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शिक्षकों का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन : जाकेश साहू सरकार पर बरसे, बोले-बात नहीं हुई तो स्कूलों में तालेबंदी

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राजनांदगांव। प्रदेश के शिक्षक अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर सड़कों पर उतर आए। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के सभी 33 जिला मुख्यालयों में हजारों शिक्षकों ने छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक-समग्र शिक्षक फेडरेशन के बैनर तले एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ सहित एलबी संवर्ग के 10 से अधिक शिक्षक संगठनों ने खुला और निरूशर्त समर्थन दिया।
राजनांदगांव जिला मुख्यालय में आयोजित धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ जागरूक शिक्षक संघ (पंजीयन क्रमांक 122202595034) के प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने मंच से सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को शिक्षकों से सीधी बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, अन्यथा आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होगा।

चुनावी वादे पूरे नहीं हुए
जाकेश साहू ने कहा कि वर्ष के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में शिक्षकों से कई वादे किए थे। इन्हीं वादों के दम पर पार्टी को बड़ी जीत मिली और प्रदेश में सरकार बनी, लेकिन लगभग दो साल बीतने के बाद भी सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति दूर नहीं हुई। न क्रमोन्नति वेतनमान मिला, न ही प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि उल्टा टेट की अनिवार्यता और वीएसके (विद्या समीक्षा केंद्र) में ऑनलाइन उपस्थिति के नाम पर शिक्षकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।

वीएसके ऐप पर भी सवाल
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बस्तर और सरगुजा संभाग सहित कई दूरस्थ इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या है। ऐसे में वीएसके ऐप पर ऑनलाइन अटेंडेंस कर पाना मुश्किल है। निजी मोबाइल के इस्तेमाल से डेटा लीक होने और बैंक खातों से धोखाधड़ी का खतरा भी बना हुआ है।

कर्मचारी नेताओं को किया जा रहा टारगेट
जाकेश साहू ने आरोप लगाया कि जो कर्मचारी नेता शिक्षकों और कर्मचारियों की मांगों को सोशल मीडिया या मंच के माध्यम से उठाते हैं, उन्हें अधिकारी टारगेट कर रहे हैं। असामाजिक तत्वों की झूठी शिकायतों पर बिना जांच के निलंबन जैसी कार्रवाई की जा रही है, जो पूरी तरह अनुचित है।

स्पष्ट चेतावनी
संगठन ने सहायक शिक्षक, नव पदोन्नत प्रधान पाठक और नवीन यूडीटी के वेतनमान में विसंगति को तत्काल दूर करने, क्रमोन्नति वेतनमान देने और प्रथम सेवा गणना के साथ पुरानी पेंशन सहित सभी लाभ देने की मांग दोहराई।
प्रदेश अध्यक्ष जाकेश साहू ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल सांकेतिक और एक दिवसीय है। यदि इसके बाद भी सरकार ने शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो सभी शिक्षक संगठन मिलकर अनिश्चितकालीन और व्यापक आंदोलन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
धरना-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।

महावीर चौक में विधायक इंद्रशाह मंडावी का जन्मदिन उत्साह व धूमधाम से मनाया गया : आसिफ

