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CG Drone Pilot Bharti: 10वीं पास युवाओं के लिए शानदार मौका, यहां ड्रोन पायलट और सुरक्षा जवान के पदों पर निकली भर्ती…

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CG Drone Pilot Bharti “भर्ती शिविर 13 और 15 अप्रैल को आयोजित होगा” 100 सुरक्षा जवान, 20 ड्रोन पायलट और 30 सुपरवाइज़र पद उपलब्ध हैं” चयनित युवाओं को स्थायी नौकरी और कई सुविधाएँ दी जाएँगी”

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था गौरेला के सहयोग से जीडीएक्स ग्रुप ग्रेटर नोएडा एवं भारत सरकार के पसारा एक्ट के तहत 100 सुरक्षा जवान, 20 ड्रोन पायलेट, 30 सुरक्षा सुपरवाईज़र एवं कंप्यूटर ऑपरेटर भर्ती हेतू शिविर 13 अप्रैल को शासकीय आईटीआई मरवाही में और 15 अप्रैल को शासकीय आईटीआई गौरेला में सुबह 10 बजे से अपरान्ह 3 बजे तक भर्ती कैम्प आयोजित किया जा रहा है।

इच्छुक युवा जिनकी योग्यता 10वी पास, उम्र 18 से 40 वर्ष, ऊँचाई 168 सेमी0, वजन 52से 96 किलो और सुपरवाईज़र हेतु स्नातक के साथ कम्प्यूटर ज्ञान, उम्र 22 से 40 वर्ष, ऊँचाई 170 सेंटी मीटर, वजन 55 से 96 किलो हो, वे सभी 10 वी पास अथवा अधिकतम प्रमाणपत्र की छायाप्रति एवं आधार कार्ड की छायाप्रति, दो पासपोर्ट साईज फोटो के साथ स्वयं शासकीय आईटीआई में उपस्थित होकर आफलाईन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती शिविर में दूसरे जिले के युवा भी शासकीय आईटीआई में स्वयं उपस्थित होकर आफलाईन आवेदन कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए भर्ती अधिकारी के मोबाइलनंबर- +91-9311947932 एवं +91-9667989993 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

चयनित युवाओं को जीडीएक्स ग्रुप के ट्रेनिंग सेंटर एन.आई.एम.टी कैंपस नियर परीचौक मेट्रो स्टेशन, एनआईएमटी कालेज प्रांगण में स्थित सेंटर में 15 दिन के आवासीय प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र के साथ मध्यप्रदेश के बड़े-बड़े ओद्योगिक क्षेत्रों में 15 हजार से 25 हजार तक के मासिक सेलरी के साथ 58 वर्ष तक स्थाई नौकरी के साथ ही पीएफ, पेंशन, जीवन बीमा, फेमिली मेडिकल सुविधा, सालाना वेतन में वृद्धि, लोन की सुविधा, प्रमोशन जैसे अनेक सुविधाओ के साथ ड्यूटी दौरान रहने एवं खाने की सुविधाएं रियायती दरों पर दी जाएगी।

LPG Crisis: गैस-पेट्रोल-डीजल की किल्लत होगी दूर! जंग के बीच ‘मिशन एनर्जी’ में जुटा भारत, जयशंकर ने संभाली कमान…

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LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी अस्थिरता और युद्ध के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने के लिए कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका के दौरे के बाद अब फ्रांस और जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। दूसरी ओर, विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई (UAE) में रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा कर रहे हैं। यह भागदौड़ ऐसे समय में हो रही है जब ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर की खबरें हैं। भारत की प्राथमिकता इस तनावपूर्ण माहौल में अपनी अर्थव्यवस्था को ग्लोबल उतार-चढ़ाव से बचाना है।

S Jaishankar UAE Visit: ऊर्जा सुरक्षा और यूएई का दौरा

भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक मिडिल ईस्ट पर निर्भर है। विदेश मंत्री एस जयशंकर का यूएई दौरा इसी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए है। अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण सप्लाई रुकती है या कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यूएई जैसे रणनीतिक साझेदारों से बातचीत का मकसद संकट के समय ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने का ठोस रास्ता निकालना है।

फ्रांस के साथ रणनीतिक सहयोग

पेरिस में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। यहां बातचीत का मुख्य केंद्र रक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे अहम मुद्दे हैं। फ्रांस के साथ साइबर सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और एआई (AI) पर भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। भारत की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट संकट के बीच रक्षा और तकनीकी मोर्चों पर फ्रांस के साथ संबंधों को और अधिक गहरा किया जाए ताकि वैकल्पिक सुरक्षा घेरा मजबूत हो सके।

