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भारत-अमेरिका ट्रेड डील का काउंटडाउन! जयशंकर ने बता दिया सीक्रेट, बोले- ‘बहुत जल्द…’

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भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है और इसे बहुत जल्द पूरा किए जाने की उम्मीद है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को वॉशिंगटन यात्रा से लौटने के बाद यह बात कही.

यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही दोनों देशों ने भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है. माना जा रहा है कि इस समझौते के बाद भारत-अमेरिका रिश्तों में एक नया दौर शुरू होगा.

वॉशिंगटन दौरे के बाद बड़ा बयान

एस. जयशंकर अमेरिका में अहम खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर हुई मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने गए थे. इस दौरान उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की और व्यापार व आर्थिक सहयोग पर बातचीत की. जयशंकर ने बताया कि इस व्यापार समझौते का काम वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल देख रहे हैं और समयसीमा को लेकर उनके पास अभी पक्की जानकारी नहीं है.

सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, ‘अमेरिका की यात्रा सकारात्मक और उपयोगी रही. भारत-अमेरिका का ऐतिहासिक व्यापार समझौता अब अंतिम दौर में है और बहुत जल्द पूरा हो जाएगा. इससे दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय खुलेगा और आगे कई नई संभावनाएं बनेंगी.’

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स पर सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है. आने वाले दिनों में रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा पर भी बातचीत देखने को मिलेगी. कुल मिलाकर, दोनों देशों के रिश्तों में अब साफ तौर पर अच्छी गति दिख रही है, खासकर उन महीनों के बाद जब व्यापार से जुड़े मुद्दों पर तनाव देखा गया था.

टैरिफ पर क्या बोले विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि अमेरिकी पक्ष ने साफ कर दिया है कि भारतीय सामान पर अंतिम टैरिफ 18% होगा. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सोमवार को हुई फोन बातचीत के बाद आए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि पीएम ने भी बताया था कि भारतीय उत्पाद अब 18% के कम टैरिफ पर अमेरिका भेजे जाएंगे.

रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘यह व्यापार समझौता हमारे निर्यात को बड़ा बढ़ावा देगा. इससे भारत के श्रम-आधारित उद्योगों को फायदा होगा, नए रोजगार के मौके बनेंगे और देश में विकास व समृद्धि आएगी.’

पहला चरण में होगा यह समझौता

मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि 18% का यह कम टैरिफ तब लागू होगा, जब सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी और दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे देंगे. यह भारत-अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण होगा.

स्कॉट बेसेंट के साथ बैठक में जयशंकर ने दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की. वहीं, मार्को रुबियो के साथ हुई बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, परमाणु, रक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक जैसे मुद्दे शामिल रहे. दोनों पक्षों ने साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग तंत्रों की जल्द बैठक करने पर भी सहमति जताई.

संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बरकरार

इस पूरे मामले से जुड़े लोगों ने यह भी बताया कि भारत की ओर से अमेरिकी सामान पर टैरिफ शून्य किए जाने की संभावना कम है. भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपने हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम सुनिश्चित किए हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क, जिसमें नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की बैठकें भी शामिल हैं, इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भारत और अमेरिका कई क्षेत्रों में रिश्तों को फिर से संतुलित और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके.

ट्रेन से मिसाइल दागेगा भारत, ‘अग्नि’ से कांप उठेंगे चीन-पाकिस्तान, रूस से अमेरिका तक किसी के पास नहीं ‘घोस्ट’

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भारत की अग्नि प्राइम मिसाइल ने एक और बड़ा कारनामा कर दिखाया है. इस बार अग्नि को रेल-आधारित लॉन्च से दागा गया, जिसके बाद दुनियाभर का ध्यान भारत के परीक्षण पर टिक गया है. इससे चीन और पाकिस्तान में काफी चिंता और दहशत फैल गई है.

यह मिसाइल भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई दे रही है और इसे ‘घोस्ट ट्रेन’ जैसा हथियार कहा जा रहा है, क्योंकि भारत के विशाल रेल नेटवर्क पर यह आसानी से छिप सकती है और दुश्मन के लिए ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.

