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AIADMK पर Rahul Gandhi का बड़ा हमला, बोले- भ्रष्टाचार के कारण BJP के आगे किया ‘Surrender’

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को आरोप लगाया कि एआईएडीएमके नेतृत्व ने भ्रष्टाचार के कारण भाजपा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है, और दावा किया कि क्षेत्रीय पार्टी अब तमिलनाडु में भाजपा के प्रवेश के लिए एक माध्यम के रूप में काम कर रही है।

कन्याकुमारी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि आरएसएस जो द्रविड़ विचारधारा से नफरत करता है, वह भी तमिलनाडु पर शासन करने की योजना बना रहा है।

गांधी ने जोर देकर कहा कि प्रत्येक राज्य को अपनी आवाज और स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि प्रत्येक राज्य के लोगों को अपने राज्य का संचालन करना चाहिए। लेकिन भाजपा ऐसा नहीं सोचती। वह एक ही परंपरा, एक ही भाषा और एक ही इतिहास में विश्वास करती है। उन्होंने आगे कहा कि विकेंद्रीकृत शासन के सिद्धांतों के अनुरूप तमिलनाडु का शासन वहां की जनता द्वारा ही होना चाहिए।

गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रभावित करने की कोशिश की, जिसके जवाब में मोदी ने एआईएडीएमके प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के माध्यम से तमिलनाडु को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि डीएमके-कांग्रेस गठबंधन तमिल भाषा, संस्कृति और इतिहास की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर भाजपा को घेरते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह कदम दक्षिण और उत्तर-पूर्वी भारत के प्रतिनिधित्व को कम करने के लिए उठाया गया है, और इसे भारत के संघ के विचार पर हमला करार दिया।

उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले संसद में उन्होंने हमारे संविधान पर हमला किया। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक पारित करने का दावा किया, लेकिन इसके पीछे उनका मकसद चुनावी मानचित्र को बदलना था; वे दक्षिण और उत्तर-पूर्वी भारत के प्रतिनिधित्व को कम करने की कोशिश कर रहे थे… वे भारत के संघ के विचार पर हमला कर रहे थे, और इसीलिए हमने उन्हें हराया। इस तरह का कोई भी प्रयास बार-बार विफल होगा।

बिहार नहीं छोडूंगा… Nitish Kumar का JDU MLAs को संदेश, सरकार के हर काम पर रखूंगा पैनी नजर’

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जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार ने सोमवार को पार्टी विधायकों से कहा कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के एक सप्ताह बाद भी वे बिहार में विकास कार्यों पर नजर रखना जारी रखेंगे। कुमार ने 1, अणे मार्ग पर विधायक दल की एक बैठक को संबोधित किया, जो मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास है और जहां जेडीयू सुप्रीमो, जो अब राज्यसभा सांसद हैं, लगभग दो दशकों से रह रहे हैं।

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए जेडीयू एमएलसी और प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि हमारे पार्टी नेता ने कहा है कि संसद के उन सत्रों को छोड़कर जिनमें उनकी उपस्थिति आवश्यक होगी, वे अपना अधिकतम समय बिहार में बिताएंगे।

नीरज कुमार ने आगे कहा कि नीतीश कुमार ने हमें बताया कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके कार्यकाल में किए गए अच्छे कार्य नई सरकार के तहत भी जारी रहें, जिसमें जेडीयू एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। स्थिति पर नजर रखने के लिए वे समय-समय पर राज्य का दौरा करेंगे। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने पुष्टि की कि एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसके तहत नीतीश कुमार को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के सभी सदस्यों ने नीतीश कुमार के शासन, नेतृत्व और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार को दी गई पहचान के लिए उनके प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