Vikram Misri Europe Visit: जर्मनी के साथ व्यापारिक हित

जर्मनी में भारतीय प्रतिनिधिमंडल व्यापार, निवेश और ग्रीन एनर्जी जैसे विषयों पर चर्चा करेगा। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते जर्मनी भारत के लिए व्यापार और नई टेक्नोलॉजी का बड़ा स्रोत है। हाल ही में जर्मन चांसलर के भारत दौरे के बाद अब विदेश सचिव उन समझौतों को जमीन पर उतारने की कोशिश करेंगे। मिडिल ईस्ट में मचे घमासान के बीच भारत जर्मनी के साथ मिलकर अपनी व्यापारिक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाना चाहता है।

वैश्विक बदलावों के बीच कूटनीति

विदेश सचिव का यह दौरा अमेरिकी प्रशासन में बदलाव और ईरान-अमेरिका के बीच चल रही सीजफायर वार्ताओं के बीच हो रहा है। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन के संभावित अधिकारियों से मिलने के बाद अब यूरोप के इन दो बड़े देशों के साथ तालमेल बिठाना भारत की सोची-समझी रणनीति है। भारत का उद्देश्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चाहे जो भी समीकरण बनें, देश की व्यापारिक और रक्षा संबंधी जरूरतों पर कोई आंच न आए और ग्लोबल मंच पर भारत की स्थिति मजबूत बनी रहे।

लोकतंत्र की सुंदर तस्वीर! फुले जयंती पर PM मोदी-राहुल गांधी की मुलाकात ने जीता दिल…

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PM Modi Rahul Gandhi शनिवार, 11 अप्रैल को संसद परिसर के ‘प्रेरणा स्थल’ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने देश का राजनीतिक माहौल अचानक बदल दिया। अक्सर एक-दूसरे पर तीखे हमले करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बीच आज संक्षिप्त लेकिन बेहद संजीदा बातचीत देखने को मिली। मौका था महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती (Jyotiba Phule 200th Anniversary) का, जहां तमाम दिग्गज नेता उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक, इस मुलाकात के वीडियो और तस्वीरें अब ‘टॉक ऑफ द टाउन’ बनी हुई हैं।

जब आमने-सामने आए मोदी और राहुल

घटना उस वक्त की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी गाड़ी से ‘प्रेरणा स्थल’ पर उतरे। वहीं पास में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री अपनी कार से उतरते ही कुछ पल के लिए रुके और राहुल गांधी के पास जाकर उनसे बात करने लगे। वीडियो में देखा जा सकता है कि दोनों नेताओं के बीच काफी ‘सौहार्दपूर्ण’ तरीके से बातचीत हुई। हालांकि, यह बातचीत महज कुछ सेकंड्स की थी, लेकिन इसकी गंभीरता और सहजता ने वहां मौजूद हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। राजनीतिक कड़वाहट के बीच देश के दो सबसे बड़े नेताओं को इस तरह सहज भाव से बात करते देखना सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद किया जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता को इस तरह गंभीर चर्चा करते देखना लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है।

महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर जुटे दिग्गज

संसद परिसर में स्थित प्रेरणा स्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय के अग्रदूत महात्मा ज्योतिबा फुले को उनकी 200वीं जन्मशती पर नमन करना था। पीएम मोदी और राहुल गांधी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने फुले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। नेताओं ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और हाशिए पर खड़े समुदायों के उत्थान के लिए ज्योतिबा फुले के महान योगदान को याद किया।

क्यों खास हैं दोनों नेताओं की यह मुलाकात?

संसद के सत्रों के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच अक्सर तीखी नोंकझोंक, नारेबाजी और वॉकआउट देखने को मिलता है। भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विचारधारा की जंग काफी पुरानी और गहरी है। ऐसे में पीएम मोदी और राहुल गांधी का एक-दूसरे के करीब खड़े होकर शिष्टाचार के साथ बात करना यह संदेश देता है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद लोकतांत्रिक मर्यादाएं और औपचारिक संवाद जीवित हैं। महात्मा ज्योतिबा फुले ने हमेशा समाज को जोड़ने और न्याय की बात की थी। आज उनकी 200वीं जयंती के मौके पर संसद के भीतर पक्ष और विपक्ष के बीच का यह छोटा सा ‘संवाद’ शायद उनकी विरासत को सबसे बेहतरीन श्रद्धांजलि थी। अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह छोटी सी मुलाकात आने वाले दिनों में संसद के भीतर की कड़वाहट को कम करने में मददगार साबित होगी?

