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इस शख्स की बंदरों से है बेमिसाल दोस्ती

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मध्य प्रदेश के आगर मालवा केएक शख्स कोबंदरोंं से बिल्कुल डर नहीं लगता. बल्कि वह तो बंदरोंं का दोस्त है. उसे बन्दरों के बीच रहना पसंद है।

वह बंदरोंं को एक आवाज और इशारे में पास भी बुला लेता है. इस शख्स को इन बंदरोंं से डर नहीं लगता है, क्योंकि उसने इन्हें समझने में 40 साल से ज्यादा वक्त गुजार दिया है।

वह समय की अनुकूलता के अनुसार अलग-अलग बन्दरों के गुटों के साथ समय बिताते रहते हैं। आगर-मालवा के मूलनिवासी इस शख्स का नाम है लोकेंद्र सिंह. लोकेंद्र सिंह पेशे से शिक्षक है और वर्तमान में झाबुआ के उत्कृष्ट स्कूल में पदस्थ है।

इन्हें बचपन से ही प्रकृति से प्रेम रहा है विशेषकर बंदर और चिड़ियाओं से. नौकरी के बाद जब भी वक्त मिलता है यह आसपास के जंगलों में पहुंच जाते है।

पाकिस्तान से करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए मनमोहन सिंह को बुलावा

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पाकिस्तान ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आमंत्रित किया है.

विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान ने करतारपुर साहब कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह की काफ़ी तैयारी की है और प्रधानमंत्री इमरान ख़ान भी इसमें काफ़ी दिलचस्पी ले रहे हैं.

क़ुरैशी ने कहा कि वो पाकिस्तान सरकार की ओर से मनमोहन सिंह को दावत दे रहे हैं और इसके लिए उन्हें लिखित में औपचारिक निमंत्रण भी जल्द भेजा जाएगा.

काॉरिडोर का उद्घाटन इसी साल नवंबर में होगा लेकिन अभी तारीख़ की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

हालांकि समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ 9 नवंबर से ये कॉरिडोर औपचारिक तौर पर शुरू हो जाएगा.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने मीडिया से कहा, “गुरुनानक देव की 550वीं जयंती के मौके पर सिख श्रद्धालुओं के करतारपुर आने को लेकर हम बहुत खुश हैं.”

दरबार साहिब से डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा

पिछले कई सालों से भारत में मौजूद सिख नेता पाकिस्तानी सरकार से इस कॉरिडोर पर काम शुरू करने की अपील कर रहे थे.

काफ़ी लंबी बातचीत के बाद दोनों सरकार इस निर्माण के लिए तैयार हुईं थीं.

ये कॉरिडोर पाकिस्तानी पंजाब के करतारपुर में दरबार साहिब को भारतीय पंजाब के गुरदासपुर ज़िले के डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ेगा.

भारतीय श्रद्धालु बिना वीज़ा के सरहद के उस पार जाकर दरबार साहिब गुरुद्वारा जा सकेंगे. इसके लिए उन्हें केवल एक परमिट लेना होगा.

नवरात्रि स्पेशलः देवी के किरदार में छा गई ये अभिनेत्रियां, नं 3 की तो होने लगी थी पूजा

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हर साल की तरह इस साल भी भारत में नवरात्री की धूम देखने को मिल रही है। देशभर में श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। बॉलीवुड और टीवी में ऐसी कई अभिनेत्रियां रहीं जिन्होंने पर्दे पर देवी का किरदार निभाया और खूब वाहवाही बटोरी।तो आइए आज बात करते है इन्ही एक्ट्रेस की जिन्होनें इस किरदार को निभाकर दर्शको के मन में अपनी खास जगह बनाई।

हेमा मालिनीः बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी ने दूरदर्शन पर प्रसारित ‘जय माता की’ सीरियल में माता के अलग-अलग अवतार का किरदार निभाया था।सीरियल में ऐसे कई मौके आए जब हेमा मालिनी ने क्लासिकल डांस भी किया था।

मौनी रॉय- टीवी के पॉपुलर शो ‘देवों के देव महादेव’ में अभिनेत्री मौनी रॉय माता सती के रूप में दिखीं। दर्शकों ने इस रोल में उन्हें काफी पसंद किया। सीरियल में मौनी रॉय के अपोजिट भगवान शिव के किरादर में अभिनेता मोहित रैना थे। मौनी रॉय इसके अलावा नागिन 2 में महिषासुर वध के लिए मां दुर्गा के रूप में भी दिखी थीं।जिन्हें शो में काफी पसंद किया गया था।

