Home Blog Page 131

तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए विजय की TVK CPI और CPM से भी मांगेगी समर्थन…

0

टीवीके को कांग्रेस का समर्थन हासिल है लेकिन इसके बावजूद भी वो 118 के जादुई आंकड़े से अभी दूर है. ऐसे में खबर आ रही है कि टीवीके सरकार बनाने और 118 का आंकड़ा हासिल करने के लिए CPI और CPM जैसी पार्टियों से भी समर्थन मांगने पर विचार कर रही है.

तमिलनाडु में ‘विजय सरकार’ का शपथ ग्रहण कब होगा इसे लेकर स्थिति अभी तक साफ नहीं है. पेंच बहुमत के आंकड़े पर आकर फंस गया है. बुधवार को टीवीके प्रमुख विजय ने राज्यपाल से मुलाकात की थी लेकिन उस दौरान वो उन्हें बहुमत के आंकड़े को लेकर संतुष्ट नहीं कर पाए थे. हालांकि, टीवीके को कांग्रेस का समर्थन हासिल है लेकिन इसके बावजूद भी वो 118 के जादुई आंकड़े से अभी दूर है. ऐसे में अब टीवीके सरकार बनाने और 118 का आंकड़ा हासिल करने के लिए CPI और CPM जैसी पार्टियों से भी समर्थन मांगने के लिए संपर्क कर रही है.

तमिलनाडु में डीएमके को हराकर ही टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी है. ऐसे में डीएमके के समर्थन का सवाल ही नहीं है, वहीं एआईएडीएमके भी साफ कर चुकी है कि वह टीवीके को समर्थन नहीं देगी. इन चुनाव परिणामों में डीएमके को 59 और एआईएडीएमके को 47 सीटें मिली हैं. ऐसे में टीवीके के पास छोटी पार्टियों को अपनी ओर लाने के अलावा कोई विकल्‍प नहीं है. यही कारण है कि टीवीके अब वामदलों की ओर देख रही है. टीवीके के उप महासचिव सीटी निर्मल कुमार ने कहा कि हमारे आधिकारिक पत्र के अलावा हम समर्थन मांगने के लिए CPI और CPM की टीमों से भी मुलाकात कर रहे हैं.

TVK के पास बहुमत नहीं, राज्यपाल ने समझाया

टीवीके के उप महासचिव ने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल को हमारे नेता को आमंत्रित करना चाहिए.  उन्‍होंने कहा कि हम एक दिन और इंतजार करेंगे. हमें उम्मीद है कि राज्यपाल नियमों के अनुसार निर्णय लेंगे.

तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने टीवीके प्रमुख विजय को गुरुवार को समझाया कि उनकी पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं है. लोक भवन ने कहा कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने टीवीके अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय को बृहस्पतिवार को लोक भवन आमंत्रित किया. बुधवार के बाद दोनों के बीच यह दूसरी बातचीत थी. लोक भवन ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘बैठक के दौरान माननीय राज्यपाल ने समझाया कि उनके पास तमिलनाडु विधानसभा में सरकार गठित करने के लिए आवश्यक बहुमत अभी तक नहीं है.”

चुनाव में भाकपा और माकपा को मिली 2-2 सीटें 

तमिलनाडु की 234 सदस्‍यीय विधानसभा में टीवीके ने 108 सीटों पर जीत दर्ज की है. हालांकि बहुमत का आंकड़ा 118 है. ऐसे में पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए अभी कुछ और विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी. इन परिणामों में पीएमके को चार सीटें मिली हैं. वहीं आईयूएमएल, भाकपा, माकपा और वीसीके को दो-दो सीटें मिली हैं. वहीं भाजपा, डीएमडीके और एएमएमके को एक-एक सीट प्राप्त हुई.

आतंकी ठिकाने से एयरबेस तक, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने क्या-क्या…

0

पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने वाला भारत का ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम हमले का जवाब था. भारत का लक्ष्य पाकिस्तान के आतंकी ढांचों को तबाह करना था. पूरे ऑपरेशन के जरिए पाकिस्तान के आतंकी ढांचे की कमर तोड़ी गई. ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर जानिए, पूरे मिशन में पाकिस्तान ने क्या-क्या खोया.

Operation Sindoor Anniversary: आतंकी ठिकाने से एयरबेस तक, ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने क्या-क्या खोया?

ऑपरेशन सिंदूर की आज यानी 7 मई को पहली वर्षगांठ है. भारतीय सेना ने यह ऑपरेशन साल 2025 में चार दिन यानी 7 से 10 मई तक चलाया था. पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने यह कार्रवाई की थी. इस हमले में 26 पर्यटकों को आतंकियों ने गोलियों से भून दिया था. इसी कुत्सित हमले का जवाब देने को भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर लांच किया था. भारत का लक्ष्य आतंकी ढांचों को नेस्तनाबूत करना था और उसी पर सुरक्षा बलों ने लगातार प्रहार किए.

