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CG: ‘ नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु एकजुटता का आह्वान.. नारी शक्ति की भागीदारी से मजबूत होगा लोकतंत्र’

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर छत्तीसगढ़ के सभी लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों, विधानसभा सदस्यों तथा महिला संगठनों को पत्र लिखकर सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया है। उन्होंने 16 अप्रैल 2026 को संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर प्रस्तावित चर्चा को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक क्षण बताते हुए कहा है कि यह मातृशक्ति को लोकतांत्रिक संस्थाओं में समुचित प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सांसदों को लिखे अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 16 अप्रैल 2026 को संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर प्रस्तावित चर्चा देश के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अवसर है। वर्ष 2023 में संसद द्वारा इस अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित किए जाने को लोकतंत्र की एकजुटता और महिला सशक्तीकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने सांसदों से आग्रह किया कि वे वर्ष 2029 के लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों से पूर्व इस अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू करने के विषय में सकारात्मक और सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि मातृशक्ति को उनका समुचित अधिकार शीघ्र प्राप्त हो सके।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ के सभी विधायकों को लिखे गए पत्र में उल्लेख किया है कि अब समय आ गया है कि महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में उनका उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘मातृशक्ति के नेतृत्व में सशक्तीकरण’ का यह अभियान देश के समग्र विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों से अपेक्षा की कि है कि वे महिला आरक्षण के समर्थन में छत्तीसगढ़ की आवाज को सशक्त करें तथा इस विषय पर होने वाली चर्चा में सक्रिय सहभागिता निभाते हुए सकारात्मक वातावरण के निर्माण में अपना योगदान दें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला संगठनों को लिखे अपने पत्र में महिला संगठनों के निरंतर प्रयासों और योगदान की सराहना करते हुए कहा है कि महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका ने समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी है। उन्होंने उल्लेख किया कि 16 अप्रैल को संसद में होने वाली चर्चा केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से सशक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। साथ ही यह लोकतंत्र को और अधिक समावेशी एवं संवेदनशील बनाने का अवसर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उल्लेख किया कि यह सुखद संयोग है कि यह महत्वपूर्ण चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब छत्तीसगढ़ में ‘महतारी गौरव वर्ष’ मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सदैव महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी इसका प्रमाण है। स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किए जाने तथा ‘महतारी वंदन योजना’ और ‘रानी दुर्गावती योजना’ जैसी पहल के सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने महिला संगठनों से आह्वान किया कि वे 16 अप्रैल को होने वाली इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने-अपने मंचों से मुखर होकर आवाज बुलंद करें, ताकि महिला आरक्षण के पक्ष में देशव्यापी सकारात्मक वातावरण तैयार हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला संगठन केवल इस परिवर्तन के साक्षी ही नहीं, बल्कि इसके निर्माण में भागीदार भी बनेंगी।

मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों और महिला संगठनों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक अवसर पर एकजुट होकर महिला आरक्षण के समर्थन में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करें और संसदीय चर्चा में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों से यह पहल न केवल सफल होगी बल्कि देश के लोकतंत्र के  सशक्तीकरण की दिशा में एक नए युग की शुरुआत करेगी।

CG ”अंबागढ़ चैकी विकासखण्ड के ग्राम कौडूटोला पिनकापार में 26 अप्रैल को किया जाएगा ’सामाजिक समरसता सम्मेलन’ का आयोजन”

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नागवंशी गोड़ समाज के नाम से समाज से अलग हुए स्वाजातीय जनों को उनके सहमति से गोंड़ समाज में मिलाने की कार्यवाही की जाएगी’

गोंड़ समाज में वापसी के इच्छुक स्वजातीय जनों को 20 अप्रैल तक आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य’