Ambedkar Jayanti 2026: बैंक, स्कूल और ऑफिस… जानें 14 अप्रैल को कहां रहेगी छुट्टी…

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Ambedkar Jayanti 2026: समाज सुधारक और भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती हर साल 14 अप्रैल को मनाई जाती है। इसे भीम जयंती भी कहा जाता है। इस दिन, एक विधिवेत्ता, समाज सुधारक और हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए समानता, सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों के पैरोकार के रूप में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

2026 में, अंबेडकर जयंती मंगलवार को पड़ रही है। यह दिन पूरे भारत में मनाया जाएगा, जिसमें कई राज्यों के स्कूल, कॉलेज, निजी और सरकारी संगठन छुट्टी मनाएंगे।

अंबेडकर जयंती पर क्या खुला रहेगा और क्या बंद?

केंद्र सरकार ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में 14 अप्रैल (मंगलवार) को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। भारतीय रिजर्व बैंक के वार्षिक अवकाश कैलेंडर में भी इस दिन को अधिकांश राज्यों में बैंक अवकाश के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

क्या स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे?

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग) द्वारा जारी आधिकारिक ज्ञापन के अनुसार, पूरे देश में सभी केंद्र सरकार के कार्यालयों, जिसमें औद्योगिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, में अवकाश रहेगा।

शेयर बाजार, डाकघर, सरकारी स्कूल और कॉलेज, अदालतें और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) भी बंद रहेंगे।

क्या अंबेडकर जयंती पर बैंक खुले रहेंगे या बंद?

RBI कैलेंडर के अनुसार, अगरतला, अहमदाबाद, बेलापुर, बेंगलुरु, भुवनेश्वर, चेन्नई, गंगटोक, गुवाहाटी, हैदराबाद, इंफाल, जयपुर, जम्मू, कोच्चि, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना, रांची, तिरुवनंतपुरम और विजयवाड़ा में बैंक बंद रहेंगे।

हालांकि, सूचीबद्ध राज्यों में बैंक की शाखाएं बंद रहेंगी, फिर भी ग्राहक वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों सेवाओं के लिए इंटरनेट बैंकिंग, SMS बैंकिंग और WhatsApp बैंकिंग का उपयोग जारी रख सकते हैं।

अंबेडकर जयंती के अलावा, इस दिन महा विषुव संक्रांति, बिजू/बुइसु उत्सव, तमिल नव वर्ष, चेइराओबा, बैसाखी और बोहाग बिहू जैसे क्षेत्रीय उत्सव भी मनाए जाते हैं।

क्या 14 अप्रैल को शेयर बाज़ार (NSE, BSE) खुला रहेगा? शेयर बाज़ार के सभी सेगमेंट, जिनमें इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स और कमोडिटी डेरिवेटिव्स शामिल हैं, 14 अप्रैल को बंद रहेंगे।

अंबेडकर जयंती पर कौन सी सेवाएं खुली रहेंगी?

अस्पताल (हालांकि कुछ जगहों पर आउटपेशेंट डिपार्टमेंट/OPD बंद हो सकते हैं), आपातकालीन सेवाएं और मेडिकल स्टोर जैसी ज़रूरी सेवाएं खुली रहेंगी।

आप किराने की खरीदारी के लिए भी जा सकते हैं, क्योंकि स्थानीय नियमों के आधार पर दुकानें, सुपरमार्केट और निजी कंपनियां खुली रह सकती हैं।

ATM, पेट्रोल पंप, सार्वजनिक परिवहन (बसें, ट्रेनें) और निजी परिवहन सेवाएं (कैब) भी सामान्य रूप से काम करेंगी।

इस महीने आने वाली छुट्टियां:

15 अप्रैल: बंगाली नव वर्ष (नबबरशा) / बोहाग बिहू / विशु / हिमाचल दिवस

16 अप्रैल: बोहाग बिहू

20 अप्रैल: बसव जयंती, अक्षय तृतीया (कर्नाटक)

Indian Iron Dome: UP में बनेगा भारत का अपना आयरन डोम! मिसाइल-ड्रोन से करेगा रक्षा, कौन बनाएगा और कहां बनेगा?