Operation Sindoor What Pakistan Lost Pics

आइए, पहली वर्षगांठ के मौके पर एक बार फिर से जानने की कोशिश करते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने क्या-क्या खोया? एयरबेस, रडार, लड़ाकू विमान, आतंकवादी अड्डे और आतंकी भी? कितनी जनहानि हुई?

पाकिस्तान ने क्या-क्या खोया?

पाकिस्तान ने क्या-क्या खोया, यह जानकारी खुले स्रोतों में स्पष्ट उल्लेख किया गया है. लेकिन मारे गए आतंकियों की पूरी सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं दिखाई देती. पाकिस्तानी डोजियर के हिसाब से पंजाब प्रांत के रावलपिंडी, लाहौर, मियांवाली, सरगोधा, डिंगा, सिंध प्रांत के कराची, हैदराबाद, बलूचिस्तान के क्वेटा, तुर्बत एवं ग्वादर, खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर एवं डेरा इस्माइल खान तथा गिलगित-बाल्टिस्तान के स्कार्दू पर हमले किये गए थे. लेकिन इन स्थानों पर कितना नुकसान हुआ, इसका स्पष्ट उल्लेख कम ही मिलता है. डोजियर में टारगेट और नुकसान पर अक्सर अलग बातें होती हैं.

पाकिस्तान के मुज़फ़्फ़राबाद के पास हमले के बाद की तस्वीर. फोटो: AP

Operation Sindoor What Pakistan Lost

कौन-कौन से एयरबेस पर हुआ हमला?

मीडिया रिपोर्ट्स एवं अन्य पाकिस्तानी स्रोतों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करीब दर्जन भर एयरबेस पर भारतीय सेना ने हमले किये थे, इनमें नूर खान, रफीकी, मुरिद, सुक्कर, सियालकोट, पसूर, चूनियां, सरगोढ़ा, स्कार्दू, भोलारी और जैकबाबाद मुख्य रूप से शामिल हैं. इसके अलावा चकलाला और राहिम यार खान एयरपोर्ट भी हमले का शिकार हुआ. डोजियर में यह भी दावा दिखता है कि मसरूर एयरबेस, समुंगली एयरबेस को भी भारतीय सेना ने निशाना.

पाकिस्तान में चीनी रडार और एयर डिफेंस को कितना हुआ नुकसान?

यह मामला थोड़ा टिपिकल है. ज्यादातर दावों पर आधारित है. बहुत ठोस चीजें उपलब्ध नहीं हैं. मसलन, भारत ने शुरुआती हमलों में पाकिस्तान में तैनात चीनी एयर डिफेंस सिस्टम को जाम करने की बात कही थी. मीडिया रिपोर्ट्स में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने का भी दावा किया गया है. पसूर में रडार इंस्टॉलेशन, लाहौर में एयर डिफेंस सिस्टम के तबाह होने की जानकारी मिलती है. समय पूर्व चेतावनी देने वाले रडार भी कई जगह नष्ट किये गए. इस मामले में एकदम स्पष्ट सूची खुले स्रोतों में उपलब्ध नहीं दिखती है.

पाकिस्तान के मुरीदके में भारतीय मिसाइल के हमले के बाद का हाल. फोटो: AP

New Project

लड़ाकू विमानों को कितना नुकसान पहुंचा?

यह विषय भी विवादित और अलग-अलग दावों के साथ है. नूर खान एयरबेस पर हमले में एक सी-130 विमान के नुकसान का स्पष्ट उल्लेख मिलता है. भोलारी बेस पर भी कुछ विमानों के साथ ही रडार सिस्टम के डैमेज होने और बाद में रिपेयर होने का उल्लेख मिलता है. इस ऑपरेशन में कम से कम पांच पाकिस्तानी जेट और एक अर्ली वॉर्निंग विमान मार गिराने की जानकारी भी उपलब्ध है लेकिन पाकिस्तान सरकार या सेना की ओर से ऐसी कोई सूची खुले स्रोतों में नहीं मिलती.

भारत का दावा है कि शुरुआती हमलों में कम से कम सौ से ज्यादा आतंकी मारे गए. फोटो: AP

Operation Sindoor What Pakistan Lost Picture

ऑपरेशन सिंदूर में कितनी जानें गईं?

पाकिस्तान सरकार ने कुल 40 नागरिकों तथा 13 सैन्य कर्मियों के मारे जाने को स्वीकार किया है, जो सच से अलग दिखाई देते हैं. पूरी दुनिया मानती है कि इन हमलों में पाकिस्तान को ज्यादा जनहानि हुई है. 10 मई के हमलों में आधा दर्जन एयरमैन मारे जाने की पुष्टि का भी स्पष्ट उल्लेख मिलता है. भारत का दावा है कि शुरुआती हमलों में कम से कम सौ से ज्यादा आतंकी मारे गए लेकिन पाकिस्तान ने आतंकवादियों की मौत तो छोड़िए, उनकी मौजूदगी से ही लगातार इनकार किया.

कौन-कौन आतंकी मरे?

