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CG: राजनांदगांव के विकास को नई गति: 2 हजार सीटर अत्याधुनिक ऑडिटोरियम सहित 226 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों…

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राजनांदगांव को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित मॉडल सिटी के रूप में विकसित करेंगे : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय…

राजनांदगांव के विकास को नई गति: 2 हजार सीटर अत्याधुनिक ऑडिटोरियम सहित 226 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से नगर पालिक निगम राजनांदगांव के विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने 226 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से होने वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। उन्होंने  राजनांदगांववासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह भूमिपूजन केवल विकास कार्यों की शुरुआत नहीं, बल्कि शहर के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ प्रदेश के संतुलित और समावेशी विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में राजनांदगांव की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि शहर की बढ़ती आबादी के अनुरूप नागरिक सुविधाओं का विस्तार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इन परियोजनाओं के माध्यम से शहर के हर वार्ड तक विकास की किरण पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अमृत मिशन 2.0 के तहत शहर में घरेलू अपशिष्ट जल के वैज्ञानिक उपचार के लिए दो नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इससे गंदे पानी को सीधे नदियों और नालों में जाने से रोका जा सकेगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नागरिकों के स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नगरोउत्थान योजना के अंतर्गत सड़कों का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिससे यातायात अधिक सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राजनांदगांव में 2 हजार सीटर का विशाल अत्याधुनिक ऑडिटोरियम बनाया जाएगा, जो संस्कारधानी की कला, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों को नया मंच प्रदान करेगा। इससे स्थानीय कलाकारों, साहित्यकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के व्यापक अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह ऑडिटोरियम शहर की एक नई पहचान बनेगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट नगर के उन्नयन, नाली निर्माण, पाइपलाइन विस्तार तथा शहर के 51 वार्डों में मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए विशेष बजट प्रावधान किए गए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के लिए नए संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि राजनांदगांव केवल स्वच्छता सर्वेक्षण में भाग लेने वाला शहर न रहे, बल्कि देश के अग्रणी स्वच्छ शहरों में अपनी पहचान बनाए। उन्होंने कहा कि संसाधनों का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से विकास कार्यों की गति तेज की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के मार्गदर्शन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से राजनांदगांव तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनके विजन और जनसहभागिता से शहर को छत्तीसगढ़ की एक मॉडल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने जिले के विकास से संबंधित लंबित अधोसंरचना प्रस्तावों को भी शीघ्र स्वीकृत करने का आश्वासन दिया।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राजनांदगांव उनके दिल के बेहद करीब है और आज का दिन शहर के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि संकल्प बजट 2026-27 में राजनांदगांव जिले के समग्र विकास के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। डॉ. सिंह ने बताया कि शिवनाथ नदी के संरक्षण, संवर्द्धन और विकास के लिए 250 करोड़ रुपये की योजनाएँ स्वीकृत की गई हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों के माध्यम से अनेक विकास कार्य प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए 20 करोड़ रुपये, स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 20 करोड़ रुपये, नगरीय प्रशासन विभाग के अंतर्गत 60 करोड़ रुपये, तथा लोक निर्माण विभाग के माध्यम से लगभग 200 करोड़ रुपये के कार्य शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि खेल सुविधाओं के विकास के लिए हॉकी स्टेडियम में टर्फ सहित अन्य सुविधाओं के निर्माण हेतु 8 करोड़ 80 लाख रुपये तथा दिग्विजय स्टेडियम में खेल अधोसंरचना सुदृढ़ करने के लिए 6 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है, जिससे युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।

कार्यक्रम में राजनांदगांव जिले के प्रभारी मंत्री श्री गजेंद्र यादव, सांसद श्री संतोष पांडेय, छत्तीसगढ़ भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह तथा महापौर श्री मधुसूदन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि भूमिपूजन के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण, सड़क चौड़ीकरण एवं उन्नयन, 2 हजार सीटर ऑडिटोरियम निर्माण, नाला निर्माण, पाइपलाइन विस्तार, ट्रांसपोर्ट नगर उन्नयन, कचरा प्रबंधन संयंत्र स्थापना तथा स्वच्छता संबंधी कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं से राजनांदगांव के 51 वार्डों में बुनियादी सुविधाओं का व्यापक विस्तार होगा और शहर के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

CG: गोधन संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 11 जिलों में 29 गौधाम का किया शुभारंभ…

