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समंदर के नीचे दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, सुरंग खोदने के लिए बनाई नई टेक्नोलॉजी…

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चीन ने दुनिया की सबसे लंबी अंडरसी हाई-स्पीड रेल टनल में ‘टर्नरी मिक्स्ड गैस’ तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है. यह तकनीक हीलियम, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण से हाई प्रेशर में सुरक्षित काम करने में मदद करती है. इससे 78 मीटर गहराई पर भी काम किया जा सकता है.

समंदर के नीचे सुरंग बनाना खुद में ही एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन चीन ने इस काम में अब एक ऐसा कदम उठा दिया है, जो पूरी दुनिया को चौंका रहा है. चीन ने अपनी पहली ‘टर्नरी मिक्स्ड गैस’ तकनीक को सफलतापूर्वक इस्तेमाल से दुनिया की सबसे लंबी अंडरसी हाई-स्पीड रेल टनल बनाने का रास्ता आसान कर दिया है. यह मेगा प्रोजेक्ट पूर्वी चीन के निंगबो और झोउशान के बीच बन रही 16.18 किलोमीटर लंबी जिनतांग अंडरसी टनल है. इसे दुनिया की सबसे लंबी समुद्र के नीचे बनने वाली हाई-स्पीड रेल टनल माना जा रहा है.

यहां एक सवाल आपके मन में आना चाहिए कि अभी दुनिया की सबसे लंबी अंडरसी टनल ‘चैनल टनल’ है जो 50 किमी लंबी है. यह फ्रांस और यूके को जोड़ती है. तो फिर भला चीन सबसे लंबी अंडरसी टनल कैसे बनाने वाला है. दरअसल चैनल टनल की कुल लंबाई ज्यादा है, लेकिन पूरा हिस्सा पानी के नीचे नहीं है. वहीं जिनतांग टनल पूरी तरह समुद्री जल के नीचे होगी. टेक्नोलॉजी के हिसाब से ये बहुत एडवांस भी है.

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती थी समुद्र के नीचे बेहद ज्यादा दबाव. टनल का सबसे गहरा हिस्सा समुद्र तल से करीब 78 मीटर नीचे है, जहां पानी और मिट्टी का दबाव करीब 0.85 मेगापास्कल तक पहुंच जाता है. इसे समझें तो यह ऐसा है जैसे एक छोटे सिक्के के बराबर जगह पर करीब 30 किलो वजन रखा हो. आम तौर पर इस तरह के काम में कंप्रेस्ड एयर यानी दबाव वाली हवा का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसकी सीमा 0.5 मेगापास्कल तक ही सुरक्षित मानी जाती है. यानी पारंपरिक तकनीक यहां काम नहीं कर सकती थी. कोई भी इंसान यहां अगर काम करता तो जान से हाथ धो देता.

इसी चुनौती को पार करने के लिए चीन के इंजीनियरों ने ‘टर्नरी मिक्स्ड गैस सिस्टम’ नाम की एक नई तकनीक विकसित की. ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें तीन गैसों, हीलियम, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसे टनल के अंदर काम करने वाले मजदूरों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इस तकनीक की खासियत यह है कि हीलियम जैसी हल्की गैस का इस्तेमाल करने से हाई प्रेशर में होने वाले खतरों को कम किया जा सकता है. जैसे नाइट्रोजन के असर से होने वाली दिक्कतें और ज्यादा ऑक्सीजन के कारण होने वाले जोखिम. इससे काम करने वाले लोगों को गहरे समुद्र जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित सांस लेने में मदद मिलती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम में गैस मिक्सिंग और सप्लाई के लिए कुल 113 अलग-अलग मॉड्यूल लगाए गए हैं. यह सिस्टम 0.5 से 1 मेगापास्कल तक के प्रेशर में भी सही तरीके से काम कर सकता है, जो इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए बहुत अहम है. इस तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर उस समय किया जाता है जब टनल बनाने वाली मशीन के कटर की जांच या बदलाव करना होता है. यानी सबसे जोखिम भरे काम को अब ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा. चीन का यह कदम सिर्फ एक टनल प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि देश अंडरसी कंस्ट्रक्शन और हाई-प्रेशर इंजीनियरिंग में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

पटना में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों की संपत्ति को लेकर दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं…

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पटना में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों की संपत्ति को लेकर दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं. नई कैबिनेट के 35 मंत्रियों में से 32 करोड़पति हैं, जबकि सिर्फ तीन मंत्रियों की संपत्ति 1 करोड़ रुपये से कम बताई गई है. पिछड़ा एवं अति पिछड़ा कल्याण मंत्री रमा निषाद करीब 31.85 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर मंत्री हैं.