चूंकि, पाकिस्तान ने आतंकियों की मौजूदगी से ही इनकार किया है. ऐसे में इस मामले में मीडिया रिपोर्ट्स में जो दावे हैं, वही उपलब्ध हैं. कोई आधिकारिक सूची नहीं उपलब्ध है. फिर भी अब्दुल रऊफ अज़हर का नाम मरने वालों में प्रमुखता से लिया गया लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई. आतंकी मसूद अज़हर के परिवार के कम से कम दस सदस्यों और चार करीबी सहयोगियों के मारे जाने की बात भी सामने आई.

कौन-कौन से आतंकी ठिकाने खत्म किये?

इस मामले में तस्वीर थोड़ी ज्यादा साफ-साफ मिलती है. बहावलपुर, मुरीदके, कोटली, मुज़फ्फराबाद, शवाई नाला कैंप, गुलपुर, बरनाला तथा सियालकोट के कुछ साइट्स को भारतीय सेना ने नेस्तनाबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. कह सकते हैं कि इनके पूरे के पूरे ढांचे तबाह किये. पाकिस्तान सरकार माने या न माने, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, आतंकी और उनके ठिकाने ध्वस्त हुए थे. इस मुद्दे पर किसी को शक नहीं होना चाहिए.

ऑपरेशन सिंदूर को एक साल हो गया. अब बहस का केंद्र सिर्फ स्ट्राइक नहीं है. केंद्र यह भी है कि डेटा कितना पुष्ट है और कितना प्रचार है. खुले स्रोतों में सबसे मजबूत चीज टारगेट की सूची दिखती है. एयरबेस के नाम भी कई जगह दोहराए जाते हैं. रडार और चीनी सिस्टम पर असर की बातें भी मिलती हैं. पर, मॉडल-वार चीनी रडार की पूरी सूची नहीं मिलती. लड़ाकू विमानों का नुकसान भी एक जैसा नहीं मिलता.

Operation Sindoor Anniversary: ऑपरेशन सिंदूर में भारत के कौन से हथियार पाकिस्तान पर कहर बनकर टूटे?

0

Operation Sindoor Anniversary: भारत के ऑपरेशन सिंदूर अभियान का आज एक साल पूरा गया है. यह अभियान न केवल शौर्य का प्रतीक था बल्कि पहलगाम में हुई कायरतापूर्ण घटना का जवाब देने के साथ पाकिस्तान में आतंक के गढ़ को खत्म करने का मिशन भी था. इस ऑपरेशन में भारत ने आधुनिक युद्धकला के उन तमाम हथियारों का इस्तेमाल किया, जिन्होंने पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा और रडार सिस्टम दोनों को धुआं-धुआं कर दिया.

7 मई 2025 की तारीख भारत के रक्षा इतिहास में गहरे अक्षरों में दर्ज हो गई. पहलगाम में निहत्थे नागरिकों पर हुए कायराना हमले के बाद भारत का धैर्य जवाब दे गया था. केंद्र सरकार और सैन्य नेतृत्व ने एक ऐसे अभियान की रूपरेखा तैयार की, जिसे ऑपरेशन सिंदूर का नाम दिया गया. इस ऑपरेशन में भारत ने आधुनिक युद्धकला के उन तमाम हथियारों का इस्तेमाल किया, जिन्होंने पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा और रडार सिस्टम दोनों को धुआं-धुआं कर दिया.

आइए, ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के बहाने जानते हैं कि भारत ने किन हथियारों के जरिए पाकिस्तान की सेना, सरकार, आतंकी ठिकानों को धोया?

वायुसेना का नेतृत्व और राफेल का दबदबा

ऑपरेशन सिंदूर की धुरी भारतीय वायुसेना बनी थी. इस अभियान में राफेल लड़ाकू विमान भारत के सबसे बड़े गेम चेंजर साबित हुए. फ्रांस से आए इन विमानों ने अपनी विजिबिलिटी और जैमिंग तकनीक के जरिए पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र में खलबली मचा दी. राफेल की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर बम थे. राफेल ने पाकिस्तानी एयरस्पेस में बिना घुसे ही लंबी दूरी से सटीक हमले किए. हैमर बम अपनी अचूक मारक क्षमता के लिए जाने जाते हैं. वायुसेना ने नूर खान और रहीमयार खान जैसे पाकिस्तानी एयरबेस पर हाई-इम्पैक्ट ऑपरेशन किए, जिससे वहां का लॉजिस्टिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया.

राफेल की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्कैल्प क्रूज मिसाइल और हैमर बम थे.

ब्रह्मोस की सुपरसोनिक गति और अमोघ प्रहार

जब बात लंबी दूरी और प्रचंड गति की आती है, तो ब्रह्मोस का कोई सानी नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की तैनाती ने पाकिस्तान के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स को हिलाकर रख दिया. ब्रह्मोस की रफ्तार इतनी तेज है कि दुश्मन का एयर डिफेंस उसे ट्रैक करने से पहले ही खुद नष्ट हो जाता है. भारत ने इस मिसाइल के जरिए पाकिस्तान के सामरिक ठिकानों पर पिन-पॉइंट स्ट्राइक की, जिससे नागरिक बस्तियों को बचाते हुए केवल तय टारगेट को तबाह किया जा सका.

ब्रह्मोस मिसाइल.

