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भारत अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: एक दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान…

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भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं नीतिगत सुधारों के चलते अगले दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

यह जानकारी सरकार की ओर से जारी ताजा डेटा में सामने आई।

भारत रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ऐसे अवसर पर मनाया जा रहा है, जब देश का अंतरिक्ष इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या इस साल अगस्त तक बढ़कर करीब 440 हो गई है, जो 2014 में सिर्फ 1 थी।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश लगभग छह गुना बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। अकेले 2026 में अब तक 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके हैं। इनमें 18 स्टार्टअप हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए अनुमति मिली है।

भारत ने 2020 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था। इससे उपग्रहों, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी संभव हुई।

इसे भारत के व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को और बढ़ाया। इस नीति में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया।

इसरो की वाणिज्यिक शाखा एनएसआईएल लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएं उपलब्ध कराती है और इसरो की तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाती है।

एनएसआईएल का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में 321.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बढ़ते व्यावसायीकरण को दर्शाता है।

इन-स्पेस सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम बनाता है। 31 जनवरी 2026 तक इसने उद्योगों और स्टार्टअप्स को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में मदद की।

दिल्ली-एनसीआर में रविवार सुबह हुई झमाझम बारिश, तापमान में देखी जा रही गिरावट…

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दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए रविवार की सुबह खुशनुमा रही। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद से लेकर गुरुग्राम तक तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव हो गया।

राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में सुबह से ही बरसात का दौर जारी रहा।

मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को दिल्ली-एनसीआर में बादल छाए रहेंगे। ज्यादातर जगहों पर न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा और अधिकतम तापमान भी सामान्य के आसपास ही रहने की संभावना है। दिल्ली में सोमवार को भी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।

दिल्ली एयरपोर्ट की ओर से जानकारी दी गई है कि भारतीय मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, दिल्ली एयरपोर्ट के आस-पास खराब मौसम की स्थिति रहने की संभावना है। दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन अभी सामान्य है। आपकी यात्रा बिना किसी परेशानी के पूरी हो, इसके लिए हमारी ग्राउंड टीमें सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर पूरी लगन से काम कर रही हैं। उड़ानों से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें।

रविवार को उत्तर प्रदेश में भी मौसम विभाग की ओर से तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। बनारस, प्रयागराज, समेत 13 जिलों में बारिश से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। मौसम विभाग की ओर से देश के कई हिस्सों में मानसून के सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है। उत्तर-पूर्व मध्य प्रदेश के ऊपर बने मौसम तंत्र और बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए दबाव के कारण मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है।

मौसम विभाग के अनुसार, 23 से 25 ​​अगस्त के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में काफी बड़े इलाके में या हर जगह बारिश होने की संभावना है। उत्तर-पश्चिम भारत के बाकी हिस्सों में कुछ जगहों पर या छिटपुट बारिश हो सकती है, जबकि 23 से 28 अगस्त के दौरान उत्तराखंड में कुछ जगहों पर आंधी-तूफान और बिजली गिरने की आशंका है। वहीं, 23 से 28 अगस्त के दौरान नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी काफी भारी बारिश की आशंका है।

नितिन नवीन की अध्यक्षता में भाजपा की दूसरे दिन हुई बैठक…

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भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन नवीन की अध्यक्षता में रविवार को दूसरे दिन संगठनात्मक बैठक हुई। बैठक में वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने संगठन के विस्तार और आगामी चुनावों की तैयारियों पर चर्चा की।

बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, सुनील बंसल, संजय भाटिया, स्मृति ईरानी, ​​हरीश द्विवेदी, सतीश पूनिया, गजेंद्र पटेल, राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी तरुण चुघ, बैजयंत पांडा, राजीव चंद्रशेखर, रेखा वर्मा, हर्ष मल्होत्रा, श्रीकांत शर्मा, संदीप पाठक, लाल सिंह आर्य और मनोज टिग्गा समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए।

चर्चा का मुख्य फोकस पार्टी संगठन को मजबूत करने और उसके संगठनात्मक नेटवर्क का विस्तार करने के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करना है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भाजपा कई राज्यों में चुनावों से पहले अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को तेज़ कर रही है। उम्मीद है कि वरिष्ठ नेता पार्टी की रणनीति, संगठनात्मक तैयारियों और जमीनी स्तर पर पार्टी की मौजूदगी को और मजबूत करने वाले कार्यक्रमों पर विचार-विमर्श करेंगे।

