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गलन भरी रातों से आफत, अलाव का सहारा ले रहे लोग, कब मिलेगी इस कड़कड़ाती ठंड से राहत?

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छत्तीसगढ़ में ठंड का कहर

छत्तीसगढ़ के तमाम जिलों में भी ठंड का कहर देखने को मिल रहा है. वहीं धमतरी जिले की बात की जाए तो धमतरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है. यहां सुबह और रात का तापमान लगभग 10.4 सेल्सियस दर्ज किया गया. जिससे लोग गर्म कपड़े का सहारा ले रहे हैं.

लोगों का कहना है कि जिले में काफी ज्यादा ठंड पड़ रही है… लेकिन नगर निगम के द्वारा कोई व्यवस्था नहीं किया जा रहा है. इस ठंड में चौक चौराहों पर अलाव की व्यवस्था होनी चाहिए. लोगों ने बताया कि वो स्वयं से ही लकड़ी, पेपर इकट्ठा करके आग जलाकर ठंड से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं.

ठंड इतना ज्यादा बढ़ गया है कि लोग घर से भी बाहर कम निकल रहे हैं.. इधर, नगरी सिहावा क्षेत्र के वनांचल इलाके में कोहरा भी देखने को मिल रहा है. लोग अपनी गाड़ियों के हेडलाइट चालू करके सफर कर रहे हैं. हालांकि कोहरे के कारण यहां कई हादसे भी हो चुके हैं.

अलाव के सहारे बैठे लोग

सूरजपुर में ठंड का सितम जारी है. सुबह के वक्त यहां का न्यूनतम पारा 5 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज की गई, जिससे सुबह काम पर जाने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. मौसम विभाग की माने तो शीतलहर और ठंड अभी कुछ दिन और रहने की संभावना है

DA Hike: कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, केंद्र के समान मिलेगा महंगाई भत्ता, CM साय ने की घोषणा…

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DA Hike: छत्तीसगढ़ से एक बड़ी खबर है. यहां अधिकारी-कर्मचारियों के हित में सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है. आइए जानते हैं…

Increased Dearness Allowance: छत्तीसगढ़ में अधिकारी-कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. सरकार ने प्रदेश के अधिकारी-कर्मचारियों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य के अधिकारी-कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता मिलेगा. सीएम विष्णु देव साय ने इसकी घोषणा कर दी है.

रायपुर में प्रदेश अधिवेशन का हो रहा है आयोजन

दरअसल आज रविवार को राजधानी रायपुर के रोहनीपुरम में राज्य कर्मचारी संघ के आठवें प्रदेश अधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है. इस अधिवेशन में प्रदेशभर के कर्मचारी शामिल हुए हैं. यहां सीएम विष्णु देव साय भी पहुंचे. कर्मचारियों को उन्होंने संबोधित किया. इसी बीच उन्होंने कर्मचारियों के हित में बढ़ा फैसला लेते हुए महंगाई भत्ता बढ़ाने की घोषणा कर दी.

अब इतना मिलेगा

सीएम साय ने कर्मचारियों के हित में घोषणा करते हुए कहा कि अब राज्य के अधिकारी-कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता मिलेगा. अब 55% से बढ़कर 58% महंगाई भत्ता मिलेगा. 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी गई है. कर्मचारियों के हित में लिए इस फैसले के बाद कर्मचारी संघ में काफी खुशी देखने को मिली.

राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान ने राजनीतिक हलचल

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राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एक ओर लाखों नाम हटाने की..

वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान

  • 27 लाख 40 हजार 759 नाम हटाने के आवेदन
  • 79,787 फार्म नए नाम जोड़ने के लिए आए
  • राजनीतिक दलों की ओर से 38,846 दावे दर्ज

राज्य में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल मचा दी है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं। एक ओर लाखों नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है, तो दूसरी ओर हजारों नए मतदाता अपने अधिकार के लिए आवेदन कर रहे हैं। चुनाव आयोग को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले प्रदेश में 27 लाख 40 हजार 759 फार्म-7 प्राप्त हो चुके हैं। इनमें नाम विलोपन की मांग की गई है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे नाम शामिल हैं जिन्हें अनकलेक्टेबल बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार 23 दिसंबर से अब तक 23,096 मतदाताओं ने नाम सुधार के लिए आवेदन किया है। ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद प्राप्त आवेदनों में 79,787 फार्म 6/6ए नए नाम जोड़ने के लिए, 2,140 फार्म 7 नाम हटाने के लिए और 23,096 फार्म 8 नाम में सुधार के लिए आए हैं। इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में युवा, नवविवाहित और स्थानांतरित मतदाता अपने अधिकार को लेकर जागरूक हुए हैं और सूची में नाम दर्ज कराने आगे आए हैं।

राजनीतिक दलों की ओर से दावे

राजनीतिक दलों को भी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अधिकार है। 23 दिसंबर 2025 से सात जनवरी 2026 शाम चार बजे तक केवल 15 दिनों में एक करोड़ 84 लाख 95 हजार 920 दावे और आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। इन आंकड़ों ने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। आने वाले चुनाव से पहले मतदाता सूची सबसे बड़ा रणक्षेत्र बन चुकी है।

राष्ट्रीय दलों में सबसे आगे भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हैं। भारतीय जनता पार्टी ने 20,017 बीएलए के माध्यम से 183 नाम शामिल कराने के लिए दावे दर्ज किए हैं। कांग्रेस ने 17,681 बीएलए सक्रिय करते हुए नाम जोड़ने के लिए दावे प्रस्तुत किए हैं। बहुजन समाज पार्टी ने 501 बीएलए के जरिए दावे लगाए हैं। आम आदमी पार्टी ने 119 बीएलए मैदान में उतारे हैं। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने 528 आवेदन प्रस्तुत किए हैं। कुल मिलाकर राजनीतिक दलों की ओर से 38,846 दावे और आपत्तियां दाखिल की गई हैं, जिनमें से 228 मामलों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

एफिडेविट से नहीं आया कोई मामला

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 2(ग) के तहत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दिए जाने वाले शपथपत्र के माध्यम से न तो समावेशन और न ही विलोपन के लिए कोई आवेदन प्राप्त हुआ है। इसका अर्थ है कि अब तक अधिकांश दावे सीधे मतदाताओं या राजनीतिक दलों के माध्यम से ही आए हैं।

अधिकारियों का क्या कहना

नवीन ठाकुर, उप निर्वाचन अधिकारी, रायपुर का कहना है कि “यह अभियान मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए है। केवल वही आवेदन मान्य होंगे जो निर्धारित फार्म और आवश्यक घोषणा के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। सामान्य शिकायतें या बिना दस्तावेज के दिए गए आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।”

बैंक जाने वालों के लिए अलर्ट; 12 जनवरी को किन शहरों में बैंक बंद

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Bank Holiday January 2026: जनवरी में बैंक से जुड़े काम करने वालो के लिए छुट्टियों की जानकारी लेना बहुत जरूरी है. क्योंकि इस महीने अलग-अलग कारणों से बैंक बंद रहने वाले हैं. जिससे बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहने वाली हैं.

आज 11 जनवरी को रविवार की साप्ताहिक छुट्टी है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) पहले से बैंक हॉलिडे की पूरी लिस्ट जारी करता हैं. जिसमें यह साफ बताया जाता है कि किस दिन और किस शहर में बैंक बंद रहेंगे. लिस्ट के मुताबिक, कल यानी 12 जनवरी को भी छुट्टी की घोषणा की गई है. ऐसे में अगर आप बैंक ब्रांच जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले अपने शहर की छुट्टियों की जानकारी जरूर चेक कर लें…

12 जनवरी को कहां रहेंगे बैंक बंद?

आरबीआई की छुट्टियों की लिस्ट के मुताबिक, कल पश्चिम बंगाल में बैंक बंद करने का ऐलान किया गया है. ऐसे में राज्य के ग्राहकों को सलाह है कि वे बैंक से जुड़े जरूरी काम किसी और दिन निपटा सकते हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल को छोड़कर देश के बाकी सभी राज्यों में 12 जनवरी को बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे.

पश्चिम बंगाल में कल बैंकों में छुट्टी स्वामी विवेकानंद की जयंती को लेकर दी गई है. स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

बैंकों की ऑनलाइन सेवाएं रहेगी चालू

बैंकों में भले ही कल छुट्टी की घोषणा की गई है. लेकिन ग्राहकों की ऑनलाइन सुविधाएं प्रभावित नहीं होंगी. नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई, एटीएम और ऑनलाइन फंड ट्रांसफर जैसी सेवाएं पहले की तरह चालू रहेंगी. जिससे ग्राहक घर बैठे ही अपने काम आसानी से कर सकेंगे. हालांकि, जिन कामों के लिए बैंक ब्रांच जाने की आवश्यकता होती है, वैसे काम प्रभावित होंगे.

26 जनवरी की परेड में होना चाहते हैं शामिल, जानें कहां से मिलेगा टिकट!

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गणतंत्र दिवस की मुख्य परेड 26 जनवरी को नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित होगी. इसके बाद 28 और 29 जनवरी को बीटिंग द रिट्रीट समारोह होगा. जो पूरे उत्सव का शानदार समापन माना जाता है. इन दोनों ही कार्यक्रमों के लिए टिकट लेना जरूरी होता है और इन्हें पहले से बुक करना सबसे बेहतर रहता है.

अगर आप घर बैठे टिकट लेना चाहते हैं. तो रक्षा मंत्रालय के आमंत्रण पोर्टल से ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं. यहां मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करके लॉगिन करना होता है. इसके बाद आपको परेड या बीटिंग द रिट्रीट में से इवेंट चुनना होता है और सीटिंग ऑप्शन सेलेक्ट करना होता है.

इवेंट चुनने के बाद टिकट की संख्या भरें. फिर अपनी जरूरी जानकारी डालें और वैलिड फोटो आईडी अपलोड करें, जैसे आधार या वोटर आईडी. इसके बाद ऑनलाइन पेमेंट करें. पेमेंट पूरा होते ही आप अपना ई टिकट डाउनलोड कर सकते हैं. चाहें तो उसका प्रिंट भी निकाल सकते हैं.

जो लोग ऑनलाइन टिकट नहीं लेना चाहते. उनके लिए दिल्ली में सरकारी ऑफलाइन काउंटर भी लगाए जाते हैं. यहां ओरिजनल फोटो आईडी दिखाकर सीधे टिकट खरीदे जा सकते हैं. सेना भवन, शास्त्री भवन, जंतर मंतर, संसद भवन, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन पर काउंटर उपलब्ध रहते हैं.

कार्यक्रम में जाते समय वही फोटो आईडी साथ रखें, जो बुकिंग में दी गई थी. टिकट सिर्फ चुनी गई तारीख और इवेंट के लिए मान्य होता है. कम से कम 1 से 2 घंटे पहले पहुंचना बेहतर रहता है. सभी गेट्स पर सुरक्षा जांच होती है, इसलिए प्रतिबंधित सामान न लेकर जाएं.

गणतंत्र दिवस के दिन राजपथ और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक सीमित रहता है. ऐसे में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना सबसे सही विकल्प होता है. मोबाइल में ई टिकट सेव रखें या प्रिंट कॉपी साथ रखें. थोड़ी प्लानिंग के साथ आप इस ऐतिहासिक परेड का पूरा आनंद ले सकते हैं.

Somnath Temple: सोमनाथ मंदिर में पीएम की शिव पूजा, मंत्र जाप

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Somnath Temple: 2026 गुजरात के सोमनाथ मंदिर के लिए 2 वजहों से खास है. साल 1026 में महमूद गजनवी ने मंदिर पर हमला कर ध्वस्त कर दिया था, जिसके 1000 साल पूरे हो रहे हैं. हाल में प्रधानमंत्री ने मंदिर को लेकर एक भावनात्मक लेख लिखा था.

अब इसके बाद पीएम ने सोमनाथ मंदिर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए और शिव साधना की.

दूसरा कारण ये है कि 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष हो गए हैं, इस अवसर पर 8 जनवरी से 11 जनवरी तक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है.

ड्रोन शो में दिखाई प्राचीन आस्था की झलक

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत सोमनाथ मंदिर परिसर में अरब सागर के तट पर भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया गया. ड्रोन शो में सनातन की भव्यता दिखाई गई. करीब 3000 ड्रोन के जरिए आकाश में सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण का दृश्य, त्रिशूल, ओम, भगवान शिव का तांडव और पीएम की आकृति दिखाई.

पीएम नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने एक वीडियो शेयर किया है जिसमें 1000 साल भी बाद सोमनाथ मंदिर की भव्यता और दिव्यता की झलक दिखाई गई. समुद्र की लहरों के सामने खड़ा सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक स्थापत्य नहीं, बल्कि भारत की उस जीवंत परंपरा का प्रतीक है जो सदियों से अपनी अस्मिता को बचाए हुए है.

सोमनाथ मंदिर पर क्यों हुए हमले

सोमनाथ मंदिर पर हमले का सबसे बड़ा कारण इसकी संपत्ति थी. मंदिर को राजाओं, व्यापारियों, विदेशी यात्रियों से भारी दान मिलता था. सोमनाथ मंदिर का खजाना सदियों से भारत की समृद्धि का प्रतीक रहा है, जिसे महमूद गजनवी ने 1026 ईस्वी में लूटा था, जिसमें भारी मात्रा में सोना, चांदी और कीमती रत्न शामिल थे.

ऐतिहासिक प्रसिद्धि के लिए मुगलों ने मंदिर को निशाना बनाया. आक्रमणकारी जानते थे, मंदिर पर हमला इतिहास में दर्ज होगा. प्रसिद्ध स्थल पर हमला आक्रमणकारी की सत्ता और भय का संदेश देता था.

ईरान से क्या-क्या मंगवाता है भारत, यहां बदली सरकार तो किसे होगा ज्यादा

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मध्य पूर्व का अहम देश ईरान एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. सड़कों पर विरोध, सत्ता को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक राजनीति की हलचल के बीच दुनिया की नजर ईरान पर टिकी है. ऐसे में भारत के लिए भी यह सवाल बेहद अहम हो जाता है कि ईरान से उसका रिश्ता सिर्फ कूटनीतिक है या आर्थिक भी है.

अगर ईरान में सत्ता बदलती है, तो क्या भारत को नुकसान होगा या फायदा? इस रिपोर्ट में आपको हर पहलू का जवाब साफ शब्दों में देते हैं.

ईरान में हालात क्यों बने चिंता का कारण

ईरान में हाल के समय में हिंसा और विरोध प्रदर्शनों की खबरें सामने आ रही हैं. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने अंतरराष्ट्रीय माहौल को और गरमा दिया है. उन्होंने कहा है कि ईरान के लोग अब आजादी की ओर देख रहे हैं और इस बदलाव में अमेरिका उनके साथ है. ऐसे बयानों के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि अगर ईरान की सरकार में बड़ा बदलाव होता है, तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके व्यापारिक साझेदार भी प्रभावित होंगे.

भारत और ईरान का आर्थिक रिश्ता

भारत और ईरान के बीच संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत हैं. भारत दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और अपनी 85 फीसदी से ज्यादा जरूरतें आयात से पूरी करता है. लंबे समय तक ईरान भारत के लिए कच्चे तेल का एक अहम स्रोत रहा है, क्योंकि वहां का तेल गुणवत्ता के साथ-साथ कीमत के लिहाज से भी अनुकूल माना जाता रहा है.

भारत ईरान से क्या-क्या मंगवाता है

ईरान से भारत का सबसे बड़ा आयात कच्चा तेल रहा है. इसके अलावा भारत ईरान से सूखे मेवे जैसे पिस्ता और खजूर, कुछ खास केमिकल्स, पेट्रोकेमिकल उत्पाद और कांच से बने बर्तन भी मंगवाता है. ये सभी सामान भारतीय बाजार में अपनी अलग पहचान रखते हैं. खासकर सूखे मेवों की मांग त्योहारों और शादियों के मौसम में काफी बढ़ जाती है.

भारत ईरान को क्या निर्यात करता है

भारत भी ईरान को कई जरूरी सामान भेजता है. इसमें सबसे प्रमुख है बासमती चावल, जिसका ईरान बड़ा खरीदार रहा है. इसके अलावा चाय, चीनी, दवाइयां, ऑटो पार्ट्स और कुछ इंजीनियरिंग के सामान भी भारत से ईरान जाते हैं. इन निर्यातों से भारत के कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा मिलता है.

ईरान की अर्थव्यवस्था किन पर टिकी है

ईरान की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस है. ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडार वाले देशों में गिना जाता है. सरकारी आय का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात से आता है. इसके अलावा पेट्रोकेमिकल, उर्वरक और ऊर्जा से जुड़े उद्योग भी उसकी अर्थव्यवस्था को संभाले हुए हैं. हालांकि अमेरिकी और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण ईरान को कई बार अपने तेल निर्यात में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है.