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राजनांदगांव। मोहला-मानपुर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक इंद्रशाह मंडावी का जन्मदिन राजनांदगांव शहर के महावीर चौक में पूरे उत्साह, उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कांग्रेस नेता आसिफ अली के नेतृत्व में स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों द्वारा ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत विधायक इंद्रशाह मंडावी के स्वागत से हुई, जहां उन्हें फूलमालाएं पहनाकर, पुष्पगुच्छ भेंटकर एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं कुलबीर सिंह छाबड़ा, हेमा देशमुख, संतोष पिल्ले, श्रीकिशन खंडेलवाल, रूपेश दुबे, कमलजीत सिंह पिंटू, शारदा तिवारी, सुदेश देशमुख, रमेश डाकलिया, विवेक वासनिक, अशोक फडणवीस, थानेश्वर पाटिला, झम्मन देवांगन, एजाजउर रहमान, नारायण यादव, मन्ना यादव, रूबी गरचा, सूर्यकांत जैन आदि वरिष्ठ नेताओं की उपस्थित में मंच पर केक कटवाकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं। आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियों और जयकारों के साथ विधायक के प्रति अपना स्नेह और सम्मान प्रकट किया। जन्मदिन की खुशियां साझा करते हुए आसपास उपस्थित नागरिकों एवं राहगीरों को मिठाइयां वितरित की गईं।
इस अवसर पर आसिफ अली ने कहा कि विधायक इंद्रशाह मंडावी सरल स्वभाव, मजबूत नेतृत्व और जनहित के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मोहला-मानपुर सहित आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार संघर्ष किया है। क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और आम जनता की समस्याओं को विधानसभा में प्रमुखता से उठाने का कार्य विधायक द्वारा निरंतर किया जा रहा है।
आयोजन में उपस्थित कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों ने विधायक के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर जनसेवा की कामना करते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में क्षेत्र आगे भी विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
इस दौरान मुख्य रूप से अमित चंद्रवंशी, पार्षद छोटेलाल रामटेके, शकील रिजवी, मानव देशमुख, सुनील रामटेके, गामेन्द्र नेताम, मनीष साहू, इशाक खान, विशु अजमानी, चेतन सिन्हा, विजय यादव, राधे यादव, हनीफ खान, हितेश गोन्नाडे, निरंजन पासवान, राहुल देवांगन, विशाल गढ़े, परस लहरे, गोपी टंडन, कृष्णा मेश्राम, प्रदीप यादव, शेख अनीस, शैलेश ठावरे, मोहनीश गेडाम, तोकेश साहू, नरेंद्र सिन्हा, प्रमोद सोनटेके, हिमांशु बंजारे, बंटी यादव, कमलेश मेश्राम, जानू खान, मोहम्मद रफीक, प्रियांश मेश्राम, देवेंद्र कलिहारी, डॉ. चंचल देवांगन, सलीम खान, सौरभ देवांगन, शाकिर खान, इंसार खान, रफीक मनिहार, रेहान खान, शहजाद गोरी, सीमा चौरसिया, सतीश चौरसिया, शादाब अली, भूपेंद्र साहू, दानी रगड़े, गोलू विश्वकर्मा, अरविंद साहू, द्वारका यादव, अभी गुप्ता, हर्षिल भिलावे, लल्लू सिन्हा, धीरज रामटेके, महेश यादव, गोलू कुलदीप, संजय साहू, शेख नबी, नीलेंद्र साहू, परवेज खान, दिनेश मानकर, फैजान खान, रजत खांडेकर, मतीन खान, मुश्ताक शेख, खोमन लाल साहू, पन्ना साहू, सूरज पासवान, दिव्यांश साहू आदि सहित बड़ी संख्या में स्थानीय गणमान्य नागरिक, युवा कार्यकर्ता एवं समाजसेवी उपस्थित रहे, जिन्होंने विधायक के प्रति अपना समर्थन और आशीर्वाद व्यक्त किया।
उक्त जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया पैनलिस्ट अभिमन्यु उदय मिश्रा ने दी।

किसान बेईमान नहीं, शासन-प्रशासन की नीतियों पर गंभीर सवाल : अशोक फड़नवीस

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राजनांदगांव। प्रदेश में धान खरीदी को लेकर किसानों की बढ़ती परेशानियों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक फड़नवीस ने सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मेहनतकश किसान, जिन्हें कभी प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार और गोल्डन मैन कहा जाता था, आज उसी सरकार की नजर में चोर बनते जा रहे हैं। टोकन जारी होने के बाद भी किसानों के घर-घर आरआई और पटवारियों को भेजकर धान की जांच कराना सरकार की नीयत और सोच पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अशोक फड़नवीस ने कहा कि जिन किसानों को धान विक्रय के लिए विधिवत टोकन दिया गया है, उन्हीं किसानों के घर राजस्व विभाग के पटवारी भेजकर इकट्ठा किए गए धान की मात्रा की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा सरकार में अब पटवारी ईडी और सीबीआई अधिकारी की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को यह संदेश दिया जा रहा है कि उनके पास जितना धान मिलेगा, उतनी ही राशि उनके रकबे के अनुसार नहीं दी जाएगी, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। फड़नवीस ने सवाल उठाया कि जब फसल कटाई से पहले ही पटवारी खेतों में जाकर रकबा और संभावित उत्पादन का सर्वे कर शासन को रिपोर्ट सौंपते हैं, तो उसी आधार पर धान की खरीदी क्यों नहीं की जा रही। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार किसानों को संदेह की दृष्टि से देख रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि चुनाव के दौरान किसानों से बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज सरकार उन्हीं वादों से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने मांग की कि किसानों से 21 मि्ंटल प्रति एकड़ की दर से धान खरीदी की जाए, खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त स्टाल और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा किसानों को तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
फड़नवीस ने कहा कि वर्तमान में बड़ी संख्या में किसान टोकन के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। प्रशासनिक अव्यवस्था के चलते किसानों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान किया जा रहा है। राजस्व विभाग में हितग्राहियों के काम लंबे समय से लंबित हैं और विभाग में अराजकता का माहौल बना हुआ है।
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान शासन केवल एक प्रयोगशाला बनकर रह गया है, जिसे यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रशासन को कैसे संचालित किया जाए। इसका सीधा असर पूरे प्रशासनिक तंत्र पर पड़ रहा है और किसानों सहित आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के सम्मान और अधिकारों से किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि सरकार ने जल्द अपनी नीति नहीं बदली तो कांग्रेस किसानों के हित में आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगी।