गोड़ समाज ब्लाॅक अंबागढ़ चैकी द्वारा अंबागढ़ चैकी विकासखण्ड के ग्राम कौडूटोला पिनकापार में रविवार 26 अप्रैल को ’सामाजिक समरसता सम्मेलन’ का आयोजन किया गया है।

संभागीय समिति के अनुमति से आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से नागवंशी गोड़ समाज के नाम से अलग संगठन बनाने वाले अंबागढ़ चैकी ब्लाॅक के  सामाजिक जनों को उनके सहमति से गोड़ समाज में मिलाने की कार्यवाही की जाएगी।

जिससे कि गोड़ समाज संभाग मोहला के एकता एवं संगठनात्मक ढांचा को बरकरार रखा जा सकता है। समाज के द्वारा गोंड़ समाज में शामिल होने के इच्छुक नागवंशी गोड़ समाज के नाम से अलग हुए स्वजातीय जनों को 20 अप्रैल तक आवेदन पत्र प्रस्तुत कर 26 अप्रैल को ग्राम कौडूटोला पिनकापार में आयोजित ’सामाजिक समरसता सम्मेलन’ में शामिल होने की अपील की गई है।

जिससे कि जिले के सबसे बड़े गोड़ समाज को एकता के सूत्र में आबद्ध रखकर समाज के सर्वांगीण विकास में सभी स्वजातीय जनों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

गोड़ समाज में वापस शामिल होने के इच्छुक नागवंशी गोड़ समाज के स्वजातीय जन 20 अप्रैल तक संभागीय महासचिव श्री नीतराम पुरामे, ब्लॉक अध्यक्ष, अंबागढ़ चैकी श्री छबिलाल वट्टी, संगठन मंत्री श्री देव प्रसाद कड़ियाम, ब्लॉक उपाध्यक्ष श्री ओमप्रकाश कोरेटी के पास अपना आवेदन पत्र प्रस्तुत कर 26 अप्रैल को आयोजित ’सामाजिक समरसता सम्मेलन’ में शामिल हो सकते है।

उल्लेखनीय है कि केवल विचाराधीन आवेदनों के मामले में संभागीय समिति के निर्णय उपरांत संबंधित व्यक्तियों को गोड़ समाज में मिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। गोंडवाना समाज के संभागीय संरक्षक श्री जगत सलामे, महासचिव श्री नीतराम पुरामे, ब्लाक अध्यक्ष श्री छबिलाल वट्टी एवं अन्य सभी समाज प्रमुखों ने नागवंशी गोड़ समाज के नाम से अलग संगठन में शामिल हुए अंबागढ़ चैकी ब्लाॅक के सभी स्वजातीय जनों को वापस गोड़ समाज में शामिल होकर समाज के विकास एवं एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपील की गई है।

CG” सुदूर वनांचल के ग्राम हथरेल में सांस्कृतिक, शैक्षणिक, संवैधानिक कार्यशाला एवं कैरियर गाइडेंस कार्यक्रम का किया गया आयोजन”

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” गोंड़ समाज द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में समाज प्रमुख, विषय विशेषज्ञों के अलावा बड़ी संख्या में युवा-युवती एवं स्वजातिजन हुए शामिल ”

गोण्डवाना समाज केन्द्र सुवरबोड़ के द्वारा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चैकी जिले के सूदूर वनांचल के ग्राम हथरेल में रविवार, 12 अप्रैल को ’सांस्कृतिक, संवैधानिक एवं कैरियर गाइडेंस’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस एक दिवसीय समारोह में समाज प्रमुखों, विषय विशेषज्ञों, अधिकारी-कर्मचारियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में युवा-युवती एवं गोंड समाज के लोगों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक के रूप में गोण्डवाना समाज के पूर्व संभागीय महासचिव श्री तुकाराम कोर्राम उपस्थित थे।