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Indian Iron Dome: पिछले साल 2025 में पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ Operation Sindoor चलाया था। जिसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत की तरफ ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए थे।

ये पहली बार था जब भारत को अपने खुद के Defence System Iron Dome की जरूरत महसूस हुई। तभी से भारत इसकी तैयारी में जुट गया और अब लग रहा है भारत को अपना आयरन डोम जल्द मिल जाएगा। जानिए कहां बन रहा है, किस राज्य जमीन पर तैयार होगा, कौन बना रहा है और इसमें कितना खर्चा आने वाला है।

यूपी में बनेगा भारत का अपना आयरन डोम

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इसके लिए Bharat Electronics Limited (BEL) ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के चित्रकूट में 75 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया है। इस नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में अगली पीढ़ी की मिसाइलें, रडार सिस्टम और भारत का अपना ‘आयरन डोम’ तैयार किया जाएगा।

₹600 करोड़ से ज्यादा का बड़ा निवेश

BEL के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में ₹600 करोड़ से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट सरकार की तरफ से किया जाएगा। यह सुविधा क्विक-रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM), कुशा एयर डिफेंस सिस्टम और अगली पीढ़ी के रडार सिस्टम जैसे अहम डिफेंस प्रोग्राम्स की जरूरतों को पूरा करेगी। इसके साथ ही यहां मेंटेनेंस, रिपेयर और ऑपरेशन (MRO) की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

क्या है प्रोजेक्ट कुशा?

Defence Research and Development Organisation (DRDO)

द्वारा विकसित प्रोजेक्ट कुशा एक लंबी दूरी का स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। इसका मकसद स्टील्थ फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे खतरों से देश की रक्षा करना है। यह सिस्टम करीब 400 किलोमीटर की रेंज में तीन अलग-अलग लेवल का सुरक्षा कवच (three-layer shield) प्रदान करेगा।

S-400 जैसा सिस्टम, लेकिन पूरी तरह स्वदेशी

प्रोजेक्ट कुशा की तुलना अक्सर रूस के S-400 सिस्टम से की जाती है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पूरी तरह भारत में विकसित हो रहा है। इसका लक्ष्य 2028-29 तक भारत का अपना ‘आयरन डोम’ तैयार करना है, जिससे विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम हो सके।तीन लेयर में काम

करेगा डिफेंस सिस्टम

कुशा सिस्टम में तीन तरह के इंटरसेप्टर मिसाइल होंगे-

M1- रेंज 150 किमी होगी,

M2- रेंज 250 किमी होगी,

M3- रेंज 350 से 400 किमी तक।

इसमें एडवांस रडार सिस्टम भी लगे होंगे, जो एक साथ कई लक्ष्यों को ट्रैक और डिस्ट्रॉय करने की क्षमता रखते हैं।

CM योगी का बड़ा योगदान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने BEL के CMD मनोज जैन को भूमि आवंटन पत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग ₹562.5 करोड़ के निवेश से एक लेटेस्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जाएगी, जहां हाई टेक रडार और एयर डिफेंस सिस्टम का उत्पादन होगा।

MSME और इंडस्ट्री को भी मिलेगा फायदा

इस प्रोजेक्ट से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी बड़ा फायदा होगा। इससे टेक्नोलॉजी सहयोग, इनोवेशन और नॉलेज ट्रांसफर के नए मौके मिलेंगे, जिससे उत्तर प्रदेश को एक बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में मदद मिलेगी।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार आएगी, हमें पूरा विश्वास?, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा-ममता दीदी का जाना तय, गुंडागर्दी, हिंसा बहुत बढ़ी…

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केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार आएगी, इसका हमें पूरा विश्वास है। वहां की जनता ममता बनर्जी से नाराज है, उनके राज में वहां गुंडागर्दी, हिंसा बहुत बढ़ गई है, कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ गई हैं।

इस बार भाजपा की सरकार बनेगी और वहां ममता दीदी का जाना तय है। असम में भी भाजपा की सरकार बनेगी…केरल की जनता भी परिवर्तन चाहती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैदान पर मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की स्पर्धा ऐतिहासिक है। दोनों विजय प्राप्त करने के लिए जी जान से जुट जाते हैं, जब आर जी कर मेडिकल कॉलेज में एक डॉक्टर बेटी के साथ अन्याय किया गया, हत्या की गई तो बंगाल का हर परिवार, हर युवा सड़क पर आ गया था।

यहां तक मोहन बागान और ईस्ट बंगाल भी बेटियों के साथ हुई निर्ममता के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए थे। यानी बेटियों का सम्मान और जान को बचाने के लिए हम सभी को एकजुट होकर निर्मम सरकार को सबक सिखाना है…मोदी ने बंगाल की बहनों और बेटियों के लिए भी एक गारंटी दी है। बेटियों के साथ हुए हर अन्याय, हर दुष्कर्म केस की फाइल खुलेगी।

