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दुनिया भर में चमकी भारत की ‘ज्वैलरी’! फरवरी में रत्न और आभूषण निर्यात 3.86% बढ़ा, 2.68 अरब डॉलर तक पहुंचा कारोबार…

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जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अनुसार, फरवरी में भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट में साल-दर-साल 3.86 फीसदी की वृद्धि हुई, जो बढ़कर 2,680.79 मिलियन USD (24,340.05 करोड़ रुपए) हो गया.

यह ग्रोथ इंडस्ट्रीज की ओर से दूसरे बाजारों में अपने विस्तार (Diversification) के कारण हुई. GJEPC के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के इसी महीने में कुल एक्सपोर्ट 2,581.08 मिलियन डॉलर (22,460.13 करोड़ रुपए) रहा था. अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक, कुल जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट लगभग स्थिर रहा. यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के 25,915.81 मिलियन डॉलर (2,18,737.62 करोड़ रुपए) की तुलना में 25,933.72 मिलियन डॉलर (2,28,230.06 करोड़ रुपए) रहा.

कैसे बढ़ा एक्सपोर्ट?

GJEPC के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा कि पिछला साल ग्लोबल जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है. इस पर अमेरिका की बदलती टैरिफ पॉलिसीज, जियो पॉलिटिकल अनिश्चितताओं और प्रमुख बाजारों में कंज्यूमर्स की बदलती पसंद का असर पड़ा है. इन मुश्किलों के बावजूद, भारतीय जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर ने जबरदस्त लचीलापन दिखाया है.

उन्होंने आगे कहा कि एक्सपोर्टर्स ने अपने एक्सपोर्ट मार्केट्स का सक्रिय रूप से विस्तार किया है. उन्होंने UAE और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है, जहां फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (Free Trade Agreements) ने अहम भूमिका निभाई है. वहीं, हांगकांग जैसे बाजारों से भी लगातार मज़बूत समर्थन मिलता रहा है.

भंसाली ने बताया कि अमेरिका के टैरिफ फ्रेमवर्क में हाल के बदलावों से जड़े हुए आभूषणों (Studded Jewellery) के सेगमेंट को कुछ राहत मिली है. हालांकि, उद्योग अभी भी प्राकृतिक हीरों और कुछ खास तरह के खुले पत्थरों (Loose Stones) पर लगने वाले अंतिम टैरिफ को लेकर और ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रहा है. मौजूदा अमेरिकी कार्यकारी आदेश के तहत, इन पर अभी 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है.

GJEPC की ओर से जारी हुए ये आंकड़े

GJEPC के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में कटे और तराशे हुए हीरों के निर्यात में मामूली गिरावट (0.84 प्रतिशत) दर्ज की गई. यह एक साल पहले के 1,362.67 मिलियन USD (11,860.71 करोड़ रुपए) की तुलना में घटकर 1,351.17 मिलियन USD (12,268.05 करोड़ रुपए) रह गया.

पिछले महीने, पॉलिश किए हुए लैब-ग्रोन हीरों का एक्सपोर्ट 1.85 प्रतिशत बढ़कर 111.68 मिलियन USD (972.04 करोड़ रुपए) से 113.74 मिलियन USD (1,033.03 करोड़ रुपए) हो गया.

पिछले महीने, सोने के गहनों के कुल एक्सपोर्ट में 3.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई, जो एक साल पहले के 899.82 मिलियन USD (7,828.05 करोड़ रुपए) की तुलना में बढ़कर 928.85 मिलियन USD (8,432.16 करोड़ रुपए) हो गया.

फरवरी में, चांदी के गहनों का एक्सपोर्ट 123.77 प्रतिशत बढ़कर 116.37 मिलियन USD (1,056.30 करोड़ रुपए) हो गया, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 52.01 मिलियन USD (452.39 करोड़ रुपए) था.

