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भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को मौन धारण कर दी गई श्रद्धाजंलि

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राजनांदगांव। शहीद दिवस पर कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने आज कलेक्टोरेट परिसर में स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को मौन धारण कर श्रद्धाजंलि अर्पित की। कलेक्टर जितेन्द्र यादव एवं कलेक्टोरेट के अधिकारी तथा कर्मचारियों ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को श्रद्धाजंलि दी। इस दौरान अपर कलेक्टर सीएल मारकण्डेय, नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शीतल बंसल सहित कलेक्टोरेट के अन्य अधिकारी तथा कर्मचारी उपस्थित रहे।

जल जीवन मिशन ने बदली गांव की दिशा और दशा, जल जीवन मिशन से ग्राम गुण्डरदेही में आया बदलाव

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राजनांदगांव। छुरिया विकासखंड अंतर्गत आने वाले 1021 जनसंख्या वाला ग्राम गुण्डरदेही पेयजल की समस्या से प्रभावित था। गांव की आबादी बढ़ने के साथ-साथ जल स्रोतों पर भी दबाव भी बढ़ता गया। ग्रीष्म ऋतु में पेयजल की अत्यधिक गंभीर समस्या हो जाती थी। जिसे देखते हुए शासन द्वारा जल जीवन मिशन के तहत ग्राम गुण्डरदेही में पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य शुरू किया गया। सबसे पहले ग्राम के जल स्रोतों का सर्वे किया गया। उसके बाद सुरक्षित जल आपूर्ति हेतु संरचनाओं का निर्माण किया गया। पाईप लाईन विस्तार, जल भण्डारण व्यवस्था एवं 222 घरेलू नल कनेक्शन प्रदान कर गांव के प्रत्येक घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य पूरा किया गया। जल जीवन मिशन के लागू होने से गांव के जीवन स्तर में सुधार देखने को मिला है। पहले ग्रामीण महिलाओं को पेयजल की व्यवस्था के लिए घंटो लग जाते थे। समय की बचत होने से ग्रामीण महिलाएं परिवार एवं आजीविका से जुड़े कार्यों में समय दे पा रही हैं। ग्रामवासियों को स्वच्छ पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो रहा है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है। जल जीवन मिशन से ग्राम गुण्डरदेही में पेयजल की समस्या का समाधान हुआ। साथ ही स्वच्छता और जागरूकता को भी बढ़ावा मिला है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ग्रामीणों को जल संरक्षण, पेयजल की गुणवत्ता एवं नल कनेक्शन के रख-रखाव के बारे में जानकारी दी गई। इससे गांव में जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई है और ग्रामीणों द्वारा जल व्यवस्था को सुरक्षित रखने में सहयोग किया जा रहा है। ग्राम गुण्डरदेही के प्रत्येक घरों में नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो रहा है और यह ग्रामीणों के सम्मान एवं आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा ग्रामीणों के समन्वय से जल जीवन मिशन ने गांव की दिशा और दशा को बदलने का कार्य किया है। सरपंच श्रीमती उमा सिंह ने कहा कि जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्राम गुण्डरदेही के ग्रामीणों को नलों के माध्यम से ग्राम के प्रत्येक घरों तक शुद्ध पेयजल की सुविधा मिलने से ग्रामीण जीवन आसान हुआ है। पहले पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों को रोज संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन अब हर घर में नल से जल पहुंचने से समय, स्वास्थ्य और स्वच्छता तीनों में सुधार हुआ है।

स्वीकृत निर्माण कार्यों को शीघ्र प्रारंभ कर समय-सीमा में करें पूर्ण : जितेन्द्र यादव

