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CG” सहकार से समृद्धि की परिकल्पना को साकार करने में नव गठित समितियां होंगी ऐतिहासिक कदम: श्री शशिकांत द्विवेदी’

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छत्तीसगढ़ में सहकार से समृद्धि की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसी कड़ी में रेंगाकठेरा में नवगठित सेवा सहकारी समिति के वर्चुअल उद्घाटन के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ के प्राधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी ने कहा कि यह ऐतिहासिक कदम साबित होगा। गौरतलब है कि प्रदेश की 515 नवगठित सेवा सहकारी समितियों का वर्चुअल उद्घाटन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप द्वारा किया गया।

प्राधिकारी श्री शशिकांत द्विवेदी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में पूरे देश में नई सहकारी समितियां बनाई जा रही हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक 2573 सेवा सहकारी समितियां बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि पहले पैक्स और लैम्पस केवल खाद-बीज की आपूर्ति और ऋण देने का काम करती थीं, लेकिन अब ये बहुउद्देशीय सेवा सहकारी समितियां बन गई हैं। इन समितियों के माध्यम से किसानों को खाद, बीज और ऋण की सुविधा के साथ-साथ कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए 54 प्रकार की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, टिकट बुकिंग, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, खसरा-नक्शा, जन औषधि केंद्र, पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी जैसी सेवाएं शामिल हैं।

श्री द्विवेदी ने बताया कि पैक्स के कंप्यूटरीकरण से पारदर्शिता बढ़ रही है और देशभर में 73 हजार से अधिक पैक्स को डिजिटलीकरण से जोड़ा जा चुका है। सभी पैक्स को प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि किसान कृषि में नवाचार अपनाकर समृद्ध बन सकें। महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी सहकारिता विभाग सक्रिय है। दुग्ध, मत्स्य और कृषि विपणन सहकारी समितियों के माध्यम से लखपति दीदी और सारथी दीदी जैसी योजनाओं से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति, राष्ट्रीय बीज सहकारी समिति और राष्ट्रीय निर्यातक सहकारी समिति जैसी नई संस्थाएं गठित की गई हैं। सहकार टैक्सी और सहकार बीमा जैसी योजनाओं से युवाओं और महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। अर्बन को-ऑपरेटिव बैंकों ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय का रिकॉर्ड बनाया है। श्री शशिकांत द्विवेदी ने कहा कि सहकारिता के इस विस्तार से न केवल सहकार से समृद्धि का सपना पूरा होगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी बल मिलेगा।

CG” NSUI ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के नाम सौंपा ज्ञापन’

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➡️ छात्रसंघ चुनाव बहाली की मांग तेज’

राजनांदगांव। प्रदेशभर के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने शनिवार को जोरदार पहल की। राजनांदगांव जिला NSUI के नेतृत्व में कैंप कार्यालय पहुंचकर विधानसभा अध्यक्ष एवं राजनांदगांव विधायक डॉ. रमन सिंह के नाम विधायक प्रतिनिधि संतोष अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में NSUI पदाधिकारियों ने कहा कि विगत कई वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने के कारण विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। छात्रसंघ चुनाव छात्रों की आवाज, नेतृत्व क्षमता, जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है लेकिन चुनाव नहीं होने से छात्रों की समस्याएं प्रशासन और शासन तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रही हैं। NSUI नेताओं ने बताया कि संगठन द्वारा प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन चलाया जा रहा है जिसके तहत विभिन्न जिलों में ज्ञापन सौंपकर सरकार का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव में भी यह ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन के माध्यम से NSUI ने पांच प्रमुख मांगें रखीं जिनमें प्रदेश के सभी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की तत्काल बहाली, निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से समयबद्ध चुनाव, चुनाव कार्यक्रम की शीघ्र घोषणा, छात्र प्रतिनिधियों को अधिकार एवं मान्यता तथा लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत छात्रसंघ प्रणाली को पुनः लागू करने की मांग शामिल है। NSUI नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए गए तो छात्र संगठन चरणबद्ध आंदोलन को और तेज करेगा जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस अवसर पर प्रदेश महासचिव राजा यादव, जिला अध्यक्ष अमर झा सहित NSUI के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में छात्रहितों की रक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली की मांग उठाई। NSUI जिला अध्यक्ष अमर झा ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव केवल चुनाव नहीं, बल्कि छात्रों को नेतृत्व का अवसर देने और उनकी समस्याओं को मंच प्रदान करने की प्रक्रिया है। इसलिए सरकार को तुरंत निर्णय लेकर छात्रसंघ चुनाव बहाल करना चाहिए। इस दौरान मुख्य रूप से भाजपा नेता योगेश खत्री, मनीष गोलछा और त्रिगुण टॉक थे।

