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कम बजट में खरीद सकते हैं ये पोर्टेबल ब्लूटूथ स्पीकर, जानें इनके बारे में

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अगर आप संगीत सुनने के शौकीन हैं और आप अच्छे साउंड के साथ गाना सुनना चाहते हैं तो आप हमारे द्वारा सुझाये गये इन ब्लूटूथ स्पीकर्स में से कोई भी चुन सकते हैं। ये आपको 2000 रूपये तक की रेंज में मिल जायेंगे। इस स्पीकर वजन में हल्के हैं आप इन्हें कहीं भी ले जा सकते हैं।

JBL GO Portable वायरलेस स्पीकर: जेबीएल के इस ब्लूटूथ स्पीकर पर अमेजन पर उपलब्ध हैं। इसे आप 1699 रूपये में खरीद सकते हैं। ये ब्लैक, रेड और ग्रे सहित आठ कलर्स में उपलब्ध हैं।
एमआई कॉम्पेक्ट Bluetooth Speaker 2 – इसकी कीमत मात्र 799 रुपये है। इसे आप अमेजन से खरीद सकतें हैं। सफेद कलर एवं आकर्षक डिजाइन वाले इस स्पीकर में इन-बिल्ट माइक है। शाओमी का कहना है कि यह डिवाइस 6 घंटे का बैटरी बैकअप देता है।

बॉट स्टोन 200 Portable Bluetooth Speakers – यह स्पीकर अमेजन पर प्रोडक्ट ब्लैक, ब्ल्यू और औरेंज कलर में एवेलेबल है। इस स्पीकर की मआरपी 2,999 रुपये है लेकिन यह स्पीकर अमेजन पर मात्र 1,299 रुपये में मिल रहा है।

Portronics POR-821 SoundDrum Wireless Bluetooth 4.2 Stereo Speaker – पॉर्ट्रोनिक्स का यह साउंड ड्रम एफएम और यूएसबी म्यूजिक के साथ आता है। यह स्पीकर ब्लैक, ब्ल्यू एवं ग्रे कलर्स में एवेलेबल है। काफी स्टाइलिश लुक वाले इस स्पीकर की एमआरपी भी 2,999 रुपये है लेकिन अमेजन पर यह 1,699 रुपये में एवेलेबल है।
boAt Stone 650 Wireless Bluetooth Speaker – बोट का यह बेहद स्टाइलिश ब्लूटूथ स्पीकर वाटर एवं डस्ट रेसिस्टेंट फीचर्स के साथ आता है। यह पोर्टेबल स्पीकर है लेकिन इसे माउंट भी किया जा सकता है। 4,990 रुपये एमआरपी का यह प्रोडक्ट 1,999 रुपये में एवेलेबल है।

अगर माइक्रोसॉफ्ट का ये प्लान लागू हो गया होता, तो न्यूयार्क जैसी सुरक्षित बन चुकी होती दिल्ली

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दिल्ली को सुरक्षित बनाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट एवं न्यूयार्क पुलिस विभाग ने मिलकर एक खास योजना बनाई थी। हालांकि इसकी पूरी रिपोर्ट माइक्रोसॉफ्ट ने ही तैयार की थी। दिल्ली पुलिस की ओर से उन्हें जरूरी डाटा मुहैया कराया गया। सुरक्षा की पक्की गारंटी देने वाली ‘डोमेन अवेयरनेस सिस्टम’ (डीएएस) तकनीक का इस्तेमाल न्यूयार्क में हो रहा है। दिल्ली में अगर माइक्रोसॉफ्ट की योजना लागू हो जाती, तो वह दुनिया का ऐसा दूसरा शहर बन जाता। दिल्ली पुलिस के एक टॉप अफसर का कहना है कि विभिन्न एजेंसियों के बीच ठीक से तालमेल न होने के कारण यह योजना जमीन पर नहीं उतर सकी।

