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‘BJP अगर 500-700 वोटों से आगे हो तो दोबारा गिनती की मांग करें’, ममता बनर्जी का TMC कार्यकर्ताओं को संदेश’

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ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्रों पर समय से पहले पहुंचने और एकजुट होकर काम करने को कहा. टीएमसी सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी ने मतगणना के दौरान कड़ी निगरानी पर विशेष जोर दिया.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को पार्टी के काउंटिंग एजेंटों को निर्देश दिया कि वे उन बूथों पर तत्काल दोबारा गिनती की मांग करें, जहां बीजेपी 500-700 वोटों के अंतर से आगे चल रही हो.

मुख्यमंत्री ने सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों के पार्टी नेताओं और मतगणना एजेंटों के साथ हुई एक वर्चुअल बैठक के दौरान ये निर्देश जारी किए. उन्होंने मतगणना एजेंटों को सलाह दी कि वे रविवार रात मतगणना केंद्रों के पास ही रुकें, ताकि सोमवार को वे समय पर वहां पहुंच सकें. डेढ़ घंटे चली इस बैठक के दौरान उन्होंने तालमेल और सतर्कता की आवश्यकता पर जोर दिया.

मतगणना केंद्रों पर समय से पहले पहुंचने के निर्देश

आईएएनएस के मुताबिक सीएम ने पार्टी कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्रों पर समय से पहले पहुंचने और एकजुट होकर काम करने को कहा. उन्होंने मतगणना प्रक्रिया के दौरान ध्यान रखने योग्य प्रमुख बातों के बारे में भी उन्हें जानकारी दी. टीएमसी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने मतगणना के दौरान कड़ी निगरानी पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि जिन बूथों पर बीजेपी 500-700 वोटों से लेकर 1 हजार वोटों तक के अंतर से आगे चल रही हो, वहां तत्काल वोटों की दोबारा गिनती की मांग उठाई जानी चाहिए.

200 से अधिक सीटें जीतेगी पार्टीममता

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने विश्वास जताया कि पार्टी 200 से अधिक सीटें जीतेगी, लेकिन साथ ही आगाह भी किया कि मतगणना के दौरान सतर्कता में कोई ढील नहीं बरती जानी चाहिए. उन्होंने निर्देश दिया कि 4 मई को जब तक वह मीडिया को संबोधित न कर लें, तब तक पार्टी का कोई भी एजेंट मतगणना केंद्र छोड़कर न जाए. उन्होंने सलाह दी कि जिन निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना केंद्र ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में स्थित हैं, वहां उम्मीदवार, उनके एजेंट और मतगणना एजेंट रविवार को ही उस जगह पर पहुंच जाएं.

उन्होंने एजेंटों को यह भी सलाह दी कि जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़े, वे कार्यवाही को दर्ज करने के लिए अपने साथ नोटबुक और पेन रखें. सूत्रों के अनुसार, पश्चिम मेदिनीपुर और बांकुरा के पार्टी के कई उम्मीदवारों ने रविवार रात को मतगणना केंद्रों के पास ही ठहरने की व्यवस्था पहले ही कर ली है. सूत्रों की मानें तो तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि जिन एग्जिट पोल में बीजेपी को आगे दिखाया जा रहा है, उनका मकसद शेयर बाजार को प्रभावित करना है.

क्या बोले अभिषेक बनर्जी 

उन्होंने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी इसी तरह के रुझान देखने को मिले थे. बीजेपी पर तंज कसते हुए उन्होंने दावा किया कि पार्टी को खुद भी पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की उम्मीद नहीं है. अभिषेक बनर्जी ने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी ने उन सर्वेक्षणों के माध्यम से वित्तीय हेरफेर का सहारा लिया है, जिन्हें उन्होंने गुमराह करने वाला बताया. पार्टी के प्रदर्शन का अनुमान लगाते हुए उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 2021 की तुलना में अधिक सीटें जीतने की संभावना है, जब उसने 215 सीटें हासिल की थीं.

Election Results 2026 Live: क्या बंगाल में बदल जाएगी सरकार? केरल में होगा बड़ा उलटफेर? कहां किसकी बनेगी सरकार, नतीजे कल’

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Assembly Election Result 2026 Live: बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मतदान समाप्त होने के बाद, एग्जिट पोल्स के नतीजे भी आ गए हैं. अब 4 मई को फाइनल नतीजे आएंगे

@eci.gov.in.

पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मतदान समाप्त होने के बाद, एग्जिट पोल्स के नतीजे भी आ गए हैं. अब सभी को 4 मई को आने वाले अंतिम चुनाव परिणामों (Election Results 2026) का इंतजार है जो इन राज्यों की तस्वीर साफ करेगी. क्या एग्जिट पोल के नतीजे सही साबित होंगे या फिर गलत ये चार मई को ही मालूम होगा.

पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल (West Bengal Exit Poll Result)
पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है.यहां अंतिम चरण में भारी मतदान हुआ. मतदाता सूची में संशोधन, पहचान की राजनीति और मजबूत जमीनी लामबंदी जैसे मुद्दों ने चुनाव को प्रभावित किया. एग्जिट पोल्स तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर का संकेत दे रहे हैं, और कई सर्वेक्षण त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जता रहे हैं. अनुमान की मानें तो भाजपा का राज्य में विस्तार होता दिख रहा है.

तमिलनाडु एग्जिट पोल (Tamil Nadi Exit Poll Result)

तमिलनाडु में, मुकाबला पिछले चुनावों की तुलना में कम सीधा-सादा प्रतीत हुआ. हालांकि कई एग्जिट पोल्स डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन की सत्ता में वापसी का संकेत दे रहे हैं, लेकिन अभिनेता-राजनेता विजय की तमिलगा वेट्री कज़गम के प्रवेश ने स्थापित राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है. कुछ अनुमानों से संकेत मिलता है कि तमिलगा वेट्री कज़गम इस बार सरकार भ बना सकती है. अगर ऐसा होता है तो राज्य की राजनीति पूरी तरह बदल जाएगी.

असम , केरल और पुडुचेरी एग्जिट पोल

असम एग्जिट पोल भाजपा के लिए आरामदायक बहुमत का अनुमान लगा रहे हैं. वहीं केरल में कांटे की टक्कर है, जहां एग्जिट पोल कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ को मामूली बढ़त का संकेत हैं.पुडुचेरी में स्थिति अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखती है, जहां खंडित विपक्षी वोटों और मौजूदा नेतृत्व के लिए स्थिर समर्थन के चलते एनडीए के आराम से सत्ता में बने रहने का अनुमान है.

बंगाल चुनाव के बाद की हिंसा रोकने के लिए ईसी स्थिति पर नजर रखेगा

चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा को रोकने के लिए स्थिति पर नजर रखने का निर्देश दिया है. इस संबंध में, सीईओ के दफ्तर ने गुरुवार को जिला मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधीक्षकों के साथ एक वर्चुअल मीटिंग की। मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने अधिकारियों को यह संदेश दिया. बुधवार को विधानसभा चुनावों के दूसरे और अंतिम चरण के खत्म होने के बाद, राज्य के अलग-अलग जिलों से छिटपुट राजनीतिक झड़पों की खबरें आई हैं.

West Bengal Election: बंगाल चुनाव की काउंटिंग से पहले शुभेंदु अधिकारी का बड़ा आरोप’

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West Bengal: पश्चिम बंगाल में काउंटिंग से पहले बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने अधिकारियों की तरफ से ड्यूटी से संबंधित जानकारी साझा करने खुलासा किया है.

पश्चिम बंगाल में 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से पहले सियासी माहौल और गरमा गया है. बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने काउंटिंग प्रोसेस को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्क्रीनशॉट शेयर कर दावा किया कि काउंटिंग ड्यूटी में लगे कई अधिकारी अपनी तैनाती से जुड़ी जानकारी बाहर साझा कर रहे हैं. बीजेपी नेता के मुताबिक, ये अधिकारी अपने डिपार्टमेंट के ऑर्गेनाइजेशन या एसोसिएशनों को अपनी ड्यूटी की जगह, पद और जिम्मेदारी जैसी जानकारी बता रहे हैं.

शुभेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि कुछ स्प्रेडशीट और लिस्ट सर्कुलेट हो रही हैं, जिनमें अधिकारी खुद या दबाव में आकर अपनी इलेक्शन ड्यूटी से जुड़ी जानकारी भर रहे हैं. इस जानकारी में काउंटिंग प्रोसेस में उनका रोल भी शामिल है. शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि यह चुनावी नियमों का गंभीर उल्लंघन है और इससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं. उनका मानना है कि अगर किसी अधिकारी की तैनाती की जानकारी ऐसे संगठनों तक पहुंचती है, जिनका राजनीतिक झुकाव हो सकता है, तो इससे उस पर दबाव बनाया जा सकता है या उसे प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है.