9 हजार किमी की रफ्तार से आगे बढ़ती अग्नि

ओडिशा के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से 24 दिसंबर 2025 को अग्नि प्राइम का सफल परीक्षण हुआ था, जो रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से किया गया. यह मिसाइल मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है, जिसकी रेंज लगभग 2 हजार किलोमीटर तक है. यह सॉलिड-प्रोपेलेंट वाली मिसाइल है, और कैनिस्टर लॉन्च्ड है. इस वजह से फ्यूलिंग की जरूरत नहीं पड़ती और इसे बहुत तेजी से लॉन्च किया जा सकता है. इसकी स्पीड 8,500 से 9,000 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो इसे नई पीढ़ी की मिसाइल बनाती है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है, जिससे भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस मजबूत हो गया है.

रेल-आधारित होने की वजह से यह मोबाइल और छिपने में माहिर है. दुश्मन के सैटेलाइट के लिए इसे ढूंढना ‘हजारों टन भूसे में सूई ढूंढने’ जैसा है. हालांकि रेल से लॉन्च की लागत ज्यादा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए यह जरूरी माना जा रहा है. भारत ने इसे दो मुख्य जगहों पर तैनात किया है:

महाराष्ट्र के पुणे जिले में देहू (पाकिस्तान सीमा से 700 किमी से कम दूरी पर).

असम के नागांव जिले में मिस्सा (चीन पर निशाना साधने के लिए सटीक जगह).

यहां रेल साइडिंग, रिट्रैक्टेबल शेल्टर और लॉन्च एरिया तैयार हैं.

अग्नि की क्षमता से कापेंगे चीन और पाकिस्तान

चीन और पाकिस्तान में डर की सबसे बड़ी वजह इसकी मोबिलिटी और छिपने की क्षमता है. अमेरिकी थिंक टैंक IISS के मुताबिक, रेल-माउंटेड मिसाइलें स्वाभाविक रूप से मोबाइल होती हैं और इन्हें ट्रैक करना मुश्किल होता है. पाकिस्तान के लिए देहू से दूरी कम होने से पूरा देश निशाने पर आ जाता है. चीन के लिए उत्तर-पूर्व के अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों से हमला आसान हो जाता है. रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी ने कहा कि चीन की आक्रामकता को देखते हुए भारत को ऐसी मिसाइलों की जरूरत है, जो दुश्मन के खास इलाकों को पूरी तरह तबाह कर सकें.

रेल-आधारित मिसाइलें किन देशों के पास हैं?

दुनिया में रेल-आधारित मिसाइलें कम देशों के पास हैं:

रूस ने RT-23 और बार्गुजिन प्रोजेक्ट किए, लेकिन महंगे होने से बंद कर दिए.

अमेरिका ने पीसकीपर पर विचार किया लेकिन आगे नहीं बढ़ाया.

चीन ने DF-41 का टेस्ट किया लेकिन पूरी रेल क्षमता नहीं बना पाया.

उत्तर कोरिया ने ह्वासोंग-11A का दावा किया.

भारत की अग्नि प्राइम मिसाइल पुरानी अग्नि-1, अग्नि-II की जगह लेगी और अग्नि-III की तरह रेल-मोबाइल है. जून 2025 में हुए ईरान-इजरायल युद्ध से सीख मिली कि मोबाइल लॉन्चर नष्ट हो सकते हैं, लेकिन रेल नेटवर्क पर अदृश्य रहना संभव है. IISS का कहना है कि यह क्षमता पहले हमले से बचाव में मदद करती है, लेकिन हथियार नियंत्रण को चुनौती देती है. यह परीक्षण भारत के मिसाइल कार्यक्रम की सफलता दिखाता है, जो शीतयुद्ध से प्रेरित रेल-मोबाइल तकनीक पर फोकस करता है. इससे भारत की क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस मजबूत होती है और पड़ोसी देशों के लिए रणनीतिक संतुलन बदल रहा है.