सिस्टम के लिए तय हो गया था बजट

बता दें कि दिल्ली पुलिस के तत्कालीन आयुक्त बीएस बस्सी के कार्यकाल के दौरान माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन ने पुलिस मुख्यालय में इस सिस्टम को लेकर छह-सात घंटे का प्रेजेंटशन दिया था। उसमें स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच, आर्म्ड पुलिस, पीसीआर, जिला पुलिस, विजिलेंस, ट्रैफिक और आतंक रोधी दस्ता आदि शाखाओं के आला अफसर मौजूद रहे। उन्होंने इस नए सिस्टम की बारीकियों के बारे में जाना।

बाद में सभी ज्वाइंट सीपी और डीसीपी को अपने-अपने इलाकों में इस उपकरण की जरूरत और उनकी संख्या बाबत एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया। रिपोर्ट भी तैयार हो गई और दिल्ली पुलिस के अफसरों की एक टीम ने इस सिस्टम को लागू करने जरूरी बजट भी तय कर लिया।

एक हजार करोड़ का खर्च

कुछ दिन बाद इसकी एक रिपोर्ट लेकर दिल्ली पुलिस के अधिकारी विचार विमर्श के लिए गृह मंत्रालय पहुंचे। इस बीच यह चर्चा भी हुई कि दिल्ली सरकार इसमें कुछ आर्थिक मदद कर सकती है। उस वक्त सीसीटीवी को लेकर दिल्ली सरकार भी गंभीरता से काम कर रही थी। एक अधिकारी के मुताबिक, सरकार के साथ बातचीत हुई, लेकिन वह सार्थक नहीं रही। सरकार का कहना था कि वे अपने स्तर पर सीसीटीवी लगाकर दिल्ली को सुरक्षित बनाएंगे। ‘डोमेन अवेयरनेस सिस्टम’ को लागू करने पर करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च होने थे। दिल्ली पुलिस को जब कहीं से भी कोई उम्मीद नजर नहीं आई, तो यह कह कर इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया कि इसका बजट बहुत ज्यादा है।

हम स्थानीय तकनीक की मदद से ही दिल्ली को सुरक्षित बनाएंगे। एक प्रेसवार्ता में बस्सी ने कहा था कि इस सिस्टम को देसी तकनीक पर विकसित करेंगे। अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ। दिल्ली सरकार, सिविक एजेंसियां और पुलिस, इन सभी के लगाए गए कैमरों का कंट्रोल अलग अलग है। किसके कैमरे में कब क्या रिकार्ड हुआ, कुछ नहीं पता। उसे अपराध के साथ कैसे लिंक करें, इन सब के बारे में भी किसी को कोई जानकारी नहीं है।

लगने थे छह हजार सिक्योरिटी कैमरे

इस सिस्टम के तहत दिल्ली में करीब साढ़े छह हजार सिक्योरिटी कैमरे लगने थे। अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो, इस सिस्टम की मदद से वह पकड़ा जाता। पीसीआर में डीएएस से लैस कंप्यूटर लगाने का प्रावधान था। बीट कर्मियों को एक ऐसी मोबाइल डिवाइस दी जानी थी, जिसमें वे किसी भी हिस्से की सीसीटीवी फुटेज देख सकते थे। इसके अलावा पुलिस कर्मियों को रेडिएशन की जांच वाला उपकरण भी मुहैया कराया जाता है।

आतंकियों के मंसूबों को समय रहते नाकाम किया जा सकता है। वारदातों की रियल टाइम इंर्फोमेशन हर पुलिस कर्मी तक पहुंचती है। कोई भी अपराधी जैसे ही अपने ठिकाने से बाहर निकलता, वह तुरंत पुलिस गिरफ्त में आ जाता। क्योंकि अपराधी का फोटो सीसीटीवी में आते ही उसकी लोकेशन पुलिस को तुरंत मिल जाती है।

