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अखिलेश यादव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर उठाए सवाल…

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समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने बुधवार को केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने अमेरिका के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि भारत कुछ अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ को घटाकर शून्य कर सकता है और अमेरिका से 500 अरब डॉलर के ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि और कोयला उत्पाद खरीद सकता है।

संसद के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए, यादव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को ‘ढील’ करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिकी डेयरी और कृषि उत्पाद भारत में आयात होते हैं, तो ‘सनातनियों’ के लिए अपने व्रत का पालन करना मुश्किल होगा।

व्यापार समझौते पर चिंता

अखिलेश यादव ने कहा कि यह समझौता वास्तव में ‘समझौता’ नहीं है, बल्कि एक ‘ढील’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने अपना पूरा बाजार अमेरिका को सौंप दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि डेयरी उत्पाद अमेरिका से आते हैं, तो भारतीयों का व्रत कैसे जारी रहेगा। उन्होंने भाजपा के सहयोगियों से पूछा कि वे स्वदेशी के नारे के साथ कहां हैं। इस व्यापार समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने से देश में राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है।

सरकार का बचाव

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा कृषि और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्रों का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में भारत की अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों, विशेषकर कृषि और दुग्ध उत्पादन को सुरक्षित रखा गया है। इस बीच, समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने केंद्र से संसद में चीन के साथ संबंधों पर चर्चा करने का आग्रह किया।

चीन के मुद्दे पर चर्चा की आवश्यकता

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा हमेशा चर्चाओं को टालने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष के नेता और अन्य दलों ने चीन के मुद्दे पर जानकारी मांगी, तो भाजपा ने पीछे हटने का प्रयास किया। उन्होंने दोहराया कि हमें चीन के साथ अपने संबंधों पर विचार-विमर्श करके निर्णय लेना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर समय-समय पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देश को यह जानने की जरूरत है कि सशस्त्र बलों का इस विषय पर क्या कहना है।