कंपनियों की लड़ाई में खरीदारों का फायदा, भारत में CAFE छूट से सस्ती हो

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भारत फ्यूल एफिशिएंसी के आधार पर दुनियाभर में छोटी कारों को मिलने वाले फायदे की समीक्षा कर रहा है. इसके लिए अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के नियमों को देखा जा रहा है.

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब देश में मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स के बीच आने वाले CAFE 3 नियमों में छोटी कारों को वजन के आधार पर छूट देने को लेकर बहस चल रही है. ये नए नियम अगले साल लागू होने वाले हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया में CAFE (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) नियमों के तहत छोटी कारों को दी जाने वाली छूट का अध्ययन कर रही है, ताकि भारत के नियमों को विकसित देशों के बराबर लाया जा सके. यह कवायद ऐसे समय में हो रही है, जब देश की बड़ी कार कंपनियों मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स के बीच CAFE 3 नियमों में छोटी कारों को वजन के आधार पर छूट देने को लेकर मतभेद सामने आए हैं. सूत्रों के मुताबिक, पहली बार सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने केंद्र सरकार को दुनिया के बड़े ऑटो बाजारों में छोटी कारों को मिलने वाली छूट से जुड़ा पूरा डेटा सौंपा है.

देश की कंपनियों में मतभेद

रिपोर्ट में एक वरिष्ठ उद्योग अधिकारी ने बताया कि देश की कंपनियों में मतभेद बढ़ने के बाद केंद्र ने CAFE 3 नियम तय करने के लिए वैश्विक नियमों का डेटा मांगा था. ये मतभेद ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) की ओर से जारी ड्राफ्ट नियमों पर चर्चा के दौरान सामने आए. SIAM की ओर से दिया गया डेटा उन सभी देशों की कार बिक्री को कवर करता है, जहां CAFE नियम लागू हैं. यह जानकारी भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) और बिजली मंत्रालय (MoP) को केंद्र के निर्देश पर भेजी गई है. एक वरिष्ठ MHI अधिकारी ने बताया कि केंद्र ने ऑटो उद्योग से सुझाव मांगे थे. सभी पक्षों की राय देखने के बाद BEE अंतिम नियम तय करेगा. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सुझावों को आगे भेजा गया है, लेकिन किसी का समर्थन नहीं किया गया है.

अन्य देशों में क्या है नियम?

चीन में 1090 किलोग्राम से कम वजन वाली कारों को CAFE में छूट मिलती है. यूरोप में 1115 किलोग्राम से कम वजन की कारों के लिए उत्सर्जन लक्ष्य आसान हैं. दक्षिण कोरिया में यह सीमा 1100 किलोग्राम है. जापान में वजन के हिसाब से धीरे-धीरे बदलने वाला सिस्टम है, जिसमें वजन बढ़ने के साथ लक्ष्य का फर्क कम होता जाता है. अमेरिका में 41 स्क्वायर फीट से कम फुटप्रिंट वाली गाड़ियों को इंसेंटिव मिलता है. EU को छोड़कर ज्यादातर देशों में छोटी कारों के लिए यह छूट 2015-16 से लागू है. उद्योग अधिकारी ने कहा कि मकसद ऐसे नियम बनाना है जो पर्यावरण को सुरक्षित रखें, गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ाएं, सड़कों पर भीड़ कम करें और भारत के नियमों को वैश्विक स्तर के बराबर लाएं.

क्या है CAFE 3?

CAFE 3 नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे, जिनका उद्देश्य ईंधन खपत और वाहन प्रदूषण कम करना है. कार जितना ज्यादा ईंधन खर्च करती है, उतना ही ज्यादा CO₂ उत्सर्जन करती है. BEE के ड्राफ्ट CAFE 3 नियम आने के बाद उद्योग दो हिस्सों में बंट गया है. मारुति सुजुकी का कहना है कि छोटी कारें बड़ी कारों के मुकाबले ज्यादा माइलेज देती हैं, इसलिए उन्हें उत्सर्जन नियमों में छूट मिलनी चाहिए. इससे पहली बार कार खरीदने वालों को भी फायदा होगा. वहीं टाटा मोटर्स जैसी कंपनियों का कहना है कि किसी भी कार कैटेगरी को खास छूट देने का कोई औचित्य नहीं है.

क्या सस्ती होंगी छोटी कारें?

