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NEET UG 2026 परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर NTA सख्त…

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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 को लेकर कथित गड़बड़ियों की खबरों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने आधिकारिक बयान जारी किया है. एजेंसी ने कहा है कि 3 मई को परीक्षा पूरी सुरक्षा व्यवस्था और तय नियमों के तहत आयोजित की गई थी. राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की कार्रवाई और मीडिया में सामने आई गिरफ्तारियों के बाद NTA ने स्पष्ट किया कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है. एजेंसी का कहना है कि लाखों ईमानदार छात्रों की मेहनत पर किसी तरह का संदेह नहीं किया जाना चाहिए. साथ ही छात्रों और अभिभावकों से जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील भी की गई है.

सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई थी परीक्षा

NTA के अनुसार NEET UG 2026 परीक्षा 3 मई को देशभर में तय समय पर आयोजित हुई थी. परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी. प्रश्न पत्रों को GPS ट्रैकिंग वाले वाहनों से पहुंचाया गया और उन पर विशेष वॉटरमार्क भी लगाए गए थे ताकि हर पेपर की पहचान की जा सके.

इसके अलावा परीक्षा हॉल में AI आधारित CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और 5G जैमर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया. एजेंसी ने दावा किया कि सभी केंद्रों पर परीक्षा प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के पूरी हुई.

परीक्षा के बाद मिली कथित गड़बड़ी की सूचना

NTA ने बताया कि परीक्षा के चार दिन बाद यानी 7 मई की देर रात उसे कुछ कथित अनियमितताओं की जानकारी मिली. इसके बाद 8 मई की सुबह ही यह सूचना केंद्रीय जांच एजेंसियों को भेज दी गई ताकि मामले की स्वतंत्र जांच हो सके.

एजेंसी ने कहा कि हाल में हुई गिरफ्तारियां जांच एजेंसियों की तेज कार्रवाई का रिजल्ट है और NTA लगातार उन्हें तकनीकी सहायता तथा जरूरी डेटा उपलब्ध करा रहा है.

जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील

NTA ने साफ किया कि मामला अभी जांच के अधीन है, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. एजेंसी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाएगा.

साथ ही NTA ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की कि वो अफवाहों पर ध्यान दें. एजेंसी ने भरोसा दिलाया कि शिक्षा मंत्रालय के परामर्श से जरूरत पड़ने पर उचित कदम उठाए जाएंगे.

PF News Update: EPFO रिकॉर्ड में गड़बड़ी तो अटक सकता है क्लेम..

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ईपीएफओ रिकॉर्ड में जॉइनिंग और एग्जिट डेट की गलतियां कर्मचारियों के लिए गंभीर समस्याएं खड़ी कर सकती हैं. ये गलतियां न केवल आपकी भविष्य निधि (पीएफ) की बचत और उस पर मिलने वाले ब्याज को कम करती हैं, बल्कि पीएफ ट्रांसफर और निकासी में भी बाधा डाल सकती हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गलत जॉइनिंग या एग्जिट डेट के कारण आपकी पेंशन पात्रता प्रभावित हो सकती है. एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (ईपीएस) के तहत पेंशन पाने के लिए कम से कम दस साल की सेवा अवधि अनिवार्य है. यदि रिकॉर्ड में आपकी सेवा अवधि कम दिखती है, तो आप पेंशन लाभ से वंचित हो सकते हैं, भले ही आपने पर्याप्त समय तक काम किया हो.

 

Headlines: तमिलनाडु में विजय का शपथ ग्रहण और देश भर में अहम राजनीतिक हलचल…

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तमिलनाडु में एक्टर विजय ने नए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण समारोह चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित हुआ, जहां विजय थोड़ी देर में पहुंचे. उन्हें आईयूएमएल, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम और वीसीके जैसे दलों का बिना शर्त समर्थन प्राप्त है, जिससे उन्होंने 118 के बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. राहुल गांधी भी इस समारोह में शामिल होने के लिए चेन्नई पहुंचे. टीवीके चीफ विजय की मां शोभा चंद्रशेखर ने अपने बेटे की सफलता पर खुशी व्यक्त की.

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार, ED की कार्रवाई पर सियासी घमासान…

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प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई चंडीगढ़ के सेक्टर दो स्थित उनके सरकारी आवास पर की गई, जिसके बाद करीब 10 घंटे की पूछताछ हुई और उन्हें दिल्ली ले जाया गया. ईडी का दावा है कि संजीव अरोड़ा ने अपनी फर्म के माध्यम से मोबाइल खरीद में फर्जी बिक्री और निर्यात के जरिए धन कमाया है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त किया गया.