इस तरह काम करता है डीएएस

  • सभी पुलिसकर्मी इंट्रेक्टिव डॉटा मैप (डिजिटल) से जुड़े रहते हैं
  • सिस्टम में प्रत्येक अपराधी एवं संदिग्धों का फोटो सहित रिकॉर्ड
  • शहर में आने वाले हर वाहन की नंबर प्लेट दर्ज होती है
  • किसी जगह का रेडिएशन लेवल कितना है, यह डाटा भी पुलिस को मिलता है
  • पुलिस कर्मियों के पास रेडिएशन जांच के लिए पोर्टेबल डिवाइस होती है
  • मोबाइल या कंट्रोल रूम में एक क्लिक करते ही सामने होगा सारा डाटा
  • स्टेडियम, बस स्टैंड, एयरपोर्ट, मेट्रो व रेलवे स्टेशन और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर छोटी से छोटी गतिविधियों पर भी पैनी नजर
  • एक जगह पर लगा सिक्योरिटी कैमरा पांच सौ फुट उपर तक जा सकता है
  • सेकेंडों में सूचनाओं का बारीकी से आदान-प्रदान
  • घटना स्थल पर तैनात पुलिस को मौके की सभी दिशाओं से लाइव स्थिति की जानकारी मिलेगी
  • डीएएस में घटना स्थल का वीडियो प्रत्येक पांच मिनट बाद पलटकर आएगा

अफरातफरी एवं गलत सूचना से बचाव

मान लीजिए कि किसी बिल्डिंग में गोलीबारी की घटना हुई है। चारों तरफ से ऐसी कॉल आ रही हैं कि दर्जनों हथियारबंद लोगों ने हमला किया है। मीडिया में भी तरह-तरह की अफवाहें फैल रही हैं। ऐसे मौके पर पुलिस ने कॉल का विश्लेषण करने की बजाए डीएएस का इस्तेमाल कर, उस बिल्डिंग के पास लगे कैमरे को ऊपर उठाकर वारदात वाले स्थान की तरफ मोड़ दिया। इससे उस जगह की सही तस्वीर सामने आ जाती है। पुलिस को तुरंत ये पता लग जाता है कि छत पर केवल एक शूटर छिपा बैठा है या वहां दर्जनों अपराधी हैं।

क्रॉस फायरिंग में कितने अपराधी मारे गए, यह भी कैमरे की मदद से पता लगाया जा सकता है। कंट्रोल रूम में एक बड़ी स्क्रीन पर घटना स्थल एवं उसके आसपास के 15 स्थानों का लाइव वीडियो देखने की सुविधा होती है। यह भी पता चल जाता है कि अपराधी किस तरफ भाग रहा है और उसके साथी कहीं छिपे तो नहीं है।

अपराधी का बचना मुश्किल

इस सिस्टम की खासियत यह भी है कि इसकी मदद से अपराधी बच नहीं सकता। उसका फोटो या स्कैच डीएएस पर डालते ही शहर के हर पुलिसकर्मी तक वह जानकारी पहुंच जाती है। यदि वह अपराधी कहीं भी जाएगा, तो उसका फोटो उसे सलाखों तक पहुंचा देगा। एक बार सड़क पर आने के बाद वह किसी भी सूरत में बच नहीं सकेगा। बम विस्फोट की फर्जी कॉल करने वाले भी पुलिस को चकमा नहीं दे पाएंगे। इस तरह की कॉल आते ही सेकेंड में लोकेशन का पता चल जाएगा।

इतना ही नहीं, वहां की एक-दो दिन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी मिलेगी। जिस नंबर से आपातकालीन कॉल आई है, उस नंबर का पिछले कई दिनों का डाटा शहर के सभी पुलिसकर्मियों को मिल जाएगा।

लापरवाह वाहन चालकों को भी सबक

शहर में प्रत्येक वाहन का रिकॉर्ड डीएएस पर होगा। ट्रैफिक पुलिस तय रफ्तार के हिसाब से वाहनों का रिकॉर्ड सिस्टम में डाल देगी। स्कूल या मार्केट के आसपास के हाई क्रैश जोन में लापरवाह चालकों पर अंकुश लग सकेगा। लापरवाही से वाहन चलाने वालों के घर पर चालान पहुंच जाता है।

