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बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, असम चुनाव में बढ़ी राजनीतिक गर्मी…

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अंतिम चरण के चुनाव प्रचार से पहले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को “आंशिक समय के राजनीतिज्ञ” करार दिया, जो चुनावों के दौरान भारत आते हैं और चुनाव खत्म होते ही विदेश लौट जाते हैं।

शुक्रवार को मंगलदाई के डिघिरपर राश खाला मैदान में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए, नबीन के बयान ने असम विधानसभा चुनावों के निर्णायक चरण में बीजेपी के आक्रामक रुख को दर्शाया।

नबीन ने पार्टी के उम्मीदवारों नीलिमा देवी (मंगलदाई), डॉ. परमाणंद राजबोंगशी (सिपाझार), और बिकान डेका (टांगला) के लिए प्रचार करते हुए बीजेपी के शासन के रिकॉर्ड की तुलना कांग्रेस के शासन के वर्षों की अस्थिरता से की।

उन्होंने कहा, “2014-16 के बाद, जब बीजेपी की सरकारें केंद्र और असम में आईं, तब शांति, समृद्धि और संभावनाओं का माहौल बना, जो पहले के डर और अशांति के युग को बदल दिया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर पर ध्यान केंद्रित करते हुए, नबीन ने दोहराया कि असम सरकार के विकास दृष्टिकोण का केंद्रीय हिस्सा है।

उन्होंने कहा, “मोदी जी का मानना है कि भारत की प्रगति पूर्वोत्तर की प्रगति के बिना संभव नहीं है,” और यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री की राज्य में बार-बार की यात्राएं उनके लोगों के प्रति “गहरी सम्मान और प्रतिबद्धता” को दर्शाती हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तुलना करते हुए, नबीन ने दावा किया कि मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान असम का “लगभग 70 बार” दौरा किया, जो सिंह के राज्य के साथ जुड़ाव के विपरीत है।

नबीन ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी-नियंत्रित राज्य सरकार की भी प्रशंसा की, जो उन्होंने कहा कि “घुसपैठियों” से बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि को पुनः प्राप्त करने में सफल रही है, जिन्हें पहले कांग्रेस सरकारों द्वारा संरक्षण दिया गया था।

उन्होंने कहा, “वर्तमान सरकार ने सरकारी भूमि को मुक्त करने और कानून-व्यवस्था को बहाल करने के लिए निर्णायक कदम उठाए हैं।”

रैली में राज्य बीजेपी अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया ने पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त किया।

सैकिया ने कहा, “बीजेपी मंगलदाई, सिपाझार और टांगला सीटों पर बड़े अंतर से जीत हासिल करेगी।”

उच्च स्वर और विपक्ष पर लक्षित हमलों के साथ, असम में बीजेपी का अभियान अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें नेता विकास के दावों और राजनीतिक विरोधाभासों के मिश्रण के माध्यम से समर्थन को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या हैं आज के ईंधन के दाम? जानें LPG, CNG और PNG की ताजा कीमतें…

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ईंधन की कीमतों में स्थिरता

मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, घरेलू और व्यावसायिक ईंधन की कीमतों में आज कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ है। LPG, CNG और PNG की आपूर्ति पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी भी शहर में स्टॉक की कमी की सूचना नहीं मिली है।

भारत कच्चे तेल का 40 प्रतिशत और LPG का लगभग 90 प्रतिशत आयात पश्चिम एशियाई देशों से करता है, जिससे वैश्विक तनाव का प्रभाव ईंधन की कीमतों पर लगातार देखा जा रहा है। सरकार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत योग्य परिवारों को सब्सिडी प्रदान कर रही है।

14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतें

  • दिल्ली: 913 रुपये
  • मुंबई: 912.50 रुपये
  • चेन्नई: 928.50 रुपये
  • कोलकाता: 939 रुपये
  • बेंगलुरु: 915.50 रुपये
  • हैदराबाद: 965.50 रुपये

19 किलो कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें

  • दिल्ली: 2,078.50 रुपये
  • मुंबई: 2,031.50 रुपये
  • चेन्नई: 2,246.50 रुपये
  • कोलकाता: 2,208.50 रुपये
  • बेंगलुरु: 2,161 रुपये
  • हैदराबाद: 2,320.50 रुपये

CNG और PNG की कीमतें CNG की आज की कीमतें (प्रति किलो)