बिहार में सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब नए मंत्रियों की संपत्ति को लेकर दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं. नई कैबिनेट में शामिल 35 मंत्रियों में से 32 मंत्री करोड़पति हैं, जबकि सिर्फ तीन मंत्रियों की संपत्ति 1 करोड़ रुपये से कम बताई गई है. सबसे खास बात यह है कि करीब 10 मंत्रियों की संपत्ति खुद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से भी अधिक है. वहीं महिला मंत्रियों की औसत संपत्ति पुरुष मंत्रियों के मुकाबले करीब पांच गुना ज्यादा बताई जा रही है.

रमा निषाद सबसे अमीर मंत्री

नई कैबिनेट में सबसे अमीर मंत्री पिछड़ा एवं अति पिछड़ा कल्याण मंत्री रमा निषाद हैं. चुनावी हलफनामे और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति करीब 31.85 करोड़ रुपये आंकी गई है. रमा निषाद दूसरी बार मंत्री बनी हैं, लेकिन संपत्ति के मामले में उन्होंने सभी वरिष्ठ नेताओं को पीछे छोड़ दिया है. राजनीतिक गलियारों में उनकी संपत्ति को लेकर चर्चा तेज है. खासकर इसलिए क्योंकि नई सरकार में शामिल कई दिग्गज नेताओं से भी उनकी संपत्ति कहीं ज्यादा है.

रमा निषाद सबसे अमीर मंत्री

नई कैबिनेट में सबसे अमीर मंत्री पिछड़ा एवं अति पिछड़ा कल्याण मंत्री रमा निषाद हैं. चुनावी हलफनामे और उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उनकी कुल संपत्ति करीब 31.85 करोड़ रुपये आंकी गई है. रमा निषाद दूसरी बार मंत्री बनी हैं, लेकिन संपत्ति के मामले में उन्होंने सभी वरिष्ठ नेताओं को पीछे छोड़ दिया है. राजनीतिक गलियारों में उनकी संपत्ति को लेकर चर्चा तेज है. खासकर इसलिए क्योंकि नई सरकार में शामिल कई दिग्गज नेताओं से भी उनकी संपत्ति कहीं ज्यादा है.

Central Government Scheme: बंगाल में अब हर घर पहुंचेगी ‘मोदी की गारंटी’, सुवेंदु सरकार का 7 योजनाओं वाला मेगा प्लान…

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पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद अब केंद्र की कई बड़ी योजनाओं के तेजी से लागू होने का रास्ता साफ माना जा रहा है. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और पीएम किसान जैसी योजनाओं को नए अंदाज में लागू करने की तैयारी है. पीएम मोदी की ‘गारंटी’ के साथ बंगाल में महिलाओं, किसानों, बेरोजगार युवाओं और सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़े ऐलान चर्चा में हैं.

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 9 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया. पहली बार भाजपा ने राज्य की सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ कब्जा किया और सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. ब्रिगेड मैदान में हुए भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने इस जीत को राष्ट्रीय महत्व दे दिया. चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने दावा किया था कि अगर बंगाल में उसकी सरकार बनी तो वे सभी केंद्रीय योजनाएं लागू होंगी जो सालों से राजनीतिक टकराव के कारण अटकी हुई थीं. अब सुवेंदु सरकार के गठन के साथ ही ‘मोदी की गारंटी’ को जमीन पर उतारने की चर्चा तेज हो गई है. भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में स्वास्थ्य, आवास, रोजगार, किसानों और महिलाओं से जुड़ी योजनाओं को युद्ध स्तर पर लागू किया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल की राजनीति अब कल्याणकारी योजनाओं की सीधी प्रतिस्पर्धा में बदल सकती है.

सबसे ज्यादा चर्चा आयुष्मान भारत योजना को लेकर हो रही है. अब तक पश्चिम बंगाल इस केंद्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना से बाहर था. भाजपा सरकार बनने के बाद इसे राज्य में लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है. इस योजना के तहत हर पात्र परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने विजय भाषण में कहा कि बंगाल के गरीब परिवारों को अब इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लाखों गरीब परिवारों को राहत मिलेगी और निजी अस्पतालों तक उनकी पहुंच आसान होगी. भाजपा इसे बंगाल में अपनी सबसे बड़ी सामाजिक गारंटी के तौर पर पेश कर रही है.

प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी नई सरकार बड़ा फैसला लेने जा रही है. पिछले कुछ सालों में इस योजना पर भ्रष्टाचार और लाभार्थी चयन में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे. अब सुवेंदु सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में आवास योजना को तेज करने की तैयारी में है. भाजपा नेताओं का दावा है कि लाखों अधूरे घरों का निर्माण जल्द पूरा होगा. केंद्र और राज्य के बीच फंड और नामकरण को लेकर जो विवाद था, वह अब खत्म माना जा रहा है. गरीब परिवारों को पक्का घर देने का मुद्दा भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया जा रहा है.

