अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग से भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की सप्लाई पर संकट आ गया है. भारत अपनी LPG जरूरत का सिर्फ 40% ही उत्पादन करता है. बाकी इम्पोर्ट करता है.
ज्यादातर उसी क्षेत्र से मंगाई जाती है जहां अभी लड़ाई चल रही है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है.
बता दें कि ईरान और ओमान के बीच मौजूद होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी शिपिंग रूट में से एक है. दुनिया भर में तेल और गैस शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है. 1 मार्च से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से LPG इंपोर्ट पर असर पड़ा है.
भारत में LPG की सालाना खपत लगभग 31.3 मिलियन टन है, जिसमें से लगभग 87% घरों की रसोई में इस्तेमाल होती है, जबकि बाकी हिस्सा होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल यूजर्स को जाता है. देश की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा लगभग 62% इंपोर्ट से पूरा होता है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अपने इंडियन ऑयल मार्केट आउटलुक टू 2030 में बताया, क्लीन कुकिंग प्रोग्राम की वजह से पिछले दस सालों में LPG इम्पोर्ट लगभग तीन गुना बढ़ गया है. भारत के LPG इम्पोर्ट की मात्रा 2020-21 में 16.48 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) से बढ़कर 2025-26 में 18 MMT से ज्यादा हो गई.
कितनी बढ़ गई कंज्यूमर्स की संख्या?
देश में LPG का इस्तेमाल बढ़ रहा है, क्योंकि ज्यादा लोग खाना पकाने के लिए साफ फ्यूल इस्तेमाल कर रहे हैं. पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के डेटा के मुताबिक, 2015 से जुलाई 2025 के बीच एक्टिव घरेलू LPG कंज्यूमर्स की संख्या 1,486 लाख से बढ़कर 3,305 लाख हो गई, जो एक दशक में 120% से ज़्यादा की बढ़ोतरी है. सरकार ने दावा किया है कि LPG कवरेज लगभग 100% घरों तक बढ़ गया है, जो 2016 में 62% था जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू हुई थी.
कहां से LPG इंपोर्ट करता है भारत?
भारत का LPG इंपोर्ट कुछ ही देशों में केंद्रित है, जिनमें से ज़्यादातर पश्चिम एशिया में हैं. 2025 में कतर ने भारत के LPG इंपोर्ट का लगभग 34% हिस्सा लिया, जिससे वह देश का सबसे बड़ा सप्लायर बन गया. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने लगभग 26% सप्लाई की, उसके बाद कुवैत (8.3%) का स्थान रहा.
गैस के लिए पश्चिम एशिया पर यह निर्भरता लंबे समय से है. 2020 में भारत के कुल LPG इंपोर्ट का लगभग 37% कतर से, 16% UAE से और 11% सऊदी अरब से आया. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर मिलकर भारत की इम्पोर्टेड LPG सप्लाई का 90 परसेंट से ज्यादा हिस्सा देते हैं.
किन देशों से कितना LPG इंपोर्ट करता है भारत?
कतर- 34% UAE- 26% कुवैत-8.3%
2024-25 में कितना इंपोर्ट?
UAE- 40% कतर-22% सऊदी अरब-15% कुवैत-15% अन्य-8 %
LNG इंपोर्ट भी बढ़ा
2024-25 में भारत का लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इंपोर्ट भी बढ़ है, जो 27 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया. ये अब तक का सबसे ज़्यादा है और 2011-12 में इंपोर्ट किए गए 13.5 MMT से दोगुना है. LPG की तरह, यह भी ज़्यादातर उन्हीं पश्चिम एशियाई देशों से आता है जो अब लड़ाई में फंसे हुए हैं.
क्या अमेरिका की भी है हिस्सेदारी?
क्या भारत अमेरिका से भी LPG इंपोर्ट करता है. इस सवाल का जवाब सरकार ने लोकसभा में दिया था. केंद्र सरकार ने कहा कि साल 2026 के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने अमेरिका गल्फ कोस्ट से कॉन्ट्रैक्ट किया. ये डील सालाना 2.2 मिलियन टन LPG के इंपोर्ट को लेकर हुई.
सरकार ने कहा कि भारत सस्ती LPG को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर काम कर रहा है. इसी कोशिश के तहत, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के अधिकारियों की एक टीम ने 21 से 24 जुलाई 2025 तक अमेरिका का दौरा किया और बड़े US प्रोड्यूसर्स के साथ बातचीत की.
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में PSU तेल कंपनियों ने सबसे कम कीमतों पर LPG देना पक्का किया है. पिछले साल LPG की वैश्विक कीमतों में 60 परसेंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी के बावजूद, उज्ज्वला के लाभार्थियों को लगभग ₹500-550 की सब्सिडी वाली कीमत पर सिलेंडर मिलते रहे, जबकि असल कीमत ₹1100 से ज़्यादा थी. भारत सरकार ने इस बोझ को उठाया और पिछले साल LPG की बढ़ती कीमतों के असर से बचाने के लिए ₹40,000 करोड़ से ज़्यादा खर्च किए. सरकार ने ये भी बताया कि अभी रूस से LPG इंपोर्ट करने के लिए कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं है.
भारत खुद कितना उत्पादन करता है?
भारत की घरेलू एनर्जी की रीढ़ अरब सागर में मौजूद मुंबई हाई (पहले बॉम्बे हाई) फील्ड है. इसे सरकारी कंपनी ONGC चलाती है, यह देश की सबसे ज़्यादा पैदावार वाली संपत्ति है, जो ऑफशोर तेल और गैस का सबसे बड़ा हिस्सा देती है. दूसरी तरफ बंगाल की खाड़ी में कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन नेचुरल गैस के लिए नई फ्रंटियर बन गया है.