  • दिल्ली: 77.09 रुपये
  • मुंबई: 80.50 रुपये
  • चेन्नई: 91.50 रुपये
  • कोलकाता: 93.50 रुपये
  • बेंगलुरु: 88.95 रुपये
  • हैदराबाद: 97 रुपये

PNG की आज की कीमतें (प्रति SCM) दिल्ली: 47.89 रुपये

  • मुंबई: 50 रुपये
  • चेन्नई: 50 रुपये
  • कोलकाता: 50 रुपये
  • बेंगलुरु: 52 रुपये
  • हैदराबाद: 51 रुपये

5 किलो LPG सिलेंडर की कीमत में वृद्धि.5 किलो LPG सिलेंडर की कीमत में 51 रुपये की बढ़ोतरी

5 किलो वाले LPG सिलेंडरों की कीमत में 51 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे अब इनकी कीमत 649 रुपये से बढ़कर लगभग 700 रुपये हो गई है।

उपभोक्ताओं के लिए सुझाव उपभोक्ताओं के लिए सलाह

LPG अभी भी अधिकांश घरों में खाना पकाने का मुख्य ईंधन है, लेकिन CNG और PNG तेजी से किफायती विकल्प बनते जा रहे हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने शहर के अनुसार ईंधन की कीमतों और सरकारी नीतियों के अपडेट पर ध्यान दें ताकि वे अपने खर्चों को बेहतर तरीके से प्रबंधित कर सकें।

ईरान की चेतावनी के बीच ग्लोबल टेक डर में: अगर Google, Apple और Meta बंद हो जाएं तो कैसे बदलेगी दुनिया की डिजिटल लाइफ…

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मध्य पूर्व में तनाव अब डिजिटल दुनिया तक भी पहुँच गया है। ईरान ने चेतावनी जारी करते हुए अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की धमकी दी है, जिससे इंटरनेट सेवाओं पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।

ऐसे हालात में, अगर Google, Apple और Meta जैसी कंपनियाँ प्रभावित होती हैं, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। सबसे अहम सवाल यह है: क्या WhatsApp, YouTube और Gmail जैसे प्लेटफॉर्म अचानक काम करना बंद कर सकते हैं? और भारत पर इसका क्या असर होगा?

सिर्फ़ ऐप्स ही नहीं: पूरी डिजिटल दुनिया इन्हीं पर निर्भर है

आज की दुनिया में, Google, Meta और Apple सिर्फ़ मोबाइल एप्लिकेशन चलाने वाली कंपनियाँ नहीं हैं; वे पूरी डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। Google के सर्वर Gmail, YouTube, Maps और हज़ारों अन्य एप्लिकेशन को चलाते हैं, जबकि Meta के बिना WhatsApp, Instagram और Facebook का काम पूरी तरह से ठप हो जाएगा। Apple का इकोसिस्टम iPhone यूज़र्स के डेटा, पेमेंट सिस्टम और ऐप के माहौल से गहराई से जुड़ा हुआ है। अगर उनके डेटा सेंटर्स में कोई बड़ी रुकावट आती है, तो यह समस्या सिर्फ़ किसी एक ऐप के बंद होने तक सीमित नहीं रहेगी; यह पूरी डिजिटल ज़िंदगी को ठप कर सकती है। ऐसी किसी घटना का असर दुनिया भर के लाखों यूज़र्स पर एक साथ पड़ेगा।

डेटा सेंटर्स: आसान निशाने

अमेरिका के अंदर सीधे हमला करने के बजाय, ईरान मध्य पूर्व में मौजूद डेटा सेंटर्स को निशाना बना सकता है। बहरीन में Amazon के डेटा सेंटर में रुकावट आने की एक घटना पहले ही सामने आ चुकी है। UAE और बहरीन जैसे इलाकों में बड़े-बड़े सर्वर हब हैं, जो पूरे इलाके को इंटरनेट सेवाएँ मुहैया कराते हैं। अगर इन जगहों पर हमला होता है, तो लाखों यूज़र्स द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सेवाएँ एक साथ बाधित हो सकती हैं। ऐसे हमले सिर्फ़ बम या ड्रोन तक ही सीमित नहीं हो सकते; इन्हें साइबर हमलों के ज़रिए या बिजली और नेटवर्क के बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचाकर भी अंजाम दिया जा सकता है। इसके अलावा, अगर समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलें-जो वैश्विक नेटवर्क की भौतिक नींव हैं-क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो कई देशों में इंटरनेट की रफ़्तार काफ़ी धीमी हो सकती है या पूरी तरह से बंद हो सकती है।