Weather Alert: बारिश के बाद अब ‘आग उगलेगा’ आसमान! 6 दिन तक 40+ तापमान, उड़ानों पर असर, IMD अलर्ट…

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Delhi Weather 18 April 2026: राजधानी दिल्ली और देश के कई हिस्सों में मौसम ने एक ऐसी करवट ली है कि लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि वे छाता लेकर निकलें या सनस्क्रीन लगाकर। एक तरफ जहां दिल्ली-NCR में गर्मी रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के 13 राज्यों में आंधी, तूफान और झमाझम बारिश का अलर्ट जारी किया है।

अगले कुछ दिन दिल्ली के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि यहां पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने वाला है और हवा की गुणवत्ता भी दम घोटने लगी है। यानी साफ है कि दिल्लीवालों को अब भीषण गर्मी के लंबे दौर के लिए तैयार रहना होगा। दिन में तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान करेंगी, जबकि रात में भी ज्यादा राहत नहीं मिलने वाली।

भीषण गर्मी की शुरुआत: 40 डिग्री के पार जाएगा पारा (Delhi Temperature 40 Degrees)

17 अप्रैल को हुई हल्की बारिश और ठंडी हवाओं ने दिल्लीवालों को जो राहत दी थी, वह बहुत ही कम समय के लिए थी। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, अब दिल्ली में भीषण गर्मी (Scorching Heat) का दौर शुरू होने वाला है। अगले 6 से 7 दिनों तक राजधानी का अधिकतम तापमान 40 डिग्री के ऊपर ही बना रहेगा।

हैरानी की बात यह है कि शुक्रवार को सीजन की सबसे गर्म सुबह दर्ज की गई थी, जब अधिकतम तापमान सामान्य से 4.2 डिग्री अधिक यानी 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। रिज और पालम जैसे इलाकों में भी पारा 40 के पार रहा। शनिवार को भी आसमान में आंशिक रूप से बादल तो दिख सकते हैं, लेकिन उमस और चिलचिलाती धूप का मेल लोगों को बेहाल कर देगा।

हवाई सफर पर मौसम की मार: इंडिगो की एडवाइजरी (Delhi Airport)

खराब मौसम और आंधी-तूफान का सबसे ज्यादा असर दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI Airport) पर देखने को मिल रहा है। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन, इंडिगो (IndiGo) ने यात्रियों के लिए ‘ट्रैवल एडवाइजरी’ जारी की है। भारी बारिश और तेज हवाओं की वजह से कई फ्लाइट्स के रूट डाइवर्ट किए गए हैं और उड़ानों में देरी हो रही है।

एयरलाइन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस जरूर चेक करें। रनवे पर कम दृश्यता (Visibility) और क्रॉसविंड्स के कारण विमानों के परिचालन में दिक्कत आ रही है। अगर आप भी आज हवाई यात्रा करने वाले हैं, तो समय से काफी पहले एयरपोर्ट पहुंचने की कोशिश करें, ताकि ट्रैफिक और फ्लाइट डिले की वजह से आपकी यात्रा खराब न हो।

दमघोंटू हुई हवा: GRAP-1 लागू होने के बाद भी बढ़ा प्रदूषण (Air Pollution AQI GRAP-1)

एक तरफ मौसम की मार है, तो दूसरी तरफ प्रदूषण ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए CAQM की सब-कमेटी ने ‘ग्रैप’ (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। इसके बावजूद शुक्रवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 263 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है।

गाजियाबाद (346) और ग्रेटर नोएडा (341) में तो हालात और भी बुरे हैं, जहां प्रदूषण ‘बेहद खराब’ स्तर पर पहुंच गया है। मौसम विभाग का मानना है कि आने वाले 10 दिनों तक प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद कम है। धूल भरी आंधी और शुष्क मौसम की वजह से हवा में मौजूद जहरीले कण (PM 10) लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं।

