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Indian Navy Agniveer Recruitment: इंडियन नेवी में अग्निवीर बनने का अवसर, जानें कब शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया…

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Indian Navy Agniveer Recruitment:

भारतीय नौसेना में नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है. नेवी ने वर्ष 2027 के लिए अग्निवीर योजना के तहत कई पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इसमें अग्निवीर एसएसआर, अग्निवीर एमआर और एसएसआर (मेडिकल) नाविक पद शामिल हैं. इच्छुक उम्मीदवार निर्धारित तारीख के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है और इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट पर लिंक उपलब्ध कराया जाएगा. भर्ती प्रक्रिया के तहत लिखित परीक्षा और शारीरिक परीक्षण के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा. पुरुष और महिला दोनों अभ्यर्थी इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं.

आवेदन कब से होंगे शुरू?

आवेदन प्रक्रिया 14 मार्च 2026 से शुरू होगी और 6 अप्रैल 2026 तक जारी रहेगी. उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि किसी तकनीकी समस्या से बचा जा सके. आवेदन में सुधार के लिए भी उम्मीदवारों को अवसर दिया जाएगा. इसके लिए संशोधन विंडो 10 और 11 अप्रैल 2026 को दो दिनों के लिए खोली जाएगी, जिसमें अभ्यर्थी अपने आवेदन में आवश्यक बदलाव कर सकेंगे.

परीक्षा की तारीख और रिजल्ट-

इस भर्ती के लिए लिखित परीक्षा अस्थायी रूप से मई 2026 में आयोजित की जाएगी. परीक्षा समाप्त होने के बाद रिजल्ट जून 2026 में जारी किए जाने की संभावना है. इसके बाद आगे की चयन प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन;

अग्निवीर एमआर पद के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से कक्षा 10 पास होना जरूरी है और कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने चाहिए. अग्निवीर एसएसआर पद के लिए अभ्यर्थियों के पास कक्षा 12 में मैथ्स और फिजिक्स सब्जेक्ट के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है. इसके अलावा तीन वर्षीय डिप्लोमा होल्डर उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं, जिनके कुल अंक 50 प्रतिशत या उससे अधिक होने चाहिए. एसएसआर (मेडिकल) पद के लिए कक्षा 12 में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी सब्जेक्ट्स के साथ न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं. एज लिमिट से संबंधित डिटेल जानकारी के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक नोटिफिकेशन देखने की सलाह दी गई है, क्योंकि अलग-अलग पदों के लिए आयु मानदंड अलग हो सकते हैं.

चयन की प्रक्रिया क्या है?

इन पदों पर भर्ती के लिए उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. शारीरिक परीक्षण में दौड़, स्क्वैट्स, पुश-अप्स और सिट-अप्स जैसे अभ्यास शामिल होंगे.

आवेदन के लिए फीस कितनी है?

इस भर्ती में पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को 550 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा. ज्यादा जानकारी और आवेदन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया जानने के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट पर जारी अधिसूचना जरूर देखनी चाहिए.

ईरान अभी भी बना सकता है 10 परमाणु बम.जंग के बीच IAEA चीफ की बड़ी चेतावनी…

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ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ गई है. संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था International Atomic Energy Agency (IAEA) के प्रमुख Rafael Grossi ने बड़ा खुलासा किया है कि ईरान अभी भी परमाणु बम बना सकता है. ग्रॉसी के मुताबिक, ईरान का बड़ा हिस्सा संवर्धित यूरेनियम इस्फहान इलाके में जमीन के नीचे बनी एक सुरंग में रखा गया था और संभावना है कि यह सामग्री अब भी वहीं मौजूद हो सकती है.

10 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम?

IAEA के अनुमान के अनुसार, पिछले साल युद्ध शुरू होने से पहले ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम से ज्यादा 60% तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद था. इस स्तर का यूरेनियम अगर और ज्यादा शुद्ध किया जाए तो उससे करीब 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं. ग्रॉसी ने बताया कि इस्फहान में आखिरी निरीक्षण के समय करीब 200 किलोग्राम 60% शुद्धता वाला यूरेनियम मौजूद था.

ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्र हैं Isfahan Nuclear Technology Center, Natanz Nuclear Facility और Fordow Fuel Enrichment Plant.

पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बड़े हमले किए थे. उस समय अमेरिका ने Northrop Grumman B-2 Spirit बमवर्षकों से भारी बंकर बस्टर बम गिराए थे, जो जमीन के सैकड़ों फीट नीचे तक तबाही मचाने में सक्षम हैं. हालांकि इस्फहान के पास मौजूद अंडरग्राउंड टनल कॉम्प्लेक्स इन हमलों में पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ.