जल जीवन मिशन को भी नई सरकार के मेगा प्लान का अहम हिस्सा माना जा रहा है. बंगाल में अभी तक ग्रामीण इलाकों के केवल सीमित परिवारों तक नल से जल पहुंच पाया है. केंद्र ने हजारों करोड़ रुपये आवंटित किए, लेकिन काम धीमा रहा. भाजपा सरकार का दावा है कि अब गांव-गांव पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाएगा. राजनीतिक रूप से भी यह योजना बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी का मुद्दा लंबे समय से बड़ा चुनावी विषय रहा है. भाजपा इसे ‘डबल इंजन सरकार’ की ताकत बताकर प्रचारित कर रही है.

किसानों को लेकर भी भाजपा सरकार बड़े ऐलान कर रही है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के साथ राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहायता जोड़ने की तैयारी है. भाजपा ने वादा किया है कि किसानों को सालाना 9 हजार रुपए तक की मदद दी जाएगी. इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को भी राज्य में पूरी तरह लागू किया जाएगा. प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर किसानों को सीधे मुआवजा मिलेगा. भाजपा नेताओं का कहना है कि इससे किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा.

महिलाओं और बेरोजगार युवाओं के लिए भी सुवेंदु सरकार बड़े कदम उठाने जा रही है. भाजपा ने चुनाव के दौरान महिलाओं को हर महीने 3 हजार रुपए देने का वादा किया था. इसे तृणमूल कांग्रेस की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना से बड़ा कदम बताया जा रहा है. वहीं स्नातक बेरोजगार युवाओं को भी मासिक भत्ता देने की बात कही गई है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को एकमुश्त आर्थिक सहायता देने का वादा भी भाजपा के एजेंडे में शामिल है. इससे युवा वर्ग में नई सरकार को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं.

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भी बंगाल की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती हैं. बंगाल के कारीगरों, बुनकरों, कुम्हारों और मछुआरों को आधुनिक उपकरण, ट्रेनिंग और बिना गारंटी वाले लोन देने की तैयारी है. भाजपा का मानना है कि इससे पारंपरिक रोजगार को नई ताकत मिलेगी. खासकर उत्तर और दक्षिण 24 परगना, सुंदरबन और तटीय इलाकों में मछुआरा समुदाय को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. सरकार इसे ‘आत्मनिर्भर बंगाल’ मॉडल का हिस्सा बता रही है.

सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भी भाजपा सरकार ने बड़ा संदेश दिया है. चुनाव के दौरान भाजपा ने वादा किया था कि सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर लंबित डीए का भुगतान किया जाएगा और सातवां वेतन आयोग लागू किया जाएगा. अब लाखों कर्मचारी नई सरकार के फैसलों पर नजर लगाए बैठे हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर सुवेंदु सरकार इन वादों को तेजी से लागू करती है तो बंगाल की राजनीति में भाजपा अपनी पकड़ और मजबूत कर सकती है. वहीं विपक्ष इसे चुनावी वादों की असली परीक्षा बता रहा है.

Mamata Banerjee: CM पद से इस्तीफा न देने पर अड़ी थी ममता, राज्यपाल ने भंग की विधानसभा, ज्योतिष से जानें जिद्दी ग्रह…

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Mamata Banerjee: ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने पर अड़ी थी. अब राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी है. ज्योतिष से जानें व्यक्ति के जिद्दी स्वभाव के पीछे कौन सा ग्रह जिम्मेदार होता है.

पश्चिम बंगाल में हाल ही में विधानसभा चुनाव (West Bengal Election) संपन्न हुए. लेकिन 4 मई 2026 को जब परिणाम आया तो, राजनीतिक गलियारों में जीत से ज्यादा हार की चर्चा होने लगी. भाजपा (BJP) ने बहुमत से अधिक सीट हासिल कर बंगाल में जीत का परचम लहराया.

वहीं लगातार तीन बार मुख्यमंत्री (Bengal CM) रहने के बाद ममता बनर्जी को करारी हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी की जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पश्चिम बंगाल में कहीं खुशी और कहीं गम जैसा माहौल है. लेकिन ऐसा पहली बार देखा जा रहा है जब राजनीति में किसी पार्टी की जीत से ज्यादा हार चर्चा का विषय बना हुआ है.

बंगाल में बीजेपी की जीत से ज्यादा टीएमसी के हार के चर्चे

पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भी राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है. शनिवार, 9 मई 2026 को बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह (West Bengal CM Oath ceremony) प्रस्तावित है. लेकिन टीएमसी की ममता बनर्जी इस बात पर अड़ी थीं कि, वह हारी नहीं हैं और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी.

इस विषय पर ममता का कहना है कि- हालिया चुनाव परिणामों के मद्देनजर वह इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उनका मानना ​​है कि वोट जबरदस्ती लूटे गए और पूरी मतदान प्रक्रिया में धांधली हुई. इसलिए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा (Mamata Banerjee Resignation) देने से मना कर दिया है.