13 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट: 70 KM की रफ्तार से चलेगी हवा (IMD Alert Heavy Rain)

सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के 13 राज्यों में मौसम विभाग ने ‘महा-अलर्ट’ जारी किया है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण कई हिस्सों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने और बिजली गिरने की संभावना है। बिहार के पटना, मुजफ्फरपुर और गया जैसे जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का पूर्वानुमान है।

झारखंड के कुछ हिस्सों में जहां ‘हीटवेव’ का येलो अलर्ट है, वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों-असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में तेज हवाओं का यह संगम अगले 48 घंटों तक जारी रह सकता है।

एक्सपर्ट की राय: क्या करें और क्या न करें?

मौसम में इस बड़े उतार-चढ़ाव के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।

हाइड्रेटेड रहें: गर्मी बढ़ने के कारण शरीर में पानी की कमी न होने दें।

फ्लाइट अपडेट: हवाई यात्रा से पहले एयरलाइन के ऐप या वेबसाइट पर नजर रखें।

प्रदूषण से बचाव: सुबह और शाम के समय बाहरी गतिविधियों से बचें, खासकर सांस के मरीज मास्क का उपयोग करें।

बिजली से सुरक्षा: आंधी-तूफान के दौरान ऊंचे पेड़ों या बिजली के खंभों के पास बिल्कुल न खड़े हों।

दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में मौसम का यह दोहरा मिजाज आने वाले दिनों में और भी चौंका सकता है। सतर्क रहें और मौसम के अपडेट पर नजर बनाए रखें।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से स्थापित किया

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ईरान का नया निर्णय

ईरान ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के अपने फैसले को पलट दिया है। देश की संयुक्त सैन्य कमान ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा, तब तक जलडमरूमध्य के माध्यम से आवाजाही को अवरुद्ध रखा जाएगा।

उन्होंने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण पहले की स्थिति में लौट आया है… सशस्त्र बलों के सख्त प्रबंधन और नियंत्रण में।” यह घोषणा उस सुबह आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का प्रतिबंध “पूर्ण रूप से लागू रहेगा” जब तक तेहरान अमेरिका के साथ एक समझौते पर नहीं पहुँचता, जिसमें उसके परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक संकीर्ण जलमार्ग है, जिसके माध्यम से विश्व के तेल व्यापार का 20-25 प्रतिशत होता है।

ईरान की सैन्य कमान का बयान – हज़रत खातम अल-अंबिया (PBUH) के केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता ने कहा: “होर्मुज जलडमरूमध्य पहले की स्थिति में लौट आया है। इस्लामिक गणराज्य ईरान, पूर्व में हुई वार्ताओं के अनुसार, अच्छे विश्वास में सीमित संख्या में तेल टैंकरों और वाणिज्यिक जहाजों के प्रबंधित मार्ग के लिए सहमत हुआ है।

हालांकि, दुर्भाग्यवश, अमेरिकियों ने अपनी प्रतिबद्धताओं का बार-बार उल्लंघन करते हुए, तथाकथित प्रतिबंध के तहत समुद्री डकैती और लूटपाट जारी रखी है,” प्रवक्ता ने कहा। “इस कारण से, होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण पहले की स्थिति में लौट आया है, और यह रणनीतिक जलडमरूमध्य सशस्त्र बलों के सख्त प्रबंधन और नियंत्रण में है,” प्रवक्ता ने कहा, यह जोड़ते हुए, “यह घोषणा की जाती है कि जब तक संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान से गंतव्य तक और गंतव्य से मूल स्थान तक जहाजों की पूर्ण स्वतंत्रता समाप्त नहीं करता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति सख्ती से नियंत्रित रहेगी और पहले की तरह बनी रहेगी।”

महिला आरक्षण पर केरल कांग्रेस और सीएम नायडू के बीच सियासी टकराव’

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महिला आरक्षण संशोधन बिल और परिसीमन को लेकर राजनीति तेज हो गई है। केरल कांग्रेस और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के बीच तीखी बयानबाजी सामने आई है।