नागपुर के जंगलों में छुपी 1000 साल पुरानी कर्पूर बावड़ी, जिसका पानी कभी नहीं सूखता!

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महाराष्ट्र के रामटेक के पास जंगलों और छोटी-छोटी पहाड़ियों के बीच बसा, करपुर बावड़ी नागपुर के सबसे कम सराहे गए धरोहर स्थलों में शामिल है.

यह प्राचीन सीढ़ीदार कुआं प्राचीन और स्थानीय लोककथाओं से घिरी हुई है, शहर के आम पर्यटक पर्यटक मार्गों से दूर इस इलाके के समृद्ध इतिहास की झलक पेश करती है.

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करपुर बावली कहां हैं?

करपुर बावड़ी का निर्माण 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का माना जाता है, जो रामटेक मंदिर परिसर के अंदर स्थित है. भारत में बावड़ियां कभी दैनिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करती थीं, जिनका इस्तेमाल पीने, धार्मिक अनुष्ठानों और खेती के लिए पानी जमा करने के लिए किया जाता था.

इस बावड़ी की खास बात ये है कि, माना जाता है कि, इसके निर्माण के दिन से लेकर आज तक किसी भी मौसम चाहे वर्षा ही क्यों न हो इसका जल स्थिर रहा है. आज यह बावड़ी घने जंगलों से घिरी पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है.

इसे कर्पूर बावली क्यों कहते हैं?

कर्पूर का मतलब कपूर होता है, जबकि बावड़ी का अर्थ पानी की टंकी या सीढ़ीदार कुआं होता है. स्थानीय लोककथाओं की माने तो, यहां के पानी में कभी कपूर जैसी सुंगध हुआ करती थी और माना जाता था कि, इसमें औषधीय गुण हैं. हालांकि अब वह सुगंध महसूस नहीं होती है, फिर भी यह नाम सालों से प्रचलित है.

कर्पूर बावड़ी मात्र एक जल संरचना नहीं, बल्कि एक पूजा स्थल भी है. यह स्थल 6 देवियों मां चामुंडा, इंगलाज, काली, रणचंडी और कपूरता को समर्पित है. सीढ़ीदार कुएं के किनारे एक छोटा काली मंदिर आज भी मौजूद है.

वास्तुकला के नजरिए से बावड़ी में तीनों ओर स्ंतभों वाला गलियारा है और आंशिक रूप से ढह चुके गर्भगृह के अवशेष भी हैं, जिसमें कभी एक देवी विराजती थीं. समय के साथ-साथ इसकी संरचना जर्जर होते चली गई, लेकिन फिर भी अपने युग की ये बेहतरीन शिल्पकारी थी.

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कर्पूर बावली का निर्माण किसने किया?

इतिहासकारों की मानें तो इस सीढ़ीदार कुएं का निर्माण यादव वंश के शासन काल में हुआ था, जिसने 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच वर्तमान समय के महाराष्ट्र के बड़े क्षेत्र पर शासन किया था. इसकी स्थाप्य शैली और बनावट उस काल के मंदिर से जुड़े जल संरचनाओं के अनुरूप है. अपनी प्राचीनता के बावजूद यह स्थल काफी हद तक अज्ञात है, जहां आज भी काफी कम लोग आते हैं.

यह बावड़ी रामटेक में श्री शांतनाथ दिगंबर जैन मंदिर से करीब 1 किलोमीटर दूर पर स्थित है. बावड़ी और उसके आसपास के इलाको में घूमने में आतौर पर 1 घंटे का समय लगता है. यहां कोई औपचारिक सुविधाएं नहीं, बल्कि आंगतुकों को अपनी योजना के मुताबिक बनानी चाहिए और इस स्थान का सावधानीपूर्वक ध्यान रखना चाहिए.

आप नजदीक के ही पहाड़ी पर स्थित रामटेक किले का दौरा भी कर सकते हैं, जहां से आसपास के ग्रामीण इलाकों का मजेदार दृश्य देखने को मिलता है. यहां आप खिंडसी झील भी देख सकते हैं, जो नौका विहार या पिकनिक मानने के लिए बेहतरीन जगह है.