परमाणु सामग्री शिफ्ट होने के संकेत नहीं

IAEA प्रमुख ने बताया कि सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य निगरानी तरीकों से अब तक ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि इस्फहान से परमाणु सामग्री को कहीं और ले जाया गया हो. उनके मुताबिक, कुछ संवर्धित यूरेनियम नतांज केंद्र में भी मौजूद हो सकता है. पिछले साल हुए हमलों के बाद से ईरान ने IAEA को अपने परमाणु भंडार की पूरी जानकारी नहीं दी है और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को बमबारी वाले परमाणु ठिकानों का निरीक्षण करने की भी अनुमति नहीं दी गई है.

साल 2025 में क्या हुआ था?

पिछले साल (2025 में) अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के परमाणु संग्रह (nuclear facilities) पर बड़े हमले किए थे। जिसे Twelve-Day War या 12 दिन का युद्ध कहा जाता है: -13 जून 2025 से इज़रायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। इनमें ईरान के प्रमुख परमाणु स्थल जैसे Natanz (यूरेनियम संवर्धन सुविधा), Isfahan (न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर), और अन्य सैन्य/परमाणु-संबंधित लक्ष्य शामिल थे। इज़रायल ने कई ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों और सैन्य कमांडरों को भी निशाना बनाया.

-22 जून 2025 को अमेरिका ने भी सीधे हस्तक्षेप किया. अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने Operation Midnight Hammer के तहत तीन प्रमुख परमाणु सुविधाओं-Natanz, Fordow (पहाड़ के नीचे बनी गहरी संवर्धन साइट), और Isfahan-पर हमला किया। इसमें B-2 बॉम्बर से “bunker buster” बम (जैसे GBU-57 Massive Ordnance Penetrator) और टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ. उस समय भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इन हमलों से ईरान का परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह तबाह” (completely obliterated) हो गया और इसे 2 साल पीछे धकेल दिया गया. हालांकि:

– IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) और कुछ खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा, लेकिन कार्यक्रम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.

– ईरान ने कहा कि नुकसान सीमित था और वह अपना कार्यक्रम फिर से शुरू कर सकता है. यह 2025 का मुख्य हमला था, जिसके बाद 24 जून 2025 को सीजफायर हो गया, लेकिन 2026 में (फरवरी-मार्च) फिर से अमेरिका-इज़रायल ने ईरान पर हमले किए, जिसमें परमाणु स्थलों को फिर निशाना बनाया गया (जैसे Natanz के प्रवेश द्वार और अन्य साइट्स).

क्या अमेरिका भेजेगा स्पेशल फोर्स?

इसी बीच खबरें सामने आई हैं कि अमेरिका ईरान के परमाणु भंडार को कब्जे में लेने या नष्ट करने के लिए स्पेशल फोर्स मिशन पर भी विचार कर रहा है. माना जा रहा है कि यह मिशन बेहद गुप्त होगा और इसमें ईरान के अंडरग्राउंड ठिकानों में घुसकर परमाणु सामग्री को सुरक्षित या नष्ट करने की कोशिश की जा सकती है. लेकिन सबसे ज़रूरी बात अगर ईरान का यह परमाणु भंडार सुरक्षित बचा हुआ है, तो यह मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.

बरेली में दो नई टाउनशिप का रास्ता साफ, BDA को मिले 150 करोड़, 12 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित…

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उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में तेजी से बढ़ती आबादी और आवास की जरूरत को देखते हुए एक बड़ी योजना को मंजूरी मिल गई है. मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को दो नई टाउनशिप बसाने के लिए 150 करोड़ रुपये दिए गए हैं.

उत्तर प्रदेश कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब बीडीए इन टाउनशिप के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया तेज करने जा रहा है.

इन टाउनशिप को विकसित करने के लिए आसपास के 12 गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा. इससे आने वाले समय में शहर में रहने के लिए नए और बेहतर आवासीय विकल्प उपलब्ध होंगे. BDA के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना से शहर का दायरा बढ़ेगा और लोगों को आधुनिक सुविधाओं से लैस कॉलोनियां मिलेंगी.

12 गांवों की जमीन होगी अधिग्रहित

नई टाउनशिप विकसित करने के लिए बीडीए ने जिन गांवों को चिन्हित किया है, उनमें आसपुर, खूबचंद, अड्पुरा, जागीर, अहिलादपुर, बरकापा, कुम्हरा, कलापुर, मोहरनियां, नवदिया, कुर्मियांन और हरहरपुर शामिल हैं. इन गांवों की जमीन को अधिग्रहित कर योजनाबद्ध तरीके से नई कॉलोनियां बसाई जाएंगी.

