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कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सस्पेंस, डीके शिवकुमार और सिद्धार,.’राहुल गांधी से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा ,’..

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कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी हलचल फिर तेज हो गई है. उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बीच हाल ही में हुई राहुल गांधी से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है.

वीडियो और पोस्ट सामने आने के बाद राज्य में पावर टसल पर बहस फिर शुरू हो गई है.

राहुल गांधी से बुधवार को हुई संक्षिप्त और एकांत बातचीत के बाद डीके शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कोशिश असफल हो सकती है, लेकिन प्रार्थना कभी असफल नहीं होती.’ यह पोस्ट मैसूरु एयरपोर्ट पर दोनों नेताओं की मुलाकात के तुरंत बाद साझा की गई. इस मुलाकात के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लगातार नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज कर रहे थे. डीके और राहुल की यह बातचीत कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के कयासों को और तेज कर गई.

मैसूरु एयरपोर्ट पर हुई मुलाकात

मंगलवार को राहुल गांधी तमिलनाडु के गुडलूर के लिए रवाना होने से पहले मैसूरु के मंडकल्लि एयरपोर्ट पहुंचे, जहां उनका स्वागत सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने किया. कुछ ही मिनट में राहुल हेलिकॉप्टर से रवाना हो गए. बाद में दिल्ली लौटते समय राहुल के मैसूरु लौटने पर डीके पहले ही एयरपोर्ट पहुंचे और रनवे पर दोनों के बीच करीब तीन मिनट तक आमने सामने बातचीत हुई. इसके कुछ समय बाद सिद्धारमैया भी वहां पहुंचे.

सियासी चर्चाओं को और मिली हवा

इस खास बातचीत के बाद राजनीतिक अटकलें तेज हो गईं. डीके ने मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं, लेकिन दोनों नेताओं ने मीडिया से दूरी बनाए रखी. वहीं सिद्धारमैया ने स्पष्ट कहा कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भ्रम नहीं है और अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान लेगा. इस बीच कांग्रेस और पुलिस ने एयरपोर्ट पर किसी भी तरह के शक्ति प्रदर्शन से बचने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं की एंट्री पर रोक लगा दी, ताकि हाल ही में मंगलुरु एयरपोर्ट पर देखे गए नारेबाजी जैसे हालात दोबारा न बनें.

सूत्रों के अनुसार, इस बार सिद्धारमैया भ्रम के मूड में बिल्कुल नहीं हैं. राहुल से बातचीत में उन्होंने कहा कि हर रोज नया भ्रम नहीं पैदा होना चाहिए और जल्द ही इसका स्थायी समाधान निकाला जाए. उधर, मुख्यमंत्री पद का इंतजार कर रहे डीके शिवकुमार ने भी संकेत दिए हैं कि उनकी कोशिश जारी रहेगी. कर्नाटक में कुर्सी की लड़ाई अब फिर से तेज होती दिख रही है और राजनीतिक गलियारों में सभी की निगाहें पार्टी हाईकमान की ओर टिकी हैं, जो मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला करेगा.

West Bengal: बंगाल में डरा रहा निपाह वायरस! बारसात से मिले 2 नए संदिग्

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पश्चिम बंगाल के कोलकाता में निपाह वायरस को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं. बारसात क्षेत्र से दो और संदिग्ध मरीजों को बेलेघाटा आईडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

डॉक्टरों का कहना है कि दोनों मरीज हाल ही में निपाह वायरस से संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे, जिसके कारण उन्हें यह संक्रमण होने की आशंका है. अस्पताल में इन मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है.

स्वास्थ्य कर्मियों की रिपोर्ट नेगेटिव

इस बीच राहत की बात यह सामने आई है कि संक्रमितों के संपर्क में आए 5 स्वास्थ्य कर्मियों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता. नदिया जिले के CMOH ने अब तक कुल 45 सैंपल एम्स कल्याणी भेजे हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार है.

नदिया जिले की दो नर्सें संक्रमित पाई गई थीं और उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है. एक नर्स गहरे कोमा में है. दूसरी नर्स को वेंटिलेशन सपोर्ट पर रखा गया है. डॉक्टरों का संदेह है कि वे नदिया के कालीगंज में एक पारिवारिक समारोह में शामिल होने के बाद संक्रमित हुईं. इसके अलावा, दूसरी नर्स संभवतः पहली संक्रमित नर्स के साथ बारसात अस्पताल में दो दिनों तक नाइट ड्यूटी करने के दौरान संक्रमित हुई.

