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CPIM attack on ED: केरलम के पूर्व सीएम पी. विजयन के घर ईडी रेड का विरोध, CPM वर्कर्स ने गाड़ियों पर किया हमला…

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CPIM कार्यकर्ताओं ने पिनराई विजयन के घर पर तलाशी के बाद वापस लौट रहे ED अधिकारियों की गाड़ियों पर हमला किया था. हालांकि, भारी विरोध के बावजूद अधिकारी सुरक्षित निकल गए.

केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित आवास के बाहर बुधवार (27 मई, 2026) को कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (CPIM) के कार्यकर्ताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों की गाड़ी पर हमला कर दिया. इस हमले में ईडी अधिकारियों से भरी गाड़ियों को काफी क्षति पहुंची है और कार के शीशे भी तोड़ दिए गए हैं.

दरअसल, यह हमला तब हुआ जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी कोचिन मिनरल्स और रूटाइल लिमिटेड (CMRL) से जुड़े 180 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग केस में केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान में विधानसभा नेता विपक्ष और सीपीआई (एम) के नेता पिनराई विजयन का आवास पर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम देकर वापस लौट रहे थे. इस मामले में ईडी ने राज्य भर के कुल 10 ठिकानों पर छापे मारे, जिसमें से एक ठिकाना पूर्व मुख्यमंत्री का आवास भी शामिल था. हालांकि, सीपीएम वर्कर्स के हमलों के बावजूद ईडी के अधिकारी सुरक्षित रूप से जोनल ऑफिस पहुंच गए.

हाथपैर से लगाया जोर, ईंट से भी किया हमला

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पिनराई विजयन के घर पर ईडी अधिकारियों की छापेमारी की कार्रवाई से नाराज पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके आवास के बाहर पुरजोर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान भारी पुलिस बल भी तैनात रही, जो सीपीएम कार्यकर्ताओं को रोकने में जुटी थी, लेकिन फिर से पार्टी वर्कर्स ईडी अधिकारियों की लेकर जा रही कार पर हमला कर दिया. सीपीएम वर्कर्स ने अपने हाथों और पैरों से जोर लगाते हुए कार की शीशों पर तोड़ दिया, जबकि इस दौरान एक पार्टी कार्यकर्ता ने कार के सामने के शीशे पर बड़ी ईंट से हमला किया.

ईडी की छापेमारी पर क्या बोले पिनराई विजयन?

रिपोर्ट के मुताबिक, अपने घर पर ED की छापेमारी पर केरल के पूर्व CM और मौजूदा LoP पिनराई विजयन ने कहा, ‘ईडी लंबे समय से मेरे घर पर तलाशी लेना चाहती थी. मुझे लगता है कि इस छापेमारी से कुछ लोगों को, खासकर राहुल गांधी जैसे को बहुत खुशी मिलेगी. राहुल गांधी ने सवाल पूछा था कि पिनराई विजयन के घर पर छापा क्यों नहीं मारा जा रहा है और पिनराई विजयन को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है. BJP सरकार हमेशा से देश में विपक्षी नेताओं पर जानबूझकर हमले करती रही है. इसके खिलाफ पूरे देश में कड़े विरोध प्रदर्शन हुए हैं.’

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का कहना है कि उनकी अपनी पार्टियों के अलावा दूसरी पार्टियों के खिलाफ ED की दखलअंदाजी जारी रहनी चाहिए. इससे हमारा अंत नहीं होने वाला है. हम इसे सिर्फ एक शुरुआत के तौर पर देखते हैं. किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि ऐसी कार्रवाई हमें खत्म कर सकती है. यहां स्थानीय लोगों और पार्टी के साथियों की भावनाएं जाहिर हुईं. जब भी दुश्मनों ने मुझ पर हमला करने की तैयारी की, मुझे पार्टी का मजबूत सपोर्ट मिला. साथियों ने आज जो साबित किया वह यह है कि उस सपोर्ट में कोई कमी नहीं आई है. यही हमारी ताकत है. आइए, हम सब मिलकर किसी भी चीज का सामना करें.’