आकाश और एस-400 यानी भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच

ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान ने ड्रोन और यूसीएवी हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की कोशिश की थी. यहां भारत के स्वदेशी आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली ने अपना लोहा मनवाया. आकाश प्रणाली ने भारत की ओर आने वाले हर पाकिस्तानी ड्रोन को हवा में ही मार गिराया. इसके साथ ही, रूस से मिले एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने भारतीय आसमान के चारों ओर एक ऐसी अदृश्य दीवार खड़ी कर दी, जिसे पार करना किसी भी पाकिस्तानी विमान के लिए असंभव हो गया.

लेयर्ड डिफेंस में पेचोरा और ओसा-एके जैसे पारंपरिक सिस्टम ने भी अपना योगदान दिया. वायुसेना के एकीकृत हवाई कमान और नियंत्रण प्रणाली ने इन सभी हथियारों को एक डिजिटल ब्रेन से जोड़कर दुश्मन के हर खतरे का रीयल-टाइम आकलन किया.

एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम.

ड्रोन और डिकॉय का जादुई खेल भी हुआ

इस ऑपरेशन की एक और दिलचस्प कड़ी थी पाकिस्तान के रडार सिस्टम को बेवकूफ बनाना. भारत ने लक्ष्य और बंशी जैसे ड्रोन का उपयोग छल के रूप में किया. पाकिस्तानी सेना को रडार पर ऐसा लगा जैसे दर्जनों राफेल विमान हमला कर रहे हैं. उन्होंने इन नकली लक्ष्यों पर अपनी कीमती मिसाइलें दाग दीं, जबकि भारत के असली लड़ाकू विमान चुपचाप अपने मिशन को अंजाम देकर सुरक्षित वापस लौट आए. नागास्त्र-1 और हेरॉन एमके-2 जैसे ड्रोन ने निगरानी और सटीक हमलों में नई इबारत लिखी.

भारतीय नौसेना ने समुद्र बनाया दबाव

ऑपरेशन सिंदूर में नौसेना का सक्रिय होना भारत की ज्वाइंटनेस का प्रमाण था. नौसेना ने अपना कैरियर बैटल ग्रुप तैनात किया. आईएनएस विक्रमादित्य और विक्रांत जैसे युद्धपोतों पर तैनात मिग-29के लड़ाकू विमानों ने मकरान तट की ओर से पाकिस्तान को पूरी तरह घेर लिया. एयरबोर्न अर्ली वार्निंग हेलीकॉप्टर्स ने समुद्र से आने वाले किसी भी खतरे को मीलों दूर ही भांप लिया. इस रणनीति ने पाकिस्तानी वायुसेना को अपने पश्चिमी समुद्री किनारे पर ही बोतल-बंद कर दिया.

थलसेना और बीएफएस ने लगाया घुसपैठ पर पहरा

जहां आसमान में मिसाइलें गरज रही थीं, वहीं थलसेना ने सीमा पर मोर्चा संभाले रखा. सेना ने कंधे पर रखकर चलाई जाने वाली मिसाइल और लो-लेवल एयर डिफेंस गन के जरिए पाकिस्तानी छोटे ड्रोनों का शिकार किया. इसी दौरान सांबा सेक्टर में सीमा सुरक्षा बलों ने एक बड़ी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए कई आतंकियों को ढेर किया. यह साबित करता है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां हर मोर्चे पर मुस्तैद थीं.

भविष्य की युद्ध कला और आत्मनिर्भर भारत

ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब भारत केवल रक्षात्मक नहीं रहा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के नेतृत्व में भारत ने एकीकृत थिएटर कमांड की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं. इस ऑपरेशन में प्रयुक्त अधिकतर हथियार या तो भारत में बने थे या भारतीय जरूरतों के अनुसार खरीदे गए थे. क्योंकि भारत डिफेंस सेक्टर में लगातार न केवल निवेश कर रहा है बल्कि लगातार सुधार की ओर कदम बढ़ाए जा रहा है.

नया भारत, नई रणनीति

इस तरह कहा जा सकता है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य श्रेष्ठता और रणनीतिक सूझबूझ की महागाथा है. भारत सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए तथ्यों और विदेशी सैन्य प्लेटफॉर्म्स की रिपोर्ट्स का सार यही है कि भारत ने अपनी संप्रभुता से समझौता न करने का कड़ा संदेश दिया है. पाकिस्तान को समझ आ गया है कि अब वह पुराने ढर्रे के परमाणु युद्ध की धमकी से भारत को नहीं डरा सकता. भारत के पास हर कदम के लिए एक तोड़ मौजूद है. चाहे वह जमीन पर थल सेना की जांबाजी हो, आसमान में राफेल और आकाश की गर्जना हो या समुद्र में नौसेना का चक्रव्यूह, ऑपरेशन सिंदूर ने नए भारत की शक्ति से दुनिया को परिचित करा दिया है.