बैठक के दूसरे दिन मौजूदा संगठनात्मक गतिविधियों का जायजा लेने और आने वाले महीनों के लिए रोडमैप तैयार करने की भी उम्मीद है, जिसमें चुनाव वाले राज्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा। आगामी चुनावी मुकाबलों से पहले केंद्रीय नेतृत्व, राज्य इकाइयों और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए भाजपा नेतृत्व लगातार संगठनात्मक बैठकें कर रहा है।

इसके पहले शनिवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों की परिचय बैठक हुई थी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात करने के साथ संवाद किया था।

बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा था कि संगठनात्मक बैठकें नए विचारों और नजरिए पर केंद्रित होती हैं, जिनका मकसद पार्टी को मजबूत करना और लोगों के साथ जुड़ाव को गहरा करना होता है। पार्टी के साथियों और नई संगठनात्मक टीम के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई।

देश का युवा भाजपा के खिलाफ, कमेटी बनाकर खुश करने की कोशिश… राजद सांसद मनोज कुमार झा…

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के जेन-जी तक अपनी पकड़ और संवाद मजबूत करने के लिए एक विशेष आउटरीच कमेटी बनाने पर विपक्षी दलों ने जवाब दिया है।

विपक्षी सदस्यों ने कहा कि भाजपा को समझ आ चुका है कि युवा उसके खिलाफ हैं। इसलिए वे युवाओं को खुश करना चाहते हैं।

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, “कई कमेटियां बनाई गई हैं। प्रधानमंत्री ने शुरू-शुरू में ग्राम आदर्श योजना शुरू की थी। आज वो योजना कहां है?”

उन्होंने कहा, “कमेटियां बनाना बहुत आसान है। लोक प्रशासन में एक कहावत है कि कमेटियां बनाना ही यह बताता है कि आप मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं। युवाओं का मैसेज समझें। वे एक बेहतर एजुकेशन सिस्टम और आर्किटेक्चर चाहते हैं। उन्हें एक ठोस ब्लूप्रिंट और नौकरी का भरोसा चाहिए। ये दोनों भाजपा की कमेटी के प्रभाव क्षेत्र में नहीं हैं।”

डीएमके के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा, “वे समझ गए हैं कि युवा उनके खिलाफ हैं। सीजेपी आंदोलन और अलग-अलग युवा आंदोलनों ने उन्हें समझा दिया है कि युवा उनके खिलाफ हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि वे युवाओं को इकट्ठा कर सकते हैं, लेकिन युवा नीट जैसे कुछ जरूरी मुद्दे उठाते हैं। वे सभी चीजें इस सरकार के खिलाफ जाएंगी। वे समझ गए हैं कि अगली बार वे जीत नहीं सकते। इसीलिए वे किसी तरह युवाओं को खुश करना चाहते हैं। इसलिए वे सभी चीजें कर रहे हैं।”

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने कहा, “वह अपनी पार्टी की तरफ से कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं होगा। जेन-जी को भाजपा पर कोई भरोसा नहीं है।”

बता दें कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय में नवनियुक्त पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में ‘वंदे मातरम’ के गायन और अन्य विषयों पर प्रस्ताव पारित किए गए। साथ ही, जानकारी सामने आई कि भाजपा ने ‘जेन-जी’ के लिए विशेष आउटरीच कमेटी बनाई है। इसका मकसद देशभर के युवाओं के साथ जुड़ाव को मजबूत करना है।

भारतीय वायु सेना ने दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों को अंजाम दिया…

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भारतीय वायु सेना ने दो महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों को अंजाम दिया है। इन युद्धाभ्यासों में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित ‘पिच ब्लैक 2026’ और मलेशिया में किया गया ‘उदारा शक्ति 2026’ शामिल हैं।

भारतीय वायुसेना के योद्धा यहां राफेल लड़ाकू विमानों, सुखोई-30एमकेएम और एफ ए-18 हॉर्नेट विमानों के साथ नजर आए।

दोनों युद्धाभ्यासों में भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल पहुंच, सामरिक समन्वय और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक रक्षा साझेदारियों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित की गई। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ऑस्ट्रेलियाई ‘पिच ब्लैक 2026’ अभ्यास के दौरान भारतीय वायु सेना ने 20 से अधिक देशों की वायु सेनाओं के साथ यह अभ्यास किया। यहां भारतीय वायु सेना ने अपने फ्रंट लाइन लड़ाकू विमान ‘राफेल’ तैनात किए थे। यहां उच्च जोखिम वाले और बहु-क्षेत्रीय ऑपरेशनल वातावरण में आयोजित जटिल लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट मिशनों को अंजाम दिया गया।

वायुसेना का मानना है कि इस अभ्यास ने साझेदार देशों के बीच बेहतर तालमेल, अनुभवों से सीखने और संयुक्त रूप से प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को बढ़ावा दिया। वायुसेना की टुकड़ी ऑस्ट्रेलिया में अभियान पूरा करने के बाद सीधे ‘उदारा शक्ति 2026’ अभ्यास के लिए मलेशिया के सुबांग पहुंची। यहां वायु योद्धाओं ने रॉयल मलेशियाई वायु सेना के साथ मिलकर सुखोई-30एमकेएम और एफ ए-18 हॉर्नेट विमानों के साथ युद्धाभ्यास किया। यह उच्च-तीव्रता वाला हवाई युद्ध अभियानों एवं संयुक्त सामरिक युद्धाभ्यास था।

इस द्विपक्षीय अभ्यास का मुख्य उद्देश्य हवाई युद्ध की रणनीति को बेहतर बनाना, विषय विशेषज्ञों के बीच अनुभवों (एसएमईई) का आदान-प्रदान करना और संयुक्त परिचालन क्षमता को अधिक प्रभावी बनाना था। इन दोनों ही युद्धाभ्यासों के दौरान वायुसेना की गतिविधियां केवल कॉकपिट तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि रखरखाव की प्रक्रियाओं, मिशन योजना से जुड़ी जानकारी के आदान-प्रदान और सांस्कृतिक मेल-जोल तक विस्तारित हुईं। इससे दोनों देशों के विभिन्न रैंकों के सैन्यकर्मियों के बीच पेशेवर संबंध व आपसी भाईचारा और मजबूत हुआ।

भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील करीब पूरी हुई…

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भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील सैद्धांतिक रूप से करीब पूरी हो गई है और अब दोनों पक्ष कानूनी और तकनीकी भाषा पर कार्य कर रहे हैं। यह जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दी।

राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम में गोर ने कहा कि समझौते की मुख्य बातें तय हो गई थीं और बाकी काम में टेक्स्ट के कुछ हिस्सों को फिर से व्यवस्थित और अंतिम रूप देना शामिल था।

गोर ने कहा, “सिद्धांत रूप में, ट्रेड डील का लगभग सारा काम पूरा हो चुका है।”

उन्होंने समझौते को अंतिम रूप देने में हुई देरी का मुख्य कारण कानूनी और तकनीकी भाषा से जुड़ी प्रक्रियाओं को बताया।

अमेरिकी राजदूत ने अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित उस कानून को लेकर जताई जा रही चिंताओं पर भी बात की, जिसके तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस कदम को राजनीतिक दलों के दोनों पक्षों के नेताओं का समर्थन मिल रहा है और इस बात पर जोर दिया कि यह व्हाइट हाउस की तरफ से शुरू की गई पहल नहीं है।

गोर ने कहा, “यह ऐसी चीज नहीं है जिसका व्हाइट हाउस ने समर्थन किया हो। आपको राष्ट्रपति ट्रंप का इसे आगे बढ़ाते हुए कोई क्लिप नहीं मिलेगा।”

यह मानते हुए कि इस कदम का भारत पर असर पड़ सकता है, उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं।

गोर ने कहा, “राष्ट्रपति पहले दिन से ही रूस और यूक्रेन के बीच इस युद्ध को खत्म करना चाहते हैं और वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने इस संघर्ष को खत्म करने को “बेहद जरूरी” बताया।

गोर ने ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच करीबी रिश्तों पर भी जोर दिया और उनके संबंधों को “गहरी और व्यक्तिगत दोस्ती” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता काम करने में विश्वास रखने वाले और नतीजों पर ध्यान देने वाले हैं, और वे आपसी हित के मुद्दों पर तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “वे दोनों ही आगे की सोचने वाले हैं, तेजी से काम करना चाहते हैं और नतीजों पर ध्यान देते हैं। हमारे राष्ट्रपति प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करते हैं।”

2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद जब ट्रंप पद पर नहीं थे, उस समय को याद करते हुए गोर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के लगातार समर्थन ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर गहरी छाप छोड़ी थी।