न्यूयार्क में तीन हजार हाई सिक्योरिटी कैमरे

करीब नौ साल पहले माइक्रोसॉफ्ट ने न्यूयार्क पुलिस विभाग से डीएएस बाबत संपर्क किया था। वहां के अनुभवी पुलिस अफसरों ने डीएएस में कई तरह के सुधार कर दिए। वारदात, अपराधियों की जमीनी हकीकत, उनके तौर-तरीके, भागना-छिपना, वाहन का इस्तेमाल और हथियारों से हमला आदि बातों का व्यावहारिक अनुभव पुलिस अफसरों के पास था। नतीजा, माइक्रोसॉफ्ट ने न्यूयार्क पुलिस को इस प्रोजेक्ट में अपना साझेदार बना लिया।

तय हुआ कि दुनिया में कहीं भी जब इस सिस्टम को लागू किया जाएगा, तो उससे मिलने वाले राजस्व का तीस फीसदी हिस्सा न्यूयार्क पुलिस को मिलेगा। माइक्रोसॉफ्ट ने न्यूयार्क में तीन हजार हाई सिक्योरिटी कैमरे लगाए हैं, और करीब 34 हजार पुलिस अफसर डीएएस से जुड़े हैं।

गुस्साई पत्नी ने पति को सड़क पर पटककर मार डाला, बस का इंतजार कर रहे थे दोनों

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 उत्तर प्रदेश में ललितपुर जनपद के महरौनी क्षेत्र अंतर्गत अंडेला गांव एक महिला का पति से झगड़ा हो गया। इसी झगड़े में उसने अपने पति को बीच सड़क पर पटक दिया। जिससे पति की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के चलते वहां भारी भीड़ एकत्रित हो गई। सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू कर दी। पुलिस अधीक्षक एमएम बेग ने बताया कि वे पति-पत्नी कहीं जाने के लिए सड़क पर बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान दोनों में झगड़ा हुआ।

विवाद इतना बढ़ा की पत्नी ने पति को धक्का मार दिया। जिससे पति सड़क पर गिर गया। उसके सिर में गंभीर चोट लगी और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक एमएम बेग ने आगे कहा कि हत्यारोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है।

महिला के ​पति की मौत के बाद घटनास्थल पर जुटे लोगों ने महिला को बहुत बुरा-भला कहा। पुलिस ने जैसे-तैसे भीड़ को समझाया। उसके बाद रास्ता खाली हुआ।

मोदी व BJP को वोट देने वाले मुस्लिमों को ओवैसी ने बताया ‘छक्का’

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AIMIM के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

असदुद्दीन ओवैसी इस वीडियो में कहते दिख रहे हैं कि जिन छह प्रतिशत मुस्लिमों ने पीएम मोदी के लिए बीजेपी को वोट दिया है, उनको क्रिकेट मैच के ‘छक्के’ कहते हैं। इस वीडियो को बीजेपी के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने भी शेयर किया है।

ओवैसी एक चुनावी सभा में 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को वोट देने वाले हिंदुओं और मुसलमानों की संख्या से जुड़े डाटा पर बात कह रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारअसदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 2014 और 2019 के बाद देशभर में एक सर्वे किया गया था कि देश की सभी 540 लोकसभा सीटों पर किस-किस धर्म, जाति और संप्रदाय के लोगों ने बीजेपी को वोट दिया। इस सर्वे में सामने आया कि 2014 में 37 फीसदी हिंदू ने मोदी को वोट किया और 2019 में 44 फीसदी ने। अब आप अंदाजा लगाइये, किस के वोट बढ़ रहे हैं। 2014 में 6 फीसदी मुसलमानों ने मोदी को वोट किया और 2019 में भी 6 फीसदी लोगों ने ही मोदी को वोट किया।

इस सर्वे के आने के बाद मेरे पास एक पत्रकाप का फोन आया और उसने जब मेरे से पूछा कि आपके धर्म के लोग भी मोदी को वोट देते हैं, तो मैंने कहा, 6 का नंबर है उसे क्रिकेट की भाषा में छक्का कहते हैं। 6 जो होता है वो छक्का होता है।

कुछ महीने पहले गायब हो गया था मंदबुद्धि युवक, फेमस पंजाबी सिंगर के वीडियो में मिला