क्रिप्टो निवेशकों को लगा 440 वोट का झटका! बिटकॉइन 67 हजार डॉलर से नीचे फिसला, एथेरियम-सोलाना भी धड़ाम…

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क्रिप्टोकरेंसी बाजार में एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिल रही है. लगातार हो रही बिकवाली के दबाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. बीते कुछ दिनों से बिटकॉइन में तो जबरदस्त सेलिंग देखने को मिल रही है.

क्रिप्टो बाजार में यह गिरावट तब शुरू हुई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के तौर पर केविन वॉर्श को नामित किया था.

इसके बाद निवेशकों ने रिस्की एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी. भारी दबाव के चलते बिटकॉइन की कीमत 67,000 डॉलर से नीचे फिसल गई है. जबकि क्रिप्टो मार्केट कैप घटकर 2.27 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है. आइए जानते हैं, बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी का क्या हाल है…..

बिटकॉइन में जोरदार गिरावट

कॉइनमार्केटकैप के अनुसार सुबह करीब 11:45 बजे बिटकॉइन 66,656.83 डॉलर पर कारोबार कर रहा था. आंकड़ों की बात करें तो, पिछले 24 घंटे में इसमें करीब 5.29 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही थी. वहीं, बीते 7 दिनों में बिटकॉइन लगभग 19.44 फीसदी टूट चुका है.

इन आंकड़ों से साफ है कि हाल के दिनों में क्रिप्टो बाजार पर दबाव बना हुआ है और बिटकॉइन में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. निवेशक लगातार बिटकॉइन की बिकवाली कर रहे हैं.

एथेरियम की मौजूदा स्थिति

कॉइनमार्केटकैप के अनुसार एथेरियम की मौजूदा कीमत करीब 1,962.48 डॉलर है. पिछले 24 घंटे में इसमें लगभग 5.53 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, बीते 7 दिनों में एथेरियम करीब 28.32 प्रतिशत टूट चुका है. जिससे साफ है कि एथेरियम पर हाल के दिनों में काफी दबाव बना हुआ है.

टीथर की कीमत

टीथर की कीमत फिलहाल लगभग 0.9988 डॉलर पर बनी हुई है. पिछले 24 घंटे में इसमें करीब 0.09 फीसदी की मामूली बढ़त देखने को मिली है. वहीं, 7 दिनों में इसमें लगभग 0.05 प्रतिशत की हल्की तेजी दर्ज की गई है. स्टेबल कॉइन होने की वजह से टीथर में ज्यादा उतार-चढ़ाव नजर नहीं आ रहा है.

बीएनबी, सोलाना और डॉजकॉइन की कीमत

बीएनबी की मौजूदा कीमत करीब 639.84 डॉलर है, जिसमें पिछले 24 घंटे में लगभग 7.42 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. जबकि बीते 7 दिनों में यह करीब 24.38 प्रतिशत कमजोर हुआ है. वहीं, सोलाना इस समय करीब 81.35 डॉलर पर कारोबार कर रहा है और इसमें पिछले 24 घंटे में लगभग 9.99 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली है.

वहीं, पिछले 7 दिनों में यह करीब 29.37 फीसदी टूट चुका है. दूसरी ओर, डॉजकॉइन की मौजूदा कीमत लगभग 0.09320 डॉलर है. जिसमें बीते 24 घंटे में करीब 8.46 प्रतिशत की गिरावट आई है और पिछले 7 दिनों में यह लगभग 18.65 फीसदी कमजोर हुआ है.

देहरादून एयरपोर्ट के आस-पास में बिना अनुमति निर्माण पर कार्रवाई, AAI ने जारी किया आदेश…

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देहरादून स्थित जॉलीग्रांट एयरपोर्ट के आसपास निर्माण कार्य को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. AAI के अनुसार एयरपोर्ट के 20 किलोमीटर के दायरे में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करने से पहले अनिवार्य रूप से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होगा.