 

ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल बाद भी इन 3 सदमे से नहीं निकल पाया बाहर पाकिस्तान…

0

ऑपरेशन सिंदूर का सदमा अब तक पाकिस्तान को है. एक तरफ उसके बड़े-बड़े आतंकी अंडरग्राउंड हैं. वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान पैसे की कमी से जूझ रहा है. पानी को लेकर संकट अलग है. पाकिस्तान ने हाल ही में पानी संकट से निपटने के लिए यूूएनएससी से गुहार लगाई है.

इन 3 सदमे से बाहर नहीं निकल पा रहा पाक

365 दिन बाद भी ऑपरेशन सिंदूर के सदमे से पाकिस्तान और उसके आतंकी संगठन बाहर नहीं निकल पाया है. एक तरफ पाकिस्तान की सरकार ऑपरेशन सिंदूर के तहत बंद किए गए पानी को लेकर परेशान है. वहीं दूसरी तरफ एयरस्ट्राइक के डर से हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे बड़े-बड़े आतंकी अभी भी अंडरग्राउंड छिपे हैं. पिछले एक साल में सार्वजनिक तौर पर इन आतंकियों की कोई भी तस्वीर सामने नहीं आई है.

मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद तो हाफिज सईद लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हैं. दोनों को पाकिस्तान का सबसे बड़ा आतंकी माना जाता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन्हीं दोनों के ठिकानों पर सबसे ज्यादा हमले किए गए थे.

लश्कर-जैश की स्थिति काफी कमजोर

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लश्कर, जैश और हिजबुल के 10 ठिकानों को भारतीय सेना ने ध्वस्त किया था. इससे ये आतंकी संगठन अब तक नहीं उबर पाए हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद लश्कर और जैश ने अपने आतंकी ठिकानों को नए सिरे से तैयार करने की घोषणा जरूर की, लेकिन अब तक उसमें सफलता नहीं मिली.

इतना ही नहीं, पिछले एक साल में हाफिज सईद और मसूद अजहर के बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. इसके उलट लश्कर और जैश के बड़े बड़े कमांडर अज्ञात हमलावरों के हमले में मारे जा रहे हैं. पिछले दिनों लश्कर के को-फाउंडर रहे हमजा की लाहौर में हत्या कर दी गई.

आर्थिक तौर पर भी लश्कर और जैश की स्थिति ठीक नहीं है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सरकार ने मसूद के परिवार को राहत के तौर पर 14 करोड़ रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की थी. दरअसल, भारत के स्ट्राइक में मसूद परिवार के 14 लोगों की मौत हुई थी.

इन दोनों आतंकी संगठनों के अलावा हिजबुल की स्थिति भी कमजोर है. हिजबुल के कमांडर सज्जाद अहमद की हाल ही में हत्या कर दी गई है.

पाकिस्तान सरकार पानी के लिए परेशान

दूसरी तरफ पाकिस्तान की सरकार पानी के लिए परेशान है. अप्रैल 2026 में पाकिस्तान की सरकार ने इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रूख किया था. पाकिस्तान की सरकार का कहना था कि 1960 के बाद यह पहली बार है, जब भारत ने सिंधु नदी का जल रोक दिया है. पाकिस्तान इस मसले को लेकर दुनिया कई देशों से गुहार लगा चुका है, लेकिन उसे अब तक कोई राहत नहीं मिली है.

सिंधु नदी के जल रुकने से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 13 प्रतिशत तो सिंध प्रांत में 17 प्रतिशत पानी की कमी आई है. आने वाले समय में इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद है. यही वजह है कि पाकिस्तान इससे काफी ज्यादा परेशान है.

इसके अलावा पाकिस्तान को एयरस्पेस में नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के विरोध में पाकिस्तान की सरकार ने भारत से आने-जाने वाले विमानों के लिए अपना स्पेस बंद कर दिया, जिसके कारण उसे हर महीने तकरीबन 300 करोड़ का नुकसान हो रहा है. यह पाकिस्तान के लिए कंगाली में आटा गीला जैसा है.

पैसे के संकट को खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने अपने हथियार और सैनिकों को किराए पर लगाने का फैसला किया. सऊदी अरब को पाकिस्तान ने इस साल 13 हजार सैनिक और हथियार भेजे हैं. बदले में सऊदी ने पाकिस्तान को 3 बिलियन डॉलर की सहायता राशि प्रदान की है.

Bihar Cabinet Expansion 2026: बिहार सम्राट चौधरी ने 32 मंत्रियों को दिलाई शपथ, PM मोदी मौजूद…

0

बिहार में सम्राट चौधरी सरकार का कैबिनेट विस्तार हुआ. 32 नए मंत्रियों ने गांधी मैदान में शपथ ली, जिनमें नीतीश कुमार के बेटे निशांत भी शामिल हैं. मंत्रिमंडल में जातीय समीकरण का खास ख्याल रखा गया, जिसमें ओबीसी, अगड़ी और अल्पसंख्यक समाज को प्रतिनिधित्व मिला. इस समारोह में पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे, जो एनडीए की मजबूती दर्शाता है.