अपराध करने वाले और अपराधियों को बचाने वालों को कोई नहीं बचाएगा। चुन-चुन कर हिसाब लिया जाएगा। ये कैसे होगा? ये बंगाल भाजपा ने अपने घोषणापत्र में स्पष्ट किया है। एक रिटायर्ड हाई कोर्ट की महिला जज को इस काम की जिम्मेदारी दी जाएगी। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर ब्लॉक में महिला थाने बनाए जाएंगे।

TMC कभी आदिवासी क्षेत्रों का उन्नयन नहीं कर सकती। मैं आपको पीएम जन मन योजना का उदाहरण देता हूं। देश के हर राज्य में आदिवासियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। केंद्र सरकार इस योजना पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। पास में ओडिशा में ही जहां भाजपा की सरकार है वहां पीएम जन मन योजना के तहत आदिवासियों के 30 हजार से अधिक घर बने हैं।

त्रिपुरा में भी ट्राइबल समाज के लिए 16 हजार से ज्यादा घर बनाए गए हैं। लेकिन यहां TMC की आदिवासी विरोधी सरकार ने पीएम जन मन योजना के तहत जानते हैं कितने घर बनाए? शून्य। एक भी घर नहीं बनाया। पैसे भारत सरकार देती है। आदिवासी समाज से इनकी दुश्मनी क्या है कि वे पक्का घर भी देने को तैयार नहीं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा ने तय किया है कि हमारी सरकार बनते ही कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में हम दायर करा देंगे। राजवंशी और कुड़माली दोनों भाषाएं बंगाल, असम और झारखंड की प्रमुख भाषाएं हैं और उनको आठवीं अनुसूची में लाने का काम भाजपा की सरकार करेगी।

नीतीश कुमार के बाद?, मीडिया में कई नाम, पीएम मोदी और अमित शाह को पता, सीएम कौन?, सम्राट चौधरी के नाम पर आलाकमान सहमत नहीं?

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनते ही सूबे में नए मुख्यमंत्री के नामों को लेकर अटकलों का बाजार और ज्यादा गर्म हो गई है। बिहार में नए सियासी उलटफेर को देखते हुए 10 अप्रैल को दिल्ली में बिहार भाजपा कोर कमेटी की बैठक होनी थी, लेकिन आखिरी वक्त में इसे रद्द कर दिया गया।

इसको लेकर बिहार का सियासी पारा चढ़ गया है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री पद के लिए आगे चल रहे सम्राट चौधरी के नाम पर भाजपा आलाकमान सहमत नहीं है, यही वजह है कि आखिरी मौके पर बैठक को ही रद्द कर दिया गया।

बता दें कि भाजपा कोर टीम में विजय सिन्हा के साथ श्रेयसी सिंह को भी दिल्ली बुलाया गया था। यहीं से सम्राट चौधरी के नाम पर सस्पेंस के बादल मंडराने लगे थे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक रद्द होने के बाद बिहार भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अनिश्चितता और गहरी हो गई है। चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम पर केंद्रीय नेतृत्व में पूरी सहमति नहीं बन पा रही है, जिसके चलते मामला अटक गया है।

इसी बीच पटना स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाला एक पोस्टर भी सामने आया, जिसे कुछ ही देर में सुरक्षा कर्मियों ने हटा दिया। पार्टी ने स्पष्ट किया कि इस पोस्टर का भाजपा से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि सम्राट चौधरी के समर्थन और विरोध दोनों ही स्तरों पर अंदरूनी खींचतान चल रही है।

वहीं विपक्षी दल राजद की टिप्पणियों ने भी माहौल को और गर्मा दिया है, जिससे भाजपा नेतृत्व असहज बताया जा रहा है। दरअसल, राजद की तरफ से सम्राट चौधरी का पक्ष लेना उनको भारी पड़ गया। सम्राट चौधरी राजद से भाजपा में आए थे और इसी को लेकर राजद काफी खुश थी। राजद का कहना था कि आखिरकार भाजपा को भी लालू के सिपाही को ही बिहार का मुख्यमंत्री बनाना पड़ रहा है।

इससे भाजपा नेतृत्व असहज बताया जा रहा है। इसी बीच सम्राट चौधरी से जुड़े पुराने मामलों और शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हालांकि इन सभी मुद्दों पर अब तक किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, और पूरा मामला फिलहाल राजनीतिक अटकलों और चर्चाओं के बीच ही घूम रहा है।

दिल्ली से पटना तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है और बिहार के नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस लगातार बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि सम्राट चौधरी दागी नेताओं में गिने जाते हैं। वे 1995 में 7 लोगों की हत्या के मामले में फंस चुके हैं। इस केस के अभियुक्तों में उनका नाम भी शामिल था, हालांकि उस समय उन्होंने खुद को नाबालिग बताया था, जिसके कारण उन्हें राहत मिल गई थी।