इस बीच ताजा जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने विधानसभा को भंग करने की घोषणा कर दी है. बता दें कि, गुरुवार 7 मई 2026 को ही पश्चिम बंगाल विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो चुका था. ऐसे में संवैधानिक नियमों के तहत विधानसभा को भंग किया गया, जिससे की किसी प्रकार का कानूनी संकट पैदा न हो. अब ममता बनर्जी के इस्तीफा देने या ना देने से फर्क ही नहीं पड़ेगा.

चुनावी नतीजे के बाद भी ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने की बात पर अड़ना और जिद्दी स्वभाव चारों ओर चर्चा का विषय बना हुआ है. अगर हम ज्योतिषीय दृष्टि से देखें तो, ज्योतिष व्यक्ति के भाव के साथ ही भावनाओं को भी व्यक्त करता है.

अच्छे-बुरे भावनाओं की पीछे ग्रहों की स्थिति जिम्मेदार होती है. जैसे मन यदि स्थिर हो कुंडली में चंद्रमा शुभ है और अस्थिर हो तो चंद्रमा अशुभ है. इसी तरह कुछ ग्रहों की अशुभ स्थिति व्यक्ति के स्वभान को कोधी, जिद्दी और कठोर बनाने में भूमिका निभाती है. आइए पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक और देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास से जानते हैं इन ग्रहों के बारे में-

  • मंगल (Mars)- कुंडली में मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव से व्यक्ति में क्रोध भावना, अत्यधिक आवेग और आक्रोश, भावनाओं में उग्रता और संबंधों में तनाव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
  • शनि (Saturn)- शनि अगर शुभ न हो तो, इससे व्यक्ति में भय, अविश्वास, भावनात्मक दूरी, उदासी और अवसाद पैदा होता है,
  • राहु  (Rahu)- छाया ग्रह राहु की अशुभता से माया, भ्रम, आसक्ति और गलत संबंधों में फंसने जैसी भावनाएं पैदा होती हैं.
  • केतु (Ketu)- कुंडली में केतु यदि शुभ न हो तो विरक्ति, असंतोष, भावनात्मक शून्यता और एकाकीपन जैसी भावनाओं को बढ़ाता है.

चुनाव से पहले गोवा सरकार का बड़ा दांव, 82 लाख वर्गमीटर को किया नो डेवलपमेंट जोन घोषित, पर्यावरण को देखते हुए कदम….

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अधिकारियों के अनुसार, तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट और पर्यटन दबाव के कारण इन क्षेत्रों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो रही थी. 82 लाख वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र को ‘नो डेवलपमेंट जोन’ (एनडीजेड) घोषित किया है.

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गोवा सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने 82 लाख वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र को ‘नो डेवलपमेंट जोन’ (एनडीजेड) घोषित किया है. इस कदम को एक तरफ पर्यावरण बचाने की कोशिश माना जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे चुनाव से पहले सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है.

सरकार ने पहाड़ी ढलानों, बागान क्षेत्रों, धान के खेतों और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इलाकों को संरक्षण दायरे में लाने का फैसला किया है. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) बोर्ड द्वारा मंजूर प्रस्ताव के तहत माजोर्डा, गोंसुआ, क्वेरीम और मंड्रेम जैसे इलाकों में निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट और पर्यटन दबाव के कारण इन क्षेत्रों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो रही थी.

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सत्तारी तालुका के क्वेरीम क्षेत्र में लगभग 65.31 लाख वर्गमीटर भूमि और पेरनेम के मंड्रेम क्षेत्र में करीब 6.44 लाख वर्गमीटर क्षेत्र को संरक्षण दायरे में शामिल किया गया है. इसके अलावा मांडवी और जुआरी नदी के किनारे करीब 6.72 करोड़ वर्गमीटर क्षेत्र को पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

विश्वजीत राणे ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, हरित क्षेत्रों और कृषि भूमि को बचाना है. उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में धान के खेतों और निचले इलाकों को भी बड़े पैमाने पर एनडीजेड घोषित किया जा सकता है.

हालांकि विपक्ष और कुछ रियल एस्टेट समूह इस फैसले को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं. उनका कहना है कि चुनाव से पहले सरकार पर्यावरण संरक्षण के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है. वहीं पर्यावरणविद इसे गोवा के प्राकृतिक संतुलन को बचाने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं.

Kerala Elections 2026: केरल में क्यों नहीं अब तक मुख्यमंत्री पर हो पाया फैसला? जीत के बाद क्या है वहां पर कांग्रेस…

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उडुमा सीट से निर्वाचित कांग्रेस विधायक के नीलकांतन ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि तिरुवनंतपुरम में हुई विधायक दल की बैठक में CM पद के लिए उनकी पसंद को दर्ज ही नहीं किया गया.