बिना अनुमति किया गया निर्माण विमानन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाएगा.

AAI ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश यात्रियों और विमानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किए गए हैं. एयरपोर्ट के आसपास ऊंची इमारतें, टावर या अन्य संरचनाएं विमान के उड़ान और लैंडिंग के दौरान जोखिम पैदा कर सकती हैं. ऐसे में नियमों का उल्लंघन न केवल सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है, बल्कि यह कानूनी अपराध की श्रेणी में भी आता है.

बिना NOC निर्माण करने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

AAI के मुताबिक एयरक्राफ्ट एक्ट 1934 की धारा 9A के तहत एयरपोर्ट के आसपास निर्धारित क्षेत्र में किसी भी निर्माण के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक है. इस नियम के तहत बिना NOC निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है. जिसमें निर्माण को ध्वस्त करना, जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है.

निर्माण कार्यों से पहले प्राधिकरण से अनुमति ले लोग- प्रशासन

एयरपोर्ट प्रशासन ने बिल्डरों, भू-स्वामियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार का निर्माण शुरू करने से पहले संबंधित प्राधिकरण से अनुमति अवश्य लें. सुविधा को ध्यान में रखते हुए NOC के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है. जिससे लोग आसानी से प्रक्रिया पूरी कर सकें.

नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ नहीं बरती जाएगी ढिलाई

AAI का कहना है कि कई मामलों में जानकारी के अभाव में लोग नियमों का उल्लंघन कर देते हैं. जिससे बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी को देखते हुए यह चेतावनी जारी की गई है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की चूक से बचा जा सके. प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी. यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसे लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा.

“Paro Pinaki Ki Kahani Review: ये है असली सैयारा, दिल छू लेगी ये फिल्म”

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मैं किसी रेल सा, तू पटरी के किनारे का घर जब भी गुजरती है तो बच्चा बाहर आता है और हाथ हिलाता है. अब बच्चे के हाथ हिलाने का मतलब क्या है, दिल का धड़कना. इन खूबसूरत लाइनों जैसी ही खूबसूरत है ये फिल्म.इन दिनों लव स्टोरीज का ट्रेंड खूब है.

सैयारा के बाद कई तरह की लव स्टोरीज आई लेकिन ये है असली सैयारा जो प्रेम का असली मतलब समझाती है.

कहानी – ये कहानी है एक सीवर साफ करने वाले लड़के और सब्जी बेचने वाली लड़की की, दोनों प्यार करते हैं. ट्रेन में मिलते हैं लेकिन इनकी मोहब्बत आसान नहीं है, यहां मोहब्बत का दुश्मन को इंसान नहीं कोई और है. वो क्या है, ये जानने थिएटर चले जाइए.

कैसी है फिल्म – ये एक दिल को छू लेने वाली फिल्म है,फिल्म आपको कई जगह इमोशनल करती है. आपको चौंकाती है, आपको सोचने पर मजबूर करती है. लड़की जब लड़के से कहती है कि तुम ये काम क्यों करते हो तो वो कहता है कोई भी कोई काम क्यों करता है.पैसों के लिए तो आप सीवर साफ करने वालों का दर्द समझते हैं. ये लड़का बड़े आराम से कहता है कि सीवर साफ करने वालों का 40 की उम्र के बाद शरीर खराब हो जाता है तो आप इन कर्मचारियों के दर्द को खुद फील करते हैं. ये लड़की जब कहती है कि कभी कभी ऐसा लगता है कि मेरे बाप ने मुझे रखा ही इसलिए है कि मैं सब्जी बेचने में उसकी मदद कर सकूं तो आप इस लड़की की कहानी में उसके साथ हो लेते हैं. फिल्म अच्छी पेस पर चलती है, कहीं खींची हुई नहीं लगती. म्यूज़िक अच्छा है और फिल्म के फील को और बढ़ाता है. इनके रोमांस के सीन दिल को छूते हैं, क्लाइमैक्स चौंकाता है और फिल्म एंड में आपको कुछ सोचने पर मजबूर करती है.