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जोगीपुर में राज्य के प्रथम गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास: गौधाम योजना से बेसहारा एवं घुमंतू गौवंश को मिलेगा सुरक्षित आश्रय’

गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री साय’

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना का शुभारंभ किया। योजना के प्रथम चरण में प्रदेश के 11 जिलों में 29 गौधामों का संचालन प्रारंभ हो गया है।

गोधन संरक्षण की दिशा में बड़ा कदममुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर बिलासपुर जिले के  कोटा विकासखण्ड के ग्राम जोगीपुर में राज्य के प्रथम गौ अभ्यारण्य का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जोगीपुर में प्रस्तावित गौ अभ्यारण्य लगभग 184 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसके विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रथम चरण में 1 करोड़ 32 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके पूर्ण होने पर यहां एक साथ लगभग 2500 गौवंश के संरक्षण और देखभाल की व्यवस्था की जा सकेगी।

गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, आस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। गौधाम योजना के माध्यम से बेसहारा एवं घुमंतू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा तथा पशुधन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि गोधन संरक्षण और गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ एमओयू किया गया है। इसके तहत कई जिलों में गाय वितरण का कार्य भी प्रारंभ किया गया है, जिससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौधामों में गौवंश के लिए चारा, पानी और समुचित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य में शासकीय भूमि पर स्थापित सभी गौधाम अब “सुरभि गौधाम” के नाम से जाने जाएंगे। उन्होंने कहा कि गौधामों में पशुपालन, हरा चारा उत्पादन तथा गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस योजना से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है, क्योंकि बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि गौधाम योजना का शुभारंभ एक पुनीत अवसर है। उन्होंने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग है तथा गोधन संरक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है, जब पूरे प्रदेश में एक साथ गौधाम योजना की शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में 10-10 गौधाम चरणबद्ध रूप से स्थापित किए जाएंगे, जिससे गौवंश संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।

छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल ने कहा कि गौ माता हमारे अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और गौवंश के संरक्षण के लिए राज्य सरकार सुनियोजित कार्ययोजना के साथ कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में विधायक श्री अमर अग्रवाल, श्री धरमलाल कौशिक, श्री धर्मजीत सिंह, श्री सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, कमिश्नर बिलासपुर श्री सुनील जैन, आईजी श्री रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, एसएसपी श्री रजनेश सिंह, संचालक पशु चिकित्सा श्री चंद्रकांत वर्मा सहित बड़ी संख्या में गौपालक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

टैक्सपेयर्स के लिए ‘सुपर अलर्ट’! 1 अप्रैल से लागू हो रहे हैं ये 7 बड़े टैक्स बदलाव, आपकी जेब पर सीधा असर…

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टैक्सपेयर्स के लिए ‘सुपर अलर्ट’!

केंद्रीय बजट 2026 में इनकम टैक्स एक्ट में कई संशोधन किए गए, जिनका मकसद टैक्सपेयर्स के लिए नियमों को आसान बनाना और प्रोसेस से जुड़े बोझ को कम करना था. मुख्य बदलावों में TCS दरों में कमी, STT में बढ़ोतरी, और रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन में एक्सटेंशन शामिल है. सरकार ने उन टैक्सपेयर्स के लिए ITR-3 और ITR-4 फाइल करने की आखिरी तारीख भी बढ़ा दी है, जिनका ऑडिट नहीं होता है. साथ ही, सरकार ने एक बार विदेशी संपत्ति का खुलासा करने का मौका देने जैसे उपायों की भी घोषणा की है. ये बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे. आइए आपको भी विस्तार से समझाने की कोशिश करते हैं.

नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025

नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025, आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल 2026 (वित्त वर्ष 2026-27) से सभी टैक्सपेयर्स पर लागू होगा. यह मौजूदा इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा. हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, और मौजूदा स्लैब ही जारी रहेंगे. ये बदलाव इसलिए अहम हैं, क्योंकि भारत में 1961 से ही इनकम टैक्स एक्ट लागू है. लेकिन तब से लेकर अब तक इकोनॉमी, टेक्नोलॉजी और यहां तक ​​कि लेबर सेक्टर में भी काफी बदलाव आ चुके हैं.

ITR फाइल करने की आखिरी तारीख में विस्तार

बजट 2026 में उन टैक्सपेयर्स के लिए ITR-3 और ITR-4 फाइल करने की आखिरी तारीख भी बढ़ा दी गई है, जिनका ऑडिट नहीं होता है. अब वे संबंधित टैक्स ईयर के खत्म होने के बाद 31 अगस्त तक अपना रिटर्न फाइल कर सकेंगे. यह नई समय सीमा वित्त वर्ष 2025-26 पर भी लागू होगी. हालांकि, ITR-1 और ITR-2 फाइल करने की आखिरी तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह तारीख पहले की तरह ही 31 जुलाई रहेगी, जो संबंधित टैक्स वर्ष के खत्म होने के बाद आती है. टैक्स ऑडिट की आखिरी तारीख भी पहले की तरह ही 31 अक्टूबर बनी रहेगी.

रिवाइज्ड ITR फाइल करने की आखिरी तारीख में बदलाव

रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर संबंधित वित्त वर्ष की 31 मार्च कर दिया गया है. हालांकि, अगर कोई टैक्सपेयर 31 दिसंबर के बाद रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करता है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क देना होगा. वहीं, देर से रिटर्न (Belated Returns) फाइल करने की आखिरी तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

TCS में किया गया बदलाव

पिछले बजट की तरह ही, बजट 2026 ने नियमों का पालन आसान बनाने, रिफंड में देरी कम करने और टैक्सपेयर्स के बीच की उलझन को दूर करने के लिए TCS दरों को तर्कसंगत बनाया है.

अप्रैल 2026 से निम्नलिखित TCS दरें लागू होंगी:

शराब की बिक्री: शराब पर TCS दर 1 फीसदी से बढ़ाकर 2 फीसदी कर दी जाएगी.

तेंदू पत्तों की बिक्री: इस उत्पाद की बिक्री पर TCS दर 2 फीसदी होगी, जो पहले की 5 फीसदी दर से कम है.

कबाड़ की बिक्री: बजट 2026 ने कबाड़ की बिक्री पर TCS दर को मौजूदा 1 फीसदी से बढ़ाकर 2 फीसदी कर दिया है.

मिनिरल्स (कोयला, लिग्नाइट, या लौह अयस्क) की बिक्री: इन उत्पादों की बिक्री पर TCS दर 1 फीसदी से बढ़ाकर 2 फीसदी कर दी गई है.

विदेशों में LRS के तहत भेजी गई रकम: TCS दरों को मौजूदा डबल टैक्स (5 फीसदी और 20 फीसदी) से घटाकर, बिना किसी सीमा के, एक ही 2 फीसदी की दर पर ला दिया गया है.

एजुकेशन और मेडिकल के लिए LRS के तहत भेजी गई रकम: ऊपर बताए गए मामलों के लिए TCS दर 5 फीसदी से घटाकर 2% कर दी गई है.

सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स में बढ़ोतरी

भारतीय शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&;O) का कारोबार करने वालों के लिए एक बड़े झटके के तौर पर, केंद्रीय बजट ने इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट के लिए सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स में बढ़ोतरी की घोषणा की है. घोषणा के अनुसार, फ्यूचर्स पर STT 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया जाएगा, और ऑप्शंस के लेनदेन पर STT 0.1 फीसदी से बढ़ाकर 0.15 फीसदी कर दिया जाएगा. ये बदलाव भी अप्रैल 2026 से लागू होंगे. सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स एक प्रत्यक्ष कर है जिसे सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर सिक्योरिटी (जैसे इक्विटी शेयर, फ्यूचर्स और ऑप्शंस) की हर खरीद और सेल पर लगाया जाता है.

बायबैक टैक्सेशन में बदलाव

सरकार ने कहा कि शेयरों के बायबैक से मिलने वाली किसी भी रकम पर 1 अप्रैल 2026 से कैपिटल गेन्स के तौर पर टैक्स लगेगा. पहले, शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को ‘डीम्ड डिविडेंड’ माना जाता था और उस पर लागू स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स लगता था. हालांकि, प्रमोटर शेयरहोल्डर्स को एक “डिफरेंशियल बायबैक टैक्स” देना होगा, जिसकी प्रभावी दर कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए 22 फीसदी और नॉन-कॉर्पोरेट प्रमोटर्स के लिए 30 फीसदी होगी.