 

पश्चिम बंगाल में BJP की ऐतिहासिक जीत, अमित शाह की चुनावी रणनीति…

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पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को एक ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने हैं. इस विजय के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की गहन चुनावी रणनीति को मुख्य कारण माना गया है. शाह ने पश्चिम बंगाल में न केवल तृणमूल कांग्रेस को शिकस्त दी, बल्कि एक ऐसा चक्रव्यूह रचा जिसमें ममता बनर्जी सत्ता से बाहर हो गईं. चुनावी राजनीति में उन्हें चाणक्य के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने अपनी कार्यशैली से कई चेहरों को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाया है.

असम में हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार संभालेंगे सत्ता की कमान, 12 मई को लेंगे CM पद की शपथ…

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हिमंत बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से NDA विधायक दल का नेता चुना गया है, जिससे उनका लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनना तय हो गया है. गुवाहाटी के खानापड़ा प्लेग्राउंड में 12 मई को शपथ ग्रहण समारोह होगा, जिसमें पीएम मोदी भी शामिल होंगे.

असम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद सरकार गठन की तैयारियां तेज कर दी हैं. रविवार (10 मई) को हुई NDA विधायक दल की बैठक में हिमंत बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से NDA विधायक दल का नेता चुन लिया गया. इसके साथ ही उनके लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है.

गुवाहाटी में आयोजित बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने औपचारिक रूप से सरमा के नाम की घोषणा की. बैठक में नव-निर्वाचित विधायकों के साथ NDA सहयोगी दलों के नेता भी मौजूद रहे. 12 मई को सुबह 11 बजे हिमंत बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. पीएम मोदी समेत NDA के तमाम दिग्गज नेता शपथ समारोह में शामिल होंगे.

विधायक दल की बैठक में फैसला

बीजेपी ने विधायक दल का नेता चुनने के लिए पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक बनाया था. इसके लिए असम बीजेपी विधायक दल की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें औपचारिक रूप से नेता का चुनाव किया गया. सरमा ने 6 मई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. फिलहाल वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे.

सर्वसम्मति से चुने गए विधायक दल के नेता

जेपी नड्डा ने बताया कि गठबंधन के सहयोगी दलों- असम गण परिषद (अगप) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) ने भी सरमा के नाम का समर्थन किया, जिससे वह सर्वसम्मति से NDA विधायक दल के नेता चुन लिए गए. सरमा और NDA के अन्य नेता रविवार को बाद में लोक भवन में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की और सरकार गठन का दावा पेश किया.

12 मई को शपथ ग्रहण समारोह

हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की कि 12 मई को NDA मंत्रिपरिषद का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे. शपथ ग्रहण समारोह गुवाहाटी के खानापड़ा प्लेग्राउंड में होगा. सरमा ने कहा, ’12 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में NDA मंत्रिपरिषद शपथ लेगी. मैं असम की जनता से अपील करता हूं कि वे आगे भी हमें अपना आशीर्वाद देते रहें. हमारा लक्ष्य असम को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल करना है’.

‘विकास को मिलेगी प्राथमिकता’

हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि नई सरकार अगले पांच वर्षों में विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी. उन्होंने कहा कि जनता ने NDA पर भरोसा जताया है और सरकार उस भरोसे पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेगी. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और समर्थन से ही NDA को लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का अवसर मिला है. उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का आशीर्वाद दिया है. असम की जनता ने NDA पर विश्वास जताया है और हम अगले पांच वर्षों में राज्य के विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे’.

NDA को मिला प्रचंड बहुमत

असम विधानसभा चुनाव में BJP के नेतृत्व वाले NDA ने जोरदार प्रदर्शन किया. गठबंधन ने कुल 102 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया. वहीं विपक्षी दलों को 75 सीटों से संतोष करना पड़ा. BJP ने 82 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BOPF) ने 10-10 सीटों पर जीत दर्ज की. इस तरह NDA ने राज्य में मजबूत स्थिति कायम रखते हुए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है.

कैबिनेट विस्तार से योगी सरकार ने साधे 2027 के समीकरण: भूपेंंद्र चौधरी समेत 6 नए मंत्रियों को योगी मंत्रिमंडल में शामिल…

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार हुआ. भूपेंंद्र चौधरी समेत 6 नए मंत्रियों को योगी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. जिन नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, उनमें एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो दलित समाज से हैं.