एक्टिंग – इशिता सिंह ने कमाल का काम किया है.उन्होंने इसके लिए अपना लुक बदला है. स्किन टोन डार्क की है, और इस किरदार में जान डाल दी है.उनके गजब का कॉन्फिडेंस दिखता है, संजय बिश्नोई एक सीवर साफ करने वाले के दर्द को जैसे दिखते हैं. उससे आपको लगता है कि उनके अलावा ये किरदार कोई कर ही नहीं सकता. एक सीन में उनके शरीर से बदबू आती है, वो सीन इतना कमाल का है कि आप उनके कायल हो जाएंगे.हनुमान सोनी ने बढ़िया काम किया है.

राइटिंग और डायरेक्शन – Rudra jadon ने फिल्म को कमाल तरीके से लिखा है और डायरेक्शन भी अच्छा है. कहीं कोई सीन एकस्ट्रा नहीं लगता, फिल्म की पेस अच्छी रखी गई है ताकि दर्शक कहीं बोर न हो.कुल मिलाकर ये दिल को छू लेने वाली फिल्म जरूर देखिए.

‘अगर कोई मंत्री या मंत्री का बेटा.’, नीट कांड पर सम्राट चौधरी का बड़ा बयान, राबड़ी देवी से मांगा ‘सबूत’

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नीट छात्रा की मौत को लेकर सियासत भी रही है. बीते गुरुवार (05 फरवरी, 2026) को राबड़ी देवी ने यह कहा था कि इसमें कोई मंत्री या मंत्री का बेटा शामिल है. इस पर अब बिहार के उपमुख्यमंत्री सह गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा बयान दिया है.

शुक्रवार (06 फरवरी, 2026) को सम्राट चौधरी ने राबड़ी देवी को चैलेंज किया. सबूत मांगा. 24 घंटे में कार्रवाई की बात कही.

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “विपक्ष राजनीति कर रहा है. राबड़ी देवी विपक्ष की नेता हैं. राबड़ी देवी जी बिहार की मुख्यमंत्री रही हैं. उनसे ये उम्मीद नहीं है. अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. सबसे बड़ी चीज है यदि राबड़ी देवी जी को ये पता है कि कोई मंत्री का बेटा उसमें शामिल है तो नाम दें, नाम बताएं, यदि नहीं बता रही हैं इसका मतलब है साक्ष्य छुपा रही हैं. राबड़ी देवी को जनता के बीच में नाम बताना चाहिए. मैं गारंटी देता हूं किसी भी मंत्री या मंत्री के बेटे का नाम आएगा तो 24 घंटे के भीतर जेल में डालने का काम करूंगा.”

“राबड़ी देवी जी जनता के बीच नाम बताएं, मैं गारंटी देता हूँ किसी भी मंत्री या मंत्री के बेटे का नाम आएगा तो 24 घंटे के अंदर जेल में डालूंगा।”

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य मिशन को रफ्तार, 10 फरवरी से फाइलेरिया उन्मूलन का महाअभियान…

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संवाद ऑडिटोरियम में गुरुवार को छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसमें प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की वर्तमान स्थिति, पिछले दो वर्षों में किए गए सुधारों और आने वाले तीन वर्षों की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चिकित्सा शिक्षा विभाग, आयुष विभाग के प्रतिनिधि, मीडिया कर्मी और विकास सहयोगी संस्थाएं मौजूद रहीं। बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने, नई योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने, टीबी मुक्त भारत अभियान और संक्रामक बीमारियों से निपटने की रणनीतियों पर विशेष चर्चा हुई।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर सरकार का जोर

स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता मजबूत और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था बनाना है। सरकार केवल इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि बीमारियों की रोकथाम, समय पर जांच और बेहतर इलाज पर भी बराबर ध्यान दे रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पीपीपी मॉडल के तहत नए मेडिकल कॉलेज खोल रही हैं, आधुनिक अस्पताल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है और आम जनता को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं।