डिविडेंड से ब्याज खर्चों की कटौती

केंद्रीय बजट 2026 के अनुसार, अप्रैल 2026 से, टैक्सपेयर्स डिविडेंड इनकम या म्यूचुअल फंड यूनिट्स से होने वाली इनकम कमाने के लिए किए गए ब्याज खर्चों की कटौती अब नहीं कर पाएंगे. ऐसे ब्याज खर्चों के लिए पहले दी जाने वाली कटौतियां हटा दी गई हैं; इसका मतलब है कि डिविडेंड इनकम पर लागू स्लैब रेट के हिसाब से पूरा टैक्स लगेगा, जिससे पहले की 20 फीसदी ब्याज कटौती की सीमा खत्म हो जाएगी.

NMDC ने एक वित्तीय वर्ष में 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का किया ऐतिहासिक रिकॉर्ड…

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NMDC का नया मील का पत्थर’

भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक कंपनी NMDC ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक ही वित्तीय वर्ष में 50 मिलियन टन (MT) लौह अयस्क का उत्पादन कर देश की पहली खनन कंपनी बनने का गौरव हासिल किया है।

1958 में भारत के लौह अयस्क संसाधनों के विकास के लिए स्थापित, यह नवरत्न CPSE, इस्पात मंत्रालय के अधीन, 1978 में लगभग 10 MT का उत्पादन करती थी।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “दशकों में, उत्पादन पांच गुना बढ़कर FY 2025-26 में ऐतिहासिक 50 MT तक पहुंच गया है, जो कंपनी के भारत के लौह अयस्क आपूर्ति श्रृंखला के रीढ़ में बदलने का संकेत है।”

NMDC का 50 मिलियन टन के मील के पत्थर तक पहुंचना हाल के वर्षों में विकास में तेज वृद्धि को भी दर्शाता है।

2015 से उत्पादन लगभग दो-तिहाई बढ़कर 30 MT से 50 MT तक पहुंच गया है, जिसमें पिछले चार वर्षों में वर्तमान क्षमता का लगभग एक-पांचवां हिस्सा जोड़ा गया है, जो कंपनी के इतिहास में सबसे तेज विस्तार चरण को दर्शाता है। NMDC लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अमितावा मुखर्जी ने कहा, “50 मिलियन टन तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह NMDC 2.0 के तहत हमारी प्रगति को दर्शाता है। जो एक बार दशकों में बनता था, उसे हमने कुछ वर्षों में तेज कार्यान्वयन, जिम्मेदार खनन प्रथाओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता के माध्यम से तेज किया है।”

भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक होने के नाते, यह मील का पत्थर न केवल हमारे संचालन की ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हमें देश के इस्पात पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए कितना विश्वास दिया गया है।

छत्तीसगढ़ और कर्नाटका के खनिज समृद्ध क्षेत्रों में अत्यधिक यांत्रिक संचालन के साथ, NMDC देश की लौह अयस्क सुरक्षा सुनिश्चित करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। कंपनी ने कहा कि वह संचालन उत्कृष्टता, तकनीकी उन्नति और जिम्मेदार खनन प्रथाओं पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखती है, क्योंकि वह विकास के अगले चरण की ओर देखती है। जैसे-जैसे भारत 2030 तक इस्पात उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक बढ़ाने के लक्ष्य की ओर बढ़ता है, लौह अयस्क की स्थिर और विश्वसनीय घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करना एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है।

देश में गरमाया गैस संकट. संसद में भी सांसदों को नहीं मिल रही चाय .

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मध्य पूर्व में बिगड़ हालातों की वजह से देश में गैस संकट पैदा हो गया है. जिसकी वजह से कई फूड रेस्टोरेंट के बंद पड़े हैं, गैस एजेंसियों के बाहर कतारों की खबरें हैं. इसके अलावा देश के कई हिस्सों में लोगों ने इसको लेकर प्रदर्शन भी किया है.

 गैस संकट की आंच संसद तक भी पहुंच गई है. शनिवार को LPG संकट को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई.

सरकार का दावा है कि स्थिति काबू में है और वह डिमांड को पूरा करने के लिए काम कर रही है. लेकिन कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के भारी अंतर को उजागर किया. कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सांसदों को संसद में चाय मिलने में भी दिक्कत हो रही है और उन्होंने कहा कि लोगों ‘कालाबाजारी’ के चलते बढ़ी हुई कीमतों लिए 1500 से 2000 रुपये देने पड़ रहे हैं.

क्या बोले कांग्रेस नेता?

कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि कमी है. मैं रोज़ा (व्रत) रख रहा हूं, लेकिन कल संसद में चर्चा का विषय यह था कि जब सांसदों ने संसद कैंटीन में चाय या कॉफ़ी मांगी, तो उन्हें बताया गया कि यह उपलब्ध नहीं है. और फिर भी, आप दावा करते हैं कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने आगे कहा कि कालाबाजारी की खबरें आ रही हैं, जिसमें कीमतें 1500 से 2000 रुपये तक मांगी जा रही हैं. जावेद खान ने सरकार पर कई आयोर लगाए. उन्होंने कहा कि सरकार भले ही कहे कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. उन्होंने दावा किया कि संसद में ही सांसदों को चाय-कॉफी नहीं मिली, क्योंकि कैंटीन में गैस खत्म हो गई थी. उन्होंने ये भी कहा कि वह खुद रोजा रख रहे हैं, लेकिन संसद में इस मुद्दे पर चर्चा जरूरी थी.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पलटवार

उन्होंने विपक्ष पर जिम्मेदारी न निभाने का आरोप लगाया. निर्मला ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात के कारण सप्लाई चेन में जो चुनौतियां आ रही हैं, उनसे निपटने के लिए सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये का फंड बनाया है, लेकिन विपक्ष इसे सुनने को तैयार नहीं है.

कांग्रेसी नेता बौखला कर झूठ बोल रहा है। संसद भवन की कैंटीन जो सौ रुपए में खाना दे रही है क्या चाय नहीं देती होगी। असंभव।

“US Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग से इन मुस्लिम देशों की बल्ले बल्ले, हो रही तगड़ी कमाई”

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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। जंग ने अब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर असर डालना शुरू कर दिया है।

युद्ध के 15 दिन पूरे होने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इस टकराव से किसे नुकसान हुआ और किसे फायदा मिला? दरअसल, जब भी खाड़ी क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो इसका सबसे पहला असर ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।

पर्शियन गल्फ दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में संघर्ष की स्थिति बनने पर तेल की सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली जाती हैं।

US Iran War: तेल निर्यातक देशों को मिलता है लाभ

– तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से उन देशों को सीधा फायदा होता है जो बड़े पैमाने पर तेल निर्यात करते हैं। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और रूस जैसे देशों की अर्थव्यवस्था को महंगे तेल से बड़ा लाभ मिलता है।

– हालांकि, इस बार स्थिति थोड़ी अलग नजर आ रही है। क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सुरक्षा खतरों की वजह से कई रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है।

– इससे कुछ खाड़ी देशों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का फायदा तेल निर्यातक मुस्लिम देशों को मिल रहा है।

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US Iran war Impact: रूस को मिला आर्थिक और राजनीतिक फायदा

इस पूरे संघर्ष से सबसे ज्यादा फायदा रूस को मिलने की चर्चा हो रही है। रूस पहले से ही दुनिया के बड़े तेल और गैस निर्यातकों में शामिल है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो रूस की आय में भी तेजी से इजाफा होता है। इसके अलावा, राजनीतिक स्तर पर भी रूस को अवसर मिलता है। जब अमेरिका का ध्यान मध्य पूर्व में युद्ध पर केंद्रित रहता है तो यूरोप और पूर्वी यूरोप के अन्य मुद्दों पर उसकी सक्रियता कम हो सकती है। इससे रूस को अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश मिलती है।

चीन की रणनीति भी मजबूत

इस संघर्ष से चीन को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलता दिखाई दे रहा है। चीन लंबे समय से मध्य पूर्व में अपनी आर्थिक और राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को अपने तेल के लिए वैकल्पिक खरीदारों की तलाश रहती है। ऐसे में चीन अपेक्षाकृत कम कीमत पर ईरान से तेल खरीद सकता है। इससे उसे सस्ता ईंधन मिलता है और साथ ही क्षेत्र में उसका प्रभाव भी बढ़ता है।

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हथियार उद्योग की बढ़ती मांग

युद्ध का एक बड़ा आर्थिक लाभ हथियार बनाने वाली कंपनियों को भी मिलता है। अमेरिका, फ्रांस, यूके और रूस की रक्षा कंपनियों को ऐसे समय में बड़े ऑर्डर मिलने लगते हैं। मध्य पूर्व के कई देश क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए मिसाइल सिस्टम, फाइटर जेट और अन्य आधुनिक हथियार खरीदते हैं। इससे रक्षा उद्योग को अरबों डॉलर का कारोबार मिलता है।