‘तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष पहचान बचाने के लिए लिया फैसला’, टीवीके के समर्थन पर कांग्रेस…

0

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को समर्थन देने के कांग्रेस के फैसले पर उठ रहे राजनीतिक सवालों के बीच कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता और विधायक एस राजेश कुमार ने गुरुवार को पार्टी के रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष पहचान की रक्षा और राज्य में सांप्रदायिक ताकतों को प्रभाव हासिल करने से रोकने के लिए लिया गया है।

तेजी से बदल रहे चुनाव बाद के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच जारी विस्तृत बयान में राजेश कुमार ने उन आरोपों को खारिज किया कि कांग्रेस ने अपने सिद्धांतों से समझौता किया है या राजनीतिक पदों की लालसा में यह कदम उठाया है।

उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल कांग्रेस के फैसले को जनता के जनादेश के साथ विश्वासघात के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पार्टी का रुख तमिलनाडु के व्यापक हितों और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की आवश्यकता से प्रेरित है।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस हमेशा धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध रही है। हमारा फैसला लोकतांत्रिक जनादेश और तमिलनाडु के भविष्य के कल्याण को ध्यान में रखकर लिया गया है।”

राजेश कुमार ने कहा कि विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले कांग्रेस को कई राजनीतिक प्रस्ताव मिले थे, लेकिन पार्टी ने सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ लड़ाई में इंडिया गठबंधन के तहत धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ बने रहने का फैसला किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पिछले विधानसभा चुनाव में धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन की जीत के लिए व्यापक प्रचार किया था और पार्टी वैचारिक रूप से आरएसएस तथा सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखे हुए है।

राजेश कुमार ने टीवीके की घोषित राजनीतिक विचारधारा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि विजय के नेतृत्व वाली पार्टी ने खुद को लगातार एक धर्मनिरपेक्ष आंदोलन के रूप में पेश किया है।

उन्होंने कहा कि टीवीके प्रमुख विजय ने सार्वजनिक रूप से पूर्व मुख्यमंत्री के कामराज को अपनी वैचारिक प्रेरणा बताया है और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता जताई है।

राजेश कुमार ने कहा, “कमाराज के आदर्शों को स्वीकार करने और धर्मनिरपेक्षता तथा सामाजिक न्याय के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध राजनीतिक आंदोलन का समर्थन करने से तमिलनाडु की धर्मनिरपेक्ष नींव और मजबूत होगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक ताकतों की एकजुटता बनाए रखना और सांप्रदायिक तत्वों को राजनीतिक जगह हासिल करने से रोकना है।

उन्होंने कहा कि टीवीके को दिया गया समर्थन वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक अवसरवाद के नजरिए से।

राजेश कुमार ने कहा, “कांग्रेस पार्टी सांप्रदायिकता के खिलाफ और सामाजिक न्याय तथा तमिलनाडु की जनता की भावनाओं की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।”

नीतीश सरकार का नया मंत्रिमंडल! 10 करीबी नेताओं को मिली जगह, 2 चौंकाने वाले नामों से बढ़ी सियासी…

0

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए कैबिनेट विस्तार के दौरान, JD(U) ने 10 ऐसे लोगों को नए मौके दिए, जो पहले भी मंत्री रह चुके हैं। वहीं, तीन लोगों को पहली बार मंत्री बनाया गया है। इन नए चेहरों में निशांत कुमार, शैलेश कुमार (उर्फ बुलू मंडल) और श्वेता गुप्ता शामिल हैं।

जो पहले मंत्री रह चुके हैं:

  1. श्रवण कुमार

JD(U) विधानमंडल दल के नेता श्रवण कुमार नालंदा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक (MLA) हैं। उन्होंने लगातार आठ बार विधानसभा चुनाव जीता है। नीतीश सरकार में, वह पहले भी ग्रामीण विकास, संसदीय कार्य और परिवहन जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी उम्र 66 वर्ष है।

  1. लेशी सिंह

JD(U) कोटे से मंत्री बनीं लेशी सिंह, पूर्णिया जिले के धमदाहा विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुकी हैं। पिछली सरकार में, उन्होंने खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के रूप में कार्य किया था। नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान वह कई बार मंत्री पद पर रह चुकी हैं। वह पहली बार वर्ष 2000 में बड़े धूमधाम से विधायक चुनी गई थीं। उनका जन्म 1974 में हुआ था।

  1. दामोदर राउत

दामोदर राउत भी इससे पहले नीतीश कुमार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वह झाझा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक हैं। उन्होंने इतिहास विषय में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है। उनकी उम्र 67 वर्ष है और वह पांच से अधिक बार विधायक रह चुके हैं।

  1. अशोक चौधरी

अशोक चौधरी के पिता, महावीर चौधरी, कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 1968 में जन्मे अशोक चौधरी ने मगध विश्वविद्यालय से Ph.D. की उपाधि प्राप्त की है। वह वर्तमान में ए.एन. कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।विधान परिषद सदस्य (MLC) अशोक चौधरी, नीतीश सरकार में कई बार मंत्री रह चुके हैं। JD(U) में शामिल होने से पहले, वह कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

