Home Blog Page 2415

कमलेश तिवारी पर किए गए थे चाकुओं से 15 वार फिर मारी गई थी एक गोली, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा…

0

कमलेश तिवारी पर 15 बार चाकुओं से हमला किया गया था। उसके बाद एक गोली भी मारी गई थी। इस बात का खुलासा पोस्टामार्टम में हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, चाकुओं के सभी 15 वार सिर्फ जबड़े से लेकर छाती के बीच में 10 सेंटीमीटर के भीतर किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कमलेश तिवारी के सीने और जबड़े पर चाकुओं से वार किया गया और फिर गला रेत दिया गया। इसके बाद चेहरे पर एक गोली भी मारी गई। सिर के पीछे हिस्से में 32 बोर की गोली फंसी मिली है।

बता दें कि कमलेश तिवारी की हत्या मामले में गुजरात आतंकवाद-रोधी दस्ता (एटीएस) ने मंगलवार को दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई है जब आरोपी राजस्थान से गुजरात जा रहे थे।

गुजरात पुलिस के मुताबिक एटीएस ने जिन दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान अशफाक हुसैन जाकिर हुसैन शेख (34) और मोइनुद्दीन खुर्शीद पठान (27) के रूप में की गई है। दोनों गुजरात-राजस्थान सीमा स्थित सूरत के शामलजी के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

गुजरात एटीएस के डीआईजी हिमांशु शुक्ला ने बताया कि सूचना मिली थी कि कमलेश तिवारी हत्याकांड के दोनों आरोपी गुजरात में दाखिल होने वाले हैं, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बॉर्डर पर टीम भेजी गई और उन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपियों ने पैसे खत्म होने के बाद परिवार से संपर्क किया था, जिसकी भनक एटीएस को लग गई थी, जिसके बाद टीम गठित कर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। डीआईजी हिमांशु शुक्ला की अगुवाई में पुलिस अधीक्षक बीपी रोजिया, एसीपी बीएस चावड़ा और अन्य पुलिस पदाधिकारियों की टीम ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस ने दोनों आरोपियों अशफाक और मोइनुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया है। सरकार की कार्रवाई पर कमलेश तिवारी की मां कुसुम ने खुशी जाहिर की है। कुसुम तिवारी ने कहा कि हम आरोपियों की गिरफ्तारी से बहुत खुश हैं। सभी को फांसी दे दी जानी चाहिए। मैं सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट हूं।

मात्र 35 रुपए का करें निवेश, LIC बोनस के साथ आपको देगी लाखों रुपए, हो जाएंगे मालामाल

0

LIC की जीवन प्रगति योजना एक एंडोमेंट योजना है जो एक ही समय पर आपको सुरक्षा के साथ साथ बचत भी प्रदान करती है। आप एक नियमित प्रीमियम का भुगतान अपने पसंदीदा अवधि तक करते हैं।इसके बाद आप लाइफ कवर (जीवन रक्षा) के पात्र हो जाते हैं, जिसे बेसिक सम अशुअर्ड (मूल बीमित रकम) कहा जाता है। यह लाइफ कवर हर 5 साल की अवधि पर बढ़ते रहता है। आप इस योजना में, दुर्घटना मृत्यु लाभ तथा दिव्यांगता राइडर का लाभ उठा सकते हैं. बस इसके लिए आपको एक मामूली सी अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा।

मैच्युरिटी लाभ: अगर पॉलिसी धारक पूरे पॉलिसी अवधि तक जीवित रहता है, तो पॉलिसी (योजना) के अंत में उसे, मूल बीमित रकम + सिंपल रिवर्सनरी बोनस(जमा हुआ बोनस) + फाइनल एडीशन बोनस (अगर कुछ है तो) का भुगतान किया जाएगा।

मृत्यु लाभ: अगर पॉलिसी अवधि के दौरान पॉलिसी धारक की मृत्यु हो जाती है तो उसके नॉमिनी को मृत्यु पर बीमित रकम + सिंपल रिवर्सनरी बोनस(जमा हुआ बोनस) + फाइनल एडीशन बोनस(अगर कुछ है तो) का भुगतान किया जाएगा।

फाइनल एडीशन बोनस: इस योजना के अंतर्गत आपको एलआईसी द्वारा योजना के अंत में एक अतिरिक्त बोनस दिया जाता है। यह एक प्रकार का लॉयल्टी बोनस होता है, जो आपको एलआईसी के प्रति वफादार रहने के लिए अर्थात लंबे समय तक योजना में बने रहने के लिए दिया जाता है। (15 वर्ष से अधिक की योजनाओं के किए) लॉयल्टी बोनस की घोषणा भी हर वर्ष एलआईसी द्वारा की जाती है।

एलआईसी जीवन प्रगति को कैसे कैल्कुलेट करें

(A)मैच्योरिटी(परिपक्वता) लाभ: पॉलिसी अवधि के अंत में, अक्षय को मूल बीमित रकम + सिंपल रिवर्सनरी बोनस(जमा हुआ बोनस) + फाइनल एडीशन बोनस(अगर कुछ है तो) का भुगतान होगा. इसके आधार पर,