इजराइल की रणनीतिक सोच

ईरान और इजराइल के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। इजराइल हमेशा ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमता को अपने लिए बड़ा खतरा मानता रहा है। ऐसे में यदि युद्ध के कारण ईरान का सैन्य ढांचा कमजोर होता है तो इसे इजराइल अपने लिए रणनीतिक राहत के रूप में देखता है, भले ही संघर्ष के दौरान उसे भी नुकसान झेलना पड़े।

घरेलू राजनीति पर भी असर

कई बार युद्ध का लाभ सीधे देशों को नहीं बल्कि वहां के नेताओं को मिलता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद के मुद्दे को आगे रखकर सरकारें घरेलू असंतोष से ध्यान हटाने की कोशिश करती हैं। ईरान और अमेरिका दोनों में यह रणनीति अलग-अलग समय पर देखने को मिलती रही है। अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, हथियार उद्योग, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

Silver Rate Today: जंग के बीच चांदी में बड़ी गिरावट! झटके में 11,000 गिरे दाम, अब इतना सस्ता हो गया सिल्वर?

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारत में चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 13 मार्च 2026 को सर्राफा बाजार में चांदी के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार राजधानी दिल्ली में चांदी की कीमत ₹11,000 गिरकर ₹2,65,500 प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई। इससे पहले पिछले कारोबारी दिन चांदी ₹2,76,500 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखी गई। यहां चांदी करीब 3.24 प्रतिशत यानी ₹8,683 गिरकर ₹2,59,279 प्रति किलो पर आ गई, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह ₹2,67,962 प्रति किलो पर बंद हुई थी। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार एक किलो चांदी की कीमत करीब ₹7,813 घटकर ₹2.60 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। इससे पहले यह करीब ₹2.68 लाख प्रति किलो थी। गुडरिटर्न्स की रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू बाजार में चांदी की कीमत आज करीब ₹5,000 गिरकर ₹2,75,000 प्रति किलो तक आ गई। चूंकि शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहता है, इसलिए फिलहाल यही कीमतें मान्य मानी जा रही हैं।

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International Market: वैश्विक बाजार में भी दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी के भाव दबाव में हैं। हाजिर चांदी का भाव गिरकर करीब 83.14 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और कमोडिटी बाजार में अस्थिरता की वजह से कीमती धातुओं के दाम में उतार-चढ़ाव जारी है।

All Time High से बड़ी गिरावट

दिलचस्प बात यह है कि इसी साल 29 जनवरी 2026 को चांदी का वायदा भाव ₹4,20,048 प्रति किलो के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन उसके बाद बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी की कीमत लगभग ₹2.30 लाख प्रति किलो थी, जो जनवरी के अंत तक बढ़कर ₹3.86 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद पिछले करीब 44 दिनों में चांदी की कीमत में करीब ₹1,25,445 तक की गिरावट दर्ज की गई है।

भारत में सोना-चांदी के भाव कैसे तय होते हैं

भारत में सोना और चांदी की कीमतें कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करती हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार, डॉलर की स्थिति, कच्चे तेल की कीमत, आयात शुल्क, जीएसटी और घरेलू मांग-आपूर्ति का बड़ा असर होता है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA), मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और अंतरराष्ट्रीय बाजार के आंकड़ों के आधार पर रोजाना इन धातुओं के दाम तय होते हैं। शादी-विवाह का सीजन, निवेश की मांग और आर्थिक हालात भी इनकी कीमतों को प्रभावित करते हैं।

ईरान-अमेरिका संघर्ष: तेल संकट और कूटनीतिक विरोधाभास…

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ईरान के विदेश मंत्री का अमेरिका पर हमला

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक कूटनीति में एक अनोखा विरोधाभास उत्पन्न किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को अमेरिका को ‘पाखंडी’ बताते हुए उस पर तीखा हमला किया।

अराघची का कहना है कि जो अमेरिका पहले भारत पर रूसी तेल का आयात न करने का दबाव बना रहा था, वही अब युद्ध के कारण उत्पन्न तेल संकट के चलते रूस से तेल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