नीरज कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को विधायक दल के नए नेता का चयन करने का अधिकार दिया गया है। विधायक दल ने सर्वसम्मति से उनके कार्यों और उपलब्धियों के लिए आभार व्यक्त किया। बैठक के दौरान, नीतीश कुमार ने यह भी संकेत दिया कि संसदीय जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ वे पार्टी नेताओं के साथ राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा करके बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में सक्रिय रूप से जुड़े रहेंगे।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य संगठनात्मक मामलों और सरकारी पहलों की प्रगति से घनिष्ठ रूप से जुड़े रहना है। आंतरिक मतभेदों की अटकलों पर नीरज कुमार ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की अनबन से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि बिल्कुल कोई विवाद नहीं था। आखिर हमारी पार्टी का नाम ही ‘एकजुट’ है। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि बैठक में किसी विशिष्ट नाम पर चर्चा नहीं हुई और दोहराया कि नेता चुनने का अधिकार पूरी तरह से नीतीश कुमार के पास है। दिलचस्प बात यह है कि तत्काल निर्णय न होने से राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। नीतीश कुमार को नेता बनाने का प्रस्ताव उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने पेश किया था और इसे सर्वसम्मति से समर्थन मिला था।

DMK-Congress गठबंधन पर बरसे Chandrababu Naidu, बोले- परिसीमन पर फैला रहे हैं भ्रम’

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चंद्रबाबू नायडू ने तमिलनाडु में अपने चुनाव प्रचार को और तेज़ करते हुए द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठबंधन पर सीधा हमला किया। उन्होंने डीएमके की विचारधारा में आए बदलाव पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी की स्थापना मूल रूप से कांग्रेस के विरोध में हुई थी, लेकिन अब यह उसी पार्टी के साथ मिलकर काम करती है।

विधानसभा चुनाव से पहले जनसभाओं को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा कि यह विरोधाभास राजनीतिक मूल्यों में निरंतरता की कमी को दर्शाता है। उन्होंने मतदाताओं से आग्रह किया कि वे समय के साथ गठबंधनों में आए बदलावों और शासन पर इसके प्रभाव पर ध्यान दें।

नायडू ने महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा भी उठाया और संसद में इसका विरोध करने के लिए डीएमके और कांग्रेस की कड़ी आलोचना की। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए 33 प्रतिशत आरक्षण को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रगतिशील कदम बताया। उन्होंने कहा कि विधेयक का विरोध करने वाली पार्टियों को देश भर की महिलाओं को जवाब देना होगा और अपने रुख को सही ठहराना होगा।

अपने भाषण के दौरान, नायडू ने विकास के उदाहरणों का इस्तेमाल करते हुए अपनी बात को पुष्ट किया। उन्होंने अमरावती में 5000 एकड़ में फैले एक विशाल हवाई अड्डे के निर्माण की योजना का जिक्र किया और इसकी तुलना तमिलनाडु के बुनियादी ढांचे के स्तर से की। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर कई हवाई अड्डों के साथ पहले से ही विस्तार कर रहे हैं, जबकि तमिलनाडु इस तरह की महत्वाकांक्षाओं के साथ तालमेल नहीं बिठा पाया है। उन्होंने जे. जयललिता के कार्यकाल के दौरान राज्य की अपनी पिछली यात्राओं का भी जिक्र किया और आगामी चुनावों में एनडीए गठबंधन की जीत का विश्वास व्यक्त किया।

अभिनेता विजय और उनके राजनीतिक प्रवेश पर कटाक्ष करते हुए नायडू ने कहा कि उनकी पार्टी का प्रभाव चुनावों के दौरान स्पष्ट हो जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि चेन्नई, जिसे कभी प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता था, हाल के वर्षों में प्रगतिशील शासन के अभाव के कारण अपनी चमक खो रहा है। नायडू के चुनावी भाषण नीति, विकास और राजनीतिक विरोधाभास के मिश्रण पर केंद्रित थे। वैचारिक बदलावों को उजागर करते हुए, शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए और सुधारवादी राजनीति पर जोर देते हुए, वे एनडीए गठबंधन के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