एक्सपोर्टर रख रहे बारीकी से नजर

पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बारे में बात करते हुए, भंसाली ने कहा कि जैसे-जैसे हम वित्त वर्ष के अंतिम चरण की ओर बढ़ रहे हैं, उद्योग बदलती भू-राजनीतिक घटनाओं और वैश्विक व्यापार स्थितियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है. उन्होंने आगे कहा कि एक्सपोर्टर स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं और शिपमेंट तथा सप्लाई चेन की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

FASTag का एनुअल पास ले चुके लोगों को भी देनी होगी बढ़ी हुई फीस, जानें नया नियम…

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Fastag Annual Pass: अगर आप अक्सर हाईवे पर गाड़ी चलाते हैं और टोल से बचने के लिए FASTag का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके काम की है. सरकार ने प्राइवेट गाड़ी मालिकों के लिए मिलने वाले खास एनुअल पास की कीमत में हल्का इजाफा करने का फैसला किया है.

यानी जिन लोगों ने यह पास लिया है या लेने की सोच रहे हैं, उन्हें अब थोड़ा ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है.

हालांकि राहत की बात यह है कि अगर आप 31 मार्च से पहले पास खरीद लेते हैं या रिन्यू कर लेते हैं. तो आपको पुरानी कीमत पर ही इसका फायदा मिल सकता है. हाईवे पर बार बार सफर करने वालों के लिए यह पास काफी फायदेमंद माना जाता है. क्योंकि इससे हर बार टोल देने की झंझट कम हो जाती है. लेकिन अब नए नियम लागू होने के बाद इसकी कीमत में बदलाव किया जा रहा है. जिसे लेकर कई लोगों के मन में सवाल भी उठ रहे हैं.

कितना बढ़ेगा एनुअल पास का चार्ज?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नियमों के मुताबिक हर साल टोल दरों में बदलाव होता है और उसी फॉर्मूले के आधार पर पास की कीमत भी अपडेट की जाती है. फिलहाल जो FASTag एनुअल पास 3000 रुपये में मिलता है. उसकी कीमत 1 अप्रैल से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी जाएगी. यानी कुल 75 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. जो करीब 2.5 प्रतिशत के बराबर है. इस बदलाव से देशभर के लाखों वाहन मालिक प्रभावित होंगे. अनुमान है कि करीब 52 लाख लोग इस बदलाव से प्रभावित होंगे.

ध्यान रखने वाली बातें:

  • अभी की कीमत 3000 रुपये है.
  • 1 अप्रैल से कीमत 3075 रुपये हो जाएगी.
  • यानी कुल 75 रुपये की बढ़ोतरी की गई है.
  • करीब 52 लाख वाहन मालिकों पर इसका असर पड़ेगा.

कैसे काम करता है FASTag एनुअल पास?

यह एनुअल पास खासतौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है. जो नेशनल हाईवे पर बार बार सफर करते हैं. पिछले साल 15 अगस्त को इसे शुरू किया गया था और तब से यह काफी पाॅपुलर हो गया है. इस में एक बार पेमेंट करने के बाद पास पूरे एक साल या 200 ट्रिप तक वैलिड रहता है. इनमें से जो भी पहले पूरा हो जाए.

इस योजना में दो तरह के ऑप्शन मिलते हैं;’

3000 रुपये का वार्षिक पास जिसमें एक साल तक हाईवे इस्तेमाल किया जा सकता है.

30000 रुपये का लाइफटाइम पास जिसमें लंबे समय तक टोल से राहत मिलती है.

कुछ जरूरी बातें भी ध्यान में रखना जरूरी है

यह पास सिर्फ नेशनल हाईवे पर ही मान्य होता है.

राज्य सरकार के टोल प्लाजा पर सामान्य शुल्क कटेगा.

पास के लिए दिया गया पैसा नॉन रिफंडेबल होता है.

कहां से खरीद सकते हैं यह पास?

इस पास को खरीदना काफी आसान रखा गया है और इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती. वाहन मालिक इसे घर बैठे मोबाइल से भी खरीद सकते हैं. इसके लिए Rajmarg Yatra App का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट से भी पास लिया जा सकता है. पेमेंट करने के करीब दो घंटे के भीतर पास एक्टिव हो जाता है और मोबाइल पर कन्फर्मेशन मैसेज भी मिल जाता है.

पास खरीदने के आसान तरीके

राजमार्ग यात्रा ऐप के जरिए ऑनलाइन खरीद सकते हैं.