दरअसल, सीएम चंद्रबाबू नायडू ने विपक्ष पर महिला आरक्षण संशोधन बिल को रोकने का आरोप लगाया था, जिसके बाद कांग्रेस की केरल इकाई ने जवाब दिया। कांग्रेस ने सोशल मीडिया पोस्ट में सीएम नायडू पर आंध्र प्रदेश के साथ ‘विश्वासघात’ करने का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि उनकी यह भूमिका याद रखी जाएगी।

कांग्रेस ने अपने जवाब में यह भी कहा कि महिला आरक्षण संशोधन बिल 2023 में सभी दलों के समर्थन से सर्वसम्मति से पास हो चुका है। इस बयान के जरिए कांग्रेस ने सीएम नायडू के उस आरोप को खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष इस बिल को रोक रहा है।

इससे पहले सीएम नायडू ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम को रोक रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक बाधा बताया और कहा कि यह उन करोड़ों महिलाओं के साथ विश्वासघात है, जो संसद में समान प्रतिनिधित्व की हकदार हैं।

हालांकि, कांग्रेस ने इस मुद्दे को परिसीमन की ओर मोड़ते हुए कहा कि उसने ‘देश के भविष्य’ के लिए डिलिमिटेशन बिल का विरोध किया है। विपक्ष का मानना है कि अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो दक्षिण भारत के राज्यों (आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल) की राजनीतिक ताकत कम हो सकती है।

जहां एक तरफ महिला आरक्षण संशोधन बिल को महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं इसकी प्रक्रिया को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के कारण राजनीतिक जटिलताएं भी बढ़ गई हैं।

सीएम नायडू के बयान को सत्तारूढ़ गठबंधन के रुख के साथ जोड़ा जा रहा है, जबकि कांग्रेस इस बहस को संघीय संतुलन और क्षेत्रीय समानता के मुद्दे से जोड़ने की कोशिश कर रही है।

दोनों पक्षों के बीच ‘विश्वासघात’ और ‘प्रतिनिधित्व’ जैसे मुद्दों पर चल रही यह जुबानी जंग अब एक बड़े राष्ट्रीय विमर्श का रूप लेती जा रही है, जो सिर्फ महिला अधिकारों तक सीमित नहीं, बल्कि देश में राजनीतिक शक्ति के संतुलन से भी जुड़ी है।

पश्चिम बंगाल चुनाव: पहचान बनाम विकास की लड़ाई” पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति’

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पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, जहां चुनावी प्रतिस्पर्धा केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि विभिन्न मुद्दों के बीच भी हो रही है। एक ओर क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक मुद्दे हैं, जबकि दूसरी ओर विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर चर्चा बढ़ रही है। यह जानना आवश्यक है कि जनता किन मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लंबे समय से बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय गर्व को अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र बनाया है। उनकी नीति ‘बंगाल बनाम बाहरी’ की भावना को मजबूत करने पर आधारित है, जिससे एक बड़े वर्ग में समर्थन मिलता है। उनके समर्थकों का मानना है कि यह केवल राजनीति नहीं, बल्कि राज्य की भाषा, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का मामला है।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी विकास, उद्योग, निवेश और रोजगार को अपने चुनावी अभियान का मुख्य मुद्दा बनाकर मैदान में उतरी है। पार्टी का तर्क है कि बंगाल को तेज आर्थिक विकास की आवश्यकता है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे, उद्योगों और नई नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। बीजेपी का कहना है कि केवल पहचान की राजनीति से राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है।

जमीनी स्तर पर, मतदाताओं के बीच दोनों मुद्दों पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय पहचान और सामाजिक योजनाओं का प्रभाव अधिक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे अधिक महत्वपूर्ण बनते जा रहे हैं। युवा वर्ग विशेष रूप से नौकरी के अवसर और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में कोई एक मुद्दा निर्णायक नहीं होगा, बल्कि दोनों के बीच संतुलन ही परिणाम को प्रभावित करेगा। यदि अस्मिता की भावना मतदाताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ती है, तो विकास का एजेंडा उनके भविष्य की उम्मीदों को आकार देता है।