  1. भगवान सिंह कुशवाहा

भगवान सिंह कुशवाहा भोजपुर ज़िले की जगदीशपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। इससे पहले वे ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर काम कर चुके हैं। वे विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी रह चुके हैं। नीतीश कुमार ने उन्हें JD(U) का राष्ट्रीय महासचिव भी नियुक्त किया था। कुशवाहा का अपने समुदाय में काफी प्रभाव है और वे समता पार्टी के ज़माने से ही नीतीश कुमार के बहुत करीबी सहयोगी रहे हैं।

  1. मदन सहनी

JD(U) नेता मदन सहनी अत्यंत पिछड़े वर्ग से आते हैं। उनका जन्म 1971 में दरभंगा ज़िले के खरजपुर में हुआ था। राजनीति में अपने शुरुआती दिनों में, उन्होंने दरभंगा ज़िला परिषद के अध्यक्ष के तौर पर काम किया। वे पहली बार 2015 में विधानसभा सदस्य (MLA) बने। उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार में कई विभागों में मंत्री के तौर पर काम किया। फिलहाल, वे दरभंगा की बहादुरपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  1. रत्नेश सदा

रत्नेश सदा इससे पहले नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वे सहरसा ज़िले की सोनबरसा (आरक्षित) विधानसभा सीट से लगातार चार बार विधायक चुने गए हैं। 2023 में, संतोष सुमन (HAM पार्टी के) के इस्तीफे के बाद, खाली हुई जगह को भरने के लिए रत्नेश सदा को मंत्री नियुक्त किया गया था। उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है।

  1. शीला कुमारी

शीला कुमारी – जिन्हें शीला मंडल के नाम से भी जाना जाता है – जिन्हें सम्राट चौधरी की सरकार में मंत्री बनाया गया है, वे इससे पहले नीतीश कुमार की सरकार में परिवहन मंत्री रह चुकी हैं। उनके ससुर, धनिक लाल मंडल, बिहार विधानसभा के स्पीकर थे। शीला ने 2020 में राजनीति में कदम रखा। फिलहाल, वे मधुबनी की फुलपरास विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं।

  1. सुनील कुमार

रिटायर्ड IPS अधिकारी सुनील कुमार इससे पहले नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वे दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। वे 2020 में JD(U) में शामिल हुए थे। फिलहाल, वे गोपालगंज की भोरे (आरक्षित) विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  1. जमा खान

जमा खान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (BSP) से की थी। 2020 में, वे पहली बार BSP के टिकट पर विधायक चुने गए। वर्तमान में, वे कैमूर की चैनपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। इससे पहले, वे नीतीश कुमार की सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के पद पर रह चुके हैं। यह बात ध्यान देने योग्य है कि अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले जमा खान सम्राट, सरकार में एकमात्र मुस्लिम मंत्री हैं। मंत्री के तौर पर उनकी दोबारा नियुक्ति को नीतीश कुमार द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय को एक संदेश देने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

थलापति विजय के समर्थक की भावुक प्रार्थना, राजनीति में उठापटक जारी…

0

थलापति विजय की राजनीतिक गतिविधियों के बीच, उनके एक भावुक प्रशंसक ने विजय के निवास के बाहर प्रार्थना की। प्रशंसक ने विजय के संघर्षों और उनकी मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर अपनी भावनाएँ व्यक्त की। इस बीच, विजय की आगामी फिल्म ‘जन नायक’ लीक हो गई है, जिससे उनके प्रशंसकों में निराशा है। जानें इस कहानी के पीछे की पूरी जानकारी और विजय की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ।

थलापति विजय की राजनीतिक गतिविधियाँ

थलापति विजय ने तमिलागा वेत्त्री कझागम की शानदार जीत के बाद सुर्खियाँ बटोरी हैं। हाल ही में, उन्होंने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस बीच, विजय के निवास के बाहर एक भावुक प्रशंसक का वीडियो वायरल हुआ है। इस समर्थक ने प्रार्थना करते हुए विजय के प्रति अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विजय ने इस मुकाम तक पहुँचने के लिए बहुत संघर्ष किया है और उन्हें उम्मीद है कि विजय को सफलता मिलेगी।

विजय के घर के बाहर प्रशंसक की भावुकता

एक वीडियो में देखा गया कि एक प्रशंसक विजय के निवास के बाहर घुटने टेककर प्रार्थना कर रहा है। मीडिया से बात करते हुए, उसने पुलिस सुरक्षा की कमी पर सवाल उठाया। आँसू भरे आँखों से उसने कहा, “मैं थलापति के लिए अपनी जान दे दूँगा। वह निश्चित रूप से मुख्यमंत्री बनेगा। समाचार चैनल कुछ भी कहें, लेकिन वह ही इस पद पर बैठेगा।”

प्रशंसक ने यह भी कहा कि विजय ने इस स्तर तक पहुँचने के लिए बहुत संघर्ष किया है, जिससे उनके अनुयायियों के लिए यह स्थिति भावुक हो गई।

नेहरू स्टेडियम में प्रशंसकों की भीड़

कई प्रशंसकों ने माना कि विजय की शपथ ग्रहण समारोह 7 मई को होगी और वे चेन्नई के नेहरू स्टेडियम पहुँचे। हालाँकि, जब उन्हें पता चला कि समारोह की जानकारी पुष्टि नहीं हुई है, तो वे निराश हो गए। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों के इंतज़ार के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो गईं।