इसके अलावा कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में समाज सेवी श्री शंकर शाह कुंजाम, गोण्डवाना समाज के अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ के संभागीय संरक्षक श्री चंद्रेश ठाकुर, थाना प्रभारी मोहला श्री ईश्वर धु्रव, अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक संघ के जिला अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार गोटे, पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष श्री लखन सोरी, अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ के संभागीय कोषाध्यक्ष श्री शिव कलामे, केन्द्र अध्यक्ष सुवरबोड़ श्री पुरन सिंह कुमोटी, खाद्य निरीक्षक श्री धरमुराम किरंगे सहित अन्य अतिथिगण उपस्थित थे।

इस एक दिवसीय कार्यशाला में अतिथियों एवं विषय विशेषज्ञों के द्वारा समाज के नवोदित पीढ़ी एवं स्वाजातीय जनों को गोण्डवाना समाज की गौरवशाली संस्कृति, विरासत, इतिहास के अलावा उनके संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ युवा-युवतियों को प्रतियोगी परीक्षा के अलावा व्यापार व्यवसाय तथा नशा उन्मुलन आदि के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

इस अवसर पर मुख्य प्रशिक्षक श्री तुकाराम कोर्राम ने गोंड़ी भाषा एवं संस्कृति के अलावा गोंड़ समाज के इतिहास एवं विरासत के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दी। अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ के संभागीय संरक्षक श्री चंद्रेश ठाकुर ने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति विश्व की समस्त संस्कृतियों की जननी है।

जिसका उल्लेख प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने अपने विश्व विख्यात पुस्तक डिस्कवरी आफ इंडिया में किया है। श्री ठाकुर ने कहा कि समाज को आगे ले जाने के लिए केवल संस्कृति एवं विरासत के गौरवगान करने भर से काम नही बनेगी। हम सभी को हमारे समाज में प्रवेश कर रही नशापान जैसे कुरीतियों को दूर करना होगा।

उन्होंने कहा कि शराब एवं नशापान किसी भी समाज के संस्कृति का हिस्सा नही हो सकता वरन् वह समाज के पतन का सबसे बड़ा कारण है। श्री ठाकुर ने शिक्षा एवं संगठन को समाज के विकास के लिए ब्रह्मास्त्र बताते हुए आने वाले पीढ़ी को उच्च शिक्षित, ज्ञानवान एवं संस्कारी बनाने को कहा।

उन्होंने नवयुवकों को सीख देते हुए कहा कि दुनिया में कोई भी कार्य असंभव नही है। उसे प्राप्त करने के लिए व्यक्ति के पास बड़ी सोंच, दृढ़ ईच्छा शक्ति और लक्ष्य के प्रति समर्पण होना चाहिए। श्री ठाकुर ने समाज के नई पीढ़ी को कड़ी मेहनत, त्याग एवं साधना से जीवन में उपलब्धि हासिल कर समाज के विकास में योगदान देने को कहा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष श्री लखन सोरी ने समाज के युवा-युवतियों को प्रतियोगी परीक्षाओं तथा व्यापार व्यवसाय के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दी।

उन्होंने कहा कि हमारे युवा-युवतियों के सामने शासकीय नौकरी के अलावा व्यापार-व्यवसाय तथा आधुनिक तरीके से खेती किसानी के माध्यम से अपने जीवन को सजाने संवारने के लिए व्यापक अवसर है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए थाना प्रभारी श्री ईश्वर धु्रव ने समाज के युवा-युवतियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन होने के संबंध में महत्वपूर्ण टिप्स दिए। उन्होंने युवा-युवतियों को विपरित परिस्थितियों में भी कभी हार नही मानने की समझाईश दी।