गायत्री शास्त्री- साल 1997 में दूरदर्शन पर दिखाया जाने वाला सीरियल ‘ओम नम: शिवाय’ काफी मशहूर हुआ था। शो में शिव का किरदार समर जय सिंह ने निभाया था जबकि देवी पार्वती का रोल गायत्री शास्त्री ने किया था।जिन्हें इस किरदार में काफी पसंद किया गया था।

अनीता गुहाः साल 1975 में रिलीज हुई कम बजट की फिल्म ‘जय संतोषी मां’ उस वक्त ब्लॉकबस्टर साबित हुई। बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री अनीता गुहा ने संतोषी मां का किरदार निभाया था। देवी के किरदार मे अनीता को इस कदर पसंद किया गया कि इसके बाद वो कई धार्मिक फिल्मों में नजर आईं।जिन्हें हर किसी देवी के किरदार में खास तौर पर पसंद किया गया था।

ग्रेसी सिंहः साल 2015 में प्रसारित सीरियल ‘संतोषी मां’ में ग्रेसी सिंह मुख्य किरदार में दिखी थीं।इस शो में ग्रेसी ने खूब सुर्खियां बटौरी थी हालांकि इससे पहले ग्रेसी आमिर खान की लगान में भी पॉपुलर हुई थी।

सोनरिका भादौरिया– इस लिस्ट में शामिल एक्ट्रेस सोनारिका भदौरिया ने सीरियल ‘देवों के देव महादेव’ में पार्वती का किरदार निभाया था। शो से सोनारिका को काफी पॉपुलरिटी मिली और उन्होंने फिल्मों की ओर रुख किया। सोनारिका की बॉलीवुड में पहली फिल्म ‘सांसें’ हैं। फिल्म में सोनारिका के साथ रजनीश दुग्गल नजर आए थे। यह एक हॉरर फिल्म थी।

दो सेकंड में जीवन मौत का हुआ फैसला, पलक झपकते युवक ने बचाई मासूम की जान

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जाको राखे साइयां मार सके ना कोई.यह कहावत जोधपुर के घोड़ा चौक में उस समय चरितार्थ हो गई, जब एक बच्ची खेलते- खेलते सीवरेज लाइन के पास बने बड़े गड्ढे में गिर गई. जैसे ही बची नीचे गिरी और एक युवक ने आकर उसको खड्डे से बाहर निकाल लिया. गनीमत तो यही रही कि युवक ने तुरंत बच्ची को बाहर निकाल लिया. अगर बच्ची सीवरेज लाइन के मैनहोल के भीतर चली जाती तो इस मासूम की जान जा सकती थी.

आप इस वीडियो में देख सकते है कि किस तरह से मासूम खेलते हुए, एक नन्ही चिड़िया की तरह सड़क पर फुदकते हुए आ रही थी. इतने में गड्ढे के पास आकर इसका संतुलन बिगड़ जाता है और वह गड्ढे में गिर जाती है. हालांकि यह बच्ची अपने आपको एक बारगी तो अपने आप को संभाल लेती है, लेकिन फिर से उसका संतुलन बिगड़ता है और सीवरेज मैनहोल के पास बने बड़े गड्ढे में गिर जाती है.

देखते ही देखते बच्ची पानी में समा जाती है, लेकिन मात्र ढाई सेकंड में वहां पर मौजूद ज्योतिराम नामक युवक फुर्ती दिखाते हुए, ढाई सेकेंड में बच्ची को इस पानी से बाहर निकाल देता है. बच्ची का नाम वैष्णवी बताया जा रहा है उसके पिता का नाम विनायक. यह पूरी घटना इस चित्र में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई. जोधपुर शहर में बारिश के बाद लगातार सड़कों के हाल-बदहाल है जगह-जगह गड्ढे हैं और यह गड्ढे लोगों की जान की आफत बने हुए.