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पिछले कई महीने से गायब युवक एक गाने के वीडियो एल्बम के जरिए परिजनों को मिला। अब आप सोच रहे होंगे भला ऐसा कैसे हो सकता है। दरअसल, इस घटना को जिसने भी सुना उनको एक पल के लिए विश्वास करना मुश्किल था। लेकिन यह सच्चाई है कि पिछले कई महीने से गायब मंदबुद्धि युवक परिजनों को मिल गया।बिना बताए चला गया घर से बाहर

पंजाब राज्य के गुरदासपुर जिले का रहने वाला 22 साल मंदबुद्धि युवक निशान सिंह अपने रिश्तेदार मंगल सिंह के पास काफी लंबे समय से रहता था। क्योंकि निशान के पिता की मौत के बाद उसकी मां भी दो बेटियों को उसके साथ छोड़कर कहीं चली गई, जिसका पता आज तक नहीं लग पाया। इसके बाद रिश्तेदार मंगल सिंह निशान और उसकी दोनों बहनों को अपने यहां ले आए। और उनका पालन-पोषण करने लगे। मंगल सिंह ने बताया कि दस फरवरी को देर रात बिना किसी को बताए निशान घर से बाहर चला गया।

सिंगर के वीडियो एल्बम में मिला

काफी खोजबीन के बाद निशान का पता नहीं चला तो उन्होंने थाने में शिकायत भी दर्ज करवाई लेकिन निशान का कहीं भी पता नहीं चला। युवक निशान सिंह जन्म से ही बोल नहीं पाता है और ना ही कोई काम पूरी तरह से कर पाता है। इस कारण निशान की कोई खोज-खबर नहीं मिल पाई। लेकिन कुछ समय बाद पंजाबी गायक सतीन्द्र सरताज के गाने की वीडियो रिलीज हुई, जिस जगह इस वीडियो को फिल्माया गया था। वहां निशान की भी फुटेज उसमें दिखी। परिवार के सदस्यों ने जब वीडियो देखा तो उन्हें निशान के जगह की खबर मिल गई।

पहले भी जा चुका है घर

इसके बाद परिजन आसरा पहुंचे जहां वीडियो की शूटिंग हुई थी। वहां परिजनों को निशान मिल गया। पहले निशान को परिजनों के हाथों में नहीं सौंपा गया, लेकिन डीसी गुरदासपुर से परिजनों ने अपील की, जिसके बाद उन्हेंन निशान को अपने साथ ले जाने की इजाजत मिली। परिवार के सदस्य पुष्पिंदर सिंह ने बताया कि निशान शुरू से ही उनके साथ रहा है। परिवार को उससे बहुत लगाव था और जब से वह लापता हुआ था तब से हर कोई चिंतित था। लेकिन अब निशान मिल गया है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि साल 2013 में निशान एक बार घर से जा चुका तब भी वह बठिंडा में मिला था।

फिल्मों में स्टार्स नहीं बल्कि उनके बॉडी डबल्स करते है खतरनाक स्टंट सीन्स

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फिल्मों में खतरनाक स्टंट सीन्स देखना दर्शकों को काफी पसंद आता है। यही कारण है कि फिल्ममेकर फिल्मों में कई खतरनाक सीन्स को जरूर रखते हैं। ऐसे में कुछ बॉलीवुड अभिनेता है जो अपनी फिल्मों में स्टंट सीन्स खुद ही करते हैं। लेकिन कुछ ऐसे है जो फिल्मों में स्टंस्ट सीन्स खुद ना करके अपने बॉडी डबल से करवाते हैं। ये बॉडी डबल हीरो या हीरोइन का कॉपी होता है। जिसका इस्तेमाल स्टंट और एक्शन सीन्स के लिए किया जाता है। आइए जानते हैं टॉप स्टार्स के बॉडी डबल के बारे में –

सलमान खान ने अपनी फिल्म सुल्तान में पतंग लूटने वाले सीन पर भी बॉडी डबल का सहारा लिया था। सलमान की ये फिल्म बॉक्स आफिस पर सुपरहिट हुई थी।

बॉलीवुड के खिलाड़ी अभिनेता अक्षय कुमार अपनी ​फिल्मों में एक्शन सीन्स खुद ही करते है लेकिन उनको फिल्म ‘चांदनी चौक टू चाइना’ में कुछ स्टंट्स करने के लिए बॉडी डबल का सहारा किया था।