बंगाल के चुनावी नतीजों की निष्पक्षता पर पड़ेगा असर

बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष ने यह भी कहा कि काउंटिंग प्रक्रिया की निष्पक्षता काफी हद तक इस बात पर डिपेंड करती है कि ऑफिसर की तैनाती की जानकारी सीक्रेट रखी जाए. अगर यह गोपनीयता टूटती है तो नतीजों की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह से जानकारी इकट्ठा करना कुछ ऑर्गेनाइजेशन की तरफ से ऑफिसर पर दबाव बनाने की कोशिश भी हो सकती है, ताकि काउंटिंग के दौरान किसी खास पार्टी को फायदा पहुंचाया जा सके.

चुनाव आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग

इन आरोपों के साथ शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि ऑफिसरों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे अपनी काउंटिंग ड्यूटी से जुड़ी कोई भी जानकारी किसी ऑर्गेनाइजेशन  या एसोसिएशन के साथ शेयर न करें. इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि ऐसे संगठनों की जांच की जाए जो इस तरह की संवेदनशील जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं.

‘समंदर की गहराई में शान से लहराया तिरंगा, अंडमान में रचा गया इतिहास’

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समुद्र के भीतर गोताखोरों की एक बड़ी टीम तिरंगे को संभालते हुए धीरे-धीरे फैलाती है . चारों तरफ नीले पानी के बीच जब तिरंगे के तीन रंग उभरते हैं तो नजारा बेहद शानदार बन जाता है.

नीले समंदर की गहराइयों में जब तिरंगा लहराया तो वो नजारा सिर्फ एक दृश्य नहीं बल्कि पूरे देश के गर्व का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया. अंडमान और निकोबार द्वीप ने वो कर दिखाया जो आज तक दुनिया में किसी ने नहीं किया था. जहां आमतौर पर झंडा ऊंचे पहाड़ों या इमारतों पर फहराया जाता है, वहीं इस बार भारत का तिरंगा समुद्र की गहराई में लहराया गया. ये सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, साहस और जज्बे का ऐसा उदाहरण है जिसे देखकर हर भारतीय का सीना चौड़ा हो जाएगा.

समुद्र की गहराई में लहराया तिरंगा

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह ने शनिवार को इतिहास रचते हुए समुद्र के भीतर दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया . स्वराज द्वीप के राधानगर बीच पर 60×40 मीटर का विशाल तिरंगा विशेष तकनीक और शानदार समन्वय के साथ समुद्र की गहराई में स्थापित किया गया. इस मिशन को सफल बनाने के लिए प्रशिक्षित गोताखोरों की टीम और कई एजेंसियों ने मिलकर काम किया. यह पूरा ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था क्योंकि पानी के अंदर इतनी बड़ी संरचना को संभालना आसान नहीं होता.

गोताखोरों की बड़ी टीम ने निभाई मुख्य भूमिका

वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि समुद्र के भीतर गोताखोरों की एक बड़ी टीम तिरंगे को संभालते हुए धीरे-धीरे फैलाती है. चारों तरफ नीले पानी के बीच जब तिरंगे के तीन रंग उभरते हैं तो नजारा बेहद शानदार और भावुक कर देने वाला बन जाता है . ऊपर पानी की सतह पर नावें और सुरक्षा टीम मौजूद दिखाई देती हैं, जबकि नीचे गोताखोर पूरी सटीकता के साथ इस मिशन को अंजाम देते हैं . बताया जा रहा है कि इस पूरे आयोजन में खास तरह के वॉटर-रेसिस्टेंट मटेरियल और एंकरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया ताकि झंडा स्थिर रह सके.

यूजर्स ने भी जमकर की तारीफ

सोशल मीडिया पर इस ऐतिहासिक पल को देखकर लोगों का जोश सातवें आसमान पर है . यूजर्स इसे “समंदर में भारत की शान” बता रहे हैं तो कुछ लोग कह रहे हैं कि “अब तिरंगा सिर्फ जमीन और आसमान ही नहीं, पानी में भी लहरा रहा है”. कई यूजर्स ने इसे अब तक का सबसे गर्व वाला दृश्य बताया और गोताखोरों की टीम को सलाम किया. वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे बार-बार देखकर अपने दोस्तों के साथ शेयर कर रहे हैं.