मूल बीमित रकम = Rs. 2,50,000/-

(B) सिंपल रिवर्सनरी बोनस = Rs. 10,500 x 20 वर्ष = Rs. 2,10,000/-

यहां पर हमने माना है कि, एलआईसी प्रत्येक वर्ष प्रति 1000 रुपये के बीमित रकम पर 42 रुपये का बोनस देती है। इस प्रकार हर वर्ष मिलने वाला बोनस = 42 x 2,50,000/1,000 = Rs. 10,500/-

(C)फाइनल एडीशन बोनस = Rs. 12,500/-

यहां पर हमने फाइनल एडीशन बोनस की दर प्रति Rs. 1000 के बीमित रकम पर Rs. 50 रखा है।

अर्थात, 50 x 2,50,000/1,000 = Rs. 12,500

तो अक्षय को मैच्युरिटी रकम के रूप में, (A) + (B) + (C) = Rs. 2,50,000 + Rs. 2,10,000 + Rs. 12,500 = Rs. 4,72,500/-

तो जीवन प्रगति के इस उदहारण में मैच्युरिटी लाभ के रूप में अक्षय को = Rs. 4,72,500/-

एलआईसी जीवन प्रगति योजना में सहभागी होने की शर्तें

उम्र: 12 से 45 वर्ष

पॉलिसी अवधि: 12 से 20 वर्ष

मैच्योरिटी की अधिकतम उम्र: 65 वर्ष

कवर राशि न्यूनतम – Rs. 1,50,000 अधिकतम – कोई सीमा नहीं

एलआईसी जीवन प्रगति योजना में सरेंडर वैल्यू

अगर पॉलिसी धारक ने 3 साल तक प्रीमियम भरा है तो वह पॉलिसी को सरेंडर कर सकता है और सरेंडर मुल्य प्राप्त कर सकता है। इस कैल्कुलेटर का उपयोग कर आप एलआईसी जीवन प्रगति योजना में मिलनेवाले सरेंडर वैल्यू का निर्धारण कर सकते हैं।

सड़क पर चलते-चलते अचानक जमीन में समा गईं दो महिलाएं, वीडियो देख उड़ जाएंगे होश…

0

बीते सप्ताह तुर्की से एक वीडियो सामने आया और देखते देखते वायरल हो गया। इस वीडियो में जो कुछ भी नजर आया वो किसी को भी हिला देने के लिए काफी था। शायद इसीलिए उसकी शुरूआत में चेतावनी भी लिखी गई कि देखने वालों को ये तस्वीरें विचलित कर सकती हैं। मामला बीते सप्ताह बुधवार को तुर्की के शहर दियरबकिर का बताया जा रहा है। ये एक सीसीटीवी फुटेज है जिसमें सड़क पर हंसते हुए बात करते जा रही दो महिलाये अचानक जमीन में धंसती नजर आ रही हैं।

मामले का वीडियो टर्किश सिक्योरिटी फोर्स ने जारी किया और इसमें दिखाई जा रही दोनों महिलायें चिकित्सा जगत से जुड़ी हैं। इनमें से एक नाम सुजैन कुदै है जो पेशे से डाक्टर हैं और दूसरी एक नर्स हैं जिनका नाम ओजलेम दयमाज बताया गया है। दोनों के साथ ये डरावनी घटना बुधवार की शाम 4 बजे हुई जब संभवत वे अपनी ड्यूटी खत्म करके जा रही थीं।

सीसीटीवी फुटेज से पता चल रहा है कि घटना वाले दिन शाम को डॉक्टर सुजैन और दयमाज एक सड़क पर हंस-हंसकर बातें करती हुई जा रही थीं। उसी उमय अचानक सड़क धंसी और दोनों नीचे चली गई। ये देख कर वहां मौजूद लोगों में हलचल मच गई और वे दौड़ कर घटनास्थल पर पहुंचे।

जिसके बाद कुछ लोगों ने गढ्ढे में नीचे उतरकर महिलाओं की तलाश की। उन लोगों को वे उनके साथ ही गिरी भारी चीज के नीचे दबी मिलीं। बाद में उन्हें सही सलामत ऊपर निकाल लिया गया और अस्पताल पहुंचाया गया। खबरों के मुताबिक उनको मामूली चोटें आई थीं जिसके इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। फिल्हाल घटना स्थल को पुलिस ने सील कर दिया है और निर्माण कार्य शुरू हो गया है, जिसके पूरा होने के बाद सड़क को दोबारा खोल दिया जाएगा।

तिहाड़ जाकर डीके शिवकुमार से मिलीं सोनिया गांधी…

0

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की वार्षिक आम बैठक (एजीएम) मुंबई में शुरू हो चुकी है. एजीएम में बोर्ड के नए अध्यक्ष समेत पदाधिकारियों का चुनाव होना है. पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली का अध्यक्ष के तौर पर औपचारिक ऐलान होगा. इसके साथ ही बोर्ड में चला आ रहा प्रशासकों की समिति (सीओए) का करीब 3 साल का शासन भी खत्म होगा

जम्मू कश्मीर के DGP दिलबाग सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस

सोनिया गांधी ने डीके शिवकुमार से की मुलाकात

कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी अपनी पार्टी के नेता डीके शिवकुमार से मिलने तिहाड़ जेल पहुंचीं. आतंकियों की नावेद टाक, हामिद लोन और जुनैद भट के रूप में पहचान हुई है. मौके से हथियार बरामद किए गए है. साथ ही मामले को दर्ज किया गया है.

छत्तीसगढ़ : राज्यपाल ने जागरूकता अभियान चलाने के दिए निर्देश…

0

राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज ग्राम सुपेबेड़ा में जिला अधिकारियों की बैठक में कहा कि ग्राम पंचायत के माध्यम से किडनी पीड़ित परिवारों की सूची बनाई जाए। उन्होंने यहां जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। इस अभियान के माध्यम से वे खानपान एवं दवाइयों सम्बधी जानकारी ग्रामीणों को प्रदान करें। उन्होंने अधिकारियों से तेल नदी पर पुल, इंदागांव सबस्टेशन, वाटर फिल्टर प्लांट कार्य को जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा स्वास्थ्य मंत्री श्री टी. एस. सिंहदेव, महासमुंद लोकसभा सांसद श्री चुन्नीलाल साहू, बिन्द्रा नवागढ़ के विधायक श्री डमरूधर पुजारी, राज्यपाल के सचिव श्री सोनमणि बोरा और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

छत्तीसगढ़ : राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने श्री अमित शाह को दी जन्मदिन की हार्दिक बधाई…

0

राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में श्री शाह के सदैव स्वस्थ रहने और उनके दीर्घायु जीवन की भी कामना की है।

छत्तीसगढ़ – गंदा पानी कपड़े से छानकर पी रहे स्कूली बच्चे, दो साल से हैंडपंप खराब…

0

छत्तीसगढ़ में सरकार स्कूली बच्चों को मध्याह्न भोजन में पौष्टिक खाना देने की योजना चला रही है। जशपुर जिले के एक स्कूल में बच्चे जो पानी पी रहे हैं, उसे पीने की कल्पना शहरों में बैठा कोई भी व्यक्ति नहीं कर सकता। बच्चे स्कूल पास बने एक गड्‌ढे और कुएं में जमा गंदा पानी पी रहे हैं। मध्याह्न भोजन के बाद थाली और हाथ इसी में धोते हैं, इसके बाद कपड़े से यही पानी छानकर पीते हैं। यह मजबूरी इस वजह से क्योंकि स्कूल में लगा हैंडपंप दो सालों से खराब पड़ा है।

69 बच्चों के लिए एक टीचर

  1. इस स्कूल का नाम शासकीय प्राथमिक शाला भट्ठा है। यहां 69 बच्चे पढ़ते हैं। 5वीं कक्षा तक के स्कूल में टीचर एक ही है। स्कूल में कम से कम 3 टीचर होने चाहिए] लेकिन एक ही टीचर के भरोसे बच्चों का भविष्य है। गंदे पानी की समस्या पर टीचर हरिशंकर सिदार ने बताया कि दो सालों से अधिकारियों और सरपंच को इसकी लिखित जानकारी दी जा रही है] लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। गांव में भी पानी की समस्या है]आम लोग भी इसी पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।
  2. जिला शिक्षा अधिकारी एन कुजूर ने बताया कि बच्चों को गंदा पानी मिलने की जानकारी इससे पहले मुझे नहीं थी। मीडिया की वजह से जानकारी मिली है] पीएचई के अधिकारियों से बात करके खराब पड़े हैंड पंप को बनवाया जाएगा। जशपुर विधायक विनय भगत ने कहा कि आज के दौर में स्कूली बच्चे गड्‌ढे और कुएं का गंदा पानी पी रहे हैं यह दुर्भाग्य जनक है। मैं जल्द ही गांव जाकर लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्या को दूर करने का प्रयास करुंगा।

छत्तीसगढ़ – नशीली गोलियों से ऐसी बर्बादी… हर शहर में नाबालिग नशेड़ियों की बढ़ती संख्या…

0

रायगढ़. जिले में लगातार नशीली दवाएं जब्त की जा रही है। राशन दुकान, पान दुकान, कुएं के अंदर, मोहल्लों में पुलिस ने माल बरामद किया है। इस साल ड्रग विभाग व पुलिस ने 70 से ज्यादा मामले पकड़े हैं। सबसे बड़ी कार्रवाई पुलिस ने की है। ड्रग विभाग की कार्रवाई मेडिकल स्टोर पर कम ही रही है। पुलिस ने किराना स्टोर, पान ठेलों और ग्रामीण इलाकों में खेतों में कार्रवाई की हैं। चार सालों में 150 से अधिक बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। इसकी रोकथाम के लिए प्रशासन कोई प्रयास नहीं कर पा रहा है। बड़े से लेकर बच्चे भी चपेट में आ रहे हैं।

केस -1 | मोहल्लों और घरों तक पहुंच रही
पुलिस ने 2 अक्टूबर को लैलूंगा वार्ड नंबर 7 में स्थित किराना दुकान से 4 कार्टून में रखी 475 नग कोरेक्स की सीसी जब्त की थी। आरोपी ललित गोयल दुकान से आसपास के ग्रामीण युवक कोरेक्स बेचता था।
केस -2 | कुएं के अंदर छिपाया था कोरेक्स
सरिया पुलिस ने 13 अक्टूबर को श्रीकिशन अग्रवाल के पास से लगभग 1400 नग कोरेक्स की सीसी मिली थी। आरोपी ने कुएं के अंदर माल को छिपाकर रखा था। आरोपी अपने एजेंट के जरिए आसपास के क्षेत्र में दवा की सप्लाई करता था। आरोपी ने रायपुर से माल लाने की बात कही थी।
केस -3 | पान ठेले में मिली थीं 200 बॉटल
पान ठेले में बिक रहे कोरेक्स में ड्रग विभाग ने पकड़ा ड्रग विभाग की टीम ने लगभग 15 दिन पहले ही लैलूंगा में पान ठेले में बिक रहे 200 बॉटल कोरेक्स की बॉटल को पकड़ा था। कार्रवाई के बाद ड्रग विभाग ने पुलिस को सौंप दिया था।
केस -4 | मेडिकल स्टोर से भी पकड़ी गईं  
ड्रग विभाग ने लैलूंगा के ही जय मेडिकल में रेड की थी। मेडिकल में कोरेक्स सीरप, क्लोनाजेपम, टैबलेट और एक गर्भपात करने की किट मिली थी। मेडिकल का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया ड्रग विभाग कर रही है।

रायपुर

कानून सख्त हो ताकि नशीली दवा बेचने से पहले हजार बार सोचें 
नशीली दवाइयों की बिक्री और फैलाव रोकने का एक ही तरीका है, इतना कड़ा कानून बनाना चाहिए कि कोई इन्हें बेचने के बारे में सोच भी न सकें। अभी नशीली दवा बेचने वालों को भी कड़ी सजा नहीं मिल पा रही है, और जिन मेडिकल स्टोर्स में ऐसी दवाइयां पकड़ी जा रही हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। जिन मेडिकल स्टोर्स में नशीली दवाओं का हिसाब गड़बड़ मिला है, उनका लाइसेंस केवल कुछ समय के लिए ही निलंबित किया जा रहा है। इस तरह, कार्रवाईयां खानापूर्ति के सिवा कुछ और नहीं रह गई हैं। जब तक कानून सख्त नहीं होगा, ऐसे लोग भयभीत नहीं होंगे। सख्ती हुई तो ऐसी दवाइयां बेचने वाले भी गड़बड़ी करने की नहीं सोचेंगे। ऐसी दवा जिनमें नशे की मात्रा है, वो डाक्टरों की पर्ची के बिना किसी भी सूरत में नहीं मिलनी चाहिए, वह भी एक पर्ची से एक ही बार। जहां तक अस्पतालों का सवाल है, वहां ऐसे प्रावधान जरूरी है कि मरीजों का जीवन बचाने के लिए डाक्टर बिना किसी बंधन के कोई भी फैसला ले सकें।

सरेअाम नशे के अड्डे लेकिन मात्रा बहुत कम : अश्वनीनगर से महादेव घाट जाने वाली भीड़ भरी सड़क के फुटपाथ पर 16-17 साल के लड़के सालूशन का नशा करते मिले। ऐसा नजारा शहर की कई सड़कों पर नजर आता है। स्टेशन रोड हो या गुढ़ियारी, खमतराई, कुकुरबाड़ा, कबीरनगर, शिवानंदनगर, पंडरी-मोवा, कुंदरापारा, बैजनाथपारा, पुरानीबस्ती और आजाद चौक, रोड के किनारे लड़कों का दल ऐसे ही नशा करते साफ दिख जाता है। पुलिस लगातार कार्रवाई भी नहीं कर पाती, क्योंकि सालूशन की जितनी मात्रा मिलती है, उस पर कोई बड़ी धारा के तहत केस नहीं बनता।

केस -1 | बच्चे को लेकर पत्नी चली गई, कोर्ट में तलाक का केस किया
राजधानी का कुशाल एक प्लेसमेंट कंपनी में कर्मचारी था। उसने 28 साल की उम्र में शादी की। दो साल तक सबकुछ अच्छा रहा। एक बेटी भी हुई। अचानक उसे सालूशन की लत लग गई। काम में भी वो नशा करता और घर पर भी। पत्नी से झगड़ा होने लगा। आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। आखिर में पत्नी बेटी के साथ अलग हो गई। तलाक के लिए कोर्ट में केस भी लगा दिया। 

केस -2 | दो साल की बेटी की जान लेने की कोशिश
खम्हारडीह इलाके का 30 साल का राजू (परिवर्तित नाम) सुलभ शौचालय में मैनेजर था। 26 साल में शादी हुई और सालभर बाद बेटी गई। दो साल तक सब ठीक चला, फिर नशे की लग लगी तो पत्नी से मारपीट करने लगा। एक दिन परिजनों ने उसे अपनी दो साल की बेटी का हाथ चाकू से काटने की कोशिश करते हुए देखा तो सब घबराए। इसके बाद निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

बिलासपुर

मेडिकल-बाजारों में 10 साल से बिक रही नशीली दवा, संचालक कहते हैं- कोई पूछने नहीं आता 
बिलासपुर। बिलासपुर-रतनपुर मार्ग पर हाईवे से सटा गांव है सेंदरी। आबादी कोई 3000। मेंटल अस्पताल यहीं है, इसलिए पास के मेडिकल स्टोर में बिना पर्ची मांगे नींद और नशे की दवाएं खुलेआम बेच रहे। सड़क के किनारे एक अपना ढाबा खुला है। इसके कैंपस के भीतर राघवेंद्र मेडिकल स्टोर है। दुकान के बाहर किसी तरह का बोर्ड नहीं है पर लोग इसे इसी नाम से जानते हैं। गांव वालों से पूछने पर कि नशे या नींद की दवा कहां मिलेगी? यहीं का पता देते हैं। श्रद्धा मेडिकल स्टोर संचालित है। वहां भी कोडीन की शीशी ली गई।

केस -1 | घर का कमाऊ बेटा नशेड़ी, 65 साल की मां कर रही लालन पालन
सुशीला कटेलिया 65 साल की उम्र में अपने तीनों बच्चों की लाठी है। 45 वर्षीय बड़ा बेटा राजू मानसिक रूप से कमजोर है। उसने नाइट्रावेल और कोडीन जैसी दवाएं लेनी शुरू कर दी। इसके चलते ही उसका दिमागी संतुलन बिगड़ गया। मंझले बेटे रवि को लकवा है। छोटे बेटे रवि को ब्रेन हेमरेज है। दवाइयों के असर से वह कमजोर हो चुका है। अपने बेटों को पालने के लिए मिठाई के डिब्बे बनाती है। जो कमाती है और जितना समय बचता है, उसमें बच्चों का काम और इलाज।
केस -2 | बेटा नशे के लिए तड़पता है, पैरेंट्स का जीवन दुश्वार
तालापारा के 21 वर्षीय राकेश पटेल को 3 साल पहले कोडीन के नशे की लत लगी। परिजनों से छुपाने और दूसरे मादक पदार्थ की बदबू से बचने इसे लेना शुरू किया। कुछ दिनों बाद यह लत लग गई। पढ़ाई छूट गई। सबकुछ तबाह हो गया। घरवालों ने उसे रिहेबलिटेशन सेंटर भेजा है, जहां उसकी हालत से सभी को निराशा हो रही। पूरा परिवार परेशान है। हर दिन उन्हें परेशानी हो रही। पिता विवेक पटेल कहते हैं बेटा हाथ से निकल चुका है। फिर भी प्रयास कर रहे हैं। उसे सही रास्ते पर लाने की। ईश्वर करे-सब ठीक हो। 

दुर्ग

ये 3 केस बता रहे कि नशे की गोलियों ने किस तरह सबकुछ बर्बाद कर दिया… 

पांच लाख रुपए महीने तक थी कमाई, नशे ने पांच हजार तक पहुंचा दिया मेर पिता जी ट्रांसपोर्टर थे। घर में अपनी दो ट्रक, एक स्कार्पियो और एक छोटी कार थी। आमदनी इतनी अच्छी थी कि पूरा परिवार मजे से रह रहा था। मेरे दोनों बच्चे शहर के अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे। पांच साल पहले मेरे पिता जी की मौत क्या हुई ट्रांसपोर्ट का काम मेरे कंधों पर आ गया। काम मैं अच्छे से संभाल लिया। मासिक टर्न-ओवर करीब-करीब पांच लाख रुपए तक पहुंच गया था। एक-दो बार ट्रक ड्राइवरों के साथ मै भी माल गिराने गया तो उनको नशे की गोलियां खाते देखा तो मै भी एक बार गोलियां खा लिया। इसके बाद से जब ड्राइवर मुझसे मिलने आते मेरे लिए गोलियां लेकर आते थे। धीरे-धीरे मैं उन्हें इसके लिए पैसे देने लगा। एक साल के भीतर इन गोलियों की लत ऐसी लगी कि रोज इसके लिए मुझे 5000 रुपए तक खर्च होने लगे। इस नशे की पूर्ति के लिए कर्जदार होता गया। इस क्रम में कर्ज देने के लिए एक ट्रक बेचनी पड़ी। एक साल नहीं बीता कि बच्चों को भी सामान्य स्कूल में डालना पड़ गया। बीते चार सालों में नशे के कारण मेरी दो ट्रके, एक स्कार्पियों और एक घरेलू कार बिक गई। मेरी मजबूरी का फायदा उठाते हुए नशा के कारोबारी मुझसे ही इसका धंधा कराने लगे। आज जब मै नशा छोड़ना चाह रहा हूं तो शारीरिक दिक्कतें हो रही हैं। मेरे नशे के कारण मेरा कारोबार और परिवार दोनों बर्बाद हो गया है।  – संजय सिंह., निवासी पॉवर हाउस।

200 लोगों को रोज रोजगार देता था, आज खुद बेरोजगार हूं…
मैं बीएसपी में ठेकेदार था। सौ-डेढ़ सौ मजदूर मेरे साथ थे। एक भाई की पढ़ाई और घर के सभी खर्च मैं ही देखता था। तीन भाईयों में बड़ा होने के नाते सबकुछ मेरे ही कंधों पर था। ठेकेदारी से महीने में औसतन लाखों रुपए लेने देने पड़ते थे। कभी-कभार दोस्तों के साथ बीयर वगैरह भी ले लेता था। एक दिन एक मजदूर से बीयर मंगाया तो वह उसके साथ ही नशे की गोलियां भी ले आया। उसी के साथ मैं पहली बार नशे की गोलियां खाया। आगे मैं उससे जब भी सिगरेट मंगाता, वह गोलियां भी ले आता। धीरे-ध्ीरे मैं गोलियां लेने का आदी हो गया। नशे की पूर्ति के लिए प्रतिदिन 5000 रुपए खर्च होने लगे। कुछ महीने मजदूरों के वेतन से कटौती कर नशा किया लेकिन परिवार का खर्च बढ़ जाने से समस्या पैदा होने लगी। इसी क्रम में कई शिकायते हो गई तो कांट्रेक्ट खत्म हो गया। पैसे का कोई स्रोत नहीं था इसलिए सालभर में जमा पूंजी खत्म हो गई। आज मुझे ठेकेदारी छोड़ नशे का कारोबार करना पड़ रहा है। कारोबारी सेलिंग के एवज में नशे की गोलियां देते हैं। – इमरान खान, केलाबाड़ी दुर्ग

सब्जी का थोक व्यापारी था, अब ऑटो चलाकर फिर शुरू की जिंदगी
मैं सब्जी का धंधा करता था। पान तक नहीं खाता था। अन्य कारोबारियों को बीड़ी, सिगरेट पीते देख शौकिया एक दो बार मै भी सिगरेट पी लिया। आगे चलकर सिगरेट की लेने देन शुरू हो गई। इसी क्रम में कुछ लोगों के साथ बीयर वगैरह पीना भी शुरू हो गया। अबतक नशा से घर परिवार में कोई परेशानी नहीं हो रही थी। एक बार सब्जी लेकर उड़ीसा क्या जाना हुआ गाड़ी के ड्राइवर ने मुझे नशे की गोलियां खीला दी। इसके बाद से जब भी वह मिलता मुझे गाेलियां दे देता। फिर क्या मै भी उसके लिए गोलियां खरीदने लगा। यही से मेरी बर्बादी शुरू हुई। सब्जी का धंधा जो कि हर माह मै 4 से 5 लाख तक कर लेता था वह छह माह में घटकर 50 हजार से भी कम हो गया। इतने कम पैसे में आगे चलकर नशा और परिवार दोनों का खर्च मैनेज करने में मुश्किलों होने लगी। कुछ और दिनों में सब्जी का धंधा मुझे बंद करना पड़ा। दिन भर नशे की गोलियों के लिए दर-दर भटकने लगा। घर वाले घर से निकाल दिए। आज नशे की गोलियों के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जाता हूं। कुछ मेरी इस मजबूरी का फायदा उठाते हैं। सबकुछ बर्बाद हो गया है।

छत्तीसगढ़ – जीवनरक्षा की अाड़ में नशीली दवाओं का गोरखधंधा इस घातक नशे के निशाने पर नाबालिग और किशोर…

0

नशीली टैबलेट और साल्यूशन जैसे पदार्थ राजधानी समेत प्रदेश के हर शहर में सिर्फ युवाओं को ही निशाना बनाने लगे हैं। रायपुर, रायगढ़, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई में, वहां एक ही बात कॉमन मिली और वह थी, नशेड़ियों की बेहद कम उम्र। पड़ताल के दौरान भास्कर ने पाया कि गोलियाें और साल्यूशन के अधिकांश नशेड़ियों की उम्र 12 साल से लेकर 30 साल तक ही है। पुलिस अफसरों का दावा है कि नशे में किए गए अपराधाें में जितने लोग भी पकड़े जा रहे हैं, उनमें ज्यादातर नाबालिग हैं और इस कद्र नशे की गिरफ्त में हैं कि कई बार उन्हें संयत रखने के लिए पुलिस ही खामोशी से ऐसी गोलियां थानों में ही खिला देती है। 


पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि पुख्ता और कड़ी कार्रवाई का प्रावधान ही नहीं होना ऐसी दवाइयों की तस्करी को और बढ़ा रहा है। कई नशेड़ियों ने बताया कि पुलिस उन्हें एक या ज्यादा बार पकड़ चुकी है, लेकिन एक-दो टैबलेट या साल्यूशन मिलने की वजह से उनके खिलाफ कभी कोई केस नहीं बना। आमतौर से सौ दो सौ के फाइन के साथ ही ऐसे नशेड़ियाें को छोड़ना फोर्स की भी विवशता हो गई है। कुछ पुलिस अफसरों का कहना है कि ऐसी दवाइयों के पकड़े जाने के मामले में जब तक नार्कोटिक्स एक्ट जैसी कार्रवाई नहीं होगी, जैसी दस-बीस रुपए के गांजे में हो जाती है, तब तक ऐसी दवाइयों के फैलाव को रोकने का कोई कारगर रास्ता बन पाना मुश्किल है।

जिन दवाइयों में नशा है, उनकी बिक्री का कानून बेहद सख्त है। डाक्टरों की पर्ची के बिना ये दवाइयां नहीं मिल सकतीं। लेकिन प्रदेश के चार प्रमुख शहरों में भास्कर टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि सारी सख्ती कागजी है। नशेड़ियों को एक तो ऐसी टैबलेट, सिरप या सालूशन अासानी से मिल रहे हैं। दूसरा, अगर वे पकड़े भी गए तो सौ-पचास रुपए के जुर्माने में छोड़ने के अलावा पुलिस के पास विकल्प नहीं है। यही वजह है कि ये नशा नाबालिगों तक में बुरी तरह फैल रहा है। हालात ये हैं कि राजधानी समेत अधिकांश जगह छोटी-बड़ी वारदातों में पकड़े गए कम उम्र के अारोपी इन्हीं दवाओं के नशे में मिल रहे हैं। वह भी इतने हिंसक कि नजर चूकी तो थाने या हवालातों में ही कुछ भी करने पर अामादा हो रहे हैं।

नशे का 18 साल से अादी, अब पत्नी भी नशेड़ी : रायपुर स्टेशन के अासपास रहने वाला कैलाश (परिवर्तित नाम) 5 साल की उम्र से नशे का अादी है। माता-पिता के मरने के बाद सौतेली मां व भाई ने घर से निकाल दिया। तब से स्टेशन में रहने लगा और अब 24 साल का है। तीन साल पहले उसने सुनीता (परिवर्तित नाम) से शादी की। घुमंतू जीवन के दौरान दोनों मिले और शादी कर ली। अब दोनों ही सालूशन और नशीली दवाइयों का नशा करते हैं। दोनों हर दिन खाली बोतलें जमा करते हैं। इसे बेचकर नशे का सामान खरीदते हैं। स्टेशन में लगने वाले भंडारे में खाना खा लेते हैं। नशीली चीजों के लिए इन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती। सप्लायर आता है और खास जगह बुलाकर नशे का सामान बेचकर चला जाता है। यह सालों से चल रहा है, हालांकि सुनीता अब बीमार रहने लगी है।

40% वारदातें नशे की हालत में, इसमें भी 25% अपराधी नाबालिग : पिछले नौ महीने में शहर में हुए अपराध पर नजर डाली जाए तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस अवधि में 29 हत्याएं, 40 हत्या की कोशिश और 55 से ज्यादा लूटपाट की वारदातें दर्ज की गईं हैं। इसमें 40 फीसदी वारदात आरोपियों ने नशे के हालत में की हैं। इसमें 25 फीसदी आरोपी नाबालिग हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नशे के कारण वारदातें बढ़ते ही जा रही है। नशे में अपराधी खुद पर काबू नहीं रख पाते और घटना को अंजाम देते हैं। कई बार तो पुलिस की कस्टडी में नशा नहीं मिलने से स्थिति बिगड़ने लगती है, तब डाक्टर की सलाह पर पुलिस खुद ही नशे का डोज देती है।


फोर्स ने 9 माह में 150 नशेड़ी पकड़े, सभी सौ-सौ रु. जुर्माना भरकर छूटे  : रेलवे एक्ट-145 के अनुसार स्टेशन परिसर व ट्रेनों में न्यूसेंस करने व नशे की हालत में पकड़े जाने वालों पर कानूनी कार्रवाई होती है। आरपीएफ ने जनवरी से सितंबर तक करीब साढ़े तीन सौ ऐसे लोगों पर कार्रवाई की है। इसमें 136 ऐसे युवक व किशोर थे, जो नशे की हालत में पकड़े गए हैं। लेकिन विडंबना यह है कि नशेडि़यों को मात्र सौ रुपए बतौर जुर्माना करके छोड़ दिया गया। इसके बाद फिर से ये लोग नशे में लिप्त हो जाते हैं। रायपुर पोस्ट प्रभारी दिवाकर मिश्रा ने बताया कि कानून के प्रावधानों के मुताबिक नशेडिय़ों पर कार्रवाई की जाती है। समय-समय पर इनकी काउंसिलिंग करने की बात भी उन्होंने कही। हालांकि इसके बाद भी नशे की गिरफ्त से युवकों व किशोरों को दूर करने कोई ठोस कानूनी उपाय नहीं है।

हवालात में भी हिंसक होकर सिर पटकने लगते हैं नशेड़ी : क्राइम ब्रांच में नशेड़ियों को बरसों तक डील कर चुके इंस्पेक्टर रमाकांत साहू की जुबानी- ज्यादातर अपराधी सालूशन तथा नशीली गोलियों के नशे में फंसे हैं। अाजकल चाकूबाजी, लूटपाट, चेनस्नेचिंग, पॉकेटमारी और मारपीट में पकड़े जाने वाले बदमाश नशे में ही मिलते हैं। इन अपराधियों से इंट्रोगेशन करना या थाने में बिठाना अासान नहीं है, क्योंकि ये होश में नहीं रहते। कई बदमाश को हवालात के भीतर सिर पटकने लगते हैं, खुद को चोट पहुंचाने की कोशिश करते हैं, गालियां देते हैं। इसलिए रखते समय ध्यान भटकाने के लिए फिल्में दिखाते हैं। कुछ बदमाश हर चार-पांच घंटे में नशा करने वाले होते हैं। डोज नहीं मिलने पर वे बेकाबू हो जाते है। पागलों जैसी हरकतें हैं, उत्पात मचाते है। उन्हें काबू में करने के लिए डॉक्टर या नशामुक्ति केंद्र वालों की मदद ली जाती है। अधिकांशत: बदमाशों के नशा उतरने का इंतजार किया जाता है। इसके लिए उन्हें नहलाया जाता है या फिर खट्टी चीजे दी जाती हैं। नशेड़ियों से पूछताछ के लिए स्टाफ को भी ट्रेनिंग दी जाती है। क्योंकि नशे में बदमाश गाली गलौज और उन्हें मारने-पिटने के लिए उकसाने की कोशिश करते है। इसलिए स्टाफ को धैर्य रखना सिखाया जाता है। ऐसे बदमाश के लिए 24 घंटे दो स्टाफ बैठे रहते हैं। जरूरत होने पर उन्हें अस्पताल या नशा मुक्ति केंद्र भेजते हैं