अनुसूचित जनजाति संघ के जिला अध्यक्ष श्री अरविंद गोटे, श्री मन्ने मण्डावी सहित अन्य अतिथियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए समाज के युवा-युवतियों को महत्वपूर्ण सीख दी। समारोह में सर्कल अध्यक्ष बोटेझर श्री भावसिंह कुमोटी, सर्कल अध्यक्ष मड़ियानवाड़वी श्री रैयसिंग सोरी, सर्कल अध्यक्ष हथरेल श्री सुखराम तुलावी, हथरेल सर्कल सचिव श्री प्रेमलाल मंडावी, बोटेझर सर्कल सचिव श्री दिनेश कुमार धुर्वे, सर्कल सचिव भोजटोला श्री रेशम नुरेटी, सर्कल सचिव मड़ियानवाड़वी श्री शेषराम धुर्वे व्याख्याता श्री जे. आर. कोरचे,  अधिकारी-कर्मचारी प्रकोष्ठ के ब्लाॅक सचिव मोहला श्री मन्ने मंडावी, प्रधानपाठक श्री धनसिंह कुंजाम, शिक्षक श्री कृष्ण कुंजाम, सचिव श्री सीताराम उपस्थित थे।

मध्य पूर्व में तनाव से वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल, वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल…

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मध्य पूर्व में बढ़ते तनावों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव को जन्म दिया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य निवेशकों की चिंता का केंद्र बन गया है।

यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, जो दुनिया की लगभग एक-पांचवीं ईंधन आपूर्ति का परिवहन करता है, ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। ऊर्जा की कीमतों में इस वृद्धि ने कई संपत्ति वर्गों में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। इस अनिश्चितता के प्रभाव वैश्विक शेयर बाजारों में महसूस किए जा रहे हैं, जहां बेंचमार्क सूचकांक दबाव में आ गए हैं क्योंकि निवेशक जोखिम से बचने लगे हैं। वस्तु बाजार भी बाधित हो रहे हैं, विशेष रूप से उर्वरकों और प्रमुख औद्योगिक इनपुट की आपूर्ति में, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई के दबाव की चिंताएं बढ़ रही हैं।

डालाल स्ट्रीट पर तनाव का असर

भारतीय शेयर बाजार की भावना संघर्षशील बनी हुई है क्योंकि संघर्ष बढ़ा है। डालाल स्ट्रीट लाभ और हानि के बीच झूल रहा है, जो संघर्ष विराम की उम्मीदों और होर्मुज जलडमरूमध्य के संभावित बंद होने के डर के बीच की जंग को दर्शाता है। सोमवार की शुरुआती ट्रेडिंग में तनाव स्पष्ट था। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 49 पैसे कमजोर होकर 93.32 पर कारोबार कर रहा था। शेयर बाजारों में तेज बिकवाली देखी गई, जहां निफ्टी50 23,600 के स्तर से नीचे गिरकर 23,608.45 पर पहुंच गया, जो 442 अंकों या 1.84 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इसी बीच, बीएसई सेंसेक्स 1,500 अंकों से अधिक गिरकर 75,988.32 पर आ गया, जो 2.01 प्रतिशत की कमी है। अनिश्चितता के इस माहौल में, निवेशक यह सवाल कर रहे हैं कि ऐसे उतार-चढ़ाव वाले हालात में अपने फंड कहां आवंटित करें।

विशेषज्ञ की राय: अनुशासित रहें, बाजार का समय न लगाएं

बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि पहले की आशाएं अब समाप्त हो गई हैं, और भू-राजनीतिक जोखिम एक बार फिर बाजार की दिशा को निर्धारित कर रहे हैं। “पिछले बुधवार को, बाजारों में उम्मीद थी कि कुछ सकारात्मक होगा जब संघर्ष विराम और वार्ताओं की घोषणा की गई थी। लेकिन वह गति अब समाप्त हो गई है। इसलिए हम फिर से भारतीय बाजारों के प्रति नकारात्मक हो रहे हैं और बाजार को चलाने वाले कमाई के खिलाफ, यह भू-राजनीतिक जोखिम है जो बाजार को प्रभावित करेगा,” बग्गा ने कहा। उन्होंने निवेशकों को आवेगपूर्ण ट्रेडिंग निर्णयों से बचने और अनुशासित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। “यह व्यापार करने का समय नहीं है। निवेश करें, अपने अनुशासित मासिक निवेश को एसआईपी के माध्यम से करें। इस बाजार का समय लगाने की कोशिश न करें क्योंकि मुझे नहीं लगता कि तलहटी बन गई है, लेकिन कोई नहीं जानता कि तलहटी कब बनेगी,” उन्होंने कहा।

व्यापार में बाधाएं आर्थिक चिंताओं को बढ़ाती हैं

वित्तीय बाजारों के अलावा, भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक व्यापार प्रवाह को भी प्रभावित कर रहे हैं। भारत के लगभग 20 प्रतिशत वस्त्र निर्यात प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि लाल सागर और ओमान की खाड़ी के माध्यम से प्रमुख शिपिंग मार्ग बाधित हो रहे हैं। बग्गा ने इस अनिश्चित चरण के दौरान सतर्क रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। “भारतीय बाजारों पर सतर्कता, वैश्विक बाजारों पर सतर्कता, वर्तमान में पूंजी को सुरक्षित रखें, यह तलहटी उठाने का समय नहीं है क्योंकि आप गिरते चाकू पकड़ने की कोशिश कर सकते हैं और इस प्रक्रिया में चोटिल हो सकते हैं,” उन्होंने चेतावनी दी।

बिहार में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी, मोदी और शाह की उपस्थिति की उम्मीद…

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बिहार में शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियाँ

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 15 अप्रैल को बिहार में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की संभावना है।

प्रधानमंत्री 14 अप्रैल की रात पटना पहुंचेंगे और संभवतः वहीं रुकेंगे। यह समारोह पटना के राजभवन और लोकभवन परिसर में आयोजित किया जाएगा। खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को सुबह 11 बजे मंत्रिमंडल की बैठक बुलाएंगे, जिसके बाद वे राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे.

एनडीए सरकार के गठन की प्रक्रिया

इस कदम से राज्य में एनडीए के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन का औपचारिक मार्ग प्रशस्त होगा। एनडीए विधायकों की बैठक भी निर्धारित है, जिसमें विधायक दल के नए नेता का चुनाव किया जाएगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सबकी नजरें टिकी हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उनकी नियुक्ति लगभग तय है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है.

ओबीसी समुदाय पर चौधरी का प्रभाव

चौधरी, जो प्रभावशाली ओबीसी समुदाय कोइरी से ताल्लुक रखते हैं, को भाजपा और मुख्य विपक्षी दल आरजेडी दोनों द्वारा लुभाने की कोशिश की जा रही है। चौधरी को 2023 में राज्य पार्टी अध्यक्ष बनाया गया था और एक साल बाद उपमुख्यमंत्री बने, जब जेडीयू सुप्रीमो की गठबंधन में वापसी के बाद एनडीए सत्ता में आया था। एनडीए विधायकों को अगले दो दिनों तक पटना में रहने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि महत्वपूर्ण बैठकें होने वाली हैं। विधायक दल की बैठक के दौरान गठबंधन के नए नेता का औपचारिक रूप से चुनाव किया जाएगा.

“राजस्थान विधानसभा और न्यायालयों में बम धमकी के बाद सुरक्षा बढ़ाई गई…

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सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता

राजस्थान विधानसभा, उच्च न्यायालय और सत्र अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सोमवार को सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि धमकी के तुरंत बाद सभी परिसरों को खाली कराया गया और पुलिस ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया।

धमकी का विवरण

पुलिस के अनुसार, विधानसभा कार्यालय को एक ई-मेल प्राप्त हुआ, जिसमें अगले तीन घंटे में बम से उड़ाने की चेतावनी दी गई थी। इसके बाद कर्मचारियों को बाहर निकाला गया और तलाशी अभियान शुरू किया गया। बम निरोधक दस्ते और श्वान दस्ता घटनास्थल पर भेजे गए।