कैसे एक हमला कई सेवाओं को ठप कर सकता है

एक डेटा सेंटर एक डिजिटल पावरहाउस की तरह काम करता है, जिसमें हज़ारों सर्वर एक साथ मिलकर काम करते हैं। इन सर्वरों को लगातार बिजली, कूलिंग और तेज़ रफ़्तार इंटरनेट कनेक्टिविटी की ज़रूरत होती है। जैसे ही इनमें से कोई भी ज़रूरी सिस्टम फेल होता है, सर्वर ज़्यादा गरम होने लगते हैं और फिर बंद हो जाते हैं। अक्सर, सुरक्षा कारणों से, सिस्टम अपने आप बंद हो जाते हैं, जिससे सेवाएँ अचानक रुक जाती हैं। Google के लिए, इसका मतलब है विज्ञापनों का रुक जाना; Meta के लिए, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म में रुकावट; और Apple के लिए, उसके ऐप्स और पेमेंट सिस्टम पर असर पड़ना। इससे इन कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान होता है और साथ ही यूज़र्स का भरोसा भी कम होता है।

भारत और दुनिया पर असर

अगर ऐसी कोई स्थिति आती है, तो भारत जैसे देशों पर सीधा असर पड़ेगा। यहाँ, करोड़ों लोग WhatsApp, YouTube और Google जैसी सेवाओं पर निर्भर हैं। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े स्टार्टअप तक, हर किसी का काम-काज इन प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ा हुआ है। अगर सेवाएँ कुछ घंटों के लिए भी रुक जाती हैं, तो UPI पेमेंट ठप हो सकते हैं, ऑनलाइन कारोबार रुक सकते हैं, और फ्रीलांसरों और कंटेंट क्रिएटर्स का काम बाधित हो सकता है। इसके अलावा, अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा, क्योंकि बैंकिंग, ई-कॉमर्स और सरकारी सेवाएँ सभी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर हैं। सिर्फ़ एक डेटा सेंटर के बंद होने से एक के बाद एक कई समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं, जिससे पूरा डिजिटल इकोसिस्टम अस्थिर हो सकता है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में संघ और ममता बनर्जी के बीच टकराव…

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पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति एक बार फिर से सक्रिय हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की बढ़ती गतिविधियों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार के बीच के समीकरण चर्चा का विषय बन गए हैं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि क्या संघ की रणनीति ममता बनर्जी के लिए नुकसानदायक होगी या यह उनके लिए राजनीतिक लाभ का कारण बनेगी।

संघ की गतिविधियों में वृद्धि

हाल के दिनों में संघ ने पश्चिम बंगाल में अपने संगठन को तेजी से फैलाने पर ध्यान केंद्रित किया है। गांवों में पहुंच बनाने और सांस्कृतिक-सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जोड़ने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसे आगामी चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

ममता बनर्जी की स्थिति

वहीं, ममता बनर्जी का बंगाल की राजनीति में एक मजबूत आधार बना हुआ है। उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पिछले चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था। ममता खुद को बंगाल की ‘माटी की बेटी’ के रूप में प्रस्तुत करती हैं, जो उन्हें स्थानीय पहचान दिलाता है।

राजनीतिक टकराव का लाभ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संघ की सक्रियता भाजपा के लिए जमीन तैयार कर सकती है, लेकिन यह ममता बनर्जी के लिए भी फायदेमंद हो सकती है।

ध्रुवीकरण का लाभ: संघ की उपस्थिति से यदि राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो ममता अपने कोर वोट बैंक को और मजबूत कर सकती हैं।

विपक्ष को घेरने का मौका: ममता इस स्थिति को बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप के रूप में पेश कर राजनीतिक लाभ उठा सकती हैं।

भाजपा की रणनीति

संघ की रणनीति को भाजपा की चुनावी तैयारी से जोड़ा जा रहा है। यदि संघ जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करता है, तो इसका लाभ भाजपा को मिल सकता है, जिससे ममता के लिए चुनौती बढ़ेगी।

भविष्य की दिशा

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि संघ की यह रणनीति किस दिशा में जाती है और ममता बनर्जी इसे किस प्रकार संभालती हैं। बंगाल की राजनीति में हर कदम का व्यापक प्रभाव होता है, इसलिए दोनों पक्ष अपनी चालों में सावधानी बरत रहे हैं।

निष्कर्ष

संघ और ममता बनर्जी के बीच यह राजनीतिक मुकाबला सीधा नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक है। संघ अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है, जबकि ममता इस स्थिति को अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास कर रही हैं। इस समय यह कहना कठिन है कि किसका पलड़ा भारी है, लेकिन मुकाबला निश्चित रूप से दिलचस्प हो गया है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष में नया मोड़: दो दशकों का सबसे बड़ा नुकसान…

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अमेरिका को ईरान के खिलाफ युद्ध में बड़ा झटका

अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे युद्ध में एक ऐसा झटका लगा है, जो पिछले 20 वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ता है। लगातार बढ़ते नुकसान और नई घटनाओं ने इस संघर्ष को और भी गंभीर बना दिया है। अब यह युद्ध केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि यह रणनीति और नियंत्रण की परीक्षा बन चुका है।

अमेरिकी सैनिकों की संख्या में वृद्धि

अमेरिकी रक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में अब तक 365 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, जबकि 13 सैनिकों की जान चली गई है। घायल सैनिकों में सेना, नौसेना, वायुसेना और मरीन के जवान शामिल हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या थल सेना के जवानों की है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि हाल में हुए बचाव अभियानों में घायल हुए सैनिक भी इसी आंकड़े में शामिल हैं या नहीं।

ईरान द्वारा विमानों को निशाना बनाना 20 साल बाद ऐसा नुकसान

इस युद्ध में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने अमेरिकी विमानों को निशाना बनाया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया है। इनमें से एक विमान का पायलट सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि दूसरा अब भी लापता है। उसकी खोज के लिए चलाया जा रहा बचाव अभियान काफी जोखिम भरा है।

अमेरिकी हवाई ताकत पर सवाल

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में यह पहली बार है जब विदेशी धरती पर अमेरिकी सेना के दो विमान गिराए गए हैं। इससे अमेरिका की हवाई ताकत और सुरक्षा संबंधी दावों पर सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले 2003 के इराक युद्ध के दौरान एक ए-10 विमान गिराया गया था, लेकिन मौजूदा स्थिति उससे भी अधिक गंभीर मानी जा रही है।

नेताओं के बयानों में विरोधाभास नेताओं के दावों में विरोधाभास

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान कमजोर हो चुका है और अमेरिका की स्थिति मजबूत है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि अमेरिका ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया है और जल्द ही अपने लक्ष्य हासिल कर लेगा। दूसरी ओर, ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई करने का दावा कर रहा है और खुद को मजबूत स्थिति में बता रहा है। दोनों देशों के बयानों ने इस संघर्ष को और उलझा दिया है।

बचाव अभियान की चुनौतियाँ बचाव अभियान बना चुनौती

लापता पायलट की खोज के लिए चलाया जा रहा अभियान आसान नहीं है। दुश्मन क्षेत्र में यह ऑपरेशन काफी जोखिम भरा है और इसमें शामिल टीमों को लगातार खतरे का सामना करना पड़ रहा है। इन घटनाओं के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह युद्ध जल्द समाप्त होने वाला नहीं है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं, जिससे तनाव बढ़ता जा रहा है।

उत्तर भारत में मौसम की मार: किसानों की फसलें प्रभावित, मौसम में अचानक बदलाव से किसानों की चिंता…

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उत्तर भारत में मौसम के अचानक बदलते मिजाज ने किसानों के लिए चिंता का कारण बना दिया है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में अचानक हुई ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। अप्रैल की शुरुआत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से मौसम में यह बदलाव आया है।

आज भी बारिश की संभावना

आज भी उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश और ओले गिरने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह से बादल छाए हुए हैं। दोपहर और शाम के समय इन क्षेत्रों में तेज गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर ओले गिरने की संभावना है।

ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान

हरियाणा के भिवानी, हिसार, रोहतक और सोनीपत जैसे जिलों में भारी ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे तैयार खड़ी सरसों, गेहूं और रबी की अन्य फसलों को 50 प्रतिशत से अधिक का नुकसान होने की आशंका है।

उत्तर प्रदेश में भी बेमौसम बारिश

उत्तर प्रदेश के मथुरा, अलीगढ़ और हाथरस जिलों में भी बेमौसम बारिश और ओलों ने आलू और गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन ने नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी (फसल नुकसान मूल्यांकन) के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली-एनसीआर में मौसम का असर