Iran Vs America War:  भारतीय जहाजों पर हुए हमले के सवाल पर भड़के ट्रंप, महिला पत्रकार को निकाला बाहर’

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Iran Vs America War: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों पर हुए हमले ने भारत समेत पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जब व्हाइट हाउस में सवाल पूछा गया, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने न केवल सवाल को नजरअंदाज किया, बल्कि महिला पत्रकार को कमरे से बाहर जाने तक कह दिया। यह घटना दिखाती है कि खाड़ी क्षेत्र में हालात कितने गंभीर और अनिश्चित बने हुए हैं।

भारतीय जहाजों पर हमले के बाद माहौल तनावपूर्ण

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा दो भारतीय जहाजों को निशाना बनाना एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटना है। भारत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे समुद्री सुरक्षा का उल्लंघन बताया है। चूंकि यह रास्ता वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवनरेखा माना जाता है, इसलिए भारतीय टैंकरों पर हमले से व्यापारिक जगत में भी हड़कंप मच गया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि अपने जहाजों और क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वह हर जरूरी कदम उठाएगा।

पत्रकार को ट्रंप ने कहा- OUT

सीबीएस न्यूज की व्हाइट हाउस रिपोर्टर ओलिविया रिनाल्डी ने जब इस हमले और अमेरिका के रुख पर सवाल पूछा, तो ट्रंप भड़क गए। उन्होंने ओलिविया को तुरंत बाहर जाने (OUT) का आदेश दे दिया। ओलिविया रिनाल्डी एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्होंने 2024 के चुनाव अभियान को भी कवर किया है। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद ट्रंप के रवैये की आलोचना हो रही है, इसे प्रेस की आजादी पर प्रहार माना जा रहा है।

ईरान को ट्रंप की ‘आर या पार’ की चेतावनी

इस तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है, जो स्वीकार्य नहीं है। ट्रंप का कहना है कि वे अभी भी शांति समझौता चाहते हैं, लेकिन यह उनकी शर्तों पर होगा। उन्होंने साफ किया कि या तो ईरान प्यार से समझौते की मेज पर आए, वरना अमेरिका दबाव बनाकर इसे लागू करवाएगा। ट्रंप के इस रुख से युद्ध की आहट और तेज हो गई है।

पुलों और पावर प्लांटों पर हमले की धमकी

ट्रंप ने केवल जुबानी चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह करने का इशारा भी किया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने अमेरिका का प्रस्तावित समझौता नहीं माना, तो अमेरिकी सेना ईरान के पुलों और पावर प्लांटों जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकती है। इमरजेंसी सिचुएशन रूम में बुलाई गई बैठक इस बात का संकेत है कि अमेरिकी प्रशासन अब किसी भी बड़े सैन्य विकल्प पर विचार करने से पीछे नहीं हटेगा।

cg” महिला आरक्षण विधेयक को रोकना कांग्रेस की विभाजनकारी राजनीति का प्रतीक : विष्णु देव साय’

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को आरोप लगाया कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए ‘‘बांटो और राज करो’’ की नीति अपनाई है।

उन्होंने मुख्य विपक्षी दल के इस कदम को देश की 70 करोड़ महिलाओं के साथ ‘विश्वासघात’ और ‘घोर पाप’ करार दिया।

साय ने यहां स्थित भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी अवसर आया है, कांग्रेस महिला आरक्षण को कानूनी जामा पहनाने की कोशिशों को समर्थन देने में विफल रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस अंग्रेजों की ‘बांटो और राज करो’ की नीति का अनुसरण कर रही है और गत तीन दशक से केवल महिला आरक्षण के बारे में बात कर रही है।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘लेकिन, जब भी सार्थक कार्रवाई करने और कानून बनाने का समय आता है, कांग्रेस के सदस्य मुंह मोड़ लेते हैं। कांग्रेस ने एक बार फिर वही रवैया अपनाया है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ‘‘वंशवादी और वोट बैंक की राजनीति’’ से प्रेरित होकर विधेयक का विरोध करके देश की 70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है।