निपाह वायरस का खतरा क्यों गंभीर है?

स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीम आज कालीगंज में जांच के लिए पहुंच रही है ताकि संक्रमण के स्रोत और वायरस के फैलाव को समझा जा सके. सबसे बड़ी चिंता यह है कि निपाह वायरस का अभी तक कोई टीका या पक्का इलाज मौजूद नहीं है. डॉक्टर जयदेव राय बताते हैं, ‘कुछ दवाओं का परीक्षण हुआ है, पर कोई भी विशेष रूप से कारगर नहीं मिली. फिलहाल उपचार केवल लक्षणों के आधार पर किया जाता है. गंभीर मरीजों को तुरंत ICU में भर्ती करना जरूरी होता है.’

उनके अनुसार, निपाह वायरस तेजी से मस्तिष्क पर असर करता है. मरीज बेहोश हो सकता है, उसे दौरे पड़ सकते हैं, दिल की धड़कन रुक सकती है और सांस लेने में गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है, क्योंकि इस वायरस की मृत्यु दर काफी अधिक है.

निपाह कैसे फैलता है?

डॉक्टरों का कहना है कि निपाह वायरस का प्रमुख स्रोत चमगादड़ हैं. उनके लार या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से इंसान संक्रमित हो सकता है. डॉ. राय बताते हैं, ‘हमेशा जरूरी नहीं है कि संक्रमण चमगादड़ से ही फैले. संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी वायरस दूसरे व्यक्ति में जा सकता है.’

डॉक्टर जयदेव राय कहते हैं, ‘निपाह वायरस के लक्षण अन्य वायरस की तरह शुरू होते हैं, लेकिन यह बहुत तेजी से फैलता है. यह बहुत तेजी से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है. मरीज बेहोश हो जाता है, दौरे पड़ते हैं, दिल रोग हो सकता है. सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. यदि इस प्रकार की समस्याएं और लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और मरीज को आईसीयू देखभाल देनी चाहिए. क्योंकि इस बीमारी की मृत्यु दर बहुत अधिक है.

“Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति में खिचड़ी पर ग्रहण! 14 एकादशी और “

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Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व खिचड़ी के बगैर अधूरा माना जाता है. इसलिए मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व भी कहते हैं. इस दिन खिचड़ी पकाने और खाने के साथ ही दान करने का भी विधान है.

लेकिन इस वर्ष कुछ ऐसी स्थिति बनी है जिससे न केवल मकर संक्रांति की तिथि बल्कि खिचड़ी को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं.

बता दें कि इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी और 15 जनवरी दोनों ही दिन मनाई जा रही है. लेकिन दोनों ही तिथियां खिचड़ी पकाने, खाने और दान के लिए उचित नहीं है. दरअसल 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है और 15 जनवरी को गुरुवार है. एकादशी तिथि पर चावल खाना वर्जित है तो वहीं गुरुवार को खिचड़ी बनाना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसे में क्या करें जानें.

14 जनवरी- एकादशी के कारण बदला नियम

14 जनवरी को इस साल मकर संक्रांति के साथ ही षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बना है. लेकिन एकादशी पड़ने के कारण व्रती और धार्मिक नियमों का पालन करने वाले लोग इस दिन अन्न (चावल) का सेवन नहीं करते. शास्त्रों के अनुसार एकादशी पर चावल का सेवन वर्जित माना गया है. ऐसे में मकर संक्रांति पर बनने वाली खिचड़ी, जिसमें चावल प्रमुख होता है, उसे खाने से परहेज किया जा रहा है. इसी वजह से कहा जा रहा है कि इस बार मकर संक्रांति की खिचड़ी पर ग्रहण लग गया है. हालांकि आप साबूदाना, दलिया या समा चावल की खिचड़ी बनाकर नियम पूरा कर सकते हैं.

जनवरी- गुरुवार को खिचड़ी वर्जित

काशी के विद्वानों के अनुसार, 15 जनवरी 2026 को भी मकर संक्रांति मनाई जाएगी. लेकिन गुरुवार होने के कारण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन भी खिचड़ी नहीं बनाई जाती है. दरअसल गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और गुरु ग्रह को समर्पित है. इस दिन पीली दान, हल्दी और चावल से बनी खिचड़ी खाने से गुरु ग्रह कमजोर हो सकता है, जिससे धन हानि या दरिद्रता आ सकती है.