अगर ईरान में सरकार बदली तो नुकसान किसे

अगर ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है और नीतियों में बड़ा बदलाव आता है, तो सबसे पहले असर तेल व्यापार पर पड़ सकता है. भारत जैसे देश, जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर हैं, उन्हें वैकल्पिक स्रोतों की ओर देखना पड़ सकता है. वहीं ईरान को भी नुकसान हो सकता है, क्योंकि भारत जैसे बड़े खरीदार के बिना उसके तेल निर्यात पर असर पड़ना तय है. इसके साथ ही सूखे मेवे और अन्य गैर-तेल व्यापार भी प्रभावित हो सकता है.

‘देश के 44 फीसदी शहर गंभीर…’, वायु प्रदूषण को लेकर जयराम रमेश

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वायु प्रदूषण को लेकर कांग्रेस ने एक बार फिर मोदी सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत में वायु प्रदूषण अब केवल कुछ महानगरों की समस्या नहीं, बल्कि यह एक देशव्यापी संकट बन चुका है, जिस पर सरकार की प्रतिक्रिया बेहद कमजोर और नाकाफी है.

जयराम रमेश ने सेंटर फ़ॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के ताज़ा सैटेलाइट आधारित रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि देश के करीब 44 प्रतिशत शहर लगातार गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में हैं. CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 4,041 नगरों में से 1,787 शहरों में पिछले 5 सालों (2019-2024, कोविड वर्ष 2020 को छोड़कर) के दौरान PM 2.5 का वार्षिक स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहा है. इसका मतलब है कि देश का लगभग आधा शहरी भारत जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है.

NCAP केवल 130 शहरों तक ही सीमित

इतनी व्यापक समस्या के बावजूद सरकार का राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) केवल 130 शहरों तक ही सीमित है. इनमें से भी 28 शहरों में अब तक कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (CAAQMS) तक नहीं लगाए गए हैं. जिन 102 शहरों में निगरानी की व्यवस्था है, उनमें से 100 शहरों में PM10 का स्तर 80 प्रतिशत या उससे अधिक दर्ज किया गया है. कुल मिलाकर, NCAP फिलहाल देश के केवल 4 प्रतिशत गंभीर रूप से प्रदूषित शहरों को ही कवर कर पा रहा है.

जयराम रमेश ने कसा तंज

जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि जिसे सरकार नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम कहती है, वह अब ‘नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’ बनकर रह गया है. उन्होंने NCAP की गहन समीक्षा, पुनर्गठन और बड़े पैमाने पर सुधार की मांग की. कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत के मौजूदा वायु गुणवत्ता मानक बेहद कमजोर हैं. WHO के मुताबिक 24 घंटे की सीमा 15 माइक्रोग्राम से कम और वार्षिक सीमा 5 माइक्रोग्राम से कम होनी चाहिए. यानी भारत के मानक अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों से कई गुना पीछे हैं.

कांग्रेस ने यह भी मांग की कि सभी कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में 2026 के अंत तक FGD सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाए जाएं. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की स्वतंत्रता बहाल की जाए और पिछले 10 वर्षों में किए गए जन-विरोधी पर्यावरण संशोधनों को वापस लिया जाए.

बजट 2026 की रूपरेखा तय करने में जुटी सरकार; राज्यों से मांगे गए सुझाव

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Union Budget 2026: यूनियन बजट 2026 को आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. ऐसे में आम लोगों से लेकर राज्यों तक को आगामी बजट से कई उम्मीदें हैं. केंद्र सरकार की ओर से भी इसकी तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं, ताकि सभी वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखा जा सके.

इसी कड़ी में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार, 10 जनवरी को नई दिल्ली में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के साथ प्री-बजट परामर्श बैठक की है. जिसमें बजट 2026 से जुड़ी प्राथमिकताओं और सुझावों पर चर्चा की गई. आइए जानते हैं, बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा की गई….

इन मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान कई राज्यों की ओर से पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना को जारी रखने की बात कही गई. साथ ही योजना के लिए अधिक आवंटन की जरूरतों पर भी जोर दिया गया. राज्य के प्रतिनिधियों ने कहा कि, यह योजना राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों में विकास कार्यों को तेज करने में मदद कर रही है.