आधार से जुड़ा नया AI स्कैम! डिजिटल अरेस्ट के बाद अब ठगों का सबसे खतरनाक दांव, हो गया खुलासा…

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AI Cyber Fraud: यह मामला तब सामने आया जब थलतेज इलाके के एक कारोबारी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बिना उनकी जानकारी के बदल दिया गया है.

AI Cyber Fraud: देश में साइबर ठगी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं. डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों के बाद अब एक नया और ज्यादा खतरनाक तरीका सामने आया है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधार डेटा से छेड़छाड़ का इस्तेमाल किया जा रहा है. गुजरात के अहमदाबाद में ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ जहां साइबर क्राइम पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

कैसे सामने आया पूरा मामला

यह मामला तब सामने आया जब थलतेज इलाके के एक कारोबारी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बिना उनकी जानकारी के बदल दिया गया है. यह बदलाव सामान्य नहीं था बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साइबर ठगी का खेल चल रहा था.

ऐसे दिया गया ठगी को अंजाम

जांच में पता चला कि आरोपियों ने आधार रिकॉर्ड में बदलाव करके पीड़ित का मोबाइल नंबर हटाकर अपना नंबर जोड़ लिया. इसके बाद उनके पास आने वाले OTP सीधे ठगों तक पहुंचने लगे. इसी के जरिए उन्होंने बैंकिंग ऐप्स और डिजिलॉकर जैसे संवेदनशील अकाउंट्स तक पहुंच बना ली. इतना ही नहीं, ठगों ने KYC डिटेल्स में भी बदलाव किया जिससे पूरा कंट्रोल उनके हाथ में आ गया और असली यूजर को इसकी भनक तक नहीं लगी.

AI का खतरनाक इस्तेमाल

इस केस की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ठगों ने AI टूल्स का भी सहारा लिया. उन्होंने पीड़ित की फोटो से छोटे-छोटे वीडियो क्लिप तैयार किए, जिनमें चेहरे की हल्की हरकतें दिखाई देती थीं. इन क्लिप्स का इस्तेमाल बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा देने के लिए किया गया जो आमतौर पर लाइवनेस डिटेक्शन पर आधारित होता है.

बैंक अकाउंट और लोन तक पहुंच

ठगों ने पीड़ित की जानकारी का इस्तेमाल करके तीन अलग-अलग बैंकों में e-KYC के जरिए अकाउंट खोलने की कोशिश की. इसके अलावा, उनके नाम पर जियो पेमेंट्स बैंक से 25,000 रुपये का लोन भी ले लिया गया. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आधार अपडेट किट का गलत इस्तेमाल किया. ये किट कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए इस्तेमाल की जाती हैं लेकिन इन्हें अवैध तरीके से हासिल कर आधार रिकॉर्ड में बदलाव किए जा रहे थे.

क्या करें अगर आप साइबर फ्रॉड का शिकार हों

अगर आपको किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी का शक हो तो तुरंत कार्रवाई करना बेहद जरूरी है. आप 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. साथ ही, अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएं और तुरंत बैंक से संपर्क करके अपने अकाउंट और कार्ड्स को सुरक्षित करें.

CBSE Class 12 Result 2026: क्या 10 से 15 मई के बीच आएगा CBSE 12वीं का रिजल्ट, जान लें ताजा अपडेट’

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CBSE Class 12 Result 2026: क्या CBSE 12वीं का रिजल्ट 10 से 15 मई के बीच आएगा? आइए जानते हैं लेटेस्ट अपडेट, पिछले सालों का ट्रेंड, रिजल्ट डेट की संभावनाएं क्या हैं.

CBSE Class 12 Result 2026: जहां Central Board of Secondary Education (CBSE) ने कक्षा 10 के नतीजे अप्रैल की शुरुआत में ही जारी कर दिया था, वहीं लाखों छात्र अभी भी कक्षा 12 के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं. परीक्षा खत्म होने के बाद सबसे बडा सवाल यही होता है कि रिजल्ट कब आएगा? पिछले सालों के आंकड़े बताते हैं कि यह देरी कोई नई बात नहीं है और रिजल्ट आमतौर पर CBSE के तय समय के अनुसार ही आता है. साथ ही इस बार भी अलग अलग रिपोर्ट्स में रिजल्ट डेट को लेकर चर्चा तेज है. खासकर 10 से 15 मई के बीच रिजल्ट आने की संभावना को लेकर छात्रों के बीच काफी उत्सुकता बनी हुई है.

10 से 15 मई क्यों मानी जा रही संभावित तारीख

इस साल कक्षा 12 की परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच आयोजित की गई थीं. परीक्षा खत्म होने के बाद कॉपियों की जांच का काम अलग-अलग चरणों में शुरू किया गया. इसके लिए CBSE के डिजिटल मार्किंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कॉपियां जल्दी जांची जा सकें और सभी विषयों में एक जैसा मूल्यांकन हो सके. रिपोर्ट्स के अनुसार CBSE 12वीं का रिजल्ट 10 से 15 मई 2026 के बीच जारी हो सकता है. यह अनुमान पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखकर लगाया जा रहा है, क्योंकि बोर्ड अक्सर इसी समय के आसपास रिजल्ट जारी करता रहा है. साल 2024 और 2025 में रिजल्ट 13 मई को घोषित हुआ था, जबकि 2023 में यह 12 मई को आया था. इससे यह समझ आता है कि हर साल मई के बीच यानी 10 से 15 मई के बीच रिजल्ट आने का एक तय पैटर्न बन गया है. हालांकि अभी तक CBSE की ओर से कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है, लेकिन यह समय सबसे ज्यादा संभावित माना जा रहा है.

तीसरे हफ्ते की भी जताई जा रही संभावना

कुछ आधिकारिक अपडेट्स में यह भी बताया गया है कि रिजल्ट मई के तीसरे हफ्ते में भी जारी किया जा सकता है. CBSE के अधिकारियों के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है और रिजल्ट की तैयारी चल रही है. ऐसे में यह साफ है कि रिजल्ट मई के मध्य या तीसरे सप्ताह तक जारी होने की पूरी संभावना है.

रिजल्ट कहां और कैसे देख सकेंगे छात्र

रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र इसे CBSE की आधिकारिक वेबसाइट results.cbse.nic.in पर जाकर देख सकेंगे. इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी डालनी होगी. इसके अलावा DigiLocker और UMANG ऐप के जरिए भी छात्र अपनी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड कर सकेंगे. यह डिजिटल मार्कशीट अस्थायी होती है, जबकि ओरिजिनल मार्कशीट बाद में स्कूल से मिलती है.

Emergency Alert: सरकार ने पूरे देश में एक साथ भेजा अलर्ट मैसेज, क्या ऐसे आपके फोन में कुछ भी हो सकता है बदलाव?

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Emergency Alert: 2 मई को एक साथ कई लोगों के फोन पर इमरजेंसी अलर्ट आया था. इससे लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि क्या ऐसे दूर बैठे-बैठे फोन में और कोई बदलाव भी किए जा सकते हैं?

Emergency Alert: 2 मई की सुबह लगभग 11.40 बजे सरकार की तरफ से मोबाइल पर एक इमरजेंसी अलर्ट भेजा गया था. यह सरकार के एक नए सिस्टम का ट्रायल था. यह अलर्ट सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम को परखने के लिए भेजा गया था. किसी प्राकृतिक आपदा के समय लोगों को अलर्ट करने के लिए यह सिस्टम बनाया गया है. अगर कोई फोन साइलेंट है तो भी यह अलर्ट आने पर उसमें साउंड आएगी और यह फोन की स्क्रीन पर पॉप-अप होगा. ऐसे में कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी आ सकता है कि क्या अलर्ट भेजने की तरह दूर बैठकर फोन में कुछ भी बदलाव किया जा सकता है? आज हम इस सवाल का जवाब जानेंगे.

कैसे भेजे गया था इमरजेंसी अलर्ट?

2 मई को सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी की मदद से लोगों को अलर्ट किया गया था. यह सिस्टम किसी इलाके में एक साथ कई लोगों को एक साथ अलर्ट मैसेज भेजने के काम आती है. इस पर नेटवर्क कंजेशन का कोई असर नहीं होता और अलर्ट भेजते ही लोगों के मोबाइल पर पहुंच जाता है. इसे 1990 के दशक में यूरोपीय टेलीकम्युनिकेशन स्टैंडर्ड इंस्टीट्यूट ने डेवलप किया था और आज 30 से अधिक देशों में इसे यूज किया जा रहा है.

यह टेक्नोलॉजी काम कैसे करती है?