BEE के ड्राफ्ट CAFE 3 नियमों के अनुसार, 4 मीटर से छोटी, 909 किलोग्राम से कम वजन वाली और 1200 cc से कम इंजन वाली कारों को CO₂ उत्सर्जन की गणना में 3 ग्राम की छूट मिलेगी. पिछले वित्त वर्ष में 909 किलोग्राम से कम वजन वाली कारों की हिस्सेदारी कुल पैसेंजर वाहन बिक्री में 7.5% रही, जो FY18 में 31.5% थी. अनुमान है कि FY32 तक, जब CAFE 3 लागू रहेगा, यह हिस्सेदारी और घटकर 4.5% रह जाएगी. मौजूदा CAFE 2 नियम (जो मार्च 2027 तक लागू हैं) में छोटी कारों के लिए अलग नियम नहीं हैं. मौजूदा नियमों के तहत, 3,500 किलोग्राम से कम वजन वाली सभी पैसेंजर गाड़ियों (CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक सहित) का औसत उत्सर्जन 113 ग्राम CO₂ प्रति किलोमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए. इसका मतलब यह है कि अगर किसी कंपनी के पास ज्यादा माइलेज वाली गाड़ियां हैं, तो कुछ मॉडल ज्यादा उत्सर्जन वाले भी हो सकते हैं.

क्या कहती हैं कंपनियां?

टाटा मोटर्स ने पहले कहा था कि CAFE नियमों का असली उद्देश्य कंपनियों को पूरे पोर्टफोलियो स्तर पर ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए प्रेरित करना है, न कि हर कार या सेगमेंट के लिए अलग लक्ष्य तय करना. कंपनियां अपने हिसाब से तकनीक चुनकर लक्ष्य पूरा कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि GST 2.0 के तहत 4 मीटर से कम लंबाई और इंजन क्षमता के आधार पर छोटी कार की जो परिभाषा है, वही सही है. इस परिभाषा के अनुसार टाटा मोटर्स भारत में दूसरी सबसे बड़ी छोटी कार निर्माता है, जिसकी 85% से ज्यादा बिक्री इसी सेगमेंट से आती है. CAFE नियम पूरे करने में टाटा को कोई परेशानी नहीं है और किसी तरह की खास छूट की जरूरत नहीं है. उन्होंने वजन के आधार पर छोटी कार तय करने को मनमाना बताया और कहा कि इससे सुरक्षा से समझौता हो सकता है. वहीं मारुति सुजुकी ने पहले कहा था कि कुछ बड़ी और ज्यादा ईंधन खपत करने वाली कार बनाने वाली कंपनियां गलत जानकारी फैलाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही हैं.

अजीत जोगी युवा मोर्चा ने फूड ऑफिसर को सौंपा ज्ञापन, नकली खाद्य पदार्थों की जांच की मांग

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राजनांदगांव। नकली खाद्य पदार्थों की बिक्री और राशन दुकानों में अनियमितताओं के खिलाफ अजीत जोगी युवा मोर्चा ने फूड ऑफिसर और फूड ड्रग इंस्पेक्टर को ज्ञापन सौंपा। मोर्चा ने नकली पनीर, दूध सहित अन्य खाद्य पदार्थों की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
अजीत जोगी युवा मोर्चा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष शमसुल आलम के निर्देश पर युवा शहर जिलाध्यक्ष बिलाल सोलिन खान के नेतृत्व में यह ज्ञापन दिया गया। बिलाल ने कहा कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में खुलेआम नकली खाद्य पदार्थों की बिक्री हो रही है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई राशन दुकानें समय पर नहीं खुलतीं और वितरण में गड़बड़ियां की जा रही हैं। मोर्चा ने ऐसे दुकानदारों के खिलाफ जांच कर लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।
बिलाल सोलिन खान ने कहा कि यदि जल्द ही जांच कर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष शमसुल आलम के नेतृत्व में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इस मौके पर जिला महासचिव ऋषभ रामटेके, शहर अध्यक्ष अकलतरा अंकू पांडे, मुकेश साहू, अजय मार्कण्डेय, साहिल खान सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

‘वे आदेश देते हैं, हम संवाद करते हैं, यही है असली फर्क; राहुल गांधी

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूडीएफ महा पंचायत में बीजेपी और आरएसएस पर हमला बोला. राहुल ने कहा कि आरएसएस और भाजपा सत्ता के केंद्रीकरण के पक्षधर हैं, जबकि कांग्रेस सत्ता के विकेंद्रीकरण के पक्ष में है.