NHAI की वेबसाइट से भी आवेदन किया जा सकता है.

पेमेंट के करीब 2 घंटे में पास एक्टिव हो जाता है.

मोबाइल पर कन्फर्मेशन मैसेज भी मिल जाता है.

इस कंपनी की कारों पर मिल रहा ₹50,000 तक का डिस्काउंट; 31 मार्च तक है मौका…

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मार्च 2026 में Kia अपनी कई कारों पर भारत में ₹50,000 तक का डिस्काउंट दे रही है. Kia Sonet और Seltos जैसे मॉडल पर ये ऑफर्स खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले कार खरीदना चाहते हैं.इन ऑफर्स के तहत खरीदारों को कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस और कॉर्पोरेट बेनिफिट्स का फायदा मिलता है, जिससे ऑन-रोड कीमत कम हो जाती है.

इसके अलावा Syros, Carens Clavis और Carens Clavis EV जैसे अन्य मॉडल भी डीलरशिप पर मिलने वाले इंसेंटिव के साथ उपलब्ध हैं.

किआ सोनेट और सेल्टोस पर डिस्काउंट ऑफर

मार्च 2026 में Kia Sonet पर कुल मिलाकर 30,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है. इस ऑफर में 10,000 रुपये की नकद छूट, 10,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 10,000 रुपये के कॉर्पोरेट लाभ शामिल हैं. ये कॉम्पैक्ट एसयूवी लाइनअप में सबसे किफायती मॉडलों में से एक है और Tata Nexon, Hyundai Venue और Maruti Suzuki Brezza जैसे अन्य लोकप्रिय मॉडलों को टक्कर देती है.किआ सेल्टोस मिड-साइज सेगमेंट की एक और एसयूवी है और खरीदार 20,000 रुपये के एक्सचेंज बोनस और एक्सटेंडेड वारंटी पैकेज का लाभ उठा सकते हैं. ये एसयूवी हुंडई क्रेटा, होंडा एलिवेट और स्कोडा कुशाक जैसे लोकप्रिय मॉडलों को टक्कर देती है.

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साइरोस, कैरेंस क्लैविस और कैरेंस क्लैविस ईवी पर छूट

Kia Syros पर 40,000 रुपये या उससे ज्यादा तक का डिस्काउंट मिल रहा है. इनमें 10,000 रुपये की नकद छूट, 20,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 10,000 रुपये का कॉर्पोरेट ऑफर शामिल है.Kia Carens Clavis में भी वही फायदे मिलते हैं, जिनमें 10,000 रुपये की नकद छूट, 20,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 10,000 रुपये का कॉर्पोरेट ऑफर शामिल है. वहीं, Kia Carens Clavis EV में 20,000 रुपये तक की नकद छूट, 20,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 10,000 रुपये का कॉर्पोरेट ऑफर मिलता है. इस तरह कुल फायदे 50,000 रुपये या उससे भी ज्यादा हो जाते हैं.

मौजूदा Kia मालिकों के लिए डिस्काउंट

Kia अपनी कारों के मौजूदा मालिकों के लिए भी एक खास बोनस स्कीम पेश कर रही है. ये स्कीम चुनिंदा मॉडल्स पर लागू होती है और खरीदार को मिलने वाले कुल डिस्काउंट में और बढ़ोतरी करती है.

मार्च में मिलने वाले डिस्काउंट क्यों खास हैं

मार्च आमतौर पर ऑटो इंडस्ट्री में ज्यादा डिस्काउंट का महीना होता है, क्योंकि निर्माता फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले अपनी इन्वेंट्री क्लियर करना चाहते हैं. Kia की SUVs और MPVs खरीदने वाले संभावित ग्राहकों के लिए ये डिस्काउंट और अधिक फायदा पहुंचाते हैं, जिसमें एक्सचेंज और कॉर्पोरेट बेनिफिट्स भी शामिल हैं.

Election 2026 Dates: बंगाल-तमिलनाडु समेत 5 राज्यों में चुनाव, BJP की चुनौतियां और विपक्ष की ताकत क्या? जानें राष्ट्रीय राजनीति पर कितना असर…

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भारत में अगले कुछ हफ्तों में पांच राज्यों- असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. ये चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश मिलाकर देश की आबादी का लगभग एक पांचवां हिस्सा हैं.

यानी करीब 20 करोड़ लोग इन जगहों पर रहते हैं. इनकी आबादी मिलाकर देश की कुल जनसंख्या का करीब 17-18 प्रतिशत है. यहां से लोकसभा में 116 सांसद चुने जाते हैं, जो कुल 543 सीटों का करीब 21 प्रतिशत है. राज्यसभा में भी इन राज्यों के विधायक मिलकर 51 सदस्य (करीब 21 प्रतिशत) भेजते हैं, जो विधानसभा के सदस्य ही चुनते हैं. मतलब ये चुनाव जीतने वाली पार्टियों का संसद में दबदबा बहुत बढ़ जाएगा.

BJP के लिए क्यों खास है ये चुनाव?

अभी हालात ऐसे हैं कि BJP और NDA केंद्र में मजबूत हैं. 2024 लोकसभा के बाद BJP ने दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में बड़ी जीत हासिल की है, लेकिन इन पांच जगहों में से सिर्फ असम में ही NDA की सरकार है. असम में हिमंता बिस्वा सरमा मुख्यमंत्री हैं, बाकी चार में विपक्ष मजबूत है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की TMC, तमिलनाडु में एमके स्टालिन की DMK, केरल में पिनराई विजयन की LDF और पुडुचेरी में एन. रंगास्वामी की AINRC-BJP गठबंधन सत्ता में है.

BJP पार्टी दक्षिण भारत और पूर्व में अपना विस्तार करना चाहती है. तमिलनाडु और केरल में BJP को अब तक कभी सरकार नहीं मिली. पश्चिम बंगाल में 2021 में TMC ने 215 सीटें जीती थीं, BJP को 77 मिली थीं. 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP ने 303 सीटें जीतीं थीं यानी 56 प्रतिशत, लेकिन ये सफलता पूरे देश में नहीं फैली. तमिलनाडु और केरल में BJP को एक भी सीट नहीं मिली. पश्चिम बंगाल में सिर्फ 18 सीटें मिलीं.

अब BJP डबल इंजन सरकार (केंद्र और राज्य दोनों में एक ही गठबंधन) का नारा दे रही है. BJP सांसद भोला सिंह ने कहा है कि जहां डबल इंजन नहीं है, वहां PM मोदी की योजनाएं लोगों तक नहीं पहुंच पातीं. इस वजह से डबल इंजन सरकार जरूरी है, जिससे विकास चार गुना तेज होगा.

विपक्ष के लिए भी ये चुनाव अस्तित्व की लड़ाई

कांग्रेस और INDIA गठबंधन इन राज्यों में मजबूत रहना चाहता है. दयानिधि मारन जैसे DMK नेता कह रहे हैं कि PM मोदी ने आखिरकार चुनाव आयोग को तारीखें ऐलान करने की इजाजत दी. संजय राउत जैसे विपक्षी नेता चुनाव आयोग पर तंज कस रहे हैं कि वो BJP का एक्सटेंडेड ब्रांच बन गया है.

असम में BJP मजबूत है, लेकिन CAA और NRC जैसे मुद्दे अभी भी गर्म हैं. पश्चिम बंगाल में TMC और BJP की कड़ी टक्कर होगी, जहां हिंसा और पोस्ट-पोल वायलेंस के आरोप लगते रहे हैं. तमिलनाडु में डीएमके vs AIADMK की पुरानी जंग है, BJP AIADMK के साथ गठबंधन में है. केरल में लेफ्ट फ्रंट तीसरी बार सत्ता बचाने की कोशिश में है. हालांकि, राज्य में ऐसा कभी नहीं हुआ. पुडुचेरी छोटा है लेकिन गठबंधन की राजनीति यहां भी दिलचस्प है.