2025 में हुए बिहार चुनाव के दौरान जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने उन पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया था। पीके का कहना है कि 1995 में सम्राट चौधरी ने एक आपराधिक मामले में खुद को 15 साल का बताया था, जबकि 2020 के चुनाव हलफनामे में अपनी उम्र 51 बताई, जो विरोधाभासी हैं।

इसके अलावा उनकी शैक्षणिक योग्यता (डिग्री) संदिग्ध है, जिसे लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। यही नहीं सम्राट चौधरी के नाबालिग रहते हुए राजद सरकार में मंत्री बना दिए जाने का मामला भी सुर्खियों में रहा था। उस वक्त भाजपा के विरोध के कारण ही राज्यपाल को सम्राट चौधरी को मंत्री पद से बर्खास्त करना पड़ा था।

बिहार में 13 अप्रैल को कैबिनेट की आखिरी बैठक?, 14 को इस्तीफा देंगे सीएम नीतीश कुमार, चिराग पासवान ने कहा- मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं?

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बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जल्द इस्तीफा देने की चर्चा तेज हो गई है। 13 अप्रैल को कैबिनेट की आखिरी बैठक मानी जा रही है और 14 अप्रैल के आसपास उनके इस्तीफे की संभावना जताई जा रही है।

अनुमान है कि 5-6 दिनों के भीतर नई सरकार बन जाएगी और 15 अप्रैल के आसपास बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल सकता है। जानकारी के अनुसार, एनडीए विधायक दल की बहुप्रतीक्षित बैठक जल्द ही बुलाई गई है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।

इसी बैठक के बाद यह साफ हो जाएगा कि बिहार में सत्ता की कमान किस नेता के हाथ में जाएगी। इस बीच लोजपा (रामविलास) प्रमुख एवं केन्द्रीय मंत्री चिराग पासवान से जब मीडिया ने नए मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर सवाल किया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सभी निर्णय समय पर और प्रक्रिया के अनुसार होंगे।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी तरह की अनिश्चितता की स्थिति नहीं है और गठबंधन के भीतर सब कुछ नियंत्रण में है। चिराग पासवान ने कहा कि नई सरकार के गठन की प्रक्रिया को लेकर सभी दलों में सहमति बन चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी निश्चित तारीख या समय की घोषणा नहीं कर सकते, लेकिन अंतिम बैठक कल(रविवार को) होने वाली है।

चिराग पासवान ने कहा मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं हूं। उन्होंने कहा कि गठबंधन के बड़े दल भाजपा, जदयू और गठबंधन के घटक दलों की बैठक होगी। आज एक नए बिहार की इमारत बन रही है। उसकी नींव नीतीश कुमार ने रखी है। जंगल राज से निकाल कर बिहार को लाया। नया चेहरा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच और सबको लेकर चलने वाली सोच वाला चेहरा होगा।

सिर्फ चेहरा बदला जा रहा है मंत्रिमंडल का स्वरूप वही होगा। संभवत: कुछ पुराने चेहरे बदलकर नए चेहरे आ सकते हैं, लेकिन जिस तरह सरकार का गठन पहले हुआ था उसी तरह से नए नेतृत्व के तहत सरकार का गठन हो सकता है। चिराग पासवान ने कहा कि बातचीत निरंतर चल रही है। कई प्रक्रिया है जिसका पालन करना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ लिया। उसके बाद बिहार में कैबिनेट की बैठक होगी। अंतिम स्वरूप तमाम चीज हैं, बहुत जल्द नए मुख्यमंत्री और नई सरकार का गठन बिहार में हो जाएगा। कोई तारीख पर चर्चा नहीं करूंगा, लेकिन बहुत जल्द इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि आने वाली एनडीए विधायक दल की बैठक में न सिर्फ नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला होगा।

बल्कि नई सरकार के स्वरूप और मंत्रिमंडल के संभावित चेहरों पर भी चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि इस बार सरकार में कुछ नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जबकि पुराने और अनुभवी नेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। बता दें कि शनिवार सुबह जदयू में हलचल तब और बढ़ गई जब पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय कुमार चौधरी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, करीब दो घंटे चली इस अहम बैठक में नए मंत्रिमंडल के स्वरूप पर भी मंथन हुआ। खास तौर पर युवा चेहरों को शामिल करने पर चर्चा हुई। उधर, भाजपा भी पूरी तरह सक्रिए हो गई है। पटना में पार्टी की अहम बैठक होने वाली है, जिसमें बिहार प्रभारी विनोद तावड़े शामिल होंगे।