राहुल ने कहा कि अगर आप भाजपा, RSS और कांग्रेस पार्टी के बीच के अंतर को थोड़ा गहराई से देखेंगे, तो आपको पता चलेगा कि वे सत्ता के केंद्रीकरण के लिए खड़े हैं और हम सत्ता के विकेंद्रीकरण के लिए खड़े हैं. वे भारत के लोगों से आज्ञापालन चाहते हैं. वे भारत के लोगों की आवाज नहीं सुनना चाहते.

UDF और कांग्रेस नेताओं से राहुल का सवाल

राहुल गांधी ने आगे कहा कि हमने दिल्ली में कई वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें कीं. इस दौरान सबने यही कहा कि यूडीएफ पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव जीतने जा रही है. मगर सबसे बड़ा सवाल ये है कि चुनाव जीतने के बाद आप क्या करेंगे? राहुल ने कहा कि यह सवाल UDF और केरल कांग्रेस के नेताओं से है. उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी की समस्या है.

नेतृत्व का लोगों के लिए सुलभ होना जरूरी

राहुल ने कहा कि यूडीएफ और कांग्रेस पार्टी को केरल के लिए एक ऐसा विजन देना होगा जो इन सभी समस्याओं का समाधान करे. मुझे विश्वास है कि इस मंच पर मौजूद नेतृत्व में यह समझने की क्षमता है कि केरल के लोग क्या चाहते हैं और वे केरल के लोगों की जरूरतों को पूरा करेंगे. राहुल ने आगे कहा कि किसी भी सरकार की सफलता के लिए, नेतृत्व का लोगों के लिए सुलभ होना जरूरी है.

उन्होंने ये भी कहा कि नेतृत्व को लोगों के साथ घुलना-मिलना होगा और मुझे विश्वास है कि यूडीएफ और कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व विनम्र होगा, केरल के लोगों के साथ घुलेगा-मिलेगा और सच में केरल के लोगों की आवाज बनेगा.

गुजरात में तेजी से बढ़ रहा AAP का ग्राफ: कांग्रेस को पछाड़कर आम आदमी

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गुजरात की राजनीति में एक बड़ा और साफ़ बदलाव दिखाई देने लगा है। तीन दशक से जिस राज्य में भाजपा का दबदबा बना हुआ है, वहां अब आम आदमी पार्टी तेज़ी से एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है।

WeePreside और CIF द्वारा किए गए “Pulse of Gujarat 2026” सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात की राजनीति अब भाजपा बनाम आम आदमी पार्टी की दिशा में बढ़ रही है, जबकि कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है।

सर्वे में ‘आप’ का वोट शेयर 24.8 प्रतिशत

सर्वे के मुताबिक गुजरात में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 24.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 17.3 प्रतिशत रह गया है। यानी आम आदमी पार्टी अब कांग्रेस को पीछे छोड़कर गुजरात की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है। भाजपा अभी भी करीब 49.5 प्रतिशत वोट शेयर के साथ आगे है, लेकिन अब उसे सीधी चुनौती कांग्रेस की बजाय आम आदमी पार्टी से मिलती हुई दिख रही है।

‘तीन साल में आप का वोट शेयर दोगुना’

अगर 2022 के विधानसभा चुनाव से तुलना की जाए तो बदलाव और स्पष्ट हो जाता है। 2022 में कांग्रेस को लगभग 27 प्रतिशत वोट मिले थे, जो 2017 के 40 प्रतिशत के मुकाबले पहले ही काफी बड़ी गिरावट थी। अब तीन साल बाद स्थिति यह है कि कांग्रेस का वोट शेयर करीब 10 प्रतिशत और गिर गया है। आम आदमी पार्टी 2022 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ते हुए करीब 13 प्रतिशत वोट शेयर तक पहुंची थी। तीन साल में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर लगभग दोगुना हो चुका है। यह साफ़ संकेत है कि कांग्रेस का पारंपरिक वोट अब बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी की ओर शिफ्ट हो रहा है।

शहरी गुजरात में AAP की पकड़ मौजूद

क्षेत्रीय आंकड़े भी यही कहानी कहते हैं। सौराष्ट्र-कच्छ जैसे इलाकों में, जहां भाजपा को कुछ नुकसान की आशंका जताई जा रही है, वहां आम आदमी पार्टी तेज़ी से अपनी पकड़ बना रही है। उत्तर और मध्य गुजरात में भाजपा अब भी आगे है, लेकिन शहरी और मेट्रो इलाकों में आम आदमी पार्टी को कांग्रेस से कहीं ज़्यादा समर्थन मिल रहा है। शहरी गुजरात में AAP को अब दूसरी पसंद नहीं, बल्कि सीधी चुनौती देने वाली पार्टी के रूप में देखा जा रहा है।

अहमदाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं का बड़ा सम्मेलन

इसी बदले हुए माहौल के बीच अहमदाबाद में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का बड़ा सम्मेलन हुआ। इस सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अब गुजरात की जनता के मन से डर निकल चुका है। अरविंद केजरीवाल ने साफ़ कहा कि 2027 में गुजरात में सत्ता बदलने वाली है और आम आदमी पार्टी सत्ता परिवर्तन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर और लोगों को जेल में डाला गया तो उससे डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि यह लड़ाई अन्याय के खिलाफ़ है और जनता इसका जवाब देगी।

जनता का मूड गुजरात में बदल रहा

तीन साल की सरकार के बाद जनता का मूड अब बदलता दिख रहा है। कैबिनेट के सामूहिक इस्तीफों, बेरोज़गारी, महंगाई और प्रशासन से जुड़े सवालों के बीच लोग यह सोचने लगे हैं कि भरोसा किस पर किया जाए। WeePreside और CIF का यह सर्वे बताता है कि भाजपा अभी आगे ज़रूर है, लेकिन उसका मुकाबला अब कमजोर होती कांग्रेस से नहीं, बल्कि तेज़ी से मजबूत होती आम आदमी पार्टी से है।

Blinkit-Swiggy की बढ़ी टेंशन? अंबानी ने क्विक कॉमर्स में कर दिया वो कम

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आजकल हम सभी की आदत बदल गई है. दूध का पैकेट हो या स्नैक्स, हम दुकान पर जाने के बजाय फोन उठाकर 10 मिनट में डिलीवरी देने वाले ऐप्स का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी जल्दी सामान पहुंचाने की होड़ में ये कंपनियां पैसा कैसे कमाती हैं?

सच तो यह है कि क्विक कॉमर्स के बाजार में मुनाफे तक पहुंचना लोहे के चने चबाने जैसा रहा है. लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अब जो दावा किया है, उसने बाजार के समीकरण बदल दिए हैं. रिलायंस ने साफ कर दिया है कि उसका क्विक कॉमर्स और एफएमसीजी (FMCG) बिजनेस अब पैसा कमाने लगा है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का कहना है कि उनका क्विक कॉमर्स बिजनेस अब हर ऑर्डर पर मुनाफा कमा रहा है, जिसे कारोबारी भाषा में ‘कंट्रीब्यूशन मार्जिन पॉजिटिव’ होना कहते हैं.

मुनाफे का गणित समझ लें

अक्टूबर 2024 में रिलायंस ने अपने क्विक कॉमर्स बिजनेस की शुरुआत की थी. इतने कम समय में कंपनी ने वो हासिल कर लिया है, जिसके लिए दूसरी कंपनियां सालों से संघर्ष कर रही हैं. कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि उनका एफएमसीजी कारोबार, जिसे शुरू हुए तीन साल हो चुके हैं, वह भी अब मुनाफे (Ebitda Positive) की स्थिति में आ गया है.

रिलायंस रिटेल के सीएफओ दिनेश तलुजा ने इसके पीछे की वजह समझाई है. दरअसल, रिलायंस भारत में किराना और ग्रोसरी का सबसे बड़ा खिलाड़ी है. इस वजह से वे एफएमसीजी कंपनियों से सबसे ज्यादा सामान खरीदते हैं. जब आप थोक में इतना बड़ा ऑर्डर देते हैं, तो स्वाभाविक है कि आपको सामान सस्ती दरों पर मिलता है. इसी ‘सोर्सिंग पावर’ का फायदा रिलायंस को क्विक कॉमर्स में मिल रहा है, जिससे उनका मुनाफा बढ़ रहा है.

खाने-पीने की चीजों से हो रही असली कमाई

रिलायंस की इस सफलता के पीछे एक और बड़ा कारण है ग्राहकों की पसंद को समझना. तलुजा ने बताया कि फूड और बेवरेज (F&B) कैटेगरी में सबसे ज्यादा मार्जिन होता है. रिलायंस के क्विक कॉमर्स पर आने वाले हर तीन में से एक ऑर्डर इसी कैटेगरी का होता है.

आमतौर पर किराना दुकानों में खाने-पीने की चीजों की बर्बादी (वेस्टेज) 30 से 35 प्रतिशत तक होती है, जिससे मुनाफा घट जाता है. लेकिन रिलायंस ने अपने सप्लाई चेन मैनेजमेंट से इस बर्बादी पर लगाम लगा दी है. यही कारण है कि वे ग्राहकों को अच्छी कीमत भी दे पा रहे हैं और खुद भी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. साथ ही, कंपनी अब सिर्फ राशन ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन के सामान भी डिलीवर कर रही है, जिससे कमाई का दायरा बढ़ रहा है.

दूसरे खिलाड़ियों के मुकाबले कहां खड़ी है रिलायंस?