दिल्ली-एनसीआर में भी गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और रुक-रुक कर बारिश होने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। आज फिर बारिश की संभावना जताई जा रही है।

राजस्थान में ओलावृष्टि का असर

राजस्थान में शुक्रवार को अधिकांश जिलों में बारिश के साथ ओले गिरे। आज भी बारिश और ओले गिरने की संभावना है। कई जिलों में धूलभरी हवाओं का दौर भी चला। बारिश और ओलों के कारण तापमान में गिरावट आई है। खेतों में तैयार खड़ी फसलों को काफी नुकसान हुआ है।

मौसम विज्ञान विभाग का अलर्ट

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, यह मौसमी उथल-पुथल 5 अप्रैल तक जारी रह सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अब अप्रैल के महीने में भी बढ़ रहा है, जो कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है।

किसानों को सलाह

किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और सिंचाई व कीटनाशकों के छिड़काव को फिलहाल टाल दें। आने वाले सप्ताह में 6 अप्रैल के बाद मौसम के साफ होने और तापमान में फिर से बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे लोगों को इस बेमौसम ठंड से राहत मिलेगी।

Gold Rate Today: सोना लगातार हो रहा सस्ता, 3500 गिरे दाम, क्या खरीदारी का सही मौका? 22K-18K गोल्ड के नए रेट…

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Gold Rate Today 4 April 2026: देश में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है, लेकिन 4 अप्रैल 2026 को निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत भरी खबर आई है। वायदा बाजार में सोना करीब ₹3500 तक लुढ़क गया है, जिससे खरीदारी का माहौल बनता दिख रहा है।

हालांकि स्पॉट मार्केट में कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, लेकिन हालिया गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर नए संकेत दिए हैं।

दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹1,51,090 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है, जबकि एक दिन पहले यह ₹1,51,500 पर स्थिर था। मुंबई में भी 24 कैरेट गोल्ड ₹1,50,940 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोने की कीमत गिरकर 4591.52 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है, जो ग्लोबल ट्रेंड को दिखाता है।

Gold Rate In India: देश के 20 बड़े शहरों में सोने के ताजा रेट (04 अप्रैल 2026) शहर 24 कैरेट (₹) 22 कैरेट (₹) 18 कैरेट

  • दिल्ली -1,51,090- 1,38,510- 1,11,350
  • मुंबई-1,50,940- 1,38,360- 1,11,200
  • कोलकाता- 1,50,940-1,38,360- 1,11,200
  • चेन्नई- 1,51,100 -1,38,510 -1,11,350
  • अहमदाबाद-1,50,990- 1,38,410- 1,11,250
  • जयपुर- 1,51,090- 1,38,510- 1,11,350
  • लखनऊ- 1,51,090- 1,38,510- 1,11,350
  • चंडीगढ़ -1,51,090- 1,38,510- 1,11,350
  • भोपाल -1,50,990- 1,38,410- 1,11,250
  • हैदराबाद- 1,50,940- 1,38,360- 1,11,200
  • बेंगलुरु- 1,50,940- 1,38,360- 1,11,200
  • पुणे -1,50,940- 1,38,360- 1,11,200
  • पटना -1,51,090- 1,38,510- 1,11,350
  • इंदौर- 1,50,990- 1,38,410- 1,11,250
  • नागपुर- 1,50,940- 1,38,360- 1,11,200
  • सूरत -1,50,990- 1,38,410- 1,11,250
  • कानपुर- 1,51,090- 1,38,510- 1,11,350
  • गुरुग्राम -1,51,090- 1,38,510- 1,11,350
  • नोएडा- 1,51,090- 1,38,510- 1,11,350
  • रायपुर- 1,50,990- 1,38,410- 1,11,250

चांदी भी हुई सस्ती (Silver Rate In India)

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखी गई है। 4 अप्रैल को चांदी ₹2,49,900 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। एक दिन पहले दिल्ली में इसका भाव ₹2,37,000 प्रति किलो था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी 69.57 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही है।

कैसे तय होते हैं सोना-चांदी के दाम?