बीडीए अधिकारियों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण से पहले संबंधित गांवों में सर्वे कराया जाएगा. इसके बाद जमीन की कीमत तय कर किसानों और जमीन मालिकों से बातचीत की जाएगी. पूरी प्रक्रिया सरकार के नियमों के अनुसार ही पूरी की जाएगी ताकि किसी भी तरह की परेशानी न हो. अधिकारियों का कहना है कि इन टाउनशिप में सड़क, पार्क, बिजली, पानी, सीवर, स्कूल और अन्य जरूरी सुविधाओं का भी ध्यान रखा जाएगा. इससे लोगों को व्यवस्थित और बेहतर माहौल में रहने का मौका मिलेगा.

आठ शहरों को मिला 425 करोड़ का बजट

प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत आठ शहरों को कुल 425 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया है. इसमें बरेली विकास प्राधिकरण को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है. 150 करोड़ रुपये मिलने से बीडीए को जमीन खरीदने और टाउनशिप की योजना को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी.

सरकार की ओर से दी गई यह राशि प्राधिकरण को अधिकतम 20 साल की अवधि के लिए उपलब्ध कराई गई है. इसका मुख्य उद्देश्य नई टाउनशिप बसाने के लिए जमीन की व्यवस्था करना और भविष्य में आने वाली आर्थिक बाधाओं को दूर करना है. इस योजना में आवास विकास परिषद को भी शामिल किया गया है. हालांकि, बरेली को मिला बड़ा बजट इस बात का संकेत है कि शहर का औद्योगिक और आवासीय महत्व लगातार बढ़ रहा है.

अधिकारियों के मुताबिक, अब बीडीए जल्द ही चिन्हित गांवों में सर्वे और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटेगा. मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली इस योजना को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने की तैयारी की जा रही है. अगर यह योजना तय समय पर पूरी हो जाती है तो बरेली में आवास की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है. साथ ही शहर के विकास को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.

एक बैंक अकाउंट, जिस पर 4 राज्यों में FIR. पटना के व्यापारी ने साइबर ठगों को किराए पर दे दिया खाता, गजब है कहानी…

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बिहार की राजधानी पटना में साइबर पुलिस ने एक ऐसे दवा व्यापारी को गिरफ्तार किया है, जिसने अपनी फर्म का बैंक खाता साइबर अपराधियों को किराए पर दे रखा था. कंकड़बाग निवासी इस व्यापारी के खाते से महज 6 दिनों के भीतर 81 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ, जिसके बदले उसे भारी-भरकम कमीशन मिला.

अब यह व्यापारी पुलिस की सलाखों के पीछे है और जांच की आंच कई अन्य राज्यों तक पहुंच गई है.

गिरफ्तार व्यापारी की पहचान अनिल कुमार के रूप में हुई है. जांच में सामने आया कि अनिल ने अपनी फर्म के नाम पर एक करंट अकाउंट खुलवाया था. इस अकाउंट का इस्तेमाल साइबर ठग देश भर में लोगों से लूटी गई रकम को ठिकाने लगाने के लिए कर रहे थे. चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध काम के बदले अनिल को 16 लाख 20 हजार रुपये का कमीशन भी मिला.

4 राज्यों की पुलिस को थी तलाश

साइबर थाना अध्यक्ष सह डीएसपी नीतिश चंद्र धारिया ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर जब अनिल के खाते की पड़ताल की गई, तो परतें खुलती चली गईं. अनिल के इस करंट अकाउंट के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा समेत चार अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी की शिकायतें पहले से दर्ज थीं. जब पुलिस ने अनिल से इतनी बड़ी रकम के स्रोत के बारे में पूछा, तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका.

पुलिस की रडार पर कमीशन एजेंट

पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि अनिल अकेला ऐसा व्यक्ति नहीं है. राजधानी में एक पूरा नेटवर्क सक्रिय है जो कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को अपने खाते उपलब्ध कराता है. डीएसपी ने बताया कि पुलिस अब उन सभी लोगों को चिन्हित कर रही है जो अनजाने में या जानबूझकर साइबर गैंग के मददगार के रूप में काम कर रहे हैं.

सावधानी ही बचाव है

साइबर पुलिस ने आम नागरिकों और व्यापारियों को सचेत किया है कि वे कभी भी अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स किसी अनजान व्यक्ति को न दें. यदि आपके खाते से किसी भी तरह का संदिग्ध लेनदेन होता है, तो इसकी जिम्मेदारी खाताधारक की होगी और उसे जेल की हवा खानी पड़ सकती है.

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग का असर, 178 साल पुराने पंचम पुरीवाला होटल में गैस खत्म, 79 मेनू की जगह सिर्फ 2 आइटम…

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मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के बीच एलपीजी गैस की कमी का असर अब शहर के पुराने और मशहूर होटलों पर भी दिखाई देने लगा है. मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बाहर फोर्ट इलाके में स्थित करीब 178 साल पुराना पंचम पुरीवाला होटल भी इस संकट से जूझ रहा है.

ब्रिटिश काल में 1848 में शुरू हुए इस ऐतिहासिक होटल में आमतौर पर 79 तरह के मेनू आइटम मिलते थे.

बताया जाता है कि खासतौर पर यहां 5 प्रकार की पूरियां परोसी जाती थीं. लेकिन एलपीजी की कमी के चलते अब होटल में सिर्फ दो ही आइटम परेासे जा रहे हैं. जिनमें पूरी-भाजी और आमरस-पूरी उपलब्ध है. होटल प्रबंधन के मुताबिक, उनके पास एलपीजी का बहुत ही सीमित स्टॉक बचा है. इसी कारण उन्हें कई परिचितों से उधार सिलेंडर लेकर किसी तरह होटल चलाना पड़ रहा है. इस स्थिति को लेकर टीवी9 भारतवर्ष के संवाददाता विनोद जगदाले ने पंचम पुरीवाला पहुंचकर मौके का जायजा लिया. इस दौरान होटल प्रबंधन ने बताया कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण अब सिर्फ दो ही आइटम परेासे जा रहे हैं. आइटम कम होने से उनकी रोजाना आमदनी काफी कम हो गई है.

छठी पीढ़ी चला रही रेस्टोरेंट

होटल प्रबंधन ने बताया कि भारत में रेलवे शुरू होने से पहले से लेकर के अभी तक चालू है. इस दुकान का नाम पंचम पूरिवाला है. यह दुकान पंचम दास द्वारा खोली गई थी. यह दुकान मुंबई में सुबह-सुबह मजदूरों को भोजन कराने के लिए खोला गया था. इसके ठीक सामने अंग्रेजो के जमाने में एक जेल हुआ करता था, इस कारण यहां बहुत भीड़ रहता थी. अब एक दो मंजिला रेस्तरां में तब्दील हो गया है. इसे अब इस रेस्टोरेंट को मलिक की छठी पीढ़ी चला रही है.

महात्मा गांधी भी खा चुके हैं खाना

यह दुकान पूरी भाजी की है. पूरी-भाजी की एक प्लेट के साथ पांच पूरी और एक सब्जी परोसी जाती है, जो की यहां की परंपरा है. जिन्होंने इसे खोला उनका नाम पंचम था जिसका संस्कृत में अर्थ है पांच. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और सरदार वल्लभ भाई से लेकर दिग्गज सुपरस्टार राजेश खन्ना और संगीत निर्देशक खय्याम तक इस साधारण भोजनालय में खाना खा चुके है. इनके मेन्यू में बदलाव कर के पांच फ्लेवर की पूरी जोड़ दिया गया है. जो लोग मुंबई के खाने के बारे में जानते हैं, वो इस भोजनालय के बारे में भी जानते हैं. मुंबई के लोगों के बीच यह जगह बहुत फेमस है.

India LPG import:  भारत में किन-किन देशों से आती है गैस, क्या अमेरिका की भी हिस्सेदारी और अपना उत्पादन कितना..समझिए’

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अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग से भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई पर संकट आ गया है. भारत अपनी LPG जरूरत का सिर्फ 40% ही उत्पादन करता है. बाकी इम्पोर्ट करता है.

ज्यादातर उसी क्षेत्र से मंगाई जाती है जहां अभी लड़ाई चल रही है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है.

बता दें कि ईरान और ओमान के बीच मौजूद होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी शिपिंग रूट में से एक है. दुनिया भर में तेल और गैस शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है. 1 मार्च से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से LPG इंपोर्ट पर असर पड़ा है.

भारत में LPG की सालाना खपत लगभग 31.3 मिलियन टन है, जिसमें से लगभग 87% घरों की रसोई में इस्तेमाल होती है, जबकि बाकी हिस्सा होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल यूजर्स को जाता है. देश की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा लगभग 62% इंपोर्ट से पूरा होता है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अपने इंडियन ऑयल मार्केट आउटलुक टू 2030 में बताया, क्लीन कुकिंग प्रोग्राम की वजह से पिछले दस सालों में LPG इम्पोर्ट लगभग तीन गुना बढ़ गया है. भारत के LPG इम्पोर्ट की मात्रा 2020-21 में 16.48 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) से बढ़कर 2025-26 में 18 MMT से ज्यादा हो गई.

कितनी बढ़ गई कंज्यूमर्स की संख्या?

देश में LPG का इस्तेमाल बढ़ रहा है, क्योंकि ज्यादा लोग खाना पकाने के लिए साफ फ्यूल इस्तेमाल कर रहे हैं. पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के डेटा के मुताबिक, 2015 से जुलाई 2025 के बीच एक्टिव घरेलू LPG कंज्यूमर्स की संख्या 1,486 लाख से बढ़कर 3,305 लाख हो गई, जो एक दशक में 120% से ज़्यादा की बढ़ोतरी है. सरकार ने दावा किया है कि LPG कवरेज लगभग 100% घरों तक बढ़ गया है, जो 2016 में 62% था जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू हुई थी.

