Home Blog Page 175

भारत छोड़ सकता है WhatsApp? जानिए प्राइवेसी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार, यहां जानिए पूरा मामला…

0

भारत में WhatsApp सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं बल्कि रोजमर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. परिवार की बातचीत हो, ऑफिस का काम या फिर पेमेंट और बिज़नेस चैट हर जगह WhatsApp मौजूद है.

ऐसे में जब देश की सर्वोच्च अदालत ने WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta को कड़े शब्दों में चेतावनी दी तो यह मामला सुर्खियों में आ गया. अगर हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़ दीजिए जैसी टिप्पणी ने साफ संकेत दिया कि यूजर्स की निजता को लेकर कोर्ट किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है.

WhatsApp की प्राइवेसी विवाद की शुरुआत कैसे हुई

इस पूरे विवाद की जड़ साल 2021 में आई WhatsApp की नई प्राइवेसी पॉलिसी है. इस अपडेट के जरिए यूजर्स को बताया गया कि WhatsApp, Meta समूह की अन्य कंपनियों के साथ कुछ यूजर डेटा साझा कर सकता है. पॉलिसी में कहा गया था कि इस डेटा का इस्तेमाल सेवाओं को बेहतर बनाने, कस्टमाइजेशन और मार्केटिंग से जुड़े कामों के लिए किया जाएगा.

सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि यूजर्स के सामने दो ही विकल्प थे या तो नई शर्तें स्वीकार करें या फिर WhatsApp अकाउंट डिलीट कर दें. डेटा शेयरिंग से अलग रहते हुए ऐप इस्तेमाल करने का कोई विकल्प नहीं दिया गया जिससे लोगों में नाराज़गी बढ़ गई.

एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के बावजूद चिंता क्यों बढ़ी

WhatsApp ने यह स्पष्ट किया कि दोस्तों और परिवार के बीच होने वाली निजी चैट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड रहती हैं. हालांकि, बिज़नेस अकाउंट्स के साथ की गई बातचीत से जुड़ा डेटा एकत्र किया जा सकता है और इसका इस्तेमाल विज्ञापनों के लिए भी हो सकता है. भारत जैसे देश में, जहां करोड़ों लोग WhatsApp पर निर्भर हैं यह बात लोगों को ज्यादा सुकून नहीं दे पाई.

2026 में फिर क्यों गरमाया मामला

यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक तब पहुंचा, जब WhatsApp और Meta ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था. CCI का मानना था कि नई प्राइवेसी पॉलिसी ने यूजर्स की पसंद और प्रतिस्पर्धा दोनों को नुकसान पहुंचाया है.

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली बेंच ने सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब यूजर्स के पास मानो या छोड़ो जैसा विकल्प हो तो सहमति को असली कैसे माना जा सकता है. इसे बनावटी सहमति करार दिया गया जिसमें यूजर्स पर दबाव डालकर हामी भरवाई जाती है.

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि WhatsApp की मजबूत पकड़ के कारण लोगों के पास व्यावहारिक रूप से कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता क्योंकि लगभग हर कोई यही ऐप इस्तेमाल करता है. अदालत ने साफ कहा कि निजता का अधिकार किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता और कारोबारी फायदे संविधान से ऊपर नहीं हो सकते.

WhatsApp और Meta का पक्ष क्या है

WhatsApp ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन अदालत में Meta के वकीलों ने दलील दी कि यह सेवा मुफ्त है और यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाता. उनका कहना था कि सभी तरह का डेटा साझा नहीं किया जाता और निजी संदेशों तक कंपनी की पहुंच नहीं होती. फिर भी, कोर्ट इन तर्कों से संतुष्ट नजर नहीं आया.