इसके जरिए नई परिसंपत्तियां तैयार हो रही हैं और पूंजीगत निवेश को भी मजबूत समर्थन मिल रहा है. आंकड़ों की बात करें तो, वित्त वर्ष 2020-21 से अब तक केंद्र सरकार इस योजना के लिए 4.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक जारी कर चुकी है.

इन राज्यों ने लिया हिस्सा

इस बैठक में दिल्ली, गोवा, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और सिक्किम के मुख्यमंत्री मौजूद रहे. वहीं अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्रियों के साथ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और अन्य प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए. बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और मणिपुर के राज्यपाल ने हिस्सा लिया.

केंद्र सरकार की तरफ से वित्त मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक का हिस्सा बने. इनमें आर्थिक कार्य विभाग, व्यय विभाग और राजस्व विभाग के सचिवों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों के अन्य अधिकारी शामिल थे.

“ईरान में कुछ बड़ा होने वाला है? डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का तेहरान ने दिय”

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ईरान में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ शुरू हुआ आम लोगों का विरोध प्रदर्शन 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है. एक-एक कर देश के हर कोने से खामेनेई सरकार के खिलाफ आवाज उठ रही है. इंटरनेट ब्लैकआउट के भी 60 घंटे हो चुके हैं.

इस बीच अमेरिका की चेतावनी से तेहरान का सियासी हलका काफी नाराज है. संसद के अध्यक्ष ने यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी का जवाब धमकी से दिया है.

ईरान के संसद अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इस्लामी गणराज्य पर हमला करता है तो अमेरिकी सेना और इजरायल निशाने पर होंगे. कालीबाफ ने यह धमकी तब दी जब ईरानी संसद में सांसद मंच की ओर दौड़े और अमेरिका विरोधी नारे लगाए. ईरानी राज्य टेलीविजन ने संसद सत्र को लाइव प्रसारित किया.

कौन हैं कालीबाफ, जिन्होंने ट्रंप को दिया करारा जवाब?

कालीबाफ एक कट्टरपंथी नेता हैं और पहले राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके हैं. उन्होंने पुलिस और ईरान की पैरामिलिट्री रिवॉल्यूशनरी गार्ड को प्रदर्शनों के दौरान दृढ़ रहने के लिए सराहा. उन्होंने कहा, ‘ईरान के लोगों को पता होना चाहिए कि हम उनके साथ सबसे कठोर तरीके से निपटेंगे और गिरफ्तार लोगों को सजा देंगे.’

ट्रंप की धमकी पर ईरान का जवाब

उन्होंने इजरायल को कब्जे वाला क्षेत्र कहते हुए सीधे धमकी दी. उन्होंने कहा, ‘ईरान पर हमले की स्थिति में कब्जे वाला क्षेत्र और क्षेत्र में सभी अमेरिकी सैन्य केंद्र, अड्डे और जहाज हमारे वैध निशाने होंगे.’

द टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, ईरान में चल रहे सरकार-विरोधी आंदोलन में यूएस के दखल की संभावना को देखते हुए इजरायल हाई अलर्ट पर है. वहीं, इंटरनेट पाबंदी की मियाद भी बढ़ गई है. इंटरनेट मॉनिटर नेटब्लॉक्स का कहना है कि ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान देश भर में इंटरनेट बंद किया गया था, जो अब 60 घंटे से ज्यादा हो गया है.

हिंसक हो गया आंदोलन: IRGC

आईआरजीसी से जुड़े तस्नीम न्यूज के मुताबिक विरोध प्रदर्शन बेहद हिंसक हो गया है. प्रदर्शनकारी शनिवार रात को ईरान के फार्स प्रांत के ममासानी काउंटी में न्यायपालिका परिसर में घुस गए और एक गार्ड पोस्ट में आग लगा दी.

काउंटी के पब्लिक और रेवोल्यूशनरी प्रॉसिक्यूटर हसन इलाही ने बताया कि कोर्टहाउस के अंदर कई कमरों में आग लगा दी गई और सिक्योरिटी फोर्स के आने और भीड़ को हटाने से पहले आग ग्राउंड फ्लोर से पहली मंजिल तक फैल गई थी.

ट्रंप ने दी ईरान को धमकी!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई को धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान की मदद को तैयार है. उन्होंने रविवार (11 जनवरी) को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा, ‘ईरान शायद आजादी की ओर देख रहा है और कहा कि अमेरिका मदद के लिए तैयार है.’