कहां से LPG इंपोर्ट करता है भारत?

भारत का LPG इंपोर्ट कुछ ही देशों में केंद्रित है, जिनमें से ज़्यादातर पश्चिम एशिया में हैं. 2025 में कतर ने भारत के LPG इंपोर्ट का लगभग 34% हिस्सा लिया, जिससे वह देश का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने लगभग 26% सप्लाई की, उसके बाद कुवैत (8.3%) का स्थान रहा.

गैस के लिए पश्चिम एशिया पर यह निर्भरता लंबे समय से है. 2020 में भारत के कुल LPG इंपोर्ट का लगभग 37% कतर से, 16% UAE से और 11% सऊदी अरब से आया. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर मिलकर भारत की इम्पोर्टेड LPG सप्लाई का 90 परसेंट से ज्यादा हिस्सा देते हैं.

किन देशों से कितना LPG इंपोर्ट करता है भारत?

कतर- 34% UAE- 26% कुवैत-8.3%

2024-25 में कितना इंपोर्ट?

UAE- 40% कतर-22% सऊदी अरब-15% कुवैत-15% अन्य-8 %

LNG इंपोर्ट भी बढ़ा

2024-25 में भारत का लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इंपोर्ट भी बढ़ है, जो 27 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया. ये अब तक का सबसे ज़्यादा है और 2011-12 में इंपोर्ट किए गए 13.5 MMT से दोगुना है. LPG की तरह, यह भी ज़्यादातर उन्हीं पश्चिम एशियाई देशों से आता है जो अब लड़ाई में फंसे हुए हैं.

क्या अमेरिका की भी है हिस्सेदारी?

क्या भारत अमेरिका से भी LPG इंपोर्ट करता है. इस सवाल का जवाब सरकार ने लोकसभा में दिया था. केंद्र सरकार ने कहा कि साल 2026 के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने अमेरिका गल्फ कोस्ट से कॉन्ट्रैक्ट किया. ये डील सालाना 2.2 मिलियन टन LPG के इंपोर्ट को लेकर हुई.

सरकार ने कहा कि भारत सस्ती LPG को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर काम कर रहा है. इसी कोशिश के तहत, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के अधिकारियों की एक टीम ने 21 से 24 जुलाई 2025 तक अमेरिका का दौरा किया और बड़े US प्रोड्यूसर्स के साथ बातचीत की.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में PSU तेल कंपनियों ने सबसे कम कीमतों पर LPG देना पक्का किया है. पिछले साल LPG की वैश्विक कीमतों में 60 परसेंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी के बावजूद, उज्ज्वला के लाभार्थियों को लगभग ₹500-550 की सब्सिडी वाली कीमत पर सिलेंडर मिलते रहे, जबकि असल कीमत ₹1100 से ज़्यादा थी. भारत सरकार ने इस बोझ को उठाया और पिछले साल LPG की बढ़ती कीमतों के असर से बचाने के लिए ₹40,000 करोड़ से ज़्यादा खर्च किए. सरकार ने ये भी बताया कि अभी रूस से LPG इंपोर्ट करने के लिए कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं है.

भारत खुद कितना उत्पादन करता है?

भारत की घरेलू एनर्जी की रीढ़ अरब सागर में मौजूद मुंबई हाई (पहले बॉम्बे हाई) फील्ड है. इसे सरकारी कंपनी ONGC चलाती है, यह देश की सबसे ज़्यादा पैदावार वाली संपत्ति है, जो ऑफशोर तेल और गैस का सबसे बड़ा हिस्सा देती है. दूसरी तरफ बंगाल की खाड़ी में कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन नेचुरल गैस के लिए नई फ्रंटियर बन गया है.

औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार! सेंसेक्स 1,000 अंक लुढ़का, निवेशकों के डूबे 2.50 लाख करोड़…

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मंगलवार को जब शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली थी, तब ऐसा लगने लगा था कि आने वाले दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में और तेजी आएगी. उसका कारण भी था. ट्रंप ने ईरान वॉर जल्द खत्म होने के संकेत दिए थे.

निवेशकों की ओर से वैल्यू बाइंग होनी शुरू हो गई थी. रुपए में सुधार और कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई थी. लेकिन बुधवार को एक बार फिर से शेयर बाजार में गिरावट आई. जानकारों का मानना है कि अभी तक शेयर बाजार ने वॉर खत्म होने के संकेत नहीं दिए हैं.