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राजनांदगांव। कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में निर्माण एजेंसियों की बैठक लेकर जिले में चल रहे निर्माण कार्यों की गहन समीक्षा की। कलेक्टर श्री यादव ने निर्माण विभागों द्वारा कराए जा रहे निर्माणाधीन कार्यों की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने पूर्व वर्षों में स्वीकृत निर्माण कार्य समय-सीमा में पूर्ण नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर के कार्य नागरिकों की जरूरत और आवश्यकता के आधार पर स्वीकृत किए जाते है। ऐसे कार्यों में ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण स्तर के निर्माण कार्य स्वीकृत होने के बाद अविलंब कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की स्वीकृति के बाद उसे शीघ्र प्रारंभ कर निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तायुक्त कार्य पूर्ण होना चाहिए। जिससे जनसामान्य को समय पर निर्माण कार्य का लाभ मिल सके। उन्होंने ठेकेदार संजय सिंघी के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति एवं समय पर कार्य पूर्ण न होने पर नाराजगी जाहिर की। निर्माण कार्यों की निविदा मिलने के बाद ठेकेदारों द्वारा लापरवाही एवं कार्य प्रारंभ नहीं करने पर संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों को नियमित विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। जिससे निर्माणाधीन कार्यों में तेजी आएगी और गुणवत्ता बनी रहेगी। उन्होंने छोटे एवं पुराने विकास कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे जनसामान्य को इसका लाभ जल्दी मिल सके।
कलेक्टर जितेन्द्र यादव ने सांसद एवं विधायक निधि के अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सांसद एवं विधायक निधि से स्वीकृत निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ निर्धारित समयावधि में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करें। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य स्वीकृति के बाद उसे शीघ्र शुरू कराना चाहिए। बैठक में नगर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शीतल बंसल, कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग एसके चौरसिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

तिलई में पांच दिवसीय योग शिविर शुरू, ग्रामीणों को मिल रहा स्वास्थ्य लाभ

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राजनांदगांव। राष्ट्रीय आयुष सोसाइटी संचालनालय रायपुर, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार तथा जिला आयुष अधिकारी डॉ. शिल्पा मिश्रा के मार्गदर्शन में आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) आरोग्यम् परम धनम पदुमतरा द्वारा ग्राम तिलई में पांच दिवसीय योग शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर 27 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 7.30 बजे तक आयोजित होगा।
शिविर में ग्रामीणों को उच्च रक्तचाप, मधुमेह, वात रोग, श्वास रोग सहित अन्य जीवनशैली जनित रोगों से बचाव एवं उपचार हेतु विविध योगासन और प्राणायाम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही शिविर में जुम्बा डांस के माध्यम से शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा प्रतिभागियों को अंकुरित चना भी वितरित किया जा रहा है।
शिविर प्रभारी डॉ. हर्षा दुबे ने बताया कि योग के नियमित अभ्यास से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी सुदृढ़ होता है। उन्होंने ग्रामवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शिविर में भाग लेकर इसका लाभ उठाने की अपील की है।
योग शिविर को लेकर ग्रामीणों में उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग सुबह-सुबह पहुंचकर योगाभ्यास कर रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि इस तरह के शिविर ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

मनरेगा और धान खरीदी को लेकर कांग्रेस का धरना और चक्काजाम, भाजपा सरकार पर साधा निशाना

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राजनांदगांव। राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की बलिदान दिवस के अवसर पर 30 जनवरी को कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत ब्‍लाक स्‍तर पर शांतिपूर्ण धरना/प्रदर्शन एवं प्रदेश के किसानों की धान खरीदी हेतु निर्धारित तिथि आगे बढ़ाए जाने की मांग को लेकर सांकेतिक चक्‍काजाम किया गया। इस दौरान धान खरीदी में उपजी अव्‍यवस्‍था, किसानों को संदेही मानने जैसे दुर्व्‍यवहार पर भी कांग्रेस ने विरोध दर्ज कराया।

राजनांदगांव शहर में उत्‍तर व दक्षिण ब्‍लाक कांग्रेस कमेटी के अलग-अलग दो स्‍थानों पर आयोजनों में बड़ी संख्‍या में कांग्रेसजन शामिल हुए। दोनों स्‍थानों पर धरना-प्रदर्शन के दौरान जिला शहर कांग्रेस कमेटी अध्‍यक्ष जितेंद्र मुदलियार पहुंचे और कार्यकर्ताओं, किसानों और समर्थकों का उत्‍साह बढ़ाया।

जिला शहर कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर उत्‍तर ब्‍लाक कांग्रेस कमेटी अध्‍यक्ष चेतन भानुशाली के नेतृत्‍व में कन्‍हारपुरी मोड़, दक्षिण ब्‍लॉक कांग्रेस कमेटी अध्‍यक्ष लक्ष्‍मण साहू के नेतृत्‍व में हल्‍दी में प्रदर्शन किया गया। 11 बजे से १ बजे तक धरना प्रदर्शन के बाद कांग्रेसियों ने दमखम के साथ चक्‍काजाम किया। प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पहले ही बड़ी संख्‍या में सुरक्षाबल तैनात किए गए थे।

प्रदर्शन के दौरान जिला शहर कांग्रेस कमेटी अध्‍यक्ष जितेंद्र मुदलियार ने कहा कि सत्‍तालोलुप भाजपा किसान, मजदूर, गरीब का दर्द नहीं जानती। ग्रामीण मजदूरों से मनरेगा की रोजगार गारंटी और आजीविका छीनी जा रही है। किसानों को धान बेचने से रोका जा रहा है। महंगाई चरम पर है और मध्‍यम, गरीब-निम्‍न वर्गीय परिवारों का जीवन यापन करना मुहाला हो गया है। ट्रिपल इंजन में विकास का वायदा करने वाली भाजपा की सरकार में सिर्फ और सिर्फ महंगाई, शोषण और भ्रष्‍टाचार के तीन इंजन चल रहे हैं।

पूर्व महापौर हेमा देशमुख ने कहा कि अन्‍नदाताओं को जिस तरह प्रताडि़त किया जा रहा है उससे भाजपा ये समझ ले कि उनकी सत्‍ता को चंद दिन ही बचे हैं। परिवार चलाने वाली महिलाएं जानती हैं कि केंद्र और राज्‍य सरकार ने किस हद तक उन्‍हें गरीबी की ओर झोंकने का काम किया है। यह भाजपा की राजनीतिक अधोगति का आरंभ है।

इस प्रदर्शन के दौरान कमलजीत सिंह पिंटू, श्रीकिशन खंडेलवाल, कुतुबुद्दीन सोलंकी, रमेश डाकलिया, अशोक फड़नवीस, राकेश जोशी, अशोक पंजवानी, विनय झा, प्रवीण मेश्राम, माया शर्मा, अमर झा, राजा तिवारी, मोहनी भारती,झम्‍मन देवांगन, गोपी रजक, आफताब अहमद, मामराज अग्रवाल, सुरेंद्र देवांगन, दुलारी साहू, राजिक सोलंकी, सचिन तुराहटे, मोहन साहू, देवेश वैष्‍णव, अभिमन्यु मिश्रा, करीम मेमन, कादिर कुरैशी, वीरेंद्र चंद्राकर, पींकू खान, बंटी यादव, समीर द्विवेदी, राजा यादव,रूपेश साहू, अब्‍बास खान, केवल राम साहू, प्रमोद बागड़ी, मनीष अग्रवाल, गजेंद्र सिंह राजपूत, अभिषेक यादव, नरेश साहू, भागचंद साहू, पोषण साहू, महेश साहू, मनीष साहू, रीना पटेल, सीताराम श्रीवास, पुनीत भारती, रमेश साहू, अमित जंघेल, कय्यूम खान धीरेंद्र, उमेश गर्ग, प्रदीप राठौर, सविता ठाकुर, सुनीता सिन्हा, जयेश साहू, ललित मरकाम, लोकू यादव, लोकेश साहू, मोहित साहू, दुर्गेश साहू, भूपेंद्र निषाद, थानसिंग साहू, तेनसिंह साहू, दुष्यंत चंद्राकर, रामचंद्र यादव, हितेश साहू, जय जायसवाल, खुलेश चंद्राकर, भागवत साहू, राकेश चंद्राकर, अशोक साहू, धनेश राम, छन्नू , चोवारम साहू, दुष्यंत साहू, लछ्छू राम साहू, वीरेंद्र साहू, कौशल राम साहू, निशा गुप्ता, अशोक सेन, विष्णु सिन्हा, ओगेश्वर साहू, विकास कुमार चंद्राकर, इंद्र कुमार साहू, धीरेंद्र जांगड़े, नरेश साहू, सकुर चौहान, सीताराम श्रीवास, प्रकाश बाफना, संदीप सोनू, गोलू नायक, मेहुल कुमार, निमेश देशलेहरे, प्रदीप राठौर, सोहन चंद्राकर, चंपालाल चंद्राकर, शिखा साहू, रूपलाल साहू, लालू साहू, नेमचंद साहू, लोकेश राय, प्रवीण चंद्राकर सहित अन्‍य कांग्रेसजन उपस्थित रहे।

SIR: कांग्रेस ने ECI को लिखा पत्र, BJP पर  फॉर्म-7 के दुरुपयोग का लगाया आरोप, रोकने और जांच कराने की मांग की…

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कांग्रेस ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए गुरुवार को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है और आग्रह किया है कि इससे संबंधित सभी संदिग्ध मामलों की प्रक्रिया रोकी जाए और स्वतंत्र जांच कराई जाए।

फॉर्म-7 मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम के शामिल होने पर आपत्ति जताने या पहले से सूचीबद्ध नाम को हटाने का अनुरोध करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आधिकारिक आवेदन पत्र है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर दावा किया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

केसी वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, ”हम इस आयोग का ध्यान एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं, जो विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत दावा और आपत्तियां दर्ज कराने के चरण में योग्य मतदाताओं के नामों को गलत तरीके से हटाए जाने से संबंधित है।”

उन्होंने दावा किया कि जो बात अत्यंत चिंताजनक है और जिस पर आयोग का तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है, वह यह है कि मीडिया की खबरों और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है जो बीजेपी से जुड़े हैं और निर्वाचन आयोग के ही दस्तावेज़ ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटवा रहे हैं।

कांग्रेस नेता का कहना है कि यदि इन कार्रवाइयों को रोका नहीं गया और आयोग द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया, तो इससे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को अनुचित चुनावी लाभ प्राप्त करने का दुस्साहस मिलेगा और लाखों मतदाता विशेषकर पिछड़े, हाशिए पर रहने वाले समुदायों से संबंधित लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।

वेणुगोपाल ने कहा कि दावों एवं आपत्तियों की अवधि में प्रमाण प्रस्तुत करने का दायित्व फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति पर ही होता है और झूठी जानकारी देने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अंतर्गत दंड का प्रावधान है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जो कुछ हो रहा है, वह अत्यंत चौंकाने वाला है और इस पर तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।

वेणुगोपाल ने दावा किया, ”फॉर्म-7 के ‘प्री-प्रिंटेड’ आवेदन बड़ी संख्या में किसी केंद्रीकृत प्रणाली से तैयार किए जा रहे हैं। इनका उपयोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इन फॉर्म को संगठित ढंग से विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ को सौंपा जा रहा है।”

उनके अनुसार, इन फॉर्म में आपत्तिकर्ता की पहचान से जुड़ी आवश्यक जानकारियां नहीं होती।कांग्रेस नेता के अनुसार, कई मामलों में जिन लोगों के नाम से फॉर्म-7 भरे गए, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इनकार किया कि उन्होंने ऐसा कोई फॉर्म भरा था। उनका कहना है कि राजस्थान और असम में यह दुरुपयोग स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ”बिना वैध पहचान व प्रमाण वाले सभी संदिग्ध फॉर्म-7 की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। बीएलओ और ईआरओ को निर्देश दिया जाए कि व्यक्तिगत सत्यापन के बिना कोई भी नाम न हटाया जाए। ऐसे सभी व्यक्तियों/संगठनों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए जो फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस पूरे मामले की तत्काल और स्वतंत्र जांच कराई जाए।”

उन्होंने आयोग से यह आग्रह भी किया, ”12 राज्यों में फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।” वेणुगोपाल ने कहा, ”मताधिकार लोकतंत्र की आत्मा है। किसी भी संगठित प्रयास द्वारा नागरिकों को इससे वंचित करना असंवैधानिक है। हम आयोग से आग्रह करते हैं कि वह इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए।”

गौरतलब है कि बीजेपी पर एसआईआर के दौरान फॉर्म-7 के दुरुपयोग के आरोप लगातार लगते रहे हैं। पश्चिम बंगाल और असम में सबसे ज्यादा बीजेपी से जुड़े लोगों द्वारा फॉर्म-7 के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। असम की बीजेपी सरकार के मुखिया सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने तो खुलेआम यह बात एक तरह से स्वीकार भी की है। हाल ही में उन्होंने कहा कि, “यह छिपाने की बात नहीं है कि हम मियां के खिलाफ हैं। हां, हम उनके वोट चुरा रहे हैं। हां यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि हम फॉर्म 7 भरकर उनके नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए चुनाव आयोग को दें। मैंने खुले तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे ऐसा काम करें, हम उन्हें वोट के अधिकार से वंचित करना चाहते हैं…वे जाएं और बांग्लादेश में वोट डालें….।” हालांकि 28 जनवरी को उन्होंने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वे मुसलमानों के खिलाफ नहीं बल्कि बांग्लादेशियों के खिलाफ हैं।

पुण्यतिथि विशेष: सिनेमा के पर्दे पर बापू के विचार, अहिंसा और सत्याग्रह की कहानियां जो आज भी देती हैं नई सीख…

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शांति, अहिंसा और सर्वोदय के संदेश के साथ देश भर में शहीद दिवस या सर्वोदय दिवस मनाया जाता है। गांधीजी के जीवन, सिद्धांतों और विचारों ने न केवल भारत को आजादी दिलाई, बल्कि पूरी दुनिया को अहिंसा का मार्ग दिखाया।

भारतीय सिनेमा ने उनके इन आदर्शों को विभिन्न तरीकों से पेश किया है।

कुछ फिल्में उनकी जीवनी पर आधारित हैं, तो कुछ ने नए अंदाज में उनके सिद्धांतों को आज के समाज से जोड़ने का काम किया है। ये फिल्में गांधीजी के सिद्धांतों को अलग-अलग रूपों में पेश करती हैं, कभी ऐतिहासिक, कभी मजाकिया तो कभी चिंतनपूर्ण। आज की पीढ़ी को इनसे प्रेरणा मिल सकती है कि अहिंसा और सत्य आज भी प्रासंगिक हैं। गांधीजी का संदेश सिनेमा के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है। ‘मोहनदास’ से ‘बापू’ तक की झलक दिखाने वाली ये फिल्में दर्शकों को गांधीजी के विचारों से जोड़ती हैं और आज के समय में उनकी प्रासंगिकता बताती हैं। इन फिल्मों की लिस्ट में साल 1982 में आई ‘गांधी’ से लेकर 2006 की ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ तक शामिल हैं।

साल 2007 में रिलीज हुई थी ‘गांधी मेरे पिता’ फिल्म, फिरोज अब्बास खान के निर्देशन में बनी फिल्म में अक्षय खन्ना, दर्शन जरिवाला, शेफाली शाह और भूमिका चावला मुख्य कलाकार के तौर पर हैं। फिल्म गांधीजी और उनके बेटे हरिलाल के बीच तनावपूर्ण रिश्ते पर केंद्रित है। पिता-पुत्र संबंध, गांधीजी के सिद्धांतों का परिवार पर प्रभाव और व्यक्तिगत संघर्ष को इसमें दिखाया गया है।

कॉमेडी-ड्रामा लगे रहो मुन्नाभाई साल 2006 में रिलीज हुई थी। गांधीजी के सिद्धांतों को मजेदार और नए अंदाज में पेश करती फिल्म के निर्देशक राजकुमार हिरानी हैं। वहीं, संजय दत्त, अरशद वारसी, विद्या बालन मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म के जरिए दिखाया गया कि कैसे एक गुंडा गांधीजी के विचारों से प्रभावित होकर सत्य, अहिंसा और प्रेम से जीवन बदल लेता है। फिल्म आज के समाज में गांधीवाद की प्रासंगिकता दिखाती है।

‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ जाहनु बरुआ की फिल्म है, जो साल 2005 में रिलीज हुई थी। अनुपम खेर के साथ उर्मिला मातोंडकर इसमें लीड रोल में हैं। यह अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति की कहानी है, जो मानता है कि उसने गांधीजी को मारा। यह गांधीजी की हत्या का सामाजिक प्रभाव और उनके सिद्धांतों की याद दिलाती फिल्म है, जो गांधीजी के विचारों को आज के संदर्भ में जोड़ती है।

‘हे राम’ फिल्म साल 2000 में रिलीज हुई थी, जिसका निर्देशन करने के साथ ही लेखन और अभिनय भी कमल हासन ने किया। फिल्म में शाहरुख खान, रानी मुखर्जी, हेमा मालिनी और नसीरुद्दीन शाह अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म विभाजन, डायरेक्ट एक्शन डे और गांधीजी की हत्या की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह गांधीजी के विचारों पर गहरा चिंतन कराती है।

‘महात्मा का निर्माण’ 1996 में रिलीज हुई थी। श्याम बेनेगल निर्देशत फिल्म में राजित कपूर, पल्लवी जोशी लीड रोल में हैं। फिल्म गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका के समय पर फोकस करती है, जहां वह सत्याग्रह की शुरुआत करते हैं।

महात्मा गांधी के जीवन पर आधारित क्लासिक फिल्म ‘गांधी’ साल 1982 में आई। रिचर्ड एटनबरो के निर्देशन में बनी इस फिल्म में बेन किंग्सले ने गांधीजी की भूमिका निभाई थी। रोहिणी हट्टंगड़ी कस्तूरबा की भूमिका में और रोशन सेठ जवाहर लाल नेहरू की रोल में थे। फिल्म की थीम अहिंसा, सत्याग्रह और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम है, जो गांधीजी के दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत लौटने और आजादी तक की यात्रा दिखाती है। महात्मा गांधी के वैश्विक प्रभाव को बखूबी दर्शाती यह फिल्म ऑस्कर जीत चुकी है।

‘पूर्वोत्तर को राजनीतिक रूप से अनाथ बना दिया गया’, असम को लेकर कांग्रेस ने अमित शाह से पूछे तीखे सवाल…

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कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह के असम दौरे के बीच शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी पर प्रदेश के साथ वादाखिलाफी करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें यह बताना चाहिए कि पूर्वोत्तर के लोगों को ”राजनीतिक रूप से अनाथ” क्यों कर दिया गया है।

पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने यह आरोप भी लगाया कि ‘जाति, माटी, भेटी’ के नारे के साथ सत्ता में आने के बाद भाजपा ने असम की जनता के साथ विश्वासघात किया।

कांग्रेस का गृह मंत्री से 10 प्रश्न

खेड़ा ने कहा, ”सत्ता में 12 साल हो चुके हैं, फिर भी कोच-राजबोंगशी, ताई-अहोम, मोरान, मटक, चुटिया और चाय बागान से जुड़े जनजाति/आदिवासी समुदाय को अभी तक अनुसूचित जनजाति का दर्जा क्यों नहीं मिला? आपकी सरकार ने असम के मूल निवासियों की 1.5 लाख बीघा ज़मीन अपने चहेतों को बेचने की अनुमति क्यों दी? ‘भूमि-बिक्रेता’ हिमंत विश्व शर्मा को खुली छूट क्यों दी गई है?”

उन्होंने यह सवाल भी किया कि असम के युवाओं को बाहर जाकर भेदभाव झेलने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ता है, असमिया पहचान क्यों कमजोर हो रही है तथा मतदाता सूची से लाखों मूल निवासी मतदाताओं के नाम क्यों गायब हो गए हैं?

कांग्रेस नेता ने कहा, ”असम के चाय उत्पादकों के लिए अब तक एमएसपी क्यों नहीं है? क्या आप बड़ी चाय कंपनियों की जेब में हैं? सत्ता में भाजपा के एक दशक बाद भी असम स्वास्थ्य सेवाओं में पीछे क्यों है? क्या आपकी सरकार असम के लोगों की भलाई की परवाह नहीं करती?”

खेड़ा ने सवाल किया कि असम के पानी में ज़हर कैसे घुल गया तथा जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं?

उन्होंने कहा, ”आप ‘जाति, माटी, भेटी’ के नारे के साथ आए थे, फिर जाति को कमजोर किया, माटी को बेच दिया और भेटी से विश्वासघात क्यों किया? असम और पूरे पूर्वोत्तर के लोग राजनीतिक रूप से अनाथ क्यों हो गए हैं?”

असम में ‘भेटी’ शब्द का उपयोग घर या मातृभूमि के लिए किया जाता है।

कांग्रेस ने यह भी कहा, ”आपकी विदेश नीति की विफलताओं ने बांग्लादेश को चीन के और करीब कर दिया है, जिससे असम के लिए नए सुरक्षा और मानवीय संकट पैदा हो रहे हैं। क्यों?”

‘मनरेगा को खत्म करने के बाद, क्या अब आरटीआई की बारी है?’ कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे का सरकार से सवाल…

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संसद में बृहस्पतिवार को प्रस्तुत वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा में लगभग दो दशक पुराने आरटीआई कानून का फिर से अध्ययन करने की वकालत की गई है, ताकि गोपनीय रिपोर्ट और मसौदों को सार्वजनिक किए जाने से छूट प्राप्त हो।

आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया कि आरटीआई अधिनियम 2005 का मकसद कभी भी इसे व्यर्थ की जिज्ञासा का जरिया बनाने का नहीं था, न ही इसका मकसद बाहर से बैठकर सरकार के हर छोटे-छोटे काम में दखल देना या उसे नियंत्रित करना था।

खड़गे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”आर्थिक समीक्षा ने सूचना का अधिकार अधिनियम की फिर से अध्ययन करने की पैरवी की है। यह सूचना को रोकने के लिए संभावित “मंत्री स्तरीय वीटो” का सुझाव भी देती है और यह देखने की बात करती है कि क्या नौकरशाहों की सार्वजनिक सेवा से जुड़े रिकॉर्ड, तबादले और स्टाफ रिपोर्ट्स को सार्वजनिक निगरानी से बाहर रखा जा सकता है।”

उन्होंने कहा, ”मोदी सरकार ने व्यवस्थित रूप से आरटीआई अधिनियम को कमजोर किया है। 2025 तक 26,000 से ज़्यादा मामले लंबित हैं। 2019 में मोदी सरकार ने आरटीआई अधिनियम में कटौती करते हुए सूचना आयुक्तों के कार्यकाल और वेतन पर नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया, जिससे स्वतंत्र निगरानी संस्थाओं को आज्ञाकारी अफ़सरों में बदल दिया गया।”