अराघची की आलोचना और अमेरिका की नीति

अराघची ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से अमेरिका की निंदा की। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन ने महीनों तक भारत पर दबाव डाला कि वह रूसी तेल का आयात बंद करे, लेकिन अब जब ईरान के साथ संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव बढ़ गया है, तो वह देशों को वही तेल खरीदने के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने लिखा, “अमेरिका ने भारत को धमकाकर रूस से तेल का आयात बंद करवाने की कोशिश की।”

यूरोपीय सरकारों पर आरोप

अराघची ने यूरोपीय सरकारों पर भी आरोप लगाया कि वे रूस के खिलाफ अमेरिकी समर्थन प्राप्त करने के लिए ईरान के खिलाफ एक ‘अवैध युद्ध’ का समर्थन कर रही हैं। उन्होंने कहा, “यूरोप को लगा था कि ईरान के खिलाफ अवैध युद्ध का समर्थन करने से उन्हें रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन मिलेगा। यह बेहद दयनीय है।”

तेल की कीमतों में वृद्धि

ईरान के विदेश मंत्री ने ये टिप्पणियाँ ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के संदर्भ में कीं, जिसमें बताया गया था कि तेल की बढ़ती कीमतों से रूस को राजस्व में भारी बढ़ोतरी हो रही है।

अमेरिका की नई छूट

इन टिप्पणियों के बीच, ट्रंप प्रशासन ने 30 दिनों की एक छूट की घोषणा की है, जिसके तहत विभिन्न देश समुद्र में फंसे हुए रूसी तेल के जहाजों से तेल खरीद सकते हैं। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं।

ईरान का भारत के लिए सुरक्षित मार्ग

संघर्ष के बावजूद, ईरान ने भारत के झंडे वाले दो लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) कैरियर को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि तेहरान इस रणनीतिक जलमार्ग से भारत जाने वाले जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करेगा।

राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर कृषि नीतियों को लेकर उठाए सवाल…

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से जुड़े उनके सवालों का उत्तर देने से बच रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार अपने स्वार्थ के लिए भारतीय कृषि को बलि चढ़ा रही है। राहुल ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी द्वारा दिए गए उत्तरों पर असंतोष व्यक्त किया।

सरकार के जवाब पर असंतोष

राहुल गांधी ने लोकसभा में सीधे सवाल किया कि 2021 में किसानों से किए गए वैधानिक एमएसपी के वादे को अब तक लागू क्यों नहीं किया गया। सरकार ने इस पर सीधे उत्तर देने के बजाय अपनी मौजूदा एमएसपी नीति को दोहराया। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने राज्यों पर एमएसपी बोनस समाप्त करने के लिए दबाव डाला, जिसे उसने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के नाम पर उचित ठहराने की कोशिश की।

अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर सवाल

जब राहुल गांधी ने पूछा कि क्या अमेरिका के साथ व्यापार बाधाओं को कम करने की प्रतिबद्धता भारत की एमएसपी और सार्वजनिक खरीद नीतियों को प्रभावित करती है, तो सरकार ने इस सवाल का भी उत्तर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में ‘गैर-व्यापार बाधाओं’ को कम करने का क्या मतलब है। क्या इसका मतलब एमएसपी व्यवस्था और सरकारी खरीद को कमजोर करना है? सरकार इस सवाल से भी बच रही है।

किसानों के अधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता

राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार न केवल किसानों से किए गए वादों को पूरा करने से इनकार कर रही है, बल्कि अपने स्वार्थ के लिए भारतीय कृषि को भी कुर्बान करने को तैयार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे किसानों के अधिकारों की रक्षा और एमएसपी को सुरक्षित रखने के लिए संसद के अंदर और बाहर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। राहुल गांधी ने इस समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर लगातार निशाना साधा है और चेतावनी दी है कि यह कृषि क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा। भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को एक अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी।

असम में युवा मतदाताओं की भूमिका: 2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी..

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2026 विधानसभा चुनाव की तैयारी

असम में 2026 विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ते हुए, राजनीतिक चर्चाएं धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। राजनीतिक नेता भाषण दे रहे हैं, पार्टियां गठबंधन बना रही हैं, और सोशल मीडिया पर विचारों की भरमार है।

लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि कॉलेज के छात्र इस सब में कहां खड़े हैं?

