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अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली में युवाओं के लिए रोजगार और घुसपैठियों से मुक्ति का किया वादा’

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पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली का संबोधन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर की बात की, जिसमें उन्होंने राज्य को घुसपैठियों से मुक्त कराने का संकल्प लिया।

इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यदि बीजेपी सत्ता में आती है, तो हर साल एक पारदर्शी और योग्यता-आधारित प्रणाली के माध्यम से युवाओं के लिए एक लाख नौकरियाँ उपलब्ध कराई जाएँगी। आसनसोल और बराकर के औद्योगिक क्षेत्रों के निकट कुल्टी में अपनी दूसरी रैली में, उन्होंने इस क्षेत्र की लौह अयस्क उत्पादन की समृद्ध विरासत को उजागर किया और इसकी खोई हुई औद्योगिक ताकत को पुनर्जीवित करने का वादा किया।

औद्योगिक विकास और रोजगार के अवसर

शाह ने कहा कि यह शहर, जो कभी लौह उद्योग का एक प्रमुख केंद्र था, वर्तमान प्रशासन के कारण अव्यवस्था का शिकार हो गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार इस गिरावट को रोकने और स्थिति को सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, प्रदूषण फैलाने वाली स्पंज आयरन इकाइयों को बंद करने और स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित करने का वादा किया। उन्होंने सत्ताधारी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वे “योग्य उम्मीदवारों की नौकरियाँ छीनकर उन्हें अयोग्य लोगों को बेच रहे हैं”। शाह ने आगे कहा कि बीजेपी का लक्ष्य हर साल युवाओं को रोजगार के निष्पक्ष और समान अवसर प्रदान करना है।

घुसपैठियों से मुक्त बंगाल की मांग

केंद्रीय गृह मंत्री ने दोहराया कि बीजेपी सरकार राज्य को अवैध विदेशी नागरिकों से मुक्त कर देगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद, हम बंगाल में अवैध रूप से बसे हर विदेशी नागरिक की पहचान करेंगे और उन्हें देश से बाहर निकाल देंगे। ममता बनर्जी प्रशासन पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि यह सरकार सिंडिकेट, गुंडा तत्वों और माफियाओं को बढ़ावा दे रही है, और सत्ता में आने पर इन नेटवर्क को समाप्त करने का वादा किया।

राज्य सरकार पर तीखा हमला

शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए कहा कि वह अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को अधिक महत्व दे रही हैं। उन्होंने दावा किया कि अपने भतीजे को मुख्यमंत्री बनाने का उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा। इसके अलावा, उन्होंने उनकी सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया और कुछ घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यह नहीं कहा जाना चाहिए कि वे शाम 7 बजे के बाद घर के अंदर रहें। शाह ने भरोसा दिलाया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सभी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, चाहे वे आधी रात के बाद भी सड़कों पर हों।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केजरीवाल की याचिका को किया खारिज, न्यायपालिका की स्वतंत्रता को मजबूती दी’

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केजरीवाल की याचिका पर न्यायालय का निर्णय

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा से अनुरोध किया था कि वे दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लें।

हालांकि, न्यायमूर्ति शर्मा ने उनकी याचिका को दृढ़ता से अस्वीकार कर दिया। इस निर्णय ने न केवल न्यायपालिका की गरिमा को बनाए रखा, बल्कि आरोपों की राजनीति पर भी एक स्पष्ट प्रहार किया। केजरीवाल, जो अक्सर नेताओं और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाते हैं, अब अदालत को भी कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें इस बार एक सख्त जवाब मिला है। न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी दबाव या धारणा के आधार पर नहीं चलती। उनके स्पष्ट और ठोस उत्तरों ने केजरीवाल की दलीलों को कमजोर कर दिया और उन्हें पूरी तरह से निरुत्तर कर दिया। यह निर्णय एक मजबूत संदेश देता है कि न्यायपालिका पर उंगली उठाना आसान नहीं है और यहां केवल कानून का ही पालन होगा।

केजरीवाल के आरोपों पर न्यायालय की प्रतिक्रिया

अब यह सवाल उठता है कि केजरीवाल भारतीय न्यायपालिका पर सवाल क्यों उठा रहे थे। क्या यह केवल एक कानूनी रणनीति थी या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश थी? एक व्यक्ति जो खुद गंभीर आरोपों और जांचों के घेरे में है, यदि वह अदालत की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगे, तो यह न केवल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जाएगा, बल्कि आम जनता में भ्रम फैलाने का भी प्रयास होगा। इससे यह संदेश जाता है कि जब तथ्यों और कानून के आधार कमजोर होते हैं, तो संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर माहौल बदला जाता है। लेकिन न्यायालय के सख्त रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे प्रयासों की कोई जगह नहीं है और कानून से ऊपर कोई नहीं है।