देश के कई राज्यों में चुनावी नतीजों के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है, लेकिन हर राज्य में तस्वीर अलग-अलग नजर आ रही है. पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी पहली बार सरकार बनाने जा रही है और शुभेंदु अधिकारी शनिवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

वहीं तमिलनाडु में विजय (विजय थलापति) की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने राज्यपाल से तीसरी बार मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है और उनके भी शनिवार को शपथ लेने जा रहे हैं. उधर असम में हिमंता बिस्व सरमा का शपथ ग्रहण 12 मई को प्रस्तावित है, जहां भाजपा गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिला है.

क्या है केरल की किचकिच

हालांकि केरल में तस्वीर सबसे ज्यादा उलझी हुई है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने चुनाव जीत लिया है, लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है. इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे विधायकों के साथ बैठक करने वाले हैं, जिसमें राहुल गांधी के भी शामिल होने की संभावना है.

सूत्रों के मुताबिक, ज्यादातर विधायक के वी वेणुगोपाल के पक्ष में हैं, जबकि कांग्रेस की सहयोगी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट में शामिल मुस्लिम लीग वी डी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है. जहां कुछ राज्यों में सरकार गठन लगभग तय हो चुका है, वहीं केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक समीकरण अभी भी बदलते नजर आ रहे हैं.

क्यों गहराता जा रहा क्लेश?

केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ रही है. उडुमा सीट से निर्वाचित कांग्रेस विधायक के नीलकांतन ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि तिरुवनंतपुरम में हुई विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी पसंद को दर्ज ही नहीं किया गया. उन्होंने इस संबंध में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षकों मुकुल वासनिक और अजय माकन को ईमेल के जरिए शिकायत भी भेजी है.

यह विवाद उस समय सामने आया जब एक रिपोर्ट में एक तस्वीर सामने आई, जिसमें सीएलपी बैठक के बाद पर्यवेक्षक वासनिक के हाथ में एक सूची दिखाई दी. बताया गया कि इस सूची में विधायकों के नाम और मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी पसंद दर्ज थी. कई विधायकों जैसे संदीप वारियर, सजीव जोसेफ, टी. ओ. मोहनन, सनी जोसेफ, उषा विजयन और टी. सिद्दीकी ने अपनी पसंद के तौर पर ‘केसी’ लिखा था, जिसे के सी वेणुगोपाल के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है.

वहीं आई. सी. बालकृष्णन के नाम के सामने “केसी+आरसी” लिखा था, जिसे रमेश चेन्निथला के समर्थन से जोड़कर देखा गया. हालांकि, नीलकांतन का कहना है कि उन्होंने अपनी पसंद स्पष्ट रूप से बता दी थी, लेकिन सूची में उनके नाम के सामने कोई प्रविष्टि नहीं की गई, जो सवाल खड़े करता है.

इस बीच, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वी डी सतीशन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं. अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व ही करेगा, क्योंकि विधायक दल पहले ही प्रस्ताव पारित कर मल्लिकार्जुन खरगे को मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार दे चुका है. केरल में कांग्रेस की जीत के बावजूद मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर असमंजस और अंदरूनी मतभेद अभी भी जारी हैं.

‘विजय सरकार पर ग्रहण, सिर्फ 116 MLAs का समर्थन, कांग्रेस ने विधायकों को बेंगलुरु किया शिफ्ट, कल VCK लेगी फैसला’

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Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन को लेकर मचे बवाल के बीच कांग्रेस पार्टी ने अपने पांचों विधायकों को चेन्नई से बेंगलुरु में शिफ्ट कर दिया है.

तमिलनाडु में चुनाव बाद ड्रामेबाजी शुक्रवार (8 मई, 2026) की देर रात उस वक्त देखी गई, जब टीवीके चीफ विजय को शनिवार (9 मई, 2026) को शपथ लेना था, लेकिन आखिरी वक्त पर समर्थन देने से वीसीके मुकर गई. इसके बाद राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को आधिकारिक तौर पर शपथ ग्रहण के ऐलान में देरी करने पड़ी है. इस बीच सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी ने अपने पांचों विधायकों को चेन्नई से बेंगलुरु में शिफ्ट कर दिया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्यपाल अर्लेकर अभी वीसीके के समर्थन पत्र का इंतजार रहे हैं. जबकि इससे पहले विजय ने तीसरी बार राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें 116 विधायकों के समर्थन वाला लेटर सौंपा. हालांकि, अभी भी सरकार के लिए जरूरी बहुमत से 2 का आंकड़ा कम है.

इससे पहले यह कहा जा रहा था कि VCK और IUML ने टीवीके को समर्थन दे दिया है, जिससे अब विजय के गठबंधन का आंकड़ा 121 तक पहुंच गया था. इसी आधार पर शनिवार (9 मई) की सुबह 11 बजे विजय के शपथ लेने की चर्चा थी, लेकिन घटनाक्रम में फिर मोड़ आया, जब IUML ने टीवीके को समर्थन देने की खबरों का खंडन कर दिया और कहा कि वह DMK के साथ ही बनी रहेगी.