उन्होंने कहा, “जब आप ऊंचे ओहदे पर होते हैं, जब आप ओवल ऑफिस में होते हैं, तो हर कोई आपका दोस्त बनना चाहता है। लेकिन जब आप पद पर नहीं होते, तभी आपको असल में पता चलता है कि आपके दोस्त कौन हैं। और उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सच्चे दोस्त साबित हुए।”

गोर के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच आपसी भरोसे ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को और मजबूत किया है।

 राजनाथ सिंह: हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकते…

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि अब हमारी सोच यह नहीं होनी चाहिए कि भारत को दुनिया से क्या खरीदना है। हमारी सोच यह होनी चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है।

स्वदेशी हथियार हमारे लिए कितने जरूरी हैं, इसका उदाहरण हमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता देखी।

राजनाथ सिंह ने यह बात रविवार को पांच रक्षा प्रोजेक्टों का शिलान्यास करने के दौरान कहीं। जिनका शिलान्यास किया गया वे पश्चिम बंगाल स्थित जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड की 5 नई फैसिलिटी हैं। जीआरएसई देश के प्रमुख युद्धपोत निर्माण प्रतिष्ठानों में शामिल है। जीआरएसई के पास 800 से अधिक जहाजों के निर्माण का अनुभव है। यहां राजनाथ सिंह ने कहा, हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि क्वालिटी ऐसी कि दुनिया भरोसा करे, कीमत ऐसी कि दुनिया चुने और डिलीवरी ऐसी कि दुनिया बार-बार ऑडर करे।

उन्होंने बताया जीआरएसई पास तकनीकी जानकारी है, कुशल कार्यबल है और अब विस्तारित क्षमता भी होगी। आपको इसका पूरा उपयोग करना होगा। आप अभी नौसेना के ऑर्डर के साथ-साथ, एक जर्मन कंपनी के लिए 12 मालवाहक जहाज बना रहे हैं। यह बिल्कुल हमारी मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, विजन के अनुरूप है। जैसे-जैसे आपकी क्षमता बढ़ेगी, आपको घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में अधिक आक्रामक बोली लगानी होगी।

राजनाथ सिंह ने कहा, “आगे भी, रक्षा मंत्रालय के साथ, हमारी प्रयोगशालाएं, हमारे सार्वजनिक उपक्रम, और निजी हितधारक मिलकर, अपनी सेनाओं को स्वदेशी प्लेटफॉर्म से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमने यह साबित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं है। आत्मनिर्भरता, युद्धक्षेत्र क्षमता का गुणक है। और इस पहल में जीआरएसई, तथा यंत्र इंडिया लिमिटेड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।”

रक्षामंत्री ने कहा कि यदि हम हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज मरम्मत और ओवरहॉल का केंद्र बन जाएं, तो विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ, हजारों रोजगार पैदा होंगे। आज भी हमारे बनाए युद्धपोत, दुनिया के संघर्ष क्षेत्रों से होकर हमारी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकते। हमारी अपनी स्वदेशी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को ही इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रभुत्व हासिल करना होगा। और आज के ये पांचों परियोजनाएं उसी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रतिबिंबित कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने बताया, “आज हम, लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपयों की लागत वाली पांच अत्यंत महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास कर रहे हैं। इनमें जीआरएसई की तीन नई जहाज निर्माण सुविधाएं – रायचक शिपयार्ड, टिम्बर पोंड हावड़ा जहाज निर्माण सुविधा और दामोदर कॉम्प्लेक्स जहाज निर्माण सुविधा शामिल हैं। इसके साथ ही यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाओं, 3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट, का भी शिलान्यास हो रहा है। ये पांचों परियोजनाएं आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की भावना को बल देने वाली हैं।”

उन्होंने कहा कि जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड जैसे संस्थान, इस बात के प्रमाण हैं, कि बंगाल का औद्योगिक आधार फिर से मजबूत हो रहा है। यहां से शुरू होने वाले ये परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन को तो बढ़ाएंगे ही, साथ ही साथ एमएसएमई, संबद्ध उद्योगों और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे। एक तरह से देखें, तो ये परियोजनाएं, बंगाल की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के, नए अध्याय के रूप में सामने आने वाले हैं।

भारतीय शेयर बाजार” देश की शीर्ष 10 में से चार कंपनियों का मार्केटकैप 87,000 करोड़ रुपए से अधिक घटा…

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देश की शीर्ष 10 में से चार कंपनियों का मार्केटकैप बीते हफ्ते 87,960.29 करोड़ रुपए घट गया है। इसकी वजह भारतीय शेयर बाजार में व्यापक आधार पर बिकवाली थी।