भारत में सोने और चांदी की कीमतें कई फैक्टर्स पर निर्भर करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, टैक्स और मांग-आपूर्ति का संतुलन इन पर असर डालता है। इसके अलावा, MCX और इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के रेट भी बाजार की दिशा तय करते हैं। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने से कीमतें ऊपर जाती हैं, जबकि वैश्विक अनिश्चितता या डॉलर मजबूत होने पर गिरावट देखने को मिलती है।

फाइलिंग से पहले चेक करें ये 7 जरूरी फीचर्स! नए टैक्स पोर्टल ने बदला काम करने का अंदाज, जानें पूरी डिटेल…

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देश के इनकम टैक्स सिस्टम में इनकम टैक्स नियमों, 2026 के तहत नए फॉर्म्स की शुरुआत के साथ काफी बदलाव आए हैं. इसके अलावा, ई-फाइलिंग पोर्टल पर एक इंटीग्रेटेड पेमेंट मॉड्यूल के लॉन्च से टैक्स फ़ाइल करने वालों को बहुत फायदा हुआ है.

पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के 1 अप्रैल 2026 से आधिकारिक तौर पर कैंसल होने के बाद, टैक्स देने वालों को अब दोहरे-फ्रेमवर्क वाले बदलाव को समझने पर ध्यान देना होगा, साथ ही यह भी पक्का करना होगा कि वे नियमों का सही से पालन करें.

सबसे बड़े सुधारों में से एक है नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के हिसाब से अपडेट किए गए फॉर्म्स की शुरुआत. इसलिए, टैक्स देने वालों के लिए फॉर्म्स को ध्यान से चुनना बहुत जरूरी हो जाता है, खासकर असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बदलाव के दौरान, पुराने और नए, दोनों सिस्टम कुछ समय तक साथ-साथ चलेंगे. इन बदलावों के साथ-साथ, नया लॉन्च किया गया इंटीग्रेटेड पेमेंट मॉड्यूल यूजर्स को दोनों टैक्स सिस्टम के तहत एक ही इंटरफेस से टैक्स चुकाने की सुविधा देता है, जिससे पेमेंट आसान हो जाता है और गलतियां कम होती हैं.

आज के बदलते माहौल में, पोर्टल पर मौजूद Quick links सेक्शन एक जरूरी टूलकिट का काम करता है, जो सही तरीके से इस्तेमाल किए जाने पर यूजर्स को सुविधा और आसानी देता है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए, यहाँ सात जरूरी लिंक्स दिए गए हैं जिन्हें हर टैक्स देने वाले को अभी देखना चाहिए:

7 जरूरी Quick Links जिन्हें हर टैक्सपेयर्स के लिए समझना जरूरी है

e-Pay Tax: अब टैक्स नियमों के पालन के लिए बहुत जरूरी हो चुका यह फीचर, पुराने और नए, दोनों टैक्स सिस्टम के तहत आसानी से पेमेंट करने में मदद करता है. यह पक्का करता है कि सही चालान का इस्तेमाल हो और इस बदलाव के दौर में टैक्स चुकाते समय गलतियों और चूकों से बचने में मदद करता है.

e-Verify Return: जब आप अपना इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल करते हैं, तो याद रखें कि आपका काम अभी आधा ही हुआ है. वेरिफिकेशन ज़रूरी है और यह पूरे प्रोसेस को पूरा करने में मदद करता है. यह लिंक आधार OTP, नेट बैंकिंग या दूसरे तरीकों से तुरंत वेरिफिकेशन करने की सुविधा देता है. इस तरह, प्रोसेसिंग की रफ्तार और समय पर रिफंड मिलना पक्का हो जाता है.

Know Tax Payment Status: यह टूल टैक्स देने वालों को यह पक्का करने की सुविधा देता है कि उनका पेमेंट सफल हुआ है या नहीं. यह शंकाओं और उलझनों को कम करने में मदद करता है और टैक्स जमा करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाता है.

Link Aadhaar/View Status: आधार-PAN को लिंक करना अभी भी जरूरी है. यह सेक्शन यूजर्स को इस जानकारी को देखने और अपडेट करने की सुविधा देता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि बिना लिंक किए, टैक्स जमा नहीं किया जा सकता.

इनकम टैक्स कैलकुलेटर: नियमों में बदलाव और एक्ट में नए संशोधनों के आने के साथ, यह कैलकुलेटर टैक्सपेयर्स को अपनी टैक्स देनदारी का सटीक अनुमान लगाने की सुविधा देता है. इसके जरिए, आप अलग-अलग टैक्स व्यवस्थाओं और योजनाओं के तहत अपनी देनदारियों की तुलना कर सकते हैं, और उसी के अनुसार अपने फाइनेंस और टैक्स फाइलिंग को व्यवस्थित कर सकते हैं.