राज्यपाल समर्थन पत्र मिलने के बाद ही करेंगे शपथ ग्रहण की घोषणा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो घंटों से टीवीके नेता VCK प्रमुख थोल. तिरुमावलवन से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका पता नहीं चल पा रहा है. राजभवन के कहा गया कि राज्यपाल कार्यालय VCK का औपचारिक समर्थन पत्र मिलने के बाद ही शपथ ग्रहण समारोह की घोषणा करेगा. पार्टी शनिवार (9 मई) को TVK को समर्थन देने पर फैसला करेगी.

विजय को किसकिस पार्टी का मिला समर्थन?

थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को कांग्रेस, CPI और CPI(M) का समर्थन मिल चुका है. गौरतलब है कि VCK, CPI और CPI(M) पहले DMK के सहयोगी रहे हैं. वहीं, शपथ ग्रहण में देरी के पीछे आखिरी समय की राजनीतिक सौदेबाजी भी बताई जा रही है.

AMMK महासचिव ने कही हैरान करने वाली बात

AMMK के महासचिव टीटीवी दिनाकरन ने कहा, ‘मैं AIADMK का समर्थन कर रहा हूं. मैंने सरकार बनाने के लिए एडप्पादी पलानीस्वामी के समर्थन में यह पत्र सौंपा है. हमारे विधायक कामराज ने भी इस पर हस्ताक्षर किए हैं और इसे मेरे सचिव के जरिए भेजा है. जब मैंने TVK देखा, तो मैं हैरान रह गया, क्योंकि वहां कोई दूसरा ही पत्र था, शायद कोई जाली पत्र या फिर यह विधायकों की खरीद-फरोख्त हो सकती है.’

उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने विधायक को फोन किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. उन्होंने शाम करीब 6:30 बजे इस पत्र पर हस्ताक्षर किए थे और इसे यहां भेजा था. जब मैंने टीवी पर देखा कि हमारी पार्टी ने विजय का समर्थन किया है, तो मैं हैरान रह गया. इसलिए मैंने राज्यपाल से मिलने का समय लिया और उन्हें वह पत्र सौंपकर उनसे इस मामले की जांच करने का आग्रह किया. मुझे लगता है कि यह जाली है या फिर विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला है. उन्हें इसकी अनुमति नहीं देनी चाहिए.’

पंजाब में AAP मंत्री के घर ED की रेड पर भड़के अरविंद केजरीवाल…

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पंजाब में ED की लगातार रेड को लेकर अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों का इस्तेमाल नेताओं को दबाने का काम किया जा रहा है.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में लगातार हो रही ED की रेड को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला है. केजरीवाल ने कहा कि बंगाल चुनाव खत्म होते ही पंजाब में लगातार ED की कार्रवाई शुरू हो गई है और इसका मकसद राजनीतिक दबाव बनाना है.

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “जैसे ही बंगाल चुनाव ख़त्म हुए, पीएम मोदी ने पंजाब में रोज ED की रेड करना शुरू कर दिया है. पिछले कुछ सालों में पीएम मोदी ने पंजाब के साथ बहुत धक्का किया है. पंजाबियों को तरह तरह से प्रताड़ित किया है.”

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने पंजाब के पानी के मुद्दे पर हमला किया, पंजाब यूनिवर्सिटी को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की और ग्रामीण विकास का पैसा भी रोक दिया. अब ED की लगातार रेड की जा रही हैं.

अशोक मित्तल और संजीव अरोड़ा का भी किया जिक्र

केजरीवाल ने अपने बयान में राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल और संजीव अरोड़ा का नाम लेते हुए कहा, “अशोक मित्तल के यहाँ रेड हुई, अगले दिन उनको बीजेपी में शामिल करवा लिया. इसका मतलब ED की रेड का मकसद चोरी का पैसा ढूँढना नहीं था. केवल अशोक मित्तल को तोड़कर उन्हें बीजेपी में शामिल करवाना था.”

उन्होंने आगे कहा, “कुछ दिन पहले संजीव अरोड़ा के यहाँ भी रेड हुई. वो बीजेपी में शामिल नहीं हुए तो उनके यहाँ फिर से रेड करवा दी.”

अपने बयान में अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना औरंगजेब से करते हुए कहा, “पंजाब गुरुओं की धरती है. कई सौ साल पहले औरंगजेब ने जुर्म और अत्याचार के जरिए देश के कई भागों पर कब्जा कर लिया. पीएम मोदी ने भी बेईमानी से देश के कई हिस्सों पर कब्जा कर लिया है. उसके बाद औरंगजेब पंजाब पहुंचा. पीएम मोदी भी अब पंजाब पहुंचे हैं.”