युवाओं की एक बड़ी संख्या असम के मतदान जनसंख्या का हिस्सा है। कई छात्र 2026 में पहली बार वोट डालेंगे। उनके लिए, यह चुनाव केवल सरकार चुनने का मामला नहीं है, बल्कि उस भविष्य का चुनाव है जिसमें वे जीना चाहते हैं। बेरोजगारी, शिक्षा की गुणवत्ता, बढ़ती कीमतें, बाढ़ नियंत्रण और विकास जैसे मुद्दे उनके जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। इसलिए, छात्रों को राजनीतिक रूप से जागरूक और सक्रिय होना चाहिए।

कुछ कैंपस में सक्रिय बहस

कुछ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक बहसें काफी सक्रिय हैं। छात्र पार्टी नीतियों, नेतृत्व शैलियों और सरकारी निर्णयों पर चर्चा करते हैं। वे सेमिनारों में भाग लेते हैं, छात्र संगठनों में शामिल होते हैं और अपने विचारों को खुलकर व्यक्त करते हैं। सोशल मीडिया भी राजनीतिक अभिव्यक्ति का एक प्रमुख मंच बन गया है। इंस्टाग्राम स्टोरीज, व्हाट्सएप ग्रुप और एक्स पोस्ट विचारों, तर्कों और प्रचार संदेशों से भरे हुए हैं। कई छात्रों के लिए, डिजिटल स्पेस भौतिक बहसों से अधिक प्रभावशाली हो गया है।

चुप्पी और राजनीतिक दूरी

हालांकि, कई कैंपस में चुप्पी है। कुछ छात्र मानते हैं कि राजनीति केवल विभाजन और तनाव पैदा करती है। वे पढ़ाई, परीक्षाओं और करियर की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करते हैं। कई लोग मानते हैं कि राजनीति पर खुलकर बोलने से दोस्ती को नुकसान हो सकता है। कुछ छात्र राजनीतिक चर्चा से बचते हैं ताकि हॉस्टल और कक्षाओं में शांति बनी रहे। इसके अलावा, एक बड़ी संख्या में छात्र राजनीति से निराश हैं। वे महसूस करते हैं कि नेता केवल चुनावों के समय युवाओं को याद करते हैं।

युवा मतदाताओं के लिए सवाल

2026 के चुनाव युवा मतदाताओं के लिए गंभीर सवाल भी लाते हैं। वे किस प्रकार के विकास की इच्छा रखते हैं? क्या वे वर्तमान नीतियों से संतुष्ट हैं? क्या उन्हें प्रतिनिधित्व महसूस होता है? नौकरी के अवसर, स्टार्टअप समर्थन, उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, नशे की लत और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। ब्रह्मपुत्र द्वारा हर साल आने वाली बाढ़ हजारों परिवारों को प्रभावित करती है। छात्र इन वास्तविकताओं से अलग नहीं हैं।

राजनीतिक जागरूकता का महत्व

हालांकि, राजनीतिक जागरूकता का मतलब किसी भी पार्टी का अंध समर्थन नहीं है। इसका मतलब है नीतियों को समझना, नेताओं से सवाल करना और आलोचनात्मक सोच रखना। कैंपस को खुली चर्चा के स्थान होना चाहिए जहां विभिन्न विचारों का सम्मान किया जाए। स्वस्थ बहस लोकतंत्र को मजबूत करती है। चुप्पी इसके विपरीत इसे कमजोर करती है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक भागीदारी दुश्मनी में न बदले। चुनाव अक्सर भावनात्मक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करते हैं। लेकिन छात्रों को सम्मानपूर्वक असहमत होना सीखना चाहिए। एक कैंपस को सीखने का स्थान रहना चाहिए, न कि संघर्ष का।

असम के युवाओं का महत्वपूर्ण क्षण

असम के युवा एक महत्वपूर्ण क्षण में खड़े हैं। 2026 विधानसभा चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच सत्ता की प्रतिस्पर्धा नहीं हैं। ये उन दिशा-निर्देशों के बारे में हैं जिनमें राज्य आने वाले वर्षों में आगे बढ़ेगा। युवा मतदाता उस दिशा को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं।

इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि छात्र राजनीतिक हैं या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या वे सूचित, विचारशील और जिम्मेदार नागरिक हैं। क्या कैंपस सार्थक बहस के केंद्र बनेंगे? या वे चुप्पी के स्थान बने रहेंगे जहां राजनीति से बचा जाता है?

इसका उत्तर न केवल चुनाव को आकार देगा, बल्कि असम के लोकतांत्रिक भविष्य को भी प्रभावित करेगा।