तलाशी अभियान की स्थिति

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “परिसर को तुरंत खाली कराकर पूरी तरह से तलाशी ली गई। अभी तक कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।” अधिकारी ने बताया कि सत्र अदालत को भी बम से उड़ाने की धमकी का ई-मेल मिला था, जिसके बाद अदालत प्रशासन ने पुलिस को सूचित किया। तलाशी के दौरान सत्र अदालत परिसर में हाई अलर्ट घोषित किया गया और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

उच्च न्यायालय की स्थिति

उच्च न्यायालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद परिसर को खाली करवाकर तलाशी अभियान शुरू किया गया, लेकिन वहां भी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय को पहले भी कई बार बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। अब तक इन धमकियों से संबंधित किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

“महिला आरक्षण पर कांग्रेस का समर्थन, लेकिन राजनीतिक कारणों पर उठाए सवाल”

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महिला आरक्षण का समर्थन, लेकिन सरकार की आलोचना

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी लोकसभा में महिला आरक्षण का समर्थन करती है। हालांकि, उन्होंने सरकार की आलोचना की है, जो इसे राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधनों पर चर्चा के लिए 16 अप्रैल से शुरू होने वाले तीन दिवसीय विशेष संसदीय सत्र से पहले, खरगे ने कहा कि 15 अप्रैल को होने वाली सर्वदलीय बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।

बेंगलुरु में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए खरगे ने कहा कि हम नारी शक्ति विधेयक के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मुझे (किरेन रिजिजू से) एक पत्र मिला है, लेकिन यह राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है।” उन्होंने बताया कि सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और आगे का निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने अपने कार्यकाल में इस प्रस्ताव को रखा था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ता है। जनगणना में देरी के कारण, केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग कर परिसीमन करने और महिला विधायकों के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने की योजना बना रही है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन विधेयक और महिला विधायकों के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन विधेयक पर विचार करने के लिए संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से तीन दिनों के लिए आयोजित किया जाएगा। इन संशोधनों के बाद लोकसभा की सीटें 543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं। इन दोनों विधेयकों को महिला आरक्षण स्थापित करने के लिए संवैधानिक संशोधन के रूप में पारित करना आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि इन विधेयकों में ओबीसी आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आरक्षण में कोई बदलाव नहीं होगा।

इससे पहले सोमवार को, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को लागू करने के लिए प्रस्तावित संशोधन के समर्थन में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में एक राष्ट्रीय स्तर का ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ आयोजित किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभा को संबोधित करते हुए प्रस्तावित महिला आरक्षण कानून को “नारी शक्ति” को समर्पित एक ऐतिहासिक कदम बताया।

Baisakhi 2026: बैसाखी 2026 कब है? 13 या 14 अप्रैल कन्फ्यूजन करें दूर, जानें सही तारीख…

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Baisakhi 2026 Mein Kab Hai: बैसाखी का पर्व इस समय खेतों में रबी की फसल की कटाई होती है। यह त्योहार पूरे देश में खासकर पंजाब के साथ-साथ उत्तर भारत में मनाया जाता है।बैसाखी 2026 कब है, 13 या 14 अप्रैल? जानें सही तारीख, पूजा विधि, दान का महत्व और इस पर्व से जुड़ी खास परंपराएं आसान भाषा में।

Baisakhi 2026 Mein Kab Hai: बैसाखी का पर्व 13-14 अप्रैल को मनाया जाता है। इस समय खेतों में रबी की फसल की कटाई होती है। यह त्योहार पूरे देश में खासकर पंजाब के साथ-साथ उत्तर भारत में मनाया जाता है। केरल में यह त्योहार ‘विशु’ कहलाता है। बंगाल में इसे नववर्ष, असम में इसे रोंगाली बिहू, तमिलनाडु में पुथंडू और बिहार में इसे बैसाख के नाम से जाना जाता है।

बैसाखी का त्योहार खुशियों, मेहनत और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। खासकर उत्तर भारत में यह दिन किसानों के लिए बहुत खास होता है, क्योंकि इसी समय खेतों में नई फसल तैयार होती है और लोग उसकी खुशी मनाते हैं। साल 2026 में बैसाखी की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में सवाल है। दरअसल, जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तभी बैसाखी मनाई जाती है। इस बार सूर्य 13 अप्रैल की रात को राशि बदलेंगे, इसलिए उदय तिथि के अनुसार बैसाखी 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी।

बैसाखी क्यों है खास?