कुल मिलाकर, बंगाल का यह चुनाव विचारों की एक लड़ाई बन चुका है-जहां एक ओर पहचान और परंपरा की रक्षा का सवाल है, वहीं दूसरी ओर विकास और अवसरों की मांग है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे अधिक महत्व देती है और किसके पक्ष में अपना निर्णय सुनाती है।

‘महिला आरक्षण की आड़ में सत्ता कब्जाने की साजिश’, विपक्षी सांसदों ने दी प्रतिक्रिया’

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लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित न होने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस महिला विरोधी नहीं है, बल्कि लंबे समय से एक-तिहाई महिला आरक्षण की समर्थक रही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में लाए गए महिला आरक्षण कानून को कांग्रेस समेत सभी दलों ने सर्वसम्मति से समर्थन दिया था।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “हमने 2023 के संशोधन का एकमत से समर्थन किया और उसे पास किया। लेकिन उसकी आड़ में उन्होंने एक और संशोधन पेश किया उसमें एक डिलिमिटेशन क्लॉज डाल दिया, इस तरह महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन बिल को एक कर दिया। इन बिलों को एक साथ लाकर, वे सत्ता हासिल करना चाहते थे ताकि आगे कोई भी डिलिमिटेशन कानून सदन में सिंपल मेजॉरिटी से पास और बदला जा सके।”

उन्होंने कहा कि आपको यह 543 सदस्यों के अंदर करना चाहिए। अगली जनगणना या जाति जनगणना पूरी होने के बाद, आप इसे अगले चुनाव में पूरा कर सकते हैं। आपका इरादा संविधान के ढांचे को बदलना और एग्जीक्यूटिव पावर अपने हाथों में लेना है।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, “हमने पहले ही 2023 का महिला आरक्षण एक्ट बिना किसी सहमति के पास कर दिया था। अब सरकार को 2029 के चुनाव के लिए बिल को लागू करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी होगी। महिला आरक्षण को डिलिमिटेशन से जोड़ने का उनका एजेंडा कल फेल हो गया। क्योंकि वे अपनी सुविधा के हिसाब से डिलिमिटेशन करना चाहते हैं।”

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “आप उन्हें क्या कहेंगे जो लोकतंत्र के विरोधी हैं और उसका विरोध करके सत्ता में आने की कोशिश करते हैं? मैं तो बस यही कहूंगा कि कल लोकतंत्र की रक्षा हुई और भारत के संविधान को सुरक्षित रखा गया।”

कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, “कांग्रेस महिलाओं के लिए आरक्षण की सबसे बड़ी समर्थक है। यह विधेयक 2023 में कांग्रेस के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हुआ था। परसों उन्होंने एक अधिसूचना जारी की और उसके बाद वे महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की योजना बना रहे थे।”

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह विधेयक 2023 में कांग्रेस के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित हुआ था। एक बार फिर से चुनाव के दौरान ही सत्र बुलाया जा रहा है। जो सही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में आजतक एक महिला जज नहीं बनी है। महिलाओं पर शोषण हो रहा है, इस पर ये लोग कुछ नहीं बोल रहे है। जनता को गुमराह करने के लिए इस तरह का काम भाजपा कर रही है। महिलाओं का सम्मान बहुत ही कम हो रहा है।

समाजवादी पार्टी सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, “समाजवादी पार्टी, हमारे नेता महिला आरक्षण के पक्ष में मजबूती के साथ खड़े हैं। सदन ने सर्वसम्मति से 2023 में महिला आरक्षण को पास कर दिया था और अब संविधान संशोधन लेकर आए हैं, 2011 की जनगणना के अनुसार महिला आरक्षण देना चाहते हैं, यह उनकी साजिश है।”

Char Dham Yatra का शंखनाद! अक्षय तृतीया पर खुलेंगे गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट, जानें पूरी डिटेल’

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Char Dham Yatra 2026: उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा 2026 का शुभारंभ अक्षय तृतीया रविवार, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर होने जा रहा है। इसी के साथ गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।

अक्षय तृतीया के दिन सुबह शुभ मुहूर्त में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं, केदारनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए इस बार रुद्रप्रयाग प्रशासन ने ‘हाई-टेक’ सुरक्षा चक्र तैयार किया है। विस्तार से जानिए गंगोत्री धाम दर्शन करने की पूरी जानकारी…

गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया आज सुबह से ही शुरू हो गई है। धाम के तीर्थ पुरोहित अशोक सेमवाल ने बताया कि आज सुबह 8:30 बजे मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न किए गए। मां गंगा की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास ‘मुखबा’ से आज दोपहर 12:15 बजे गंगोत्री धाम के लिए रवाना हो गई है।

डोली शनिवार रात ‘धरानी घाटी’ (Dharanghati) में विश्राम करेगी और कल सुबह गंगोत्री मंदिर पहुंचेगी, जहां अक्षय तृतीया के अवसर पर कपाट खोले जाएंगे। डोली विदाई के समय सेना के बैंड की धुनों और स्थानीय भक्तों के जयकारों से पूरा मुखबा गांव गुंजायमान रहा।

देश-विदेश से श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने उत्तराखंड पहुंच चुके हैं। चारधाम यात्रा के आरंभ के साथ ही उत्तराखंड में श्रद्धालुओं की भीड़ तेजी से बढ़ रही है। गंगोत्री और यमुनोत्री के रास्तों पर भक्तों की आवाजाही शुरू हो चुकी है। प्रशासन ने भी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।

केदारनाथ यात्रा के लिए हाईटेक निगरानी सिस्टम

इस साल केदारनाथ यात्रा को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए प्रशासन ने हाईटेक व्यवस्था लागू की है। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि पूरे यात्रा मार्ग गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक निगरानी के लिए अत्याधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।

हर जिले में 24 घंटे संचालित होने वाले कंट्रोल रूम में पुलिस, प्रशासन और अन्य आवश्यक विभागों के कर्मचारी तैनात रहेंगे। यात्रा मार्ग पर 360 डिग्री कैमरे लगाए गए हैं, वहीं केदारनाथ हाईवे और मंदिर परिसर में करीब 90 अतिरिक्त कैमरे भी स्थापित किए गए हैं।

यात्रियों को मिलेगी रियल टाइम मदद

नई तकनीक के जरिए प्रशासन अब यात्रियों पर लगातार नजर रख सकेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता भी उपलब्ध कराएगा। कंट्रोल रूम से ही पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिए निर्देश दिए जा सकेंगे। अधिकारियों के मुताबिक, यह हाई क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

सुरक्षा और सुविधा पर विशेष ध्यान, श्रद्धा, आस्था और तकनीक का संगम

प्रशासन ने यात्रा मार्ग को सेक्टर और सब-सेक्टर में बांटकर अधिकारियों की तैनाती की है, ताकि हर हिस्से की निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाएं, ट्रैफिक मैनेजमेंट, और आपदा प्रबंधन की भी विशेष तैयारियां की गई हैं।

चारधाम यात्रा 2026 इस बार आस्था के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी संगम देखने को मिलेगा। जहां एक ओर पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान से हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रियों की सुरक्षा के लिए हाईटेक सिस्टम को शामिल किया गया है। अब देखना होगा कि इस बार की यात्रा कितनी सफल और सुरक्षित रहती है, लेकिन फिलहाल उत्तराखंड पूरी तरह से श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार नजर आ रहा है।

बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ हिमंत बिस्वा सरमा का हमला’

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य के संसाधनों का उपयोग “बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों” के लिए कर रही हैं, और कहा कि उन्हें सत्ता से हटाना आवश्यक है “वरना हम बंगाल खो देंगे।”

कलिम्पोंग में एक रैली को संबोधित करते हुए, भाजपा नेता ने दावा किया कि असम और त्रिपुरा में उनकी पार्टी की सरकारों ने भारत में “बांग्लादेशी मुसलमानों” के प्रवेश को रोका है, जबकि पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों का प्रवेश जारी है।

उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी ने बंगाल की पूरी खजाने को बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के लिए आवंटित कर दिया है। उन्होंने वोटों के लिए इस भूमि को बांग्लादेशी मुसलमानों को बेच दिया।”

सर्मा ने कहा कि ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान राज्य को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए कहा, “हमें ममता बनर्जी को बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में हटाना होगा, अन्यथा एक दिन बांग्लादेशी मुसलमान इस राज्य को हमसे ले लेंगे।”