साथ ही मंगलवार को आई तेजी के बाद निवेशकों ने भी यह मान लिया है कि अभी वॉर जल्द खत्म होने वाली नहीं है. जिसकी वजह से निवेशकों की ओर बिकवाली की गई. वहीं दूसरी ओर विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली लगातार की जा रही है. रुपए में भी जारी है. जिसकी वजह से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान 1000 अंकों से ज्यादा नीचे दिखाई दिया. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी में 253 अंकों की गिरावट देखने को मिल चुकी है. जिसकी वजह से शेयर बाजार निवेशकों को 2.50 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार में गिरावट के कौन से प्रमुख कारण है?

शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

बुधवार को भारतीय शेयर बाजारों में एक बार फिर से गिरावट आई, सेंसेक्स 1,000 पॉइंट्स से ज़्यादा और निफ्टी 50 24,000 के निशान से नीचे आ गया. यह गिरावट तब आई जब मिले-जुले ग्लोबल संकेतों और ईरान-अमेरिका-इज़राइल के बीच चल रहे तनाव के बीच बेंचमार्क इंडेक्स सपाट खुले थे. सुबह 12.50 बजे सेंसेक्स करीब 965.08 पॉइंट्स गिरकर 77,230.73 पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 275.85 पॉइंट्स से ज़्यादा गिरकर 23,985.65 पर आ गया. एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, HDFC बैंक और बजाज फिनसर्व के शेयर सेंसेक्स पर टॉप लूज़र्स रहे, जिनमें से हर एक में 2-4% की गिरावट आई. अडानी पोर्ट्स, NTPC, सन फार्मा और टेक महिंद्रा के शेयर टॉप गेनर्स में शामिल रहे. NSE पर कई सेक्टोरल इंडेक्स सुबह की बढ़त को खोकर तेज़ी से नीचे आ गए. निफ्टी ऑटो इंडेक्स लगभग 2% गिरकर टॉप सेक्टोरल लूज़र बन गया, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.8% से ज़्यादा गिरकर उसके बाद दूसरे नंबर पर रहा. इस बीच, निफ्टी फार्मा में 1% से ज्यादा की बढ़त हुई.

शेयर बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण

ईरान-इजराइल युद्ध जारी है

मिडिल ईस्ट में वॉर के जल्दी समाधान की पहले की उम्मीदों के बावजूद, जियोपॉलिटिकल टेंशन तेल से भरपूर इस इलाके को परेशान कर रहा है. US और इजराइल ने ईरान पर युद्ध के सबसे बड़े हमले किए, जिसे कुछ लोगों ने युद्ध का सबसे बड़ा हमला बताया, जबकि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि यह लड़ाई “जल्द ही खत्म हो सकती है”. ईरान की सरकार ने चेतावनी दी है कि उसके सरकारी सुरक्षा बल सरकार विरोधी प्रदर्शनों के किसी भी फिर से शुरू होने का सामना करने के लिए “तैयार” हैं. देश ने बुधवार सुबह इजराइल, लेबनान और खाड़ी के कई इलाकों को निशाना बनाया. इससे होर्मुज स्ट्रेट जलडमरूमध्य के लंबे समय तक बंद रहने की उम्मीदें बढ़ गई हैं. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने धमकी दी है कि अगर US और इजराइली हमले बंद नहीं हुए तो वे खाड़ी से तेल शिपमेंट रोक देंगे.

रुपए में गिरावट

भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 0.14 फीसदी गिरकर 91.9350 रुपए पर खुला, जबकि पिछला बंद भाव 91.8050 रुपए था. सोमवार को US डॉलर के मुकाबले 92.35 के ऑल-टाइम लो पर बंद होने के बाद निवेशक भारतीय करेंसी के मूवमेंट पर करीब से नजर रख रहे हैं. LKP सिक्योरिटीज में कमोडिटी और करेंसी के VP रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी ने कहा कि एक्सपेक्टेड ट्रेडिंग रेंज 91.25 और 92.60 के बीच बनी हुई है, क्रूड ऑयल की कीमतों में मूवमेंट और डॉलर इंडेक्स की दिशा करेंसी के शॉर्ट-टर्म ट्रेंड को गाइड करती रहेगी.

FII की मुनाफावसूली जारी

विदेशी निवेशक मंगलवार को भी नेट सेलर बने रहे, उन्होंने कल 4,672.64 करोड़ रुपए की भारतीय इक्विटी बेची. हालांकि यह आज उनके ट्रेडिंग बिहेवियर को नहीं दिखाता है, लेकिन पिछले कई सेशन से विदेशी निवेशकों की लगातार सेलिंग ने निवेशकों का सेंटिमेंट खराब कर दिया है. मार्केट डेटा के मुताबिक, FPIs ने मार्च के पहले हफ्ते में 21,800 करोड़ रुपए से ज्यादा के भारतीय शेयर बेचे. यह तब हुआ जब फरवरी में विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों के नेट खरीदार बने रहे.