इस बैठक में मुख्यमंत्री के नए चेहरे और सरकार गठन की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, बिहार में नई सरकार के नेतृत्व को लेकर लगभग सभी अहम फैसले पहले ही दिल्ली स्तर पर तय किए जा चुके हैं। अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है, जो पटना में होने वाली विधायक दल की बैठक में की जाएगी।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी तरह से तय रोडमैप के तहत आगे बढ़ रही है। सियासत के जानकारों का मानना है कि यह बदलाव केवल चेहरा परिवर्तन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की कार्यशैली और प्राथमिकताओं में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं, जिन पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।

‘बीजेपी सत्ता में आई तो घुसपैठियों…’, ममता सरकार पर जमकर बरसे पीएम मोदी, कहा- हिंसा करने वालों पर होगा एक्शन…

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में घुसपैठ व कल्याणकारी मुद्दों पर बीजेपी का रुख स्पष्ट करते हुए वादा किया कि सत्ता में आने पर मतुआ और नामशूद्र शरणार्थी परिवारों को नागरिकता देने की प्रक्रिया तेज की जाएगी.

पूर्व बर्धमान जिले के कटवा में एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी ने शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) लागू किया, जबकि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस उन लोगों में भय फैलाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, ‘मैं मतुआ और नामशूद्र शरणार्थी परिवारों को बताना चाहता हूं कि वे देश के संविधान के संरक्षण में हैं. उन्होंने कहा कि मोदी ने सीएए कानून इसलिए बनाया ताकि मतुआ, नामशूद्र और सभी शरणार्थियों को नागरिकता मिल सके.

घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल छोड़ना पड़ेगा- पीएम

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भाजपा सरकार बनती है तो सीएए के तहत सभी पात्र आवेदकों को नागरिकता देने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी.’ दक्षिण बंगाल के कई जिलों में फैला मतुआ समुदाय चुनावों के लिहाज से एक प्रभावशाली वर्ग माना जाता है और नागरिकता का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है. पीएम मोदी ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर हमला तेज करते हुए कहा कि बीजेपी सत्ता में आई तो घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल छोड़ना पड़ेगा. उन्होंने कहा, ‘अब जाने का समय आ गया है और घुसपैठियों को अपना सामान बांधना शुरू कर देना चाहिए. जो लोग घुसपैठियों की मदद कर रहे हैं, उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा.’

बंगाल में भय का माहौल- पीएम मोदी

बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासन ने बंगाल में भय का माहौल पैदा किया है. यह चुनाव तृणमूल के डर को खत्म करने के लिए है. पीएम मोदी ने तृणमूल के भय से मुक्त और बीजेपी के विश्वास से भरे पश्चिम बंगाल का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसा बदलाव एक विकसित पश्चिम बंगाल के निर्माण की दिशा में पहला कदम होगा.

आलू किसानों को लेकर क्या कहा

प्रधानमंत्री ने कहा, ”भाजपा, तृणमूल कांग्रेस की ‘निर्मम सरकार’ के भ्रष्टाचार पर श्वेतपत्र जारी करेगी. तृणमूल की ‘निर्मम’ सरकार की नीतियों ने पश्चिम बंगाल में आलू किसानों का भविष्य बर्बाद कर दिया.” उन्होंने कहा, ”हम पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे.” महिला मतदाताओं से भाजपा के समर्थन में एकजुट होने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा, ”जहां-जहां महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया है, वहां-वहां भाजपा ने जबरदस्त जीत दर्ज की है.”

कल्याणकारी योजनाओं के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा, ”पश्चिम बंगाल में अगर भाजपा की सरकार बनती है तो पहली कैबिनेट बैठक में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना लागू की जाएगी. बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव 2 चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे. मतगणना 4 मई को की जाएगी.

बंगाल में UCC लागू करने का वादा.रैली में अमित शाह बोले-समान मौके और सभी के लिए एक ही कानून होगा…

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल के छटना विधानसभा में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि TMC के भ्रष्टाचार के कारण जिन युवाओं को अवसर गंवाने पड़े, उन्हें BJP द्वारा आयु सीमा में छूट दी जाएगी.

BJP की सरकार लाएं और हम ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code) लागू करेंगे, जिसमें सभी के लिए एक ही कानून होगा, और जो हर किसी के लिए समान अधिकारों व कर्तव्यों को सुनिश्चित करेगा.