छत्तीसगढ़ : राज्यपाल बोलीं- सरकार अच्छी है, किडनी पीड़ितों की देखभाल अब मेरा भी जिम्मा…

0

राज्यपाल अनुसुइया उइके किडनी पीड़ितों का हाल जानने मंगलवार को 11 बजे स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के साथ सुपेबेड़ी पहुंचीं। हालात जानने के बाद राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री व संवेदनशील कांग्रेस सरकार अपने स्तर पर बेहतर काम कर रही है, मैंने भी आज सुपेबेड़ा को करीब से देखा, अब मेरी भी जिम्मेदारी कि पीडितों को पूरी सुविधा मिले। उन्होंने कोई समस्या आने पर ग्रामीणों से सीधे राजभवन संपर्क करने को कहा। 


स्वागत को औपचारिकता के बगैर राज्यपाल के बाद मंत्री सिंहदेव ने भी ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि राज्यपाल संवेदनशील हैं, वे आप तक पहुंची हैं, आप उनके सामने अपनी समस्या रखिये, हममें कोई कमी हो तो हम उसे पूरा करेंगे।

राज्यपाल अनसुइया उइके ने किडनी पीड़ितों से मिलकर कहा कि पिछले 10-15 सालों से समस्या यथावत है, मैं जानने आई हूं कि इसकी वजह क्या है, हम क्या बेहतर करवा सकते हैं, इसकी चर्चा आप लोगों से करना था। उन्होंने ये भी कहा कि पास में सेनमुड़ा में मौजूद हीरा खदान का कई साल पहले दोहन किया गया था।आशंका जाहिर करते हुए कहा कि हो सकता है इसी के चलते हैवी मेटल पानी में घुलकर अब नुकसान पहुंचा रहा हो। उन्होंने कहा कि और भी कई कारण हैं जिसका  पता लगवाने की जरूरत है।  ग्रामीणों से रूबरू होने के बाद उइके ने कहा अब आश्वासन नहीं क्रियान्वयन होगा। 

अफसरों से कहा-काम करने का तरीका बदलें : पीड़ितों से संवाद के दौरान फिर से ग्रामीणों ने सुपेबेड़ा में अस्पताल, चिकित्सक, तेल नदी का साफ पानी देने,  तेल नदी के सेनमुड़ा घाट पर पुल बनाने की मांग उठाई। मंत्री इन मांगों के लिए किए गए प्रयास व मंजूरी को राज्यपाल को बताते रहे। मंत्री के जवाब से सन्तुष्ट उइके ने कहा कि सरकार काम ठीक कर रही है पर उसे क्रियान्वयन करने वाले अफसरों को अपने काम के तरीके को बदलकर बदलाव लाने की जरूरत है। 

पति की मौत के बाद मांगी इच्छामृत्यु, मंत्री ने मौके पर ही दे दी नौकरी : शिक्षक प्रदीप क्षेत्रपाल को बेवा बैदेही ने किडनी पीड़ित पति की मौत के बाद झेल रहे हालात को जब राज्यपाल के सामने रोते हुए रखा तो वे भी भावुक हो गईं। वैदेही ने बताया कि लोन लेकर उसने बीमार पति को बचाने संघर्ष किया, जमीन जायदाद सब कुछ बेच दिया पर साल भर पहले पति की मौत हो गई। आज तीन बच्चों के भरण पोषण का बोझ झेल रही है। उसने बताया कि वह अनुकम्पा नियुक्ति की मांग करते-करते थक गई।  पीड़िता ने कहा उसे अब इच्छा मृत्यु दे दी जाए। पीड़िता की भावनाएं जानकर राज्यपाल उइके भी भावुक हो गईं । उन्होंने मौके पर ही मंत्री सिंहदेव से इस बाबत चर्चा की।

राज्यपाल ने कहा-डीकेएस और एम्स में होगा पीड़ितों का मुफ्त इलाज : राज्यपाल ने परिवारों से रुबरू चर्चा कर उन्हें भरोसा दिलाया कि अब प्रभावितों को रायपुर के डीकेएस और एम्स हॉस्पिटल में निःशुल्क उपचार कराने और परिवारजनों के भोजन एवं ठहरने की निःशुल्क व्यवस्था की जाएगी। राज्यपाल ने तेल नदी पर वाटर फिल्टर प्लांट शीघ्र चालू करने, देवभोग में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का उन्नयन सिविल अस्पताल में करने तथा ब्लड बैंक की स्थापना करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर  स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने बताया कि तेल नदी पर सेंदमुड़ा के पास पुल निर्माण के लिए 10 करोड़ 8 लाख 44 हजार की स्वीकृति देने के साथ ही वाटर फिल्टर प्लांट के 14 करोड़ की स्वीकृति दे दी गई है।