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए एमडीए अभियान की शुरुआत

प्रेसवार्ता में फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन के लिए शुरू होने वाले सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम की भी जानकारी दी गई। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यह बीमारी संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है और लंबे समय बाद गंभीर रूप ले सकती है, जिससे व्यक्ति को जीवनभर परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि सही समय पर दवाएं लेने से इस बीमारी से पूरी तरह बचा जा सकता है।

18 जिलों में चलेगा विशेष अभियान

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि एमडीए कार्यक्रम 10 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक चलेगा। यह अभियान प्रदेश के 18 जिलों के 65 प्रभावित विकासखंडों में संचालित किया जाएगा। इस दौरान करीब 1 करोड़ 58 लाख से अधिक लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवाएं दी जाएंगी। 15 जिलों में तीन प्रकार की दवाएं — आईवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल दी जाएंगी। वहीं, 3 जिलों में डीईसी और एल्बेंडाजोल का उपयोग किया जाएगा।

दवा सेवन को लेकर जरूरी निर्देश

स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। हालांकि 2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार लोगों को दवा नहीं दी जाएगी। उन्होंने सभी पात्र लोगों से अपील की कि वे स्वास्थ्य कर्मचारियों की मौजूदगी में ही दवा लें और इसे खाली पेट न लें।

जनसहयोग से ही होगा फाइलेरिया का अंत

अंत में श्री जायसवाल ने मीडिया, जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, नगर निकायों और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया कि वे फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को जनआंदोलन का रूप दें। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का हर वर्ग इसमें सक्रिय रूप से भाग नहीं लेगा, तब तक इस बीमारी को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं होगा। जागरूकता और सहयोग से ही छत्तीसगढ़ को फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सकता है।

CG: जशपुर को बड़ी सौगात! मयाली बनेगा ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन…

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मयाली-बगीचा विकास परियोजना का भूमिपूजन किया, और कहा कि पर्यटन, रोजगार, स्किल सेंटर और इको-टूरिज्म से जशपुर को वैश्विक पहचान मिलेगी.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-योजना सीबीडीडी के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना का मयाली नेचर कैंप में विधिवत भूमिपूजन किया. लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित इस परियोजना के तहत मयाली, विश्व प्रसिद्ध मधेश्वर पर्वत (विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग) तथा बगीचा स्थित कैलाश गुफा क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा.

यह परियोजना क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समुदाय आधारित पर्यटन को सशक्त बनाएगी. इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जशपुर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलेगी.

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि मयाली-बगीचा विकास परियोजना जशपुर जिले के पर्यटन विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है. आज मयाली के विकास की मजबूत नींव रखी गई है. मयाली अब पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में यह एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा.

मधेश्वर महादेव पर्यटन विकास योजना- सीएम साय

मुख्यमंत्री ने कहा कि मयाली की पहचान सदियों से मधेश्वर महादेव से जुड़ी रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है. इस विकास परियोजना के माध्यम से मधेश्वर पर्वत के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. परियोजना के अंतर्गत मयाली डेम के समीप पर्यटक रिसोर्ट एवं स्किल डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि मयाली को एक समग्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा. यहां के जंगल, झरने, पहाड़ और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाएगा. पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा.  साय ने कहा इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा होम-स्टे नीति लागू की गई है, जिससे ग्रामीण परिवार पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़कर आय अर्जित कर सकेंगे और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा.

युवाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र- सीएम साय

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आई है. स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टूर गाइड, होटल सेवा, एडवेंचर स्पोर्ट्स, हस्तशिल्प एवं डिजिटल बुकिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा. इससे न केवल पर्यटन बल्कि जशपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी.

मयाली क्षेत्र को प्राकृतिक, धार्मिक एवं ग्रामीण पर्यटन के समग्र गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा. परियोजना के अंतर्गत 5 पर्यटक कॉटेज, कॉन्फ्रेंस एवं कन्वेंशन हॉल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, भव्य प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, आधुनिक टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का निर्माण किया जाएगा. इन सुविधाओं से पर्यटकों के ठहराव एवं विभिन्न आयोजनों की बेहतर व्यवस्था होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे.

धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने के लिए शिव मंदिर क्षेत्र में प्रवेश द्वार, टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का विकास किया जाएगा. वहीं बगीचा स्थित कैलाश गुफा परिसर में प्रवेश द्वार, पिकनिक स्पॉट, रेस्टिंग शेड, घाट विकास, पाथवे तथा सीढ़ियों एवं रेलिंग का जीर्णद्धार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक अनुभव मिलेगा.

यह समस्त कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से किए जाएंगे. परियोजना के पूर्ण होने से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक-प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है.

PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना में रचा राष्ट्रीय कीर्तिमान, देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण…

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PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि योजना के प्रारंभ से अब तक पहली बार छत्तीसगढ़ ने किसी एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख आवासों के निर्माण का रिकॉर्ड कायम किया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर सुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिणामोन्मुख प्रशासन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की पहली ही बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था। निर्णय के परिपालन में राज्य के सभी जिलों के सतत, संगठित एवं अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है।

चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि योजना के प्रारंभ से अब तक पहली बार छत्तीसगढ़ ने किसी एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख आवासों के निर्माण का रिकॉर्ड कायम किया है। मानसून अवधि सहित औसतन प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण कर राज्य ने समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और लक्ष्यबद्ध कार्य निष्पादन की नई मिसाल कायम की है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिलों की सक्रिय भागीदारी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक कार्य संस्कृति इस उपलब्धि का मजबूत आधार बनी है। इस क्रम में बिलासपुर जिले में 29 हजार 235, महासमुंद में 27 हजार 224, बलरामपुर में 27 हजार 12, कोरबा में 26 हजार 839 तथा रायगढ़ जिले में 26 हजार 707 आवासों का निर्माण पूर्ण कर इन जिलों ने राज्य की समग्र उपलब्धि में अग्रणी भूमिका निभाई है।इसके अतिरिक्त मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली एवं जैजैपुर जनपद पंचायतों द्वारा भी 7,500 से अधिक प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कर उल्लेखनीय योगदान दिया गया है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका सृजन को भी समान प्राथमिकता दी गई है। महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री आपूर्ति का कार्य प्रारंभ किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। इस पहल के परिणामस्वरूप 8,000 से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बनकर उभरी हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को कौशल से जोड़ने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जिलों में स्थित आरसेटी के माध्यम से 6,000 से अधिक हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 960 से अधिक महिलाएँ तथा 292 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली शामिल हैं। यह पहल कौशल विकास के साथ-साथ सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ाव का प्रभावी माध्यम बन रही है।

आवास हितग्राहियों की निजी भूमि पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत आजीविका संवर्धन हेतु विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनके तहत वर्तमान में प्रदेश में 10,000 से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण प्रगतिरत है।

इस प्रकार छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से न केवल आवासों का तीव्र गति से निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि इनके साथ-साथ स्थायी आजीविका के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं, जो राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत चालू वित्तीय वर्ष 2025 -26 में मात्र 10 माह की अवधि में छत्तीसगढ़ में 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण होना, जो देश में सर्वाधिक है, छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। मैंने प्रथम कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय इसलिए लिया, ताकि राज्य का कोई भी गरीब और जरूरतमंद परिवार पक्के घर से वंचित न रहे।

यह उपलब्धि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति, प्रशासनिक समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। मेरे लिए प्रधानमंत्री आवास केवल एक मकान नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार हैं, और इनके माध्यम से आजीविका के अवसर सृजित कर हम छत्तीसगढ़ को समावेशी और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।”- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

“प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ द्वारा 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण करना राज्य की प्रशासनिक क्षमता, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर देने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका, कौशल प्रशिक्षण और महिला सशक्तिकरण को जोड़कर योजना को समग्र विकास का माध्यम बनाया गया है। यह राष्ट्रीय कीर्तिमान छत्तीसगढ़ की सुशासन पर आधारित विकास नीति की सफलता को दर्शाता है।