इस दौरान सेंसेक्स में 468.42 अंक या 0.60 प्रतिशत गिरावट के साथ 77,540.83 और निफ्टी में 114 अंक या 0.47 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,252 पर था।

जिन कंपनियों के मार्केटकैप में कमी आई है, उनमें भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का नाम शामिल हैं।

दूसरी तरफ लाइफ इंश्योरेंस कॉपरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी), रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस और एचडीएफसी बैंक के मार्केटकैप में कमी देखी गई।

17-21 अगस्त के कारोबारी सत्र में भारती एयरटेल का मार्केटकैप 28,052.96 करोड़ रुपए घटकर 12,14,963.15 करोड़ रुपए हो गया है।

टीसीएस का बाजार मूल्यांकन 22,070.34 करोड़ रुपए घटकर 8,31,436.51 करोड़ रुपए, एसबीआई का मार्केटकैप 20,861.20 करोड़ रुपए घटकर 9,64,968.76 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान यूनिलीवर का बाजार मूल्यांकन 16,975.79 करोड़ रुपए कम होकर 4,73,912.56 करोड़ रुपए हो गया है।

वहीं, एलआईसी का मार्केटकैप 12,650 करोड़ रुपए बढ़कर 5,35,980.31 करोड़ रुपए, रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केटकैप 8,119.53 करोड़ रुपए बढ़कर 17,78,175.59 करोड़ रुपए, एलएंडटी का बाजार मूल्यांकन 3,487.83 करोड़ रुपए बढ़कर 5,62,460.94 करोड़ रुपए और बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 3,424.28 करोड़ रुपए बढ़कर 6,80,621.62 करोड़ रुपए हो गया है।

आईसीआईसीआई बैंक का बाजार मूल्यांकन 752.47 करोड़ रुपए बढ़कर 10,18,330.45 करोड़ रुपए और एचडीएफसी बैंक का मार्केटकैप 356.95 करोड़ रुपए बढ़कर 11,21,159.05 करोड़ रुपए हो गया है।

बाजार मूल्यांकन के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर शीर्ष 10 में शामिल थे।

रामदेव ने कंगना रनौत पर साधा निशाना…

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योग गुरु बाबा रामदेव ने रविवार को हरिद्वार में मीडिया से बातचीत करते हुए भाजपा सांसद कंगना रनौत से जुड़े विवाद पर टिप्पणी की।

उन्होंने कहा, “इस देश के लोग जानते हैं कि स्वामी रामदेव कौन हैं और उनका क्या योगदान रहा है।

इसलिए, मैं ऐसे (कंगना रनौत) ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता।”

वहीं, योग गुरु स्वामी रामदेव ने ‘एक देश, एक चुनाव’ का समर्थन करते हुए कहा कि इससे शिक्षा में सुधार होगा और विकास की गति बढ़ेगी।

लोकतंत्र को बाधाओं का बंधक नहीं बनने देना चाहिए। ‘एक देश, एक चुनाव’ से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि चुनाव पूरे साल चलते रहते हैं, हर कुछ महीनों में कोई न कोई चुनाव होता ही रहता है। सड़कों और संसद में हंगामा और व्यवधान पैदा करके, कुछ लोगों को लगता है कि वे लोकतंत्र को बंधक बना सकते हैं। लेकिन कोई भी लोकतंत्र को बंधक नहीं बना सकता।”

रामदेव ने कहा, “राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है, लेकिन मैं चाहता हूं कि भारत 2040 तक ही विकसित राष्ट्र बन जाए।”

योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा, “शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा प्रणाली, अर्थव्यवस्था, कृषि और लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं में सुधार की जरूरत है।

सरकार इन क्षेत्रों में काम कर रही है और भविष्य में भी काम जारी रहेगा। हालांकि, कुछ लोगों को लगता है कि देश में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। वे तो पांच, सात और दस साल के बच्चों को भी विरोध-प्रदर्शनों में शामिल कर रहे हैं, उनसे पुलिस थानों को घेरने, एसपी और जिला मजिस्ट्रेट का घेराव करने और सड़कों पर खड़े होने के लिए कह रहे हैं।

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र को सड़क और संसद में हंगामा कर बंधक बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। नाबालिग बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं करना चाहिए। यदि किसी के साथ अन्याय हो रहा है तो 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाएं।”

वंदे मातरम को लेकर बाबा रामदेव ने कहा, “हम भारत माता को दुर्गा और लक्ष्मी के रूप में मानते हैं।