Meta को मिला 9 फरवरी तक का अल्टीमेटम

इस मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने Meta और WhatsApp से हलफनामा दाखिल करने को कहा. कोर्ट चाहता है कि कंपनियां साफ तौर पर यह भरोसा दें कि यूजर्स का डेटा साझा नहीं किया जाएगा. इस मुद्दे पर अंतरिम आदेश जारी करने के लिए 9 फरवरी की तारीख तय की गई है. अगर यह भरोसा नहीं दिया गया तो WhatsApp की अपीलें खारिज हो सकती हैं.

क्या वाकई भारत छोड़ सकता है WhatsApp

हालांकि कोर्ट की भाषा काफी सख्त रही, लेकिन WhatsApp का तुरंत भारत से जाना फिलहाल संभव नहीं लगता. भारत उसका सबसे बड़ा बाजार है और यहां से हटना कंपनी के लिए बड़ा झटका होगा. कोर्ट का मकसद WhatsApp को बाहर निकालना नहीं, बल्कि यह संदेश देना है कि भारत में काम करने के लिए संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करना अनिवार्य है.

बाजार में उतार-चढ़ाव, निफ्टी 25800 के नीचे, बुरी तरह फिसला IT इंडेक्स, इंफोसिस 6% से ज्यादा टूटा…

0

खराब ग्लोबल संकेतों के बीच 4 फरवरी को घरेलू शेयर बाजारों ने गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में निफ्टी 25,700 के नीचे फिसल गया था. हालांकि, महज 10 मिनट में बाजार ने शानदार रिकवरी दिखाई. 9:25 AM तक सेंसेक्स 80 अंकों की तेजी के साथ 83,811 के स्तर पर, जबकि निफ्टी 50 अंक उछलकर 25770 के करीब कारोबार करता दिखा.

अगर एडवांस-डिक्लाइन की बात करें तो 1,161 शेयरों में तेजी, 1,148 शेयरों में गिरावट और 201 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया. इस दौरान सबसे ज्यादा गिरावट आईटी शेयरों में देखने को मिला. इंफोसिस 6 फीसदी से ज्यादा टूट गया.

इंफोसिस में 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट

आज के शुरुआती कारोबार में इंफोसिस के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली. इस दौरान शेयर 6 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ 1555 रुपये के भाव पर कारोबार कर रहे थे. जानिए क्या है बिकवाली की वजह-

4 फरवरी को IT शेयरों में बिकवाली की आशंका! US से आई खबर के बाद बिगड़ा सेंटीमेंट, रडार पर रखें ये शेयर

पावर और मेटल शेयरों में मजबूती, आईटी शेयरों पर दबाव

निफ्टी पर पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, टाटा स्टील, कोल इंडिया, ओएनजीसी और एनटीपीसी जैसे शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे. वहीं दूसरी ओर आईटी सेक्टर में बिकवाली का दबाव दिखा, जहां एचसीएल टेक, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, विप्रो और टीसीएस प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे.

रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर

कल की दमदार मजबूती के बाद आज भारतीय रुपया कमजोर खुला. बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 90.41 के स्तर पर खुला, जबकि पिछले सत्र में यह 90.27 पर बंद हुआ था.

निफ्टी के टॉप गेनर

सोर्स-NSE

निफ्टी के इन IT शेयरों में गिरावट

सोर्स-NSE

सेक्टोरल इंडेक्स का हाल

सोर्स-NSE

गिफ्ट निफ्टी में रैली ( 9:05 AM तक )

गिफ्ट निफ्टी में 92 अंकों की गिरावट देखने को मिली थी.

जापान के निक्केई में 300 अंकों की गिरावट देखने को मिली.

हैंग सेंग में करीब 174 अंकों की गिरावट देखने को मिली.

सिंगापुर के स्ट्रेट टाइम में 0.09 फीसदी की तेजी देखने को मिली.

ताइवान के बाजार में करीब एक चौथाई फीसदी की बिकवाली रही थी.

कोरियाई बाजार कोस्पी में करीब 1 फीसदी की तेजी देखने को मिली.

3 फरवरी को कैसा रहा था बाजार?

