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पंजाब में फिर देखा गया पाकिस्तानी ड्रोन, BSF की फायरिंग के बाद लौटा…

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पंजाब के फिरोजपुर में एक बार पाकिस्तानी ड्रोन देखा गया है. भारत-पाकिस्तान सीमा पर हुसैनीवाला में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने सोमवार रात को ड्रोन को आता देखा. इसके बाद बीएसएफ जवानों ने ड्रोन पर फायरिंग की. फायरिंग के कारण ड्रोन वापस पाकिस्तान चला गया. इसके बाद बीएसएफ ने सर्च ऑपरेशन चलाया. साथ ही बॉर्डर किनारे हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.

बता दें इससे 16 अक्टूबर को पहले पंजाब के फिरोजपुर में एक बार फिर पाकिस्तानी ड्रोन देखा गया था. अंतरराष्ट्रीय सीमा के सीमावर्ती गांव हजारा सिंह वाला और बाकड़ी के ग्रामीणों ने ड्रोन को उड़ते हुए देखा. स्थानीय लोगों का कहना है कि ड्रोन भारतीय क्षेत्र में एक किलोमीटर तक घुसा था.

स्थानीय लोगों के मुताबिक भारतीय क्षेत्र में एक किलोमीटर तक ड्रोन घुसा था. बीएसएफ के एचके टॉवर के पास बहुत ऊंची उड़ान भर रहा था. हालांकि ड्रोन ने कुछ गिराया था या नहीं, इस संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है. इसे सतलज नदी के किनारे धान के खेतों पर भी देखा गया था. हालांकि अभी साफ नहीं है कि ड्रोन को मार गिराने में बीएसएफ जवान कामयाब हुए थे या नहीं.

पाकिस्तान और चीन के साथ सीमाओं पर बढ़ते खतरों से पार पाने के लिए भारतीय सेना ऐसे ड्रोन खरीदने की योजना बना रही है, जो सामान की ढुलाई करने और मिसाइल की तरह अटैक करने में सक्षम होंगे. इसके साथ ही इन ड्रोन का इस्तेमाल ऊंचाई वाले सीमा क्षेत्र में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की तरह निगरानी करने के लिए किया जाएगा.

पाकिस्तान से आए ड्रोन ने भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन पहली बार नहीं किया है. 8 अक्टूबर को भी पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सीमा में घुस आया था. कुछ देर चक्कर लगाने के बाद ड्रोन वापस पाकिस्तान चला गया था. इससे पहले भारतीय सेना के अधिकारियों ने कहा था कि हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने वाले पाकिस्तानी ड्रोन को ढेर कर दिया जाएगा. लेकिन अभी तक एक भी ड्रोन नष्ट करने की जानकारी नहीं है.

BHIM यूजर्स को सरकार ने दिवाली से पहले दिया बड़ा तोहफा, अब आसानी से कर सकेंगे ये 6 काम…

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अगर आप BHIM (Bharat Interface for Money) App का इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि केंद्र सरकार ने भीम ऐप (BHIM App) का नया वर्जन भीम 2.0 (BHIM 2.0) लॉन्च कर दिया है. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भीम 2.0 में अतिरिक्त भाषाओं के साथ लेन-देन सीमा बढ़ाने समेत कई सुविधाएं दी गई हैं. भीम ऐप नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित UPI आधारित भुगतान प्लेटफॉर्म है. आपको बता दें कि डिजिटल इंडिया मिशन के तहत पीएम मोदी ने कैश लेन-देन को कम करने के लिए 30 दिसंबर 2016 को भीम ऐप लॉन्च किया था. पीएम मोदी ने तब कहा था कि इस समय कारोबार नकद के जरिए होता है, एक दिन ऐसा आएगा कि सभी व्यावसायिक ट्रांजैक्शन BHIM ऐप के जरिए किए जाएंगे.