विजय की राजनीतिक महत्वाकांक्षा में रुकावट

तमिलनाडु में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं, जब विजय ने राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, विजय से 234 सदस्यीय विधानसभा में 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण मांगा गया है, जबकि पहले उन्होंने 112 विधायकों का समर्थन प्रस्तुत किया था।

फिल्मों के मोर्चे पर, विजय की आगामी फिल्म ‘जन नायक’ को एक बड़ा झटका लगा है, क्योंकि फिल्म का पूरा संस्करण ऑनलाइन लीक हो गया है। यह एक्शन ड्रामा, जिसे विजय की राजनीति में पूर्ण रूप से प्रवेश से पहले की अंतिम फिल्म माना जा रहा है, पहले कुछ क्लिप्स के माध्यम से ऑनलाइन आया और फिर पूरी फिल्म पायरेसी प्लेटफार्मों और सोशल मीडिया पर फैल गई।

असम में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की तैयारियों की समीक्षा…

0

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के असम दौरे की तैयारियों की समीक्षा की गई है। 12 मई को गुवाहाटी में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में कई प्रमुख नेता शामिल होंगे। सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आयोजन स्थल की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया गया है। भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक भी असम में विधायक दल के नेता के चुनाव की निगरानी के लिए पहुंचेंगे। जानें इस महत्वपूर्ण समारोह की सभी जानकारियाँ।

प्रधानमंत्री मोदी का असम दौरा

असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी दौरे की तैयारियों का जायजा लेने के लिए पुलिस महानिदेशक के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की। मोदी नव निर्वाचित मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए असम आ रहे हैं। यह समारोह 12 मई को गुवाहाटी के खानापारा में स्थित पशु चिकित्सा महाविद्यालय के मैदान में होगा। मुख्य सचिव ने एक बयान में बताया कि इस कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल होंगे।

सुरक्षा और प्रोटोकॉल की समीक्षा

उन्होंने कहा कि सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, आयोजन स्थल की तैयारियों, प्रोटोकॉल और अंतर-विभागीय समन्वय से संबंधित व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई। सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे उच्चतम स्तर की तैयारी सुनिश्चित करें ताकि समारोह सुचारू, सुरक्षित और इस अवसर की महत्ता के अनुरूप संपन्न हो सके।

भाजपा की बैठकें

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दिलीप सैकिया ने बताया कि पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, असम में भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव की निगरानी के लिए 9 मई को गुवाहाटी पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि 10 मई को गुवाहाटी में भाजपा विधायक दल की बैठक होगी, जिसके बाद एनडीए की बैठक होगी जिसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक भी शामिल होंगे।

मुख्यमंत्री का इस्तीफा

इससे पहले, असम के कार्यवाहक मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस्तीफा दे दिया था, जिससे पार्टी को मिले निर्णायक चुनावी जनादेश के बाद नए मंत्रिमंडल के गठन का मार्ग प्रशस्त हुआ। सरमा ने पुष्टि की कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने जेपी नड्डा और नायब सिंह सैनी को असम के अगले मुख्यमंत्री के चयन की निगरानी के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ: भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में महत्वपूर्ण मोड़…

0

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने इसे भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन न केवल एक सैन्य कार्रवाई थी, बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए एक नया अध्याय भी। घई ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह केवल शुरुआत है। जानें इस ऑपरेशन के पीछे के सिद्धांत और भारत की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के बारे में।

ऑपरेशन सिंदूर का महत्व

लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, जो पूर्व सैन्य अभियान महानिदेशक हैं, ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर इसे भारत की रणनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण क्षण बताया। यह ऑपरेशन 7 मई, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इस अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया, जिससे सैन्य कार्रवाई को नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार बढ़ाया गया।

लेफ्टिनेंट जनरल घई का बयान

जयपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को हुए एक वर्ष हो गया है। उन्होंने इसे न केवल एक सैन्य अभियान, बल्कि भारत की रणनीतिक यात्रा का एक निर्णायक क्षण माना। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन ने भारत को अपने पूर्ववर्ती दृष्टिकोणों से आगे बढ़कर आतंकवाद को निशाना बनाने का अवसर दिया।

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का अंत नहीं है, बल्कि यह केवल एक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल हंगामा खड़ा करना नहीं है, बल्कि स्थिति को बदलना है। एक साल बाद, हम न केवल इस ऑपरेशन को याद करते हैं, बल्कि इसके पीछे के सिद्धांत को भी। भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए दृढ़ता से कार्य करेगा।

सशस्त्र बलों की भूमिका

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने सरकार द्वारा निर्धारित स्पष्ट राजनीतिक और सैन्य उद्देश्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों को इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता दी गई थी। उन्होंने बताया कि आतंकवादी तंत्र को नष्ट करने और भविष्य में होने वाले आक्रमणों को रोकने का स्पष्ट लक्ष्य था, और सशस्त्र बलों को इस अभियान की योजना बनाने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान किए गए थे।