शेयर बाजार में कल यानी 3 फरवरी को शानदार तेजी रही थी. सेंसेक्स में 2073 अंक बढ़कर 83,739 पर बंद हुआ था. निफ्टी में 639 अंकों की तेजी के साथ 25,728 पर बंद हुआ था. ट्रम्प ने भारत पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया है, जिस वजह से बाजार चढ़ा था. इस दौरान बाजार में चौतरफा तेजी देखने को मिली थी.

इस IT स्टॉक पर केडिया फैमिला फिदा! भाग रहा शेयर, कंपनी कर रही लंबी रेस की तैयारी, 100+ देशों में फैला धंधा

पैसा रखें तैयार.इस महीने खुल रहे ये 7 IPO, ₹14000 करोड़ जुटाने का प्लान, GMP दे रहा 19% तक मुनाफे का संकेत…

0

प्राइमरी मार्केट में एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है. फरवरी के अंत तक सात कंपनियां अपने इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) लॉन्च कर सकती हैं. इन कंपनियों का लक्ष्य कुल मिलाकर करीब ₹14,000 करोड़ जुटाने का है.

मार्केट में हाल की सुस्ती के बाद निवेशकों के लिए यह एक बड़ा मौका माना जा रहा है.

Fractal Analytics और Aye Finance से होगी शुरुआत

IPO लाइन-अप में सबसे पहले Fractal Analytics का इश्यू आ रहा है, जो 9 फरवरी को खुलेगा और 11 फरवरी को बंद होगा. कंपनी करीब ₹1,023 करोड़ का फ्रेश इश्यू लाएगी, जबकि ऑफर-फॉर-सेल (OFS) का साइज लगभग ₹1,810 करोड़ होगा. इसका प्राइस बैंड ₹857 से ₹900 प्रति शेयर तय की गई है. Fractal Analytics डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम करती है और दुनियाभर की कंपनियों को डिजिटल फैसले लेने में मदद करती है. इसका GMP 19 फीसदी प्रीमियम की ओर संकेत दे रहा है. 4 फरवरी को 1 बजकर 53 मिनट पर इसका जीएमपी 170 रुपये था. मौजूता जीएमपी आधार पर एक लॉट पर निवेशकों को 2720 रुपये का मुनाफा हो सकता है.

इसी दौरान Aye Finance भी 9 फरवरी से 11 फरवरी तक अपना IPO लाने जा रही है. कंपनी लगभग ₹1,000 करोड़ जुटाने की योजना में है. इसका प्राइस बैंड ₹122-129 प्रति शेयर है.

जल्‍द खत्‍म होगा NSE IPO का इंतजार, मार्च आखिर तक DRHP फाइल होने की उम्‍मीद, OFS से बेची जाएगी 4.5% हिस्‍सेदारी

ये होंगे सबसे बड़े इश्यू

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, इस IPO सीरीज में सबसे बड़ा इश्यू Indo MIM का हो सकता है, जिसका साइज करीब ₹5,500 करोड़ बताया जा रहा है. इसके बाद Clean Max Enviro Energy Solutions का IPO आने की संभावना है, जो लगभग ₹3,600 करोड़ जुटाने की तैयारी में है. ये दोनों इश्यू साइज के लिहाज से निवेशकों का खास ध्यान खींच सकते हैं.

सुस्ती के बीच IPO से लौट सकती है रफ्तार

बाकी कंपनियों में Gaja Alternative Asset Management (₹656 करोड़), Skyways Air Services (₹650 करोड़) और PNGS Reva Diamond (₹360 करोड़) शामिल हैं. ट्रेड से जुड़ी अनिश्चितता कम होने से निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे लौट सकता है.जनवरी में अब तक सिर्फ तीन IPO आए हैं, जो दिखाता है कि बाजार में कितनी सुस्ती रही है. 2025 में रिकॉर्ड ₹1.76 लाख करोड़ IPO के जरिए जुटाए गए थे, लेकिन 2026 की शुरुआत अभी तक फीकी रही है. ऐसे में फरवरी के ये IPO प्राइमरी मार्केट को नई रफ्तार दे सकते हैं.