ECI ने चुनावी राज्यों में तैयारियों का लिया जायजा

चुनाव आयोग ने पिछले हफ्तों में सभी राज्यों का दौरा किया. फरवरी में असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी, 6-7 मार्च को केरल और 9-10 मार्च को पश्चिम बंगाल में तैयारियों का जायजा लिया गया. इन दौरों में राजनीतिक दलों, पुलिस और प्रशासन से मीटिंग हुई और हिंसा रोकने, मतदाता सूची सुधारने, EVM-VVPAT जांच और CAPF तैनाती पर फोकस रहा. वहीं, मतदाता सूची की अपील की डेडलाइन आज खत्म हो रही है. रिपोर्ट्स कह रही हैं कि इस बार चरण कम हो सकते हैं. 2021 में बंगाल में 8 चरण थे, अब शायद 5-6 रह जाएंगे. मतदान अप्रैल-मई में होने की उम्मीद है, नतीजे मई की शुरुआत में आ सकते हैं.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये चुनाव सिर्फ सत्ता बदलने के नहीं हैं, बल्कि ये बताएंगे कि BJP दक्षिण और पूर्व में कितना आगे बढ़ पाती है. विपक्ष कितना एकजुट रह पाता है और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकतें कैसे मजबूत या कमजोर होती हैं. चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद देश में चुनावी आग लग जाएगी. पार्टियां रैलियां, घोषणापत्र और आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर देंगी. देखते हैं कौन जीतता है और देश की राजनीति किस दिशा में जाती है.

36 हजार किराया, 15 हजार राशन.1.5 लाख कमाने पर भी सिर्फ 20 हजार बचत…

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भारत का आईटी हब माना जाने वाला बेंगलुरु हाई सैलरी वाली नौकरियों और मॉडर्न लाइफस्टाइल के लिए मशहूर है. हर साल हजारों युवा बेहतर करियर की तलाश में यहां पहुंचते हैं. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने बड़े शहरों की महंगी जिंदगी की हकीकत को सामने ला दिया है.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनुभव

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने अपने कजिन का अनुभव साझा किया है. उसने बताया कि उसका कजिन कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक टेक कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी करने बेंगलुरु गया था. उसे करीब 1.5 लाख रुपये महीने की सैलरी मिल रही थी. परिवार और दोस्तों को लगा कि इतनी बड़ी सैलरी के साथ उसकी जिंदगी काफी आरामदायक होगी. घर पर सभी को यही लगा कि उसने बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. बड़ी टेक जॉब, बड़ा शहर और बड़ी सैलरी.

रोजमर्रा के खर्चों ने बदली तस्वीर

हालांकि कुछ महीनों बाद ही उसे एहसास हुआ कि बड़े शहर में खर्च भी उतने ही बड़े होते हैं. ऑफिस के पास एक छोटे से अपार्टमेंट का किराया करीब 36 हजार रुपये था. वहीं खाने-पीने और किराने का खर्च हर महीने 13 से 15 हजार रुपये तक पहुंच जाता था. शहर में भारी ट्रैफिक की वजह से कैब और ऑटो पर भी हर महीने करीब 6 से 8 हजार रुपये खर्च हो जाते थे. इसके अलावा ऑनलाइन फूड ऑर्डर, कॉफी और वीकेंड पर बाहर घूमने-फिरने में करीब 10 से 12 हजार रुपये खर्च हो जाते थे. इस दौरान Swiggy जैसे फूड डिलीवरी ऐप्स का इस्तेमाल भी खर्च बढ़ाने की एक वजह बन गया.

छिपे खर्चों ने कम कर दी बचत

इन खर्चों के अलावा कुछ ऐसे छोटे-छोटे खर्च भी थे जिन पर आमतौर पर ध्यान नहीं जाता. जैसे अलग-अलग ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन, मेडिकल खर्च, अचानक आने वाले बिल और घर पैसे भेजना. इन सब खर्चों के बाद महीने के आखिर में मुश्किल से 15 से 20 हजार रुपये ही बच पाते थे.

लोगों ने दिए खर्च कम करने के सुझाव

पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी राय दी. कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया कि अगर ऑफिस से थोड़ा दूर और मेट्रो लाइन के पास घर लिया जाए तो किराया काफी कम हो सकता है. वहीं कई लोगों ने माना कि बड़े शहरों में अच्छी सैलरी जरूर मिलती है, लेकिन बढ़ती महंगाई और लाइफस्टाइल खर्च बचत को काफी कम कर देते हैं.