इसलिए इस दिन चावल और केले जैसी पीली वस्तुओं से परहेज करने की सलाह दी जाती है. लेकिन गुरुवार को यदि मकर संक्रांति पड़ जाए तो आप खिचड़ी पकाकर खा सकते हैं. इसमें कोई दोष नहीं है. मकर संक्रांति पर बनी खिचड़ी प्रसाद के समान है और शास्त्रों में कहा गया है कि, प्रसाद सभी स्थिति में ग्रहण करने योग्य होता है. आप स्थानीय परंपरा और अपनी श्रद्धा के अनुसार निर्णय ले सकते हैं.

Thailand Accident: थाईलैंड में बड़ा रेल हादसा! चलती ट्रेन पर गिरी क्रेन

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पूर्वोत्तर थाईलैंड में बुधवार ( सुबह एक भीषण रेल हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. एक यात्री ट्रेन उस समय पटरी से उतर गई, जब एक निर्माणाधीन हाई-स्पीड रेल परियोजना की क्रेन ट्रेन की तीन बोगियों पर गिर पड़ी.

इस दर्दनाक दुर्घटना में अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 80 यात्री घायल बताए जा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आशंका है कि मलबे में अब भी कुछ शव फंसे हो सकते हैं, जिन्हें बाहर निकालने का प्रयास जारी है.

यह हादसा नाखोन राचासीमा प्रांत के सिखियो जिले में हुआ, जो राजधानी बैंकॉक से लगभग 230 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है. दुर्घटनाग्रस्त ट्रेन बैंकॉक से उबोन राचाथानी प्रांत की ओर जा रही थी. चश्मदीदों और पुलिस के मुताबिक, जब ट्रेन मौके से गुजर रही थी, तभी ऊपर बन रही हाई-स्पीड रेल लाइन की एक भारी क्रेन अचानक ढह गई और सीधे ट्रेन की तीन बोगियों पर जा गिरी. टक्कर के बाद ट्रेन पटरी से उतर गई और कुछ समय के लिए आग भी लग गई.

मलबे में अब भी फंसे शव, बचाव कार्य जोखिम भरा

स्थानीय पुलिस अधिकारी कर्नल थाचापोन चिननावोंग ने बताया कि अब तक 19 शव बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन कुछ शव अब भी ट्रेन की बोगियों के अंदर फंसे हुए हैं. क्रेन के हिलने की आशंका के चलते बचाव दल को फिलहाल पीछे हटना पड़ा है, क्योंकि स्थिति बेहद खतरनाक है. रेस्क्यू टीमें भारी मशीनरी की मदद से मलबा हटाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से काम बेहद सावधानी से किया जा रहा है.

195 यात्री थे सवार, दो बोगियों में सबसे ज्यादा नुकसान

थाईलैंड के परिवहन मंत्री फिफात राचकिटप्रकार्न ने एक बयान में कहा कि ट्रेन में कुल 195 यात्री सवार थे. उन्होंने बताया कि जिन यात्रियों की मौत हुई, वे उन दो बोगियों में थे, जिन पर क्रेन सीधे गिरी थी. मंत्री ने इस घटना की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं और कहा है कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

निर्माणाधीन हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर सवाल

जिस क्रेन के गिरने से यह हादसा हुआ, वह एक एलिवेटेड हाई-स्पीड रेल लाइन के निर्माण में लगी हुई थी. यह लाइन मौजूदा रेलवे ट्रैक के ऊपर बनाई जा रही थी. थाईलैंड में इस तरह की कई हाई-स्पीड रेल परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, लेकिन इस हादसे ने निर्माण सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

2026 में ‘कमल’ से सजेगा ब्रिक्स का मंच; विदेश मंत्री एस जयशंकर 

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भारत की अध्यक्षता में 2026 में ब्रिक्स का मंच कमल से सजने से जा रहा है। दरअसल विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को ब्रिक्स 2026 के लिए आधिकारिक लोगो और वेबसाइट लॉन्च की है। इस लोगो में मौजूद कमल सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।

लॉन्च के बाद विदेश मंत्री ने कहा है कि भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स समूह के जरिए वैश्विक कल्याण को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, खासकर ऐसे समय में जब समूह अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है।

बता दें कि दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाएं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स समूह की अगुवाई करती हैं। इसकी स्थापना साल 2006 में हुई थी। बीते कुछ सालों में समूह का तेजी से विस्तार हुआ जहां मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी पूर्ण सदस्य के रूप में ब्रिक्स में शामिल हो गए।

क्या कहता है नया लोगो?