रिलायंस के पास करीब 3,000 आउटलेट्स हैं जो क्विक कॉमर्स से जुड़े हैं, जिनमें से 800 डार्क स्टोर्स (जहां से सिर्फ डिलीवरी होती है) हैं. कंपनी का कहना है कि वे अपने पहले से मौजूद स्टोर नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत कम आती है. आंकड़ों की बात करें तो दिसंबर 2025 की तिमाही में रिलायंस को हर दिन 16 लाख (1.6 मिलियन) ऑर्डर मिल रहे थे. ऑर्डर्स की संख्या में तिमाही दर तिमाही 53% की बढ़ोतरी देखी गई है. कंपनी का लक्ष्य भारत का सबसे बड़ा क्विक कॉमर्स खिलाड़ी बनना है.

फिलहाल इस रेस के सबसे बड़े खिलाड़ी ब्लिंकिट (Blinkit) और स्विगी (Swiggy) अभी भी कुल मिलाकर घाटे में ही चल रहे हैं. ब्लिंकिट कुछ शहरों में मुनाफा कमा रहा है, लेकिन नए शहरों में विस्तार के कारण उनका खर्च बढ़ा हुआ है. स्विगी का घाटा भी कम हुआ है, लेकिन वे अभी पूरी तरह मुनाफे में नहीं आए हैं.

Hyundai का बड़ा प्लान, 2026 में लॉन्च होंगे एडवांस फीचर्स

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2025 में कई शानदार मॉडल्स को लॉन्च करने के बाद अब Hyundai ने 2026 की तैयारी शुरू कर दी है. इस साल कंपनी बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक कई नई गाड़ियों को लॉन्च करने की तैयारी में है, सबसे पहला लॉन्च 2026 की दूसरी तिमाही में होने की उम्मीद है.

चलिए आपको अब उन चार गाड़ियों के बारे में बताते हैं जो इस साल लॉन्च हो सकती हैं.

पहला लॉन्च: ये गाड़ी करेगी एंट्री

ग्लोबल मार्केट की तरह कंपनी तीन साल के प्रोडक्ट लाइफसाइकिल को फॉलो करते हुए, हुंडई इस साल 6th जेनरेशन Verna के फेसलिफ्ट वर्जन को लॉन्च कर सकती है. मार्च 2023 में ओरिजिनल मॉडल को लॉन्च किया गया था और इस साल अप्रैल में इस एसयूवी के अपडेटेड मॉडल को लॉन्च किया जा सकता है.

नई वरना का फ्रंट लेटेस्ट Sonata से इंस्पायर्ड होगा और यह ज्यादा शार्प और एग्रेसिव दिखेगी. इसमें कई नए फीचर्स होंगे, जिसमें कस्टमाइज़ेबल मोड्स वाला 12.3 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और वायरलेस Apple CarPlay और वायरलेस Android Auto के साथ 12.3 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल है. इस गाड़ी के इंजन में किसी भी तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है.

दूसरा लॉन्च: आएगा फेसलिफ्ट वर्जन

साल की दूसरी तिमाही में, Hyundai Exter का फेसलिफ्ट अवतार लॉन्च हो सकता है.नई Exter में 12.9 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और 9.9 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलेगा. फेसलिफ्ट में नया बंपर, बदले हुए हेडलैंप और टेल लैंप के अलावा 15 इंच के नए अलॉय व्हील्स भी मिल सकते हैं. इस कार के इंजन या ट्रांसमिशन में कोई बदलाव होने की उम्मीद नहीं है.

तीसरा लॉन्च: बड़ी बैटरी के साथ आएगी ये EV

जून या जुलाई में, हुंडई नई Ioniq 5 को लॉन्च कर सकती है. इस गाड़ी को कंपनी ने मार्च 2024 में इंटरनेशनल लेवल पर पेश किया था. इस फेसलिफ्ट मॉडल के डिजाइन में बदलाव के अलावा इसमें रियर विंडशील्ड वाइपर और वॉशर, डिजिटल की 2, थ्री-स्पोक स्टीयरिंग व्हील और ccNC-बेस्ड 12.3 इंच डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 12.3 इंच इंफोटेनमेंट सिस्टम मिल सकता है. बेहतर और लंबी ड्राइविंग रेंज के लिए इस इलेक्ट्रिक गाड़ी में 84kWh की बड़ी बैटरी मिल सकती है.