खड़गे ने आरोप लगाया कि डिजिटल डेटा सुरक्षा अधिनियम, 2023 की आड़ में “जनहित” वाले प्रावधान को खोखला कर दिया गया तथा निजता को हथियार बनाकर भ्रष्टाचार को ढकने और जांच-पड़ताल रोकने का रास्ता खोल दिया गया।

उन्होंने कहा, ” दिसंबर, 2025 तक केंद्रीय सूचना आयोग बिना मुख्य सूचना आयुक्त के काम कर रहा था, 11 साल में सातवीं बार इस अहम पद को जानबूझकर खाली रखा गया। 2014 से अब तक 100 से ज़्यादा आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है, जिससे सच बोलने वालों को दंडित करने और असहमति की आवाज़ दबाने का माहौल बना है।”

खड़गे ने सवाल किया, ”मनरेगा को खत्म करने के बाद, क्या अब आरटीआई की बारी है?”

उच्चतम न्यायालय ने यूजीसी के समानता नियमों पर रोक लगाई, चार कानूनी प्रश्न उठाए…

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यूजीसी नियमों पर उच्चतम न्यायालय की रोक

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए विनियम 2026 को चुनौती देने वाली याचिकाओं में महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्नों को उठाया है।

न्यायालय ने इस मामले पर विचार करने के लिए चार प्रमुख सवाल तैयार किए हैं।</p><p>शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी के हालिया समानता नियमों पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है।

न्यायालय ने कहा कि यह प्रारूप “प्रथम दृष्टा अस्पष्ट” है और इसके “बहुत व्यापक परिणाम” हो सकते हैं, जो समाज को “खतरनाक रूप से” विभाजित कर सकते हैं। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि विनियमों में “कुछ अस्पष्टताएं” हैं और इनके दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

न्यायालय ने यह भी कहा कि उसके अनुसार चार महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न विचारणीय हैं, जिन पर विस्तृत जांच की आवश्यकता है।

पहला प्रश्न यह है कि क्या विनियमों में धारा 3(सी) को शामिल करना, जो “जाति-आधारित भेदभाव” को परिभाषित करता है, 2026 के यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को पूरा करने के लिए उचित और तर्कसंगत है, खासकर इस तथ्य के आलोक में कि जाति-आधारित भेदभाव से निपटने के लिए कोई विशेष प्रक्रियात्मक तंत्र नहीं है।

दूसरा प्रश्न यह है कि क्या विनियमों के तहत “जाति-आधारित भेदभाव” को शामिल करने से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अंतर्गत सबसे पिछड़ी जातियों के मौजूदा संवैधानिक और वैधानिक उप-वर्गीकरण पर कोई प्रभाव पड़ेगा। क्या ये विनियम अत्यंत पिछड़ी जातियों को भेदभाव और संरचनात्मक असमानताओं से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करते हैं?

तीसरा सवाल यह है कि क्या विनियमों के खंड 7(घ) में “पृथकीकरण” शब्द को शामिल करना छात्रावासों, कक्षाओं, मार्गदर्शन समूहों या इसी तरह की शैक्षणिक या आवासीय व्यवस्थाओं के संदर्भ में, “अलग होते हुए भी समान” वर्गीकरण के बराबर होगा, जिससे अनुच्छेद 14, 15 और भारत के संविधान की प्रस्तावना के तहत समानता और बंधुत्व की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन होगा?

चौथा प्रश्न यह है कि क्या यूजीसी (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता का संवर्द्धन) विनियम 2012 में “रैगिंग” शब्द होने के बावजूद, इसे भेदभाव के एक विशिष्ट रूप के तौर पर उल्लेख नहीं करना एक प्रतिगामी विधायी चूक है। उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ 19 मार्च को इस मामले की सुनवाई करेगी।