भारत के हर रेल यात्रियों को मालूम होना चाहिए टर्मिनस, जंक्शन और सेंट्रल के बीच का ये फर्क

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भारतीय रेल दुनिया के कुछ सबसे बड़े रेल नेटवर्क्स में शुमार होता है। एशिया में तो भारतीय रेल ही सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। हर दिन लाखों लोग भारतीय रेल में सफर करते हैं। कुछ लोग तो लगभग रोज़ ही भारतीय रेल में सफर करते हैं। लेकिन गारंटी है कि इन लोगों को भी नहीं मालूम होगा कि भारतीय रेल के किसी टर्मिनस, सेंट्रल या जंक्शन में क्या फर्क होता है। अगर आपको भी ये फर्क मालूम नहीं है तो चलिए आज आप सही जगह आ गए हैं। आज हम आपको बताएंगे इन तीनों का डिफरेंस।

1- टर्मिनस

वैसे आपने अधिकतर टर्मिनल शब्द ज़्यादा सुना होगा। कभी-कभार ही आपने टर्मिनस शब्द सुना होगा। आपको बता दें कि टर्मिनस और टर्मिनल एक ही चीज़ हैं। भारत में पूरे 27 टर्मिनस बने हैं। लोकमान्य तिलक और छत्रपति शिवाजी भारत के दो सबसे बड़े टर्मिनस हैं।

2- सेंट्रल

ऐसे स्टेशन्स जहां रेलगाड़ियों का आना-जाना लगा ही रहता है, उन्हें सेंट्रल कहते हैं। भारत में कुल 5 सेंट्रल स्टेशन्स हैं। इन स्टेशन्स पर हमेशा यात्रियों की भीड़ जमा रहती है। ये 5 सेंट्रल स्टेशन्स हैं कानपुर सेंट्रल, चेन्नई सेंट्रल, मुंबई सेंट्रल, मैंगलौर सेंट्रल और त्रिवेंद्रम सेंट्रल।

3- जंक्शन

ऐसे रेलवे स्टेशन्स जहां ट्रेन्स की आवाजाही के लिए कम से कम तीन रूट बने हों, उन्हें जंक्शन कहा जाता है। किसी जंक्शन पर एक साथ तीन दिशाओं से रेलगाड़ियां आ सकती हैं और जा सकती हैं। मौजूदा समय में भारत में 300 जंक्शन्स मौजूद हैं। मथुरा जंक्शन भारत का सबसे बड़ा जंक्शन है, क्योंकि इसमें पूरे 7 रूट हैं।

4- स्टेशन

भारत में मौजूदा समय में 8 हज़ार से भी ज़्यादा स्टेशन्स मौजूद हैं। स्टेशन उस जगह को कहा जाता है जहां रेल यात्रियों को रेलगाड़ी में सामान चढ़ाने या उतारने की छूट होती है।

ऐसे अविश्वसनीय दृश्य जो हमें रोज देखने को नहीं मिलते, इन्हें एक बार जरूर देखना चाहिए

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आज हम आपके लिए 11 ऐसे अविश्वसनीय दृश्य लेकर आए हैं, जो हमें रोज देखने को नहीं मिलते। यह दृश्य कुछ ऐसे हैं जो आपको हैरानी में डाल देंगे। एक से बढ़कर एक अविश्वसनीय तस्वीरें आज आपको देखने को मिलेगी जिन्हें देखकर शायद ही आप इन पर यकीन कर पाएँ ।

1. एक बोतल अपने पूर्ण विस्तार से पहले कुछ इस तरह की दिखाई देती है।

2. एक ऐसी तस्वीर जो आपको हैरानी में डाल देगी इनके हाथों के निशानों से पसीना नहीं आ रहा है, सच में हमारा शरीर अद्भुत है।

3. एक ऐसा फूल जिसे देखकर लगता है कि इसे फोटोशॉप के जरिए तैयार किया गया होगा पर ऐसा नहीं है।

4. एक ऐसा पेड़ जिसका तना देखिए कितने अद्भुत डिजाइन प्रस्तुत कर रहा है।

5. एक विशालकाय पेड़ की टहनी जिसमें से कांटा निकल रहा है।

6. सहारा रेगिस्तान ऊंचाई से कैसा दिखता है आप इस तस्वीर में देख सकते हैं।

7. तूफान से पहले की शांति कितना सुंदर दृश्य बना रही है।

8. एक उष्णकटिबंधीय पौधा जिसे देखकर क्यूआर कोड ध्यान में आता है।

9. छत के ऊपर बढ़ता हुआ यह मशरूम किसी को भी हैरानी में डाल सकता है।

10. इस दृश्य को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे पानी के नीचे दुनिया के लिए यह सड़क बनाई गई हो।