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का रविवार को विस्तार हुआ. रविवार को लखनऊ के लोकभवन में आयोजित शपथ समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भूपेंद्र चौधरी, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा, मनोज पांडे, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर को नए मंत्री के रूप में शपथ दिलाई. इस बड़े विस्तार में, भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडे ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली.

वहीं, कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, हंसराज विश्वकर्मा और सुरेंद्र दिलेर ने राज्य मंत्री के तौर पर शपथ ली. इनके अतिरिक्त सोमेंद्र तोमर और अजीत सिंह पाल को भी शपथ दिलाई गई. सीएम योगी ने अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार वाला राज्य मंत्री बनाया. नए चेहरों में एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो दलित समाज से हैं.

यह शपथ ग्रहण सीएम योगी आदित्यनाथ की जनभवन में आनंदीबेन पटेल से मुलाकात के एक दिन बाद हुआ है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश मंत्रालय में लंबे समय से इंतजार किए जा रहे फेरबदल की अटकलों पर विराम लग गया.

  1. भूपेंद्र सिंह चौधरी: यूपी बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख जाट चेहरों में से एक हैं. वे मुरादाबाद के रहने वाले हैं. लंबे समय से संघ और भाजपा में सक्रिय हैं. 2016 में पहली बार विधान परिषद सदस्य (MLC) बने. अभी भी MLC हैं. 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद पंचायती राज राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने और 2019 में पंचायती राज के कैबिनेट मंत्री बने.
  2. मनोज पांडे: वे रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट से विधायक हैं. वह 2012-17 तक सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. वह 2022 में सपा के टिकट पर विधायक चुने गए. वह विधानसभा में सपा के चीफ व्हिप भी रह चुके हैं. मनोज पांडे अवध और पूर्वांचल के बड़े ब्राह्मण नेता हैं.
  3. कृष्णा पासवान: वह फतेहपुर जिले की खागा विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं. आंगनवाड़ी वर्कर के तौर पर अपनी संघर्ष भरी जिंदगी शुरू करने वाली कृष्णा पासवान की गिनती जिले के बड़े दलित नेताओं में होती है. वह 4 बार विधायक और दो बार जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं. उन्हें UP BJP का भरोसेमंद महिला चेहरा माना जाता है.
  4. सुरेंद्र दिलेर: वह अलीगढ़ जिले की खैर विधानसभा सीट से BJP MLA हैं. वे BJP के जाने-माने दलित युवा नेताओं में से हैं. वे हाथरस से BJP के पुराने MP राजवीर सिंह दिलेर के बेटे हैं. उनके दादा किशन लाल दिलेर 6 बार MLA और 4 बार MP रह चुके हैं. उनके पिता राजवीर सिंह दिलेर एक बार MP और एक बार MLA रह चुके हैं.
  5. हंसराज विश्वकर्मा: वे BJP से लेजिस्लेटिव काउंसिल मेंबर (MLC) हैं. पिछड़े वर्ग की पॉलिटिक्स में मज़बूत पकड़ रखने वाले हंसराज विश्वकर्मा पिछले 34 सालों से पॉलिटिक्स में एक्टिव हैं. उन्होंने 1989 में बूथ लेवल से अपना पॉलिटिकल सफ़र शुरू किया था. उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में भी एक्टिव रोल निभाया था. 2019 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनावों में वाराणसी में BJP की बड़ी जीत में उनका अहम रोल माना जाता है.
  6. कैलाश सिंह राजपूत: 1996 में तिर्वा विधानसभा सीट से BJP कैंडिडेट के तौर पर जीते. उसके बाद 2007 में BSP के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते. 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर से BJP में शामिल हुए और जीतकर विधानसभा पहुंचे. 2022 में भी उन्होंने कन्नौज जिले की तिर्वा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की.

ब्राह्माण, दलित और ओबीसी को साधने की कोशिश

अभी कैबिनेट में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत कुल 7 ब्राह्मण मंत्री हैं. पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद के सांसद और केंद्र में मंत्री बनने के बाद योगी कैबिनेट में ब्राह्मण कोटे की एक सीट खाली हो गई थी. पार्टी ने इसके लिए मनोज पांडे को चुना है। वह रविवार को शपथ लेंगे.

दलित समुदाय से 2 मंत्री होंगे सुरेंद्र दिलेर और कृष्णा पासवान को कैबिनेट में शामिल करके सरकार ने दलित समुदाय को मैसेज देने की कोशिश की है. इससे पहले योगी सरकार में दलित समुदाय से कुल 8 मंत्री थे, जिनमें कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य भी शामिल हैं, यूपी विधानसभा में कुल 86 रिजर्व सीटें हैं. इनमें से 84 सीटें एससी और 2 सीटें एसटी के लिए रिजर्व हैं. इनमें से 67 दलित विधायक भाजपा के हैं.