तिरुवनंतपुरम में कार्रवाई, दिल्ली में दिखा विरोध

वहीं, केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के तिरुवनंतपुरम स्थित आवास पर ईडी की छापेमारी से नाराज सीपीएम के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के ऑफिस के बाहर तक मार्च करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन में वृंदा करात समेत कई अन्य वामपंथी नेता शामिल थे, जो ईडी के खिलाफ नारेबाजी भी कर रहे थे.

पी. विजयन के घर पर ED का छापा कांग्रेस-BJP अभियान नहींचेन्नीथला

वहीं, केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने बुधवार (27 मई, 2026) को उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें पिनराई विजयन के आवासों पर ईडी के छापों को कांग्रेस-भाजपा अभियान बताया गया. उन्होंने दावा किया माकपा की ही भाजपा के साथ साझेदारी थी. उन्होंने कहा, ‘माकपा को यह बताना होगा कि भाजपा के साथ उनकी साझेदारी क्यों टूटी? जिसके चलते ईडी की कार्रवाई हुई.’

उन्होंने माकपा के उस दावे को भी नकार दिया कि यह छापेमारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की एक दिन पहले हुई मुलाकात का नतीजा है. मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और केरल के मुख्यमंत्री के बीच मुलाकात राज्य के हित में जरूरी थी और यह सामान्य सरकारी कामकाज का हिस्सा है. उन्होंने याद दिलाया, ‘जब पिनराई विजयन मुख्यमंत्री थे, तब वह खुद कितनी बार प्रधानमंत्री से मिले थे. इस मुलाकात को छापों से जोड़ने की कोई जरूरत नहीं है.’

Karnataka Congress: 24 घंटे में इस्तीफा दे सकते हैं सिद्धारमैया’, कांग्रेस नेता ने किया साफ, बताया कौन होगा कर्नाटक का अगला CM

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कांग्रेस विधायक आर. वी. देशपांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पहले ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया है. उन्होंने बताया कि सिद्धारमैया 28 मई को इस्तीफा दे सकते.

कर्नाटक में अगले दो दिन में सत्ता परिवर्तन की तेज होती अटकलों के बीच कांग्रेस विधायक आर. वी. देशपांडे ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगले 24 घंटे के दौरान सिद्धारमैया इस्तीफा दे सकते हैं. किसी कांग्रेस नेता का इस तरह का ये पहला बयान है. उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री ने पहले ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया है और वह कल (28 मई 2026) को इस्तीफा दे सकते हैं. विधायक चाहते थे कि वह अपने पद पर बने रहें, लेकिन उन्होंने (मुख्यमंत्री ने) कहा कि मैंने आलाकमान को जुबान दी है. अब आलाकमान ही तय करेगा कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा.’

सिद्धारमैया से मिले कर्नाटक के मंत्री एचके पाटिल

CM सिद्धारमैया से मुलाकात के बाद कर्नाटक के मंत्री एचके पाटिल ने कहा, ‘हमने अपनी चिंताएं जाहिर कीं, लेकिन वे चुप रहे. हम दोबारा मिल सकते हैं.’ कर्नाटक के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा, ‘कल CM की नाश्ते पर होने वाली बैठक के बाद सब कुछ सामने आ जाएगा. वह सिर्फ यही बताएंगे कि क्या चर्चा हुई और आगे उनकी क्या योजना है. तब तक, हमें बस इंतजार करना होगा, क्योंकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी को कुछ भी पता नहीं है.’

कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा, ‘दिल्ली की बैठक में बहुत विस्तार से चर्चा हुई. हमारे यहां राज्यसभा चुनाव और परिषद चुनाव होने वाले हैं. हम राज्यपाल के माध्यम से परिषद के लिए पांच लोगों को नामित भी करते हैं. मंत्रिमंडल में फेरबदल पर भी चर्चा हुई… हम कुछ ही दिनों में कुछ फैसले लेने वाले हैं… हमें क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जिला प्रतिनिधित्व, जाति और समुदाय, इन सभी बातों को ध्यान में रखना होगा. वहां इन सभी विषयों पर चर्चा हुई. शायद एक-दो दिनों में, जैसे ही हम बदलाव करेंगे, आपको उन फैसलों के बारे में सूचित कर दिया जाएगा.’