उन्होंने कहा कि जैसे गुरुओं ने अत्याचार का सामना किया था, वैसे ही पंजाब अब भी मुकाबला करेगा. उन्होंने कहा, “आज गुरुओं की कुर्बानी से प्रेरणा लेकर पंजाब मोदी जी के अत्याचार का सामना करेगा और पूरे देश को उनके अत्याचार से बचाएगा.”

किसानों के आंदोलन का भी किया जिक्र

केजरीवाल ने अपने बयान के आखिर में किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा, “कुछ वर्ष पहले मोदी जी ने पंजाब के किसानों को ललकारा था और उन्हें किसानों के आगे झुकना पड़ा. आज मोदी जी ने पूरे पंजाब को ललकारा है.”

ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने जैश के मुख्यालय को किया था तबाह, वो फिर बनकर होगा तैयार, पाकिस्तान सरकार ने दिए 25 करोड़…

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Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद जैश-ए-मोहम्मद ने बहावलपुर स्थित मरकज सुभानल्लाह मुख्यालय को फिर से बनाना शुरू किया कर दिया है.

आज से एक साल पहले 7 मई 2025 को भारतीय वायुसेना ने आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के बहावलपुर स्थित मुख्यालय मरकज सुभानल्लाह पर भारतीय समय अनुसार 1 बजकर 07 मिनट 24 सेकंड पर मिसाइल से स्ट्राइक की थी. जहां 1 बजकर 07 मिनट 24 सेकंड पर पहली मिसाइल ने मरकज सुभानल्लाह के प्रमुख कंपाउंड और परिसर को तहस नहस कर दिया था तो इसी मिसाइल स्ट्राइक के बाद परिसर के तीन गुंबद तबाह हो चुके थे और मरकज के मुख्य हाल में बड़ा सा गड्ढा बन गया था.

हालांकि अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान की सरकार की तरफ से मिले 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये के बाद आज एक साल के बाद आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ने ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त हुए अपने मरकज सुभानल्लाह कंपाउंड को फिर से बनाना शुरू कर दिया है. एबीपी न्यूज़ के पास जैश ए मोहम्मद के हेडक्वार्टर मरकज सुभानल्लाह के अंदर और बाहर दोनों की एक्सक्लूसिव तस्वीरें और वीडियो मौजूद हैं. जहां जैश हेडक्वार्टर के गुंबदों को 10 मार्च से रिपेयर करने का काम शुरू हुआ है तो इस समय ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त 3 गुम्बदों को ईंट और सरिया से रिपेयर करके ऊपर प्लास्टर का कोट लगा दिया गया है और लकड़ी के ढांचे से सपोर्ट दिया गया है.

मरकज सुभानल्लाह के हॉल में काफी बदलाव

मरकज सुभानल्लाह के हॉल में काफ़ी बदलाव दिख रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर बाद हॉल में कई गड्ढे हुए थे, उन्हें अब सीमेंट की मदद से भर दिया गया है और मलबे को साफ भी कर दिया गया है. ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने कुल 3 मिसाइल स्ट्राइक मरकज सुभानल्लाह परिसर में की थी. जिसमे जैश ए मोहम्मद का मदरसा अल साबिर और एक रिहायशी मकान भी था जिसमें आतंकी मसूद अजहर के परिवार के सदस्य जो जैश ए मोहम्मद के आतंकवाद का काम देखते थे वो रहते थे. उस हमले में मसूद का बहनोई और भारत का वांटेड आतंकी यूसुफ अजहर, मसूद का बहनोई और मरकज़ सुभानल्लाह का प्रमुख हाफिज जमील अहमद, आतंकी रऊफ असगर का गोद लिया हुआ बेटा हुज़ैफ़ा अजहर जो अफ़ग़ानिस्तान में जैश ए मोहम्मद के ऑपरेशंस देखता था और हाफिज जमील का बेटा हमज़ा जमील जो जैश ए मोहम्मद का ट्रेंड आतंकी था उसकी मौत हुई थी.

भारतीय स्ट्राइक में पूरी तरह तहस नहस 

भारतीय स्ट्राइक में मदरसा अल साबिर और रिहायशी मकान पूरी तरह तहस नहस हो गए थे, ऐसे में उस जगह से आज एक साल बाद मलबा हटा दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार से मिले 25 करोड़ पाकिस्तानी रुपये से जैश ए मोहम्मद वापस मदरसा अल साबिर और रिहायशी मकान का निर्माण करेगी. एबीपी न्यूज़ के पास मौजूद एक्सक्लूसिव तस्वीरों में ईंट के चट्टे भी परिसर के गेट पर दिखायी दे रहे हैं, जिनका इस्तेमाल मदरसा अल साबिर और रिहायशी मकान की नींव भरने के लिए किया जाएगा.