अधिकारियों के मुताबिक नए लोगो की प्रेरणा कमल से ली गई है। यह भारत की गहरी सांस्कृतिक विरासत और मजबूती का प्रतीक है। लोगो की पंखुड़ियों में ब्रिक्स देशों के रंग दिखाए गए हैं, जो अलग अलग आवाजों को एक साझा मकसद के साथ जोड़ने का संदेश देते हैं। वहीं लोगो के बीच में नमस्कार का चिन्ह है, जो सम्मान और सहयोग की भावना को दर्शाता है। इसके साथ एक टैगलाइन भी रखी गई है, “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण।”

वेबसाइट भी लॉन्च

जयशंकर ने इस दौरान ब्रिक्स की नई वेबसाइट भी लॉन्च की। इसका मकसद ब्रिक्स से जुड़ी सभी जानकारियों के लिए एक केंद्रीय मंच बनाना है। अधिकारियों ने बताया कि इसमें ब्रिक्स की पहल, प्रोजेक्ट, कार्यक्रम और आधिकारिक दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध होगी।

ब्रिक्स की मजबूती से तिलमिलाया है अमेरिका

शुरूआत के बाद से ही ब्रिक्स एक अहम वैश्विक मंच के तौर पर उभरकर सामने है। फिलहाल इसमें कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं, जो दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं भारत की 2026 की अध्यक्षता में ब्रिक्स से वैश्विक स्तर पर सहयोग और प्रभाव और बढ़ने की उम्मीद है। समूह ने समय समय पर अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को सीधी चुनौती देने की भी कोशिश की है, जिससे अमेरिका तिलमिलाया हुआ है।

अब 10 मिनट में नहीं मिलेगी डिलीवरी, गिग वर्कर्स के लिए सरकार ने हटाई टाइम लिमिट की शर्त!

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देशभर के गिग वर्कर्स की हड़ताल का एक बड़ा असर हुआ है। अब आमलोगों को 10 मिनट के अंदर डिलीवरी की सुविधा नहीं मिल सकेगी। सरकार ने डिलीवरी ब्यॉज की सुरक्षा को देखते हुए इस टाइम लिमिट की शर्त हटा दी है।

श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के हस्तक्षेप के बाद क्विक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने अपने सभी ब्रांड से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, क्विक कॉमर्स कंपनी Blinkit जल्द ही अपने विज्ञापनों और प्रचार सामग्री से भी ’10 मिनट में डिलीवरी’ का दावा हटाने जा रही है।

ब्लिंकिट के बाद बाकी अन्य कंपनियों की ओर से भी जल्द ही इस तरह का ऐलान किया जा सकता है। केंद्रीय श्रम मंत्री ने ब्लिंकिट के अलावा जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी बात की है और उन्हें भी डिलीवरी ब्यॉज की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। यह फैसला सरकार के हस्तक्षेप और डिलीवरी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बाद लिया गया है।

डिलीवरी ब्यॉज पर अनावश्यक दबाव और बोझ

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने Blinkit, Zepto, Swiggy और Zomato जैसी बड़ी कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठकें कीं और उनसे कहा कि वे अपने **ब्रांड प्रचार में तय समय सीमा वाली डिलीवरी का उल्लेख न करें। सरकार की चिंता यह है कि बहुत कम समय में डिलीवरी का वादा डिलीवरी कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डाल सकता है और उनकी सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। बता दें कि गिग वर्कर्स के संगठन ने इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की स्थितियों, डिलीवरी के दबाव और सोशल सिक्योरिटी की कमी जैसे मुद्दे उठाए थे।