भीम ऐप के नए वर्जन भीम 2.0 (BHIM 2.0) में क्या है खास- भीम ऐप को और उपयोगी और प्रभावी बनाने के लिए इसमें नई चीजें जोड़ी गई हैं. भीम का नया वर्जन मौजूदा 13 भाषाओं के अलावा तीन अतिरिक्त भाषाओं कोंकणी, भोजपुरी और हरियाणवी को भी सपोर्ट करेगा. मौजूदा 13 भाषाओं में हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगाली, उड़िया, कन्नड़, गुजराती, मराठी, असमी शामिल हैं.

(1) नए वर्जन में लेन-देन सीमा बढ़ाया गया है. (2) कई बैंक खातों को भी अब जोड़ा सकता है.
(3) मर्चेंट्स यानी दुकानदार भी अब अपनी ओर से नए ऑफर दे सकेंगे.
(4) IPO के लिए आवेदन का ऑप्शन भी आ गया है. (5) अब आप आसानी से पैसे गिफ्ट भी ऐप के जरिए कर सकेंगे.
(6) इसके अलावा ऐप अब 13 भाषाओं में उपलब्ध है.

BHIM ऐप से पेमेंट पर सरकार 1 अक्टूबर से खत्म कर चुकी हैं MDR चार्जेस- सरकार देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के 100 रुपये तक ट्रांजेक्शन पर MDR चार्ज खत्म कर दिए है. इससे फुटकर विक्रेताओं को मदद मिल रही है. आपको बता दें कि भीम ऐप के जरिए ट्रांजेक्शन पर पहले 2000 रुपये के लेनदेन पर 0.25 फीसदी और 2000 रुपये से अधिक लेनदेन पर 0.65 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट चार्ज किया जाता था. अब इसमें 100 रुपये तक के लेनदेन को किसी भी चार्ज से मुक्त कर दिया गया है. नई दरें 1 अक्टूबर से लागू हो गई है.

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विशेषज्ञ : ऑप्शन ट्रेडिंग से किसानों को मिल सकता है फसलों के बेहतर दाम…

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कमोडिटी डेरीवेटिव्स एक्सचेंज अब हाजिर भाव के आधार पर ऑप्शन ट्रेडिंग (विकल्प कारोबार) शुरू कर सकते हैं, क्योंकि इससे किसानों को उनकी फसलों का बेहतर दाम मिल सकता है और हेजिंग के प्रति किसानों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। ऑप्शन ट्रेडिंग किसानों के लिए ऐसा विकल्प है जिससे उनको यह भी मालूम होगा कि किस फसल को उगाने से उनको आने वाले दिनों में अच्छा मुनाफा मिल सकता है।

सरकार की ओर से कमोडिटी डेरीवेटिव्स एक्सचेंज को हाजिर भाव के आधार पर ऑप्शन ट्रेडिंग (विकल्प कारोबार) शुरू करने को हरी झंडी मिल गई है।

कमोडिटी बाजार के जानकार बताते हैं कि सरकार के इस कदम से किसानों के लिए अब हेजिंग करना सुगम हो जाएगा और इससे ऑनलाइन कमोडिटी डेरीवेटिव्स बाजार में किसानों की दिलचस्पी बढ़ेगी।

कमोडिटी बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग की शुरुआत हालांकि दो साल पहले ही शुरू हो चुकी है, लेकिन हाजिर भाव पर विकल्प अनुबंधों का सेटलमेंट हाजिर भाव पर करने की अनुमति सरकार ने पहली बार दी है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि खासतौर से एग्री कमोडिटी डेरीवेटिव्स के कारोबार में किसानों की भागीदारी बढ़ेगी।

एग्री कमोडिटी के देश के सबसे बड़े वायदा बाजार नेशनल कमोडिटी एंड डेरीवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ विजय कुमार वेंकटरमण ने आईएएनएस को बताया कि ऑप्शन ट्रेडिंग किसानों के लिए लाभकारी है क्योंकि किसान आगे का भाव देखकर एक प्रीमियम की राशि चुकाकर अपने उत्पाद के एक निश्चित परिमाण के लिए पुट ऑप्शन ले सकता है जिससे बाद में भाव कम होने पर भी किसान को नुकसान नहीं होगा बल्कि वही भाव मिलेगा जिस पर उन्होंने लॉक किया है और कीमत बढ़ने पर किसान अपने उत्पाद ऊंचे भाव पर हाजिर बाजार में बेच सकते हैं।

इसे विस्तार से समझाते हुए उन्होंने बताया, “अगर कोई किसान 5,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर पुट ऑप्शन लेता है तो इसके लिए उसे प्रीमियम के तौर पर सिर्फ छह फीसदी यानी 300 रुपये देना पड़ता है और फसल आने पर भाव घटकर 3,000 रुपये प्रति क्विंटल हो जाता है तो किसान को 2,000 रुपये एक्सचेंज की तरफ से मिल जाता है। इसके विपरीत हाजिर भाव अगर 7,000 रुपये प्रति क्विंटल हो जाता है तो किसान ऊंचे भाव पर अपना उत्पाद बेच सकता है, इसके लिए उसे महज 300 रुपये प्रीमियम के तौर पर भुगतान की गई राशि का नुकसान होगा।”

उन्होंने कहा, “हालिया अधिसूचना के अनुसार, ऑप्शन को सीधा फिजिकल पर डिलीवर किया जा सकता है। वर्तमान में ऑप्शन का सेटलमेंट पहले फ्यूचर में होता है, फिर फ्यूचर का फिजिकल में होता है, लेकिन अब सीधे फिजिकल में सेटलमेंट होगा।”

केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि किसानों को फ्यूचर्स या ऑप्शन के जरिए प्राइस डिस्कवरी का फायदा दिलाने के लिए पहले ऑनलाइन ट्रेडिंग में उनकी भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है जोकि उनमें जागरूकता पैदा करने पर ही संभव हो पाएगा।

हालांकि उन्होंने कहा कि इसमें दो राय नहीं कि ऑप्शन ट्रेडिंग किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है और यह फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का विकल्प हो सकता है।

एक अन्य कमोडिटी बाजार विश्लेषक ने बताया कि भारत में आमतौर पर देखा जाता है कि जिस फसल का किसानों को अच्छा भाव मिलता है उसकी खेती वे ज्यादा करते हैं लेकिन पैदावार ज्यादा होने पर किसानों को उतना भाव नहीं मिल पाता है जितने की उम्मीद से वे खेती करते हैं, बशर्ते एमएसपी पर फसल न बेचा जाए।

ऐसे में ऑप्शन ट्रेडिंग किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है कि वे तीन महीने आगे के भाव पर अपने फसल का पुट ऑप्शन ले सकते हैं।

नतीजों से पहले विपक्ष में मचा हाहाकार, NCP ने कहा, ‘अगर गठबंधन हारा तो कांग्रेस होगी ज्यादा जिम्मेदार’

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माजिद मेमन ने कहा, ‘शरद पवार (Sharad Pawar) जी को काफी रिस्पांस मिला है. कांग्रेस की तरफ से कुछ नर्मी दिखाई दी. राहुल जी ने मुंबई में ही कुछ दौरे किए, कांग्रेस के नेताओं ने कुछ खास मेहनत नहीं की अगर हमें सफलता नहीं मिलती है तो कांग्रेस जिम्मेदार होगी.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन कहीं ना कहीं हमारी भी जिम्मेदारी होगी. हकीकत तो ये है कि जब आंकड़े आएंगे तो तस्वीर साफ होगी 24 तक प्रतीक्षा करनी होगी ईडी को अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए.’

क्या कहते हैं एग्जिट पोल
EXIT POLL में महाराष्‍ट्र की 288 सीटों में से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को 204 सीटें मिलने की संभावना बताई गई है. इसी तरह कांग्रेस-शिवसेना गठबंधन को 69 और अन्‍य को 15 सीटें मिलने की संभावना बताई गई है.

R.भारत-जन की बात के सर्वे में बीजेपी+ को 223 सीटें, कांग्रेस+ को 55 सीटें और अन्‍य को जीरो सीटें मिलने का अनुमान व्‍यक्‍त किया है. इसी तरह सर्वे में बीजेपी+ को 180, कांग्रेस+ को 81 और अन्‍य को 27 सीटें मिलने का अनुमान व्‍यक्‍त किया गया है. बीजेपी+ को 243, कांग्रेस+ को 41 और अन्‍य को 3 सीटें मिलने की संभावना है.

लेडी गागा हुई संस्कृत की दीवानी, ​ट्वीट किया शांति देने वाला ये खास श्लोक…जानिए

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अमेरिका की मशहूर गायिका लेडी गागा भी संस्कृत की दीवानी हो गई है। उन्होंने हाल ही में संस्कृत में लिखा एक श्लोक ट्वीट किया है जिसके बाद उनके भारतीय फैन काफी तारीफें कर रहे है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि Lokah Samastah Sukhino Bhavantu यानी (लोक: समस्त सुखिनो भवंतु)। इसके बाद उनके भारतीय फैन्स को यकीन ही नहीं हो रहा था कि वो संस्कृत भी जानती हैं।

आपको बता दें कि Lokah Samastah Sukhino Bhavantu एक संस्कृत का श्लोक है जिसका मतलब इस दुनिया में सभी लोग सुखी रहें होता है। इस श्लोक का उच्चारण हिंदू धर्म के लोग अपने यहां आयोजित होने वाले कई तरह के कार्यक्रमों के दौरान प्रार्थना के रूप में करते हैं। इसके पीछे का उद्देश्य होता है कि दुनिया में प्यार फैले और सभी लोग सुख शांति से रहें। यह श्लोक एक संस्कृत उपनिषद में वर्णित है।

लेडी गागा के इस ट्वटीट को 120.8 हजार से ज्यादा लाइक्स मिल चुके है और 31.8 से ज्यादा बार रीट्वीट किया जा चुका है। कई लोग रीट्वीट में लिख रहे हैं कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का असर है जो लोग अब हिंदू धर्म और इसकी संस्कृति को महत्व देने लगे हैं।

चिदंबरम को ज़मानत, पर रिहा नहीं हो पाएँगे…

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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम को आइएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई की ओर से दर्ज मामले में ज़मानत दे दी है.

हालांकि इसके बावजूद चिदंबरम रिहा नहीं हो पाएँगे क्योंकि वे इस मीडिया समूह से संबंधित मनी लॉन्डरिंग के एक अन्य मामले में 24 अक्टूबर तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में हैं

पूर्व वित्त मंत्री ने दिल्ली हाई कोर्ट से अपनी ज़मानत की अर्ज़ी ख़ारिज होने के ख़िलाफ़ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी.

मंगलवार को जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेष रॉय की तीन सदस्यों की खंडपीठ ने चिंदबरम को ज़मानत देने का फ़ैसला सुनाया.

इस फ़ैसले के बाद दिल्ली हाई कोर्ट का फ़ैसला निष्प्रभावी हो जाएगा और अगर किसी अन्य मामले में उनकी आवश्यकता नहीं होगी तो उन्हें रिहा किया जा सकता है.

हालांकि वो अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकते.

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला सीबीआई के मामले से जुड़ा है और इसका ईडी के मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

लेकिन यदि किसी अन्य मामले में उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया जाता तो एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर रिहा किया जा सकेगा.

सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 21 अगस्त की रात बड़े नाटकीय तरीक़े से उन्हें उनके घर से गिरफ़्तार कर लिया था.

क्या है आईएनएक्स मीडिया मामला

सीबीआई ने मीडिया कंपनी आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ 15 मई, 2017 को एक एफ़आईआर दर्ज की थी.

आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया ग्रुप को 305 करोड़ रुपये के विदेशी फ़ंड लेने के लिए फ़ॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफ़आईपीबी) की मंज़ूरी में कई तरह की अनियमितताएं बरती गईं.

जब साल 2007 के दौरान कंपनी को निवेश की स्वीकृति दी गई थी उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री हुआ करते थे.

चिदंबरम तब जांच एजेंसियों के रडार पर आए जब आईएनएक्स मीडिया के प्रमोटर इंद्राणी मुखर्जी और उनके पति पीटर मुखर्जी से ईडी ने पूछताछ की.

ईडी ने इस संबंध में 2018 में मनी लांड्रिंग का एक मामला भी दर्ज किया था.

ईडी ने अपने आरोप पत्र में लिखा, “इंद्राणी मुखर्जी ने जांच अधिकारियों को बताया कि चिदंबरम ने एफ़आईपीबी मंज़ूरी के बदले अपने बेटे कार्ति चिदंबरम को विदेशी धन के मामले में मदद करने की बात कही थी.”

सीबीआई का कहना है कि आईएनएक्स मीडिया की पूर्व डायरेक्टर इंद्राणी मुखर्जी ने उनसे पूछताछ में कहा कि कार्ति ने पैसों की मांग की थी.

जांच एजेंसी के मुताबिक़ ये सौदा दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में तय हुआ था.

इंद्राणी मुखर्जी अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल में हैं.

सीबीआई ने चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को भी फ़रवरी 2018 में चेन्नई एयरपोर्ट से गिरफ़्तार कर लिया था.

उनके ख़िलाफ़ ये आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया के ख़िलाफ़ संभावित जांच को रुकवाने के लिए 10 लाख डॉलर की मांग की थी.

बाद में कार्ति चिदंबरम को ज़मानत मिल गई थी.

एयरसेल-मैक्सिस सौदे में भी है नाम

केंद्रीय जांच एजेंसी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल मैक्सिस सौदे में भी चिदंबरम की भूमिका की जांच कर रही है.

साल 2006 में मलेशियाई कंपनी मैक्सिस ने एयरसेल में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली थी. इस मामले में रज़ामंदी देने को लेकर चिदंबरम पर अनियमितताएं बरतने का आरोप है.

वो 2006 में हुए इस सौदे के वक़्त पहली यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे. 2जी से जुड़े इस केस में चिदंबरम और उनके परिवार पर हवाला मामले में केस दर्ज है.

आरोप है कि विदेशी निवेश को स्वीकृति देने की वित्त मंत्री की सीमा महज़ 600 करोड़ है फिर भी 3500 करोड़ रुपये के एयरसेल-मैक्सिस डील को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की इजाज़त के बिना पास कर दिया गया.

लेकिन पी चिदंबरम ने हमेशा अपने और अपने बेटे के ख़िलाफ़ सभी इल्ज़ामों को ख़ारिज किया है. उनके अनुसार उनके ख़िलाफ़ इल्ज़ाम राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित हैं.

आखिर कमलेश तिवारी के हत्यारे खुद के पहचाने जाने और सारे सुराग देने को इतने उतावले क्यों थे?

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कमलेश तिवारी हत्याकांड में जिस तत्परता से देश के कई राज्यों की पुलिस मुस्तैदी से एकश्न में नजर आईं, वह हैरत में डालने वाला है। 18 अक्टूबर को हिंदू नेता की हत्या के बाद यूपी से लेकर गुजरात तक और महाराष्ट्र से लेकर न जाने कहां तक पुलिस की मुस्तैदी हैरतअंगेज़ रही।

लेकिन इस सबके बावजूद कमलेश तिवारी की मां संतुष्ट नजर नहीं आतीं। इस 70 वर्षीय मां का गम और गुस्सा और उनके आरोप (कमलेश की मां ने बीजेपी नेताओं और एक माफिया पर हत्या का आरोप लगाया, कमलेश तिवारी ने खुद बीजेपी पर उनकी हत्या की साजिश रचे जाने का एक वीडियो में आरोप लगाया था) दरकिनार भी कर दें तो भी कमलेश तिवारी हत्याकांड से जुड़े कई ऐसे सवाल हैं, जो असमंजस में डालते हैं।

कमलेश की हत्या के अगले ही दिन यूपी पुलिस, गुजरात की एटीएस और सूरत की क्राइम ब्रांच फुल एक्शन में दिखी और तीन आरोपियों को धर दबोचा। इनमें एक 21 वर्षीय राशिद अहमद पठान है जो बीते 2 साल से दुबई में काम कर रहा था और पिछले महीने ही अपने भाई की 3 नवंबर को होने वाली शादी में शामिल होने के लिए वापस आया था। दूसरा 21 वर्षीय फैजान शेख छोटे-मोटे काम करता है और तीसरा 24 साल का मौलाना मोहसिन शेख सूरत के एक मदरसे में पढ़ाता है।

इनकी गिरफ्तारी के फौरन बाद ही गुजरात एटीएस के डिप्टी एसपी के के पटेल ने ऐलान किया किया इन तीनों ने अपना गुनाह कबूल लिया है। इस बीच महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख देवेन भारती ने मुंबई में ऐलान किया कि उन्होंने इस हत्याकांड के एक साजिशकर्ता को नागपुर में गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ हो रह है।

लेकिन इस सबमें अपने बेटे की शादी की तैयारियों में जुटे पठान के पिता खुर्शीद अपने छोटे बेटे की गिरफ्तारी से बेहद सदमे में हैं। उनका कहना है कि, “मेरे बच्चे बेकसूर हैं। हम तो इस कमलेश तिवारी को जानते तक नहीं कि वह क्या करता है और उसे किसने मारा।”

इस सबमें चौंकाने वाली बात यह भी है कि कथित हत्यारोपियों ने आखिर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश क्यों नहीं की? जिस तरह कमलेश तिवारी ने दोनों की अपने दफ्तर में खातिरदारी की, उन्हें चाय पानी कराया, दही-वड़ा खिलाया, उससे लगता है कि दोनों की कमलेश तिवारी से अच्छी जान-पहचान थी। पहचान इतनी अच्छी थी कि उनके कहने पर कमलेश तिवारी का ऑफिस बॉय उनके लिए पान मसाला और सिगरेट लेने बाहर चला गया और उन्होंने इसी दौरान कथित तौर पर तिवारी का गला रेत दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आमतौर पर हत्यारे अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं। वे हमेशा ध्यान रखते हैं कि वे सीसीटीवी में न कैद हो जाएं, और जब अपराध करके भागें तो कोई उन्हें देख न ले। लेकिन कमलेश तिवारी हत्याकांड में ऐसा नहीं हुआ। हत्यारे उस मिठाई के डिब्बे को वहीं छोड़ गए जिसमें वे कथित तौर पर पिस्टल लेकर आए थे, साथ ही वहां मिठाई का बिल भी छोड़ गए, ताकि पता चल जाए कि मिठाई कहां से खरीदी गई थी।

आनन-फानन पता चल गया कि जिस मिठाई के डिब्बे में पिस्टल और चाकू लाया गया था, वह सूरत के उधना एरिया की एक मिठाई की दुकान का था। पुलिस ने फौरन इस मिठाई की दुकान के सीसीटीव में फैजान समेत तीन लोगों को देखा और उन्हें गिरफ्तार कर लिया। फैजान ने मिठाई की दुकान पर सीसीटीवी से बचने की कोई कोशिश भी नहीं की।

वह चाहता तो आसानी से अपनी चेहरा छिपा सकता था, या फिर डिब्बा ही चाहिए था तो कहीं से भी ले सकता था। आखिर क्यों?

इन सबसे भी ज्यादा हैरानी की बात कि हत्यारे, कथित हत्या करने के बाद वापस उसी होटल में गए जहां वे रुके थे। वहां उन्होंने दूसरे पहने, खून से सने कपड़े वहीं छोड़ दिए। फिर रिसेप्शन पर आकर कमरे की चाबी भी दी और एक घंटे में आने का कहकर चले गए।

आखिर इन दोनों ने यह जोखिम क्यों लिया, वे तो सीधे भाग सकते थे, लेकिन उन्हें कोई ऐसी जल्दी नहीं थी।

इन सारे तथ्यों को देखें, तो आभास होता है कि ये दोनों खुद ही चाहते थे कि पुलिस उनकी पहचान करे और उन तक पहुंच जाए। लेकिन रोचक है कि इतना सब होने के बावजूद किसी भी राज्य की पुलिस इन दोनों तक अभी नहीं पहुंच सकी है।

कमलेश तिवारी की मां पुलिस की इस पूरी कहानी को खारिज कर चुकी हैं और उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर योगी सरकार ने कमलेश की वह सुरक्षा नहीं हटाई होती तो जो उन्हें अखिलेश सरकार में मिली हुई थी, तो शायद ऐसा नहीं होता।

कमलेश की मां ने एक टीवी चैनल से बातचीत में यहां तक कहा कि, “पुलिस कुछ बेकसूरों को पकड़ के सामने पेश कर देगी, और माफिया को बचा लेगी। आखिर जब प्रशासन ही ने धोखा दिया हो तो उनसे क्या उम्मीद करें।”

उन्होंने यह भी कहा, “पिछली सरकार के दौर में मेरे बेटे को करीब 17 पुलिस वालों की सुरक्षा मिली हुई थी। योगी सरकार के आते ही, पहले उनकी संख्या घटाकर 8-9 कर दी गई, और फिर इसे भी घटाकर 4 कर दिया गया। इनमें से दो हर वक्त मेरे बेटे के साथ होते थे, जब भी वह कहीं जाता था, लेकिन जिस दिन हत्या हुई, उस दिन एक भी सुरक्षा कर्मी साथ में नही था।”

इसी बात को तिवारी की पार्टी के नेता और कमलेश तिवारी के नंबर दो स्वराष्ट्र दीप सिंह भी कहते हैं। जब ये कथित हत्यारे कमलेश तिवारी से मिलने आए थे, तो सिंह उस समय वहां थे। उन्होंने बताया है कि तिवारी को दोपहर से पहले एक फोन आया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी को उनके घर के फर्स्ट फ्लोर पर बने दफ्तर को साफ करने को कहा था। साथ ही मेहमानों के लिए कुछ चाय-नाश्ता तैयार करने को भी कहा था।

सिंह ने बताया कि एक घंटे बाद दोनों आए थे और सीधे फर्स्ट फ्लोर पर चले गए थे, मानो वे यहां से वाकिफ थे। वे तिवारी के साथ करीब आधे घंटे बैठकर बातचीत करते रहे थे। इस दौरान दीप सिंह के सामने ही उन्होंने चाय-नाश्ता किया था। इसके बाद इनमें से एक ने दीप सिंह को सिगरेट लेने भेज दिया था, और वह तिवारी को इन कथित हत्यारों के साथ छोड़कर बाहर चले गए थे।

जब दीप सिंह वापस आए तो तिवारी फर्श पर खून में लथपथ पड़े थे, उनका गला रेता गया था, जहां से खून बह रहा था। उन्होंने शोर मचाया और तिवारी की पत्नी किरन दौड़ कर ऊपर आईं। उन्होंने एंबुलेंस बुलाई, लेकिन अस्पताल पहुंचते पहुंचते कमलेश दम तोड़ चुके थे।

लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथवानी की पहली प्रतिक्रिया थी, “पहली नजर में लगता है कि दोनों ने किसी निजी दुश्मनी के चलते तिवारी पर हमला किया। ऐसा लगता है कि तिवारी हमलावरों को जानते थे।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुरु में डॉक्टरों ने कहा था कि ऐसा लगता है कि हत्या गला रेतने से हुई है, लेकिन जैसी ही पुलिस को पिस्टल मिला, तो एएसपी विकास त्रिपाठी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला है कि पहले गोली मारी गई और उसके बाद चाकू से हमला किया गया।

यह सारी थ्योरी गले नहीं उतरती। अगर हमलावरों ने गोली चलाई तो किसी ने गोली चलने की आवाज क्यों नहीं सुनी? और आखिर एक ऐसे मिठाई के डिब्बे में चाकू और पिस्टल रखकर क्यों लाए जिसका बिल भी उसमें मौजूद था और दुकान का पता भी था।

जब खाने तक के नहीं बचे थे परिणीति के पास पैसे, जानिए अनछुए पहलू

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बॉलीवुड की बबली गर्ल से फेमस परिणीति चोपड़ा आज अपना 31वां जन्मदिन मना रही हैं. साल 2011 में परिणीति चोपड़ा ने साल लेडीज वर्सेज रिकी बहल से अपनी फिल्म करियर की शुरुआत की थी. फिल्म इशकजादे में वो पहली बार लीड रोल में नजर आई थीं. परिणीति का जन्म 22 अक्टूबर 1988 को हुआ था. आज उनके जन्मदिन के मौके पर चलिए हम आपको बताते हैं उनकी जिंदगी के कुछ अनछुए पहलु.

बहुत कम लोग जानते होंगे कि परिणीति चोपड़ा कभी हिरोइन नहीं बनना चाहती थी बल्कि साल 2009 में आई आर्थिक मंदी के कारण उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में आने का फैसला लिया. परिणीति पढ़ाई में हमेशा से ही होशियार थी. उन्हें 12वीं में उन्होंने पूरे देश में टॉप किया था. इसके चलते परिणीति को राष्ट्रपति ने सम्मानित किया था. इसके बाद परिणीति ने बिजनेस, फाइनेंस और अर्थशास्त्र में ट्रिपल हॉनर्स करने के बाद 2009 में इंडिया लौटी. परिणीति चोपड़ा ने इन्वेस्टमेंट मैनेजर विदेश में काम किया. इसके बाद आर्थिक मंदी के चलते उन्हें भारत लौटना पड़ा. भारत वापस आकर उन्होंने यश राज फिल्म्स में काम किया.

एक टॉक शो में परिणीति चोपड़ा ने बताया था कि साल 2014 से लेकर 2015 का दौर मेरी जिंदगी का सबसे बुरा वक्त था. उन्होंने बताया कि तकरीबन डेढ़ साल तक मेरे साथ ये वक्त चला. मेरी दो फिल्में दावत-ए-इश्क और किल दिल अच्छा काम नहीं कर सकीं. उन्होंने कहा कि एक दम से मेरे पास रुपए भी नहीं बचे थे. किस्सा शेयर करते हुए परिणीति ने कहा कि मैंने एक घर खरीदा था इसके बाद मैं और बुरे हालात से गुजरने लगी थी. उन्होंने कहा कि ऐसा लगने लगा था कि मेरी जिंदगी के सभी रास्ते बंद हो गए हैं. परिणीति कहती हैं कि इसका नतीजा ये हुआ कि मैंने खाना खाना और सोना बंद कर दिया. मैंने अपने परिवार से संपर्क खत्म कर दिया. मैं बस टीवी देखती और सो जाती. उन्होंने कहा कि मैं बिलकुल जोंबी बन गई थी.

परिणीति डिप्रेशन में जाने लगी थी. उन्होंने कहा कि वो बीमार रहने लगी थी. उन्होंने बताया कि उनके इस बुरे वक्त में परिणीति का साथ उनके भाई सहज चोपड़ा और दोस्त संजना ने काफी साथ दिया था.

राजनाथ बोले – भारत पर बुरी नजर रखने वालों को हमारी सेना छोड़ेगी नहीं…

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भारत और पाकिस्तान के बीच लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर तनाव का माहौल है. पाकिस्तान लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है. इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि भारत ने कभी भी दुनिया के किसी भी देश पर हमला नहीं किया और न ही किसी की एक इंच जमीन पर अवैध कब्जा किया, लेकिन हमारी सेना उन लोगों को जवाब देने में सक्षम है जो भारत पर बुरी नजर रखते हैं.

छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से शंकरा आई हॉस्पिटल कोयम्बटूर के प्रतिनिधि मंडल ने की मुलाकात…

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मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से आज यहां उनके निवास कार्यालय में शंकरा आई हॉस्पिटल कोयम्बटूर के प्रतिनिधि मंडल ने डॉ. पी. जानकीरमन के नेतृत्व में सौजन्य मुलाकात की।
        मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल से चर्चा के दौरान छत्तीसगढ़ में आई हॉस्पिटल की स्थापना के लिए आमंत्रित किया। प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि आई हॉस्पिटल की स्थापना के सम्बंध में राज्य के दो-तीन स्थानों का भ्रमण भी किया गया है। मुख्यमंत्री ने डॉ. जानकीरमन सहित सभी प्रतिनिधियों को शाल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर शंकरा आई हॉस्पिटल के मेडिकल एडमिनिस्ट्रेशन के प्रेसिडेंट डॉ. कौशिक मुरली और प्रेसिडेंट ऑपरेशन श्री भारत बाल सुब्रमण्यम भी उपस्थित थे।