राहुल गांधी और रवनीत बिट्टू के बीच संसद में तीखी बहस…

0

बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच एक गर्मागर्म बहस हुई। इस दौरान राहुल गांधी ने बिट्टू को गद्दार कहकर संबोधित किया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने मकर द्वार पर कांग्रेस सांसदों के विरोध प्रदर्शन के दौरान रवनीत बिट्टू को गद्दार कहा। बिट्टू ने 2024 में भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया था, जिससे यह विवाद और बढ़ गया।

गंभीर आरोप और प्रतिक्रिया

राहुल गांधी ने कहा, “देखो, एक गद्दार मेरे सामने से गुजर रहा है।” उन्होंने बिट्टू से हाथ मिलाने की कोशिश की और कहा, “नमस्ते भाई, मेरे गद्दार दोस्त। चिंता मत करो, तुम वापस आओगे।” हालांकि, केंद्रीय राज्य मंत्री ने हाथ मिलाने से मना कर दिया और राहुल को “देश के दुश्मन” कहा। यह बहस तब और बढ़ गई जब बिट्टू ने विरोध कर रहे सांसदों पर टिप्पणी की कि वे ऐसे बैठे हैं जैसे उन्होंने कोई युद्ध जीत लिया हो।

विपक्ष का प्रदर्शन

आज सुबह, बजट सत्र के दौरान, विपक्षी सदस्यों ने आठ निलंबित सांसदों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस कारण लोकसभा को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया। निलंबित सांसदों ने संसद के बाहर ‘प्रधानमंत्री समझौता कर चुके हैं’ लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मीडिया से बात करते हुए इसी मुद्दे को उठाया।

निलंबित सांसदों की सूची

निलंबित सांसदों में कांग्रेस के हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, प्रशांत यदाओराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और डीन कुरियाकोस शामिल हैं। इसके अलावा, सीपीआई (एम) के सांसद एस वेंकटेशन भी निलंबित किए गए। राहुल गांधी ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध का उल्लेख करते हुए सदन में हंगामा किया, जिसके बाद आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित किया गया।

राहुल गांधी ने लद्दाख संकट पर मोदी सरकार को घेरा…

0

राहुल गांधी का प्रधानमंत्री पर हमला

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को लद्दाख में चीन के साथ चल रहे गतिरोध के समाधान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक संवेदनशील समय में जिम्मेदारी लेने में असफलता दिखाई और सेना के नेतृत्व को अकेला छोड़ दिया। गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरणों की एक प्रति दिखाते हुए कहा कि वह इस पुस्तक को लोकसभा में प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से सौंपने के लिए तैयार हैं। उनका दावा है कि इस पुस्तक की सामग्री लद्दाख संकट के दौरान सरकार की प्रतिक्रिया की सच्चाई को उजागर करती है।

पुस्तक का महत्व

गांधी ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री आज लोकसभा में आने की हिम्मत करेंगे, क्योंकि यदि वह आते हैं, तो वह उन्हें यह पुस्तक सौंपने का इरादा रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पढ़ने के लिए महत्वपूर्ण है ताकि देश को सच्चाई का पता चल सके। पूर्व सेना प्रमुख के वृत्तांत का हवाला देते हुए उन्होंने जोर दिया कि पुस्तक में लद्दाख की घटनाओं का विस्तृत विवरण है और इसे विशेष रूप से भारत के युवाओं द्वारा पढ़ा जाना चाहिए।

चीनी सैनिकों की गतिविधियों का विवरण

गांधी ने पुस्तक में वर्णित एक महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख किया, जिसमें कैलाश रिज क्षेत्र में चीनी सैनिकों और टैंकों की गतिविधियों का जिक्र है। उन्होंने कहा कि जब चीनी टैंक कैलाश रिज पर पहुंचे, तो जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क किया और जवाबी कार्रवाई के निर्देश मांगे। गांधी ने कहा कि राजनाथ सिंह ने पहले कोई उत्तर नहीं दिया।