कैबिनेट में महिलाओं के लिए जगह बनाई गई यूपी विधानसभा में 51 महिला विधायक हैं.इनमें 30 भाजपा, 4 अपना दल (एस) और 1 आरएलडी से हैं. योगी सरकार में कुल 5 महिला मंत्री हैं. महिला आरक्षण लागू करने के लिए ज़रूरी संविधान संशोधन बिल संसद में पास नहीं हो सका. महिलाओं के बीच विपक्ष के खिलाफ BJP इसे मुद्दा बना रही है. इसे और मजबूत करने के लिए कृष्णा पासवान को कैबिनेट में जगह दी गई है. पिछड़े वर्ग से डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, धर्मपाल सिंह, राकेश सचान, अनिल राजभर, दारा सिंह चौहान और चौधरी लक्ष्मी नारायण कैबिनेट मंत्री हैं.

सहयोगी पार्टियों से कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल, ओमप्रकाश राजभर और संजय निषाद भी पिछड़े वर्ग से हैं. 5 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 6 राज्य मंत्री हैं. रविवार को हो रहे कैबिनेट विस्तार में पिछड़े वर्ग से 3 चेहरों को शामिल किया गया है. इनमें जाट समुदाय से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत शामिल हैं.

तमिलनाडु में विजय की TVK को समर्थन करने पर PM मोदी ने कांग्रेस पर तंज कसा…

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चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में TVK चीफ सी जोसेफ विजय ने आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. इस गठबंधन सरकार को लेकर पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तंज कसा है.

चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में (10 मई) को TVK चीफ सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वो अब डीएमके और एआईएडीएमके गठबंधन से बाहर के पहले ऐसा नेता बन गए हैं, जो 1967 के बाद तमिलनाडु सरकार का नेतृत्व करेंगे. हालांकि ये सब इतना आसान भी नहीं थी, क्योंकि थलापति को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से एक ही हफ्ते में 4 बार मुलाकात करनी पड़ी. विधानसभा चुनाव में टीवीके भले ही राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन उन्हें सरकार चलाने के लिए कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों समेत अन्य छोटे दलों पर निर्भर रहना पड़ेगा. ऐसे में तमिलनाडु की इस गठबंधन सरकार को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान आया है.

पीएम मोदी ने कांग्रेस को बताया परजीवी पार्टी
पीएम मोदी ने कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल अपने पुराने साथी डीएमके को धोखा देने का आरोप लगाया है. कर्नाटक के बेंगलुरु में शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज कांग्रेस की छवि एक परजीवी पार्टी के रूप में बन गई है और यही कारण है कि मौका मिलते ही यह अपने सहयोगियों को भी धोखा देती है. तमिलनाडु को ही देख लीजिए.”

यूपीए सरकार डीएमके के कारण कई बार बचीपीएम मोदी
कांग्रेस को परजीवी पार्टी बताते हुए पीएम मोदी ने जमकर तंज कसा. उन्होंने कहा कि 25-30 वर्षों तक कांग्रेस और डीएमके के बीच घनिष्ठ संबंध रहे. डीएमके के साथ गठबंधन ने कई बार कांग्रेस को संकटों से बचाया है, यहां तक ​​कि 2014 से पहले 10 वर्षों तक शासन करने वाली यूपीए सरकार भी डीएमके के कारण ही बची रही.

सत्ता की भूखी है कांग्रेसपीएम मोदी
पीएम मोदी ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि डीएमके 25-30 वर्षों तक हर सुख-दुख में कांग्रेस के साथ खड़ी रही. हर क्षण उसने कांग्रेस के हित में काम किया लेकिन जैसे ही अन्य जगहों पर राजनीतिक समीकरण बदले, सत्ता की भूखी कांग्रेस ने पहले ही मौके पर डीएमके को धोखा दे दिया.

तमिलनाडु में TVK’ प्रमुख ‘विजय के शपथ ग्रहण समारोह’ में ‘राहुल गांधी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए….

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तमिलनाडु में TVK प्रमुख विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. इस दौरान चेन्नई में हुए भव्य समारोह में राहुल गांधी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए.

तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया अध्याय शुरू हो गया है. तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) प्रमुख विजय के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो गया है. विजय की कैबिनेट में फिलहाल नौ मंत्री बनाए गए हैं. विजय के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और पूरे स्टेडियम में जश्न का माहौल बना हुआ है.