सिद्धारमैया ने राज्यपाल से मुलाकात के लिए मांगा समय

कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और हवा मिल गई जब  मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से 28 मई को मिलने का समय मांगा है. न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह अटकलें जोर पकड़ रही हैं कि सिद्धरमैया गुरुवार (28 मई 2026) को इस्तीफा दे सकते हैं, जिससे उनके उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा.

कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार सिद्धरमैया राज्यपाल गहलोत को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं. कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सिद्धरमैया और शिवकुमार के साथ घंटों चर्चा की और उनसे अलग-अलग भी मुलाकात की.

मोदी कैबिनेट का राशन को लेकर बड़ा फैसला; अश्विनी वैष्णव ने इस बारे में पूरी जानकारी दी है….

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मोदी सरकार देश में 80 करोड़ लोगों को फ्री में राशन मुहैया करवा रही है. अब इस योजना में सरकार ने तीन बदलाव किए हैं.

अश्विनी वैष्णव ने इस बारे में पूरी जानकारी दी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अहम फैसला हुआ है. कैबिनेट के इस फैसले से राशन लेने वाले 80 करोड़ लोगों पर सीधा असर पड़ेगा.  सरकार ने राशन व्यवस्था (PDS- पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला किया.  इसके लिए ‘सार्थक-पीडीएस’ (SARTHAK-PDS) योजना शुरू की गई है.  इस पूरी योजना पर करीब 25,530 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

PDS स्कीम में तीन बड़े बदलाव

केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में 80 करोड़ लोगों को राशन मुहैया करवाने का कार्यक्रम चल रहा है. इस सार्थक PDS स्कीम में तीन बदलाव किए गए हैं. इनमें राज्य सरकार को मदद करने की बात, टेक्नोलॉजी की मदद लेने की भी बात और AI के तहत अब PDS लाभार्थी का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा.

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया, ‘राज्य सरकारों को भारतीय खाद्य निगम (FCI) के बड़े गोदामों से अनाज को अलग-अलग जिलों, ब्लॉकों और आखिरी में राशन की दुकानों तक पहुंचाने में पैसों की दिक्कत आ रही थी. अब केंद्र सरकार राज्यों को आर्थिक मदद देगी.’

दूसरा बदलाव ये है कि राशन दुकानदारों (डीलर) का कमीशन बढ़ाया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘राशन देने वाले डीलरों का कमीशन काफी समय से नहीं बढ़ा था. लगातार डीलर के कमीशन को बढ़ाने की मांग भी की जा रही थी.  आज सरकार ने उनकी इस मांग को मानते हुए उनका कमीशन बढ़ाने का फैसला लिया है.’

तीसरा और आखिरी बदलाव यह है कि पूरी राशन व्यवस्था को और अधिक आधुनिक तथा पारदर्शी बनाने के लिए इसमें नई टेक्नोलॉजी (तकनीक) का इस्तेमाल किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘सरकार इस भारी-भरकम बजट से राशन पहुंचाने का खर्च उठाएगी. दुकानदारों की कमाई बढ़ाएगी और पूरे सिस्टम को डिजिटल और आधुनिक बनाएगी.’

लू से निपटने के लिए सरकार की तैयारी

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘मौजूदा लू की स्थिति पर सभी मंत्रियों के साथ चर्चा की गई. प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश को पहुंचाने के लिए कई ट्वीट किए गए. उस संदेश के जवाब में, उन खास कदमों पर चर्चा हुई जिन्हें हर मंत्रालय और विभाग अपने-अपने दायरे में उठा सकता है.’

उन्होंने बताया, ‘लू के दौरान भारत के नागरिकों को राहत देने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपायों पर विचार-विमर्श किया गया, जिसमें खास तौर पर उन सुविधाओं और उपायों पर ध्यान दिया गया जिन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय, जल संसाधन क्षेत्र और अन्य संबंधित क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है. प्रधानमंत्री ने बहुत साफ तौर पर कहा कि जब इस तरह की बड़ी चुनौतियों का सामना करना हो, तो हमें उनके प्रति ‘पूरे राष्ट्र की भावना’ के साथ आगे बढ़ना चाहिए.’

