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समंदर के नीचे दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, सुरंग खोदने के लिए बनाई नई टेक्नोलॉजी…

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चीन ने दुनिया की सबसे लंबी अंडरसी हाई-स्पीड रेल टनल में ‘टर्नरी मिक्स्ड गैस’ तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया है. यह तकनीक हीलियम, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण से हाई प्रेशर में सुरक्षित काम करने में मदद करती है. इससे 78 मीटर गहराई पर भी काम किया जा सकता है.

समंदर के नीचे सुरंग बनाना खुद में ही एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन चीन ने इस काम में अब एक ऐसा कदम उठा दिया है, जो पूरी दुनिया को चौंका रहा है. चीन ने अपनी पहली ‘टर्नरी मिक्स्ड गैस’ तकनीक को सफलतापूर्वक इस्तेमाल से दुनिया की सबसे लंबी अंडरसी हाई-स्पीड रेल टनल बनाने का रास्ता आसान कर दिया है. यह मेगा प्रोजेक्ट पूर्वी चीन के निंगबो और झोउशान के बीच बन रही 16.18 किलोमीटर लंबी जिनतांग अंडरसी टनल है. इसे दुनिया की सबसे लंबी समुद्र के नीचे बनने वाली हाई-स्पीड रेल टनल माना जा रहा है.

यहां एक सवाल आपके मन में आना चाहिए कि अभी दुनिया की सबसे लंबी अंडरसी टनल ‘चैनल टनल’ है जो 50 किमी लंबी है. यह फ्रांस और यूके को जोड़ती है. तो फिर भला चीन सबसे लंबी अंडरसी टनल कैसे बनाने वाला है. दरअसल चैनल टनल की कुल लंबाई ज्यादा है, लेकिन पूरा हिस्सा पानी के नीचे नहीं है. वहीं जिनतांग टनल पूरी तरह समुद्री जल के नीचे होगी. टेक्नोलॉजी के हिसाब से ये बहुत एडवांस भी है.

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती थी समुद्र के नीचे बेहद ज्यादा दबाव. टनल का सबसे गहरा हिस्सा समुद्र तल से करीब 78 मीटर नीचे है, जहां पानी और मिट्टी का दबाव करीब 0.85 मेगापास्कल तक पहुंच जाता है. इसे समझें तो यह ऐसा है जैसे एक छोटे सिक्के के बराबर जगह पर करीब 30 किलो वजन रखा हो. आम तौर पर इस तरह के काम में कंप्रेस्ड एयर यानी दबाव वाली हवा का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसकी सीमा 0.5 मेगापास्कल तक ही सुरक्षित मानी जाती है. यानी पारंपरिक तकनीक यहां काम नहीं कर सकती थी. कोई भी इंसान यहां अगर काम करता तो जान से हाथ धो देता.

इसी चुनौती को पार करने के लिए चीन के इंजीनियरों ने ‘टर्नरी मिक्स्ड गैस सिस्टम’ नाम की एक नई तकनीक विकसित की. ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें तीन गैसों, हीलियम, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण तैयार किया जाता है, जिसे टनल के अंदर काम करने वाले मजदूरों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इस तकनीक की खासियत यह है कि हीलियम जैसी हल्की गैस का इस्तेमाल करने से हाई प्रेशर में होने वाले खतरों को कम किया जा सकता है. जैसे नाइट्रोजन के असर से होने वाली दिक्कतें और ज्यादा ऑक्सीजन के कारण होने वाले जोखिम. इससे काम करने वाले लोगों को गहरे समुद्र जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षित सांस लेने में मदद मिलती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम में गैस मिक्सिंग और सप्लाई के लिए कुल 113 अलग-अलग मॉड्यूल लगाए गए हैं. यह सिस्टम 0.5 से 1 मेगापास्कल तक के प्रेशर में भी सही तरीके से काम कर सकता है, जो इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए बहुत अहम है. इस तकनीक का इस्तेमाल खास तौर पर उस समय किया जाता है जब टनल बनाने वाली मशीन के कटर की जांच या बदलाव करना होता है. यानी सबसे जोखिम भरे काम को अब ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा. चीन का यह कदम सिर्फ एक टनल प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि देश अंडरसी कंस्ट्रक्शन और हाई-प्रेशर इंजीनियरिंग में तेजी से आगे बढ़ रहा है.