अन्य अधिकारियों से संपर्क

गांधी ने आगे बताया कि जनरल नरवणे ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और रक्षा मंत्री से भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें प्रारंभ में कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने जयशंकर जी और अन्य से पूछा, तो कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद, जनरल नरवणे ने राजनाथ सिंह को फिर से फोन किया, जिन्होंने कहा कि वे ‘शीर्ष’ अधिकारियों से पूछेंगे।

अखिलेश यादव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उठाए सवाल…

0

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने अमेरिका के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ को घटाकर शून्य कर सकता है और अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि और कोयला उत्पाद खरीद सकता है।

संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए, यादव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को ‘ढील’ करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिकी डेयरी और कृषि उत्पाद भारत में आयात होते हैं, तो ‘सनातनियों’ के लिए अपने व्रत का पालन करना मुश्किल होगा।

व्यापार समझौते पर चिंता

अखिलेश यादव ने कहा कि यह समझौता वास्तव में ‘समझौता’ नहीं है, बल्कि एक ‘ढील’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अपना पूरा बाजार अमेरिका को सौंप दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि डेयरी उत्पाद अमेरिका से आते हैं, तो भारतीयों का व्रत कैसे जारी रहेगा। उन्होंने भाजपा के सहयोगियों से पूछा कि वे स्वदेशी के नारे के साथ कहां हैं। इस व्यापार समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने से देश में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है।

सरकार का बचाव

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कृषि और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्रों का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारत की अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध उत्पादन को सुरक्षित रखा गया है। इस बीच, समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने केंद्र से संसद में चीन के साथ संबंधों पर चर्चा करने का आग्रह किया।

चीन के मुद्दे पर चर्चा की आवश्यकता

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा हमेशा चर्चाओं को टालने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के नेता और अन्य दलों ने चीन के मुद्दे पर जानकारी मांगी, तो भाजपा ने पीछे हटने का प्रयास किया। उन्होंने दोहराया कि हमें चीन के साथ अपने संबंधों पर विचार-विमर्श करके निर्णय लेना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर समय-समय पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश को यह जानने की जरूरत है कि सशस्त्र बलों का इस विषय पर क्या कहना है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक पर नजरें, दरों में कटौती की संभावना कम…

0

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक

केंद्रीय बजट 2026 और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद, अब सभी की नजरें तीन दिवसीय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक पर हैं, जो बुधवार से शुरू हो रही है।

इस बैठक में शुक्रवार को मुख्य रेपो दर पर निर्णय लिया जाएगा।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई वाली एमपीसी आगे की नीतिगत दर में कटौती को रोकने की संभावना है। केंद्रीय बैंक अब तरलता, बांड स्थिरता और मुद्रा से संबंधित जोखिमों से निपटने के लिए सीधे उपाय करने की योजना बना रहा है।

आरबीआई ने पहले ही फरवरी 2025 से रेपो दर को 125 आधार अंकों से घटाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया है।

विश्लेषकों के अनुसार, महंगाई के बढ़ने की संभावना के चलते और नए आधार वर्ष की श्रृंखला के प्रकाशन के साथ, आगे की कटौती के लिए कोई ठोस कारण नहीं है।

यस बैंक के एक नोट के अनुसार, “वर्तमान रेपो दर 5.25 प्रतिशत है, और महंगाई लगभग 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। नए श्रृंखला के प्रभाव का इंतजार करना होगा। वर्तमान वास्तविक दर 125 आधार अंक उचित प्रतीत होती है।”

आरबीआई को रुकने की स्थिति में रहना चाहिए और “तटस्थ” रुख बनाए रखना चाहिए, ताकि किसी भी विकास में गिरावट के मामले में अपनी शक्ति को बनाए रख सके।