डिलीवरी धीमी नहीं होगी

सूत्रों ने बताया कि ’10 मिनट डिलीवरी’ का टैग हटाने का मतलब यह नहीं है कि अब डिलीवरी देर से होगी। बल्कि कंपनियां अब अपने प्रचार में निश्चित समय का वादा करने से बचेंगी, ताकि कर्मचारियों पर असुरक्षित तरीके से काम करने का दबाव न बने। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला क्विक कॉमर्स सेक्टर में एक बड़ा बदलाव दिखाता है, जहां प्रतिस्पर्धा के बावजूद अब कर्मचारी सुरक्षा और नियामक चिंताओं को अधिक महत्व दिया जा रहा है।

हड़ताल से बढ़ी बहस

देशभर में 25 और 31 दिसंबर को गिग और डिलीवरी कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। यूनियनों का आरोप था कि कंपनियां असुरक्षित डिलीवरी मॉडल अपना रही हैं और कर्मचारियों की कमाई घटा रही हैं। इसके अलावा गिग वर्कर्स को पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा नहीं दे रही हैं। हालांकि नए साल की पूर्व संध्या पर ज़्यादातर शहरों में डिलीवरी सेवाएं सामान्य रहीं, लेकिन इस मुद्दे पर बहस तेज़ हो गई।

वॉट्सऐप पर चल रहा चुनाव आयोग, हटा दिए शादीशुदा महिलाओं के नाम; ममता बनर्जी 

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लेकर बड़ा दावा किया है। कोलकाता में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बनर्जी ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया में उन महिलाओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए जिन्होंने अपने उपनाम बदले थे।

उन्होंने कहा कि शादी के बाद उपनाम बदलने वाली महिलाओं को वोट डालने का अधिकार ही नहीं दिया जा रहा है। चुनाव आयोग पर बरसते हुए सीएम बनर्जी ने कहा कि आयोग वॉट्सऐप पर ही चल रहा है। एसआईआर को लेकर जब देखो तब नियम ही बदल दिए जाते हैं।

बीजेपी का AI इस्तेमाल कर रहा चुनाव आयोग

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने भाजपा के एआई उपकरण का इस्तेमाल किया, जिससे एसआईआर डेटा में नामों के मेल न खाने की समस्या सामने आई। एसआईआर के दौरान, निर्वाचन आयोग ने उन विवाहित महिलाओं के नाम हटा दिए, जिन्होंने उपनाम बदल लिए थे। बनर्जी ने कहा कि आखिर मुख्य निर्वाचन आयुक्त यह कैसे तय कर सकते हैं कि मतदाता सूची का आधा हिस्सा हटाया जाए और किसकी सरकार बननी चाहिए।

निर्वाचन आयोग बीजेपी की कठपुतली- ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने कहा, निर्वाचन आयोग भाजपा के कठपुतली की तरह काम कर रहा है, बिना कारण बताए मनमाने ढंग से नामों को हटा रहा है। एसआईआर नियमों के अनुसार सूक्ष्म पर्यवेक्षकों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है, इन्हें केवल बंगाल में तैनात किया गया है। इसके अलावा अगर बिहार में अधिवास प्रमाण पत्र को अनुमति दी गई, तो बंगाल में क्यों नहीं दी गई?

एक दिन पहले ही ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपना पांचवां पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण “नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है, पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं और इसके परिणामस्वरूप उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।” ममता बनर्जी ने एसआईआर सुनवाई के दौरान मतदाताओं द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों की रसीद या पावती जारी न किए जाने को सबसे गंभीर खामियों में से एक बताया।

उन्होंने लिखा, “यह देखा गया है कि SIR के तहत होने वाली सुनवाइयों के दौरान मतदाता अपनी पात्रता के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज जमा कर रहे हैं। हालांकि, कई मामलों में इन दस्तावेजों की कोई उचित पावती या रसीद जारी नहीं की जा रही है।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यापन के चरण में इन दस्तावेजों को अक्सर “नहीं मिले” या “रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं” बताया जाता है, जिसके आधार पर मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं।

1KM जाएं या 400, AC-3 में देने होंगे 960 रुपये; वंदे भारत का किराया

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भारतीय रेलवे ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर महत्वपूर्ण और बड़ा अपडेट जारी किया है। बताया जा रहा है कि यह ट्रेन पूरी तरह से आम आदमी के लिए होगी और इसमें किसी भी प्रकार का वीआईपी कल्चर नहीं होगा।