साय ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के मार्ग में बाधा डाली है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस और ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) को आबादी के आधे हिस्से को उनके उचित नेतृत्व के अवसरों से वंचित करने के इस गंभीर पाप के परिणाम भुगतने होंगे। छत्तीसगढ़ और पूरे देश की महिलाएं इसका कड़ा विरोध करेंगी।”

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने भी कांग्रेस के ‘नकारात्मक’ और ‘महिला-विरोधी’ रुख की आलोचना करते हुए कहा कि संविधान संशोधन विधेयक को रोकने में विपक्ष की भूमिका के कारण 17 अप्रैल को ‘काला अध्याय’ के रूप में याद किया जाएगा।

CG Summer Vacation 2026: स्कूली बच्चों की हो गई मौज! आज से लगातार इतने दिनों तक बंद रहेंगे प्रदेशभर के सभी स्कूल’

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CG Summer Vacation 2026” छत्तीसगढ़ में अप्रैल के महीने में गर्मी अब तेजी से अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। बढ़ते तापमान को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। साय सरकार ने बढ़ते गर्मी को देखते हुए स्कूलों में गर्मी की छुट्टी का ऐलान कर दिया है।

कब से कब तक बंद रहेंगे स्कूल? आज 20 अप्रैल से 15 जून 2026 तक सभी स्कूलों में गर्मी की छुट्टी दे दी गई है’

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग समेत प्रदेश के कई जिलों में पारा 40 डिग्री के पार जा चुका है। सूत्रों के अनुसार, स्कूलों में बच्चों की तबीयत बिगड़ने की शिकायतों के बाद शासन ने यह कदम उठाया है। जारी आदेश के मुताबिक, आज 20 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक सभी कक्षाओं का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा।

इन स्कूलों पर लागू होगा आदेश

आपको बता दें कि साय सरकार के ऐलान के बाद यह आदेश एक जिले में नहीं पूरे प्रदेश के ​स्कूलों में लागू होगा। सभी सरकारी स्कूल बंद रहेंगे। प्राइवेट यानी अशासकीय स्कूलों को भी छुट्टी रखनी होगी। अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर भी यह आदेश सख्ती से लागू होगा।

cg” डिजिटल जनगणना को मिली रफ्तार, अब तक इतने हजार नागरिकों ने पूरी प्रकिया’

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छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित जनगणना 2027 के अंतर्गत प्रारंभ की गई डिजिटल स्व-गणना (Self Enumeration) प्रक्रिया को नागरिकों का उत्साहजनक प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है। जनगणना संचालन निदेशालय, छत्तीसगढ़ से प्राप्त ताज़ा आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक 19,039 नागरिकों ने स्व-गणना की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर ली है, जबकि 7,734 नागरिकों ने पंजीकरण कर प्रक्रिया प्रारंभ की है। इस प्रकार कुल 26,773 नागरिक स्व-गणना पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं।

यह पहल भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त के समन्वय में संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य सटीक, अद्यतन एवं विश्वसनीय सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का संकलन सुनिश्चित करना है। इन आंकड़ों के आधार पर आगामी वर्षों में नीतिगत निर्णयों को और अधिक प्रभावी तथा लक्षित बनाया जा सकेगा।

स्व-गणना की व्यवस्था नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का अवसर प्रदान करती है, जिससे डेटा की प्रामाणिकता में वृद्धि होती है और प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनती है। यह व्यवस्था प्रशासनिक तंत्र पर भार को भी कम करती है तथा डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देती है। प्रक्रिया के अंतर्गत नागरिकों को ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से पोर्टल में लॉगिन करना होता है। इसके पश्चात परिवार से संबंधित आधारभूत सुविधाओं एवं सदस्यों की व्यक्तिगत जानकारी दर्ज की जाती है। प्रक्रिया पूर्ण होने पर प्राप्त डिजिटल संदर्भ संख्या (CRN) भविष्य में सत्यापन के लिए उपयोगी होगी।