प्रॉफिट बुकिंग

आज शेयर बाज़ारों में गिरावट शायद प्रॉफिट बुकिंग की वजह से भी हुई. कल भारतीय शेयर बाजारों में तेज़ी आई थी, जिसमें सेंसेक्स 600 पॉइंट से ज़्यादा बढ़ा था और निफ्टी 24,250 के ऊपर बंद हुआ था. ऐसा तब हुआ जब US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान विवाद के जल्द खत्म होने का इशारा दिया और तेल की कीमतों में गिरावट ने लगातार बिकवाली के बाद माहौल को बेहतर बनाया. ट्रंप ने सोमवार को CBS न्यूज को बताया कि उन्हें लगता है कि ईरान के खिलाफ जंग “पूरी तरह खत्म हो चुकी है” और वॉशिंगटन उनके शुरुआती चार-पांच हफ्ते के अंदाजे वाले टाइमफ्रेम से “बहुत आगे” है. नतीजतन, कच्चे तेल की कीमतों में काफी गिरावट आई, जो 120 डॉलर के लेवल से 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया है. बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 82 सेंट गिरकर 86.98 प्रति बैरल पर आ गया.

क्या कह रहे हैं जानकार?

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ने निफ्टी 50 का तुरंत सपोर्ट 24,150 पर रखा था, जो हालांकि पहले ही टूट चुका है. एनालिस्ट ने चेतावनी दी थी कि इस लेवल से नीचे जाने पर फिर से बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा था कि अगर इंडेक्स 24,150 से नीचे जाता है, तो यह और गिरकर 23,800 तक जा सकता है. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि कल निफ्टी उम्मीद के मुताबिक 24,300-24,370 के दायरे को टेस्ट करते हुए नीचे गया. 25,000 की संभावनाओं पर विचार करने के लिए यह ब्रेकआउट पॉइंट बना रहेगा. फिर भी, कल का हैमर फॉर्मेशन पॉजिटिविटी का संकेत देता है, जो 24,210 से ऊपर रहने तक बना रहेगा. डाउनसाइड मार्कर 24,050 के पास हो सकता है.

LPG संकट पर केजरीवाल का केंद्र पर हमला, कहा-देश को अमेरिका की कॉलोनी बना दिया…

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देश में एलपीजी गैस की कमी और बढ़ती कीमतों को लेकर आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला हैं. दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल ने कहा कि आज देश गंभीर संकट से गुजर रहा है.

देश में एलपीजी की भारी किल्लत पैदा हो गई है. इसका कारण देश की मौजूदा सरकार की विदेश नीति है. जिसके चलते आज देश इस संकट से गुजर रहा है.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश में गैस का उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गया है, जबकि खपत का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है. उनका दावा है कि आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा हार्मुज स्ट्रेट से आता था, जो फिलहाल बंद होने की वजह से आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसका सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ रहा है. रेस्टोरेंट गैस का ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकते और उन्हें रोजाना सप्लाई पर निर्भर रहना पड़ता है.

मुंबई से लेकर पंजाब तक 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट बंद

केजरीवाल ने कहा कि मुंबई में करीब 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं, जबकि तमिलनाडु में लगभग हजारों होटल और रेस्टोरेंट बंद होने के कगार पर हैं. इसी तरह पंजाब और एनसीआर में भी हजारों होटल बंद होने की स्थिति बन रही है. केजरीवाल ने कहा कि गुजरात के मोरबी में 650 उद्योगों में से करीब 170 बंद हो चुके हैं, जिससे लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में सरकार ने घरेलू और व्यावसायिक गैस के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे स्थिति और खराब हो गई है.

सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल

विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए केजरीवाल ने कहा कि भारत की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति को खत्म कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में किसी एक देश का पक्ष नहीं लेना चाहिए था, लेकिन पीएम मोदी अमेरिका और इजरायल के पक्ष में दिखाई दिए, जिससे ईरान जैसे पुराने दोस्त देश नाराज हो गए. उनहोंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी यूएस के दबाव में काम कर रहे हैं. अगर पीएम को किसी तरह का डर है तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत आर्थिक रूप से कमजोर था, लेकिन दुनिया में उसका सम्मान था.केजरीवाल ने 1971 के युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय अमेरिका की धमकियों के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के हित में फैसले लिए थे. जबकि मौजूदा सरकार की विदेश नीति से देश की छवि को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि पिछले 75 सालों से भारत की विदेश नीति की बुनियाद रही नॉन-अलाइमेंट पॉलिसी को प्रधानमंत्री ने कुछ ही दिनों में खत्म कर दिया

अमेरिका के आगे देश को कर दिया कमजोर

अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर भी बड़ा हमला बोला है. केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा सरकार ने देश को अमेरिका की एक कॉलोनी बना दिया है. उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने शासन इसलिए किया क्योंकि वो कमजोर थे. आज अमेरिका ने हमारे देश को भी कमजोर कर दिया है. मौजूदा सरकार अमेरिका के आदेश पर फैसले लेती है. अमेरिका के कहने पर ही रूस से तेल खरीदना बंद किया गया था, जिससे देश को 8 लाख करोड़ का नुकसान हुआ था. समझ नहीं आता है आखिर क्या वजह है जो अमेरिका का अदना अफसर भी हमारी मौजूदा सरकार को आदेश दे देता है.