इसका मतलब है कि अफसरों या मंत्रियों के लिए कोई विशेष कोटा नहीं होगा, यानी हर यात्री को समान सुविधाएं मिलेंगी।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन (RAC) या आंशिक रूप से कन्फर्म टिकटों का कोई प्रावधान नहीं होगा। केवल पूर्ण रूप से कन्फर्म टिकट ही जारी किए जाएंगे। साथ ही, न्यूनतम चार्जेबल दूरी 400 किलोमीटर होगी, यानी इससे कम दूरी की यात्रा पर भी कम से कम 400 किमी का किराया देना होगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 जनवरी 2026 को एसी 1, एसी 2 और एसी 3 श्रेणियों के संभावित किरायों की घोषणा की थी। 9 जनवरी को जारी परिपत्र में किराया संरचना का विस्तृत विवरण दिया गया है…

400 किमी तक (न्यूनतम किराया)

  • एसी 1: 1520 रुपये
  • एसी 2: 1240 रुपये
  • एसी 3: 960 रुपये

(यह किराया दूरी चाहे 1 किमी हो या 400 किमी, न्यूनतम यही लागू होगा।)

400 किमी से अधिक दूरी के लिए प्रति किलोमीटर दरें

  • एसी 1: 3.80 रुपये प्रति किमी
  • एसी 2: 3.10 रुपये प्रति किमी
  • एसी 3: 2.40 रुपये प्रति किमी

(जीएसटी अलग से लगेगा।) इन यात्रियों को मिलेगा आरक्षण

  • महिला आरक्षण
  • दिव्यांगजन (PwD) आरक्षण
  • वरिष्ठ नागरिक आरक्षण
  • ड्यूटी पास आरक्षण
  • इसके अलावा कोई अन्य आरक्षण कोटा नहीं होगा

कैसे किया जाएगा बर्थ आवंटन

अगर कोई यात्री ऐसे बच्चे के साथ यात्रा कर रहा है जिसके लिए अलग बर्थ की जरूरत नहीं, तो सिस्टम उपलब्धता के आधार पर नीचे की बर्थ आवंटित करेगा।

60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष यात्रियों और 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिला यात्रियों के लिए सिस्टम उपलब्धता के आधार पर नीचे की बर्थ देने का प्रयास करेगा।

टिकट रद्द करने पर रिफंड

रद्दीकरण के 24 घंटे के भीतर रिफंड प्रक्रिया शुरू करने के लिए सभी भुगतान केवल डिजिटल माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

काउंटर से टिकट खरीदते समय भी डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी जाएगी।

अगर कोई यात्री डिजिटल भुगतान नहीं कर पाता, तो रद्दीकरण पर सामान्य नियमों के अनुसार रिफंड मिलेगा।

वहीं अधिकारियों ने कहा कि इसमें मामूली संशोधन हो सकते हैं, जिनकी जानकारी जनता को दी जाएगी। नियमित यात्रियों के लिए व्यावसायिक संचालन लॉन्च के तुरंत बाद शुरू हो सकता है, और इसका विवरण आधिकारिक परिपत्र से जारी किया जाएगा।

US से फाइनल होने वाली है ट्रेड डील? एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के बीच विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगलवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात की है। दोनों नेताओं की बातचीत से संकेत यही मिल रहा हैं कि ट्रेड डील को लेकर जल्द ही दोनों देशों में बात बन सकती है।

जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं में व्यापार, क्रिटिल मिनरल्स, न्यूक्लियर एनर्जी और रक्षा मामलों को लेकर वार्ता हुई है। जयशंकर ने कहा कि मार्को रूबियो ने उनसे इन सभी मामलों में जुड़े रहने की बात कही है।

विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ उनकी सकारात्मक चर्चा हुई है। बता दें कि भारत और अमेरिका बीच ट्रेड डील अभी अटकी हुई है। बीते साल डोनाल्ड ट्रंप के पदभार संभालने के बाद ही दोनों देशों के बीच इसको लेकर वार्ता शुरू हो गई। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप बीच में ही टैरिफ की लड़ाई लड़ने लगे और भारत समेत दुनियाभर के देशों पर भारी भरकम टैरिफ थोप दिया। अमेरिका ने भारत पर भी 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया। इसी वजह से व्यापार वार्ता में भी ब्रेक लग गया।