किसी इलाके में लगे मोबाइल टावर अपनी रीच में आने वाले फोन के साथ कम्युनिकेट करते रहते हैं और नेटवर्क भी प्रोवाइड करते हैं. जिस टेक्नोलॉजी के कारण टावर से मोबाइल के बीच इस कम्युनिकेशन होता है, उसे सेल ब्रॉडकास्ट कहा जाता है. इस टेक्नोलॉजी का यूज कर सरकार इमरजेंसी अलर्ट इश्यू कर सकती है. यह वन-वे कम्युनिकेशन होता है, जो एक टावर से कनेक्टेड सभी मोबाइल पर एक साथ मैसेज भेज सकता है. इसके लिए न तो इंटरनेट की जरूरत है और न ही सरकार के पास किसी मोबाइल यूजर का नंबर होना जरूरी है.

क्या इससे फोन में और बदलाव हो सकते हैं?

इस सवाल का जवाब है नहीं. यह टेक्नोलॉजी read-only communication channel को सपोर्ट करती है और इसके जरिए फोन की ऐप्स, फाइल्स और सेटिंग्स को एक्सेस नहीं किया जा सकता.

फिर फोन में रिमोटली चेंज कैसे किया जा सकता है?

अगर आप सोच रहे हैं कि आपको फोन में रिमोटली चेंजेज नहीं किए जा सकते तो भी आप गलत हैं. स्पाईवेयर की मदद से कोई भी दूर बैठकर आपके फोन को ऑपरेट कर सकता है. स्पाईवेयर इंस्टॉल होने के बाद आपके यूज न करने पर भी फोन लगातार यूज किया जा सकता है. इसकी मदद से फोन की हर फाइल, कैमरा और माइक्रोफोन तक को एक्सेस किया जा सकता है.

‘निशांत कुमार ने पटना से शुरू की ‘सद्भाव यात्रा’, पिता नीतीश कुमार से लिया आशीर्वाद’

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Nishant Kumar Sadbhav Yatra: निशांत कुमार की यात्रा जदयू प्रदेश कार्यालय पटना से शुरू हो चुकी है. उनकी यह यात्रा पश्चिम चंपारण से शुरू हो गई है. इस दौरान वह रथ से निकले हैं.

पश्चिम चंपारण की पावन धरा से प्रारंभ होने वाली ‘सद्भाव यात्रा’ के पहले दिन रविवार (3 मई) को निशांत कुमार ने पटना में पिता नीतीश कुमार से आशीर्वाद प्राप्त किया. पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे और जेडीयू नेता निशांत कुमार आज से बिहार यात्रा पर निकल रहे हैं.

निशांत कुमार की यात्रा जदयू प्रदेश कार्यालय पटना से शुरू हो चुकी है. उनकी यह यात्रा पश्चिम चंपारण से शुरू होगी. इस दौरान वह रथ से निकले हैं. जिस रथ से निशांत कुमार निकले हैं उसका नाम निश्चय रथ रखा गया है. निशांत कुमार के साथ उनके रथ पर प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार मौजूद हैं.

निशांत के लिए बड़ी चुनौती

निशांत के लिए यात्रा बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि बिना किसी पद के वह यात्रा पर निकल पड़े हैं. उनकी यात्रा पर विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने कहा कि निशांत जो पद चाहते वह उनको मिलता, लेकिन उन्होंने पद को ठुकराया और जनता के बीच जाने का निर्णय लिया.

श्रवण कुमार ने कहा कि निशांत कुमार बिहार में नीतीश कुमार के काम को लोगों को बताएंगे और पहुंचाएंगे. उन्होंने कहा कि युवाओं और महिलाओं से निशांत खुद को कनेक्ट जोड़ने की कोशिश करेंगे. निशांत हमारे नेता हैं और अब उनकी यह यात्रा संगठन पार्टी को मजबूत करेगी.

यात्रा को लेकर क्या बोले निशांत कुमार?

जेडीयू नेता निशांत कुमार ने यात्रा को लेकर कहा कि इसका उद्देश्य अमीर हो या गरीब, दलित हो या गैर-दलित सभी को साथ लेकर चलना है. उन्होंने कहा कि सभी के बीच भाईचारे की भावना होनी चाहिए. महात्मा गांधी ने भी सत्याग्रह आंदोलन चंपारण से शुरू किया था और मेरे पिता ने भी वहीं से शुरुआत की थी. इसलिए मैं भी उसी राह पर चल रहा हूं.

इस यात्रा का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना है. उन्होंने आगे कहा कि यह मेरी पहली राजनीतिक यात्रा है. निशांत ने कहा कि अपने कार्यकर्ता भाइयों से मिलना, उनके विचार सुनना और उनसे बातचीत करना है. मैं लोगों से मिलने और उनकी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास करूंगा.

किस देश का पासपोर्ट दुनिया में नंबर-1, भारत और पाकिस्तान किस पायदान पर? सामने आई 2026 की पासपोर्ट रैंकिंग, देखें लिस्ट

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Passport Ranking 2026: 2026 की पासपोर्ट रैंकिंग में सिंगापुर दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट बनकर उभरा है, जहां के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं.

Passport Ranking 2026: आपका पासपोर्ट यह तय करता है कि आप दुनिया के कितने देशों में आसानी से जा सकते हैं. साल 2026 में सबसे ताकतवर और सबसे कमजोर पासपोर्ट के बीच करीब 170 देशों का फर्क है. यह आंकड़े Henley Passport Index के आधार पर तैयार किए गए हैं, जिसमें यह देखा जाता है कि किसी देश के नागरिक बिना वीजा कितनी जगहों पर जा सकते हैं.

सिंगापुर सबसे आगे, 192 देशों में बिना वीजा एंट्री

सिंगापुर इस लिस्ट में पहले स्थान पर है, जहां के नागरिक 192 देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं. यह आंकड़ा सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के मुकाबले लगभग पांच गुना ज्यादा है. वहीं सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के नागरिक 50 से भी कम देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं. यह अंतर दिखाता है कि भूगोल, कूटनीति और राजनीतिक स्थिरता वैश्विक यात्रा पर कितना असर डालती है.

एशिया और यूरोप के पासपोर्ट सबसे मजबूत

सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त अरब अमीरात हैं, जहां के नागरिक 187 देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं. संयुक्त अरब अमीरात पूर्वी एशिया के बाहर सबसे मजबूत पासपोर्ट रखता है, लेकिन एक कमी यह है कि यहां के नागरिकों को संयुक्त राज्य अमेरिका में वीजा-फ्री एंट्री नहीं मिलती, जबकि सिंगापुर, जापान और दक्षिण कोरिया को यह सुविधा है. इसके बाद यूरोप के देश इस सूची में आगे हैं, खासकर नॉर्वे और स्विट्जरलैंड, जिनके नागरिक 185 देशों में बिना वीजा के जा सकते हैं.

यूरोपीय संघ के 27 देशों का एक साझा पासपोर्ट सिस्टम है, लेकिन हर देश की वीजा-फ्री पहुंच अलग-अलग है. बुल्गारिया और रोमानिया के नागरिक 177 देशों में जा सकते हैं, जबकि स्वीडन के नागरिक 186 देशों में. औसतन यूरोपीय संघ की ताकत 183 देशों की है, जो मलेशिया और यूनाइटेड किंगडम के बराबर है. यह कनाडा (182) और संयुक्त राज्य अमेरिका (179) से भी थोड़ा आगे है.

सबसे कमजोर पासपोर्ट: 50 से कम देशों में एंट्री

रैंकिंग के निचले हिस्से में पासपोर्ट की ताकत काफी कम हो जाती है. सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के नागरिक 50 से भी कम देशों में जा सकते हैं. इन देशों में अक्सर राजनीतिक अस्थिरता, ज्यादा पलायन या हाल के संघर्ष देखने को मिलते हैं, जिससे वीजा नियम सख्त हो जाते हैं. अफ्रीकी देशों जैसे नाइजीरिया (44), सोमालिया (32) और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (43) इस सूची में नीचे हैं. इन देशों की तेजी से बढ़ती आबादी और बड़े प्रवासी समुदाय भी वीजा प्रतिबंधों का कारण बने हैं.

पाकिस्तान का पासपोर्ट दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट में गिना जाता है. यह 98वें स्थान पर है और यह रैंक यमन के साथ साझा करता है. आसान भाषा में समझें तो पाकिस्तानी पासपोर्ट रखने वाले लोग सिर्फ करीब 31 से 35 देशों में ही बिना वीजा या पहुंचने पर वीजा लेकर यात्रा कर सकते हैं, यानी उनके लिए दूसरे देशों में जाना काफी सीमित है.

पासपोर्ट की ताकत दिखाती है वैश्विक असमानता

पासपोर्ट रैंकिंग सिर्फ यात्रा की सुविधा नहीं, बल्कि वैश्विक असमानता को भी दिखाती है. आप किस देश में पैदा हुए हैं, इससे यह तय होता है कि आप दुनिया के किन हिस्सों में जा सकते हैं. अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के पासपोर्ट आमतौर पर यूरोप और पश्चिमी देशों के मुकाबले कमजोर हैं. हालांकि मलेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कुछ अपवाद हैं, लेकिन इन्हें भी अमेरिका जैसे बड़े देशों में वीजा-फ्री एंट्री नहीं मिलती.