राज्य में इस अभियान के प्रभावी संचालन हेतु व्यापक स्तर पर मानव संसाधन एवं तकनीकी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया गया है, जिससे डेटा संकलन एवं सत्यापन कार्य समयबद्ध एवं त्रुटिरहित ढंग से किया जा सके। नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं, जहां किसी भी प्रकार की तकनीकी अथवा प्रक्रियात्मक समस्या का समाधान किया जा रहा है। साथ ही, डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी व्यक्तिगत जानकारियां विधि द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत पूर्णतः गोपनीय रहें।

इस संबंध में जनगणना संचालन, छत्तीसगढ़ के निदेशक डॉ. कार्तिकेय गोयल ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस डिजिटल पहल में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें तथा स्व-गणना की प्रक्रिया समय पर पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि यह प्रयास राज्य के समग्र एवं संतुलित विकास के लिए एक सशक्त आधार तैयार करेगा।

cg” रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर से खुलेंगे छत्तीसगढ़ के विकास के दरवाजे, जानिए कब से हो सकता है शुरू’

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बस्तर की प्रगति को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) एक क्रांतिकारी कदम साबित होने जा रहा है। भारतमाला परियोजना के तहत बन रहा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर न केवल दूरियों को कम करेगा, बल्कि बस्तर के स्थानीय उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक पहुँच प्रदान कर लैंड-लॉक्ड क्षेत्र की बाधाओं को समाप्त करेगा।

दुर्गम घाटों से मुक्ति और समय की बड़ी बचत

वर्तमान में जगदलपुर से विशाखापट्टनम की यात्रा ओडिशा के कोरापुट और जयपुर के कठिन घाटों से होकर गुजरती है, जिसमें 7 से 9 घंटे का समय लगता है। भारी वाहनों के लिए यह मार्ग न केवल थकाऊ है, बल्कि डीजल की खपत और मेंटेनेंस के लिहाज से भी खर्चीला है। नया कॉरिडोर इस यात्रा को मात्र 3.5 से 4 घंटे में समेट देगा। सीधा और घाट-मुक्त रास्ता होने के कारण वाहनों का परिचालन खर्च काफी कम हो जाएगा, जिससे परिवहन क्षेत्र को बड़ी राहत मिलेगी। माना जा रहा है कि रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर इसी साल के अंत तक तैयार हो जाएगा।

नबरंगपुर इंटरचेंज: बस्तर का प्रवेश द्वार

रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130 CD) छत्तीसगढ़ के रायपुर, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जिलों से गुजर रहा है। जगदलपुर मुख्यालय को इस कॉरिडोर से जोड़ने के लिए ओडिशा के नबरंगपुर का दासपुर इंटरचेंज महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। जगदलपुर का ट्रैफिक मात्र 50-60 किमी का सफर तय कर नबरंगपुर इंटरचेंज के माध्यम से रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर में शामिल हो सकेगा, जिससे बस्तर सीधे विशाखापट्टनम पोर्ट और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक नेटवर्क से जुड़ जाएगा।

बस्तरिया ब्रांड का अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश

इस कॉरिडोर का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव बस्तर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अब बस्तर की अरेबिका कॉफी, जैविक इमली, महुआ उत्पाद और प्रसिद्ध ढोकरा शिल्प को विशाखापट्टनम पोर्ट तक पहुँचाना सुगम होगा। कम लॉजिस्टिक लागत के कारण ये उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय किसानों, संग्रहकर्ताओं और शिल्पकारों को उनकी उपज का बेहतर अंतरराष्ट्रीय मूल्य मिल सकेगा।

सामाजिक और आर्थिक उत्थान

बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे आकांक्षी जिलों को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं इन सुदूर क्षेत्रों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेंगी। इस राजमार्ग के माध्यम से बस्तर का कृषि उत्पाद और इस्पात सीधे रायपुर, दुर्ग-भिलाई और विशाखापट्टनम जैसे औद्योगिक केंद्रों से जुड़ जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं के लिए तकनीकी, प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, रियल एस्टेट और सर्विस सेक्टर में हजारों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। यह कॉरिडोर बस्तर में औद्योगिक विकास की एक नई लहर लाने के लिए तैयार है।

औद्योगिक और खनिज विकास

बस्तर क्षेत्र लौह अयस्क और अन्य खनिजों से समृद्ध है। यह कॉरिडोर इन खनिजों को विशाखापत्तनम पोर्ट तक तेजी से पहुंचाने में मदद करेगा, जिससे निर्यात और व्यापार में भारी उछाल आएगा। कॉरिडोर के किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान का विस्तार

कनेक्टिविटी में सुधार होने से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की आमद बढ़ेगी। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा, दंतेश्वरी मंदिर, ढोलकल गणेश, कुतुमसर गुफा और चित्रकोट-तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों तक पहुंच आसान होगी। इससे न केवल पर्यटन राजस्व बढ़ेगा, बल्कि आदिम संस्कृति और लोक कलाओं को भी वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी।

पर्यावरण और इंजीनियरिंग का तालमेल

कांकेर जिले के बासनवाही के मंझिनगढ़ पहाड़ी (केशकाल) को चीरकर 2.79 किमी लंबी छत्तीसगढ़ की पहली ट्विन-ट्यूब टनल बनाई जा रही है। यह टनल उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन से गुजरती है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों का आवागमन बाधित न हो। साथ ही पूरे राजमार्ग में मंकी कैनोपी, एनिमल अंडरपास और ओवरपास बनाए जा रहे हैं ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बना रहे।

रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर

रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH 130CD) बस्तर संभाग और पूरे छत्तीसगढ़ के आर्थिक परिदृश्य को बदलने वाली एक महत्वाकांक्षी परियोजना है। लगभग 16,491 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह 464 किमी लंबा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर न केवल दूरी कम करेगा, बल्कि बस्तर जैसे जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में सेतु का काम करेगा। यह कॉरिडोर बस्तर को विश्व व्यापार की मुख्यधारा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा। यह परियोजना सही मायने में बस्तर की आत्मनिर्भरता और वैश्विक पहचान का आधार बनेगी।

“रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए विकास का नया द्वार खोलने जा रहा है। केंद्र सरकार के सहयोग से हम राज्य में आधुनिक और मजबूत अधोसंरचना का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इससे न केवल यात्रा समय कम होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी। हमारी सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर जैसे क्षेत्रों को मुख्य धारा की अर्थव्यवस्था से जोड़कर समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाए। यह परियोजना आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है।”

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

“रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश में कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क तैयार कर नागरिकों और माल परिवहन को सुगम, सुरक्षित और तेज बनाया जा रहा है। इस कॉरिडोर से बस्तर सीधे बंदरगाह से जुड़कर व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। हमारी प्राथमिकता है कि हर क्षेत्र तक बेहतर सड़क और बुनियादी सुविधाएं पहुंचें, जिससे प्रदेश का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।”

उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव

cg” जग्गी हत्याकांड केस में अमित जोगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई’

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छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड केस में अमित जोगी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई है। जिसके बाद अब अगली सुनवाई 23 अप्रैल कोहोगी। कोर्ट ने इस मामले में दायर SLP और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को एक साथ टैग कर दिया है, यानी अब दोनों मामलों पर संयुक्त सुनवाई होगी। इसी बीच अमित जोगी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट किया है। जिसमें उन्होंने लिखा कि आज का सुनवाई अपडेट – माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आज दोनों मामलों को एक साथ टैग कर दिया है – दिनांक 25.03.2026 के लीव टू अपील आदेश के विरुद्ध मेरी एसएलपी, दिनांक 02.04.2026 के उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध वैधानिक अपील। दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई 23 अप्रैल को निर्धारित की गई है। मेरी ओर से आज वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल जी, मुकुल रोहतगी जी, विवेक तन्खा, सिद्धार्थ दवे जी तथा शशांक गर्ग जी उपस्थित हुए। मेरी कानूनी टीम का हृदय से आभार। न्यायपालिका पर मुझे पूर्ण विश्वास है।’

सजा को रद्द करने लगाई थी याचिका

बता दें कि करीब 23 साल पुराने राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक अमित जोगी ने आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की थी, जिसकी सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट हुई है। अमित जोगी ने बिलासपुर हाईकोर्ट की सजा को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट मे याचिका लगाई थी कि उनके साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि हाई कोर्ट ने उन्हें बिना सुने ही सीबीआई की दलील पर 40 मिनट में फैसला सुना दिया।

23 साल पहले रामअवतार की हुई थी हत्या

गौरतलब है कि 23 साल पहले रामअवतार जग्गी की गोली मारकर कर दी थी हत्या 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 31 लोगों को आरोपी बनाया था। बाद में बलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को दोषी करार दिया गया था। हालांकि बाद में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

cg” कृषि विश्वविद्यालय में 20 अप्रैल को मनाया जाएगा अक्ती तिहार’

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कृषि विश्वविद्यालय में 20 अप्रैल को मनाया जाएगा अक्ती तिहार’

कृषि मंत्री श्री नेताम करेंगे मिट्टी और बीजों की पूजा’

किसानों को रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के बारे में’

प्रशिक्षण भी दिया जाएगा’

सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों एवं अनुदेशन प्रक्षेत्रों में भी होगा अक्ती तिहार का आयोजन’

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में अक्षय तृतीया के अवसर पर कल ‘‘अक्ती तिहार’’ का आयोजन किया जा रहा है। स्वामी विवेकानंद कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र के पास स्थित प्रक्षेत्र में प्रातः 10ः30 बजे से आयोजित राज्य स्तरीय अक्ती तिहार समारोह के मुख्य अतिथि कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम होंगे। समारोह की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल करेंगे।

अक्षय तृतीया के अवसर पर धरती माता एवं बीजों की पूजा-अर्चना कर बीज बुआई का कार्य प्रतीकात्मक रूप से किया जाएगा। कृषि मंत्री श्री नेताम द्वारा प्रगतिशील कृषकों को कृषि आदान सामग्री का वितरण किया जाएगा। इस अवसर पर किसानों के लिए नवीन बीज बुआई तकनीकी एवं कृषि में ड्रोन का उपयोग तकनीक का प्रदर्शन भी किया जाएगा। कृषि विज्ञान केंन्द्र रायपुर द्वारा इस अवसर पर “रासायनिक उर्वरकों का विकल्प” विषय पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया है। अक्ती तिहार का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित समस्त महाविद्यालयों, कृषि विज्ञान केन्द्रां एवं अनुसंधान केन्द्रों में भी किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि अक्ती तिहार छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और कृषि संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है जो अक्षय तृतीया के शुभ दिन मनाया जाता है। यह त्यौहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि हमारे कृषक जीवन की नई शुरूआत का प्रतीक है। इस दिन से खेती के नए कार्यों का शुभारंभ होता है। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और अच्छी फसल की कामना करने का अवसर प्रदान करता है।

अक्ती तिहार के अवसर पर गांवों में सभी देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना की जाती है। ग्राम बैगा द्वारा ठाकुर देव की पूजा कर धान चढ़ाया जाता है जो हमारी पारंपरिक आस्था और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है। किसान भाई अपने घरों से धान लाकर उसका एक भाग अपनी कोठी में मिलाते हैं और शेष भाग खेतों में पूजन के साथ बुआई की शुरूआत के रूप में अर्पित करते हैं। यह परंपरा कृषि कार्य की शुभ शुरूआत का संकेत देती है।