अमेरिका के लिए बेहद अहम भारत

भारत में अमेरिका का राजदूत सर्जियो गोर ने बताया है कि दोनों नेताओं के बीच ट्रेड टॉक, जरूरी खनिजों और रक्षा मामलों को लेकर सकारात्मक चर्चा हुई है। इससे पहले ही गोर कह चुके हैं कि अमेरिका के लिए भारत बेहद जरूरी है। सर्जियो गोर जबसे भारत में राजदूत नियुक्त हुए हैं यहां के प्रति उनका रुख बहुत ही नर्म और सकारात्मक देखा गया है। ट्रंप के इस फैसले को भी अच्छे नजरिए से देखा जा रहा है।

कहां तक पहुंची है व्यापार वार्ता

सर्जियो गोर ने ही कहा था कि 13 जनवरी से दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता शुरू होगी। हालांकि वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि इस हफ्ते बातचीत होनी मु्श्किल ही है। हालांकि बातचीत का अगला दौर जल्द शुरू हो सकता है जिसमें टैरिफ को लेकर भी कोई हल निकाला जा सकता है। हां इतना जरूर संभव है कि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता हो जाए। दावा किया जा रहा है कि भारत ने अमेरिका के सामने एक अच्छी डील पेश की है और इसपर जल्द ही मुहर भी लग सकती है। अमेरिका इस डील को फाइनल करना चाहता है हालांकि फाइनल मंजूरी डोनाल्ड ट्रंप से ही मिलने वाली है।

ईरान के साथ बिजनेस करने वालों पर ट्रंप ने थोपा टैरिफ, भारत पर कितना असर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना का भारत पर लगभग कोई असर नहीं पड़ेगा। निर्यातकों के संगठन फियो ने यह बात कही।

भारतीय निर्यातक पहले से 50 प्रतिशत अमेरिकी शुल्क का सामना कर रहे हैं।

ट्रंप ने घोषणा की है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25 प्रतिशत शुल्क का भुगतान करना होगा। यह एक ऐसा कदम जो भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे ईरान के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों को प्रभावित कर सकता है।

निर्यातकों के संगठन ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस’ (फियो) ने मंगलवार को कहा कि भारतीय कंपनियां और बैंक, ईरान पर लगाए गए ओएफएसी (विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय) प्रतिबंधों का पूरी तरह से और स्पष्ट रूप से पालन कर रहे हैं। हम केवल मानवीय जरूरतों से जुड़े खाद्य पदार्थों और दवा क्षेत्र में ही काम कर रहे हैं जिनपर रोक नहीं है।

फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, ‘इसलिए भारत पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव की आशंका का कोई आधार नहीं है।’ भारत का ईरान के साथ 2024-25 (अप्रैल-मार्च) में कुल 1.68 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार था, जिसमें मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र से 1.24 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात शामिल था। भारत से ईरान को निर्यात किए जाने वाले प्रमुख उत्पाद में अनाज, पशु चारा, चाय व कॉफी, मसाले, फल व सब्जियां और दवाएं शामिल थे।

फियो ने कहा, ‘जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अधिकतर उत्पाद मानवीय जरूरतों से जुड़े हैं। ईरान के साथ व्यापार, अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के दायरे से बाहर है। इसलिए फियो का मानना ​​है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क का भारत पर लगभग कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।’

निर्यातकों के लिए यह घोषणा महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अतिरिक्त शुल्क के प्रभाव को लेकर सर्तक हैं। ईरान को भारत के प्रमुख निर्यातों में चावल, चाय, चीनी, दवाइयां, कृत्रिम रेशे, विद्युत मशीनरी और कृत्रिम आभूषण शामिल हैं जबकि प्रमुख आयातों में सूखे मेवे, अकार्बनिक/कार्बनिक रसायन और कांच के बर्तन शामिल हैं।

भारत-ईरान संबंधों का एक महत्वपूर्ण पहलू चाबहार बंदरगाह का संयुक्त विकास है। ऊर्जा से भरपूर ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित इस बंदरगाह का विकास भारत और ईरान द्वारा संपर्क एवं व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।

भारत का ईरान को माल निर्यात 2024-25 में 1.55 प्रतिशत बढ़कर 1.24 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया जबकि आयात 29.32 प्रतिशत घटकर 44.183 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया।