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खुशखबर : एम्स के डॉक्टरों ने खोजी आयुर्वेदिक ‘एंटीबॉयोटिक दवा’

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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने करीब दो साल लंबी मेहनत के बाद आयुर्वेदिक ‘एंटीबॉयोटिक दवा’ खोजने में सफलता हासिल कर ली है। चर्चित आयुर्वेदिक औषधि मृत्युंजय रस से बनी फीफाट्रोल नाम की यह दवा आम एलोपैथिक एंटीबॉयोटिक से भी कहीं ज्यादा प्रभावी है और इंसान के शरीर में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरियाओं को निष्क्रिय कर सकती है। एम्स के माइक्रोबॉयोलॉजी विशेषज्ञों ने मार्च, 2017 में डॉ. समरन सिंह के निर्देशन में यह अध्ययन शुरू किया था। समरन सिंह फिलहाल भोपाल एम्स के निदेशक हैं। कई औषधियों की जांच के बाद फीफाट्रोल में एंटीबॉयोटिक दवा जैसे गुण पाए गए। अध्ययन से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि एंटीबॉयोटिक जैसे गुण होने के बावजूद फीफाट्रोल का कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है, जबकि एंटीबॉयोटिक दवाओं के इस्तेमाल से होने वाले दुष्प्रभावों के कारण हीं उनके खिलाफ दुनिया भर में मुहिम चल रही है। जल्द ही यह अध्ययन रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी जाएगी। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस खोज से सरकार को भी आयुर्वेदिक एंटीबॉयोटिक के रूप में विकल्प मिला है, जिसका इस्तेमाल शहरों से लेकर ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य सुरक्षा में किया जाएगा।

कई औषधियों का है मिश्रण

फीफाट्रोल में मृत्युंजय रस के अलावा सुदर्शन वटी, संजीवनी वटी, गोदांती भस्म, त्रिभुवन कीर्ति रस शामिल है। इसके अलावा आठ अन्य औषधीय अंशों तुलसी, कुटकी, चिरयात्रा, मोथा, गिलोय, दारुहल्दी, करंज व अप्पामार्ग को भी इसमें मिलाया गया है। करीब 16 तरह के बैक्टीरियल स्ट्रेन को अध्ययन में शामिल किया गया। इनमें से एक स्ट्रेन तो भोपाल एम्स की लैब से ही लिया गया है।

इस तरह बैक्टीरिया पर हावी है फीफाट्रोल

डॉ. समरन सिंह के मुताबिक, स्टैफिलोकोकस प्रजाति के बैक्टीरियाओं के खिलाफ फीफाट्रोल बेहद शक्तिशाली साबित हुई है। स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया त्वचा, श्वसन तथा पेट संबंधी संक्रमणो के लिए जिम्मेदार हैं। जिन लोगों का प्रतिरोधक तंत्र कमजोर होता है, उनमें इसका संक्रमण घातक भी हो सकता है। एक अन्य बैक्टीरिया पी. रुजिनोसा के पर भी यह असरदार रही है। इसके अलावा इकोलाई, निमोनिया, के एरोजेन आदि बैक्टीरिया के प्रति भी इसमें संवेदनशील प्रतिक्रिया देखी गई।

बिहार में 1.67 लाख शराबी पुलिस ने पकड़े , कोर्ट में लग गया मुकदमों का ढेर…

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पटना. बिहार पुलिस (Bihar Police) को सरकार (Government) की ओर से आदेश (Order) मिला तो शराबियों (Drunken) की धर-पकड़ शुरू हो गई. इसमें पीने वाले भी थे और पिलाने वाले भी शामिल थे. वहीं लाखों लीटर शराब भी बरामद की जा चुकी है. बिहार में जब शराबबंदी के चलते कार्रवाई हुई तो केस कोर्ट (Court) में भी पहुंचा. अब पुलिस की इस कार्रवाई के चलते कोर्ट में शराब से जुड़े मामलों का ढेर लग गया है.

3 साल में पकड़ी जा चुकी है 52 लाख लीटर शराब

हाल ही में शराबबंदी से जुड़े कुछ आंकड़े जारी किए गए हैं. अगर आंकड़ों की मानें तो बिहार में शराबियों और शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अब तक 52 लाख लीटर शराब जब्त की जा चुकी है. इसके साथ ही शराबबंदी कानून का उल्लघंन करने पर 1.67 लाख व्यक्तियों को बिहार पुलिस पकड़ चुकी है.

पटना में हुए सबसे ज्यादा मुकदमें जारी किए गए आंकड़ों की मानें तो शराबबंदी का कानून सबसे ज्यादा राजधानी पटना में तोड़ा गया. पटना में सबसे ज्यादा पटना 28,593, गया 11,221, मोतिहारी 9,979 और कटिहार में 8,867 शराबबंदी के मामले दर्ज किए गए हैं. जिस रफ्तार से केस दर्ज हुए उस रफ्तार से न्यायालय में मामलो का निबटारा नही हो रहा है. कानून के जानकार जहां इसकी वजह कोर्ट की कम संख्या होना बता रहे हैं वहीं बिहार में विपक्ष इसे मुद्दा बनाने में लगा हुआ है.

इस बारे में पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता शआंतनु कुमार की माने तो समय की जरुरत है की इस पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाया जाये, नही तो फिर आगे चलकर हालात बेकाबू होते जायेगे.

निलंबित IPS मुकेश गुप्ता की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, बेटियों का फोन टेप कराने पर दाखिल किया रिट पिटीशन, मामले की सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी!

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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने तीन अलग-अलग मामलों में गुप्ता के खिलाफ चल रही जांच पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई थी. जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस एम आर शाह की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया था. गौरतलब है कि मुकेश गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दाखिल करते हुए मांग की थी कि छत्तीसगढ़ में उनके खिलाफ चल रही जांच, राज्य के बाहर सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए. उनकी ओर से दलील दी गई थी कि उनके विरूद्ध दर्ज सभी मामले प्रायोजित हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा था. मुकेश गुप्ता के खिलाफ अवैध तरीके से फोन टेपिंग कराए जाने के साथ-साथ साडा प्लांट आबंटन में गड़बड़ी और मिक्की मेहता की मौत मामले में एफआईआर दर्ज की गई है.

जानिए उस एक्टर का नाम जो हार्दिक पांड्या को पसंद आई, शादी के लिए मिलाया परिवार से…

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टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर और अपनी बिंदास जीवनशैली के लिए मशहूर हार्दिक पांड्या एक बार फिर प्यार की पिच पर बोल्ड हो गए। हार्दिक पंड्या क्रिकेट के अलावा अक्सर अपने लिंक-अप के लिए भी चर्चा में रहते हैं। चाहे वह एली अवराम हो, ईशा गुप्ता हो या उर्वशी रौतेला हो हार्दिक पंड्या का नाम इन सभी के साथ जोड़ा गया और वह अपनी निजी जिंदगी को लेकर काफी चर्चा में रहे है। सूत्रों की मानें तो आज कल हार्दिक एक्ट्रेस नताशा स्टैनकोविक के साथ डेट कर रहे हैं।

अब खबर आ रही है कि उनका दिल नताशा स्टैंकोविक पर आया है, जो वर्तमान में नच बलिए 9 में अपने एक्स बॉयफ्रेंड एलि गोनी के साथ देखी जा रही हैं। पिछले दिनों मुंबई के बांद्रा में वह नताशा को लेकर पहुंचे थे, इस पार्टी का आयोजन उनके दोस्तों ने किया था। कहा जा रहा है कि हार्दिक अपनी नई गर्लफ्रेंड को लेकर गंभीर हैं। वह अपने परिवार वालों से नताशा से इसी पार्टी में मिलवा भी चुके हैं। इस पार्टी में हार्दिक के भाई क्रुणाल और उनकी भाभी पंखुड़ी शर्मा भी मौजूद थीं। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो हार्दिक ने पार्टी में अपनी गर्लफ्रेंड कहकर नताशा को सभी से मिलवाया।

खबरों के अनुसार हार्दिक के परिवार को इस रिश्ते पर कोई आपत्ति नहीं है और लगता है कि वह हार्दिक पांड्या की पसंद को लेकर खुश है। नताशा और हार्दिक एक दूसरे को लंबे समय से जानते हैं। बादशाह के हिट गीत “डीजे वाले बाबू” के संगीत वीडियो में दिखाई देने के बाद नताशा की लोकप्रियता बढ़ीं हैं। हाल ही में हार्दिक पांड्या ने अपनी पीठ के निचले हिस्से की चोट के इलाज के लिए लंदन में सर्जरी करवाई। हार्दिक पांड्या जब चोट से उबर रहे थे तब उनके जन्मदिन पर प्रेमिका नताशा ने उन्हें सबसे प्यारा उपहार दिया।

उन्होंने इंस्टाग्राम पर हार्दिक के लिए एक संदेश लिखा। नतासा ने लिखा, ‘मेरे सबसे अच्छे दोस्त, यह वर्ष आपके लिए एक रोलर कोस्टर की तरह रहा है। बहुत सी शानदार चीजें हुई हैं और कुछ ऐसी भी रही, जो नहीं हुई और वह आपको मजबूत बनाती हैं। आप हम सभी के लिए एक ऐसी प्रेरणा रहे हैं और मैं अपने लिए और अपने आस-पास के लोगों के लिए आपके द्वारा किए गए हर काम के लिए और अधिक गर्व महसूस करती हूं।’ इसके चलते अब दोनों की जल्द शादी करने की संभावना व्यक्त की है।

आपको बता दे मूल रूप से सर्बिया की रहने वाली नताशा ने 3 साल की उम्र से ही डांस सीखना शुरू कर दिया था। 2010 में स्पोर्ट्स सर्बिया का खिताब जीतने के बाद नताशा ने स्पोर्ट्स के क्षेत्र में ही करियर बनाने का फैसला किया। नच बलिए 9 नें भाग ले रहीं नताशा एली गोनी की भी गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं। पिछले दिनों उनका नाम प्रियांक शर्मा के साथ भी जुड़ा था।

‘Dabangg 3’ से मिसिज चुलबुल पांडे का लुक आया सामने…

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चुलबुल पांडे (chulbul pandey) और बाली उर्फ किच्छा सुदीप का पोस्टर शेयरकरने के बाद, सलमान खान (salman khan) ने अब सोनाक्षी सिन्हा (sonakshi sinha) द्वारा अभिनीत अपने प्यार मिसिजचुलबुल पांडे उर्फरज्जो का पोस्टर रिलीज कर दिया है। सलमान खान यानी चुलबुल पांडे ने अपने सोशल मीडिया पर एक विशेष पोस्टर के साथ उनका लुक शेयरकिया है जिसमें रज्जो अपने स्वैग वाले अंदाजमें नजर आ रहीं है।

वीडियो में, चुलबुल ने अपनी सुपर सेक्सी रज्जो को दर्शकों से मुखातिब करवाया है जिसे वह प्यार से अपनी हबीबी कहते है! फ़िल्म से किरदारों के लुक को एक अनोखे तरीके से साझा करने के साथ, दबंग 3 की टीम टीजर और पोस्टर्स के साथ बखूबी दर्शकों का ध्यान अपनी तरफआकर्षित कर रही है।

इस स्पेशल पोस्टर में, सोनाक्षी ने अपने स्वैग और पोज़ के साथ एक बार फिर रज्जो के लुक में चार चाँद लगा दिए है। रज्जो दबंग फ्रैंचाइजीसे मजबूत किरदारों में से एक है, जो हर किश्त के बाद अधिक निखर कर सामने आई है और चुलबुल पांडे एवं रज्जो के बीच की केमिस्ट्री बेमिसाल है जो हर बार दर्शकों के दिलों पर कब्जा कर लेती है।

चुलबुल पांडे और रज्जो के बीच की केमिस्ट्री को पिछली फिल्मों में दर्शकों द्वारा सराहा गया है और दबंग 3 के साथ इसका स्तर अधिक ऊपर होगा।

प्रतिबंधों के विरोध में ऑस्ट्रेलिया के अखबारों ने मीडिया पर फ्रंट पेज खाली छोड़ा…

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 ऑस्ट्रेलिया के सभी अखबारों ने प्रेस प्रतिबंधों के विरोध में सोमवार को अपने फ्रंट पेज को काला छापकर एकता का प्रदर्शन किया है. यह विरोध राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों और प्रेस की आजादी के हनन के खिलाफ है.

द ऑस्ट्रेलियन, द सिडनी मॉर्निंग और ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू सहित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अखबारों ने अपने फ्रंट पेज को काला छापा है.

इस संबंध में देशभर के टेलीविजन नेटवर्कों पर यह विज्ञापन प्रसारित हो रहे हैं, जिसमें दर्शकों से इस सवाल पर विचार करने को कहा जा रहा है, ‘जब सरकार आपसे सच दूर रखती हो, वे क्या कवर करेंगे?’

मालूम हो कि जून महीने में ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) के मुख्यालय और न्यूज कॉर्प के एक पत्रकार के घर पर छापेमारी के बाद ऑस्ट्रेलिया के ‘राइट टू नो कोलिशन’ अभियान के तहत अखबारों ने यह कदम उठाया है.

ये छापेमारी प्रकाशित किए गए दो लेखों के बाद की गई, जिनसे सरकार की काफी किरकिरी हुई थी.

इस संबंध में प्रेस की छह मांगें हैं, जिनमें से एक पत्रकारों को सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों से छूट देना है क्योंकि उनका यह कहना है कि यह सख्त कानून उन्हें लोगों तक जानकारियां ला पाने से रोक रहा है.

अखबारों के विरोध पर सरकार का कहना है कि वे प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं लेकिन कोई भी कानून से ऊपर नहीं है.

द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलियाई संसद ने पिछले 20 वर्षों में गोपनीयता और जासूसी से संबंधित 60 से अधिक कानून पारित किए हैं. पिछले दो वर्षों में 22 कानून पारित किए गए हैं.

न्यूज कॉर्प ऑस्ट्रेलिया के कार्यकारी चेयरमैन माइकल मिलर ने अखबार का पहला पन्ना खाली रखे जाने की तस्वीर ट्वीट की है, जिसमें द ऑस्ट्रेलियन, द डेली टेलीग्राफ, द एडवर्टाइजर और ऑब्जर्वर सहित कई अखबारों की कॉपियां हैं.

उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वह सरकार से पूछें कि वे हमसे क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं? एबीसी के प्रबंध निदेशक डेविड एंडरसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया सच छिपाने वाला लोकतंत्र बनने की राह पर है.

गौरतलब है कि रविवार को ही ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कहा कि छापेमारी के बाद तीन पत्रकारों पर मुकदमा चल सकता है. इसी के मद्देनजर मीडिया संस्थानों ने अपना विरोध जताया है.

प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि प्रेस स्वतंत्रता ऑस्ट्रेलिया के लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन कानून को बरकरार रखने की जरूरत है.

जानिए चीकू से होने वाले लाभकारी फायदे…

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चीकू शायद एक ऐसा फल है जो सर्दी, गर्मी दोनों मौसमों में खूब खाया जाता है। यह खाने में बहुत ही स्वादिष्ट भी होता है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन-ए, सी और आयरन जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते है। गर्भावस्था में भी चीकू खाने से बहुत से फायदे होते है। दिल की बीमारी और कैंसर से बचने के लिए भी चीकू बहुत ज्यादा फायदेमंद है। इसके अलावा चीकू के और भी कई फायदे हैं जो शायद आप जानते ही नहीं है।

– बालों की सुंदरता
चीकू खाने से बालों का टूटना और झड़ना विल्कुल बंद हो जाता है। इसके बीजों से निकला गया तेल सिर में लगाने से बाल मुलायम और बहुत खूबसूरत बन जाते हैं।

– आंखों के लिए फायदेमंद
इसमें विटामिन-ए पाया जाता है जो हमारी आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। चीकू खाने से आंखों की बीमारी भी दूर होती हैं।

– वजन कम करना
इससे गैस्ट्रिक समस्या भी ठीक होती है और पाचन तंत्र भी बहुत मजबूत बनता है, जिससे खाना बहुत आसानी से पच जाता है। इस तरह पेट पर फालतू चर्बी नहीं चढ़ती और वजन भी नियंत्रण में रहता है।

– स्किन के लिए जरूरी
चीकू में विटामिन-ई और काफी एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाये जाते हैं जो हमारी स्किन के लिए बहुत ही आवश्यक होता है। इससे त्वचा सुंदर और कोमल भी बनती है और चेहरे के दाग-धब्बे और झुर्रियां भी बहुत कम होती हैं।

– गुर्दे की पत्थरी
चीकू को अच्छी तरह मसल कर खाने से गुर्दे और ब्लैडर में होने वाली पत्थरी भी पूरी तरह दूर होती है।

– कब्ज से छुटकारा
चीकू में काफी मात्रा में फाइबर भी पाया जाता है जो खाने को पचाने में बहुत मदद करते हैं। खाना अच्छी तरह पचने से कब्ज भी नहीं होती।

– हड्डियों की मजबूती
इसमें कैल्शियम, फ़ास्फ़रोस और आयरन जैसे बहुत से पोषण तत्व मौजूद होते हैं जो हमारी हड्डियों के लिए बहुत आवश्यक होते हैं। चीकू के सेवन से हड्डियों और मांसपेशियों को बहुत मजबूती मिलती है।

बर्थडे स्पेशल : चाहे मुझे कोई जंगली कहे…फेम शम्मी कपूर का है आज जन्मदिन…

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‘चाहे मुझे कोई जंगली कहे, कहता रहे….’ जंगली के इस गाने ने शम्मी कपूर को स्टार बना दिया था। शम्मी कपूर, जिनका आज जन्म दिन है। वही शम्मी कपूर जो लीजेंडरी पृथ्वीराज कपूर के पुत्र तथा राज कपूर और शशि कपूर के भाई थे।

शम्मी कपूर की पहली फ़िल्म रेल का डिब्बा 1953 में आई लेकिन उनकी की आरंभिक फिल्में सफल नहीं रही थी। ‘लैलामजनू,’ ‘ठोकर’ ‘मेम साहिब’ ‘चोर बाजार’ जैसी फिल्में उस समय की मशहूर नायिकाओं के होने बावजूद नहीं चली।

दरसअल वह दौर त्रिमूर्तियों का था। राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार का। इन तीनों की अपनी छवि थी देव साहब जहां रोमांस को अलग अंदाज में पेश कर रहे थे वही दिलीप कुमार ट्रेजेडी किंग कहे जाते थे। राज कपूर भोले भाले जीवंत भारतीय के किरदार में अपने को पेश कर रहे थे। ऐसे शम्मी कपूर के सामने बड़ी चुनौती थी अपने को अलग अंदाज में दिखाने की जिसे दर्शक पसंद कर सकें।

तभी 1961 में उन्हें जंगली मिली और उन्होंने अपने आप को चुलबुले प्लेबॉय के रूप में पेश कर दिया। हिंदी सिनेमा के आकाश पर एक नये सितारे जन्म हो गया। शम्मी कपूर स्टार बन गए। फिर तो हिट फिल्मों की लाइन लग गयी। कॉलेज गर्ल, बसंत, सिंगापुर, बॉयफ्रेंड, प्रोफेसर, प्यार किया तो डरना क्या, चाइना टाउन, कश्मीर की कली,ब्लफ मास्टर, उनकी सफल फिल्में थी 1968 में उन्हें ब्रह्मचारी फ़िल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्मफ़ेअर अवार्ड मिला।

1970 से 1990 के बीच उन्होंने अपने आपको सह अभिनेता के रूप में ढाल लिया था। उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का फ़िल्मफ़ेअर अवार्ड भी मिला। उन्होंने प्रोडक्शन में भी हाथ आजमाया। अपनी मृत्यु के कुछ समय पहले अपने भतीजे रणवीर कपूर अभिनीत इम्तियाज अली निर्देशित फिल्म रॉकस्टार बनाई थी।

शम्मी कपूर ने गीता बाली से 1955 में शादी की थी। जिनसे उन्हें पुत्र आदित्य राजकपूर और कंचन पुत्री हुई। गीता बाली का देहावसान 1965 में चेचक से हो गयी थी। फिर शम्मी कपूर ने 1969 में भावनगर की राजकुमारी नीला देवी से शादी की।

अपने समय की नामचीन नायिका मुमताज ने 2011 में एक इंटरव्यू में कहा था कि शम्मी साहेब मुमताज को बेहद चाहते थे और शादी भी करना चाहते थे। उन दोनों के बीच रोमांस ब्रह्मचारी फ़िल्म के शूटिंग के दौरान परवान चढ़ा था, लेकिन मुमताज फिल्मी कैरियर छोड़ना नहीं चाहती थी इसलिए यह रोमांस विवाह में नहीं बदल सका।

शम्मी कपूर नेटसेवी भी थे। वे इंटरनेट यूजर्स कम्युनिटी ऑफ इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष थे। एथिकल हैकर्स एसोसिएशन जैसी इंटरनेट संस्थाओं को बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

शम्मी कपूर का निधन मुम्बई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में 14 अगस्त 1911 को हुआ था।

रोज सुबह पी जाने वाली चाय भी आपको कर सकती है बीमार, हुआ बड़ा खुलासा जानिए कैसे…

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चाय के शौकिन सावधान हो जाएं। आम से लेकर खास तक चायपीने वाले कहीं मिलावटी चाय तो नहीं पी रहे है। अभी तक लगता यही था कि कम से कम चाय तो मिलावटियों की काली नजर से बची हुई है। अब चाय को भी मिलावटियों की नजर लग गई है। भारतीय चाय बोर्ड ने चाय की पत्तियों में मिलावट का खुलासा किया है। चाय को अधिक गाढ़ा बनाने के लिए मिलावटखोर इसमें हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल कर रहे हैं। बोर्ड ने जब कुछ चाय पत्तियों के नमूनों की जांच की तब चाय में मिलावट का पता चला।

चाय बोर्डं ने चाय में रंग मिलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। बोर्ड ने कहा है कि चाय में रंग मिलाने का कोई प्रावधान नहीं है। बोर्ड ने सभी हिस्सेदारों से फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) के निदेर्शों का पालन करने के निर्देश दिए है। एफएसएसएआई आठ सिंथेटिक रंगों को कुछ निर्धारित खाद्य पदार्थों में मिलाने की स्वीकृति देता है, इनमें चाय शामिल नहीं है।

चाय बोर्ड ने असम के एक बोट लीफ फैक्ट्री के नमूने की जांच की तो उसमें एक पीला रंग इस्तेमाल करने की बात सामने आई। अब बोर्ड उसके लाइसेंस को रद्द करने के कदम उठाएगा। यह कलरिंग एजेंट टरट्रजाइन है। खाद्य सामानों में रंग करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। चाय में अच्छा रंग लाने के लिए कभी कभार इसका इस्तेमाल किया जाता है। बोर्ड ने कहा कि रंग की मिलावट उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के नजरिए से खतरनाक है,इसलिए यह वर्जित है। बोर्ड ने एक नोटिस में कहा है कि अक्सर रिपोर्ट आती है कि निम्न क्वालिटी की चाय में रंग देकर उसे बेचने योग्य किया जाता है। इन रंगों से चाय की गुणवत्ता नहीं बढ़ती है। कुछ रंग हैं जो गैर विषैले होते हैं और उन्हें एफएसएसएआई मिठाई और फल के रसों में मिलाने की इजाजत देता है।

बोर्ड का कहना है कि साधारण प्रयास से ही चाय के रंग को पकड़ा जा सकता है। सिर्फ सूखी चाय को हाथ पर रगड़िए तो हाथ में एक चमकीला रंग लग जाएगा। जो अच्छी चाय होगी उसका रंग हाथ में नहीं लगेगा। बोर्ड ने और एक तरीका बताया है जिसके अनुसार एक गिलास ठंडे पानी में चाय डूबा दीजिए। यदि तुरंत गिलास का सफेद पानी रंगीन हो जाता है तो उसमें रंग का इस्तेमाल किया गया है।

नोबल विजेता अभिजीत बनर्जी ने दी मोदी सरकार को सलाह, कारोबारियों पर ज्‍यादा टैक्‍स लगाकर गरीबों के लिए बनाएं योजना…

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अर्थशास्‍त्र में इस साल का नोबल पुरस्‍कार पाने वाले सह-विजेता भारतीय अमेरिकी अर्थशास्‍त्री अभिजीत बनर्जी का मानना है कि वैश्विक गरीबी से निपटने के लिए प्रयोग आधारित नजरिया अपनाना होगा। अर्थशास्‍त्र का नोबल देने वाली संस्‍था रॉयल स्‍वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के अनुसार इस नजरिये ने डेवलपमेंट इकोनॉमिक्‍स को बदल दिया है। मेसाच्‍यूसेट्स इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी में अर्थशास्‍त्र के फोड फाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी ने भारत सरकार की गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की तारीफ की है और उन्‍होंने कारोबारियों को टैक्‍स कटौती का लाभ न दिए जाने की बात कही है।

बनर्जी ने कहा है कि कारोबारियों पर उच्‍च कर लगाने से सरकार को कल्‍याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए अधिक धन मिल सकता है। ऐसा कर सरकार किसानों के लिए आर्थिक मदद प्रदान कर सकती है और मध्‍यम अवधि में अपने राजकोषीय घाटे को कम कर सकती है।

अंग्रेजी बिजनेस अखबार मिंट को दिए एक साक्षात्‍कार में अभिजीत बनर्जी ने मोदी सरकार की उन नीतियों की सराहना की है, जो गरीबों पर केंद्रित हैं। उनका मानना है कि कारोबारियों पर ज्‍यादा टैक्‍स लगाकर उससे गरीबों के लिए चलाई जा रही कल्‍याणकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने में मदद मिल सकती है।

नोबेल पुरस्‍कार विजेता और विख्‍यात अर्थशास्‍त्री अभिजीत बनर्जी ने मोदी सरकार की जनधन, उज्‍जवला, आयुष्‍मान भारज योजना के साथ ही साथ दूसरी आम लोगों से जुड़ी योजनाओं की प्रशंसा की है। अभिजीत बनर्जी ने कहा कि आयुष्‍मान भारत जैसी योजनाएं आम लोगों का जीवन बचाएंगी और उन्‍हें बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं उपलब्‍ध होंगी। जनधन योजना से आम लोग बचत कर पाने में सक्षम होंगे।

बनर्जी ने आधार कार्ड को बैंक और रसोई गैस पर मिलने वाली सब्सिडी से जोड़ने की भी तारीफ की। कांग्रेस की न्‍याय योजना का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि इस योजना का डिजाइन ठीक नहीं है। उन्‍होंने कांग्रेस को इससे जुड़े कुछ आंकड़े दिए थे बाकि उनकी कोई भ‍ूमिका नहीं थी।

बनर्जी ने कहा कि मैं कुछ खास वजह से आरसीटी से सहमत नहीं हूं। मैं लॉन्‍ग टर्म ससटेनेबल ग्रोथ के बारे में नहीं जानता हूं और न ही मैं गरीबों के लिए राजनीतिक तंत्र को बदलना जानता हूं। मैं केवल लोगों के लिए कुछ उपयोगी काम करना चाहता हूं।