यही हमारी आस्था, हमारा ज्ञान, हमारा मंदिर और हमें सुरक्षा व शक्ति देने वाली हैं। वह हमारे लिए सर्वोच्च हैं और हमारी भक्ति व आकांक्षा का परम केंद्र हैं। जो लोग ‘वंदे मातरम’ में देवियों, देवताओं, मठों या मंदिरों का जिक्र देखते हैं, वे मेरी नजर में हमारी संस्कृत और संस्कृति से कटे हुए लगते हैं।

उन्हें संस्कृत का थोड़ा और अध्ययन करना चाहिए और इसके अर्थ को बेहतर ढंग से समझना चाहिए। हमारे लिए भारत माता ही हमारा ज्ञान, हमारी आस्था, हमारा मंदिर, हमारी पूजा, हमारा कर्तव्य, हमारा उद्देश्य, हमारी मंजिल, हमारा धर्म और हमारा सब कुछ हैं।”

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस: भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में अगले चरण का विकास डाउनस्ट्रीम एप्लीकेशन…

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राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर रविवार को एक्सपर्ट्स ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में अगले चरण का विकास सैटेलाइट और लॉन्च क्षमता से तय नहीं होगा, बल्कि डाउनस्ट्रीम एप्लीकेशन, निजी क्षेत्र की भागीदारी और सैटेलाइट आधारित सर्विसेज से निर्धारित होगा।

इंडियन स्पेस एसोसिएशन (आईएसपीए) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट ने कहा कि भारत के प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम ने बहुत कम समय में बड़ी प्रगति की है और अब इसकी क्षमताएं वास्तविक बाजार के अवसरों में बदल रही हैं।

उन्होंने कहा कि भारत एक ‘फुल-स्टैक’ स्पेस इकॉनमी के तौर पर उभर रहा है, जिसमें लॉन्च, सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर और कई तरह के डाउनस्ट्रीम एप्लीकेशन के क्षेत्रों में देश की ताकत बढ़ रही है।

भट्ट ने कहा कि प्राइवेट स्पेस कंपनियों की हालिया कामयाबियों ने यह साबित कर दिया है कि भारत में ग्लोबल लेवल पर मुकाबला करने लायक क्षमताएं विकसित करने की काबिलियत है। इससे निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को एक अहम संकेत मिला है कि भारतीय स्पेस कंपनियां इनोवेशन से आगे बढ़कर उसे असल में लागू करने और बड़े पैमाने पर काम करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।

उन्होंने इस तरक्की का श्रेय एक मजबूत पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को दिया, जिसमें इसरो की तकनीकी विशेषज्ञता, प्रगतिशील पॉलिसी और रेगुलेटरी सुधार, और नई पीढ़ी की प्राइवेट कंपनियों की काम करने की क्षमता शामिल है।

सुहोरा टेक्नोलॉजीज के सीईओ और को-फाउंडर कृषानु आचार्य ने कहा कि भारत की प्राइवेट स्पेस की कहानी ज्यादातर रॉकेट और लॉन्च व्हीकल से जुड़ी रही है, लेकिन डाउनस्ट्रीम एप्लीकेशन इस सेक्टर के लिए ज्यादा टिकाऊ ग्रोथ इंजन के तौर पर उभर सकते हैं।

आचार्य ने कहा, “जैसे-जैसे और सैटेलाइट ऑर्बिट में पहुंचेंगे, रॉ डेटा तभी काम का होगा जब उसे इस्तेमाल लायक जानकारी में बदला जाएगा। यहीं पर डाउनस्ट्रीम कंपनियां भारत की स्पेस इकॉनमी के लिए ज्यादा राजस्व बनाएंगी। हम इसे एक ऐसे स्तर के तौर पर देखते हैं जहां भारत लंबे समय तक चलने वाली और निर्यात करने लायक विशेषज्ञता बना सकता है। इससे न सिर्फ घरेलू क्षमता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्पेस डेटा पर आधारित एनालिटिक्स और एप्लीकेशन के मामले में भारत दुनिया भर में मुकाबला भी कर सकेगा।”

वियासैट इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर गौतम शर्मा ने कहा कि स्पेस के क्षेत्र में अग्रणी देशों में से एक बनने की दिशा में भारत ने काफी तरक्की की है। उन्होंने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए वर्ल्ड-क्लास स्पेस इकोसिस्टम बनाने में सरकार और इसरो की भूमिका पर भी जोर दिया।