष पद से हटाए जाने के तुरंत बाद प्रफुल्ल पटेल ने सोमवार शाम को जयंत पाटिल की जगह लोकसभा सदस्य सुनील तटकरे को पार्टी की महाराष्ट्र इकाई का प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा की। पटेल ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार को पार्टी विधायक दल का नेता भी नियुक्त किया।

इससे पहले दिन में पवार ने पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और सांसद सुनील तटकरे को ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों के चलते निष्कासित कर दिया। दोनों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बगावत में साथ दिया था। शरद पवार ने ट्वीट किया, ‘‘मैं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते श्री सुनील तटकरे और श्री प्रफुल्ल पटेल को पार्टी-विरोधी गतिविधियों की वजह से राकांपा सदस्यों के रजिस्टर से हटाने का आदेश देता हूं।’’

कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी ने मंत्रियों को दिया मंत्र, कहा- 2024 नहीं 2047 देखकर करें काम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के प्रगति मैदान के नवनिर्मित कन्वेंशन सेंटर में सोमवार को लगभग पांच घंटे तक चली मंत्रिपरिषद की मैराथन बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि देश में कई राजनीतिक दल 2024 पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन उनकी सरकार 2047 के विजन के साथ अगले 25 वर्षों में भारत को विकसित भारत बनाने के लिए काम कर रही है।

उनके इस कथन को विपक्षी एकता की मुहिम चलाने वाले दलों के खिलाफ एक कटाक्ष के तौर पर देखा जा सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार अगले 25 वर्षों के लिए काम कर रही है और ऐसे में उनकी टीम को अदूरदर्शी नहीं होना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं मंत्रिपरिषद की बैठक की तस्वीरों को शेयर करते हुए ट्वीट किया कि मंत्रिपरिषद के साथ एक सार्थक बैठक, जहां हमने विभिन्न पॉलिसी संबंधी मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शेयर की गई बैठक की चार तस्वीरों में से एक में प्रधानमंत्री अपने मंत्रिपरिषद के सहयोगियों को संबोधित करते नजर आ रहे हैं और दो अन्य तस्वीरों में वे मंत्रियों के साथ बैठकर प्रेजेंटेशन देखते नजर आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक के समापन के बाद मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री ने देश के आधारभूत एवं बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया, विकास कार्यों की चर्चा की, काम करने का मंत्र दिया, परफॉर्मेंस पर चर्चा की, 2047 के विजन और रोड मैप के बारे में भी बताया।

इसके साथ ही देश को आगे ले जाने के बारे में भी बैठक में चर्चा हुई। मीनाक्षी लेखी ने आगे बताया कि विदेश सचिव ने बैठक में प्रेजेंटेशन देकर यह बताया कि इस बार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा ( अमेरिका और मिस्र की विदेश यात्रा) किस प्रकार से भिन्न थी और इसका देश को क्या लाभ मिला है।

लेखी ने कहा कि इस प्रेजेंटेशन के जरिए यह भी बताया गया कि तीन-चार महीने पहले तक जिन बातों का जिक्र तक नहीं हो रहा था उस पर भी भारत इस बार की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा में रिजल्ट लेकर आया है।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में रक्षा सचिव और वित्त मंत्रालय की तरफ से भी प्रेजेंटेशन दिया गया। इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर भी बैठक में प्रेजेंटेशन दिया गया। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों को 2047 के रोड मैप पर फोकस करने और सभी चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की भी हिदायत दी। Council of Ministers Meeting

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रिपरिषद की बैठक को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि हम शांति के साथ काम कर रहे हैं, ताकि हम युद्ध के लिए तैयार रहें। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही तमाम कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम लाभार्थियों तक पहुंचाने पर जोर देते हुए मंत्रियों से इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। इसके अलावा नई-नई तकनीक को तेजी से अपनाने की बात कही। भारत की आर्थिक विकास को गति को बढ़ाने पर फोकस करने को कहा और साथ ही देश के मतदाताओं की उम्मीदों पर खरा उतरने की सलाह भी दी। सोमवार को लगभग पांच घंटे तक चली केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक में केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, एस. जयशंकर, स्मृति ईरानी, पीयूष गोयल, गिरिराज सिंह, अनुराग ठाकुर, महेंद्र नाथ पांडेय, किरेन रिजिजू और जी.किशन रेड्डी सहित केंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्री शामिल हुए।

बैठक में प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, रक्षा सचिव, विदेश सचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय समेत अन्य कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कैबिनेट में बड़े बदलाव और फेरबदल की आहट के बीच लगभग पांच घंटे तक चली मंत्रिपरिषद की इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा आलाकमान ने भाजपा संगठन के साथ-साथ मोदी सरकार में फेरबदल का भी एक बड़ा ब्लू प्रिंट तैयार किया है, और यह माना जा रहा है इस सरकार के कई मंत्री भाजपा संगठन में भेजे जा सकते हैं। वही कुछ मंत्रियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

ऐसे में मंत्रिपरिषद की इस बैठक को कई मंत्रियों के लिए विदाई बैठक के तौर पर भी देखा जा रहा है। वर्तमान लोक सभा में मोदी सरकार का संभवतः यह आखिरी सबसे बड़ा फेरबदल और विस्तार होगा इसलिए किसे हटाना है और किसे लाना है, इसे लेकर भाजपा में शीर्ष स्तर पर विचार-मंथन का दौर पिछले लंबे समय से जारी है। मंत्रिपरिषद की बैठक को संभवतः अंतिम बैठक माना जा सकता है क्योंकि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है जिसके 11 अगस्त तक चलने की संभावना है। इसलिए यह माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी संसद के मानसून सत्र से पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं। पार्टी संगठन में भी बड़ा फेरबदल होना है। कई राज्यों में भी नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति होनी है जो अपने-अपने प्रदेशों में नई टीम बनाएंगे।