इस दिन रहेगा ईद उल-अज़हा पर्व पर अवकाश, सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश जारी…

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मुस्लिम समाज के प्रमुख त्यौहारों में शामिल ईद उल-अज़हा को लेकर सरकार ने आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक़ ईद की छुट्टी पहले 27 मई को तय थी जिसमे बदलाव किया गया है। अब 28 मई यानी गुरुवार को यह अवकाश मिल सकेगा। इस संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।

क्या लिखा है आदेश में?

जीएडी की तरफ से जारी आदेश के अनुसार विभाग की अधिसूचना क्रमांक-1001/86/2025-GAD-5, दिनांक 06 नवम्बर, 2025 द्वारा वर्ष 2026 के लिए अवकाश घोषित किए गए हैं, जिसमें सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाश की सूची में “ईद-उल-जुहा (बकरीद)” हेतु दिनांक-27 मई, 2026, दिन-बुधवार को अवकाश घोषित है।

राज्य शासन एतद्द्वारा पूर्व में जारी उक्त अधिसूचना में आंशिक संशोधन करते हुए, “ईद-उल-जुहा (बकरीद)” के पर्व हेतु पूर्व में घोषित अवकाश दिनांक-27 मई, 2026, दिन-बुधवार के स्थान पर दिनांक 28 मई, 2026, दिन-गुरुवार को सार्वजनिक एवं सामान्य अवकाश घोषित करता है।

छग वक्फ बोर्ड ने जारी किया दिशा-निर्देश

मुस्लिम समुदाय का अहम पर्व ईद उल अजहा (बकरीद) इस साल 28 मई को मनाया जाना है। लिहाजा शांति व्यवस्था को देखते हुए छग राज्य वक़्फ़ बोर्ड ने भी जरूरी दिशा-निर्देश जारी किये है। 5 बिन्दुओ वाले एडवाइजरी में निर्देशित किया गया है कि, ईद-उल-अज़हा के मौके पर खुले में या सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी बिल्कुल न करें। प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न करें, कुर्बानी की फोटो या वीडियो सोशल मीडिया में
वायरल न करें।

वक़्फ़ बोर्ड के निर्देश के अनुसार कुर्बानी का खून नालियों में न बहाएं, अपशिष्ट पदार्थ व खून गड्ढा खोदकर दफनाएं। खुले में नमाज़ अदा न करें जिससे यातायात या अन्य किसी प्रकार की समस्या हो। जमात ज्यादा होने पर शिफ्टों में ईद की नमाज़ की व्यवस्था करें। समाज में साम्प्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारा कायम रख कर सभी समाज की आस्था का आदर करते हुए ईद-उल-अज़हा के त्योहार को मनाएं।

काव्य कुंभ में गूंजेगी मामे खान की सूफियाना आवाज, रायपुर में इस दिन होगा भव्य आयोजन…

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राजधानी रायपुर में 6 जून को आयोजित होने जा रहे “काव्य कुंभ सीजन-2” को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। आयोजन में कविता, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। प्रदेशभर के साहित्य प्रेमियों और युवाओं में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह है। इस बार आयोजन में राजस्थान के प्रसिद्ध फोक सिंगर मामे खान अपनी प्रस्तुति देंगे।

आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की टिकटें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म BookMyShow पर उपलब्ध हैं। आप भी अपना टिकट बुक कराकर इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।

बता दें कि राजस्थान के जैसलमेर निवासी मामे खान मंगणियार समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। यह समुदाय अपनी पारंपरिक लोक संगीत विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। मामे खान ने बेहद कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में कदम रख दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने मात्र 12 वर्ष की उम्र में अपने गायन करियर की शुरुआत की थी। उनकी पहली बड़ी प्रस्तुति पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सामने हुई थी। कई वर्षों के संघर्ष और लगातार मेहनत के बाद मामे खान को साल 1999 में बॉलीवुड में पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने अपनी दमदार आवाज और लोक शैली से लाखों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। “केसरिया बालम”, “बावरे” सहित कई लोकप्रिय गीतों ने उन्हें देशभर में प्रसिद्धि दिलाई। उनकी गायकी में राजस्थान की मिट्टी, लोक संस्कृति और सूफी संगीत की अनूठी झलक देखने को मिलती है।