Iran NOPO Unit: कितनी ताकतवर है ईरान की NOPO यूनिट, जिसके पास है नए सुप्रीम लीडर की सुरक्षा का जिम्मा…

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Iran NOPO Unit: मुज्तबा खामेनेई को हाल ही में ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है. उनकी सुरक्षा एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुकी है. उन्होंने अपने पिता अयातुल्ला खामेनेई की मृत्यु के बाद पद को संभाला है.

इस घटना के बाद ईरान को लीड करने वाले सुप्रीम लीडर की सुरक्षा के लिए NOPO नाम के एक खास विशेष बल को तैनात किया गया है. काले कपड़े पहनने वाली इस टुकड़ी को ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के अंदर सबसे ज्यादा गोपनीय और सबसे ज्यादा ट्रेंड बलों में से एक माना जाता है.

क्या है NOPO?

NOPO को औपचारिक रूप से निरूयेह विजेह पासदारान विलायत के नाम से जाना जाता है. यह ईरान का सबसे ताकतवर बल है. यह एक एलिट टैक्टिकल यूनिट के रूप में काम करता है. इसे आतंकवाद रोधी अभियान, बंधकों को छुड़ाने और प्रमुख राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा जैसे उच्च जोखिम वाले मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है. जब से मुज्तबा खामेनेई ने पद को संभाला है तब से यह टुकड़ी कथित तौर पर उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा व्यवस्था को संभाल रही है.

NOPO का युद्ध कौशल

NOPO टुकड़ी के सदस्य काफी मुश्किल प्रशिक्षण कार्यक्रम से गुजरते हैं. यह उन्हें शहरी और युद्ध दोनों तरह के हालातों के लिए तैयार करता है. उनकी तैयारी में एडवांस्ड मार्शल आर्ट, आत्मरक्षा की तकनीक, सामरिक निशानेबाजी, शहरी बाधाओं को तेजी से पार करने के लिए पार्कौर और गोताखोरी के अभियान शामिल होते हैं.

काफी मुश्किल भर्ती प्रक्रिया

NOPO के लिए भर्ती प्रक्रिया काफी ज्यादा कठोर मानी जाती है. उम्मीदवारों का चयन आमतौर पर दूसरे विशिष्ट पुलिस या सुरक्षा इकाइयों से कड़ी छंटनी के बाद किया जाता है. भर्ती के लिए उच्च शारीरिक फिटनेस, मजबूत मानसिक दृढ़ता, होशियारी का आकलन और ऊंचाई के साथ-साथ सहनशक्ति के स्तर जैसे खास शारीरिक मापदंडों को शामिल किया जाता है. काफी कम संख्या में आवेदक इन सभी परीक्षाओं को पास कर पाते हैं.

संगठनात्मक ढांचा और तैनाती

NOPO यूनिटी की आधिकारिक तौर पर 1991 में स्थापना की गई थी और इसका उद्देश्य आतंकवाद विरोधी और बंधक बचाव अभियानों को संभाला था. हालांकि यह बल काफी छोटा है लेकिन इसके बावजूद भी इसे 6 ब्रिगेड में बांटा गया है. इनमें से चार ब्रिगेड तेहरान में तैनात है और बाकी यूनिट ईरान के प्रमुख शहरों मशहद और इस्फहान में स्थित है. इससे देश के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा खतरों पर तेजी से कार्रवाई करना संभव हो जाता है.

CG: गौधाम योजना को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासत! सीएम साय ने कांग्रेस पर साधा निशाना तो विपक्ष ने ऐसे किया पलटवार…

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया गौधाम योजना का शुभारंभ। मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए पशुपालकों से सीधे संवाद किया। सभा को संबोधित करते हुए सीएम साय ने कांग्रेस पर निशाना साधा .

छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार ने प्रदेश में गौवंश की सुरक्षा, सेवा के संकल्प के साथ गौधाम योजना पर अमल शुरू कर दिया है। दावा है कि योजना में सड़कों पर आवारा धूमते गौवंश की समस्या हल होगी, हादसों में कमी आएगी। मुख्यमंत्री ने इसी योजना के मंच से लगे हाथ पिछली कांग्रेस सरकार की गौठान योजना को भ्रष्टाचार का जरिया बताते हुए कांग्रेस के सत्ता से हाथ धोने के लिए गौमाता की हाय लगने की बात कही। जिस पर कांग्रेस ने भी तीखा रिएक्शन दिया।

शनिवार को बिलासपुर से पूरे प्रदेश के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक नई योजना का शुभारंभ किया नाम है ‘गौधाम योजना।’ बिलासपुर की गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी से CM साय ने प्रदेशभर के 11 जिलों के 29 गौधामों का शुभारंभ किया। साथ ही पशुपालक सम्मेलन का आयोजन भी हुआ।

 मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए पशुपालकों से सीधे संवाद किया।

मंच से CM साय ने विपक्ष पर करारा प्रहार किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि…गौमाता की आह का नतीजा है कि जनता ने कांग्रेस को रिजेक्ट कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बीजेपी कार्यकर्ता के तौर पर कांग्रेस काल में गौठानों का निरीक्षण किया था, तो कई जगह गाय तो दूर गाय का चित्र तक नहीं था, ना बिजली थी -पानी का इंतजाम।

विपक्ष के आरोपों से इतर। गौधाम योजना को लेकर सरकार का दावा है, योजना के तहत प्रदेश में 1460 गौधाम बनेंगे, 26 को स्वीकृति मिली है, गौधामों में आवारा घूमते, निराश्रित गौवंश को रखा जाएगा जिससे हादसों में कमी आएगी, योजना के तहत – चरवाहे को मानदेय, पशुओं को चारा समेत सारी व्यवस्था पहले से एक साथ की गई है..सवाल है क्या ये योजना जमीन पर गौवंश की सुरक्षा और हादसों पर नियंत्रण कर पाएगी ?

GST fraud : फर्जी फर्म का पर्दाफाश, ‘हिंदुस्तान कॉर्पोरेशन’ की आड़ में करोड़ो की टैक्स चोरी!

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फर्जी फर्म से 12.5 करोड़ की टैक्स चोरी। DGGI ने अमन सिंह को गिरफ्तार किया.GST नेटवर्क की जांच जारी।

 pur GST fraud छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में DGGI ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए GST घोटाले के आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने हिंदुस्तान कॉर्पोरेशन के नाम से एक फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी को अंजाम दिया था।

12.5 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी

मिली जानकारी के अनुसार आरोपी की पहचान अमन सिंह के रूप में हुई है जो कबीर नगर का निवासी है। आरोपी ने हिंदुस्तान कॉर्पोरेशन नामक एक फर्जी फर्म खड़ी की थी। इस फर्म का उपयोग बड़े पैमाने पर GST घोटाले के लिए किया जा रहा था। जांच में इस फर्जीवाड़े से लगभग 12.5 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी होने का खुलासा हुआ है। सबूतों के आधार पर DGGI ने आरोपी अमन सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

अमन सिंह पर GST घोटाले में संलिप्तता और सरकार को भारी नुकसान पहुँचाने का आरोप है। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जा रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

छत्तीसगढ़ में मौसम ने बदली चाल! तेज हवाओं के साथ हो सकती है बारिश…

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Weather Upate: छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम में यह बदलाव आने वाले दिनों में लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत दे सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी के साथ हवा चलने की स्थिति बन सकती है।

रायपुर में धुंध रहने के आसार हैं

राजधानी रायपुर की बात करें तो यहां मौसम थोड़ा अलग रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक रायपुर में धुंध रहने के आसार हैं, जिससे सुबह और शाम के समय हल्की धुंध देखने को मिल सकती है। ऐसे में लोगों को वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के कारण वातावरण में नमी बढ़ने से धुंध जैसी स्थिति बन सकती है।

प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 39.6°C बिलासपुर में दर्ज

प्रदेश के तापमान की बात करें तो कई शहरों में गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। सबसे अधिक तापमान बिलासपुर में 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। वहीं सबसे कम तापमान अंबिकापुर में 14.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है और कुछ जगहों पर बारिश के कारण गर्मी में हल्की कमी भी आ सकती है।

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