साउथ अफ्रीका के स्टंट परफॉर्मर डेरेन मैकलीन ने जॉन अब्राहिम की फिल्म ‘फोर्स 2’ के लिए कई खतरनाक स्टंट्स किए हैं। इतना तय है कि फिल्म देखते वक्त आपको इस झोल का बिलकुल भी पता नहीं चला होगा।

शाहरुख खान ने अपनी फिल्म ‘फैन’ में बॉडी डबल का इस्तेमाल किया था। फिल्म के एक खतरनाक स्टंट सीन को बॉडी डबल ने अंजाम दिया था।

ऋ​तिक रोशन और कैटरीना की फिल्म बैंग बैंग के कई एक्शन सीन्स ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। बता दें, इसमें कैटरीना के लिए कुछ स्टंट्स उनके बॉडी डबल द्वारा फिल्माए गए थे।

सलमान खान की फिल्म एक था टाइगर ने बॉक्स आफिस पर अच्छी कमाई की थी। फिल्म में फिल्म में बॉडी डबल का इस्तेमाल किया गया है। फिल्म में सूरज नाम के बॉडी डबल ने सलमान के लिए कुछ सीन शूट किए थे।

एक्शन से भरी इस फिल्म धूम 3 में ऐश के एक्शन सीन Sanodar Pardiwala ने फिल्माए हैं। फिल्म में कई शानदार एक्शन सीन्स थे जो ऐश को करने थे लेकिन उसको Sanodar Pardiwala ने शूट किया था।

आमिर खान ने जो स्टंट ‘धूम-3’ में किए थे। वो इस शख्‍स ने किए। इस फिल्म की शूटिंग शिकागो में हुई थी।

‘बच्चों के जन्म में 3 साल से कम अंतर रखनेवाली माओं में रहता खून कम’

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उत्तर प्रदेश के परिवार कल्याण विभाग का आंकड़ा बताता है कि बच्चों के जन्म में तीन साल से कम अंतर रखने वाली करीब 62 फीसद महिलाएं एनीमिया की गिरफ्त में आ जाती हैं।

विभाग के निदेशक डॉ. बद्री विशाल ने यहां गुरुवार को यह बात कही। डॉ. विशाल ने सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) के सहयोग से युवा दंपतियों में बच्चों के बीच अंतर और गर्भधारण में देरी के महत्व की अवधरणा को मजबूत करने के लिए आयोजित कार्यशाला में कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए यह बहुत ही जरूरी है कि दो बच्चों के जन्म में कम से कम तीन साल का अंतर रखा जाए। ऐसा न करने से जहां महिलाएं उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में पहुंच जाती हैं, वहीं बच्चों के भी कुपोषित होने की पूरी संभावना रहती है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के ज्यादातर मामलों में देखने को मिला है कि जन्म में तीन साल से कम अंतर रखने वाली करीब 62 फीसद महिलाएं एनीमिया की गिरफ्त में आ जाती हैं।

निदेशक ने कहा कि इसी तरह दो साल से कम अंतराल पर जन्मे बच्चों में शिशु मृत्युदर (आईएमआर) 91 प्रति हजार जीवित जन्म है, जो समग्र आईएमआर 64 प्रति हजार जीवित जन्म से कहीं अधिक है।

कार्यक्रम में मौजूदा संयुक्त निदेशक परिवार कल्याण डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा उत्तर प्रदेश की कुल किशोर जनसंख्या करीब 4.89 करोड़ है। एनएफएचएस-4 (2015-16) के आंकड़े बताते हैं कि सर्वेक्षण के दौरान करीब 3.8 फीसद किशोरियां 15 से 19 साल की उम्र में गर्भवती हो चुकी थीं या मां बन चुकी थीं।

डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 (एनएफएचएस-4) के आंकड़ों के अनुसार, करीब 57 फीसद महिलाओं और उतने ही पुरुषों का मानना है कि एक आदर्श परिवार में दो या उससे कम बच्चे होने चाहिए।

देश के सात राज्यों के 145 जिले उच्च प्रजनन की श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। इन सात राज्यों में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और असम शामिल हैं और इन 145 उच्च प्रजनन वाले जिलों में 57 उत्तर प्रदेश के हैं, जिनकी कुल प्रजनन दर तीन या तीन से अधिक है। यह 145 जिले देश की कुल आबादी के 28 फीसद भाग को कवर करते हैं। यह जिले मातृ मृत्यु का 30 फीसद और शिशु मृत्यु का 50 फीसद कारण बनते हैं।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की प्रोफेसर और सेंटर ऑफ एक्सिलेन्स की समन्वयक डॉ. सुजाता देव ने बताया कि किशोर और किशोरियों को स्वयं जागरूक होना जरूरी है कि उनके शरीर में क्या परिवर्तन हो रहे हैं, उनके लिए क्या आवश्यक है और क्या नहीं। तभी वह सही निर्णय ले पाएंगे, क्योंकि यही यह लोग आगे चलकर दंपति बनते हैं। विवाह से पहले लड़का हो या लड़की उन्हें विवाह पूर्व परामर्श दिया जाना चाहिए।

त्योहारी सीजन में मोबाइल कंपनियों में बढ़ी प्रतिस्पर्धा, ऑफरों की बौछार…

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इस त्योहारी सीजन को भुनाने ऑटोमोबाइल, रियल इस्टेट, इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ ही अब मोबाइल कंपनियां भी जुट गई हैं। एक दूसरे को कड़ी टक्कर देते हुए कुछ कंपनियां 1500 रुपये का हैंडसेट आधी कीमत यानि 700 रुपये में उपलब्ध करा रही हैं तो कुछ कंपनियां ज्यादा बातचीत के साथ ज्यादा डेटा दे रही हैं। टेलीकॉम मार्केट में इन दिनों रिलायंस जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, बीएसएनएल प्रमुख कंपनियां है और इनके द्वारा ऑफरों की बौछार की जा रही है। सभी कंपनियों के स्पेशल ऑफर तो 31 अक्टूबर तक लागू भी है।

सबसे बड़े ऑफर के रूप में रिचार्ज पर मिलने वाली इंश्योरेंस की सुविधा के साथ ही मिलने वाले ज्यादा डाटा को माना जा रहा है। मोबाइल कंपनियों के फायदे के ये ऑफर 249 रुपये, 399 रुपये, 125 रुपये, 179 रुपये के रिचार्ज पर मिल रहे हैं।

कंपनियों का कहना है कि सारे ऑफर उपभोक्ताओं को लुभाने वाले हैं और उनके फायदे के लिए ही हैं। इसके साथ ही बताया जा रहा है कि कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर को देखते हुए कंपनियां हैंडसेट निर्माता कंपनियों से टाइ-अप कर सस्ते हैंडसेट उपलब्ध कराने का प्लान बना रही हैं।

दूरसंचार क्षेत्र में बढ़ी प्रतिस्पर्धा का एक और असर सामने आया है। पिछले दिनों एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने उनके नेटवर्क से बाहर जाने वाली कॉल पर घंटी बजने का समय (रिंग टाइम) घटाकर 25 सेकंड कर दिया है। आमतौर पर कॉल आने के समय रिंग टाइम 40-45 सेकंड होती है। प्रतिद्वंदी कंपनी रिलायंस जियो के साथ प्रतिस्पर्धा के चलते एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की ओर से उठाए गए इस कदम का एक मकसद कॉल जुड़े रहने के समय के मुताबिक उसपर लगने वाले इंटरकनेक्ट उपयोग शुल्क (आइयूसी) की लागत घटाना भी है।

PCC अध्यक्ष चित्रकोट पहुंचे, CM भूपेश का दौरा आज…

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कंडेल से रायपुर के गांधी मैदान तक प्रदेश स्तरीय गांधी विचार यात्रा का समापन होते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम चित्रकोट में डेरा डालने पहुंच गए। मरकाम उन्होंने ऐसा करके पार्टी के आला-नेताओं और पदाधिकारियों को स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि अब चित्रकोट उपचुनाव में ताकत झोंकनी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को दो सभा लेने के लिए पहुंचेंगे। एक-दो दिन में दूसरे आला-नेताओं का भी दौरा शुरू हो जाएगा।