टॉप 20 सबसे ताकतवर पासपोर्ट (2026)

रैंक देश वीजा-फ्री गंतव्य
1 सिंगापुर 192
2 जापान 187
2 दक्षिण कोरिया 187
2 संयुक्त अरब अमीरात 187
5 नॉर्वे 185
5 स्विट्जरलैंड 185
7 यूरोपीय संघ (औसत) 183
7 मलेशिया 183
7 यूनाइटेड किंगडम 183
10 ऑस्ट्रेलिया 182
10 कनाडा 182
10 न्यूजीलैंड 182
13 लिकटेंस्टीन 180
14 आइसलैंड 179
14 संयुक्त राज्य अमेरिका 179
16 मोनाको 176
17 चिली 174
17 हांगकांग 174
19 एंडोरा 169
20 अर्जेंटीना 168
20 ब्राज़ील 168

भारतीय पासपोर्ट की स्थिति

भारत का पासपोर्ट इस साल 80वें स्थान पर है. भारतीय नागरिक 55 से 58 देशों में वीजा-मुक्त या वीजा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं.

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Delhi Vivek Vihar fire Live: इसमें 9 झुलसे हुए शव अलग-अलग जगहों से बरामद किए गए. 1 शव को पहली मंजिल, 5 शवों को दूसरी मंजिल, और 3 शवों को सीढ़ियों की मुमटी जो बंद पाई गई थी वहां से बरामद किया गया है.

पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में एक इमारत के अंदर आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई है. घटना के बाद मौके पर राहत-बचाव का काम जारी है. शाहदरा के विवेक विहार स्थित एक चार मंजिला इमारत में आग लग गई. आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की ओर से काबू पाने के प्रयास जारी हैं. फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल पर मौजूद हैं.

आग बिल्डिंग के छह फ्लैट्स के अंदर घरेलू सामान में लग गई थी. इसमें 9 झुलसे हुए शव अलग-अलग जगहों से बरामद कर लिए गए हैं. 1 शव को पहली मंजिल, 5 शवों को दूसरी मंजिल, और 3 शवों को सीढ़ियों की मुमटी जो बंद पाई गई थी वहां से बरामद किया गया है. दिल्ली पुलिस द्वारा सभी शवों को क्राइम टीम को सौंप दिया गया है. फिलहाल घटनास्थल पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है.

यह आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते कई फ्लोर इसकी चपेट में आ गए. जानकारी के मुताबिक, यह आग विवेक विहार फेज-1 के एक बहुमंजिला मकान में लगी थी. फायर कंट्रोल रूम को इस हादसे की सूचना तड़के 3:48 बजे मिली थी, जिसके बाद तुरंत पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके के लिए रवाना हो गईं. मौके पर पहुंचने पर पता चला कि बिल्डिंग के दूसरे, तीसरे और चौथे फ्लोर पर आग लगी हुई थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दमकल की करीब 12 से 14 गाड़ियां मौके पर लगाई गईं.

राहत-बचाव दलों ने शुरू किया प्रयास

फायर ब्रिगेड, पुलिस, क्राइम टीम, ट्रैफिक पुलिस और डीडीएमए की टीम ने मिलकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया. करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 6:25 बजे आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन इसके बाद भी सर्च ऑपरेशन जारी रहा, खासकर ऊपरी मंजिलों पर, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अंदर फंसा न रह जाए.

शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि सुबह करीब 4 बजे आग लगने की कॉल मिली थी और तुरंत टीम मौके पर पहुंच गई थी. उन्होंने कहा कि आग पर काबू पाने में करीब दो घंटे लगे, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. बचाव कार्य के दौरान करीब 10 से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. इनमें से दो लोगों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेजा गया.

घायलों को अस्पताल में कराया भर्ती

वहीं, कुछ अन्य घायलों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस आग में कुल नौ लोगों की जान चली गई. यह संख्या और बढ़ भी सकती है, क्योंकि अभी सर्च ऑपरेशन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग इतनी भयानक थी कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला. कई लोग अपनी जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागे, जबकि कुछ लोग अंदर ही फंस गए थे.फिलहाल आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियां हर एंगल से मामले की जांच कर रही हैं.