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का वादा किया है. गृह मंत्री अमित शाह ने ये ऐलान शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी का घोषणापत्र जारी करते वक्त किया. मौजूदा चुनावी राज्यों में असम के बाद पश्चिम बंगाल दूसरा राज्य है जहां बीजेपी ने यह वादा किया है. वैसे ये पहली बार नहीं है जब बीजेपी ने किसी चुनावी राज्य में UCC लागू करने का वादा किया हो. बीजेपी राष्ट्रीय स्तर पर भी लंबे समय से एक समान कानून लाने की बात करती रही है पर ये अभी तक परवान चढ नही सका. पीएम मोदी ने भी हाल ही में पार्टी के स्थापना दिवस पर ‘सेक्युलर सिविल कोड’ की बात की, जो भेदभाव को खत्म करेगा और संविधान की भावना को मजबूत करेगा.

यूसीसी भी रहा अहम मुद्दा

बीजेपी के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) की कहानी दशकों लंबी वैचारिक प्रतिबद्धता और गठबंधन की राजनीति की असलियत या मजबूरी की कहानी रही है. बीजेपी के लिए तीन अहम वैचारिक मुद्दों में राम मंदिर और अनुच्छेद 370 को हटाने के साथ ही UCC भी रहा है. मोदी सरकार में बीजेपी ने राम मंदिर और अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण जैसे दो प्रमुख वैचारिक वादों को पूरा किया है, लेकिन समान नागरिक संहिता लागू करने का तीसरा वादा अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर पूरा नहीं हो सका है. यही कारण है कि पार्टी ने इसे राज्य दर राज्य आगे बढ़ाने का फैसला किया है.

UCC का रास्ता बहुत पुराना है

बीजेपी के चुनाव दर चुनाव घोषणापत्र के इतिहास को खंगाले तो पता चलता है कि एक राष्ट्र, एक कानून यानि UCC तक पहुंचने का रास्ता सीधा नहीं रहा है. बीजेपी के UCC को लेकर यात्रा की शुरुआत 1980 के दशक में हुई. भारतीय जनसंघ के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए बीजेपी ने UCC को अनुच्छेद 44 के तहत एक संवैधानिक दायित्व के रूप में पेश किया, पर जहां 1996 के बीजेपी के घोषणापत्र में UCC शामिल था पर 1998 और 1999 के घोषणापत्रों में यह नदारद था, वजह थी गठबंधन की मजबूरी.

अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में 20 से ज्यादा क्षेत्रीय की अगुवाई वाली सरकार का नेतृत्व किया पर गठबंधन में शामिल समता पार्टी और टीडीपी के चलते UCC के वादे को ठंडे बस्ते में डाल दिया. हालांकि, फिर यूपीए सरकार में विपक्ष में रहते हुई पार्टी ने UCC को समय-समय पर उठाया. फिर 2014, 2019 और 2024 के चुनावी घोषणापत्र में बीजेपी ने UCC को पूरी तरजीह दीं. लेकिन, 2024 में मोदी सरकार का बहुमत नाजुक स्थिति में है और फिर वही पुराने सहयोगी नीतीश कुमार और टीडीपी साथ है जिनके चलते कभी UCC के वादे को पीछे रखना पड़ा था. चंद्रबाबू नायडू को आंध्रप्रदेश में तो नीतीश कुमार को बिहार में मुस्लिम वोटरों का समर्थन मिलता रहा है लिहाजा UCC को लेकर वो सतर्क थे.

यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य उत्तराखंड

यही वजह है कि इन दोनों ही दलों ने UCC पर आगे बढ़ने से पहले व्यापक चर्चा और विचार-विमर्श की वकालत की. इसके बाद बीजेपी ने एक नया रास्ता निकाला जो राज्यों के जरिए आता था यानि कि UCC को बीजेपी शासित राज्य सरकार के जरिए आगे बढ़ाया जाए. जहां 2025 की जनवरी में उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बना तो उसके लगभग एक साल बाद मार्च 2026 मे गुजरात ने भी सख्त UCC कानून पारित किया.

असम विधानसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में बीजेपी ने सरकार बनने के तीन महीने के भीतर UCC लागू करने का वादा किया है. अगले साल होने वाले यूपी विधानसभा के चुनावी घोषणापत्र मे भी UCC का वादा रहेगा. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस साल दिवाली तक राज्य में UCC कानून लागू करने का टार्गेट रखा है.

केंद्र स्तर पर गठबंधन की मजबूरियों के बीच बीजेपी अपनी राज्य सरकारों के मार्फत रणनीतिक तरीके से यूसीसी को लेकर आगे बढ़ रही है. ताकि, राज्यों के रास्ते ही सही देर सबेर राष्ट्रीय स्तर पर भी UCC एक हकीकत बन सके.