प्रदेश के इन 8 शहरों में ऑडिशन

छत्तीसगढ़ में साहित्य, कविता और मंचीय अभिव्यक्ति को नई पहचान देने वाला “काव्य कुंभ” इस बार अपने दूसरे अध्याय के साथ और भी बड़े स्वरूप में लौट रहा है। प्रदेशभर में युवाओं और साहित्य प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हो चुके इस आयोजन का विस्तार इस बार 8 शहरों तक किया गया है। रायपुर, कोरबा, बस्तर, भिलाई, अंबिकापुर, जशपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव में एक से पांच जून तक ऑडिशन लिया जाएगा। यहां से चयनित प्रतिभागियों को प्रदेश स्तरीय मंच में प्रस्तुति देने का मौका मिलेगा। प्रदेश स्तर पर विजेताओं को एक लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

Sai Cabinet: साय कैबिनेट की बैठक हुई खत्म, इन अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद लगी मुहर….

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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज साय कैबिनेट की अहम बैठक आयोजित हुई। छत्तीसगढ़ कैबिनेट की ये अहम बैठक महानदी भवन मंत्रालय में हुई। सीएम विष्णुदेव साय ने कैबिनेट की इस बैठक की अध्यक्षता की। राज्य में चल रहे सुशासन तिहार के बीच होने वाली यह कैबिनेट बैठक काफी अहम मानी जा रही थी। आज हुई साय कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। साय कैबिनेट की इस बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी प्रदेश के डिप्टी सीएम अरुण साव ने दी।

कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –

मंत्रिपरिषद ने राज्य के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, मंडलों और स्थानीय निकायों में जमा स्क्रैप और अनुपयोगी सामग्रियों के पारदर्शी एवं व्यवस्थित निस्तारण के लिए भारत सरकार के उपक्रम मेटल स्क्रैप ट्रेडिंग कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (MSTC) के साथ सेलिंग एजेंसी अनुबंध की अवधि को आगामी तीन वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है।

यह अनुबंध नवंबर 2019 से प्रभावी है तथा 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। MSTC के अत्याधुनिक ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर के खरीदार प्रतिस्पर्धी बोली लगाकर स्क्रैप सामग्री खरीद सकते हैं, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और राज्य को बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।

इस व्यवस्था से राज्य में स्क्रैप निस्तारण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, तकनीक आधारित और राजस्वोन्मुख हुई है। इस निर्णय से विभागों को अलग-अलग निविदा और विज्ञापन प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होगी, प्रशासनिक समय और संसाधनों की बचत होगी, साथ ही कार्यालय परिसरों में स्वच्छता और स्थान प्रबंधन भी बेहतर होगा।

मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल को सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके लिए “छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम” में संशोधन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि “छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल अधिनियम, 2026” लागू होने के बाद पूर्व के छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल का विलय नए कर्मचारी चयन मण्डल में हो चुका है। साथ ही उसकी सभी परिसंपत्तियां एवं देनदारियां भी नए मण्डल में शामिल हो गई हैं।

राज्य मंत्रिपरिषद ने सड़क निर्माण कार्यों में 01 अप्रैल 2026 के पश्चात बिटुमिन (डामर) की कीमतों में हुई असाधारण और अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए, राज्य के हित और निर्माण कार्यों में निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 की अवधि के लिए अनुबंधित ठेकेदारों को सीमित एवं आंशिक मूल्य राहत (क्षतिपूर्ति) प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