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर बंगाल में कोई विकास नहीं हुआ है और सरकार में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सत्ता में आती है, तो वे “इस क्षेत्र से सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकाल देंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि यदि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बनाती है, तो वे गोरखालैंड मुद्दे का संवैधानिक समाधान खोजेंगे और “गोरखाओं के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे।”

इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि भाजपा का “अवसान” शुरू हो चुका है, क्योंकि केंद्र ने 2029 से विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित करने में विफल रहा।

हावड़ा जिले के उलूबेरिया में एक रैली को संबोधित करते हुए, बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा “हार गई” है और केवल अपने सहयोगियों के समर्थन से सत्ता में बनी हुई है।

उन्होंने कहा, “भाजपा का अवसान शुरू हो चुका है। हमने भाजपा को हराया है। उन्हें अपमानित किया गया है। उनके पास अपनी खुद की बहुमत नहीं है। वे दूसरों के समर्थन से सत्ता में हैं।”

भाजपा पर सीमांकन के लिए दबाव डालने के आरोप लगाते हुए, एआईटीसी प्रमुख ने कहा कि पार्टी देश को “बांटने” की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, “वे सीमांकन चाहते थे क्योंकि वे देश को बांटना चाहते थे। हमें महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए विधेयक लाने की आवश्यकता नहीं है।”

उन्होंने उन लोगों को चेतावनी दी जो “भाजपा के लिए काम कर रहे हैं” कि पार्टी केंद्र में लंबे समय तक सत्ता में नहीं रहेगी।

महिला आरक्षण अभी लागू करो, परिसीमन के हम खिलाफ’, प्रियंका गांधी का BJP पर सीधा प्रहार’

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संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक गिरने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। अब ‘INDIA’ गठबंधन के दलों ने केंद्र सरकार को घेरने के लिए साझा रणनीति तैयार की है।

विपक्ष ने मांग की है कि सरकार राजनीतिक पैंतरेबाजी छोड़कर पुराने महिला आरक्षण बिल को तुरंत प्रभाव से लागू करे। इस बीच अब कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के रुख पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है।

विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सभी घटक दल एकजुट होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र भेजने की तैयारी में हैं। इस पत्र के जरिए पुराने महिला आरक्षण बिल को बिना किसी शर्त के लागू करने की मांग की जाएगी।

जनता तक अपनी बात पहुंचाएगा विपक्ष

इसके साथ ही विपक्षी दल देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेंगे ताकि जनता को यह समझाया जा सके कि वे आरक्षण के विरोधी नहीं हैं, बल्कि सरकार की उस मंशा के खिलाफ हैं जिसके तहत आरक्षण की आड़ में देश के राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश की जा रही है। गठबंधन की बैठक में सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर सहयोगियों के समर्थन के लिए आभार भी जताया है।

प्रियंका गांधी की सीधी चुनौती

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार के रुख पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह सोमवार को ही संसद में वह पुराना महिला आरक्षण विधेयक पेश करे, जिस पर पहले ही व्यापक राजनीतिक सहमति बन चुकी थी।

प्रियंका गांधी का कहना है कि विपक्ष उस बिल का तुरंत समर्थन करने के लिए तैयार है। उन्होंने साफ किया कि विपक्ष संविधान की रक्षा करने और परिसीमन के जरिए रची गई साजिश को नाकाम करने में सफल रहा है। उन्होंने सरकार को ललकारते हुए कहा कि अगर मंशा साफ है, तो सोमवार को बिल लाएं और देख लें कि कौन वास्तव में महिला विरोधी है।

आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज का दिन सरकार के लिए एक ‘काला दिन’ है क्योंकि उन्हें पहली बार वह झटका लगा है जिसके वे हकदार थे। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि आज महिलाओं की समस्याएं और संघर्ष लगातार बढ़ रहे हैं और महिलाएं मूर्ख नहीं हैं, वे सब देख रही हैं।