नोटिस का पालन करें: टैक्स फाइलिंग के पीक सीजन के दौरान, नोटिस मिलना तय है. यह लिंक यूजर्स को जरूरी डॉक्यूमेंट्स तुरंत अपलोड करने, जवाब देने और अपनी सब्मिशन को ट्रैक करने की सुविधा देता है, जिससे मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान हो सके और पेनल्टी व आगे की जांच से बचा जा सके.

इंस्टेंट e-PAN: नए टैक्सपेयर्स इस फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो उन्हें अपडेटेड टैक्स इकोसिस्टम में बिना किसी रुकावट के शामिल होने और तेजी से डिजिटल PAN प्राप्त करने की सुविधा देता है.

ये लिंक्स काम करते हैं आसान

जैसे-जैसे टैक्स का ढांचा विकसित हो रहा है और उसमें संरचनात्मक बदलाव आ रहे हैं, ये क्विक लिंक्स महज शॉर्टकट से कहीं ज़्यादा हैं. ये नई अपडेटेड इनकम टैक्स वेबसाइट का इस्तेमाल करने के अनुभव को और भी आसान बनाते हैं, और टैक्सपेयर्स को नियमों का पालन करने, जानकारी रखने और स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद करते हैं.

Delhi RTO Reopening 2026: दिल्ली में फिर खुलेंगे 13 RTO, DL-13 नंबर प्लेट भी लौटेगी, क्या बदलेगा आपके लिए?

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Delhi RTO Reopening 2026: दिल्ली के निवासियों के लिए परिवहन सेवाओं से जुड़ी एक बड़ी और राहत भरी खबर है। दिल्ली परिवहन विभाग ने अपने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल करते हुए शहर के सभी 13 जिलों में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) को फिर से चालू करने की योजना बनाई है।

फेसलेस (डिजिटल) सेवाओं को बढ़ावा देने के नाम पर बंद किए गए कई दफ्तरों को अब जनता की सुविधा के लिए दोबारा खोला जा रहा है।

वर्तमान में दिल्ली में केवल 4 आरटीओ (मॉल रोड, सराय काले खां, मयूर विहार और द्वारका) ही इन-पर्सन यानी ऑफलाइन सेवाओं के लिए चालू हैं। लेकिन अब सरकार ने हर जिले में एक आरटीओ कार्यालय संचालित करने का निर्णय लिया है।

किन-किन इलाकों में खुलेंगे नए RTO?

नई योजना के तहत दिल्ली के अलग-अलग जिलों में RTO ऑफिस खोले जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:

मॉल रोड (ओल्ड दिल्ली), जामनगर हाउस (नई दिल्ली), लाडो सराय (दक्षिण), हरि नगर (पश्चिम), लोनी (उत्तर-पूर्व), सराय काले खां (दक्षिण-पूर्व), मयूर विहार (पूर्व), वजीरपुर (सेंट्रल नॉर्थ), द्वारका (दक्षिण-पश्चिम), राजा गार्डन (सेंट्रल), रोहिणी-1 (आउटर नॉर्थ), बुराड़ी (उत्तर) और रोहिणी-2 (नॉर्थ-वेस्ट)।

DL-13 सीरीज की ‘वापसी’: अब नहीं होगा कोई गैप

प्रशासनिक पुनर्गठन के साथ-साथ विभाग ने वाहन पंजीकरण की ‘DL-13’ सीरीज को भी दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। पिछले कुछ वर्षों से इस सीरीज का उपयोग नहीं किया जा रहा था और सीधे DL-14 सीरीज शुरू कर दी गई थी। अब DL-14 सीरीज को बंद कर पुरानी DL-13 को वापस लाया जाएगा, जिससे रजिस्ट्रेशन सीक्वेंस (क्रम) को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।

डिजिटल के साथ ‘फिजिकल’ मौजूदगी की जरूरत क्यों?

परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भले ही विभाग ने अपनी 90% सेवाओं (जैसे लर्निंग लाइसेंस, रिन्यूअल, डुप्लीकेट लाइसेंस और ओनरशिप ट्रांसफर) को ‘फेसलेस’ मोड में सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया है, लेकिन कुछ कार्यों के लिए अभी भी मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ती है।

वाहनों के निरीक्षण और दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के लिए दफ्तर जाना जरूरी होता है। वर्तमान में केवल 4 दफ्तर होने के कारण लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। 13 दफ्तर खुलने से लोग अपने नजदीकी जिले में ही काम करा सकेंगे। ऑफलाइन सहायता के तहत उन लोगों के लिए सहायता केंद्र के रूप में कार्य करेंगे जिन्हें डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने में कठिनाई होती है।

फेसलेस सेवाएं रहेंगी प्राथमिक मोड

विभाग ने स्पष्ट किया है कि ‘फेसलेस सर्विसेज’ अभी भी सेवा वितरण का प्राथमिक तरीका बनी रहेंगी। आरटीओ दफ्तर केवल उन मामलों के लिए सपोर्ट सेंटर के रूप में काम करेंगे जहाँ मैन्युअल हस्तक्षेप या प्रवर्तन संबंधी कार्य अनिवार्य होगा।

अधिकारियों का कहना है कि इन सभी 13 कार्यालयों को पूरी तरह क्रियाशील बनाने के लिए बुनियादी ढांचे और स्टाफ की व्यवस्था की जा रही है। इसकी समयसीमा जल्द ही अलग से जारी की जाएगी। दिल्ली में 13 RTO का दोबारा शुरू होना आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।

इससे न सिर्फ सेवाएं नजदीक मिलेंगी, बल्कि समय की बचत और पारदर्शिता भी बढ़ेगी। यह कदम डिजिटल इंडिया और ग्राउंड लेवल सुविधा दोनों को साथ लेकर चलने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

Mawan Dhiyan Satkar Yojana: पंजाब में हर महीने मिलेंगे 1500 रुपए! कैसे भरना है फॉर्म, क्या लगेंगे दस्तावेज?

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Mawan Dhiyan Satkar Yojana: पंजाब सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए बड़ी पहल की है। राज्य की मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना को लेकर अधिसूचना जारी कर दी गई है।

इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद दी जाएगी। सामान्य श्रेणी की महिलाओं को 1000 रुपए और अनुसूचित जाति से जुड़ी महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा देना और उनकी घरेलू जरूरतों में मदद करना है।

पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने इस योजना को लागू करने का फैसला किया है। योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹1500 मिलेंगे।

सरकार ने साफ किया है कि किसी परिवार में पात्र महिलाओं की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी। यानी अगर एक ही परिवार में कई महिलाएं पात्र हैं तो सभी को योजना का लाभ मिल सकता है।

क्या पेंशन पाने वाली महिलाओं को भी मिलेगा लाभ?

2 अप्रैल को जारी अधिसूचना के मुताबिक, जो महिलाएं पहले से सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रही हैं, उन्हें भी इस योजना का पूरा लाभ मिलेगा। यानी उनकी मौजूदा पेंशन जारी रहेगी और इसके साथ योजना की राशि भी मिलेगी।

2022 चुनाव में किया गया था वादा

पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 से पहले भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने का वादा किया था। उसी वादे को पूरा करते हुए अब यह योजना लागू की गई है। सरकार के अनुसार योजना का लाभ सीधे महिलाओं के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा और इसे 2 अप्रैल से लागू माना जाएगा।

कैसे भरा जाएगा फॉर्म?

इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र महिलाओं को आवेदन फॉर्म भरना होगा। फॉर्म के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज भी जमा करने होंगे ताकि पात्रता की जांच की जा सके।

कौन-कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी?

योजना के लिए आवेदन करते समय महिलाओं को ये दस्तावेज देने होंगे:

आधार कार्ड (जिस पर पंजाब का पता दर्ज हो)

पंजाब का वोटर आईडी कार्ड

बैंक अकाउंट और पासबुक की कॉपी

अगर महिला अनुसूचित जाति या जनजाति से है तो जाति प्रमाणपत्र

योजना की निगरानी कैसे होगी?

सरकार ने योजना को सही तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को दी है। गांव-गांव तक जानकारी पहुंचाने के लिए विशेष फेसिलिटेटर और मोबिलाइज़र भी तैनात किए जाएंगे। जिन महिलाओं का बैंक अकाउंट नहीं है, उनके खाते खुलवाने में भी मदद की जाएगी। वहीं पारदर्शिता बनाए रखने और किसी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल डैशबोर्ड भी तैयार किया गया है। नियमों के मुताबिक लाभार्थी की मृत्यु होने पर योजना के तहत मिलने वाली राशि तुरंत बंद कर दी जाएगी।