यह राहत केवल बिटुमिन मूल्य में हुई असाधारण वृद्धि के प्रभाव को कम करने हेतु निर्धारित फार्मूले के आधार पर दी जाएगी तथा अन्य निर्माण घटकों पर अनुबंध में पूर्व से प्रावधानित एस्केलेशन नियम यथावत लागू रहेंगे। वैश्विक परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण डामरीकरण कार्य प्रभावित होने लगे थे, जिससे सड़क निर्माण और संधारण कार्यों की गति बाधित होने की आशंका थी। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं हेतु इसी प्रकार की राहत के निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क निर्माण कार्य प्रभावित न हों और विकास कार्यों की गति बनी रहे, जिससे जनता को निर्धारित समय पर सड़क निर्माण कार्यों का लाभ मिल सके।

कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष पर FIR, भाजपा नेता की शिकायत पर पुलिस का बड़ा एक्शन…

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छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के बिश्रामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत शिवनंदनपुर इलाके में चुनावी चर्चा के दौरान हुए विवाद के बाद कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज की और हथियार दिखाकर धमकी दी।

जानकारी के अनुसार नगर पंचायत शिवनंदनपुर में आगामी 1 जून को चुनाव होना है। चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक चर्चाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान नरेंद्र जैन ने न केवल अपशब्दों का प्रयोग किया, बल्कि हथियार लेकर डराने-धमकाने की कोशिश भी की।
मामले को गंभीर मानते हुए भाजपा जिला अध्यक्ष ने बिश्रामपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने कांग्रेस नेता नरेंद्र जैन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। घटना के बाद इलाके में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

बता दें कि नगर पंचायत चुनाव से पहले सामने आए इस विवाद ने स्थानीय राजनीति को और अधिक गर्मा दिया है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जबकि प्रशासन चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की तैयारी में जुटा हुआ है।

 

वन विभाग में वित्तीय हेराफेरी, cg में लाखों का गोबर खाद घोटाला, बड़ी कार्रवाई..

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​वन विभाग में वित्तीय हेराफेरी के बड़े मामले में बिलासपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) मनोज कुमार पाण्डेय ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने सहायक ग्रेड-2 और कैंपा (CAMPA) शाखा प्रभारी भूपेंद्र कुमार साहू को वित्तीय अनियमितता और कूट रचित दस्तावेजों के सहारे लाखों गबन करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। ​यह पूरी कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक की जांच रिपोर्ट के बाद की गई है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2022 में वृक्षारोपण कार्य के लिए की गई गोबर खाद खरीदी में व्यापक फर्जीवाड़ा हुआ था।

कैसे चलता था फर्जीवाड़े का खेल?

आरोपी कर्मचारी ने फर्जी प्रमाण-पत्रों और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर 14.77 लाख रुपये का अवैध लेखा समायोजन किया था। इसके अलावा समिति सचिवों पर अनैतिक दबाव बनाकर शासकीय राशि आहरित करने की शिकायत भी सच पाई गई। ​आदेश के मुताबिक, भूपेंद्र साहू ने वरिष्ठ अधिकारियों को अंधेरे में रखकर गलत तरीके से एल.ओ.सी. तैयार करवाई और जांच के दौरान भी गुमराह करने वाले बयान दिए। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन और घोर वित्तीय कदाचार मानते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय बिलासपुर तय किया गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ नरवा विकास और ग्रीन क्रेडिट जैसी अन्य योजनाओं में भी गड़बड़ी की शिकायतें हैं, जिनकी जांच तेज कर दी गई है।

‘लाल किला मैदान से गूंजा आदिम गौरव का स्वर, जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है छत्तीसगढ़ की पहचान… सीएम साय’

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देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में रविवार को जनजातीय अस्मिता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक चेतना का विराट संगम देखने को मिला, जब भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से हजारों जनजातीय प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा पारंपरिक समुदायों के लोग एक मंच पर एकत्र हुए। जनजाति सुरक्षा मंच एवं जनजाति जागृति समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। मुख्यमंत्री साय के साथ छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री केदार कश्यप एवं रामविचार नेताम भी उपस्थित थे।