“Sheetla Ashtami: गधा क्यों बना शीतला माता की सवारी? जानें इससे जुड़ी धार्मिक मान्यता”

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आज शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. ये पर्व हर साल चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है. इस दिन विधि-विधान से माता शीतला की पूजा की जाती है.

उनको बासी भोजन का भोग लगाया जाता है. चूंकि माता का भोग सप्तमी तिथि को ही तैयार कर लिया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन माता की पूजा करने से संक्रामक बिमारियों से मुक्ति मिलती है.

सनातन धर्म में बताया गया है कि हर देवी-देवताओं की अपनी अलग-अलग सवारियां हैं. कोई देवी शेर पर सवार होती हैं, तो कोई उल्लू या हाथी पर. इसी तरह माता शीतला गधे पर सवार होती हैं. गधा आमतौर पर मेहनती और सीधा-सादा जानवर माना जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि माता शीतला गधे पर ही क्यों सवार होती हैं? अगर नहीं तो आइए जानते हैं कि गधा माता की सवारी कैसे बन गया?

स्कंद पुराण के अनुसार…

सनातन धर्म में माता शीतला को बीमारियों को दूर करने वाली देवी माना गया है. विशेषकर चेचक और अन्य त्वचा के रोगों से बचने के लिए उनकी पूजा की जाती है. स्कंद पुराण के अनुसार, माता शीतला की सवारी गधा है. माता अपने हाथों में कलश, सूप और झाड़ू धारण करती हैं. इसके साथ ही वो नीम के पत्तों की माला भी धारण करती हैं.लोगों के मन में ये सवाल आता है कि माता ने गधे को ही क्यों अपनी सवारी के लिए चुना?

शीतला माता की सवारी गधा ही क्यों?

दरअसल, गधा एक बहुत ही मेहनती और सनहशील जानवर है. गधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी जबरदस्त मानी जाती है. यानी जल्दी उसको कोई बीमारी नहीं होती. माता शीतला भी बीमारियों को दूर करती हैं. यही कारण है माता ने अपनी सवारी के लिए गधे को चुना. गधा हमें सिखाता है कि धैर्य और सहनशीलता से हर परेशानी से पार पाया जा सकता है.

Anganwadi Bharti 2026: आंगनबाड़ी में नौकरी का एक और शानदार अवसर…

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Anganwadi Bharti 2026 Chhattisgarh:

आंगनबाड़ी में नौकरी का एक और शानदार अवसर, इस जिले में निकली भर्ती, जानिए योग्यता सहित अन्य पात्रता शर्तें

छत्तीसगढ़ के लुण्ड्रा परियोजना क्षेत्र में आंगनबाड़ी सहायिका के 2 पदों पर भर्ती’

आवेदन केवल महिला उम्मीदवारों से आमंत्रित’

अंतिम तिथि 24 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन’

 Anganwadi Bharti 2026 Chhattisgarh अगर आप भी आंगनबाड़ी में सरकारी नौकरी करना चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल एकीकृत बाल विकास परियोजना लुण्ड्रा के परियोजना अधिकारी ने बताया कि आंगनबाड़ी सहायिका के 02 रिक्त पदों पर भर्ती हेतु इच्छुक एवं पात्र महिला अभ्यर्थियों से 24 मार्च 2026 तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

आवेदन पत्र विभागीय वेबसाइट https://aww.e-bharti.in/ के माध्यम से भरे जाएंगे।

Anganwadi Bharti 2026 Chhattisgarh रिक्त पदों में चन्द्रडीपा वार्ड के आंगनबाड़ी केंन्द्र अगासी चन्द्रडीपा में आंगनबाड़ी सहायिका के 01 पद एवं खालपारा वार्ड में आंगनबाड़ी केंन्द्र सिलसिला खालपारा में आंगनबाड़ी सहायिका के 01 पद भर्ती की जानी है।

उन्होंने बताया कि उक्त पदों पर केवल महिला ही आवेदन कर सकती है। नियुक्ति की शर्तों एवं अहर्ताओं के संबंध में परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना लुण्ड्रा कार्यालय, जनपद पंचायत लुण्ड्रा, पंचायत भवन के सूचना पटल पर देखी जा सकती है।