11. एक पेड़ जिसे पूरा काट दिया गया था फिर कुछ दिनों बाद उसने से पौधा निकल आया।

शूटिंग के दौरान तड़प-तड़प कर इस एक्टर की हुई थी दर्दनाक मौत, वजह जानकर रह जाएंगे दंग

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 बॉलीवु़ड जगत में ऐसे कई अभिनेता हुए हैं जिन्होंने अपने शानदार अभिनय से देश के हर घर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। दोस्तों ऐसी ही एक कलाकार के बारे में आज हम बताएंगे जो इस समय हमारे बीच तो नही हैं लेकिन इस कलाकार को कोई भुला नही पायेगा। दोस्तों यह कलाकार कोई और नहीं बल्कि फिल्म इण्डस्ट्रीज के जाने माने कलाकार राजेश विवेक है। दोस्तों राजेश विवेक को उनके शानदार अभिनय के अलावा उनकी भारी आवाज के लिए भी जाना जाता था।

दोस्तों 31 जनवरी 1949 को जन्मे राजेश विवेक को अपने फ़िल्मी करियर के शुरुवाती दौर में काफी संघर्ष करना पड़ा लेकिन दोस्तों धुन के पक्के इस कलाकार को टीवी इतिहास के सबसे लोकप्रिय पौराणिक धारावाहिक ‘महाभारत’ में श्री वद व्यास का किरदार अदा करने का मौका मिला जिसको राजेश विवेक ने इतनी शिद्दत से निभाया की इसके बाद उनको कई फिल्मो के ऑफर मिले जिन्हें राजेश विवेक ने हाथी हाथ लपक लिया था।

दोस्तों इसके बाद राजेश विवेक ने कई सदाबहार बॉलीवुड फिल्मो में काम किया, लेकिन उन्हें बॉलीवुड में असली सफलता फिल्म ‘विराना’ में एक बूढ़े तांत्रिक का किरदार निभाकर मिली वही लगान में वह ज्योतिषी गुरन का शानदार किरदार निभाकर रातो रात एक बड़े स्टार बन गये थे।

दोस्तों 14 जनवरी 2016 को राजेश विवेक एक फिल्म की शूटिंग कर रहे थे, तभी अचानक उनके सीने में दर्द उठा और दर्द इतना बढ़ गया की राजेश विवेक नीचे गिर गये और तडपने लगे बाद में उनको होस्पिटल ले जाया गया जहाँ इस महान कलाकार ने सदा सदा के लिए अपनी आँखे बंद कर ली थी।

Navratri Recipe: व्रत में खाएं स्वादिष्ट और हेल्दी कुट्टू की कचौरी, जानें बनाने का आसान तरीका

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नवरात्र तन, मन और आत्मा को स्वच्छ करने का मौका होता है। इस दौरान गेहूं का आटा नहीं, कुट्टू का आटा खाया जाता है। कुट्टू का आटा अनाज नहीं, बल्कि फल से बनता है और अनाज का बेहतर विकल्प होने के साथ पौष्टिक तत्वों भरपूर भी होता है। आज आपको बताते हैं कूटू की कचौरी की रेसिपी, जिसे आप व्रत के समय इस्तेमाल कर सकते हैं।

कुट्टू की कचौरी आवश्यक सामग्री:

1. सिंघाड़ा या कुट्टू का आटा-Buchwheat flour – 200 ग्राम
2. आलू- Potato – 04 (उबले हुए)
3. हरी मिर्च- Green chilli – 01 (बारीक कतरी हुई)
4. अदरक- Ginger – 01 टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)
5. काली मिर्च- Black pepper – 1/4 छोटा चम्मच
6. अमचूर-Amchur powder – 1/4 छोटा चम्मच

7. सेंधा नमक-Halite – 01 छोटा चम्मच

8. तेल-Oil – तलने के लिये

कुट्टू कचौरी बनाने की विधि:

1. कुट्टू की कचौरी रेसिपी बनाने के लिए सबसे पहले सिंघाड़े का आटा छान लें। फिर उसमें थोड़ा सा सेंधा नमक और एक बड़ा चम्मच तेल डाल कर गूंथ लें।

2. इसके बाद आलू को छील लें। उसमें हरी मिर्च, अदरक, काली मिर्च, अमचूर पाउडर और आधा छोटा चम्मच सेंधा नमक डाल कर अच्छी तरह मिला लें।

3. अब कढ़ाई में तेल डाल कर गरम करें। जब तक तेल गरम हो रहा है, गुंथे हुए आटे से छोटी सी लोई लेकर उसे गोल बनाएं और फिर हथेली से दबा कर चपटा कर लें।
4. अब एक चम्मच आलू का मिश्रण आटे पर रखें और उसे चारों ओर से उठा कर बंद कर दें।
5. फिर आलू भरी लोई को हथेलियों से दबा चपटा कर लें और फिर बेल कर पूरी के आकार का बना लें

6. कढ़ाई का तेल गरम होने पर उसमें बेली हुई पूरी डालें और उसे पलट-पलट कर ब्राउन होने तक सेंक लें।

7. लीजिए कुट्टू कचौरी बनाने की विधि कम्‍प्‍लीट हुई। अब गर्मा-गरम कुट्टू की कचौरी Kuttu Ki Kachori को सर्विंग प्‍लेट में निकालें और दही या फलाहारी चटनी के साथ इसका आनंद लें।

259 साल पुरानी हवेली ने किया 80 किलोमीटर का सफर, समुद्र में तैरकर पहुंची दूसरी जगह

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अमेरिका के मैरीलैंड में 3.62 लाख किलोग्राम की एक इमारत को बड़े से नाव पर लादकर समुद्र के रास्ते ईस्टन से क्वीन्सटाउन के डेकोर्सी कोव तक पहुंचाया गया। दरअसल, यह इमारत एक ऐतिहासिक हवेली है, जो 259 साल पुरानी है। इसे अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम से भी पहले यानी वर्ष 1760 में बनाया गया था।

इस हवेली को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने में करीब सात करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह तीन मंजिला हवेली क्रिश्चियन नीली नाम के शख्स की है।

क्रिश्चियन नीली के मुताबिक, इस पुरानी हवेली को शिफ्ट करने की तैयारी पिछले दो साल से चल रही थी, जिसे अब अंजाम दिया गया। शिफ्टिंग में कुल दो हफ्ते का समय लगा। पहले इसे 150 पहिए वाले रोबोटिक ट्रक से क्वींसटाउन बंदरगाह तक लाया गया, उसके बाद उसे एक मालवाहक नाव पर लादकर 80 किलोमीटर दूर ले जाया गया।

क्रिश्चियन नीली ने बताया कि नए जगह पर नया घर बनाने में खर्च भी ज्यादा लगता और शायद वैसा घर भी नहीं बन पाता। इसलिए उन्होंने अपने पुराने और एतिहासिक हवेली को ही ले जाना बेहतर समझा।

अर्थव्यवस्था को अगस्त में बड़ा झटका, साल भर में कोर सेक्टर की ग्रोथ 90% लुढ़की

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अगस्त महीने में आठ कोर सेक्‍टर्स की विकास दर रिपोर्ट में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. अगस्त महीने में 8 कोर सेक्‍टर्स की ग्रोथ घटकर 0.5 फीसदी पर आ गई है. जबकि जुलाई महीने में यह ग्रोथ 2.1 फीसदी थी. वहीं अगस्त 2018 में आठ कोर सेक्‍टर्स की विकास दर 4.7 फीसदी थी.

अर्थव्यवस्था को झटका

दरअसल पिछले अगस्त की तुलना में इस साल आठ कोर सेक्‍टर्स की विकास दर में करीब 90 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. मोदी सरकार के लिए यह एक बड़ा झटका है.

दरअसल, तमाम कोशिशों के बावजूद उद्योगों की वृद्धि दर में रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है. जुलाई में आठ कोर सेक्टर की विकास 2.1 फीसदी थी, जिससे एक उम्मीद जगी थी कि आगे सुधार देखने को मिलेगी. लेकिन अब अगस्त के आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है.

कच्चे तेल की कीमत में उछाल एक बड़ी वजह

इससे पहले जून महीने में 8 प्रमुख उद्योगों की ग्रोथ घटकर 0.2 फीसदी रही थी. कोर सेक्टर में गिरावट की अहम वजह ऑयल के दाम में उछाल और सीमेंट उत्पादन में भारी सुस्ती बताई गई थी.

आठ प्रमुख उद्योग में कोयला, क्रूड, ऑयल, नेचुरल गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइजर्स, स्टील, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी आते हैं. इनकी भारत के कुल इंडस्ट्रियल आउटपुट (औद्योगिक उत्पादन) में करीब 40 फीसद हिस्सेदारी होती है.