चौथा लॉन्च: Venue से ऊपर प्लेस होगी ये SUV

इस साल फेस्टिव सीजन के आसपास, कंपनी शायद साल का अपना सबसे महत्वपूर्ण लॉन्च करेगी. Bayon, फिलहाल ये गाड़ी अभी डेवलपेमेंट स्टेज में है, ये सब 4 मीटर एसयूवी होगी जो वेन्यू से ऊपर पोजीशन की जाएगी. ये गाड़ी ज्यादा स्पोर्टी लुक के साथ आ सकती है. ये गाड़ी 4th जेनरेशन i20 के प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी और इसमें हुंडई का हाइब्रिड-रेडी 1.2 लीटर टर्बोचार्ज्ड 4 सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया जा सकता है.

BJP और शिंदे सेना आपस में लड़े, उसमें हमें न घसीटे. BMC मेयर चुनाव

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महाराष्ट्र में बीएमसी के मेयर पद को लेकर महायुति की दो सहयोगी पार्टियों के बीच खींचतान के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने अपने को अलग रखने की बात कही है. बीएमसी चुनाव में भाजपा के 89 और शिवसेना शिंदू गुट के 29 पार्षद विजयी हुए हैं.

बीएमसी में महायुति को बहुमत मिला है, लेकिन मेयर पद को लेकर दोनों पार्टियों में घमासान मचा हुआ है. इस बीच उद्धव ठाकरे का यह बयान सामने आया है कि यदि बीएमसी में बीजेपी का मेयर बनता है, तो उनके पार्षद मतदान के दौरान अनुपस्थित रहेंगे.

भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे का यह बयान सियासी रूप से काफी अहम माना जा रहा था और कहा जा रहा था कि इससे भाजपा को बैकडोर से मदद मिलेगी.

आपस में लड़े, हमें न घसीटे… यूबीटी प्रवक्ता

लेकिन अब शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता हर्षल प्रधान का ट्वीट सामने आया है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि सत्ता की लालच के लिए साथ आई भाजपा और शिंदे सेना आपस में लड़े, उसमें हमें न घसीटे.

उन्होंने लिखा कि भाजपा और शिंदे गुट जैसे सत्ता-लोलुप, समान विचारधारा वाले दलों को अपनी आपसी लड़ाइयां खुद ही लड़नी चाहिए. मिंधे गुट और भाजपा को एक-दूसरे से जरूर भिड़ना चाहिए, लेकिन हमें इस संघर्ष में घसीटा नहीं जाना चाहिए.

15 जनवरी को राज्य के 29 नगर निगम चुनावों में हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. भाजपा ने कई नगर पालिकाओं में अकेले दम पर सत्ता हासिल की, लेकिन बीएमसी के मेयर पद को लेकर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना में घमासान मचा हुआ है.

मुंबई के मेयर को लेकर सियासी घमासान

मुंबई नगर निगम का मेयर कौन बनेगा? इस पर खूब चर्चा हो रही है. मुंबई नगर निगम में भाजपा के पार्षदों की संख्या अधिक है. इसके बाद शिवसेना ठाकरे समूह और शिवसेना शिंदे समूह के पार्षद आते हैं. कहा जा रहा है कि चूंकि भाजपा से अधिकतम पार्षद चुने गए हैं, इसलिए मेयर भाजपा के ही होंगे. हालांकि, देखा जा रहा है कि एकनाथ शिंदे ने पासा पलटते हुए खेल का रुख ही बदल दिया है.

शिवसेना (शिंदे) गुट की मदद के बिना भाजपा के लिए मुंबई नगर निगम में सत्ता बनाना मुश्किल है. किसी भी हालत में उन्हें शिवसेना के शिंदे गुट की मदद लेनी ही पड़ेगी. शिंदे ने यह शर्त रखी कि भाजपा के मेयर ढाई साल तक रहेंगे और शिवसेना के शिंदे गुट के भी ढाई साल तक मेयर रहेंगे. हॉर्स ट्रेडिंग के भय से नवनिर्वाचित पार्षदों को फाइल स्टार होटल में ठहराया है.

यूबीटी ने मेयर चुनाव से बनाई दूरी

इस बीच, ऐसी जानकारी आई थी कि मेयर चुनाव के दौरान भाजपा ने शिवसेना ठाकरे समूह से सीधा संपर्क किया है. कहा जा रहा है कि ठाकरे समूह के 65 पार्षद महापौर चुनाव प्रक्रिया में अनुपस्थित रहेंगे. 2017 के महापौर चुनाव में भाजपा ने शिवसेना ठाकरे समूह के पक्ष में अपना नाम वापस ले लिया था.

इस बार कहा जा रहा है कि इसकी भरपाई शिवसेना करेगी और शिवसेना ठाकरे समूह के पार्षद महापौर चुनाव में अनुपस्थित रहेंगे. हालांकि, भाजपा नेता प्रवीण दारेकर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उद्धव ठाकरे और देवेंद्र फडणवीस के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है. वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता हर्षल प्रधान ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया है.