प्रियंका ने चेतावनी देते हुए कहा कि अब पीआर (PR) और मीडिया का शोर काम नहीं आएगा; अगर सरकार वाकई कुछ ठोस करना चाहती है, तो साल 2023 में सर्वसम्मति से पारित किए गए उस पुराने बिल को वापस लाए जिसे सभी दलों का समर्थन प्राप्त था। उन्होंने मांग की कि अगर जरूरत हो तो उसमें छोटे संशोधन करके उसे इसी वक्त लागू किया जाए और महिलाओं को उनके अधिकार तुरंत दिए जाएं। प्रियंका ने सरकार को आगाह किया कि आरक्षण को अन्य मुद्दों के साथ उलझाकर महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश न की जाए, विपक्ष इस पर हर सहयोग के लिए तैयार है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि, ‘हम बहुत साफ़ तौर पर कह रहे हैं, और हम यह हर मंच से कहेंगे, हम यह हर राज्य में कहेंगे-सिर्फ़ कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि INDIA गठबंधन की हर पार्टी यह बहुत साफ़ तौर पर कहेगी। वह 2023 का कानून वापस लाओ जो पास हुआ था; उसमें जो भी बदलाव करना चाहते हो, करो, ताकि 2029 तक उसे लागू किया जा सके- हम उसका पूरा समर्थन करेंगे।

सरकार पर बहुत ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय दबाव

उन्होंने कहा कि, ‘इस सरकार के लिए हालात बदल गए हैं। उनके कामों से यह साफ़ दिखाई देता है। पहली बात तो यह कि उन पर बहुत ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय दबाव है। वे जो भी कदम उठा रहे हैं- जैसा कि मेरे भाई ने कई बार कहा है- मुझे नहीं लगता कि कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री अमेरिका के साथ की गई डील की शर्तें स्वीकार करता, जब तक कि उस पर बहुत ज़्यादा दबाव न होता। जनता कई तरह की समस्याओं से जूझ रही है; गैस, फल, सब्ज़ियों-हर चीज़ के दाम बढ़ गए हैं। इसका बोझ महिलाओं के कंधों पर है। वे अपने महिला मोर्चा को जिसके भी घर के सामने ले जाना चाहें, ले जा सकते हैं। वे जितना चाहें, उतना तमाशा कर सकते हैं। इस देश की जनता अब जाग चुकी है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा कहती हैं, ‘जिस तरह से वे यह बिल लाए हैं, जिन चीज़ों को उन्होंने इसके साथ जोड़ा है- जैसे परिसीमन और 2011 की जनगणना-उससे यह साफ़ ज़ाहिर होता है कि उन्हें पहले से ही पता था कि यह बिल पास नहीं हो पाएगा। वे तो बस इसका राजनीतिक श्रेय लेना चाहते थे।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि, ‘हमारा रुख़ बहुत साफ़ है। पूरे INDIA गठबंधन ने अपना रुख़ बहुत साफ़ कर दिया है, और इस वोट से यह बात और भी ज़्यादा साफ़ हो गई है कि-हमारी समझ के अनुसार- यह जो बिल पेश किया गया था और जिस पर तीन दिनों तक चर्चा हुई, वह महिलाओं के आरक्षण के बारे में नहीं था; वह पूरी तरह से परिसीमन के बारे में था, और हम सभी ने इस विषय पर अपने विचार बहुत साफ़ तौर पर व्यक्त कर दिए हैं।’

लोकसभा में क्यों फेल हुआ संविधान संशोधन विधेयक?

शुक्रवार को सदन में हुई वोटिंग के दौरान भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही, जिसके कारण संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका। मैराथन बहस के बाद हुए मतदान में बिल के समर्थन में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सदस्यों ने इसके विरोध में मतदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक सीमा तक वोट न मिलने के कारण यह बिल गिर गया है। इस विधेयक की सबसे बड़ी बाधा इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ना था, जिसे विपक्ष ने चुनावी ढांचे के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश करार दिया।

परिसीमन के पेंच पर अड़ा विपक्ष और सरकार का रुख

विपक्षी खेमे से शशि थरूर जैसे नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे महिलाओं को अधिकार देने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन के साथ उलझाना तर्कसंगत नहीं है। थरूर का कहना है कि परिसीमन एक बेहद गंभीर और अलग विषय है जिस पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है, इसलिए आरक्षण को इससे अलग कर तुरंत लागू किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर इस महत्वपूर्ण सुधार को रोकने का आरोप लगाया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी संकेत दिया है कि सरकार फिलहाल इससे जुड़े अन्य सहायक विधेयकों को आगे नहीं बढ़ाएगी।