सीएम साय ने रेखा गुप्ता से की मुलाकत

कार्यक्रम स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्ययंत्रों और जनजातीय संस्कृति के विविध रंगों से सजा यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना और जनजातीय पहचान के संरक्षण का राष्ट्रीय संदेश बनकर उभरा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यक्रम में देशभर से आए जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और लोगों से आत्मीय मुलाकात की तथा अपने संबोधन में कहा कि जनजातीय समाज केवल प्रकृति का रक्षक नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सबसे प्राचीन और जीवंत स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सदियों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा करते हुए जनजातीय समाज ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का कार्य किया है। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट और असंतुलित विकास की चुनौतियों से जूझ रही है, तब जनजातीय जीवन दर्शन मानवता को टिकाऊ और प्रकृति-सम्मत विकास का रास्ता दिखा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और संतुलन का जीवन जीता आया है तथा उनकी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर हैं।

जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है छत्तीसगढ़ की पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध जनजातीय संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जो केवल प्राकृतिक संपदा का प्रतीक नहीं, बल्कि जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपरा का जीवंत आधार भी है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक जनजातीय समाज का योगदान अतुलनीय रहा है। भगवान बिरसा मुंडा तथा छत्तीसगढ़ के अमर शहीद वीर नारायण सिंह जैसे महानायकों ने अपनी संस्कृति, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान का अद्वितीय इतिहास रचा है, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘आदि परब’, बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय प्रतिभा, परंपरा, खेलकौशल और पहचान को राष्ट्रीय मंच देने का सशक्त प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक शक्ति, सामूहिकता और प्रतिभा को नई पहचान मिल रही है तथा युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्राप्त हो रही है।

भाषा से जीवित रहती है समाज की संस्कृति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी समाज की संस्कृति उसकी भाषा से जीवित रहती है, इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि गोंडी, हल्बी और सादरी जैसी जनजातीय भाषाओं में बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा देने की दिशा में विशेष पहल की जा रही है, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा, सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी रह सके। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की पहचान, इतिहास और सामूहिक स्मृति का आधार भी होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि बस्तर से सरगुजा तक देवगुड़ी जैसे पारंपरिक आस्था केंद्रों के संरक्षण और विकास का कार्य तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना केवल परंपरा को बचाने का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और उनकी पहचान को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। राज्य सरकार इस दिशा में संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

कलाकारों ने दी प्रस्तुति

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। लाल किला मैदान मांदर, ढोल, पारंपरिक लोकधुनों और सांस्कृतिक उत्साह से गूंजता रहा। विविध जनजातीय परंपराओं, रंगों, वेशभूषाओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों से सजा यह आयोजन देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रभावशाली प्रतीक बनकर सामने आया।

भारत के भविष्य की महत्वपूर्ण शक्ति है जनजातीय समाज

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि जनजातीय समाज केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की भी महत्वपूर्ण शक्ति है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज का जीवन दर्शन, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन की भावना और सांस्कृतिक अनुशासन आधुनिक विकास मॉडल को मानवीय और संतुलित दिशा दे सकते हैं। लाल किला मैदान में आयोजित यह राष्ट्रीय जनजाति सांस्कृतिक समागम केवल एक आयोजन बनकर सीमित नहीं रहा, बल्कि जनजातीय समाज की एकता, स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और प्रकृति-सम्मत विकास के राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त घोष बनकर उभरा।

ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर के सामने जहां रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, वहीं चीन का युआन उच्चतम स्तर… आइए जानें…

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ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर के सामने जहां रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, वहीं चीन का युआन मजबूती के साथ तीन साल के उच्चतम स्तर पर है. आइए जानें कि चीन खुद को इतना मजबूत कैसे बना रहा है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर एशियाई देशों की करेंसी पर पड़ रहा है. एक तरफ जहां भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गोते लगाते हुए अपने रिकॉर्ड निचले स्तर की तरफ बढ़ रहा है, वहीं पड़ोसी देश चीन की मुद्रा युआन बिल्कुल अलग राह पर है. डॉलर की आंधी के बीच भी चीनी युआन मजबूती के साथ इतिहास रच रहा है. इस विपरीत स्थिति ने दुनिया भर के आर्थिक जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है कि आखिर भारत और चीन की मुद्राओं में इतना बड़ा अंतर क्यों दिख रहा है.