आराधिका राव, डीबीएस बैंक की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री के अनुसार, “हम इस तिमाही और अप्रैल-जून 2026 में बांड खरीद जारी रहने की उम्मीद करते हैं। वित्तीय वर्ष 27 के बजट में रिकॉर्ड उच्च उधारी का उल्लेख है, इसलिए केंद्रीय बैंक को अपने धन बाजार से संबंधित संचालन में सक्रिय रहना चाहिए और उधारी की लागत को नियंत्रित रखना चाहिए।”

आरबीआई ने हाल ही में तरलता बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की तरलता बढ़ाई जाएगी। केंद्रीय बैंक ने कहा कि वह तरलता की स्थिति को सुधारने के लिए ओपन मार्केट बांड खरीद, विदेशी मुद्रा स्वैप और परिवर्तनीय दर रेपो संचालन का संयोजन उपयोग करेगा। ये कदम मौजूदा तरलता और वित्तीय स्थितियों की समीक्षा के बाद उठाए जा रहे हैं।

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ समझौता हुआ अंतिम रूप से…

0

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ समझौता

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सोमवार शाम हुई बातचीत के बाद अंतिम रूप से तय किया गया है।

भारत को अब अधिकांश अन्य देशों की तुलना में कम टैरिफ मिलेगा।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के सूत्रों ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच फोन पर विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 18 प्रतिशत कर दिया गया है। इस समझौते के तुरंत बाद, मोदी ने 1.4 अरब भारतीयों की ओर से ट्रंप का धन्यवाद किया।

हालांकि, सूत्रों ने बताया कि औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर करने में कुछ समय लगेगा क्योंकि कई मुद्दों को हल करना बाकी है। संबंधित मंत्री और अधिकारी अब मिलकर व्यापार समझौते को अंतिम रूप देंगे, जिसमें समय लगेगा। फिर भी, दोनों देश इस समझौते को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए उत्सुक हैं।

सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत लंबे समय से चल रही थी, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका। लेकिन मोदी और ट्रंप ने चर्चा के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया। यह समझौता एक बार हस्ताक्षरित होने पर भारतीय निर्यातकों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।

ऊर्जा क्षेत्र के संबंध में, सूत्रों ने कहा कि भारत किसी भी देश से सस्ता तेल खरीदेगा, लेकिन भारत ने प्रतिबंधित देशों या कंपनियों से तेल न खरीदने पर सहमति जताई है।

वेनेजुएला लंबे समय से एक प्रतिबंधित देश था, लेकिन अब इसे हटा दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में उस देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री से बातचीत की थी, और संभावना है कि भारत वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू करेगा, जो कीमतों पर निर्भर करेगा।

सूत्रों ने यह भी बताया कि कृषि क्षेत्र बंद रहेगा, ताकि भारतीय किसानों का लाभ हो सके, और इसे अन्य देशों के लिए नहीं खोला जाएगा।

PMO के सूत्रों ने कहा कि भारत को दिया गया 18 प्रतिशत टैरिफ अमेरिका द्वारा किसी भी देश को दिया गया सबसे कम टैरिफ में से एक है।

भारत के प्रतिस्पर्धियों में शामिल देशों जैसे इंडोनेशिया को 19 प्रतिशत, वियतनाम को 20 प्रतिशत, बांग्लादेश को 20 प्रतिशत और चीन को 34 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ता है।

अमेरिका के साथ टैरिफ समझौता कुछ ही दिनों बाद हुआ, जब भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एक बड़ा टैरिफ समझौता किया, जिसे ‘सभी समझौतों की मां’ कहा गया।

यह समझौता 27 जनवरी को मोदी और यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति में नई दिल्ली में हस्ताक्षरित किया गया था।

तेलंगाना बीजेपी ने राहुल गांधी के संसद में बोलने पर रोक के दावे की आलोचना की…

0

राहुल गांधी के दावे पर बीजेपी की प्रतिक्रिया

तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस बयान की तीखी निंदा की, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें संसद में बोलने से रोका गया।

तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी की यह आदत बन गई है कि वे झूठे आरोप लगाते हैं, भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठाते हैं और भारतीय सशस्त्र बलों का अपमान करते हैं।

राव ने कहा कि राहुल गांधी बार-बार यह दावा करते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है, साथ ही वे हमारे लोकतंत्र को चुनौती देते हैं और सशस्त्र बलों का अपमान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी राहुल गांधी के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। राव ने यह आरोप लगाया कि गांधी संसद में जनहित के मुद्दों को उठाने के अपने कर्तव्य को भूल गए हैं। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें सशस्त्र बलों और राष्ट्र का अपमान करते हुए देख रहे हैं, फिर भी वे यह कहते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, जहाँ एक झूठा व्यक्ति विपक्ष का नेता बन गया है।

इससे पहले, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बोलने से रोकने की चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिस दस्तावेज़ का उल्लेख करना था, उसे प्रमाणित करवा लिया था, लेकिन फिर भी उन्हें निचले सदन में इसका हवाला देने की अनुमति नहीं दी गई।

पत्र में राहुल गांधी ने लिखा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रस्ताव पर बोलते समय, उन्हें उस दस्तावेज़ को प्रमाणित करने का निर्देश दिया गया था जिसका वे उल्लेख करने वाले थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने भाषण के दौरान दस्तावेज़ को प्रमाणित कर दिया था। दीर्घकालिक परंपरा के अनुसार, सदन में किसी दस्तावेज़ का उल्लेख करने के इच्छुक सदस्य को उसे प्रमाणित करना और उसकी सामग्री के लिए ज़िम्मेदारी स्वीकार करना आवश्यक है। एक बार यह आवश्यकता पूरी हो जाने पर, अध्यक्ष सदस्य को दस्तावेज़ का उद्धरण देने की अनुमति देते हैं। इसके बाद, सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह जवाब दे, और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है।

राहुल गांधी को संसद में बोलने के लिए नियमों का पालन करने की सलाह…

0

संसदीय कार्य मंत्री का बयान

बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में बोलते समय संसदीय नियमों का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने गांधी के पत्र का उत्तर दे दिया है और संसद में कोई भी सदस्य मनमाने तरीके से नहीं बोल सकता।

एक दिन पहले, राहुल गांधी ने अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर बोलने से रोकने पर अपनी चिंता व्यक्त की थी.

रिजिजू का जवाब

पत्रकारों से बातचीत करते हुए रिजिजू ने कहा कि उन्होंने गांधी के पत्र का उत्तर दे दिया है। उन्होंने कहा, “हम भी इंतजार करते-करते थक गए हैं, लेकिन वह बोलते नहीं हैं। उनका कहना है कि वह नियमों का उल्लंघन करके बोलेंगे। हमने दो दिन इंतजार किया, लेकिन दूसरों को भी बोलने का अवसर मिलना चाहिए। यह भारत की संसद है, आपको नियमों के अनुसार बोलना चाहिए।”

कांग्रेस सांसद की प्रतिक्रिया

इस बीच, कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा कि संसद में बोलने का अधिकार विपक्ष के नेता और सभी सांसदों को है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर राहुल गांधी को रोकने और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। सिंह ने कहा, “मैं देख रहा हूं कि जिस दिन से राहुल गांधी बोलने की कोशिश कर रहे हैं, पूरी भाजपा सरकार उन्हें रोकने पर तुली हुई है।”

विपक्ष का विरोध

बुधवार को लोकसभा को विपक्षी सदस्यों द्वारा बजट सत्र के दौरान आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन के विरोध में जोरदार नारेबाजी के बीच स्थगित कर दिया गया। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर मीडिया से बात करते हुए गांधी ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, प्रशांत यदाओराव पाडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और डीन कुरियाकोस शामिल हैं।