इस शपथ ग्रहण समारोह में देश के कई बड़े नेता भी शामिल हुए हैं. कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल और बीजेपी नेता तमिलिसाई सुंदरराजन, बीजेपी नेता के अन्नामलाई और तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन भी कार्यक्रम में पहुंचे हैं. इसके अलावा फिल्म और राजनीति जगत की कई हस्तियां भी समारोह का हिस्सा बनी हैं. विजय के माता-पिता भी इस खास मौके पर मौजूद हैं. वहीं अभिनेत्री त्रिशा कृष्णन की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. विजय के फिल्मी करियर और राजनीति दोनों में उनकी लोकप्रियता का असर समारोह में साफ दिखाई दिया.

मंत्री बनने वाले नेताओं की लिस्ट

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले विजय ने राज्यपाल को उन नेताओं की सूची सौंपी थी जिन्हें मंत्री बनाया जाना है. राज्यपाल ने तमिलगा वेत्री कषगम के कई वरिष्ठ नेताओं के नामों को मंजूरी दे दी है. इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी. वेंकटरमणन, आर. निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु और सेल्वी एस. कीर्तना शामिल हैं. ये सभी नेता विजय के साथ मंत्री पद की शपथ लेंगे. TVK ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया. पार्टी ने कई दिग्गज नेताओं को हराकर राज्य में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई. विजय की जीत को तमिलनाडु की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

शुभेंदु के मंत्रिमंडल में और कौन-कौन नेता शामिल… पार्टी के कई बड़े नेताओं के नाम संभावित मंत्रियों की सूची…

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने जा रही है. शुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल में अग्निमित्रा पॉल, दिलीप घोष, रूपा गांगुली समेत कई बड़े नेताओं के नाम चर्चा में हैं.

पश्चिम बंगाल में शनिवार (9 मई 2026) को बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. शुभेंदु के मंत्रिमंडल में और कौन-कौन नेता शामिल होंगे, इसकी एक संभावित लिस्ट भी सामने आई है. बीजेपी की तरफ से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन पार्टी के कई बड़े नेताओं के नाम संभावित मंत्रियों की सूची में सामने आए हैं. सूत्रों के मुताबिक शुभेंदु अधिकारी के मंत्रिमंडल में बीजेपी की वरिष्ठ नेता अग्निमित्रा पॉल, रूपा गांगुली, दिलीप घोष, स्वपन दासगुप्ता, शंकर घोष, सरदत्त मुखर्जी, इंद्रनील खा और अजीत कुमार जाना को जगह मिल सकती है. ये सभी नेता लंबे समय से पार्टी में सक्रिय रहे हैं और पश्चिम बंगाल में बीजेपी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं.

इसके अलावा कुछ और नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं, जिन्हें नई सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है. इनमें दीपंजन चक्रवर्ती, ज्वेल मुर्मू, नमन राय, दीपक बर्मन, सजल घोष और बंकिम घोष शामिल हैं. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल का गठन किया जा सकता है

फिल्म और सांस्कृतिक जगत से जुड़े चेहरे को मौका

फिल्म और सांस्कृतिक जगत से जुड़े चेहरे भी नई सरकार में दिखाई दे सकते हैं. अभिनेता रुद्रनील घोष, रथिंद्रनाथ बसु और जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है. बीजेपी पहली बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने जा रही है, इसलिए पार्टी ऐसा मंत्रिमंडल तैयार करना चाहती है जिसमें राजनीतिक अनुभव के साथ अलग-अलग वर्गों का प्रतिनिधित्व भी दिखे. शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनने वाली यह सरकार पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव मानी जा रही है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम सूची में किन नेताओं को जगह मिलती है और किसे कौन सा विभाग दिया जाता है.

बंगाल चुनाव में किस पार्टी ने कितने सीटें जीती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है. भाजपा ने 206 सीटें जीतकर विधानसभा में दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल कर लिया है. इसके साथ ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल पुराने शासन का अंत हो गया है. यह चुनाव मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद हुआ पहला चुनाव था. चुनाव नतीजों में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था. पार्टी सिर्फ 80 सीटें जीत सकी और एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है. राज्य की कुल 293 विधानसभा सीटों में से 292 सीटों के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं. अन्य दलों की बात करें तो कांग्रेस को 2 सीटें मिली हैं. आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) ने भी 2 सीटों पर जीत दर्ज की है. वहीं सीपीआई(एम) सिर्फ 1 सीट जीतने में सफल रही.