न्यायमूर्ति शर्मा का विस्तृत आदेश

न्यायमूर्ति शर्मा ने लगभग एक घंटे तक अपना विस्तृत आदेश पढ़ते हुए उन सभी आरोपों का क्रमवार उत्तर दिया, जो केजरीवाल ने उठाए थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी झूठ को यदि हजार बार भी दोहराया जाए, तो वह सत्य नहीं बनता। उन्होंने न्यायिक निष्पक्षता पर उठाए गए सवालों को सिरे से खारिज किया।

न्यायाधीश की निष्पक्षता पर टिप्पणी

न्यायमूर्ति शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि एक न्यायाधीश की निष्पक्षता का एक स्वाभाविक अनुमान होता है और इसे केवल ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही चुनौती दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि केजरीवाल द्वारा व्यक्त की गई शंकाएं केवल व्यक्तिगत आशंकाएं हैं, जो किसी भी कानूनी कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं।

आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में भागीदारी

केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि न्यायमूर्ति शर्मा ने आरएसएस से जुड़ी अधिवक्ता परिषद के कुछ कार्यक्रमों में भाग लिया, जिससे पक्षपात की आशंका बनती है। इस पर न्यायमूर्ति ने कहा कि न्यायाधीशों का विभिन्न वैचारिक संगठनों के कार्यक्रमों में भाग लेना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

परिवार के सदस्यों के सरकारी पैनल में होने का आरोप

एक अन्य आरोप में केजरीवाल ने कहा कि न्यायमूर्ति शर्मा के परिवार के कुछ सदस्य सरकारी पैनल में हैं, जिससे हितों का टकराव हो सकता है। इस पर न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रत्यक्ष संबंध या प्रभाव नहीं दिखाया गया है, जिससे उनके निर्णय प्रभावित हो सकते हों।

राजनीतिक माहौल में गर्माहट

इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी की सांसद बांसुरी स्वराज ने केजरीवाल पर न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश की न्यायिक व्यवस्था किसी व्यक्ति की सुविधा के अनुसार नहीं चलती, बल्कि संविधान और कानून के अनुसार संचालित होती है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रतीक

यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संस्थागत मजबूती का प्रतीक बन गया है। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा का यह निर्णय स्पष्ट करता है कि न्यायालय किसी भी प्रकार के दबाव, आरोप या धारणा के आधार पर अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा।

महंगी शराब के दीवाने हुए भारतीय, डिमांड में रिकॉर्ड उछाल, मंदी में भी ‘हाई’ है जोश’

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भारत में प्रीमियम शराब की मांग में ज़ोरदार बढ़ोतरी देखी जा रही है, जबकि दुनिया भर में कंज्यूमर सस्ती शराब की ओर मुड़ रहे हैं. आईडब्ल्यूएसआर के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में प्रीमियम और सुपर-प्रीमियम शराब सेगमेंट में वॉल्यूम के हिसाब से करीब 9 फीसदी और वैल्यू के हिसाब से 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो दुनिया भर में आई गिरावट के बिल्कुल विपरीत है.

लंदन में स्थित इस इंडस्ट्री ट्रैकर ने 22 बड़े बाजारों का सर्वे किया, जिनमें दुनिया भर की शराब की खपत का करीब तीन-चौथाई हिस्सा शामिल है. इन बाजारों में पिछले साल शराब की कुल सेल का वॉल्यूम 2 फीसदी गिरा और वैल्यू में 4 फीसदी की कमी आई. साल 2020 के बाद यह पहली बार गिरावट दर्ज की गई है.

कंपनियां बदल रही रणनीति

आईडब्ल्यूएसआर के मैनेजिंग डायरेक्टर मार्टेन लोडेविजक्स ने कहा कि​ शराब बनाने वाली बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां, जिनकी पिछली स्ट्रैटिजी मुख्य रूप से लगातार प्रीमियम बनाने पर केंद्रित थीं, अब अपनी रणनीति बदल रही हैं. हाल के रीफॉर्मेशन और लीडरशिप में बदलाव से पता चलता है कि अब उनका ज्यादा ध्यान वॉल्यूम, प्रासंगिकता और अलग-अलग कीमतों वाली कैटेगरीज में संतुलित पोर्टफोलियो पर है, न कि सिर्फ मुनाफा बढ़ाने पर. जहां एक तरफ दुनिया भर में शराब का कारोबार कंज्यूमर्स के कम होते भरोसे और प्रीमियम शराब की घटती मांग से प्रभावित हुआ, वहीं भारत में कीमतें बढ़ने और कंज्यूमर्स के ज्यादा सतर्क होने के बावजूद वॉल्यूम में 4 फीसदी और वैल्यू में 5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

भारत में 410 मिलियन से ज्यादा केस की खपत

Suntory Global Spirits India के मैनेजिंग डायरेक्टर नीरज कुमार ने कहा कि प्रीमियम बनाने का चलन देश में शराब की कैटेगिरी को लगातार आगे बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत ने प्रीमियम बनाने के मामले में एक ‘उज्ज्वल स्थान’ के तौर पर अपनी रेलेवेंसी और दुनिया भर में अपनी अहम भूमिका को साबित किया है. हम इस बदलाव को साफ तौर पर देख रहे हैं-समझदार कंज्यूमर अब ज्यादा से ज्यादा प्रतिष्ठित व्हिस्की और प्रीमियम ‘व्हाइट स्पिरिट्स’ को चुन रहे हैं, जिससे वॉल्यूम के बजाय वैल्यू को ज्यादा बढ़ावा मिल रहा है.

वॉल्यूम के हिसाब से भारत शराब पीने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश है, जहां 410 मिलियन से ज्यादा केस की खपत होती है. हालांकि, इंपोर्टेड शराब पर ज्यादा टैक्स होने की वजह से लग्जरी और महंगी शराब में इसकी हिस्सेदारी 5 फीसदी से भी कम है. जहां देश में शराब पीने वाले करीब आधे कंज्यूमर सिर्फ सस्ती और बिना ब्रांड वाली शराब ही खरीद सकते हैं, वहीं तेजी से बढ़ता मिडिल क्लास-जो प्रीमियम और उससे ऊपर की कैटेगिरी की शराब खरीदने की क्षमता रखता है-की संख्या करीब 150 मिलियन होने का अनुमान है.

पिछले हफ्ते Pernod Ricard ने बताया कि मार्च तिमाही में भारत में उसके कारोबार में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. भारत Pernod Ricard के लिए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है. कंपनी की चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर हेलेन डी टिसोट ने निवेशकों को बताया कि भारतीय बाजार में कंज्यूमर्स से जुड़े फंडामेंटल फैक्टर लगातार मजबूत बने हुए हैं. इसके अलावा, शराब की मजबूत डिमांड और प्रीमियम बनाने के लगातार जारी चलन से हमारी बिक्री को भी काफी फायदा मिल रहा है.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट

भारत में हर साल 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के कानूनी तौर पर शराब पीने की उम्र में आने की उम्मीद है, इसलिए ज्यादातर ग्लोबल कंपनियां इस देश को अपने टॉप तीन प्रायोरिटी मार्केट में से एक मानती हैं. Diageo और Pernod Ricard, जो दुनिया की दो सबसे बड़ी स्पिरिट कंपनियां हैं, उनके लिए भारत वॉल्यूम के मामले में सबसे बड़ा मार्केट है. वे ज्यादा वॉल्यूम के पीछे भागने के बजाय, ज्यादा मार्जिन कमाने की अपनी रणनीति के तहत प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस करने की कोशिश कर रही हैं. Lodewijks ने कहा कि 2025 का उतार-चढ़ाव भरा साल ड्रिंक्स इंडस्ट्री को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर गया है. “टैरिफ में रुकावट और सतर्क कस्टमर्स की वजह से प्रीमियम प्रोडक्ट्स की रणनीतियों पर दबाव पड़ा, जबकि उभरते हुए मार्केट एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आए.

‘इलेक्ट्रिक रिक्शा’ मार्केट में उतरेगी Hyundai, इस भारतीय कंपनी से हुई बड़ी डील’

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भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की डिमांड तेजी से बढ़ रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए हुंडई मोटर कंपनी और TVS मोटर कंपनी ने एक बड़ा कदम उठाया है. दोनों कंपनियों ने मिलकर भारतीय बाजार के लिए एक नया इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (E3W)+ E4Wबनाने का फैसला किया है.

इसके लिए दोनों के बीच एक जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट साइन हुआ है.

इस साझेदारी की शुरुआत तब हुई जब दोनों कंपनियों ने भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्स्पो 2025 में अपने इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर का प्रोटोटाइप पेश किया था. इस प्रोटोटाइप में कई एडवांस फीचर्स देखने को मिले थे, जिससे साफ हो गया था कि यह वाहन खास तौर पर भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है.

कौन कंपनी क्या काम करेगी?

इस प्रोजेक्ट में हुंडई डिजाइन की जिम्मेदारी संभालेगी, यानी वाहन का लुक, स्टाइल और ओवरऑल डिजाइन हुंडई तैयार करेगी. वहीं TVS अपने इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म और थ्री-व्हीलर के अनुभव के आधार पर इस गाड़ी के डेवलपमेंट में मदद करेगी. इसके अलावा, TVS ही इस इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर का मैन्युफैक्चरिंग और भारत में सेल्स भी संभालेगी. भविष्य में इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल एक्सपोर्ट के लिए भी किया जा सकता है.

भारत के हिसाब से तैयार होगा E3W

कंपनियों का कहना है कि यह इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर खास तौर पर भारतीय सड़कों और मौसम के अनुसार डिजाइन किया जाएगा. इसमें खराब सड़कों के लिए एडजस्टेबल ग्राउंड क्लियरेंस, ज्यादा गर्मी में बेहतर परफॉर्मेंस के लिए एडवांस थर्मल मैनेजमेंट साथ ही पैसेंजर और कार्गो दोनों के लिए अलग-अलग इंटीरियर ऑप्शन शामिल होंगे.

मेक इन इंडिया पर जोर

दोनों कंपनियां इस प्रोजेक्ट में ज्यादा से ज्यादा पार्ट्स भारत में ही बनाएंगी और सोर्स करेंगी. इससे लागत कम होगी, सप्लाई चेन बेहतर बनेगी और आफ्टर-सेल्स सर्विस भी आसान होगी. हुंडई के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जूंगसुन को के अनुसार, यह साझेदारी भारत के ट्रांसपोर्ट सिस्टम में कंपनी की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. वहीं TVS के शरद मिश्रा ने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारत के साथ-साथ अन्य उभरते बाजारों के लिए भी उपयोगी साबित होगा. इस साझेदारी से तैयार होने वाला पहला इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर भारत में ही लॉन्च किया जाएगा. इससे देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

महिला आरक्षण पर बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन, CM योगी बोले- कांग्रेस और सपा का चेहरा अलोकतांत्रिक’

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महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी ने मंगलवार को लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन किया. सीएम आवास से विधानसभा तक पैदल मार्च और महिला जन आक्रोश रैली निकाली गई. इस यात्रा में सीएम योगी के साथ-साथ दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी शामिल थे.

इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा भी शामिल थे.

पदयात्रा में राज्य सरकार में मंत्री और भाजपा के सहयोगी दलों के नेता आशीष पटेल और ओमप्रकाश राजभर समेत कई नेता शामिल हुए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पदयात्रा शुरू करते हुए भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे दिए. आक्रोश मार्च में शामिल लोग सपा-कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे. रैली मार्ग पर कई पोस्टर लगाए गए थे.

सीएम योगी ने कहा कि यह जनाक्रोश पदयात्रा कांग्रेस और सपा के महिला-विरोधी रवैये के खिलाफ रोष का प्रतीक है. यह आक्रोश कांग्रेस और सपा समेत विपक्षी दलों के महिला विरोधी आचरण के खिलाफ देश भर में है. उन्होंने कहा कि खासतौर से आधी आबादी के मन में यह आक्रोश है और लखनऊ में हजारों की संख्या में बहनें इसमें शामिल हुई हैं. बीजेपी की महिला पदाधिकारियों ने भी इसमें हिस्सा लिया.

कांग्रेस हो या सपा, इनका चेहरा अलोकतांत्रिक- CM योगी

यात्रा के सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस हो या सपा, इनका चेहरा अलोकतांत्रिक है, महिला विरोधी है, मोदी जी ने इन्हें अपनी महिला विरोधी छवि को समाप्त करने का जो विकल्प दिया, उसका भी इन लोगों ने दुरुपयोग किया है. देश भर में इंडिया गठबंधन के महिला विरोधी आाचरण के विरोध में सड़कों पर महिलाओं का आंदोलन हो रहा है.

योगी ने कहा कि इतनी भीषण गर्मी के बावजूद इतनी बड़ी भीड़ प्रधानमंत्री मोदी जी की नीतियों के प्रति समर्थन का प्रतीक है. यह मार्च कांग्रेस, सपा, TMC और DMK के महिला-विरोधी रवैये का प्रतीक है. रैली को देखते हुए 11 रूट पर यातायात डायवर्ट किया गया था. इस दौरान पुलिस की मुस्तैदी थी. भीषण गर्मी के बीच रैली मार्ग पर मेडिकल कैंप और जगह जगह एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई थी.

भारत के लिए कितना जरूरी है विदेशी निवेश, इस दिग्गज रेटिंग एजेंसी ने कही बड़ी बात’

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क्या भारत के वित्तीय संस्थानों की तरक्की में विदेशी निवेश का अहम योगदान है. अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं तो आप बिल्कुल सही सोच रहे हैं, दरअसल दिग्गज रेटिंग एजेंसी फिच ने माना है कि भारत के वित्तीय संस्थानों की ग्रोथ में विदेशी शेयरधारकों की अहम भूमिका है.

फिच का कहना है कि विदेशी शेयरधारकों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी भारतीय वित्तीय संस्थानों के लोन सेगमेंट के लिए सकारात्मक हो सकती है क्योंकि इससे लांग टर्म पूंजी मिलती है और कुछ मामलों में कामकाज के मानकों में सुधार होता है.

रेटिंग एजेंसी ने बयान में कहा कि हालांकि, केवल विदेशी रुचि को मजबूत लोन सेगमेंट का विश्वसनीय संकेत नहीं माना जा सकता. वे लेनदेन जो आंतरिक नियंत्रण, जोखिम प्रबंधन एवं नेतृत्व की जवाबदेही को मजबूत करते हैं, केवल वित्तीय लाभ के लिए किए गए सौदों की तुलना में अधिक लोन-संबंधी महत्व रखते हैं.

भारत की ग्रोथ पर है विदेश निवेशकों को भरोसा

फिच ने कहा कि हाल के समय में विदेशी निवेशकों की बढ़ती रुचि भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं, वित्तीय क्षेत्र के नियमन एवं निगरानी तथा बेहतर जोखिम प्रबंधन ढांचे पर उनके बढ़ते भरोसे को दर्शाती है. रेटिंग एजेंसी का मानना है कि निवेशक ऐसे मंच की तलाश करेंगे जिनमें विस्तार योग्य वितरण क्षमता और स्थानीय विशेषज्ञता हो. इसमें कहा कि विकसित बाजारों का अनुभव रखने वाले अधिग्रहणकर्ता जोखिम नियंत्रण और निगरानी में सुधार ला सकते हैं. साथ ही प्रतिष्ठित रणनीतिक शेयरधारकों की मौजूदगी पूंजी की लागत को कम करने में सहायक हो सकती है. ये कारक वित्तीय संस्थानों की स्वतंत्र ऋण खंड को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं.

विदेशी निवेशक कहां लगा रहे हैं ज्यादा पैसा

फिच ने बयान में कहा कि विदेशी शेयरधारकों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी भारतीय वित्तीय संस्थानों के ऋण खंड के लिए दीर्घकालिक पूंजी और वित्त पोषण लचीलेपन, व्यावसायिक विस्तार तथा कुछ मामलों में कामकाज के मानकों में सुधार के माध्यम से सकारात्मक हो सकती है. रेंटिंग एजेंसी का मानना है कि बैंकों की तुलना में गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफआई) में विदेशी शेयरधारकों के नियंत्रण हासिल करने के अधिक आसार हैं क्योंकि नियमों के तहत एनबीएफआई में पूर्ण विदेशी स्वामित्व की अनुमति है. उदाहरण के तौर पर, सुमितोमो मित्सुई फाइनेंशियल ग्रुप ने फुलर्टन इंडिया क्रेडिट कंपनी (अब एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट) का 100 प्रतिशत अधिग्रहण किया जिससे निदेशक मंडल एवं प्रबंधन में प्रतिनिधित्व बढ़ा. साथ ही बिक्री एवं वित्त पोषण में समन्वय भी मिला.

Gold Rate Today: सोना खरीदने वालों की चांदी! कीमतों में आई भारी गिरावट, देखिए 22K,18K के लेटेस्ट रेट’

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Gold Rate Today 21 April 2026: अक्षय तृतीया के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है। पिछले दो दिनों से गोल्ड की चमक फीकी पड़ी है और दाम धीरे-धीरे नीचे खिसक रहे हैं।

राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना बीते दो दिनों में करीब ₹500 तक सस्ता हुआ है, जबकि 22 कैरेट में ₹460 तक गिरावट दर्ज की गई है। आज भी कीमतों में हल्की नरमी जारी रही, जिससे ज्वैलरी खरीदने वालों के लिए थोड़ा राहत का माहौल बना है।

वैश्विक स्तर पर भी सोने पर दबाव बना हुआ है। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मजबूत होते डॉलर ने गोल्ड की कीमतों को नीचे खींचा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने का वायदा भाव गिरावट के साथ खुला, जिससे साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार में दबाव बना हुआ है।

MCX और वायदा बाजार का हाल

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने के वायदा भाव में सुस्ती देखी गई। 24 कैरेट सोने का भाव 0.1% गिरकर ₹1,53,785 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया।

याद दिला दें कि इसी साल 29 जनवरी को सोना ₹1,80,779 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिसके मुकाबले अब यह काफी नीचे ट्रेड कर रहा है। वहीं, चांदी की कीमतों में भी ₹100 की मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

Gold Price In India Today: देश के बड़े शहरों में सोने का रेट (प्रति 10 ग्राम) (Sone ka Bhav)

शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट

  • दिल्ली ₹1,55,920 ₹1,42,490 ₹1,16,610
  • मुंबई ₹1,55,780 ₹1,42,340 ₹1,16,460
  • कोलकाता ₹1,55,780 ₹1,42,340 ₹1,16,460
  • हैदराबाद ₹1,55,780 ₹1,42,340 ₹1,16,460
  • भोपाल ₹1,55,820 ₹1,42,390 ₹1,16,510
  • रायपुर ₹1,55,780 ₹1,42,340 ₹1,16,460

क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम? (why Gold Price Drop)

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों और डॉलर इंडेक्स में उछाल के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना गिरकर 4,805.09 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है, जिसका सीधा असर भारत में सोने की कीमतों पर दिख रहा है।

भारत में कैसे तय होते हैं सोना-चांदी के भाव?

भारत में सोने और चांदी की कीमतें मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों पर निर्भर करती हैं। लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) की दरें इसका आधार होती हैं।

इसके अलावा, भारत में Indian Bullion and Jewellers Association (IBJA) देश के प्रमुख शहरों के बड़े डीलरों से रेट लेकर एक औसत भाव तय करता है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स (GST), इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) और ज्वेलर्स का मेकिंग चार्ज अलग से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में अंतर दिखाई देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  1. 22 कैरेट और 24 कैरेट सोने में क्या अंतर है?

24 कैरेट सोना 99.9% शुद्ध होता है और बहुत नरम होता है, इसलिए इससे गहने नहीं बनाए जा सकते। वहीं 22 कैरेट सोने में 91.6% सोना और बाकी अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, जिससे यह गहनों के लिए मजबूत बनता है।

  1. हॉलमार्क वाला सोना क्यों खरीदना चाहिए?

हॉलमार्क सोने की शुद्धता की गारंटी देता है। भारत सरकार ने अब गहनों पर HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर अनिवार्य कर दिया है, जिससे ग्राहकों को धोखाधड़ी से सुरक्षा मिलती है।

  1. क्या आने वाले दिनों में सोना और सस्ता होगा?

सोने के दाम काफी हद तक वैश्विक तनाव और मुद्रास्फीति पर निर्भर करते हैं। यदि ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता सफल होती है, तो कीमतों में और सुधार की संभावना हो सकती है।

  1. डिजिटल गोल्ड और फिजिकल गोल्ड में कौन सा बेहतर है?

निवेश के लिहाज से डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ईटीएफ (ETF) बेहतर हैं क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज और सुरक्षा की चिंता नहीं होती। हालांकि, शादियों या उपयोग के लिए फिजिकल गोल्ड ही पसंद किया जाता है।

Bombay HC से RSS प्रमुख मोहन भागवत को मिली बड़ी राहत, Z+ सुरक्षा के खिलाफ याचिका हाई कोर्ट से खारिज’

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Bombay HC RSS Security: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने 20 अप्रैल को एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत और नागपुर स्थित संघ कार्यालयों को दी जा रही Z+ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे।

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि इस सुरक्षा पर होने वाला खर्च करदाताओं के पैसे से न उठाकर RSS या उससे जुड़े व्यक्तियों से वसूला जाए।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि याचिका किसी विशेष उद्देश्य से दायर प्रतीत होती है। इसी आधार पर अदालत ने इसे खारिज कर दिया।

Z+ सुरक्षा को लेकर क्या थी याचिका की मांग?

नागपुर के सामाजिक कार्यकर्ता ललन किशोर सिंह द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया था कि RSS एक गैर-पंजीकृत संगठन है, और इसके बावजूद उसे और उसके प्रमुख को राज्य की ओर से उच्चस्तरीय Z+ सुरक्षा दी जा रही है, जिसका खर्च आम करदाताओं के पैसे से उठाया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस सुरक्षा व्यवस्था पर हर महीने होने वाला लगभग 40 से 45 लाख रुपये का खर्च RSS या उससे जुड़े व्यक्तियों से वसूला जाए। याचिका में 27 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुकेश अंबानी की सुरक्षा से जुड़े मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया गया।

बिहार में पहली बार भाजपा का CM! वो 5 वजहें जिसने सम्राट चौधरी को बनाया ‘सुल्तान’, कैसे जीता BJP-RSS का भरोसाउस फैसले में कहा गया था कि विशेष परिस्थितियों में दी जाने वाली सुरक्षा का खर्च संबंधित व्यक्ति या संगठन से वसूला जा सकता है। याचिकाकर्ता के वकील अश्विन इंगोले ने दलील दी कि जब सुरक्षा संवैधानिक या वैधानिक अनिवार्यता के तहत नहीं दी जा रही हो, तब उसका खर्च सार्वजनिक खजाने से नहीं, बल्कि लाभार्थी से लिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा?

हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मामले के व्यापक नीतिगत पहलुओं पर कोई टिप्पणी नहीं की। अदालत ने केवल इस बात पर जोर दिया कि याचिका के पीछे की मंशा संदिग्ध लगती है और इसी आधार पर इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया। Z+ सुरक्षा देश में दी जाने वाली सबसे उच्च स्तर की सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है, जिसमें कई स्तरों पर सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

यह सुरक्षा आमतौर पर उन व्यक्तियों को दी जाती है, जिन्हें उच्च खतरे का आकलन किया जाता है। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि केवल जनहित का दावा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि याचिका की मंशा और आधार भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।

सरकार को बड़ी राहत

अदालत के इस फैसले से सरकार और RSS को बड़ी राहत मिली है। याचिका खारिज होने का मतलब है कि मोहन भागवत और संघ कार्यालयों की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था यथावत बनी रहेगी और सरकारी खजाने से ही इसका खर्च वहन किया जाएगा। फिलहाल, RSS प्रमुख मोहन भागवत और नागपुर स्थित संघ कार्यालयों को दी जा रही Z+ सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी।

पतंजलि फूड्स के निवेशकों के लिए मुनाफे वाली खबर, जानें कब आएगा पैसा’

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पतंजलि फूड्स ने मंगलवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2 रुपए के फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 1.75 रुपए का दूसरा अंतरिम डिविडेंड मंजूर कर दिया. कंपनी ने एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि यह फेस वैल्यू का 87.5 फीसदी है, और इसका भुगतान 20 मई, 2026 को या उससे पहले किया जाएगा.

बोर्ड ने दूसरे अंतरिम डिविडेंड को पाने के हकदार शेयरधारकों को तय करने के लिए 25 अप्रैल, 2026 की तारीख को ‘रिकॉर्ड डेट’ के तौर पर निर्धारित किया है.

कंपनी ने इससे पहले 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान, वित्त वर्ष 2026 के लिए प्रति शेयर 1.75 रुपये का पहला अंतरिम डिविडेंड घोषित किया था और उसका भुगतान भी कर दिया था. इस घटनाक्रम के बाद, पतंजलि फूड्स के शेयर की कीमत में 1% से ज़्यादा की तेज़ी आई. पिछले छह महीनों में यह शेयर 21% और साल-दर-तारीख (YTD) आधार पर लगभग 16% नीचे रहा है.

कंपनी के मुनाफे और रेवेन्यू में इजाफा

तीसरी तिमाही (Q3) में, कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया. कंपनी का कंसोलिडेटिड नेट प्रॉफिट पिछले साल की इसी अवधि के 371 करोड़ रुपए से 60% बढ़कर 594 करोड़ रुपए हो गया. ऑपरेशन से होने वाला रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 17 फीसदी बढ़कर 10,484 करोड़ रुपये हो गया, जबकि Q3FY25 में यह 8,997 करोड़ रुपए था. यह Q3 और वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों, दोनों के लिए कंपनी का अब तक का सबसे ज्यादा रेवेन्यू है.

पतंजलि फूड्स को उम्मीद है कि अनुकूल व्यापक आर्थिक रुझानों की मदद से वित्त वर्ष 2026 का समापन मजबूत रहेगा. इन रुझानों में GST 2.0 सुधार शामिल हैं, जो बड़े पैकों की कीमतों में कटौती और छोटे पैकों में मात्रा बढ़ाने के जरिए खपत को बढ़ावा दे सकते हैं. एडिबल ऑयल क्षेत्र पर GST में हुए बदलावों का कोई असर नहीं पड़ने की उम्मीद है. कंपनी को यह भी उम्मीद है कि महंगाई में नरमी और कर सुधारों के कारण शहरी मांग में सुधार होगा, जबकि खरीफ की अच्छी फसल के चलते ग्रामीण मांग भी मज़बूत बनी रहने की संभावना है.

कंपनी के शेयरों में तेजी

डिविडेंड के ऐलान के बाद से कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिल रही है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार कंपनी के शेयर में कारोबारी सत्र के दौरान 1 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिला और कंपनी के शेयर की कीमत 465.20 रुपए के दिन के हाई पर पहुंच गए. वैसे कंपनी का शेयर दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर 0.77 फीसदी की तेजी के साथ 464 रुपए पर कारोबार कर रहा है. वैसे कंपनी का शेयर सुबह 461.45 रुपए पर ओपन हुआ था और सोमवार को कंपनी का शेयर 460.45 रुपए पर बंद हुआ था.

JEE Main 2026 Session 2 में 26 स्टूडेंट्स को मिला 100 पर्सेंटाइल, कौन सा स्टेट रहा सबसे आगे?

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JEE Main 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने JEE Main 2026 Session 2 Paper 1 (BE/BTech) के बहुप्रतीक्षित परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस वर्ष की परीक्षा में देश भर के मेधावियों ने शानदार प्रदर्शन किया है, जिसमें कुल 26 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल का परफेक्ट स्कोर हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

खास बात यह है कि इन टॉपर्स की सूची में जनवरी सत्र के 12 छात्र भी अपनी जगह दोबारा सुरक्षित करने में कामयाब रहे।

इस बार के नतीजों में एक दिलचस्प बात यह रही कि 100 पर्सेंटाइल क्लब में शामिल सभी टॉप स्कोरर छात्र हैं। चंडीगढ़ के आरुष सिंघल ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर ऑल इंडिया रैंक 1 (AIR 1) हासिल कर पूरे देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जिससे उनके परिवार और क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है

JEE Main में दक्षिण भारत का दबदबा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश रहे सबसे आगे

JEE Main 2026 के परिणामों में क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो दक्षिण भारतीय राज्यों का वर्चस्व स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश इस बार सबसे बड़े ‘टॉपर हब’ बनकर उभरे हैं। इन दोनों ही राज्यों से 5-5 छात्रों ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किए हैं। यह आंकड़ा गवाह है कि तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में इन राज्यों की तैयारी और शिक्षण स्तर काफी उच्च श्रेणी का रहा है।

अलग-अलग राज्यों से निकले चमकते सितारे

सिर्फ दक्षिण ही नहीं, बल्कि उत्तर और पूर्व भारत के राज्यों ने भी बेहतरीन उपस्थिति दर्ज कराई है। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों के छात्रों ने भी टॉप स्कोरर्स की सूची में अपनी जगह बनाई है। बिहार के शुभम कुमार ने 100 पर्सेंटाइल हासिल कर राज्य को गौरवान्वित किया है।

100 पर्सेंटाइल क्लब

  • आरुष सिंघल – चंडीगढ़
  • जोन्नाला रोशन मणिदीप रेड्डी – आंध्र प्रदेश
  • नरेंद्रबाबू गारी महित – आंध्र प्रदेश
  • यस मिश्रा – दिल्ली (NCT)
  • कबीर छिल्लर – राजस्थान
  • अर्नव गांधी – हरियाणा
  • सिद्धार्थ श्रीकांत अथले – महाराष्ट्र
  • शुभम कुमार – बिहार
  • थाम्मिना गिरीश – तमिलनाडु
  • भावेश पात्रा – ओडिशा
  • पुरोहित निमय – गुजरात

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया और JEE Advanced की राह

NTA द्वारा जारी यह स्कोर एक नॉर्मलाइज्ड पर्सेंटाइल है। चूंकि परीक्षा कई दिनों तक अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित की गई थी, इसलिए पेपर की कठिनाई के स्तर को संतुलित करने के लिए इस पद्धति का उपयोग किया जाता है। अब इन परिणामों के आधार पर JEE Advanced के लिए कट-ऑफ और योग्यता तय की जाएगी। शीर्ष रैंक हासिल करने वाले ये छात्र अब देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में प्रवेश पाने के लिए अगले चरण की परीक्षा में शामिल होंगे।