पंजाब पुलिस की स्पेशल यूनिट संभालती जिम्मेदारी

सूत्रों के मुताबिक मस्जिद सुभानल्लाह परिसर की दीवार को भी पहले से ऊंचा किया गया है. इस समय आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के पूरे परिसर की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान की मरियम नवाज सरकार की पंजाब पुलिस की स्पेशल यूनिट “इलीट पुलिस” संभाल रही है,  जिसका काम पाकिस्तान में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाना और VIP को सुरक्षा देना है. एबीपी न्यूज़ के पास मौजूद एक्सक्लूसिव फोटो और वीडियो में पंजाब पुलिस की इस स्पेशल यूनिट की गाड़ियां और जवान साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे हैं.

क्या AI आपकी सोचने की ताकत कमजोर कर रहा है? नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा…

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Artificial Intelligence: यह रिसर्च 1,222 लोगों पर किए गए तीन बड़े एक्सपेरिमेंट्स पर आधारित थी. इसमें प्रतिभागियों को मैथ्स और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन से जुड़े सवाल दिए गए.

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. ईमेल लिखना हो, किसी प्रोजेक्ट के लिए आइडिया चाहिए हो या फिर होमवर्क में मदद लेनी हो लोग तुरंत AI चैटबॉट्स का सहारा लेने लगे हैं. ChatGPT, Claude और Gemini जैसे टूल्स कुछ ही सेकंड में जवाब दे देते हैं जिससे समय और मेहनत दोनों बचते हैं.

लेकिन एक नई रिसर्च ने इस सुविधा के पीछे छिपे एक बड़े खतरे की तरफ इशारा किया है. स्टडी के मुताबिक, केवल कुछ मिनट तक AI पर निर्भर रहने से इंसान की खुद सोचने और समस्याएं हल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है.

रिसर्च में क्या सामने आया?

यह रिसर्च 1,222 लोगों पर किए गए तीन बड़े एक्सपेरिमेंट्स पर आधारित थी. इसमें प्रतिभागियों को मैथ्स और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन से जुड़े सवाल दिए गए. कुछ लोगों को AI की मदद लेने की अनुमति थी जबकि बाकी प्रतिभागियों को बिना किसी AI सपोर्ट के सवाल हल करने थे. जिन लोगों ने AI का इस्तेमाल किया, उन्होंने शुरुआत में बेहतर प्रदर्शन किया. उनके जवाब तेजी से आए और स्कोर भी ज्यादा रहे. लेकिन असली फर्क तब दिखा जब रिसर्चर्स ने AI एक्सेस हटा दिया.

AI की मदद लेने वाले प्रतिभागियों का प्रदर्शन अचानक कमजोर पड़ गया. मैथ्स टेस्ट में बिना AI वाले लोगों ने लगभग 73 प्रतिशत सवाल सही हल किए, जबकि AI पर निर्भर रहने वाले लोग केवल करीब 57 प्रतिशत तक ही पहुंच पाए. पढ़ने-समझने वाले टेस्ट में भी यही पैटर्न देखने को मिला.

सबसे बड़ा असर पड़ा सोचने की आदत पर

रिसर्चर्स के मुताबिक, असली चिंता सिर्फ कम स्कोर नहीं है. AI इस्तेमाल करने वाले लोग कठिन सवालों को जल्दी छोड़ने लगे. यानी उनकी Persistence यानी लगातार कोशिश करने की क्षमता कमजोर होने लगी. स्टडी में कहा गया कि सिर्फ लगभग 10 मिनट तक AI से मदद लेने के बाद लोग बिना AI के ज्यादा जल्दी हार मानने लगे. रिसर्चर्स ने इसे Boiling Frog Effect जैसा बताया. मतलब शुरुआत में असर छोटा लगता है लेकिन धीरे-धीरे इंसान की गहराई से सोचने और खुद मेहनत करने की आदत कम हो सकती है.

हर तरह का AI इस्तेमाल नुकसानदायक नहीं

हालांकि रिसर्च में एक दिलचस्प बात भी सामने आई. जिन लोगों ने AI से सीधे जवाब मांगे, उनमें सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई. लेकिन जिन्होंने AI का इस्तेमाल केवल हिंट, गाइडेंस या समझाने के लिए किया, उन पर नकारात्मक असर काफी कम था. यानी अगर AI को “टीचर” की तरह इस्तेमाल किया जाए तो वह सीखने में मदद कर सकता है. लेकिन अगर हर काम का सीधा जवाब AI से लिया जाए तो दिमाग धीरे-धीरे शॉर्टकट्स का आदी बन सकता है.

असली समस्या AI नहीं, हमारी आदत है

इस स्टडी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि AI खुद दुश्मन नहीं है. खतरा तब शुरू होता है जब इंसान हर छोटी चीज के लिए उस पर पूरी तरह निर्भर होने लगता है. AI समय बचा सकता है, काम आसान बना सकता है और नई चीजें सिखा सकता है लेकिन अगर हम खुद सोचने और संघर्ष करने की आदत छोड़ देंगे तो लंबे समय में इसका असर हमारी मानसिक क्षमता पर पड़ सकता है.