बैसाखी सिर्फ खेती से जुड़ा त्योहार नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी है। सिख समुदाय के लिए यह दिन बहुत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। यह दिन हमें साहस, एकता और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश देता है। साथ ही यह नई ऊर्जा और नए काम की शुरुआत का भी संकेत माना जाता है।

बैसाखी की सरल पूजा विधि

बैसाखी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। अगर नदी में स्नान संभव न हो, तो घर पर ही पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर नहा सकते हैं। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर सूर्य देव को जल अर्पित करें। घर के मंदिर में दीपक जलाएं और भगवान को नई फसल का अन्न चढ़ाएं। इस दिन गुरुद्वारों में भी विशेष कार्यक्रम होते हैं। लोग वहां जाकर मत्था टेकते हैं, कीर्तन सुनते हैं और कड़ा प्रसाद ग्रहण करते हैं। पूजा का मुख्य भाव यही है कि हम ईश्वर का धन्यवाद करें और अपनी मेहनत के फल के लिए आभार व्यक्त करें।

दान करने का महत्व

बैसाखी के दिन दान करना बहुत शुभ माना जाता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को अनाज, फल या कपड़े दे सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया दान जीवन में सुख और शांति लाता है। साथ ही यह हमें दूसरों की मदद करने की भावना भी सिखाता है।

नई शुरुआत के लिए अच्छा दिन

बैसाखी को नई शुरुआत का दिन भी कहा जाता है। कई लोग इस दिन कोई नया काम शुरू करने की योजना बनाते हैं।अगर आप भी अपने जीवन में कुछ नया करना चाहते हैं, तो यह दिन आपके लिए शुभ साबित हो सकता है। इस समय सकारात्मक सोच  और आत्मविश्वास के साथ लिया गया फैसला आगे चलकर अच्छा परिणाम दे सकता है। बैसाखी का असली मजा उसके उत्सव में है। पंजाब और हरियाणा में लोग इस दिन भांगड़ा और गिद्धा करते हैं, ढोल की धुन पर नाचते हैं और खुशियां मनाते हैं। गांवों में मेले लगते हैं और लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं। यह दिन लोगों को एक साथ जोड़ने का काम करता है।

घर के खाने का खास महत्व

इस दिन घर में बने भोजन का विशेष महत्व होता है। खीर, मीठे चावल और कड़ा प्रसाद जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं। घर के बने खाने में जो प्यार और अपनापन होता है, वह बाहर के खाने में नहीं मिलता। परिवार के साथ बैठकर खाना खाने से रिश्ते और मजबूत होते हैं। यह त्योहार हमें सिखाता है कि मेहनत का फल जरूर मिलता है। साथ ही यह भी बताता है कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं।जीवन में आगे बढ़ने के लिए धैर्य, विश्वास और मेहनत बहुत जरूरी है, यही बैसाखी का असली संदेश है।बैसाखी 2026 का पर्व 14 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन नई उम्मीद, नई ऊर्जा और खुशियों का प्रतीक है। इस दिन सकारात्मक सोच के साथ अपने काम की शुरुआत करते हैं और दूसरों की मदद करते हैं, तो यह आपके जीवन में सुख और संतुलन लेकर आ सकता है।

“बैसाखी 2026: पंजाब और हरियाणा में फसल कटाई का उत्सव”