चित्रकोट में 21 अक्टूबर को मतदान होना है। हालांकि, कांग्रेस ने पहले ही चित्रकोट उपचुनाव के लिए प्रदेश चुनाव समिति और स्थानीय कार्यकर्ताओं की बैठक कर ली है। प्रचार की रणनीति पर चर्चा हो चुकी है। अब केवल पार्टी के आला-नेताओं, पदाधिकारियों और मोर्चा-संगठनों को प्रचार के मैदान में कूदना है।

पीसीसी अध्यक्ष ने गुस्र्वार को चित्रकोट रवाना होने से पहले प्रदेश प्रभारी महामंत्री गिरिश देवांगन से उपचुनाव को लेकर चर्चा की। उन्होंने चित्रकोट भेजी जाने वाली टीमों को तैयार करने के लिए कहा है। चुनावी सभा का आगाज मुख्मयंत्री बघेल करेंगे। शुक्रवार को दोपहर 12 बजे उरभा विकासखंड के ग्राम छिंदावाड़ा और दोपहर 2.30 बजे बास्तानार विकासखंड के ग्राम किलेपाल में सभा करेंगे। उसके बाद रायपुर लौट आएंगे।

प्रभारी महामंत्री देवांगन ने बताया कि शुक्रवार से चित्रकोट उपचुनाव के लिए प्रदेश कार्यालय में कंट्रोल रूम शुरू हो जाएगा। यहां से चित्रकोट में न केवल पार्टी, बल्कि विपक्ष की गतिविधियों की भी रोजाना रिपोर्ट ली जाएगी।

भाजपा चित्रकोट उपचुनाव को राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़ने की तैयारी कर चुकी है। राष्ट्रवाद, कश्मीर से धारा 377 हटाने, राफेल जैसे विषयों को प्रचार करके मोदी के नाम पर वोट मांगा जाएगा। वहीं, कांग्रेस ने गांधी के राष्ट्रवाद के नाम, पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के 15 साल बनाम मौजूदा कांग्रेस सरकार के नौ माह के कार्यकाल पर चुनाव लड़ने की तैयारी की है। भाजपा पर वादाखिलाफी का आरोप लगाकर कांग्रेस अपनी सरकार के कामकाज का प्रचार करेगी।

छत्तीसगढ़ – केंद्र ने स्वास्थ्य पैकेज पर छत्तीसगढ़ को दी ऐसी सलाह…

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छत्तीसगढ़ में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं का लाभ मरीजों को तो मिल रहा है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में हितग्राहियों की संख्या बहुत कम है। खासकर दंत रोग, प्रसव और मोतियाबिंद सर्जरी की। यही वजह है कि नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) के सीईओ डॉ. इंदू भूषण ने सीधे स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक को पत्र लिखकर महत्वपूर्ण सलाह दी है। इसमें उल्लेख है कि आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) के अंतर्गत प्रसव और मोतियाबिंद सर्जरी के पैकेज सिर्फ सरकारी अस्पतालों के लिए ही आरक्षित किए जाएं। इससे सरकारी अस्पतालों को मजबूती मिलेगी, मरीजों का विश्वास भी बढ़ेगा।

2009 में शुरू हुई राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) जो अब आयुष्मान भारत हो चुकी है, उसने निजी अस्पतालों को मजबूत कर दिया। प्रदेश में इन 10 सालों में बड़ी संख्या में मोतियाबिंद सर्जरी, प्रसव और दंत के उपचार निजी अस्पतालों में हुए।

करोड़ों-करोड़ रुपये अस्पतालों को भुगतान हुए। इस दौरान कई बार गड़बड़ियां भी उजागर हुईं। प्रमाण मिले, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी हुई। बावजूद इसके सरकारों ने कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की कि सरकारी अस्पतालों में इन सभी स्वास्थ्य सुविधाओं के पैकेज को आरक्षित किया जाए। अब सीधे केंद्र ने इस मामले में हस्ताक्षेप कर दिया है।