भारतीय रुपये की ऐतिहासिक गिरावट 

वैश्विक बाजार के दबाव के चलते भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. रुपये की इस तेज गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अब कई कड़े और बड़े कदम उठाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बाजार में डॉलर की कमी को पूरा करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने, करेंसी स्वैप के दायरे को बढ़ाने और विदेशी निवेशकों के जरिए भारी मात्रा में डॉलर जुटाने जैसे रणनीतिक विकल्पों पर काम कर रहा है ताकि रुपये की साख को बचाया जा सके.

डॉलर के सामने चीनी युआन की दहाड़

रुपये के पूरी तरह विपरीत चलते हुए चीन की करेंसी युआन इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने पिछले 3 साल के सबसे उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रही है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीन के युआन यानी रेनमिनबी की विनिमय दर इस समय लगभग 6.84 से 6.86 युआन प्रति अमेरिकी डॉलर के मजबूत स्तर पर टिकी हुई है. इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में महज 1 चीनी युआन की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 0.14 अमेरिकी डॉलर के बराबर बैठती है, जो उसकी आर्थिक स्थिरता को दर्शाती है.

डॉलर और युआन के बीच विनिमय दर

वैश्विक करेंसी बाजार के ताजा आंकड़ों को देखें तो वर्तमान में 1 अमेरिकी डॉलर हासिल करने के लिए लगभग 6.80 से 6.90 चीनी युआन की ही जरूरत पड़ती है. अगर हाल के महीनों से इसकी तुलना की जाए तो युआन ने डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति में बहुत बड़ा सुधार किया है. इससे पहले के समय में यह विनिमय दर 7 युआन प्रति डॉलर के पार बनी हुई थी. इस तरह युआन ने मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए खुद को अमेरिकी डॉलर के सामने एक बेहद मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर लिया है.

भारतीय मुद्रा के मुकाबले चीनी युआन की कीमत

अगर चीनी युआन की ताकत का अंदाजा भारतीय रुपये के नजरिए से लगाया जाए, तो दोनों के बीच का अंतर काफी बड़ा नजर आता है. मौजूदा विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के अनुसार, यदि आप चीनी युआन की तुलना सीधे भारतीय रुपये से करते हैं, तो भारत के बाजार में 1 चीनी युआन की कीमत लगभग 14.15 रुपये के स्तर पर पहुंच जाती है. युआन का रुपये के मुकाबले इतना महंगा होना यह साफ दिखाता है कि चीन की अर्थव्यवस्था और उसका मुद्रा प्रबंधन इस वैश्विक संकट में भारत से बेहतर स्थिति में है.

वैश्विक व्यापार से अमेरिकी डॉलर को हटाने की मुहिम

चीनी युआन की इस अप्रत्याशित मजबूती के पीछे सिर्फ बाजार के नियम नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे चीन सरकार की एक बहुत बड़ी आर्थिक रणनीति काम कर रही है. चीन की कम्युनिस्ट सरकार और वहां का केंद्रीय बैंक यानी ‘पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना’ मिलकर एक खास योजना पर काम कर रहे हैं. चीन का मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मंच से अमेरिकी डॉलर के एकछत्र वर्चस्व को पूरी तरह खत्म करना या उसे सीधी चुनौती देना है, जिसे आर्थिक दुनिया में डि-डॉलरीकरण की मुहिम कहा जाता है.

स्मार्टनेस से खुद को मजबूत कर रहा चीन

चीन अपने पास मौजूद दुनिया के सबसे विशाल और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल बेहद आक्रामक तरीके से कर रहा है. वह इस भारी-भरकम पूंजी के दम पर दुनिया भर के विकासशील और विकसित देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में डॉलर के बजाय सीधे युआन में लेनदेन करने को बढ़ावा दे रहा है. चीन की कोशिश है कि युआन को दुनिया की सबसे भरोसेमंद और प्रमुख आरक्षित मुद्रा (रिजर्व करेंसी) के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर अमेरिकी नियंत्रण को कमजोर किया जा सके.