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बैसाखी का पर्व

आज उत्तर भारत, खासकर पंजाब और हरियाणा में बैसाखी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। यह पर्व रबी फसल की कटाई की खुशी में मनाया जाता है, जिसमें परंपरा और स्वाद का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।

मुख्य व्यंजन और क्षेत्रीय विशेषताएं

मीठे चावल: बैसाखी पर पीले रंग का विशेष महत्व है। लगभग हर घर में केसर, इलायची और सूखे मेवों से बने ‘मीठे चावल’ का आनंद लिया जा रहा है, जो समृद्धि और नई फसल का प्रतीक माने जाते हैं।

सरसों का साग और मक्की की रोटी:

सर्दियों का यह प्रमुख भोजन बैसाखी पर ताजा उपज के साथ पारंपरिक तरीके से परोसा जा रहा है। सफेद मक्खन और गुड़ के साथ इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।

छोले-भटूरे और पूरी-छोले:

गुरुद्वारों और मेलों में आज छोले-भटूरे और आलू-पूरी के भंडारे की भरपूर मांग है। बैसाखी मेलों में इन व्यंजनों का विशेष महत्व है।

प्रसाद:

गुरुद्वारों में ‘कड़ाह प्रसाद’ (गेहूं के आटे का हलवा) का वितरण किया जा रहा है, जो शुद्ध देसी घी से बना होता है और इसका आध्यात्मिक महत्व है। गर्मी के मौसम को देखते हुए मीठी लस्सी और सत्तू का शरबत भी बड़े पैमाने पर पिया जा रहा है।

बाजार का हाल:

मिठाई की दुकानों पर जलेबी, लड्डू और पिन्नी की बिक्री में भारी वृद्धि देखी गई है। कई रेस्तरां ने बैसाखी के अवसर पर विशेष ‘पंजाबी थाली’ पेश की है, जिसमें पारंपरिक स्वादों को आधुनिक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह त्योहार न केवल भोजन का प्रतीक है, बल्कि किसानों की मेहनत और मिट्टी के प्रति सम्मान को भी दर्शाता है।

“पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के हर मामले में टीएमसी का नाम दिखता है : अमित शाह”

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली के दौरान टीएमसी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में जितने भी बड़े भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, उनमें कहीं न कहीं टीएमसी नेताओं की भूमिका रही है।

बीरभूम जिले के बोलपुर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, “कैश-फॉर-क्वेरी से लेकर कैश-फॉर-जॉब, मवेशी तस्करी से लेकर कोयला तस्करी, पीडीएस घोटाले से लेकर अवैध जमीन कब्जाने तक, आप किसी भी भ्रष्टाचार का नाम ले लीजिए, हर जगह टीएमसी नेताओं के निशान मिलेंगे।”

उन्होंने कहा कि इस ‘कुशासन’ से जनता परेशान हो चुकी है और अब विधानसभा चुनाव के जरिए बदलाव लाने के लिए तैयार है।

मित शाह ने अपने भाषण में यह भी दोहराया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो राज्य में हर हाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। उन्होंने कहा, “हम उस व्यवस्था को खत्म करेंगे, जिसमें कुछ लोग एक साथ चार-चार शादियां करते हैं।”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद वे महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को रात में बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है।

गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो महिलाएं रात 1 बजे भी सुरक्षित तरीके से दोपहिया वाहन से निकल सकेंगी। उन्होंने कहा, “आरजी कर मेडिकल कॉलेज जैसी घटनाएं, कासबा लॉ कॉलेज और दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज में हुए अपराध दोबारा नहीं होंगे। हमारे शासन में महिलाएं पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि टीएमसी के असामाजिक तत्व 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान में बाधा डालने की कोशिश करते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अमित शाह ने कहा, “उन्हें सलाह है कि मतदान के दिन घर में ही रहें, नहीं तो 5 मई के बाद उन्हें ढूंढ-ढूंढकर जेल भेजा जाएगा।”